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मोहन सरकार का बड़ा फैसला: उज्जैन की लैंड पूलिंग योजना अब नहीं चलेगी

उज्जैन    किसानों और स्थानीय स्तर पर भारी विरोध के बाद आखिरकार सरकार ने उज्जैन के सिंहस्थ क्षेत्र की लैंड पूलिंग योजना को मंगलवार देर रात निरस्त कर दिया। अब सिंहस्थ क्षेत्र में ठीक उसी तरह से व्यवस्था होगी, जैसे अब तक होती आई है।लैंड पूलिंग योजना में सरकार ने सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी निर्माण के लिए किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के तहत लेने का प्रावधान किया था। इसमें किसानों को भूमि का एक हिस्सा विकसित करके दिया जाता और शेष का मुआवजा मिलता लेकिन इसके लिए वे तैयार नहीं थे। शासन ने आदेश को राजपत्र (गजट) में प्रकाशित भी कर दिया है। यह निर्णय भारतीय किसान संघ के 26 दिसंबर से उज्जैन में ‘घेरा डालो–डेरा डालो’ आंदोलन की चेतावनी के बाद लिया गया है। किसान संघ ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक लैंड पूलिंग नीति को पूरी तरह निरस्त करने का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। आंदोलन की घोषणा के बाद सरकार और किसान संगठनों के बीच टकराव की स्थिति लगातार गहराती जा रही थी। दरअसल, सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास योजनाओं के अंतर्गत किसानों की भूमि को लैंड पूलिंग के माध्यम से विकसित करने का प्रस्ताव था। इस नीति के तहत जमीनों के अधिग्रहण और पुनर्विकास को लेकर किसानों में भारी असंतोष था। किसान संगठनों का आरोप था कि यह नीति उनकी सहमति के बिना लागू की जा रही है और इससे उनकी जमीनों पर स्थायी असर पड़ेगा। 19 नवंबर का आदेश सिर्फ संशोधन था भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने कहा था कि 19 नवंबर को जारी आदेश केवल संशोधन था, निरस्तीकरण नहीं। इसके बाद प्रदेश के 18 जिलों के किसान प्रतिनिधियों की बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया गया। किसानों ने एलान किया था कि 26 दिसंबर से विक्रमादित्य प्रशासनिक भवन का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। अब शासन द्वारा लैंड पूलिंग योजना को पूरी तरह निरस्त किए जाने को किसान आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है।   उज्जैन लैंड पूलिंग पॉलिसी यह थी उज्जैन लैंड पूलिंग पॉलिसी दरअसल सिंहस्थ कुंभ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) द्वारा प्रस्तावित एक शहरी विकास योजना थी। इसके तहत शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी मात्रा में किसानों की निजी जमीन को एक साथ पूल (एकत्र) कर सुनियोजित तरीके से विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। यानी सरकार जमीनों को अधिग्रहित कर सड़क, सीवर, ड्रेनेज, बिजली, पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं का विकास, सिंहस्थ के लिए स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना, उज्जैन के विस्तार को मास्टर प्लान के तहत विकसित करना था।  योजना में किसानों को क्या दिया जाना था? किसानों से जमीन लेकर उसे विकसित करने के बाद विकसित भूमि का एक हिस्सा (कम लेकिन अधिक मूल्य वाला) किसान को लौटाने का प्रावधान रखा गया था। शेष भूमि पर शासन/प्राधिकरण द्वारा शहरी विकास में उपयोग की थी।  किसान संगठन क्यों नाराज हुए? भारतीय किसान संघ समेत अन्य किसान संगठनों को जमीन पर स्थायी नियंत्रण खत्म होने का डर था। किसानों का कहना था कि एक बार जमीन लैंड पूलिंग में चली गई तो उस पर उनका  अधिकार कमजोर हो जाएगा। कितनी जमीन लौटेगी, कब लौटेगी और किस कीमत पर इस पर स्पष्ट और कानूनी भरोसा नहीं था। किसानों का तर्क था कि यह अधिग्रहण जैसा ही है, लेकिन बिना सीधा मुआवजा दिए। इसमें आरोप लगे कि कई जगह किसानों की स्पष्ट सहमति के बिना योजना लागू करने की तैयारी थी। किसान संगठनों का कहना था कि सिंहस्थ अस्थायी आयोजन है, लेकिन इसके नाम पर जमीन की स्थायी योजना बनाई जा रही थी।   भाजपा विधायक ने भी किया योजना का विरोध  उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने लैंड पूलिंग योजना को लेकर अपनी ही सरकार के फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा है कि यह योजना किसानों के हित में नहीं है और इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। विधायक जैन ने लिखा कि 17 नवंबर को भोपाल में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई बैठक में योजना वापस लेने का निर्णय लिया गया था, जिसके बाद किसान संघ ने उत्सव रैली भी निकाली थी। इसके बावजूद यदि योजना लागू मानी जा रही है और किसान 26 दिसंबर से आंदोलन करने को मजबूर हैं, तो वे स्वयं भी किसानों के समर्थन में आंदोलन में शामिल होंगे। विधायक के इस रुख से लैंड पूलिंग योजना को लेकर भाजपा के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा था मामला किसान संघ और स्थानीय संगठन सिंहस्थ के नाम पर लैंड पूलिंग के माध्यम से किसानों की जमीन लेने का विरोध कर रहे थे। बात पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अधिकारियों के साथ पहुंचे और बैठकों के कई दौर चले। सरकार की ओर से सिहंस्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का हवाला देकर व्यवस्था बनाने की बात रखी गई तो अन्य कुंभ का उदाहरण देकर लैंड पूलिंग के बिना व्यवस्था बनाए जाने की बात उठी। उधर, किसान पूरी तरह से लैंड पूलिंग योजना को निरस्त करने पर अड़े थे। सरकार ने पहले प्रयास किया था कि किसानों की सहमति से लैंड पूलिंग की जाए, लेकिन भारतीय किसान संघ का कहना था कि किसानों की भूमि स्थायी निर्माण के लिए लेने से उनकी आजीविका का साधन समाप्त हो जाएगा। यह होता उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में लगभग 2,800 हेक्टेयर भूमि है। इसमें साढ़े आठ सौ हेक्टेयर शासकीय और शेष निजी भूमि है। सरकार बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए यहां जन सुविधा की दृष्टि से स्थायी निर्माण करना चाहती थी। इसके लिए किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के तहत लेना प्रस्तावित था। इसमें जिसकी भूमि ली जाती, उसे एक निश्चित क्षेत्र में स्थायी निर्माण करके सरकार देती और बाजार मूल्य से शेष भूमि का भुगतान भी किया जाता। भाजपा विधायक की भी असहमति उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने भी योजना से असहमति जताई थी। उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि किसान हित में लैंड पूलिंग योजना निरस्त होनी चाहिए। … Read more

इंदौर के एम.वाय. हॉस्पिटल का 773 करोड़ रुपए की लागत से होगा नवनिर्माण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने गुना जिले के म्याना रेलवे स्टेशन को ऊर्जा संरक्षण के लिए किया सम्मानित इंदौर के एम.वाय. हॉस्पिटल का 773 करोड़ रुपए की लागत से होगा नवनिर्माण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजधानी भोपाल के प्रमुख मार्गों पर बनने वाले द्वार, विरासत से विकास के संकल्प की करेंगे सिद्धी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर गुना जिले के म्याना रेलवे स्टेशन को सम्मानित किया है। म्याना स्टेशन को 9687 यूनिट विद्युत ऊर्जा की बचत के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि म्याना रेलवे स्टेशन का बेस्ट परफॉर्मिंग यूनिट के रूप में सम्मानित होना, प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बैतूल जिले के शिल्पकार श्री बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय शिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया है। उन्होंने बताया कि भरेवा धातु शिल्प को जी.आई. टैग प्राप्त हुआ है। गोंड जनजाति की एक उपजाति धातु ढलाई का यह कौशल, पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित करती है। यह शिल्पकार प्रतीकात्मक देवी-देवताओं की मूर्ति, परंपरागत आभूषण, गोंड अनुष्ठान में प्रयुक्त धार्मिक सामान के साथ ही मोर लैंप, बैलगाड़ी, घंटियां, पायल, दर्पण के फ्रेम जैसी सजावटी वस्तुएं का निर्माण करते हैं। इस सामग्री की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत लोकप्रियता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री वाघमारे को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 773 करोड रुपए लागत से इंदौर में एम.वाय. हॉस्पिटल का नवनिर्माण किया जाएगा। नए 1450 बिस्तरीय एम.वाय हॉस्पिटल के निर्माण से पुरानी बिल्डिंग की कठिनाईयों से मुक्ति मिलेगी। अस्पताल के साथ ही नर्सिंग हॉस्टल, ऑडिटोरियम आदि का भी निर्माण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया की विमेन टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 (ब्लाइंड) का फाइनल मैच जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल मध्यप्रदेश की तीन दृष्टि बाधित महिला क्रिकेट खिलाड़ियों सुश्री सुनीता सराठे, सुश्री सुषमा पटेल और सुश्री दुर्गा येवले को 25-25 लाख रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जा रही है। प्रत्येक खिलाड़ी के लिए 10-10 लाख रुपए नगद और 15-15 लाख रुपए की एफडी की व्यवस्था है। टीम के तीनों कोच सर्वश्री सोनू गोलकर, ओमप्रकाश पाल और दीपक पहाड़े को एक-एक लाख रुपये प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नई दिल्ली में 12, 13 ,14 दिसंबर को मध्यप्रदेश उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें हस्तशिल्प, एक जिला-एक उत्पाद, माटी कला परिषद, पर्यटन आदि के स्टाल लगाए गए और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधायक श्री मधु वर्मा ने अपने पुत्र का विवाह, आगर मालवा में हुए सामूहिक विवाह समारोह में कर, अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधायक श्री वर्मा द्वारा सामाजिक समरसता और शादियों में अपव्यय को रोकने के लिए की गई इस पहल की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजधानी भोपाल को प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समृद्धता से जोड़ने के संकल्प के अंतर्गत राजधानी भोपाल के प्रमुख मार्गों पर महापुरुषों को समर्पित द्वार बनाने का निर्णय लिया गया था। गत वर्ष भोपाल-नर्मदापुरम मार्ग पर राजा भोज द्वार के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हुई, इसी क्रम में भोपाल-इंदौर मार्ग पर हाल ही में विक्रमादित्य द्वार निर्माण के लिए भूमि-पूजन किया गया। वास्तु शिल्प के अद्भुत उदाहरण इन द्वारों से राजधानी भोपाल का गौरव बढ़ेगा। यह द्वार, विरासत से विकास के संकल्प की सिद्धी की दिशा में प्रभावी कदम सिद्ध होंगे।  

मध्य प्रदेश: 7 कैटेगरी स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति बंद, 6 जिलों में वन विज्ञान केंद्र खुलेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारियों की 7 कैटेगरी (दैनिक वेतन भोगी, अंशकालीन, कार्यभारित, स्थायीकर्मी सहित अन्य) समाप्त कर दी हैं। अब सिर्फ तीन कैटेगरी रहेंगी, इनमें नियमित, संविदा, आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले।  कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि वर्तमान में कार्यरत कार्यभारित कर्मचारी की सेवाकाल में मृत्यु होने पर उसके आश्रित को नियमित पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। इस संवर्ग में अभी ऐसा प्रावधान नहीं था। जिन कैटेगरी को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है, वे अपने सेवाकाल तक कार्य करते रहेंगे। उनके रिटायर होते ही वह पद स्वत: समाप्त हो जाएगा। यदि विभाग कर्मचारी की डिमांड करता है, तो उस पद के विरुद्ध नियमित पद का सृजन किया जाएगा और भर्ती की जाएगी। बता दें कि दिग्विजय सरकार ने साल 2001 में दैनिक वेतन भोगी के पद समाप्त किए थे। कोर्ट में नहीं बताना पड़ेगी कैटेगरी सरकार का कहना है कि अभी न्यायालयीन प्रकरणों में अलग-अलग पदों की वजह से काफी गफलत होती है। नई व्यवस्था लागू होने और संबंधित पद समाप्त होने के बाद कोर्ट को यह बताना नहीं पड़ेगा कि कर्मचारी किस कैटेगरी का है। इससे बार-बार सुनवाई से सरकार बच सकेगी। उधर, स्थायी और अस्थायी का अंतर खत्म करने के बाद विभागों को हर साल अस्थायी पदों के लिए कैबिनेट से मंजूरी लेने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। नियमित और संविदा पर रहेगा फोकस सरकार ने साफ कर दिया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद नियमित और संविदा कर्मचारियों पर ही फोकस रहेगा। दरअसल, आउटसोर्स कर्मचारी सरकार के कर्मचारी ही नहीं हैं। इन कर्मचारियों की सेवाएं सरकार कंपनियों के माध्यम से लेती है। मेट्रो के लिए 90.67 करोड़ का प्रावधान भोपाल एवं इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संचालन व रखरखाव के लिए राज्य सरकार ने 90.67 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इस राशि से मेट्रो संचालन में होने वाले खर्च की व्यवस्था की जाएगी। प्रस्ताव नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रस्तुत किया। इस योजना में प्रावधान है कि आमदनी और व्यय का खर्च राज्य शासन को उठाना पड़ता है। इसलिए कैबिनेट ने यह राशि मंजूर की है। 1782 करोड़ का सिंचाई पैकेज नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना एवं बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के अंतर्गत डूब प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज की स्वीकृति दी गई। इसमें पहले से तय बजट में 1782 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज दिया है। इससे 5512 करोड़ रुपए की अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों की योजनाओं का पूरा किया जा सकेगा। 71967 हेक्टेयर जमीन सिंचित हो सकेगी और 125 मेगावाट बिजली जनरेट हो सकेगी। कैबिनेट में इन मुद्दों को भी दी गई मंजूरी जल संसाधन विभाग में रिटायर्ड एसडीओ वीके रावत से देय पेंशन राशि की वसूली से संबंधित प्रस्ताव मंजूर। सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में रिक्त पदों की पूर्ति एवं राज‌भवन में सेवानिवृत्त कर्मचारी को एक साल के लिए पुनः संविदा नियुक्ति देने तथा संजय सिंह चौहान अतिरिक्त राज्य शिष्टाचार अधिकारी को संविदा नियुक्ति दिए जाने को मंजूरी। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत डॉ राजेश गौर पूर्व डीन मेडिकल कालेज दतिया के विरुद्ध लोकायुक्त जांच प्रकरण में विभागीय जांच उपरांत पेंशन रोकने से संबंधित प्रस्ताव मंजूर। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत पूर्व सीईओ जनपद पंचायत राजनगर जिला छतरपुर बीके सिंह के रिटायरमेंट के बाद पेंशन वापस लेने को मंजूरी। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना के सूचकांक एवं मानदंड निर्धारण पर चर्चा के दौरान योजना का सूचकांक दो से तीन किया गया है। इसके बाद 3810 कार्य 693.76 करोड़ रुपए की लागत से कराए जा सकेंगे। खनिज साधन विभाग के प्रस्ताव पर संचालनालय की स्थापना और खनिजों के सर्वेक्षण की स्थापना जैसी खनिज योजनाओं को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर चर्चा को मंजूरी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अंतर्गत लोक वित्त पोषित योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति एवं निरंतरता से जुड़े मुद्दे स्वीकृत किए गए। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को वर्ष 2026-27 से निरंतर जारी रखने पर निर्णय लिया गया। योजना पांच साल तक चलती रहेगी और इसके लिए 905.25 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। योजना में 50 हजार से 50 लाख तक लोन दिए जाने का प्रावधान है। वन विभाग के प्रस्ताव पर वन विज्ञान केंद्र की स्थापना संबंधी नई योजना को मंजूरी दी गई है। इसके लिए 48 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं जो प्रदेश के छह जिलों में बनाए जाएंगे। लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर रोहिणी प्रसाद गुप्ता और अन्य विरुद्ध एमपी सरकार के मामले में न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन में कार्यभारित स्थापना में नियुक्तियों से संबंधित विषय को मंजूरी। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के अंतर्गत सेवानिवृत्त उप संचालक जीएस चौहान को संविदा नियुक्ति दिए जाने और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रस्ताव पर सलामुद्दीन अंसारी सेवानिवृत्त सहायक संचालक से पेंशन वापसी के संबंध में निर्णय लिया गया। 773 करोड़ से बनेगा इंदौर के एमवाय अस्पताल का भवन मंत्रालय में कैबिनेट बैठक शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रिमंडल के सदस्यों को बताया कि इंदौर के एमवाय अस्पताल का नवनिर्माण 773 करोड़ रुपए से किया जा रहा है। यह 1450 बिस्तर का होगा, इससे कई कठिनाईयों से राहत मिलेगी। अस्पताल के साथ नर्सिंग हॉस्टल, ऑडिटोरियम का भी निर्माण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विमेन T20 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 (ब्लाइंड) का फाइनल जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल मध्य प्रदेश की तीन दृष्टि बाधित महिला क्रिकेट खिलाड़ियों सुनीता सराठे, सुषमा पटेल और दुर्गा येवले को 25-25 लाख रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप दी जा रही है। प्रत्येक खिलाड़ी के लिए 10-10 लाख रुपए नगद और 15-15 लाख रुपए की एफडी रहेगी। टीम के तीनों कोच सोनू गोलकर, ओमप्रकाश पाल और दीपक पहाड़े को एक-एक लाख रुपए प्रोत्साहन स्वरूप दे रहे हैं। भरेवा धातु शिल्प को मिला जीआई टैग बैतूल जिले के भरेवा धातु शिल्प को जीआई टैग प्राप्त हुआ है। इसके लिए शिल्पकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय शिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया है। गोंड जनजाति की … Read more

सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया संबल योजना के तहत 160 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने का ऐलान, सीधे हितग्राहियों के खातों में

भोपाल   एमपी सीएम डॉ. मोहन यादव आज मंगलवार 16 दिसंबर को राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी संबल योजना के तहत हितग्राहियों को बड़ी राहत देने जा रहे हैं। एक सिंगल क्लिक के माध्यम से वे 7 हजार 227 प्रकरणों में कुल 160 करोड़ रुपए की अनुग्रह सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में ट्रांसफर करेंगे। यह कार्यक्रम राजधानी भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। इसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। क्या है संबल योजना दरअसल संबल योजना के तहत दी जाने वाली यह अनुग्रह सहायता असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक संबल बनेगी। दुर्घटना, असामयिक मृत्यु या अन्य आपात परिस्थितियों में यह सहायता राशि परिवारों को तात्कालिक सहारा देती है। सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि संकट के समय परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। सीएम का बड़ा संदेश कार्यक्रम के दौरान सीएम मोहन यादव प्रदेश सरकार की अन्य जनहितैषी योजनाओं की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाएंगे। इसमें श्रमिक कल्याण, ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी प्रमुख रहेंगी। यही नहीं सीएम यह भी संदेश देंगे कि सरकार समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पारदर्शिता हो रही मजबूत राज्य सरकार लगातार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से पारदर्शिता लाते हुए सरकारी व्यवस्थाओं को मजबूत कर रही है, ताकि किसी भी स्तर पर बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और लाभ सीधे पात्र हितग्राही तक पहुंचे। संबल योजना के तहत होने वाला यह बड़ा भुगतान इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का बड़ा दावा सरकार का दावा है कि आने वाले समय में भी ऐसी योजनाओं के जरिए श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों को निरंतर राहत दी जाती रहेगी।

मुख्यमंत्री इंदौर में देंगे मेट्रो को लेकर बड़ी सौगात, मेट्रोपॉलिटन एरिया और अंडरग्राउंड रूट पर होगी चर्चा

  इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 14 दिसंबर को रेसीडेंसी कोठी में शहर में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य फोकस इंदौर मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड रूट पर रहेगा। इंदौर में यह बैठक सरकार के दो साल पूर्ण होने के बाद हो रही है। इस कारण माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इंदौर को सौगात दे सकते है। बैठक में इंदौर के मेट्रोपाॅलिटन सिटी एरिया की घोषणा हो सकती है। पहले इसका एरिया छह हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में था। बाद में इंदौर विकास प्राधिकरण ने इसका प्रस्ताव 9 हजार वर्गकिलोमीटर एरिया किया है और प्रस्ताव सरकार को भेजा था। इस एरिया में उज्जैन, देवास, महू व धार की पंचायतें, कुछ नगरीय निकाय शामिल होंगे। एरिया की सीमा का खुलासा बैठक के दौरान होगा। मुख्यमंत्री इस बात पर अंतिम फैसला ले सकते हैं कि मेट्रो के रूट में कोई बदलाव किया जाएगा या पुराना रूट ही बरकरार रहेगा। पिछले दिनों मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तय अंडरग्राउंड रुट पर आपत्ति ली थी और मेट्रो को बंगाली काॅलोनी से ही अंडरग्राउंड करने पर जोर दिया था।   मेट्रो के अलावा, बैठक में बीआरटीएस की बस रैलिंग हटाने में हो रही देरी को लेकर भी चर्चा होगी। नौ महीने से अधिक समय तक रैलिंग नहीं हटाए जाने पर हाईकोर्ट ने भी नाराजगी व्यक्त की है। बीआरटीएस पर बनने वाले नए ब्रिजों को लेकर भी फैसला हो सकता है। समीक्षा बैठक में सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर शहर में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा भी की जाएगी। शहर के मास्टर प्लान की 23 सड़कों पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन कुछ सड़कों के मार्ग में अभी भी बाधक निर्माण नहीं हटाए गए हैं।   

मप्र में मोहन सरकार के 2 साल: अतीत की सीख, वर्तमान की मजबूती और भविष्य की दिशा

मप्र में मोहन सरकार के दो वर्ष: अतीत, वर्तमान और भविष्य को साथ लेकर चलने का संकल्प भोपाल मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में सरकार ने अतीत के सांस्कृतिक वैभव को पुनर्स्थापित करने, वर्तमान की प्रशासनिक चुनौतियों को साधने और भविष्य की विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में कई पहलें की हैं। मुख्यमंत्रीडॉ. यादव ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर से ही प्रदेश की पहचान को सांस्कृतिक और विकासात्मक—दोनों स्तरों पर मजबूत करने की रणनीति अपनाई। काल को तीन खंडों में विभाजित किया जाता रहा है, अतीत, वर्तमान और भविष्य। इन तीनों काल के लिए एक साथ कुछ करने की सामर्थ्य विरले ही व्यक्तित्वों में होती है। लेकिन तीनों कालों के लिए बहुत कुछ करने का चमत्कार बाबा महाकाल की नगरी के डॉ मोहन यादव ने दो साल की अवधि में कर दिखाया है। एक ओर जहां उन्होने मध्यप्रदेश के गौरवशाली अतीत को प्रभावी ढंग से संरक्षित और पुनर्स्थापित किया है, तो महाराज विक्रमादित्य के शासनकाल की झलक इन दो वर्षों के वर्तमान कार्यकाल में देखी जा सकती है। देश के इस हृदय प्रदेश को लेकर उनकी दूरगामी योजनाएं सुनहरे भविष्य के प्रति आश्वस्त करती हैं। अतीत: सांस्कृतिक धरोहर को नया आयाम सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। महाकाल कॉरिडोर के विस्तार कार्यों ने उज्जैन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। राज्य के प्राचीन धरोहर स्थलों पर संरक्षण गतिविधियाँ तेज की गईं। ओंकारेश्वर क्षेत्र में अद्वैत दर्शन से जुड़े प्रकल्पों को गति दी जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण के चरण मध्यप्रदेश की भूमि पर जिन स्थानों पर पड़े, उन्हे श्रीकृष्ण पाथेय में समाहित कर इनको तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। वर्तमान: प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचे पर फोकस दो वर्षों में सरकार ने बुनियादी ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता दी है। प्रमुख सड़क मार्गों, औद्योगिक कॉरिडोरों और शहरी सुविधाओं को उन्नत करने के कार्य जारी हैं। ग्रामीण सड़कों का उन्नयन भी अभियान मोड में किया जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी सुधार, रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर काम किया गया है। कृषि क्षेत्र में उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाओं—जैसे लाड़ली बहना और स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम—के क्रियान्वयन पर भी जोर रहा। भविष्य: निवेश, ऊर्जा और स्वास्थ्य ढांचे की तैयारियाँ राज्य सरकार ने आगामी दशक के विकास को लक्ष्य बनाते हुए कई योजनाएँ तैयार की हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत MSME और बड़े निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। पीथमपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन, जल संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहन ढांचे को बढ़ावा देकर हरित ऊर्जा क्षेत्र में कदम तेज हुए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला एवं ग्रामीण स्तर तक मजबूत करने की दिशा में अस्पताल उन्नयन और टेली-मेडिसिन सेवाओं का विस्तार प्रस्तावित है। संतुलित नेतृत्व का संकेत डॉ. मोहन यादव के दो वर्ष का कार्यकाल यह संकेत देता है कि सरकार अतीत के सांस्कृतिक गौरव, वर्तमान की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और भविष्य की विकास योजनाओं—तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। आने वाले समय में इन पहलों का वास्तविक असर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में दिखाई देगा।                                                                                                                                                   नरेंद्र शिवाजी पटेल  

मोहन सरकार की कृषि नीति का असर: मध्य प्रदेश में 55 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को शुक्रवार को दो वर्ष पूरे हो गए हैं। इन दो वर्षों में कृषि क्षेत्र में प्रदेश ने उत्पादन, उत्पादकता और विविधीकरण के नये रिकॉर्ड बनाए हैं। वर्ष 2023-24 से 2024-25 के बीच खाद्यान्न उत्पादन में 55 लाख टन से अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सरकार की कृषि नीति, सिंचाई विस्तार और किसान हितैषी योजनाओं की सफलता को दर्शाती है। आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 5.34 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 6.13 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। वहीं, कुल कृषि उत्पादन 7.24 करोड़ टन से बढ़कर 7.79 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। इसमें 55 लाख टन की वृद्धि हुई। यह बढ़ोतरी उन्नत बीज वितरण, फसल बीमा, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि यंत्रीकरण का सीधा परिणाम मानी जा रही है। गेहूं, मक्का और धान ने बढ़ाया प्रदेश का मान सरकारी आंकड़ों के अनुसार गेहूं उत्पादन 2023-24 में 3.28 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में 3.82 करोड़ टन हो गया। मक्का उत्पादन 48.68 लाख टन से बढ़कर 69.37 लाख टन, धान का उत्पादन 1.40 करोड़ से थोड़ा घटकर 1.36 करोड़ टन हुआ। हालांकि, धान की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 3415 किलोग्राम से बढ़कर 3551 किग्रा हो गई। दलहन-तिलहन भी बढ़ा रिपोर्ट के अनुसार सोयाबीन उत्पादन 66.24 लाख टन, मूंगफली उत्पादन 15.47 लाख टन, तिल उत्पादन 1.69 लाख टन हुआ। कुल तिलहन उत्पादन थोड़ी कमी के साथ 94.95 लाख टन पर स्थिर रहा। वहीं, दलहन उत्पादन में चना 35.83 लाख टन से घटकर 22.04 लाख टन, मूंग बढ़कर 21.28 लाख टन और उड़द बढ़कर 1.51 लाख टन रही। उत्पादकता में भी लगातार सुधार सरकार की रिपोर्ट के अनुसार कुल कुल खाद्यान्न उत्पादकता 2023-24 में 3322 किग्रा प्रति हेक्टेयर और 2024-25 में 3650 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही। वहीं, कुल कृषि उत्पादकता 2379 से बढ़कर 2627 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही। किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस मोहन सरकार ने दो वर्ष में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें एमएसपी पर खरीदी का दायरा बढ़ाया, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा, फसल विविधीकरण नीति लागू करना और ई-उपार्जन और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत किया किया गया है। क्या कहते हैं कि विशेषज्ञ कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में खेती में यह बढ़त केवल अनुकूल मौसम का परिणाम नहीं है, बल्कि नीतिगत निर्णय, समय पर खाद-बीज उपलब्धता और किसानों को त्वरित भुगतान का असर है। खाद्यान्न में नया कीर्तिमान जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पीके मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में किसानों के लिए भावांतर, सौर ऊर्जा संयंत्र और दुग्ध प्रोत्साहन जैसी योजनाओं ने खेती की लागत कम की है और आमदनी बढ़ाने का रास्ता खोला है। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव तभी टिकाऊ होगा, जब मंडियों, सिंचाई ढांचे और तकनीकी क्षेत्र को और मजबूत किया जाए। साथ ही किसानों की भागीदारी बढ़ाई जाए।  

मोहन सरकार के दो वर्षों में छह लाख को मिली नौकरी, तीन साल में 20 लाख को मिलेगी रोजगार की सुविधा

भोपाल   मोहन सरकार अपने दो वर्ष पूरे कर चुकी है और अब शेष तीन वर्षों के लिए सरकार ने विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है। सरकार ने साफ किया है कि आने वाले वर्षों में उसका मुख्य फोकस रोजगार, शहरी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर रहेगा। इन सेक्टरों को राज्य के विकास के लिए निर्णायक माना जा रहा है। रोजगार: सबसे बड़ा फोकस राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए रोजगार अवसरों का सृजन है- चाहे सरकारी क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र। सरकार ने आगामी तीन वर्षों में 20 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया है। विभागों में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जा रही है और कई विभागों में भर्ती संबंधी विज्ञप्तियां भी जारी हो चुकी हैं। सरकार का दावा है कि पिछले दो वर्षों में 6 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। स्वरोजगार योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा और 30,000 नए उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित करने की योजना है। 38 शहरों का नया जीआईएस मास्टर प्लान टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा प्रदेश के 38 शहरों के जीआईएस आधारित मास्टर प्लान तैयार किए जाएंगे। साथ ही महानगर क्षेत्र कानून लागू किया जाएगा। टीडीआर पोर्टल का विस्तार, टीओडी नीति का क्रियान्वयन और सिंहस्थ 2028 के लिए एकीकृत मास्टर प्लान आधारित विकास किया जाएगा। डीपीडीपी कानून के अनुरूप विभागीय पोर्टल का आधुनिकीकरण किया जाएगा। नक्शाविहीन गांवों का डिजिटलीकरण, भू-अर्जन प्रक्रियाओं को एंड-टू-एंड ऑनलाइन करने और नई आबादी की भूमि का चिन्हांकन भी योजना का हिस्सा है। विश्वास-आधारित डायवर्ज़न प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि स्कूल हर जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि स्कूल, एकलव्य विद्यालय, माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर और बालक आदर्श आवासीय विद्यालय की स्थापना की योजना है, जिससे आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दायरा बढ़ेगा। जल जीवन मिशन- लक्ष्य से पहले पूरा करने का दावा प्रदेश सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समयसीमा दिसंबर 2028 तय की है, लेकिन मध्य प्रदेश इसे मार्च 2027 तक पूरा कर देश में मिसाल पेश करेगा। मिशन के संचालन और संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की जाएगी, ताकि जल आपूर्ति किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो। 

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2 साल की उपलब्धियां गिनाईं, मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों को मिलेगा ज्यादा वेतन

भोपाल  ''जिस प्रकार से समय बदला है और समय के साथ उर्जा के क्षेत्र में सबसे सस्ती बिजली मध्य प्रदेश दे रहा है. बिजली में ऐसे-ऐसे नए प्रयोग हुए हैं कि लोग भैंचक्के होकर देख रहे हैं कि ये मध्य प्रदेश में क्या हो रहा है. हमारा सबसे लोएस्ट रेट बिजली में गया.'' यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही है. शुक्रवार को राज्य सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर सीएम मोहन यादव ने राजधानी के कुशाभाऊ इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में सरकार की उपलब्धियां गिनाई है. इस दौरान उन्होंने बीते दो सालों के साथ आने वाले भविष्य को लेकर भी खुलकर चर्चा की. 6-6 महीने एमपी और यूपी को मिलेगी बिजली सीएम ने कहा कि, ''बिजली में ऐसे-ऐसे नए प्रयोग हुए हैं कि लोग भौचक्के होकर देख रहे हैं कि ये मध्य प्रदेश में क्या हो रहा है. हमारा सबसे लोएस्ट रेट बिजली में गया. हमारे प्रदेश में ओंकारेश्वर, आगर और नीमच में सोलर पार्क की स्थापना की गई है. नीमच में 2 हजार मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट लगाया गया है. वो भी कंपोजिट प्रोजेक्ट है. यानि यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है.'' पानी के बाद अब बिजली की अदला-बदली सीएम मोहन यादव ने कहा, ''इस सोलर प्रोजेक्ट से 6 महीने मध्य प्रदेश और 6 महीने उत्तर प्रदेश को बिजली मिलेगी. पानी की अदला-बदली के साथ हम दूसरे राज्यों के साथ बिजली की साझेदारी भी कर रहे हैं. मुरैना के बीहड़ वाले जंगलों का बेहतर इस्तेमाल उर्जा के क्षेत्र में कैसे किया जा सकता है, इस पर भी विचार किया जा रहा है. उज्जैन में शिप्रा नदी के पानी से होगा स्नान सीएम ने बताया कि "उज्जैन में शिप्रा नदी का पानी पहले उपलब्ध नहीं था. जिससे श्रद्धालुओं को स्नान करने में समस्या होती थी. पिछली बार भी सिंहस्थ के दौरान साधु-संतों ने मटमैले पानी से स्नान किया था. लेकिन इस बार सिंहस्थ की व्यवस्था जल संसाधन विभाग ने कर दी है. 800 करोड़ रुपये की योजना तैयार किया गया है. जिससे शिप्रा का पानी उज्जैन में लाने की तैयारी है. दो राज्यों के बीच आपसी सहमति से नदी जोड़ने का अभियान भी शुरु किया गया है. इसके तहत गंभीर और खान नदी को जोड़ते हुए जमीन के नीचे टनल बनाकर जोड़ने का काम किया गया है. जिसके ऊपर खेती होगी और नीचे जलधारा बहेगी." उन्होंने आगे बताया कि "कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की थी. इस दौरान डाक्टरों की कमी को लेकर भी चर्चा हुई थी. जिस रफ्तार से प्रदेश में मेडिकल कालेज बढ़ रहे हैं, उसी तेजी से हमको मैन पावर भी चाहिए. हेल्थ सेक्टर में एक्सपर्ट नहीं मिलने की चुनौती सरकार के सामने है, लेकिन अब हमने तय किया है कि प्राइवेट सेक्टर से अधिक वेतन देकर विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी सेवाओं में लिया जाएगा. कार्यकाल के दो साल के भीतर भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन शहर बनाने की घोषणा करने के साथ काम भी शुरू कर दिया है."

सम्राट विक्रमादित्य प्रवेश द्वार के भूमि-पूजन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे सम्राट विक्रमादित्य प्रवेश द्वार का भूमि-पूजन सांस्कृतिक विरासत और शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम पीएम ई-बस सेवा योजनांतर्गत अत्याधुनिक ई-बस डिपो का भी होगा भूमिपूजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश की गौरवशाली अतीत और समृद्ध संस्कृति से जुड़ी पहल के तहत सम्राट विक्रमादित्य प्रवेश द्वार एवं पीएम ई-बस सेवा योजनांतर्गत अत्याधुनिक ई-बस डिपो का भूमि-पूजन करेंगे। कार्यक्रम 13 दिसंबर को प्रातः 11 बजे महाराणा प्रताप शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फंदा भोपाल में आयोजित होगा। सम्राट विक्रमादित्य प्रवेश द्वार के माध्यम से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक शहरी विकास से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा। सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, न्यायप्रियता और सांस्कृतिक चेतना को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने वाला यह प्रवेश द्वार न केवल ऐतिहासिक पहचान को सुदृढ़ करेगा, बल्कि क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और नगरीय विकास को भी नई दिशा देगा। विकास के नए प्रतिमान होंगे स्थापित मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि प्रदेश की विरासत को संजोते हुए विकास के नए प्रतिमान स्थापित करना राज्य शासन की प्राथमिकता है। “विरासत के साथ विकास” की भावना को साकार करता यह प्रवेश द्वार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। यह कार्यक्रम विकास और सेवा के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भी विशेष महत्व रखता है, जो मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और समग्र विकास की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।