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Navratri 2026: अष्टमी-नवमी पर कन्याओं को गिफ्ट देते समय न करें ये गलतियां, जानें क्या देना है शुभ

Sharadiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दौरान छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का बाल स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। उन्हें भोजन कराने के बाद दक्षिणा और उपहार देने की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भेंट देने से पूजा का पुण्य मिलता है। हालांकि, उपहार चुनते समय कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ वस्तुएं कन्या पूजन में देना उचित नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं कि कंजक पूजन के दौरान किन चीजों से बचना चाहिए। नवरात्रि में कन्या पूजन का क्या है महत्व? सनातन धर्म में छोटी कन्याओं को देवी शक्ति का स्वरूप माना जाता है। इसी वजह से नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने की परंपरा है। इस दिन भक्त कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोते हैं, तिलक लगाते हैं और सात्विक भोजन कराते हैं। इसके बाद उन्हें दक्षिणा या उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं का सम्मान करना और उन्हें श्रद्धा के साथ भोजन कराना मां दुर्गा की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दौरान उपहार देते समय भी उनकी उम्र और जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए। कन्या पूजन में नुकीली चीजें देने से बचें कन्या पूजन के दौरान उपहार चुनते समय नुकीली वस्तुओं से बचने की सलाह दी जाती है। छोटी बच्चियों को चाकू, कैंची या ऐसी दूसरी चीजें देना उचित नहीं माना जाता, जिनसे उन्हें चोट लगने का खतरा हो। धार्मिक परंपराओं में भी इस तरह की वस्तुओं को शुभ उपहारों में शामिल नहीं किया जाता है। इसलिए कन्याओं के लिए ऐसा सामान चुनना बेहतर है, जो उनके काम आए और सुरक्षित भी हो। उनकी उम्र के अनुसार कॉपी, पेंसिल, किताब या दूसरी उपयोगी चीजें भेंट की जा सकती हैं। काले रंग की वस्तुएं देना माना जाता है अशुभ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन में काले रंग की वस्तुएं उपहार में देने से बचना चाहिए। कई परंपराओं में काले रंग को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए पूजा के अवसर पर इस रंग की चीजें देना उचित नहीं माना जाता है। इसकी जगह लाल, गुलाबी या पीले रंग की वस्तुएं चुनी जा सकती हैं। कन्याओं को रंगीन कपड़े, रुमाल या दूसरी उपयोगी चीजें भेंट करना एक विकल्प है। हालांकि, उपहार चुनते समय सबसे जरूरी बात बच्चियों के प्रति सम्मान और स्नेह का भाव रखना है। कन्या पूजन में चमड़े की चीजें क्यों ना दें? कन्या पूजन के दौरान चमड़े से बनी वस्तुएं देने से भी बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से पूजा-पाठ में शुद्धता का विशेष महत्व माना गया है और कुछ परंपराओं में चमड़े की चीजों को शुभ नहीं समझा जाता है। इसलिए कंजक पूजन के लिए उपहार लेते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए। इसकी जगह कपड़े से बनी उपयोगी वस्तुएं, पुस्तकें या अन्य उपयुक्त सामान दिया जा सकता है। उपहार ऐसा हो, जिसे बच्चियां आसानी से इस्तेमाल कर सकें और जिसे देते समय परिवार भी सहज महसूस करे। कन्या पूजन में कौन-से उपहार देना शुभ है? कन्या पूजन में उपहार की कीमत से ज्यादा उसके पीछे की श्रद्धा और सम्मान को महत्व दिया जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार कन्याओं को फल, मिठाई, वस्त्र, कॉपी-पेंसिल, किताबें, चूड़ियां या रुमाल दिए जा सकते हैं। कई लोग मां दुर्गा के प्रतीक के रूप में लाल चुनरी या श्रृंगार सामग्री भी भेंट करते हैं। उपहार चुनते समय बच्चियों की उम्र और जरूरतों का ध्यान रखना अच्छा रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं को प्रेम और आदर के साथ भोजन कराना तथा उन्हें उपयोगी वस्तुएं देना इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन के दौरान इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर और वर्जित वस्तुओं से बचकर उपहार देने से आपके घर में सुख, समृद्धि और मां दुर्गा का आशीर्वाद बना रहता है।

Navratri 2026: कलश विसर्जन का सही समय क्या है? पढ़ें आसान विधि और नियम

आज महानवमी तिथि के समाप्ति के साथ ही चैत्र नवरात्रि का समापन हो गया. चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को ही महानवमी कहा जाता है. हालांकि, उदया तिथि के अनुसार, आज राम नवमी नवमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है. वहीं महानवमी पर आज मां सिद्धरात्रि की पूजा की गई. लोगों ने कन्या पूजन किया. नवरात्रि का हवन किया. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है. ऐसे में अब लोगों के मन ये सवाल आ रहा है कि नवरात्रि के कलश का विसर्जन कब किया जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि का कलश विसर्जन किस दिन किया जाएगा? साथ ही जानते हैं कि कलश विसर्जन का शुभ मुहूर्त और विधि क्या है? नवरात्रि कलश विसर्जन शुभ मुहूर्त नवरात्रि का कलश विसर्जन नवमी तिथि के समापन के बाद शुभ रहता है.नवमी तिथि की पूजा आज की जा चुकी है. ऐसे में कलश विसर्जन के लिए आज यानी 27 मार्च का दिन भी शुभ है. क्योंकि सुबह 10 बजकर 06 मिनट के बाद दशमी तिथि लग चुकी है. ऐसे में आज भक्त दोपहर 1 बजे से कलश का विसर्जन कर सकते हैं. वहीं जिन लोगों ने माता रानी का नौ दिनों का व्रत रखा है वो 28 तारीख को यानी कल कलश विसर्जन करें. 28 मार्च को दशमी तिथि सुबह 8 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. इसलिए इस समय तक आप नवरात्रि के कलश का विसर्जन कर लें. क्योंकि इसके बाद एकादशी तिथि लग जाएगी. कलश विसर्जन की विधि कलश विसर्जन करने से पहले कलश के ऊपर से नारियल को उठाएं. इसके बाद बोए गए जौ को काट लें. फिर कलश में रखे पवित्र जल में आम के पत्तों को डुबाएं और पूरे घर में इस पानी को छिड़कें. ऐसा करने से नकारात्मकता दूर होती है. जिन लोगों ने मिट्टी का कलश स्थापित किया है वो माता दुर्गा का ध्यान करते हुए इसे विसर्जत कर दें. धातु का कलश स्थापित करने वाले उसमें रखी सामग्री विसर्जित करें. कलश विसर्जन के दौरान गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ, स्वस्थानं परमेश्वरी, पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च’ मंत्र का जाप करें. कलश विसर्जन करने के बाद माता का ध्यान करें.