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‘कोई नया गुट नहीं चाहिए’: तुर्की का पाकिस्तान-सऊदी के ‘इस्लामिक NATO’ संबंध में स्पष्ट

 नई दिल्ली सितंबर 2025 में पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) किया. इस समझौते में दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि किसी एक पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान इस संगठन को इस्लामिक देशों का NATO (North Atlantic Treaty Organization) बनाने की फिराक में है और इसी कड़ी में पाकिस्तान के करीबी दोस्त तुर्की से लगातार बातचीत चल रही है. हाल ही में खबर आई कि तुर्की के इस डिफेंस पैक्ट में शामिल होने को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. लेकिन अब तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने कुछ ऐसा कह दिया है जो पाकिस्तान को हजम नहीं होगा. तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे समूह में किसी का वर्चस्व नहीं होना चाहिए बल्कि कोई भी समझौता ज्यादा समावेशी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि तुर्की कोई नया गुट नहीं बनाना चाहता. तुर्की के विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ का दिया हवाला तुर्की के विदेश मंत्री ने ये बातें गुरुवार को अल-जजीरा को दिए इंटरव्यू में कही. सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौते और उसमें तुर्की की संभावित भागीदारी पर सवाल के जवाब में फिदान ने कहा, 'न तुर्की का, न अरब का, न फारसी का, न किसी और का वर्चस्व…किसी का वर्चस्व नहीं चाहिए. क्षेत्रीय देश जिम्मेदारी के साथ एक साथ आ रहे हैं. आप देखिए न कि कैसे यूरोपीय संघ ने जीरो से शुरू करके आज तक खुद को एकसाथ रखा है. हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं?' उन्होंने आगे कहा, 'हम कोई नया गुट नहीं बनाना चाहते. हम क्षेत्रीय एकजुटता का एक मंच बनाना चाहते हैं. ये समूह दो या तीन देशों से शुरू हो सकता लेकिन अगर समय के साथ यह बड़ा ढांचा बनता है तो अच्छा होगा.' उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा का जिम्मा बाहरी देशों के हाथों में नहीं सौंपना चाहिए. कहां तक बढ़ी डिफेंस पैक्ट में तुर्की के शामिल होने की बात सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बने रक्षा गठबंधन में तुर्की के शामिल होने को लेकर हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी. ब्लूमबर्ग ने कुछ दिनों पहले एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि इस मुद्दे पर तीनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है. गठबंधन में अगर तुर्की शामिल होता है तो यह ब्लॉक त्रिपक्षीय रूप ले सकता है. इससे पहले समूह में तुर्की के शामिल होने के लेकर पाकिस्तान ने टिप्पणी की थी. पाकिस्तान ने कहा था कि ब्लॉक में किसी भी तीसरे देश को शामिल करने का फैसला पाकिस्तान और सऊदी अरब, दोनों की आपसी सहमति से तय होगा.  

पाक उछला, लेकिन भारत ने UAE के साथ कर लिया मास्टरस्ट्रोक समझौता, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली भारत और यूएई के बीच हाल ही में हुए समझौते पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ा सकते हैं। इस सप्ताह यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत पहुंचे थे जहां दोनों देशों के बीच कई अहम साझेदारियां हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नाहयान ने दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी की योजना भी पेश की है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है।   दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए गए पांच दस्तावेजों में सबसे अहम दस्तावेज रणनीतिक रक्षा साझेदारी स्थापित करने की प्रतिबद्धता रही। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब महज 4 महीने पहले पाकिस्तान और सऊदी अरब ने अपने रक्षा समझौतों को मजबूत करने की योजना बनाई है। दोनों देशों के बीच एक ऐसा समझौता भी हुआ है जिसके तहत एक देश पर हमले को दूसरे के विरुद्ध भी हमला माना जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति के बीच यमन की स्थिति पर भी चर्चा हुई। यह वही मुद्दा है, जिस पर सऊदी अरब और यूएई के रिश्तों में हाल के समय में खटास आई है। इसके अलावा गाजा की स्थिति और ईरान की स्थिति को लेकर भी बातचीत हुई। रक्षा समझौते में क्या? रक्षा साझेदारी के तहत भारत और यूएई रक्षा औद्योगिक सहयोग और उन्नत प्रौद्योगिकियों, साइबरस्पेस प्रशिक्षण, विशेष अभियानों, अपनी सेनाओं के संचालन और आतंकवाद रोधी गतिविधियों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों पक्षों ने उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने का भी फैसला किया है, जिसमें बड़े परमाणु रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर का विकास तथा उन्नत रिएक्टर प्रणालियों, परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालन और रखरखाव एवं परमाणु सुरक्षा में सहयोग शामिल है। इस दौरान एक और समझौते पर हस्ताक्षर किए गए जिसके तहत हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) 2028 से शुरू होने वाले 10 वर्षों में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस से 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) खरीदेगी। इस डील के बाद भारत, अबू धाबी का सबसे बड़ा LNG ग्राहक बन गया है। बदलते क्षेत्रीय समीकरण भारत-यूएई समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब तुर्की सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते में शामिल होने की कोशिश कर रहा है। इससे मध्य पूर्व में एक नया सैन्य गुट बनने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच पाकिस्तान, नाटो की तर्ज पर इस्लामिक नाटो के सपने भी देख रहा है। वहीं सऊदी अरब और यूएई, जो लंबे समय तक करीबी सहयोगी रहे हैं, अब क्षेत्रीय नीतियों को लेकर अलग रास्तों पर नजर आ रहे हैं। दोनों देश यमन और सूडान में अलग-अलग पक्षों का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में यूएई संग भारत का समझौता पाक के लिए झटका हो सकता है।

तालिबान ने कहा — इस्लामिक स्टेट को NATO-अमेरिका ने पनपाया, हमने जड़ से मिटाया

तालिबान अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने दावा किया कि आतंकी संगठन ISIS को अफगान जमीन से पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद इस्लामिक अमीरात ने पूरे देश में सुरक्षा और नियंत्रण स्थापित कर लिया है। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में सोमवार को मुत्तकी ने कहा, 'जब अमेरिका और नाटो की मौजूदगी थी, तब विभिन्न प्रांतों में आईएसआईएस के बड़े केंद्र थे। उस समय भी हमें संघर्षों का सामना करना पड़ा। लेकिन इस्लामिक अमीरात ने पूरे देश पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद मजबूत अभियान चलाया। शुक्र है कि अब अफगानिस्तान की एक इंच जमीन पर भी ISIS या कोई अन्य समूह सक्रिय नहीं है।' आमिर खान मुत्तकी ने भारतीय उद्योग जगत को आश्वासन दिया कि तालिबान शासित देश में शांति स्थापित हो गई है। भारत के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। भारतीय उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि वीजा एक गंभीर समस्या बनी हुई है और दोनों पक्षों के व्यापारियों की सुगम आवाजाही के लिए इस मुद्दे का तुरंत समाधान करने जरूरत है। फिक्की ने अफगान मंत्री के हवाले से बयान में कहा, ‘अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने भारतीय उद्योग जगत को आश्वासन दिया कि आवश्यक शांति स्थापित हो गई है और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार की गई हैं।’ उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार पहले ही एक अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। अमृतसर और काबुल-कंधार के बीच जल्द सीधी उड़ानें अफगान विदेश मंत्री मुत्तकी ने कहा कि अमृतसर और काबुल व कंधार के बीच जल्द ही सीधी उड़ानें शुरू होंगी। उन्होंने इसे व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक कदम बताया। राज्यसभा सांसद और वाणिज्य पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि नई उड़ानें भारत और अफगानिस्तान के बीच तेज और सुरक्षित हवाई पुल बनाएंगी। वहीं, आमिर खान मुत्तकी ने कहा कि भारत को चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंध हटाने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत करनी चाहिए। वह रणनीतिक रूप से स्थित चाबहार बंदरगाह के अधिकतम इस्तेमाल के पक्ष में हैं। उन्होंने अमेरिका के साथ अपनी बैठकों में प्रतिबंध हटाने का मुद्दा भी उठाया है।

नाटो प्रमुख का दावा: पीएम मोदी ने पुतिन से पूछा यूक्रेन युद्ध का अगला कदम

नई दिल्ली पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने भारत पर अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के प्रभावों पर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के टैरिफ की वजह से भारत ने  रूस से उसकी यूक्रेन स्ट्रैटेजी पर स्पष्टीकरण मांगा है. नाटो चीफ ने कहा कि ट्रंप की ओर से भारत पर लगा गए टैरिफ की वजह से रूस पर बड़ा असर पड़ रहा है. रूटे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर  पुतिन से बात कर रहे हैं. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर सीएनएन से बात करते हुए रूटे ने कहा कि भारत पर ट्रंप के टैरिफ का रूस पर बड़ा असर हो रहा है. भारत की ओर से पुतिन से बात की जा रही है. पीएम मोदी रूस से यूक्रेन पर अपनी रणनीति स्पष्ट करने को कह रहे हैं क्योंकि भारत को टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. बता दें कि ट्रंप ने पिछले महीने भारत पर 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था. इसके साथ ही रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से भारत पर अमेरिका ने 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया था. अमेरिकी सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर टैरिफ लगाया गया है. अमेरिका का कहना है कि रूस से तेल खरीदने की वजह से यूक्रेन के खिलाफ रूस को मदद मिल रही है. ट्रंप ने इस दौरान नाटो देशों से भी चीन पर टैरिफ लगाने को कहा था कि ताकि रूस का तेल कम खरीदा जा सके.

नाटो की चिंता बढ़ी: ड्रोन अटैक्स से नहीं निपट पा रहे, रूसी रणनीति ने बढ़ाई हलचल — जानें मजेदार पहलू

वारसॉ बीते सप्ताह पोलैंड के आसमान से रूसी ड्रोन गुजरने पर हड़कंप मच गया था। खबर है कि 19 ड्रोन पोलैंड के आसमान से गुजरे थे, जिनमें से 7 को ही उसकी ओर से इंटरसेप्ट किया जा सका। इसे उसकी एक असफलता के तौर पर देखा जा रहा है। हाल ही में नाटो देशों की एक मीटिंग हुई है, जिसमें ड्रोन हमलों से निपटने में अक्षमता की बात कही गई। गुरुवार को नाटो महासचिव मार्क रुट और यूरोपियन यूनियन के राजदूतों की मीटिंग हुई। इस मीटिंग में मौजूद कई प्रतिनिधियों ने कहा कि ड्रोन हमलों से निपटने के लिए नाटो के सदस्य देशों की तैयारी कमतर है। यह भी चिंता जाहिर की गई कि ड्रोन हमले बेहद कम लागत से होते हैं और उनके जवाब में बड़ी पूंजी खर्च की जा रही है। इस दौरान एक मजेदार तथ्य यह भी पेश किया गया कि रूस की ओर से करीब 11 हजार डॉलर के ड्रोन से ही हमले किए जाते हैं। उनके जवाब में हमारी तरफ से एयर-टू-एयर मार करने वाली 4 लाख डॉलर की मिसाइल चलाई जाती है। यह बेहद खर्चीला और जटिल है। इस संबंध में ऑस्ट्रिया के अखबार कुरियर डेली ने भी महत्वपूर्ण बात अपनी रिपोर्ट में कही है। अखबार लिखता है कि ड्रोन के जवाब में F-35 फाइटर जेट को तैनात किया गया। इसके अलावा इटली के सर्विलांस प्लेन लगे थे। यही नहीं जर्मन पैट्रियाट एयर डिफेंस सिस्टम भी लगा था। इसके बाद भी रूस की ओर से उड़े 19 ड्रोन्स में से 7 को ही इंटरसेप्ट किया जा सका। यही वजह है कि नाटो देशों ने ड्रोन हमलों से निपटने में अपनी असफलता मानी है। पोलैंड की अथॉरिटीज का भी कहना है कि रूस की ओर से भेजे गए ड्रोन्स में से 3 से 4 को ही मार गिराने में सफलता मिली। फिलहाल रूसी ड्रोन्स के कारण नाटो देशों में हलचल की स्थिति है। पौलैंड के आसमान से रूसी ड्रोन गुजरने को संप्रभुता को चैलेंज माना जा रहा है। यहां तक कि पोलैंड ने तो इसी मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मीटिंग बुलाने की भी मांग की है। नाटो के अधिकारियों का कहना है कि हम हर ड्रोन की निगरानी या उसे गिराने के लिए हर बार F-35 जैसे फाइटर जेट भी तैनात नहीं कर सकते। फिलहाल इस पर बात हुई कि ड्रोन से निपटने के कारगर और कम खर्चीले तरीकों को विकसित किया जाए। पोलैंड की मीडिया ने कहा कि उनका देश ड्रोन तकनीक से होने वाले हमलों से निपटने में सक्षम नहीं है। हमें अपनी तकनीक का आधुनिकीकरण करना होगा।

भारत-रूस तेल सौदा अमेरिका को नागवार: दी आर्थिक तबाही की धमकी

वाशिंगटन  नाटो चीफ के बाद अब  अमेरिका ने रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को अब खुली धमकी दी है। अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर  लिंडसे ग्राहम  ने कहा है कि अगर भारत, चीन और ब्राजील ने रूस से तेल लेना बंद नहीं किया, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार करेगा। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप  रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा देंगे। इससे पहले  NATO महासचिव मार्क रूट ने सीधे चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ये देश अब भी रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं तो उन पर 100% सेकेंडरी सैंक्शंस  (अमेरिकी टैरिफ) लगाए जाएंगे। उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में कहा था  “अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं तो तैयार रहिए। पुतिन पर दबाव डालिए कि वो शांति समझौता करें, नहीं तो भारी कीमत चुकानी होगी।”  ग्राहम की पुतिन को चेतावनी  मार्क रूट की तरह ही धमकाते हुए अमेरिका का कहना है कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूस से सस्ता तेल खरीदकर  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  को यूक्रेन पर हमला जारी रखने में मदद कर रहे हैं। ग्राहम के मुताबिक, रूस अपनी आधी से ज्यादा कमाई कच्चे तेल के निर्यात से ही करता है और इसमें से 80% से ज़्यादा तेल भारत, चीन और ब्राजील को ही जाता है। ग्राहम ने कहा कि पुतिन ने ट्रंप को कमजोर समझकर बहुत बड़ी गलती कर दी है। उन्होंने कहा- “हम यूक्रेन को और हथियार देंगे, ताकि पुतिन को पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। रूस की अर्थव्यवस्था पहले से ही बुरी हालत में है और अब इसे और नुकसान होगा।”     भारत-चीन-ब्राजील के लिए सख्त संदेश  ग्राहम ने साफ कहा कि इन तीनों देशों को अब तय करना होगा कि वे अमेरिका के साथ व्यापार चाहते हैं या रूस का सस्ता तेल। “अगर आप रूस से तेल खरीदते रहेंगे तो यह खून के पैसों जैसा है। आप पुतिन की जंग को जिंदा रख रहे हैं। हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे।” ग्राहम ने ट्रंप की तुलना एक बेहतरीन गोल्फ खिलाड़ी स्कॉटी शेफ़लर से करते हुए कहा- “डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राजनीति के स्कॉटी शेफ़लर हैं और अब वो अपने विरोधियों को सबक सिखाने वाले हैं।”*   यूक्रेन युद्ध से जुड़ा  विवाद 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए। लेकिन भारत, चीन और ब्राजील ने सस्ता तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करनी जारी रखी हैं। अब अमेरिका चाहता है कि रूस को और कमजोर किया जाए ताकि युद्ध जल्द रुके।

भारत-रूस तेल सौदा अमेरिका को नागवार: दी आर्थिक तबाही की धमकी

वाशिंगटन  नाटो चीफ के बाद अब  अमेरिका ने रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को अब खुली धमकी दी है। अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर  लिंडसे ग्राहम  ने कहा है कि अगर भारत, चीन और ब्राजील ने रूस से तेल लेना बंद नहीं किया, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार करेगा। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप  रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा देंगे। इससे पहले  NATO महासचिव मार्क रूट ने सीधे चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ये देश अब भी रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं तो उन पर 100% सेकेंडरी सैंक्शंस  (अमेरिकी टैरिफ) लगाए जाएंगे। उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में कहा था  “अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं तो तैयार रहिए। पुतिन पर दबाव डालिए कि वो शांति समझौता करें, नहीं तो भारी कीमत चुकानी होगी।”  ग्राहम की पुतिन को चेतावनी  मार्क रूट की तरह ही धमकाते हुए अमेरिका का कहना है कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूस से सस्ता तेल खरीदकर  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  को यूक्रेन पर हमला जारी रखने में मदद कर रहे हैं। ग्राहम के मुताबिक, रूस अपनी आधी से ज्यादा कमाई कच्चे तेल के निर्यात से ही करता है और इसमें से 80% से ज़्यादा तेल भारत, चीन और ब्राजील को ही जाता है। ग्राहम ने कहा कि पुतिन ने ट्रंप को कमजोर समझकर बहुत बड़ी गलती कर दी है। उन्होंने कहा- “हम यूक्रेन को और हथियार देंगे, ताकि पुतिन को पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। रूस की अर्थव्यवस्था पहले से ही बुरी हालत में है और अब इसे और नुकसान होगा।”     भारत-चीन-ब्राजील के लिए सख्त संदेश  ग्राहम ने साफ कहा कि इन तीनों देशों को अब तय करना होगा कि वे अमेरिका के साथ व्यापार चाहते हैं या रूस का सस्ता तेल। “अगर आप रूस से तेल खरीदते रहेंगे तो यह खून के पैसों जैसा है। आप पुतिन की जंग को जिंदा रख रहे हैं। हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे।” ग्राहम ने ट्रंप की तुलना एक बेहतरीन गोल्फ खिलाड़ी स्कॉटी शेफ़लर से करते हुए कहा- “डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राजनीति के स्कॉटी शेफ़लर हैं और अब वो अपने विरोधियों को सबक सिखाने वाले हैं।”*   यूक्रेन युद्ध से जुड़ा  विवाद 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए। लेकिन भारत, चीन और ब्राजील ने सस्ता तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करनी जारी रखी हैं। अब अमेरिका चाहता है कि रूस को और कमजोर किया जाए ताकि युद्ध जल्द रुके।

नाटो प्रमुख ने कहा– रूस से कच्चा तेल खरीदने से उसकी युद्ध नीति को मिल रही मदद, भारत और चीन को जिम्मेदारी से कदम उठाने की सलाह

नई दिल्ली "सुनिए.. अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, या फिर भारत के प्रधानमंत्री हैं या फिर ब्राजील के राष्ट्रपति हैं और आप अभी भी रूसियों के साथ बिजनेस कर रहे हैं और उनका तेल और गैस खरीद रहे हैं, तो आप समझ लीजिए कि अगर मॉस्को में बैठा वो आदमी शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं ले रहा है तो मैं 100 परसेंट का सेकेंडरी सैंक्शंस लगाने जा रहा हूं." धमकी की ये भाषा दुनिया के शक्तिशाली देशों के संगठन नाटो चीफ मार्क रूट की है. उन्होंने गैर कूटनीतिक शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए भारत-ब्राजील और चीन को रूस के साथ बिजनेस न करने की सलाह दी है. नाटो महासचिव मार्क रूट ने मंगलवार को चेतावनी दी कि यदि ब्राजील, चीन और भारत जैसे देश रूस के साथ व्यापार करना जारी रखते हैं तो उन पर 100% सेकेंडरी सैंक्शंस लगाया जा सकता है और ये प्रतिबंध बहुत भारी पड़ सकते हैं. ये सैंक्शंस अमेरिका द्वारा इन देशों पर लगाया जा सकता है. उन्होंने बुधवार को अमेरिकी सीनेटरों के साथ बैठक के दौरान यह बात कही. यह बात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यूक्रेन के लिए नए हथियारों की घोषणा और रूस से सामान खरीदने वाले देशों पर कठोर टैरिफ लगाने की धमकी देने के ठीक एक दिन बाद कही गई.  मार्क रूट ने कहा है कि इन देशों को चाहिए कि वे पुतिन पर यूक्रेन के साथ सीजफायर के लिए दबाव बनाएं. रूट ने कहा, "इन तीनों देशों के लिए मेरा विशेष प्रोत्साहन यह है कि अगर आप बीजिंग या दिल्ली में रहते हैं, या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं, तो आपको इस पर गौर करना चाहिए, क्योंकि यह आपको बहुत प्रभावित कर सकता है." उन्होंने आगे कहा, "तो कृपया व्लादिमीर पुतिन को फोन करें और उन्हें बताएं कि उन्हें शांति वार्ता के बारे में गंभीर होना होगा, क्योंकि अन्यथा इसका ब्राज़ील, भारत और चीन पर व्यापक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा." गौरतलब है कि ट्रंप रूस के खिलाफ यूक्रेन को हथियारों की नई खेप देने का ऐलान कर चुके हैं. ट्रंप ने यह भी धमकी दी है कि अगर रूस 50 दिनों के अंदर शांति समझौते पर सहमत नहीं होता है तो रूस का तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 100 फीसदी सेकेंडरी टैरिफ लगाएगा. ट्रंप ने अपने बयान में ब्राजील, चीन या भारत का नाम नहीं लिया था. लेकिन मार्क रूट ने तस्वीर साफ कर दी है. बता दें कि ये तीन देश हैं जिन्होंने 2022 में पुतिन की सेना द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदना जारी रखा है. बता दें कि अमेरिकी सीनेटर एक ऐसे विधेयक पर जोर दे रहे हैं जिसमें रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रावधान है. मार्क रूट ने अपने बयान में काफी तल्खी लाते हुए कहा, "इसलिए मुझे यकीन है कि उन्हें अभी तक पता नहीं है कि उन्हें क्या हिट करेगा? इसे समझने में कुछ समय लगेगा. और मुझे लगता है कि आप लोग मीडिया में यह बात स्पष्ट कर रहे हैं, सीनेटर भी ब्राज़ील, भारत और चीन के अपने समकक्षों के साथ इस पर चर्चा कर रहे होंगे. हथियारों की आपूर्ति के अलावा, रूस पर अधिकतम दबाव डालने में यह बहुत मददगार होगा." बता दें कि भारत अमेरिका के साथ एक ऐसे व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रहे हैं. जिसमें अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया जाने वाला टैरिफ 20 प्रतिशत हो सकता है.  चीन और भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार थिंक टैंक सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के डेटा बताते हैं कि चीन और भारत कच्चे रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं.  पांच दिसंबर 2022 से मई 2025 के अंत तक चीन ने रूस के कुल कच्चे तेल के निर्यात का 47 फीसदी और भारत ने 38 फीसदी खरीदा है. 2024 में भारत ने रूस से लगभग 1.8 से 2.07 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) कच्चा तेल आयात किया. जो उसके कुल तेल खरीद का 40-44% है. इसकी वैल्यू 2024 में 52.73 बिलियन डॉलर थी. चीन रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है. चीन ने 2024 में 1.76 से 2 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात रूस से प्रतिदिन किया. जो उसके कुल आयात का 20-22% है. 2024 में इसकी वैल्यू 78 बिलियन यूरो रही. दोनों देशों ने मिलकर मार्च 2023 में रूस के 91% तेल खरीदे.