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Naxal Surrender: तेलंगाना में बड़ा समर्पण, कमांडर हेमला के साथ 47 माओवादी छोड़ेंगे हथियार

जगदलपुर. नक्सल मोर्चा में तेलंगाना में हलचल नजर आ रही है. 18 वर्षीय महिला माओवादी मुडियम रामे उर्फ राजिता के आत्मसमर्पण के बाद छत्तीसगड़ कैडर के 47 और नक्सली समर्पण की तैयारी में हैं. यह हलचल भले ही तेलंगाना में हो रही है, लेकिन इसका असर बस्तर में भी पड़ेगा, क्योंकि समर्पण करने वाले तमाम नक्सली बस्तर क्षेत्र में सक्रिय थे. तेलंगाना के मुलुगु जिले से बड़ी खबर सामने आई है, जहां 18 वर्षीय मुडियम रामे उर्फ राजिता ने मुलुगु पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला लिया. मुलुगु एसपी सुधीर रामनाथ केकान ने उसे 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की. बीजापुर जिले के बसागुड़ा क्षेत्र की रहने वाली मुडियम रामे उर्फ राजिता साउथ बस्तर डिवीजनल कमेटी में पार्टी सदस्य के तौर पर सक्रिय थी. इसके साथ ही 9वीं प्लाटून में भी उसकी भूमिका बताई गई है. पुलिस की ओर से पुनर्वास योजना के तहत उसे मुख्यधारा से जोड़ने की पहल की गई. जानकारी के अनुसार, मुडियम रामे उर्फ राजिता के बाद हैदराबाद में आज बड़ी संख्या में माओवादी आत्मसमर्पण करेंगे. इनमें बटालियन नंबर-1 के कमांडर हेमला वेज्जा के साथ छत्तीसगढ़ कैडर के 47 माओवादी 34 हथियारों के साथ समर्पण करने जा रहे हैं. आत्मसमर्पण कार्यक्रम तेलंगाना डीजीपी शिवधर रेड्डी के समक्ष होगा. यह समर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है.

छत्तीसगढ़ में बड़ी सफलता: 8-8 लाख के इनामी 2 नक्सली AK-47 के साथ आत्मसमर्पण

कांकेर. छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में दो नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। सरेंड करने वाले नक्सलियों की पहचान हिड़मे और शंकर के रूप में की गई है। दोनों पर 8-8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इसकी पुष्टि एसपी निखिल राखेचा ने की है। जानकारी के अनुसार, दोनों नक्सली एके-47 जैसे घातक हथियार के साथ पुलिस के पास पहुंचे और मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई। पुलिस अधिकारियों ने आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें शासन की पुनर्वास नीति का लाभ देने की बात कही है। सरकार द्वारा निर्धारित नक्सलवाद समाप्ति की डेडलाइन के दिन ही यह आत्मसमर्पण हुआ है, जिसे सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। बताया जा रहा कि अब भी कांकेर के जंगलों में करीब 15 नक्सलियों की मौजूदगी बताई जा रही है, जिनके खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की अपील लगातार की जा रही है। आने वाले समय में और भी नक्सलियों के सरेंडर की उम्मीद है। ज्ञात हो कि, सुकमा और बीजापुर के रहने वाले 9 दुर्दांत नक्सलियों ने रविवार को आंध्र प्रदेश में सरेंडर कर दिया। इनमें 25 लाख का इनामी और 36 साल से आतंक का पर्याय बना स्टेट कमेटी मेंबर सुरेश भी शामिल है। छत्तीसगढ़ में सक्रिय घेराबंदी के कारण नक्सली अब पड़ोसी राज्यों में जाकर हथियार डाल रहे हैं। सरेंडर करने वाले 9 में से 8 नक्सली छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिले के हैं। नक्सल विचारधारा के थिंक-टैंक माने जाने वाले चेल्लुरी नारायण राव उर्फ सुरेश सचिव, एओबीएसजेडसी का सरेंडर संगठन के लिए किसी बड़ी हार से कम नहीं है। कुल 48 लाख रुपए के इनामी नक्सलियों ने हथियार छोड़े हैं। इसमें सुरेश 25 लाख के अलावा कार्तम लच्छू 5 लाख जैसे खूंखार नाम शामिल हैं। समर्पण के साथ नक्सलियों ने 1 इंसास राइफल, 5 .303 राइफल और 6 सिंगल शॉर्ट राइफल पुलिस को सौंपी। आत्मसमर्पण करने वाले कैडर्स ने पूछताछ में संगठन के भीतर मची भगदड़ और टूट के तीन मुख्य कारण बताए हैं। बड़े नेताओं की लगातार एनकाउंटर में मौत और गिरफ्तारियों से संगठन दिशाहीन हो गया है। बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सडक़ और कैंप पहुंचने से ग्रामीणों का समर्थन अब नक्सलियों को नहीं मिल रहा। विधायक की हत्या का मास्टरमाइंड था सुरेश  सुरेश का इतिहास बेहद रक्तरंजित रहा है। वह 2018 में आंध्र प्रदेश के विधायक किदारी सर्वेश्वर राव और पूर्व विधायक सिवेरी सोमेश्वर राव की जघन्य हत्या का मुख्य आरोपी था। दर्जनों एंबुश और पुलिस मुठभेड़ों में शामिल रहे। सुरेश का सरेंडर यह बताता है कि अब संगठन के पास न तो सुरक्षित ठिकाने बचे हैं और न ही लडऩे का जज्बा।

लाल आतंक को बड़ा झटका: छत्तीसगढ़ में 34 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, कुल इनाम 84 लाख

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में मंगलवार को सात महिलाओं समेत 34 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें आठ-आठ लाख रुपये के इनामी पांच प्रमुख नक्सली भी शामिल हैं। इनमें में 45 वर्षीय पांड्रू पुनेम, 25 वर्षीय रुकनी हेमला, 22 वर्षीय देवा उइका, 27 वर्षीय रामलाल पोयम और 21 वर्षीय मोटू पुनेम शामिल हैं। बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया कि इनमें से 26 नक्सलियों पर सामूहिक रूप से 84 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने कहा कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को कौशल विकास प्रशिक्षण और 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी। सात महिलाओं ने भी किया सरेंडर बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) जितेंद्र यादव ने बताया कि 7 महिलाओं सहित 34 नक्सलियों ने यहां वरिष्ठ पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के अधिकारियों के समक्ष सरेंडर किया। उन्होंने बताया कि यह नक्सली माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी, तेलंगाना राज्य कमेटी और आंध्र ओडिशा सीमा डिवीजन में सक्रिय थे। अधिकारी ने बताया कि सरेंडर करने वाले प्रमुख नक्सलियों में पांड्रू पुनेम (45), रुकनी हेमला (25), देवा उइका (22), रामलाल पोयम (27) और मोटू पुनेम (21) शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक पर आठ लाख रुपये का इनाम है।  सरकार की ओर से दी जाएंगी सुविधाएं एसपी जितेंद्र यादव ने बताया कि पुनर्वास नीति के तहत, सरेंडर करने वाले कैडरों को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से प्रदान की जाने वाली अन्य सुविधाओं जैसे कौशल विकास प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं के साथ-साथ 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को हिंसा छोड़ने के लिए आकर्षित कर रही है। एसपी जितेंद्र यादव ने कहा कि सरेंडर करने वालों नक्सलियों के परिवार भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं और समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें। दो साल में 2200 से अधिक नक्सलियों ने किया सरेंडर एसपी ने बताया कि सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर, पिछले दो सालों में दंतेवाड़ा जिले में 824 माओवादियों ने हिंसा छोड़ दी है और मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। पुलिस ने बताया कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में शीर्ष माओवादियों सहित 2200 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है। केंद्र सरकार ने मार्च, 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया है। सरेंडर करने वाले नक्सली पंडरू पूनेम उर्फ संजू (45), बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के मेटापाल एर्रापारा का रहने वाला. इनाम- 8 लाख रुपये. रूकनी हेमला (25), बासागुड़ा थाना क्षेत्र के कोरसागुड़ा मेटापारा गांव निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. देवा उईका (22), बासागुड़ा के सुकनपल्ली कुंजामपारा गांव निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. रामलाल पोयाम उर्फ रामलू (27), जांगला थाना क्षेत्र के कोतरापाल काकड़पारा निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. मोटू पुनेम उर्फ रवि (21), हिरोली सरपंचपारा निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. मीना माड़वी उर्फ जमली (26), एड़समेटा कड़ियापारा निवासी. इनामी- 5 लाख रुपये. सुदरू पुनेम (27), एड़समेटा निवासी. इनाम- 5 लाख रुपये लिंगे कुंजाम उर्फ सुमित्रा (25), दुरनदरभा कुरसमपारा निवासी, सुकमा. इनाम- 5 लाख रुपये. पाले उईका (25), मल्लेपल्ली स्कूलपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. सुखराम उरसा उर्फ गंगा (21), तुर्रेनार सरपंचपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. दिनेश करटाम उर्फ बामड़ा (30), दुरधा डोडरेपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. शंकर पोडियाम (25), परकेली स्कूलपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. सुखराम पोडियम (25), हकवा बोटेमपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये मुन्ना पोयाम (35), जप्पेली स्कूलपारा निवासी बीजापुर. इनामी- 2 लाख रुपये. सुखमती बोड्डू (39), कमकानार तेलगापारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. लक्ष्मण गोंदे उर्फ डेंगा (25), पदमुर नदीपारा निवासी, बीजापुर. इनाम 2 लाख रुपये. लक्ष्मण हेमला (31), घुमरा थना नैमेड़ जिला बीजापुर इनाम- 2 लाख रुपये अर्जुन बोड्डू (29), कमकानार तेलगापारा थाना गंगालूर जिला बीजापुर इनाम- 2 लाख रुपये. पण्डरू मड़कम उर्फ सलीम (30), कोतरापाल लक्खापारा थाना जांगला जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. राजू कुरसम उर्फ दुरूम (22) ईसुलनार स्कूलपारा थाना गंगालूर जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. सोमारू मड़कम (25) कोतरापाल काकडीपारा थाना जांगला जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. संतो पोड़ियाम ऊर्फ संतोषी (20) पोंदुम कर्रेपारा थाना भैरमगढ़ जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. हिड़मा माड़वी ऊर्फ गुडडी (20) कोतरापाल लक्खापारा थाना जांगला जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. सुखमती उरसा (26) पोमरा पटेलपारा थाना मिरतुर जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. चमरू ओयाम (46) पदमुर सरपंचपारा थाना गंगालूर जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. पण्डरू बड़दी (47), बीजापुर पायकू ओयाम (45), बीजापुर सुखराम तेलम (33), बीजापुर जग्गू पोडियम (19), बीजापुर सन्नू कुरसम (18), बीजापुर राजू हेमला (40), बीजापुर फगनू मड़कम (21), बीजापुर सुरेश कुरसम (20), बीजापुर मोती उरसा (30), बीजापुर एसपी ने की नक्सलियों से ये अपील बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने माओवादियों से अपील करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को आकर्षित कर रही है. पुनर्वास करने वालों के परिजन भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जियें और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें. उन्होंने आगे कहा कि माओवादी भ्रामक और हिंसक विचारधाराओं को त्यागकर निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें. सरकार की ‘पूना मारगेम' नीति उनके भविष्य को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वावलंबी बनाने के लिए हर संभव सुविधा प्रदान कर रही है. सीएम ने भी नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की     नक्सलियों के समर्पण पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, "पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन, बस्तर में शांति की ओर निर्णायक कदम. बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है. बीजापुर जिले में ₹84 लाख के इनामी 34 माओवादी कैडरों ने हिंसा और लाल आतंक का रास्ता छोड़कर भारतीय संविधान में आस्था जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुरूप छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर ठोस और मानवीय प्रयास कर रही है. ‘पूना मारगेम' नीति ने यह सिद्ध किया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास हिंसा से कहीं अधिक प्रभावी समाधान हैं. यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने का नहीं, बल्कि भय से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का निर्णय है.     … Read more

मध्य प्रदेश में इतिहास रचा सुनीता ने किया नक्सली सरेंडर, जानें क्यों मिली 4 लाख रुपये

बालाघाट मध्य प्रदेश में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए यह एक बहुत बड़ी सफलता है. 33 साल में पहली बार, राज्य में किसी नक्सली ने आधिकारिक तौर पर आत्मसमर्पण किया है. 31 अक्टूबर को बालाघाट में 23 साल की नक्सली सुनीता ने हॉक फोर्स (Hawk Force) के सामने हथियार डाल दिए.यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि आखिरी ऐसा सरेंडर साल 1992 में हुआ था, जब छत्तीसगढ़ राज्य, मध्य प्रदेश का ही हिस्सा था. नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ बनने के बाद से अब तक मध्य प्रदेश में एक भी नक्सली ने आत्मसमर्पण नहीं किया था. महिला नक्सली ने सुरक्षा बलों के सामने अपने आप को समर्पित कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया. इस आत्मसमर्पण के बदले उसे कुल 4 लाख 10 हजार रुपये का इनाम दिया गया है.इससे पहले बालाघाट की पांच महिला नक्सलियों ने आत्मसमर्पण तो किया था, लेकिन उनमें से किसी ने भी हथियार नहीं सौंपे थे. इस बड़ी कामयाबी को हॉक फोर्स की बड़ी सफलता माना जा रहा है. वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी X पर पोस्ट कर जानकारी दी है कि आत्मसमर्पण नीति के तहत यह पहला नक्सली सरेंडर है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बालाघाट के ग्राम चोरिया में स्थापित हो रहे नए हॉक फोर्स कैंप में 22 वर्षीय महिला नक्सली सनीला उर्फ सुनीता आयाम ने आत्मसमर्पण किया. सनीला वर्ष 2024 से नक्सल संगठन के एमएमसी जोन प्रभारी और सीसी मेंबर रामदेर की हथियारबंद गार्ड के रूप में सक्रिय थी. वह मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल थी. बताया जा रहा है कि सीसी मेंबर रामदेर पर तीनों राज्यों की ओर से मिलाकर लगभग 3 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है. ऐसे में उसकी गार्ड रही सनीला का आत्मसमर्पण नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. उसने आत्मसमर्पण के समय इंसास राइफल, तीन मैगजीन में 30 जिंदा कारतूस, एक बीजीएल और अन्य सामग्री पुलिस को सौंपी. कुल मिलाकर मिला 4 लाख का इनाम आत्मसमर्पण नीति के तहत, सुनीता को तुरंत 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई. इसके अलावा, इंसास राइफल के लिए साढ़े तीन लाख रुपये और तीन मैगजीन के लिए दस हजार रुपये का इनाम दिया गया है. इस तरह कुल मिलाकर उसे 4 लाख 10 हजार रुपये का इनाम मिला है. समाज के विकास में योगदान देना चाहती है पुलिस ने बताया कि सुनीता के पिता भी पहले छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन से जुड़े थे, जिन्होंने हाल ही में सितंबर 2025 में आत्मसमर्पण किया था. पूछताछ के दौरान सुनीता ने बताया कि वह राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहती थी. उसने यह भी कहा कि जंगलों में हिंसा और भय का जीवन छोड़कर अब वह समाज के विकास में योगदान देना चाहती है. इसके साथ ही सुनीता का कहना है कि वह अपने पिछले कल में लौटना नहीं चाहती न हीं उसे दोहराना. और भी नक्सली कर सकते हैं आत्मसमर्पण हॉक फोर्स के डीएसपी अखिलेश गौर ने महिला नक्सली से पूछताछ की जिसमें उसने बताया कि उसने कुछ हथियार जंगल में छिपा रखे हैं. इसके बाद सेनानी शियाज के नेतृत्व में सहायक सेनानी अखिलेश गौर और रूपेंद्र धुर्वे की टीम ने गोपनीय सर्च ऑपरेशन चलाकर जंगल से छिपाए गए हथियार बरामद कर लिए. इस प्रकार यह आत्मसमर्पण अभियान पूर्णतः सफल रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि सुनीता के सरेंडर के बाद बालाघाट क्षेत्र में सक्रिय अन्य नक्सली भी आने वाले दिनों में आत्मसमर्पण कर सकते हैं. इस सफलता के बाद पुलिस महानिरीक्षक संजय सिंह और पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने हॉक फोर्स की सराहना की और टीम को इनाम देने की घोषणा की. सीएम मोहन यादव ने किया एक्स पर पोस्ट इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस आत्मसमर्पण की प्रशंसा की. उन्होंने लिखा- प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के तहत पहला नक्सली सरेंडर है. यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य नक्सल नियंत्रण के लक्ष्य की ओर अग्रसर है. मध्य प्रदेश पुलिस को नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण में लगातार सफलता मिल रही है. 1 नवंबर को बालाघाट जिले के लांजी थाने अंतर्गत चोरिया कैंप में 14 लाख की इनामी महिला नक्सली सुनीता ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया. यह प्रदेश की प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के तहत पहला समर्पण है. पूर्व में भी नक्सलियों के समर्पण और मुठभेड़ों में पुलिस को सफलता मिलती रही है. साल 2022 में जुड़ी थी माओवादी संगठनों से हॉक फोर्स के डीएसपी अखिलेश गौर ने बताया कि सशस्त्र हार्डकोर की 22 वर्षीय महिला नक्सली छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गोमवेटा भैरमगढ की रहने वाली है. उसका नाम सलीना उर्फ सुनीता पिता बिसरु ओयाम है. यह महिला नक्सली एसीएम के पद पर रहते हुए सेंट्रल कमेटी के प्रमुख सदस्य सीसीएम रामदेर नक्सली की सुरक्षा गार्ड रह चुकी है. जो वर्ष 2022 में माओवादी संगठनों से जुड़ी थी, जिसने माड़ क्षेत्र में 06 महीने का प्रशिक्षण लिया और फिर सेंट्रल कमेटी के सदस्य रामदेर के सुरक्षा गार्ड के रूप में माड़ क्षेत्र में काम करना शुरू किया. ऐसे पहुंची आत्मसमर्पण के लिए सुनीता सुनीता, रामदेर की 11 सदस्यी टीम के साथ एमएमसी जोन दर्रेकसा क्षेत्र पहुंची जहां जीआरबी डिवीजन में सक्रिय थी और मलाजखंड दर्रेकसा दल में एसीएम के पद पर थी, जिस पर कुल 14 लाख का ईनाम घोषित था. सुनीता इंसास राइफल, विंडोरी बैग, पिट्ठू बैग और वर्दी के साथ दलम से अलग होकर निकल गई. इसके बाद उसने जंगल में इंसास राइफल, विंडोरी बैग, पिट्ठू बैग और वर्दी को डंप में छिपाया, फिर आत्मसमर्पण करने के उद्देश्य से पुलिस कैंप चौरिया पहुंची.

नक्सलियों का आत्मसमर्पण अभियान तेज: बीजापुर में 51 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

बीजापुर बीजापुर जिले में एक बार फिर नक्सलियों को बड़ा झटका लगा है। बुधवार को शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और पूना मारगेम  पुनर्वास से पुनर्जीवन योजना के तहत  51 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में नौ महिलाएं और 42 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल 66 लाख का इनाम घोषित था। सभी ने हिंसा का मार्ग त्यागकर लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त की और सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया। वर्ष 2025 में अब तक बीजापुर जिले में 461 माओवादी मुख्यधारा में शामिल हुए हैं, 138 माओवादी मारे गए और 485 गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मुख्यधारा में लौटे सभी 51 माओवादियों को राज्य शासन की ओर से 50,000 की पुनर्वास प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। राज्य शासन की पूना मारगेम  पुनर्वास से पुनर्जीवन नीति ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की मजबूत नींव रखी है।  प्रशासन, सुरक्षा बल, सामाजिक संगठन और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में बदला जा रहा है। इस अभियान में डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, एसटीएफ, केरिपु-85, केरिपु-199 तथा कोबरा-210 और 201 बटालियन की टीमों का विशेष योगदान रहा। 'माओवादियों को आकर्षित कर रहीं योजननाएं' बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा राज्य शासन की पुनर्वास नीति माओवादियों को आकर्षित कर रही हैं। मुख्यधारा में प्रवेश करने वाले माओवादियों के परिजन भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। एसपी ने माओवादियों से अपील की है कि वे भ्रामक विचारधाराओं को त्यागें और निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटे, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास स्थापित हो सके।

भूपेश बघेल की नक्सलियों की सराहना पर डिप्टी CM अरुण साव का कटाक्ष, पूछा- पार्टी का या निजी मत?

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सलियों के समर्पण करने पर सरकार की तारीफ की है. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें स्पष्ट करना चाहिए, यह पार्टी का स्टैंड है, या उनका निजी मत? उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि (बस्तर में नक्सलियों का) ऐतिहासिक आत्मसमर्पण हुआ है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तारीफ की है, इसके लिए धन्यवाद. लेकिन उन्हें स्पष्ट करना चाहिए, यह पार्टी का स्टैंड है या उनका निजी मत है? उनके प्रदेश अध्यक्ष कुछ और बात कर रहे हैं. अरुण साव ने कहा कि सरगुजा भी नक्सलवाद से प्रभावित था, जिसे हमने ही नक्सल मुक्त किया. 2018 तक नक्सलवाद थोड़े से हिस्से में ही था, लेकिन कांग्रेस के कार्यकाल में नक्सलवाद पला बढ़ा. अब अबूझमाड़ जैसे इलाकों से भी नक्सलवाद का खात्मा हो रहा है. प्रधानमंत्री के संकल्प और गृह मंत्री अमित शाह के प्रयास से प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाएंगे. धनतेरस पर खरीदें स्वदेशी सामग्री उप मुख्यमंत्री ने धनतेरस के अवसर पर प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीएसटी बचत उत्सव की शुरुआत के बाद से ही बाजारों में रौनक लौटी है. 350 से अधिक वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है. मैं लोगों से आग्रह करता हूं कि वे स्वदेशी सामग्री ही खरीदें ताकि स्थानीय व्यापारियों की दिवाली भी रोशन हो सके. पीएम मोदी करेंगे राज्योत्सव का शुभारंभ छत्तीसगढ़ राज्योत्सव को लेकर अरुण साव ने कहा कि राज्योत्सव की तैयारियां जारी है. इस बार रजत जयंती वर्ष मनाया जाएगा. राज्य स्तर पर 5 दिन तक और जिला स्तर पर 3 दिन का आयोजन होगा. शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. विधानसभा के नए भवन का लोकार्पण भी होगा. स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच अरुण साव ने कहा कि आज मुख्यमंत्री के साथ बैठक है, जिसमें राज्योत्सव की विस्तृत रूपरेखा और कार्ययोजना तय की जाएगी. इस बार स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिलेगा. कार्यक्रमों में उन्हें पर्याप्त स्थान और सम्मान दिया जाएगा.