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जहां मर्द भी गांव छोड़ते थे, अब सुरक्षा बलों की कार्रवाई से हुई बदलाव

जमुई  बिहार के जमुई जिला का वो इलाका जिसे नक्सल समस्या के कारण लाल गलियारा की संज्ञा दी जाती थी. जिस इलाके से सटे जंगल में मुंगेर के तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू विस्फोट में शहीद हो गए थे. जिस इलाके के मर्द नक्सली खौफ के कारण दूसरे जगहों पर पलायन कर जाते थे. वहां अब सूरत बदलने लगी है. सीआरपीएफ के कैम्प आने के बाद तीन नक्सलियों के सरेंडर से लाल गलियारा में चहल पहल बढ़ गई. पलायन किए लोग गांव लौट आए हैं अब इंतजार है विकास का. सुरक्षा के बाद अब यहां बात होने लगी है बिजली, सड़क, शिक्षा और संचार सुविधा की. जमुई जिले के बरहट इलाके का चौरमारा गांव जो जंगलों और पहाड़ों से घिरा है. जहां दशकों से नक्सलियों का बोलबाला था. लाल गलियारे कहे जाने वाले इसी जंगली इलाके की सड़क पर नक्सलियों द्वारा किए गए एक विस्फोट में मुंगेर के तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू शहीद हो गए थे. अब वहां नक्सल समस्या खत्म हो चली है, चौरमारा वाले इस इलाके में अब विकास की बात की जा रही है. नक्सलियों के खौफ के कारण जो लोग पलायन कर गए थे वह गांव लौट आए हैं. चौरमारा गांव के नागेश्वर कोड़ा की कहानी भी ऐसी ही है. नक्सलियों के डर और खौफ के कारण नागेश्वर गांव छोड़कर दूसरे महानगर में चले गए थे, जबकि उनकी पत्नी संगीता देवी गांव में ही रही. लोगों को बुरी तरह पीटते थे नक्सली  संगीता देवी का सामना कई बार नक्सलियों के दस्ते से हुआ, जो गांव में अक्सर आकर अत्याचार करते थे. नक्सली खौफ के खात्मे के बाद यह दंपति उन घटनाओं को याद कर अभी भी सहम जाते हैं. संगीता बताती हैं कि कई बार हमारे सामने ही नक्सली लोगों को मारते-पीटते थे. जबरन साथ में बंधक बनाकर ले जाते और अपना काम कराते थे. मना करने पर लोगों को पीट-पीटकर घायल कर देते थे. उनके पति नागेश्वर बताते हैं कि मारपीट और अत्याचार की घटनाओं से डरकर उन्हें गांव छोड़ना पड़ गया था. कई लोगों ने छोड़ दिया था गांव  सिर्फ नागेश्वर कोड़ा ही नहीं गांव के अधिकांश मर्द जान जाने के डर और नक्सलियों की पिटाई के खौफ के कारण गांव से पलायन कर गए थे, अब वापस आ चुके हैं. यह सब संभव हुआ जब गांव में सरकार ने सीआरपीएफ कैंप लगा दी. पैरा मिलिट्री फोर्सेज की तैनाती के बाद इस इलाके में नक्सलियों का खौफ तब और खत्म हो गया जब यहां के हार्डकोर तीन नक्सली कमांडर ने सरेंडर कर दिया. सुरक्षा के बाद अब यहां के लोग विकास मांग रहे हैं, गांव में अभी तक बिजली नहीं, संचार की कोई सुविधा नहीं, गांव जाने वाली सड़क कच्ची है. हालांकि कई दशक के बाद यहां के लोग पहली बार अपना वोट गांव में डालें, सरकारी अनाज अब गांव तक पहुंचने लगा, लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरी की मांग हो रही है. जंगल में बसे चोरमारा की आबादी लगभग 4 हजार है. नक्सली खौफ के खात्मे के बाद विकास की मांग पर सरकार और जिला प्रशासन की गंभीर है. जिले के डीएम का कहना है कि बिजली संचार सड़क शिक्षा जैसी चीजों पर काम हो रही है आने वाले दिनों में जल्द ही बेहतर परिणाम देखे जाएंगे.

बस्तर में माओवादी हिंसा की दिशा बदलने का वक्त, 60 लाख के इनामी माओवादी की हुई शिनाख्त

 जगदलपुर  बस्तर से लेकर तेलंगाना तक फैला माओवादी नेटवर्क अब निर्णायक रूप से टूट चुका है। दशकों से जारी लाल आतंक का ‘रिवर्स काउंटडाउन’ (उल्टी गिनती) शुरू हो गया है। सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, निरंतर दबाव और नेतृत्व के विघटन ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। सुरक्षा एजेंसियों का विश्वास है कि 26 जनवरी को इसकी घोषणा कर दी जाए।  तेलंगाना में पीएलजीए (पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन नंबर–एक के प्रमुख बारसे देवा उर्फ सुक्का के आत्मसमर्पण और सुकमा में कोंटा एरिया कमेटी प्रमुख के मारे जाने के बाद बस्तर में संगठन लगभग नेतृत्वविहीन हो गया है। पापा राव ही एकमात्र बड़ा नाम शेष अब शीर्ष स्तर पर पापा राव ही एकमात्र बड़ा नाम शेष है। 14 माओवादी शनिवार को सुकमा, बीजापुर में मारे गए थे। उधर, तेलंगाना में बारसे देवा ने अपने 20 साथियों के साथ समर्पण किया था। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी का कहना है कि माओवादी संगठन का संख्या बल लगातार घट रहा है और नेतृत्व पूरी तरह बिखर चुका है। बस्तर में अब केवल पापा राव शीर्ष स्तर पर बचा है, जबकि जमीनी स्तर पर गिनती के ही माओवादी सक्रिय हैं। यदि बचे हुए माओवादी समय रहते आत्मसमर्पण नहीं करते, तो भविष्य में उनके लिए यह विकल्प भी नहीं बचेगा। पांच महिला सहित 12 माओवादियों की शिनाख्त वहीं सुकमा में बुर्कलंका और पामलूर इलाके में शनिवार को मुठभेड़ में मारे गए पांच महिला सहित 12 माओवादियों की शिनाख्त हो गई है। सभी शवों को जिला मुख्यालय लाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद स्वजन को सौंपा जाएगा। माओवादियों में डीवीसीएम वेट्टी मंगडू उर्फ मुक्का आठ लाख का इनामी, एसीएम माड़वी हितेश आठ लाख, सीवाईपीसी पोड़ियम जोगा 10 लाख, कोमरम बदरी, झितरू माड़वी, माड़वी मुक्का, मुचाकि मुन्नी, माड़वी जमली, पोड़ियम रोशनी ये सभी एसीएम जिन पर पांच लाख का इनाम घोषित था। इनके अलावा तामो नंदा, मड़कम रामा, मासे ये तीनों पार्टी के सदस्य थे और इन पर दो लाख का इनाम राशि घोषित था। मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास, एसएलआर राइफल, बीजीएल लांचर, 12 बोर हथियार, वायरलेस सेट, स्कैनर तथा बड़ी मात्रा में जिंदा राउंड बरामद किए गए हैं। हिंसा का भविष्य नहीं सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने पत्रवार्ता में कहा कि बस्तर क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में निरंतर व निर्णायक प्रगति हो रही है। हिंसा का कोई भविष्य नहीं है और संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों के माध्यम से ही बस्तर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने हिंसा के रास्ते पर चल रहे माओवादी कैडरों से समय रहते मुख्यधारा में लौटने और विकास के भागीदार बनने की अपील की। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई सुरक्षा बलों की सतत रणनीति और मजबूत खुफिया तंत्र का परिणाम है। पत्र में ग्रामीण को दी थी धमकी पत्रवार्ता में यह भी खुलासा हुआ कि घटनास्थल से एक धमकी भरा पत्र बरामद किया गया है, जिसमें माओवादियों ने मेहता ग्राम पंचायत के बालंगतोग गांव के एक ग्रामीण को पुलिस मुखबिर बताते हुए चेतावनी दी है। पत्र में जन अदालत में सजा देने और सुधार न होने पर कार्रवाई की धमकी का उल्लेख है। मोबाइल टावर एसपी ने कहा कि यह माओवादियों की जनविरोधी मानसिकता को दर्शाता है। 41 बड़ी घटनाओं में शामिल था मंगड़ू पुलिस के अनुसार कोंटा एरिया कमेटी का सचिव मंगडू 41 बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है, जिनमें ताड़मेटला, बुर्कापाल, एर्राबोर राहत शिविर, दरभागुड़ा, कोताचेरू और मिनपा जैसी भीषण घटनाएं शामिल हैं, जिनमें बड़ी संख्या में जवान और नागरिक बलिदान हुए थे।

दंतेवाड़ा में पुनर्वासितों के लिए बड़ी पहल, लाइवलीहुड कॉलेज में कौशल प्रशिक्षण और किट वितरण

दंतेवाड़ा : दंतेवाड़ा में पुनर्वासितों के पुनर्वास की दिशा में बड़ी पहल लाइवलीहुड कॉलेज में कौशल प्रशिक्षण के बाद वेलकम किट एवं टूल किट का वितरण दंतेवाड़ा राज्य शासन एवं जिला प्रशासन की पुनर्वास नीति के अंतर्गत पुनर्वासितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दंतेवाड़ा जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज, दंतेवाड़ा में हिंसा का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में शामिल होने वाले पुनर्वासितों के लिए रोजगारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।  इस क्रम में आज लाइवलीहुड कॉलेज परिसर में वेलकम किट एवं टूल किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 147 पुनर्वासितों को आवश्यक टूल किट प्रदान की गई, जिससे वे स्वरोजगार अपनाकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।   रोजगारोन्मुखी ट्रेड्स में प्रशिक्षण   प्रशिक्षणार्थियों को इलेक्ट्रिशियन, सिलाई, वेल्डिंग, प्लंबिंग, सोलर पैनल ऑपरेटर सहित अन्य तकनीकी एवं आजीविका आधारित ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण उपरांत संबंधित ट्रेड्स की टूल किट प्रदान की गई, ताकि वे अपने कौशल का व्यावहारिक उपयोग कर सकें। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दंतेवाड़ा विधायक श्री चैतराम अटामी रहे। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक श्री गौरव रॉय, जिला पंचायत सीईओ श्री जयंत नाहटा तथा जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री अरविंद कुंजाम विशिष्ट अतिथि, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री संतोष गुप्ता प्रभारी अधिकारी लाइवलीहुड राजीव कुजूर, सहायक संचालक कौशल विकास, अमित वर्मा, प्राचार्य लाइवलीहुड हरीश सिन्हा, डीएसपी नसर उल्ला सिद्दीकी, डीएसपी विशाल कुमार उपस्थित रहे। अतिथियों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को वेलकम किट एवं टूल किट का वितरण किया गया।   स्थानीय भाषा में संवाद, विश्वास बहाली पर जोर  विधायक श्री चैतराम अटामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुनर्वासितों को बधाई दी और उनके सामान्य जीवन में लौटने को सराहनीय कदम बताया। विधायक ने स्थानीय गोंडी भाषा में संवाद कर प्रशिक्षणार्थियों से सीधा संवाद स्थापित किया, जिससे विश्वास और सहभागिता को मजबूती मिली।   प्रशासन की सतत सहायता का आश्वासन पुलिस अधीक्षक श्री गौरव रॉय ने प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद प्रदान की जाने वाली 10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि की जानकारी देते हुए कहा कि जिला एवं पुलिस प्रशासन पुनर्वासितों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से इस राशि का सदुपयोग कर स्वरोजगार अपनाने का आह्वान किया। वहीं जिला पंचायत सीईओ श्री जयंत नाहटा ने प्रशिक्षणार्थियों को पर्यटन क्षेत्र एवं स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दंतेवाड़ा एवं रायपुर भ्रमण कार्यक्रम की जानकारी दी तथा आगामी वर्ष आयोजित होने वाले दंतेवाड़ा स्टार्टअप हंट में भाग लेकर व्यवसाय प्रारंभ करने की सलाह दी। जिला प्रशासन द्वारा दुकान संचालन हेतु सहयोग प्रदान किए जाने की भी जानकारी दी गई।  शांति और विकास की दिशा में सशक्त कदम प्रशासन का उद्देश्य पुनर्वासितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और विश्वास बहाली सुनिश्चित करना है। यह पहल बस्तर अंचल में सामाजिक समरसता और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 

सुकमा :गोलापल्ली के जंगल में एनकाउंटर, सुरक्षाबलों ने माओवादियों को घेरा

सुकमा  छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में DRG जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। खबर है कि इस दौरान  तीन नक्सली मारे गए हैं, जबकि कुछ घायल भी हुए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस को सूचना मिली थी कि गोलापल्ली इलाके में भारी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इस आधार पर DRG के जवान जंगल में सर्च ऑपरेशन के लिए गए थे। 18 दिसंबर की सुबह जब जवान उस इलाके में पहुंचे, तो माओवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी के आधार पर जिला सुकमा की डीआरजी(जिला रिजर्व गार्ड) टीम ने गुरुवार की सुबह सर्च आपरेशन शुरू किया था। अभियान के दौरान सुबह से ही सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ स्थल से हथियारों की बरामदगी हुई है, हालांकि मारे गए माओवादियों की पहचान और बरामद सामग्री का विस्तृत विवरण अभियान पूर्ण होने के बाद जारी किया जाएगा। इस पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग स्वयं सुकमा एसपी किरण चव्हाण कर रहे हैं। क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात कर सर्च ऑपरेशन को और तेज किया गया है। बता दें कि पिछले दो वर्ष में माओवादियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, शीर्ष माओवादी नेताओं सहित 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ में मारे गए हैं। इसके जवाब में जवानों ने भी कार्रवाई की और दोनों तरफ से सुबह से ही गोलीबारी जारी है। मारे गए नक्सलियों में एरिया कमेटी मेंबर (ACM) कैडर के होने की संभावना जताई जा रही है। इस कैडर पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा गया है। 3 दिसंबर को मुठभेड़ में मारे गए थे 12 नक्सली इससे पहले 3 दिसंबर को दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर जवानों ने 12 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) वेल्ला मोडियम भी मारा गया था। वहीं, इस एनकाउंटर में DRG के 3 जवान शहीद और 2 घायल हुए थे। 16 नवंबर- 3 नक्सली मारे गए थे 16 नवंबर 2025 को भेज्जी-चिंतागुफा के सीमावर्ती क्षेत्र में जवानों ने तीन नक्सलियों को मार गिराया था। इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। जिसके बाद DRG की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान तुमालपाड़ के जंगल में नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के बाद जवानों ने भी मोर्चा संभाला। नक्सलियों की गोलियों का जवाब दिया। सुबह से दोनों ओर से रुक-रुककर फायरिंग हुई। इसमें तीन नक्सली मारे गए थे। जवानों ने सर्चिंग के दौरान जंगल से तीनों नक्सलियों के शव बरामद किए गए थे।

सरेंडर नक्सलियों के इनपुट पर बड़ी कार्रवाई, बालाघाट जंगल से लाखों रुपये और हथियार मिले

बालाघाट नक्सल विरोधी अभियान के तहत बालाघाट जिले में पुलिस और सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली अहम जानकारी के आधार पर जंगलों में छिपाए गए नक्सली डंप का खुलासा हुआ है। सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने 11 लाख 57 हजार 385 रुपये नकद के साथ भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है। जिले में यह पहला मौका है जब किसी नक्सली डंप से इतनी बड़ी नकदी हाथ लगी है।  पुलिस ने प्रेस को इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार नवंबर से दिसंबर के बीच अलग-अलग समय पर कुल 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें एक, दस और दो नक्सलियों के अलग-अलग समूह शामिल थे। आत्मसमर्पण के बाद पूछताछ के दौरान इन नक्सलियों ने जिले के विभिन्न जंगली इलाकों में छिपाए गए डंप के बारे में सुराग दिए। सूचना के आधार पर पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने जंगल में सघन तलाशी अभियान चलाया। अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखे गए नक्सली डंप को बरामद किया गया। आधुनिक हथियार और विस्फोटक बरामद बरामद सामग्री में चार सेमी-ऑटोमैटिक राइफल, एक ग्रेनेड लॉन्चर, एक बोल्ट एक्शन राइफल और आठ पंप एक्शन सिंगल शॉट राइफल शामिल हैं। इसके अलावा एक देसी कट्टा, 451 राउंड कारतूस और 26 मैगजीन भी मिली हैं। क्लेमोर माइंस और डेटोनेटर भी मिले पुलिस के मुताबिक डंप से क्लेमोर माइंस पाइप, 500 ग्राम बारूद, करीब 16 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, 22 मेटल स्पाइक्स, दो किलोग्राम बोल्ट व छर्रे बरामद किए गए हैं। साथ ही पांच इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, वोल्ट मीटर, बैटरी सेल, स्टेथेस्कोप, बीपी मशीन और जीवन रक्षक दवाएं भी जब्त की गई हैं। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई नक्सलियों की आर्थिक और सैन्य ताकत को बड़ा झटका है। जिले में नक्सल गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।  

MP को नक्सलमुक्त करने का दावा, CM मोहन यादव बोले- लाल सलाम को मिली आखिरी सलामी

 बालाघाट मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य को नक्सली खतरे से पूरी तरह मुक्त होने का दावा किया. यह घोषणा तब की गई जब बालाघाट जिले में दो इनामी नक्सलियों दीपक और रोहित ने सरेंडर कर दिया. उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने के पक्के इरादे की वजह से मुमकिन हुआ है. CM यादव भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बालाघाट में नक्सलियों के सरेंडर से जुड़े 'रिहैबिलिटेशन टू रिजुविनेशन' कैंपेन के तहत आयोजित एक प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे. मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नक्‍सलवाद मुक्‍त एमपी का ऐलान करने के साथ कहा कि यह सफलता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में तैयार रणनीति का परिणाम है. सीएम ने बताया क‍ि हमारी नीति स्पष्ट थी या तो नक्सलियों को आत्मसमर्पण करवाया जाएगा या उन्हें खत्म किया जाएगा. आज वही नीति सफल हुई.  नक्सली दीपक और रोहित ने दिन में बालाघाट जिले के बिरसा थाना इलाके के कोरका में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) कैंप में सरेंडर कर दिया. नक्सली दीपक बालाघाट व रोहित छत्तीसगढ़ का निवासी  11 द‍िसंबर 2025 को मध्‍य प्रदेश के बालाघाट पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में आईजी संजयकुमार, सीआरपीएफ आईजी नीतू भट्टाचार्य, कलेक्टर मृणाल मीना और एसपी आदित्य मिश्रा मौजूद रहे. आईजी संजय कुमार ने बताया कि नक्सली दीपक बालाघाट जिले के पालागोंदी का रहने वाला है  जबकि रोहित छत्तीसगढ़ का निवासी है. सरेंडर के समय दीपक ने कार्बाइन गन और कारतूस भी समर्पित किए हैं. बालाघाट ज‍िला कलेक्टर मृणाल मीना ने बताया कि बालाघाट जिले में नक्सल गतिविधियों के कारण लगभग सौ गांवों के आदिवासी ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने में दिक्कत आ रही थी. चूंकि अब जिला नक्सल मुक्त हो चुका है ऐसे में उपरोक्त प्रभावित गांवों में विकास की धारा बहेगी.  पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दीपक और रोहित पर क्रम से 29 लाख रुपए और 14 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था, और दोनों ने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताते हुए सरेंडर कर दिया. बालाघाट के एसपी आदित्य मिश्रा ने कहा कि जिले में अब कोई हार्डकोर नक्सली एक्टिव नहीं है. उन्होंने कहा कि दीपक बालाघाट जिले के पलागांवडी का रहने वाला है और दोनों लंबे समय से इलाके में नक्सल गतिविधियों में एक्टिव थे. उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी एजेंसियां ​​लंबे समय से उनकी तलाश में थीं और यह एक बड़ी सफलता है. पुलिस अधिकारी ने कहा, "यह सरेंडर CRPF और लोकल पुलिस की जॉइंट कार्रवाई, लगातार दबाव और असरदार स्ट्रैटेजी की वजह से मुमकिन हुआ. इससे इलाके में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा." गुरुवार देर शाम मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि पुलिस अधिकारियों और जवानों की अदम्य हिम्मत और कुर्बानी की वजह से बालाघाट के लाल सलाम को आखिरी सलामी दी गई है. CM यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के गाइडेंस में आजादी के बाद पहली बार नक्सलियों के खिलाफ कोऑर्डिनेटेड तरीके से एक शानदार और ऐतिहासिक कैंपेन शुरू किया गया. उन्होंने एक ऑफिशियल बयान में कहा, "सेंट्रल लीडरशिप ने नक्सलवाद के खत्म होने के लिए 26 जनवरी 2026 की डेडलाइन घोषित की है." मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलियों के पास सिर्फ दो ऑप्शन हैं, नई जिंदगी का मौका या जिंदगी खत्म. उन्होंने आगे कहा, "सेंट्रल आर्म्ड फोर्सेज और मध्य प्रदेश पुलिस के बहादुर जवानों की मिली-जुली कोशिशों की वजह से 11 दिसंबर को आखिरी दो नक्सलियों के सरेंडर के साथ राज्य नक्सल-फ्री हो गया." CM यादव ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद के खत्म होने से मंडला, डिंडोरी और बालाघाट के विकास में आने वाली रुकावटें दूर हो गई हैं. उन्होंने कहा, "हम इस इलाके को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए सबके साथ मिलकर काम करेंगे. हम माओवाद को पनपने नहीं देंगे." साथ ही उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान कुर्बान करने वाले सभी शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी. 10 हार्डकोर नक्सलियों ने एक साथ डाले थे हथियार बता दें क‍ि मध्य प्रदेश के बालाघाट में 7 दिसंबर की अपराह्न साढ़े तीन बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने 10 हार्डकोर नक्सलियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था. मध्य प्रदेश में "पुनर्वास से पुनर्जीवन" के तहत नक्सलियों का यह कोई साधारण सरेंडर नहीं था, क्योंकि इनमें से कई नक्‍सली कैडर KB और MMC ज़ोन में वर्षों तक खूनी वारदातों का हिस्सा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरेंडर करने वाले कैडर को राज्य की पॉलिसी के तहत नई जिंदगी दी जाएगी और सरकार उन्हें सुरक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

बालाघाट जिला अब नक्सल मुक्त, 12 कमांडरों ने AK-47 समेत हथियार सौंपे

बालाघाट  मध्यप्रदेश से माओवादी ढांचे का अंतिम किला भी ढह गया है. देश के सबसे खतरनाक और एक करोड़ इनामी माओवादी नेता सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) रामधेर मज्जी ने सोमवार तड़के अपने 11 टॉप कमांडरों के साथ हथियार डाल दिए. यह सरेंडर छत्तीसगढ़ में खैरागढ़ जिले के बाकरकट्टा थाना क्षेत्र के कुमही गांव में हुआ, जहां रामधेर ने AK–47 पुलिस के हवाले कर दी. उसके साथ DVCM और ACM स्तर के आतंकी चंदू उसेंडी, ललिता, जानकी, प्रेम, रामसिंह दादा और सुकैश पोट्टम भी हथियारों के साथ सामने आए. छह महिला नक्सलियों ने भी INSAS, SLR और .303 जैसे हथियार सौंप दिए. दशकों से तीन राज्यों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए यह सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है. मध्य प्रदेश का यह प्रमुख नक्सल प्रभावित जिला, जिसकी पहचान 1990 के दशक से नक्सली हिंसा और सक्रियता के लिए रही है, अब आधिकारिक रूप से नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। यह उपलब्धि केंद्रीय गृह मंत्रालय की मार्च 2026 की तय समय सीमा से पहले हासिल हुई है। अब सिर्फ एक नक्सली दीपक सक्रिय बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा के मुताबिक, नक्सलियों ने पुनर्वास से पुनर्जीवन तक सरकार की नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया है। इससे जिला लगभग नक्सली मुक्त हो गया है। जिले में अब सिर्फ एक नक्सली दीपक सक्रिय है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि वह भी जल्द सरेंडर कर देगा। एमएमसी जोन प्रभारी रामधेर मज्जी भी शामिल आत्मसमर्पण करने वालों में एमएमसी जोन प्रभारी रामधेर मज्जी भी शामिल रहे, जिन्होंने एक AK-47 राइफल सौंपकर समर्पण किया। उनकी गार्ड और हार्डकोर नक्सली मानी जाने वाली सुनीता ओयाम कुछ वक्त पहले ही बालाघाट पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुकी थी। इस दौरान कुल 12 हथियार सौंपे गए, जिनमें दो एके-47, दो इंसास, एक एसएलआर और दो .303 राइफलें शामिल हैं। प्रमुख नक्सली, जिन्होंने किया समर्पण सरेंडर करने वाले अन्य प्रमुख नक्सलियों में चंदू उसेंडी (डीवीसीएम), ललिता (डीवीसीएम), जानकी (डीवीसीएम), प्रेम (डीवीसीएम), राम सिंह दादा (एसीएम), सुकेश पोट्टम (एसीएम), लक्ष्मी (पीएम), शीला (पीएम), सागर (पीएम), कविता (पीएम) और योगिता (पीएम) शामिल हैं। इन नक्सलियों ने पुनर्वास योजना के तहत सरेंडर किया है। उन्हें राज्य सरकार की मौजूदा पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्स्थापन का आश्वासन दिया गया है। 29 नवंबर को महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में 11 नक्सलियों का एक दल आत्मसमर्पण कर चुका है, जिसका नेतृत्व अनंत उर्फ विकास नागपुरे कर रहा था, जो पिछले महीने हॉक फोर्स के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की हत्या में शामिल था. NDTV ने कुछ दिनों पहले ही अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में खुलासा किया था कि रामधेर अब सिर्फ अपने बचे हुए 14 हथियारबंद कैडरों के साथ दक्षिणी MMC ज़ोन के घने जंगलों में छिपा हुआ था. सुरक्षा एजेंसियों ने  बताया था कि यही समूह पूरी MMC संरचना का आखिरी किला है. 29 नवंबर को अनंत उर्फ विकास नागपुरे के सरेंडर के बाद रामधेर नेटवर्क से बिल्कुल अलग-थलग पड़ चुका था. अनंत ने जाते हुए चार कैडरों को यही जिम्मा दिया था कि रामधेर से संपर्क करें और उसे हथियार डालने के लिए तैयार करें. इससे मध्यप्रदेश के लिए यह हफ्ता ऐतिहासिक बन गया है. सिर्फ 24 घंटे पहले बालाघाट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में MMC के KB डिविजन के 10 बड़े नक्सलियों ने ₹2.36 करोड़ के इनाम के साथ सरेंडर किया था. NDTV ने तभी रिपोर्ट किया था कि इसके बाद ( मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़) यानि दक्षिणी MMC ज़ोन हिल जाएगा और रामधेर की यूनिट भी टूट जाएगी और अब, कुछ ही घंटों में, वह आखिरी दीवार भी ढह गई. इससे मध्यप्रदेश अब लगभग पूरी तरह नक्सल-मुक्त माना जा रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को ही कहा था कि “आज का दिन MP पुलिस के नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी जीत है. डिंडौरी और मंडला पहले ही मुक्त थे, बालाघाट भी अब बड़े पैमाने पर नक्सल मुक्त हो रहा है. यह ऑपरेशन ‘सरेंडर करो या समाप्त हो जाओ' की नीति की ऐतिहासिक सफलता है.” उत्तर MMC ज़ोन पहले ही खाली हो चुका था. अब दक्षिणी MMC ज़ोन के सबसे बड़े नाम रामधेर के सरेंडर के बाद पूरे MMC क्षेत्र जो तीन राज्यों तक फैला था, का सफाया माना जा रहा है. इससे कान्हा नेशनल पार्क, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पूरे जंगल कॉरिडोर की सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ेगा. जो दस नक्सली रविवार को आत्मसमर्पण करने पहुंचे, वे MMC ज़ोन के कान्हा–भोरा देव (KB) डिवीजन से जुड़े थे, जो छत्तीसगढ़ के कबीरधाम और MP के बालाघाट व मंडला जिलों में सक्रिय था. आत्मसमर्पण करने वालों में MMC ज़ोन के विशेष जोनल समिति सदस्य सुरेंद्र उर्फ कबीर सोड़ी (50), राकेश ओड़ी उर्फ मनीष, और एरिया कमेटी सदस्य लालसिंह मरावी, सलीता उर्फ सावित्री, नवीन नुप्पो उर्फ हिड़मा, जैशीला उर्फ ललिता ओयम, विक्रम उर्फ हिड़मा वट्टी, जरीना उर्फ जोगी मुसक और समर उर्फ सोमरू शामिल हैं. इनकी उम्र 26 से 50 वर्ष के बीच है और ये सभी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं. इनमें से कई पर ग्रामीणों की हत्याओं का गंभीर आरोप है, जिन्हें पुलिस मुखबिर समझकर मारा गया था. रविवार का आत्मसमर्पण उस घटना के 36 दिन बाद हुआ है, जब 14 लाख के इनाम वाली नक्सली सुनीता ने हथियार डाले थे, रविवार का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इसी से एक दिन पहले MP पुलिस और रामधेर की टीम के बीच MP–छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर मुठभेड़ हुई थी. 2025 में अब तक MP पुलिस ने टारगेटेड ऑपरेशंस में 10 खतरनाक नक्सलियों का एनकाउंटर किया है, जिन पर कुल 1.86 करोड़ रुपये का इनाम था.

पंडुम कैफे का शुभारंभ बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का प्रेरक प्रतीक : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर में सामाजिक-आर्थिक बदलाव के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए आज जगदलपुर में ‘पंडुम कैफ़े’ का शुभारंभ किया। यह कैफ़े नक्सली हिंसा के पीड़ितों और समर्पण कर चुके सदस्यों के पुनर्वास हेतु छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों को सम्मानजनक और स्थायी आजीविका प्रदान करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। यह अनूठी पहल संघर्ष से सहयोग तक के प्रेरणादायक सफर को दर्शाती है।‘पंडुम कैफ़े’ जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में स्थित है। मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘पंडुम कैफे’ में कार्यरत नारायणपुर की फगनी, सुकमा की पुष्पा ठाकुर, बीरेंद्र ठाकुर, बस्तर की आशमती और प्रेमिला बघेल के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत की। उन्होंने नई शुरुआत के लिए उनका हौसला बढ़ाया और ‘पंडुम कैफ़े’ के बेहतर संचालन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पंडुम कैफ़े का शुभारंभ बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का एक प्रेरक प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने साय ने कहा कि पंडुम कैफे आशा, प्रगति और शांति का उज्ज्वल प्रतीक है। कैफे में कार्यरत युवा, जो नक्सली हिंसा के पीड़ित तथा हिंसा का मार्ग छोड़ चुके सदस्य हैं, अब शांति के पथ पर अग्रसर हो चुके हैं। जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से उन्हें आतिथ्य सेवाओं, कैफ़े प्रबंधन, ग्राहक सेवा, स्वच्छता मानकों, खाद्य सुरक्षा और उद्यमिता कौशल का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति के पथ पर लौटे और कैफ़े में कार्यरत एक महिला ने इस अवसर पर भावुक होकर इस पुनर्वास पहल से हुए बदलाव की बात दोहराई। एक पूर्व माओवादी कैडर ने कहा कि,“हमने अपने अतीत में अंधेरा देखा था। आज हमें समाज की सेवा करने का यह अवसर मिला है, यह हमारे लिए एक नया जन्म है। बारूद की जगह कॉफी परोसना और अपनी मेहनत की कमाई से जीना—यह एहसास हमें शांति और सम्मान दे रहा है।” एक अन्य सहयोगी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि,“पहले हम अपने परिवार को सम्मानजनक जीवन देने का सपना भी नहीं देख सकते थे। अब हम अपनी मेहनत से कमाए पैसों से घर के सदस्यों का भविष्य संवार सकते हैं। यह सब प्रशासन और इस कैफ़े की वजह से संभव हुआ है।” एक अन्य सदस्य ने समुदाय के सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि,“हमें लगा था कि मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होगा, लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन ने हमें प्रशिक्षण दिया और हमारा विश्वास जीता। सबसे बड़ी बात यह है कि हम अब पीड़ितों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे हमें अपने अतीत के अपराधों को सुधारने और शांति स्थापित करने का अवसर मिला है।” उन्होंने यह भी बताया कि ‘पंडुम’ बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है, और इसकी टैगलाइन “जहाँ हर कप एक कहानी कहता है” इस बात का प्रतीक है कि यहाँ परोसी गई कॉफी सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष पर विजय और एक नई शुरुआत की कहानी भी अपने साथ लेकर आती है। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, जगदलपुर महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, संभागायुक्त डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी., कलेक्टर हरिस एस., पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीगण भी उपस्थित थे।

पूर्वी रीजनल नक्सल मोर्चे का पत्र आया सामने, ब्यूरो के तेवर फिर तीखे

जगदलपुर लगातार नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के दौर के बीच, अब नक्सल संगठन के पूर्वी रीजनल ब्यूरो का नया बयान सामने आया है. यह ब्यूरो झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय बताया जाता है. ब्यूरो की ओर से जारी बयान में लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया गया है. बताया जा रहा है कि इस बयान के पीछे नक्सल नेता मिशिर बेसरा का नाम प्रमुखता से सामने आया है, जिसे इस रीजन का सबसे बड़ा नक्सली माना जाता है. बेसरा और उसके संगठन ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में लगातार हो रहे नक्सल आत्मसमर्पण की निंदा की है. बयान में कहा गया है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी “संगठन के गद्दार” हैं और राज्य सरकार की नीति में फंस गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह बयान नक्सलियों की घटती ताकत और संगठनात्मक हताशा का संकेत है. बस्तर से लेकर सीमाई राज्यों तक नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बढ़त ने अब संगठन की जमीनी पकड़ कमजोर कर दी है.

छत्तीसगढ़ के माओवादी नेता बंडी प्रकाश ने समर्पण किया, DGP के सामने हथियार सौंपे

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के माओवादी पार्टी के प्रमुख नेता बंदी प्रकाश ने तेलंगाना DGP के सामने सरेंडर कर दिया है। बंदी प्रकाश नक्सलियों के तेलंगाना स्टेट कमेटी का मेम्बर और स्पेशल जोनल कमेटी मेम्बर भी है। बंदी प्रकाश पर छत्तीसगढ़ में 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बंदी प्रकाश का नाम माओवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल है। बंदी प्रकाश उर्फ ​​प्रभात, अशोक, क्रांति मंचेरियल जिले के मंदामरी से हैं। प्रकाश के पिता सिंगरेनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 1982-84 के बीच "गाँव चलो" आंदोलन के माध्यम से रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (आरएसयू) के लिए संघर्ष किया। इसके बाद वे माओवादी पार्टी से संबद्ध सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष बने और वहाँ से राज्य समिति के सदस्य बने। छात्र नेता से बना माओवादी नेता संगठन में ‘प्रभात’, ‘अशोक’ और ‘क्रांति’ जैसे नामों से पहचाने जाने वाला बंडी प्रकाश तेलंगाना के मंचेरियल जिले के मंदामरी क्षेत्र का रहने वाला है। उसके पिता सिंगरेनी कोलियरी में कर्मचारी हैं। छात्र जीवन में ही वह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ और 1982–84 के बीच हुए गांव चलो आंदोलन के दौरान रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ गया। इसके बाद सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष के रूप में काम किया और धीरे-धीरे संगठन की ऊंची कमेटियों तक पहुंच गया। हाल के महीनों में माओवादियों पर बढ़ते दबाव और शीर्ष नेताओं के मारे जाने व मुख्यधारा में लौटने के बाद उसने भी मुख्यधारा का रास्ता चुन लिया। यहां बता दें कि कुछ दिन पहले पोलित ब्यूरो सदस्य एवं केंद्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो प्रमुख भूपति और केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश उर्फ सतीश के नेतृत्व में 271 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके एक दिन बाद कांकेर क्षेत्र में 20 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। बताया जा रहा है कि बंडी प्रकाश के आत्मसमर्पण से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी इकाई की गतिविधियों पर असर पड़ना तय है। इससे पहले भूपति की पत्नी तारक्का, उसकी भाभी सुजाता, और माओवादी नेता सुधाकर की पत्नी ककराला सुनीता भी आत्मसमर्पण कर चुकी हैं। लगातार आत्मसमर्पण की यह श्रृंखला माओवादी संगठन में तेजी से घटते मनोबल और आंतरिक असंतोष की ओर संकेत करती है। सुरक्षाबलों के ऑपरेशन से नक्सलियों में दहशत ज्ञात हो कि, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में पुलिस शहीद दिवस के अवसर पर माओवादियों से आत्मसमर्पण करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि कुछ माओवादी पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं और बाकी भी जन-जीवन में शामिल होकर देश के विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार के प्रभाव से पार्टी के प्रमुख सदस्य एक के बाद एक अपनी सेना के साथ आत्मसमर्पण कर रहे हैं। पिछले 45 वर्षों से नक्सल संगठन में थे सक्रिय बंदी प्रकाश माओवादी पार्टी में राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण संगठनकर्ता हैं। पिछले 45 वर्षों से विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे उनके आत्मसमर्पण को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका कहा जा सकता है।