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सरेंडर्ड नक्सलियों को मिली फूड ट्रेनिंग, बस्तर में चलेंगे कैफे; CM साय ने पहले दिन किया फूड ऑर्डर

बस्तर  नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पुनर्वास और मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में आज बस्तर एक नया इतिहास रचा है। पुलिस लाइन स्थित त्रिवेणी परिसर के सामने पंडुम कैफे अपनी तरह का पहला ऐसा कैफेटेरिया होगा, जहां नक्सल पीड़ित परिवारों और समर्पित नक्सलियों को रोजगार देते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।इस संवेदनशील पहल का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने किया। पंडुम कैफे का संचालन दुर्ग की प्रसिद्ध नुक्कड़ संस्था करेगी, जो वर्षों से मूक-बधिर और दिव्यांग बच्चों की देखरेख और सामाजिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में पंडुम कैफे की शुरुआत की गई है जिसका संचालन सरेंडर्ड नक्सली और नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार के लोग करेंगे। इसके लिए बकायदा उन्हें खाना बनाने, सर्व करने, ऑर्डर लेने की ट्रेनिंग दी गई। शुरुआत में 13 लोग मिलकर इस कैफे को चलाएंगे।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में बने इस कैफे का उद्घाटन किया। इस दौरान सीएम ने खुद फूड ऑर्डर किया। सरेंडर किए नक्सलियों ने CM को फूड परोसा। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने डिजिटल रूप से बिल भी पेय किया। पुलिस लाइन परिसर में बना पंडुम कैफे दरअसल, सरकार की पुनर्वास नीति के तहत बस्तर पुलिस और प्रशासन के सहयोग से जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में पंडुम कैफे बनाया गया है। इसके स्ट्रक्चर निर्माण के लिए शासन-प्रशासन ने पैसे खर्च किए हैं। नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार और हथियार छोड़कर मुख्य धारा में लौटे नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से इस कैफे का शुभारंभ किया गया है। अभी कुल 13 लोगों को कैफे की चाबी थमाई गई है। 13 लोगों को मिला रोजगार कैफे के माध्यम से कुल 13 लोगों को रोजगार मिला है। जिसमें 8 नक्सल हिंसा पीड़ित हैं, 5 लोग सरेंडर नक्सली हैं। इनमें 8 महिलाएं भी शामिल हैं। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तैयार किया गया यह कैफे नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्म समर्पित माओवादी कैडरों के लिए आजीविका प्रदान करने वाला एक मॉडल है। पहले दी ट्रेनिंग, फिर काम में लगाया इन 13 लोगों को पहले जगदलपुर में ही ट्रेनिंग दी गई। इन्हें अलग-अलग तरह के फूड्स को बनाने से लेकर परोसने तक के गुर सिखाए गए। साथ ही कस्टमर से कैसे बर्ताव करना है, कैसे ऑर्डर लेना है इसके बारे में भी बताया गया। करीब 1 महीने से ज्यादा इन्हें ट्रेनिंग दी गई। जब ये इसमें माहिर हुए तो 13 लोगों को कैफे की चाबी थमा दी गई। पर्यटकों को बस्तर दिखाने हो रहे तैयार सरकार के पुनर्वास नीति के तहत बस्तर के पूर्व नक्सलियों को अलग-अलग काम में पारंगत बनाया जा रहा है। पुनर्वास केन्द्रों में उनके जीवन को बदलने की पहल हो रही है। आड़ावाल के केन्द्र में करीब 30 सरेंडर नक्सली होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रहे हैं साथ ही कई अन्य पूर्व नक्सलियों को टूरिस्ट गाइड बनाने की भी तैयारी हो रही है। CM बोले- बस्तर के लिए नया अध्याय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पंडुम कैफे को स्पष्ट सामाजिक और विकासात्मक उद्देश्यों के साथ स्थापित किया गया है। ये बस्तर के लिए एक नया अध्याय है। पंडुम कैफे की यह पहल राज्य की शांति, विकास और मानव-केंद्रित पुनर्वास के प्रति प्रतिबद्धता को दृढ़ता से रेखांकित करती है। IG बोले- अलग-अलग स्किल्स की ट्रेनिंग दी गई बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा कि, जो कभी संघर्ष, हिंसा या माओवादी गतिविधियों से प्रभावित हुए थे उनको हॉस्पिटैलिटी, कैफे संचालन, स्वच्छता मानक, खाद्य सुरक्षा, ग्राहक सेवा और उद्यमिता में प्रशिक्षित किया गया है। यह उन्हें दीर्घकालिक करियर और आत्मनिर्भरता के लिए तैयार करता है। उन्होंने कहा कि, पंडुम नाम बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों से प्रेरित है। ये टैग लाइन 'Where every cup tells a story' क्षेत्र की दृढ़ता, उपचार और आशा की भावना को दर्शाती है। ये शांति निर्माण का स्केलेबल मॉडल है।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारा गया हिडमा, छत्तीसगढ़-आंध्र सीमा पर नक्सलियों के साथ हिंसक मुठभेड़

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों का नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी है, जगदलपुर जिले में छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश की सीमा पर बड़ी मुठभेड़ हुई है, जहां आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम जिले के जंगलों में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में कई नक्सलियों को ढेर किया है. हालांकि अभी तक यह क्लीयर नहीं हुआ है कि मरने वाले नक्सलियों की संख्या कितनी है, लेकिन जवान इलाके में लगातार चल रहे सर्च अभियान चला रहे हैं. सुरक्षाबलों के जवानों ने इलाके को चारों तरफ से घेर के रखा हुआ है, ऐसे में यहां तेजी से कार्रवाई की जा रही है. हिड़मा के अलावा 5 अन्य नक्सलियों को भी सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। सुकमा से सटे आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीताराम जिले के पास सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही थी। कई घंटों की फायरिंग के बाद एनकाउंटर में 6 नक्सली ढेर कर दिए गए हैं। नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच फायरिंग अभी भी जारी है। पुलिस ने दी जानकारी पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह एनकाउंटर आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर हुआ है। पुलिस को इन जंगलों में कई नक्सलियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। मुखबिरी के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। आज सुबह से ही सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच फायरिंग चल रही है। इस दौरान पुलिस ने सुकमा में भी 1 नक्सली को मार गिराया है। वहीं, आंध्र प्रदेश में हिड़मा समेत 6 नक्सलियों का एनकाउंटर किया गया है। अल्लुरी सीताराम जिले के एसपी अमित बरदार के अनुसार,     आज सुबह 6:30-7 बजे के करीब मारेडुमिल्ली मंडल के जंगल में एनकाउंटर शुरू हुआ था। अब तक 6 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना मिली है। यह पुलिस और सुरक्षाबलों के द्वारा चलाया गया साझा ऑपरेशन है। हिड़मा की पत्नी भी ढेर बता दें कि माड़वी हिड़मा को सबसे खूंखार नक्सलियों में गिना जाता है। हिड़मा आम नागरिकों समेत सुरक्षाबलों पर हुए 26 नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है, जिसमें कई लोगों की जान भी गई है। हिड़मा पर पुलिस ने 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। हिड़मा के अलावा उसकी पत्नी राजे की भी एनकाउंटर में मौत हो गई है। सुकमा जिले में सुबह हुई मुठभेड़  बताया जा रहा है कि 18 नवंबर की सुबह-सुबह सुकमा जिले से लगे आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम जिले की सीमा पर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई. दोनों तरफ से काफी देर तक जोरदार फायरिंग होती रही, जिसके बाद माना जा रहा है कि यहां 6 के आसपास नक्सली ढेर हुए हैं. पुलिस को इस बात की जानकारी मिली थी कि एर्राबोर के जंगल में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने डेरा डाला है, जिसके बाद रात में ही डीआरजी के जवानों ने मौके पर मोर्चा संभाला और सुबह होते ही नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई.  जैसे ही नक्सलियों ने जवानों को देखा तो तुरंत ही फायरिंग शुरू कर दी, ऐसे में जवानों ने भी बदले में फायरिंग की और जंगल को चारों तरफ से घेरकर मोर्चा संभाल लिया, बताया जा रहा है कि यहां कई बड़े कैडर के नक्सली होने की पूरी संभावना है. हालांकि सर्च ऑपरेशन के बाद ही इन बातों की पूरी जानकारी सामने आ पाएगी, फिलहाल फोर्स का यहां ऑपरेशन जारी है.  बीजापुर में मारे गए थे 6 नक्सली  बता दें कि इससे पहले बीजापुर में जिले में भी सुरक्षाबलों ने 6 नक्सलियों को ढेर किया था, जिसमें नक्सली बच्नन्वा भी शामिल था. पुलिस और सुरक्षाबलों के साथ-साथ डीआरजी के जवानों की तरफ से नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. जहां अब तक कई नक्सलियों को ढेर किया गया है.   कौन था माड़वी हिड़मा? हिड़मा का जन्म 1981 को सुकमा जिले में हुआ था। पीपुल्स लिब्रेशन की गुरिल्ला बटालियन का नेतृत्व करने के बाद वो सीपीआई-माओवादी की केंद्रीय कमेटी का सदस्य बन गया था। हिड़मा बस्तर इलाके से इस कमेटी का अकेला सदस्य था। झीरम घाटी हमले के बाद हिड़मा का नाम पहली बार चर्चा में आया था। इसके बाद हिड़मा ने लगातार कई नक्सली हमलों को अंजाम दिया और दशकों तक उसके नाम की दहशत पूरे इलाके में देखने को मिलती थी।  

सुरक्षा बलों का अभियान तेज, नक्सलियों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं के साथ पहली प्राथमिकता सरेंडर

मंडला  नक्सलियों को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक और सख्त अभियान शुरू किया गया है. मार्च 2026 तक नक्सल समस्या पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए कई आकर्षक योजनाओं की घोषणाएं भी की हैं. मंडला जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है. नक्सलवाद खत्म करने का रोडमैप तैयार एसपी रजत सकलेचा ने बताया "नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का रोडमैप तैयार है. इसके तहत पुलिस और सुरक्षा बल लगातार जंगल के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इस बार अभियान में सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की ताकत भी जुड़ गई है." राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 20 हज़ार से लेकर 4 लाख 50 हज़ार रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आर्थिक मदद एसपी रजत सकलेचा ने बताया "सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जमीन खरीदने के लिए 20 लाख रुपए तक की मदद दी जाएगी. प्रोत्साहन राशि के रूप में न्यूनतम 5 लाख रुपए, नए जीवन की शुरुआत के लिए 1 लाख 50 हज़ार रुपए,और विवाह करने पर 50 हज़ार रुपए की विशेष सहायता राशि प्रदान की जाएगी. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को फ्री खाद्यान्न भी दिया जाएगा ताकि वे समाज की मुख्यधारा में दोबारा जुड़ सकें. राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है." अन्य नक्सलियों की जानकारी देने पर सरकारी जमीन मिलेगी अगर कोई नक्सली पुलिस को दूसरे नक्सली के आत्मसमर्पण या मूवमेंट की जानकारी देता है, तो उसे सरकारी नौकरी देने पर भी विचार किया जा सकता है. हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें. मार्च 2026 तक मंडला को नक्सल मुक्त बनाने का हमारा लक्ष्य है. इस योजना की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने मीडिया, सोशल मीडिया और स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से व्यापक प्रचार अभियान शुरू कर दिया है. सरकार की योजनाएं नक्सलियों तक पहंचाने की अपील सरकार का उद्देश्य साफ है कि जंगलों में छिपे हर नक्सली तक यह संदेश पहुंचे कि अब सरकार सज़ा नहीं, सुधार का मौका दे रही है. मंडला पुलिस और प्रशासन का मानना है कि अगर यह अभियान सफल रहा तो न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश में शांति और विकास की राह और मजबूत होगी.  

नक्सल विरोधी अभियान में सफलता, पुलिस ने जंगलों से मिला विस्फोटकों का बड़ा जखीरा

गरियाबंद नक्सलवाद के खिलाफ पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने 3 अलग-अलग जंगल क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखी गई विस्फोटक सामग्री का बड़ा जखीरा बरामद किया है. जानकारी के अनुसार, शोभा और जुगाड़ थाना क्षेत्र के जंगलों में पुलिस टीम को सायबिनकछार, कोदोमाली और भूतबेड़ा के जंगलों में छिपाई गई नक्सली सामग्री मिली. बरामद सामान में 4 नग कुकर बम, इलेक्ट्रिक वायर, फटाका एवं राशन सामग्री शामिल है. पुलिस का मानना है कि यह सामान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से जंगलों में डंप किया था. समय रहते बरामदगी होने से बड़ी वारदात टल गई. एसपी निखिल राखेचा ने पूरे मामले की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि नक्सलियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और सुरक्षा बलों की सर्चिंग अभियान आगे भी जारी रहेगा.

नक्सलवाद पर उपमुख्यमंत्री शर्मा बड़ा बयान: आत्मसमर्पण स्वागत योग्य, अभियान नहीं रुकेगा

जगदलपुर बस्तर संभाग प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों का सरकार लाल कालिन पर मुख्यधारा में स्वागत कर रही है. लेकिन जो नक्सली नहीं आएंगे, उनके खिलाफ आर्म्ड फोर्सेज कार्रवाई करेंगे. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि एक मिनट के लिए भी किसी को भी विश्राम करने का समय नहीं है. नक्सलियों के खिलाफ फिर से ऑपरेशन लॉन्च किए जाएंगे. जवानों के भुजाओं की ताकत के आधार पर ही निर्णय हो रहा है. बता दें कि उप मुख्यमंत्री शर्मा बीजापुर और सुकमा के दौरे पर पहुंचे थे. जहां उन्होंने आत्म समर्पण करने वाले माओवादियों से मुलाकात की. साथ ही शासन द्वारा किए जा रहे पुनर्वास करने वाले माओवादियों के लिए रोजगारमुखी कार्यों को भी देखा. इस दौरान जगदलपुर में मीडिया से चर्चा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने उक्त बयान दिया.

सरकार की बड़ी सफलता: 208 नक्सलियों ने BGL लॉन्चर, AK-47, 153 हथियार समेत किया सरेंडर

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर आज नक्सलियों ने सबसे बड़ी संख्या में हथियार डालकर सरेंडर किया है. बस्तर संभाग के अबूझमाड़ और कांकेर के जंगलों से निकलकर कुल 208 नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया है. इनमें 110 महिला नक्सली है और 98 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जो सीसी मेंबर के साथ दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी जन जनमिलिसिया कमेटी के अलावा अन्य कैडर पर पदस्थ रहे हैं. नक्सली प्रवक्ता रूपेश के साथ-साथ अन्य सभी माओवादियों ने जगदलपुर पुलिस लाइन में मुख्यमंत्री साय के समक्ष हथियार डाले हैं. नक्सलियों ने डाले कुल 153 हथियार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा, बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी समते पुलिस प्रशासन के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में नक्सलियों ने 9 प्रकार के 153 हथियार डालकर सरेंडर किया. इनमें 19 AK 47, 17 SLR राइफल, 23 INSAS राइफल, एक INSAS LMG, 36 नग 303 राइफल, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 नग 12 बोर/ सिंगल शॉट और 1 पिस्टल शामिल हैं. मुख्यधारा से जुड़ने वाले नक्सलियों को अच्छी पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ : CM साय देश के सबसे बड़े नक्सली को लेकर रायपुर से रवाना होने के दौरान सीएम साय ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने वाले नक्सलियों का स्वागत है. उन्हें हमारी (राज्य सरकार) अच्छी पुनर्वास नीति का लाभ मिलेगा. हमने शुरू से ही हथियार छोड़ने का नक्सलियों से आह्वान किया था. खाली हो जाएगा माड़ डिविजन भैरगगढ़ से सरेंडर होने वाले नक्सलियों में नक्सली प्रवक्ता रूपेश के अलावा 1 सेंट्रल कमेटी मेंबर (सीसीएम), 2 दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर (डीकेएसजेडसी), 15 डिविजनल कमेटी मेंबर (डीवीसीएम), एक माड़ एसीएम और 121 अन्य कैडर के माओवादी शामिल हैं. इसी के साथ अधिकतम अबूझमाड़ नक्सल मुक्त होगा और उत्तर बस्तर से लाल आतंक समाप्त हो जाएगा। इसके बाद दक्षिण बस्तर में नक्सलवाद का सूपड़ा साफ होना रह गया है. इन 7 कैडरों के नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण 1) CCM 01 कैडर 2) DKSZC 04 कैडर 3) रीजनल कमेटी मेंबर 01 कैडर 4) DVCM 21 कैडर 5) ACM लेवल 61 कैडर 6) पार्टी मेंबर 98 कैडर 7) PLGA मेंबर/ RPC मेंबर/ अन्य 22.  

IG का दावा: कांकेर-सुकमा समेत बस्तर में 1,800 से ज्यादा नक्सलियों ने छोड़ा हथियार

रायपुर   बीते 24 घंटे में नक्सल सरेंडर के सारे रिकॉर्ड टूट गए। महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ तक 138 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया। सरेंडर करने वालों में सबसे बड़ा नाम नक्सलियों के पोलित ब्यूरो मेंबर भूपति उर्फ सोनू दादा का है। सोनू ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के के सामने सरेंडर किया। उसके सरेंडर की खबर एक दिन पहले मंगलवार को ही सामने आ गई थी। नक्सल प्रभावित इलाकों से एक बड़ी खबर आई है. बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि बीते 20 महीनों में कुल 1,876 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण (सरेन्डर) किया है. इनमें कई कुख्यात नक्सली शामिल हैं, जिन पर लाखों रुपए के इनाम थे. नक्सल विरोधी अभियान में लगातार सफलता के बीच शनिवार को कांकेर और सुकमा जिलों में एक बार फिर 127 माओवादियों ने हथियार डाल दिए. इनमें कांकेर जिले में 100 और सुकमा में 27 नक्सली शामिल हैं. यह सभी नक्सली अलग-अलग संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय थे और वर्षों से पुलिस व सुरक्षा बलों की नजर में थे. बड़े कमांडर कर रहे सरेंडर  छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के बड़े कमांडरों ने सरेंडर करना शुरू कर दिया है.चर्चा है कि बड़े कमांडर रुपेश और रनिता भी सरेंडर कर सकते हैं, बताया जा रहा है कि उनकी छत्तीसगढ़ के पुलिस अधिकारियों से बातचीत आखिरी दौर में पहुंच गई है. अगर ऐसा होता है तो यह नक्सल संगठनों के लिए बड़ा झटका माना जाएगा, क्योंकि यह दोनों माओवादी बडे़ नेता माने जाते हैं. इससे पहले माओवादी रणनीतिकार मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ ​​सोनू या भूपति ने हथियार डाल दिए हैं. उसने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में समर्पण कर दिया था, जबकि सुकमा और कांकेर जिले में भी नक्सलियों ने कल छत्तीसगढ़ में सरेंडर किया था.  आईजी सुंदरराज ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को बसों के जरिए BSF कैंप तक लाया गया, जहां उन्होंने अपने हथियार सुरक्षा बलों को सौंपे. इसके बाद सभी से नियमों के मुताबिक पूछताछ की गई और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की गई है. उन्होंने कहा कि यह सरेंडर सिर्फ आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह साबित करता है कि सरकार की विकास और विश्वास की नीति जमीनी स्तर पर असर दिखा रही है. पहले जहां नक्सली खौफ और हथियार के सहारे शासन चलाने की कोशिश करते थे, वहीं अब गांवों में सड़कें, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र खुलने लगे हैं जिसकी वजह से लोग मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. बस्तर में अब डर नहीं, भरोसा बढ़ा है आईजी सुंदरराज पी. ने आगे कहा कि बस्तर में अब डर नहीं, भरोसा बढ़ा है. जो कभी जंगल के रास्तों में बंदूक लेकर घूमते थे, वे अब अपने बच्चों के भविष्य की बात कर रहे हैं. ये बदलाव आसान नहीं था, लेकिन सुरक्षा बलों, प्रशासन और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से यह संभव हुआ. बिखर रहा नक्सलवाद  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद बिखरना शुरू हो गया है. कांकेर जिले में जिन 100 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, उनमें टॉप कमांडर राजू सलाम, कमांडर प्रसाद और मीना ने भी हथियार डाले हैं, जो नक्सल संगठनों के लिए सबसे ज्यादा आगे रहते थे. राजू सलाम डिवीजनल कमेटी मेंबर था और वह 5 नंबर का कमांडर था, जो कई बड़ी घटनाओं में भी शामिल रहा है, बताया जाता है कि पिछले 20 सालों के दौरान जो बड़ी नक्सली घटनाएं हुई थी, उसमें कही न कही राजू सलाम का हाथ था. इसी तरह कमांडर प्रसाद और मीना भी नक्सल संगठनों में बड़े नाम थे, जो नक्सल संगठन के लिए कई चीजें उपलब्ध कराते थे.   कई महिला नक्सली भी शामिल आत्मसमर्पण करने वालों में कई महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो वर्षों से भूमिगत थीं. कुछ पर 5 लाख से 10 लाख रुपए तक के इनाम भी घोषित थे. पुलिस ने इन्हें सामाजिक पुनर्वास योजना के तहत लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.कांकेर में 100 और सुकमा में 27 नक्सली सरेंडर करने वालों में कई वारदातों में शामिल रहे हैं इनमें पुलिस कैंप पर हमले, सड़क निर्माण में बाधा और ग्रामीणों को डराने जैसे अपराध शामिल हैं.बस्तर पुलिस का कहना है कि अभी भी कई इलाके ऐसे हैं जहां नक्सली सक्रिय हैं, लेकिन अब उनका जनाधार तेजी से कमजोर हो रहा है. पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने नक्सल इलाकों में लगातार सफल सर्च ऑपरेशन चलाए हैं, जिससे संगठन का नेटवर्क कमजोर पड़ा है. जानकारी के मुताबिक, राजू सलाम डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) कंपनी नंबर 5 का कमांडर था। वह रावघाट एरिया में सक्रिय था। राजू सलाम कांकेर में पिछले 20 साल में घटी सभी बड़ी घटनाओं का मास्टरमाइंड रहा है। इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने से इलाके में नक्सलवाद के खात्मे की उम्मीदें बढ़ गई हैं। फिलहाल, कांकेर पुलिस आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों की पहचान करने में जुटी हुई है। संभावना है कि इन्हें जल्द ही जिला मुख्यालय या संभागीय मुख्यालय में मीडिया के सामने पेश किया जाएगा। इसके अलावा एक दिन पहले ही 6 करोड़ के इनामी और पोलित ब्यूरो सदस्य भूपति ने 60 साथियों के साथ महाराष्ट्र में सरेंडर किया था। सुकमा में भी 50 लाख के इनामी 27 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इनमें 10 महिलाएं और 17 पुरुष शामिल हैं। कोंडागांव जिले में 5 लाख की इनामी महिला नक्सली गीता उर्फ कमली सलाम (40) ने भी हथियार छोड़ दिए हैं। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि पिछले 20 महीनों में अब तक 1,876 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। समाज की मुख्यधारा से जुड़ कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ ले रहे हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में और भी माओवादी इस सकारात्मक रास्ते को अपनाएंगे। 20 महीने में 1876 का सरेंडर  बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने नक्सलियों के सरेंडर को लेकर बड़ी जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि 20 महीने में अब तक 1876 नक्सलियों ने हथियार डाले हैं और सभी पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. जबकि आने वाले दिनों में भी और नक्सलियों का सरेंडर हो सकता है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि माओवादी अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं.  2026 तक नक्सलवाद खात्में का प्लान  दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद खात्में को लेकर डेडलाइन … Read more

झारखंड: गुमला में सुरक्षाबलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़, जेजेएमपी के 3 मारे गए

रांची  झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का अभियान जारी है. केंद्र सरकार ने नक्सवाद के खात्मे का ऐलान किया है. राज्य के गुमला जिले में स्थानीय पुलिस और जेजेएमपी (JJMP) के नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हुई. इस एनकाउंटर में तीन नक्सली ढेर कर दिए गए हैं. मुठभेड़ आज सुबह जिले के बिशनपुर थाना क्षेत्र के केचकी जंगल में हुई. मारे गए नक्सलियों की पहचान लोहरदगा के सेनहा के रहने वाले लालू लोहरा व सुजीत उरांव और लातेहार के होशिर का रहने वाला छोटू उरांव के रूप में हुई है.  सर्च अभियान के दौरान उग्रवादियों ने की फायरिंग पुलिस सूत्रों ने बताया कि गुमला एसपी हरिश बिन जमा को सूचना मिली थी कि जेजेएमपी संगठन के कुछ नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए बिशनपुर इलाके में जमा हुए हैं. सूचना के बाद झारखंड जगुआर और गुमला जिला बल की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया. गठित टीम ने इलाके में सर्च अभियान चलाया. इसी दौरान पुलिस की टीम जैसे ही केचकी जंगल में पहुंची, नक्सलियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिसमें तीन नक्सली मारे गये और एक को गिरफ्तार कर लिया गया. 5 लाख इनामी दो नक्सल ढेर इस मुठभेड़ में पुलिस ने 5 लाख रुपये के दो इनामी उग्रवादी सहित तीन उग्रवादियों को ढेर किया है. जेजेएमपी सुप्रीमो ब्रजेश यादव मौके से भाग निकला. पुलिस ब्रजेश की घेराबंदी में लगी हुई है. मारे गए तीनों प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन जेजेएमपी के इनामी कमांडर लालू लोहरा और छोटू उरांव है. जबकि तीसरे उग्रवादी की पहचान नहीं हुई है. इन लोगों क पास से घातक हथियार सहित कई चीजें समान बरामद हुआ है. गुप्त सूचना पर पहुंची सुरक्षा बल इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार गुमला पुलिस अधीक्षक को गुप्त सूचना मिली थी कि बिशुनपुर प्रखंड के जंगली इलाका केचकी जंगल में जेजेएमपी के उग्रवादी कैंप लगाकर बैठे हुए हैं. ये लोग किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में हैं. इस सूचना पर पुलिस की एक टीम गठित कर जंगल की घेराबंदी की गयी. सुरक्षा बलों को देखते ही उग्रवादियों ने क्यूआरटी टीम पर फायरिंग कर दी. इसी दौरान जवाबी कार्रवाई में तीन उग्रवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया. उग्रवादियों के पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद  गुमला एसपी हरिश बिन जमा ने कहा कि दोनों ओर से हुई मुठभेड़ में तीन नक्सली मारे गए हैं. इनके पास से एक-एक-56 राइफल, एक एसएलआर और एक इंसास राइफल बरामद हुए हैं. सुरक्षा बलों द्वारा जंगल में सर्च अभियान चलाया जा रहा है. यह अभियान आगे भी जारी रहेगा.

अपने ही गढ़ में डर से जी रहे माओवादी, जानिए वो 5 बड़े कारण जिन्होंने तोड़ दिया नक्सलियों का हौसला

रायपुर  छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था लेकिन अब यहां फोर्स की गतिविधियां बढ़ गई हैं। फोर्स नक्सलियों के उन ठिकानों में पहुंच गई है जिसे सबसे सुरक्षित माना जाता था। जिसके बाद माओवादी संगठन बैकफुट पर हैं।  नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी ने सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार डालने को लेकर लेटर लिखा है। यह लेटर CPI (माओवादी) के द्वारा जारी किया गया है। जो लेटर सामने आया है उस लेटर के सत्यता की जांच की जा रही है। आइए जानते हैं वो पांच कारण जिस कारण से नक्सलियों ने हथियार छोड़ने का फैसला किया है। ताबड़तोड़ एनकाउंटर से टूटी कमर छत्तीसगढ़ में बीते डेढ़ सालों में सुरक्षाबल के जवानों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। सुरक्षाबल के जवानों बस्तर और नक्सल प्रभावित जिलों में लगातार एनकाउंटर कर रहे हैं। एनकाउंटर के कारण नक्सलियों की रीढ़ टूट गई है। सुरक्षाबल के जवान केवल बस्तर ही नहीं उस सभी जिलों में कार्रवाई कर रहे हैं जहां नक्सली गतिविधियों की जानकारी मिल रही हैं। छत्तीसगढ़ में इस साल अलग-अलग मुठभेड़ों में 244 नक्सली मारे जा चुके हैं। इनमें से 215 नक्सली बस्तर संभाग में मारे गए। जबकि 27 गरियाबंद जिले में मारे गए। इसके अलावा दुर्ग संभाग के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में दो नक्सली मारे गए हैं। आपूर्ति को किया प्रभावित छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों के उन ठिकानों पर भी धावा बोला जो उनके लिए सुरक्षित माने जाते हैं। सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों की आपूर्ति को प्रभावित किया है। जिस कारण से नक्सली संगठनों तक हथियार और राशन नहीं पहुंच पा रहा है। सुरक्षाबलों ने माओवादियों द्वारा छिपाए गए भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किया है। हथियारों की बरामदगी माओवादियों के खिलाफ बड़ा झटका मानी जा रही है। जवानों ने माओवादियों द्वारा छिपाए गए हथियारों, विस्फोटक सामग्री और रसद के बड़े डंप का पता लगाकर उन्हें जब्त किया है। जवानों ने नक्सलियों के ठिकानों से बीजीएल लांचर, मजल लोडिंग बंदूक, बीजीएल सेल, बैरल पाइप, बैटरी, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, डायरेक्शनल माइंस, पिठ्ठू बैग, बीजीएल पोच, माओवादी वर्दी, केरिपु पैटर्न की कॉम्बैट ड्रेस, बेल्ट, बेडशीट, माओवादी साहित्य, पटाखे और राशन सामग्री बरामद की है। नियद नेल्लानार योजना का प्रभाव छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ जहां सुरक्षाबल के जवान नक्सलियों के साथ सीधे तौर पर मुकाबला कर रहे हैं वहीं, सरकार भी रणनीति तौर पर बड़ी तैयारी कर रही है। नक्सल प्रभावित गांवों में विकास पहुंचाने के लिए सरकार ने नियद नेल्लानार योजना की शुरुआत की है। इस योजना का लाभ बस्तर जिले के नक्सल प्रभावित लोगों को मिल रहा है। जिस कारण से ग्रामीणों ने नक्सलियों के खिलाफ आवाज उठाई है। जिन इलाकों में विकास नहीं पहुंचा था वहां जिला प्रशासन, सुरक्षाबल के जवान के माध्यम से सरकार योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। लोगों के आधारकार्ड बनाए जा रहे हैं। उनको अलग-अलग योजनाओं का लाभ मिल रहा है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ उनका मोहभंग हुआ है और सुरक्षाबल के जवानों को सहयोग दे रहे हैं। बड़े लीडरों के मारे जाने से संगठन कमजोर छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबल के जवानों ने रणनीति बदली है। जवानों ने नक्सलियों के टॉप लीडरों को टारगेट करते हुए ऑपरेशन शुरु किए हैं। सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों के कई टॉप लीडरों को मार गिराया है। जिन लीडरों को मारा गया है उनमें माओवादी संगठन का महासचिव भी शामिल है। सुरक्षाबल के जवानों ने सेंट्रल कमेटी मेंबर मोडेम बालकृष्ण, डेढ़ करोड़ के इनामी बसवाराजू, सेंट्रल कमेटी मेंबर जयराम उर्फ चलपति, सेंट्रल रीजनल ब्यूरो रेणुका जैसे नक्सलियों का एनकाउंटर किया है। नक्सली संगठनों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पालित ब्यूरो का मेंबर और डेढ़ करोड़ रुपये का इनामी बसवाराजू मारा गया है। माओवादी विचारधारा छोड़ रहे हैं नक्सली एक तरफ जहां नक्सलियों के खिलाफ जवान सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं वहीं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में माओवादी सरेंडर भी कर रहे हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को नई सरेंडर पॉलिसी के तहत नई शुरुआत करने का मौका दिया जा रहा है। जिसके बाद बस्तर इलाके में बड़े पैमाने पर नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। नक्सलियों के सरेंडर और नए कैडरों की भर्ती में कमी के कारण भी नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में 2023 में नई सरकार के गठन के बाद से अभी तक 1704 माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।  

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में दो महिला नक्सली ढेर, सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई

गढ़चिरौली  महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में पुलिस कमांडो और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में 2 महिला नक्सली को ढेर कर दिया गया है. साथ ही मौके से एके 47 समेत कई हथियार बरामद किए गए हैं. जानकारी के मुताबिक गढ़चिरौली पुलिस ने एटापल्ली तालुका के जाम्बिया जंगल में एक भीषण मुठभेड़ में दो महिला माओवादियों को मार गिराया है. खुफिया जानकारी के आधार पर, सी-60 टीमों और सीआरपीएफ की 191वीं बटालियन ने इलाके की घेराबंदी की और एक एके-47, एक पिस्तौल, गोला-बारूद और भारी मात्रा में माओवादी साहित्य बरामद किया है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सत्य साईं कार्तिक के नेतृत्व में चल रहे अभियान के तहत क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ ये कार्रवाई की गई. इसे बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है. मृत्युंजय सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिनका पत्रकारिता में 18 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में ABP News में कार्यरत हैं और महाराष्ट्र में डिप्टी ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं. वे अपराध, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी रिपोर्टिंग करते हैं. उनकी डिफेंस में काफी रुचि है.