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100 करोड़ के GST फर्जीवाड़ा मामले में ईडी रिमांड पर संजीव अरोड़ा, गुरुग्राम कोर्ट में सुनवाई

 गुरुग्राम   पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने ईडी रिमांड पर भेजे जाने के बाद गुरुग्राम की विशेष अदालत में एक अर्जी दाखिल की है। इसमें अदालत से अनुमति मांगी गई कि ईडी अधिकारी उन्हें अपनी पसंद का वकील चुनने दें, जिसके लिए वकालतनामा पर हस्ताक्षर करने दें, ताकि वह आधिकारिक तौर पर उनका केस लड़ सकें। मामले की सुनवाई पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश एवं जिला जज नरेंद्र सूरा की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से मौजूद विशेष लोक अभियोजक साइमन बेंजामिन ने इस मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने अदालत को बताया कि विभाग को इस बात से कोई एतराज नहीं है कि संजीव अरोड़ा अपनी पसंद के वकील को नियुक्त करें। इसके बाद अदालत ने अर्जी स्वीकार करते हुए जांच अधिकारी को तुरंत आदेश का पालन करने के निर्देश दिए। ED ने 100 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग में किया है गिरफ्तार अदालत ने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी मंत्री संजीव अरोड़ा को वकालतनामा पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दें। दस्तावेज को विधिवत सत्यापित करें और उसके बाद संबंधित दस्तावेज उनके वकील या परिवार के सदस्य को सौंपें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश का तत्काल प्रभाव से पालन किया जाए। (ईडी) ने करीब 100 करोड़ रुपये के मनी लाॅन्ड्रिंग और फर्जी जीएसटी बिलिंग मामले में पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार करने के बाद शनिवार देर रात गुरुग्राम पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश व जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा की अदालत में पेश किया। रिमांड खत्म होने पर 16 मई को अदालत में पेश किया जाएगा रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपित को 16 मई को अदालत में पेश किया जाएगा। मामला फर्जी कंपनियों के जरिए मोबाइल फोन खरीद-बिक्री के नाम पर करोड़ों रुपये के फर्जी जीएसटी बिल तैयार करने और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। जांच एजेंसी का दावा है कि संजीव अरोड़ा से जुड़ी कंपनियों ने दिल्ली की कथित फर्जी फर्मों के माध्यम से 100 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन किए। इसी सिलसिले में दिल्ली, चंडीगढ़ और गुरुग्राम समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की गई। ईडी ने गुरुग्राम स्थित कुछ कार्यालयों और कारोबारी साझेदारों के परिसरों पर भी कार्रवाई की है। रिमांड अवधि के दौरान ही यह आवेदन दायर किया गया। अदालत ने आदेश की प्रति दोनों पक्षों को तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 मई को निर्धारित है संजीव अरोड़ा को रोजाना एक घंटे वकील से मिलने की अनुमति पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा की ईडी रिमांड के दौरान विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया है कि हिरासत अवधि के दौरान आरोपित को प्रतिदिन सुबह 10 बजे से 11 बजे तक एक घंटे के लिए अपने वकील से मिलने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही अदालत ने ईडी को मेडिकल अधिकारी द्वारा सलाह दी गई सभी सुविधाएं, दवाइयां और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। विशेष न्यायाधीश नरेंद्र सूरा ने आदेश जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 16 मई तय की है।

आई पेरियासामी की याचिका खारिज, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मद्रास हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

चेन्नई मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को तमिलनाडु के ग्रामीण विकास मंत्री आई. पेरियासामी और उनके परिवार के सदस्यों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय एजेंसी को सुने बिना और उसका पक्ष आए बिना किसी प्रकार की अंतरिम सुरक्षा नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की प्रथम खंडपीठ ने कहा कि ईडी को नोटिस जारी किए बिना और उसे जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने ईडी के विशेष लोक अभियोजक आर. सिद्धार्थन को एजेंसी की ओर से नोटिस स्वीकार करने की अनुमति दी और ईडी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में दायर सभी रिट याचिकाओं पर 5 जनवरी 2026 तक विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करे। यह याचिकाएं मंत्री आई. पेरियासामी, उनके पुत्र आई.पी. सेंथिलकुमार और पुत्री पी. इंदिरा द्वारा दायर की गई हैं, जिनमें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत उनके खिलाफ दर्ज प्रवर्तन केस सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को चुनौती दी गई है। यह ईसीआईआर राज्य पुलिस द्वारा पहले दर्ज एक अनुपातहीन संपत्ति मामले के आधार पर दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने ईसीआईआर और उससे जुड़े सभी कार्रवाई को रद्द करने की मांग करते हुए दलील दी कि मौजूदा परिस्थितियों में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गठित एक विशेष अदालत ने पहले मंत्री को डीवीएसी द्वारा दर्ज मूल (प्रेडिकेट) अपराध से बरी कर दिया था। हालांकि, उस बरी किए जाने के आदेश को बाद में वर्ष 2025 में मद्रास हाईकोर्ट ने पलट दिया। इसके बाद पेरियासामी ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें अंतरिम राहत मिली और आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी गई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा का हवाला देते हुए मंत्री और उनके परिवार ने तर्क दिया कि चूंकि ईडी की कार्यवाही मूल अपराध पर निर्भर है, इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आगे नहीं बढ़नी चाहिए और तत्काल राहत दी जानी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार करते हुए कहा कि पहले ईडी को सुना जाना आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई ईडी द्वारा जवाब दाखिल करने के बाद होगी।

कौन हैं प्रदीप शर्मा? पूर्व IAS अधिकारी को ED केस में 5 साल की जेल

नई दिल्ली एक विशेष अदालत ने रिटायर आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा को मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के एक मामले में शनिवार को पांच साल कैद की सजा सुनाई है। उन पर 50,000 का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला 2003 से 2006 के दौरान कच्छ के जिला कलेक्टर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान रियायती दरों पर सरकारी भूमि के आवंटन से जुड़ा है। विशेष PMLA जज केएम सोजित्रा ने प्रदीप शर्मा को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 और 4 के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जांच के दौरान जब्त की गई संपत्तियां केंद्र सरकार द्वारा जब्त रहेंगी। ईडी ने आरोप लगाया था कि प्रदीप शर्मा ने मानदंडों का उल्लंघन करते हुए वेल्सपन इंडिया लिमिटेड (Welspun India Limited) को रियायती दरों पर सरकारी भूमि का एक बड़ा हिस्सा स्वीकृत किया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि शर्मा को कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अवैध परितोषण मिला, जिसमें उनकी पत्नी के खाते में 29.5 लाख जमा किए गए थे, जो कि एक अमेरिकी नागरिक हैं। ईडी के आरोप के अनुसार, प्रदीप शर्मा ने वेल्सपन इंडिया और उसकी समूह कंपनियों से प्राप्त अपराध की आय को लॉन्डर करने के लिए अपनी पत्नी के बैंक खाते का इस्तेमाल किया। इन फंडों का उपयोग कथित तौर पर एक आवास ऋण चुकाने और कृषि भूमि खरीदने के लिए किया गया था। ईडी के अनुसार, रिश्वत की राशि को चैनल करने के लिए 2004 से 2007 के बीच शर्मा की पत्नी को वैल्यू पैकेजिंग प्राइवेट लिमिटेड में 30% भागीदार बनाया गया था। प्रदीप शर्मा के खिलाफ बीते कुछ वर्षों में विभिन्न एजेंसियों द्वारा कई मामले दर्ज किए गए हैं। मार्च 2010 में सीआईडी राजकोट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की। उन पर सरकारी खजाने को 1.20 करोड़ का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा। सितंबर 2010 में सीआईडी ने IPC के तहत एक और मामला दर्ज किया। इसके बाद मार्च 2012 में ईडी के अहमदाबाद जोनल कार्यालय ने 2010 की FIR के आधार पर PMLA के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया। सितंबर 2014 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। आरोप लगाया कि उन्होंने वेलस्पन समूह के लिए कृषि भूमि को गैर-कृषि दर्जा देने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया, यह जानते हुए कि उनकी पत्नी एक संबंधित कंपनी में भागीदार थीं। जुलाई 2016 में प्रदीप शर्मा को ED ने गिरफ्तार किया। मार्च 2018 में उन्हें जमानत मिल गई। प्रदीप शर्मा को अप्रैल 2025 में एक अन्य मामले में भी दोषी ठहराया गया था। भुज कोर्ट ने 2004 में एक निजी कंपनी (सॉ पाइप्स प्राइवेट लिमिटेड) को सरकारी भूमि के आवंटन में अनियमितताओं से जुड़े 2011 के एक मामले में शर्मा को पांच साल के कठोर कारावास और 10,000 जुर्माने की सजा सुनाई थी। शर्मा वर्तमान में जेल में हैं।