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NEET घोटाले की जांच में नया मोड़: सीहोर से जुड़ा निकला मास्टमाइंड शुभम का कनेक्शन

सीहोर NEET 2026 पेपर लीक मामले की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है. अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का कनेक्शन सामने आया है. राजस्थान पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से डॉक्टर शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है, जो कभी सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी में बीएएमएस का छात्र रह चुका है. इस गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां पेपर लीक नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश तक जुड़े होने की आशंका पर भी जांच कर रही हैं।  3 मई को हुई थी शुभम की गिरफ्तारी जानकारी के मुताबिक राजस्थान पुलिस ने 3 मई 2026 को शुभम खैरनार को हिरासत में लिया था. तब से उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शुभम का सीहोर की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से संबंध रहा है. इसके बाद पुलिस ने यूनिवर्सिटी से भी संपर्क कर आरोपी के शैक्षणिक रिकॉर्ड और गतिविधियों की जानकारी जुटाई।  सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या शुभम किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था और क्या उसने मेडिकल शिक्षा संस्थानों के माध्यम से किसी तरह का संपर्क या नेटवर्क तैयार किया था. पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि पेपर लीक से जुड़े अन्य आरोपियों के साथ उसका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।  हालांकि इस पूरे मामले में श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने आरोपी शुभम खैरनार से खुद को अलग कर लिया है. यूनिवर्सिटी के कुलपति मुकेश तिवारी ने स्पष्ट कहा कि शुभम ने वर्ष 2021 में बीएएमएस पाठ्यक्रम में प्रवेश जरूर लिया था, लेकिन प्रवेश के बाद वह कभी नियमित रूप से यूनिवर्सिटी नहीं आया. कुलपति के मुताबिक उसने न तो किसी परीक्षा में हिस्सा लिया और न ही किसी शैक्षणिक या अन्य गतिविधि में भागीदारी की।  यूनिवर्सिटी का दावा, कभी क्लास में नहीं आया था आरोपी यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि आरोपी का संस्थान से केवल नाममात्र का संबंध था और उसका कैंपस गतिविधियों से कोई जुड़ाव नहीं रहा. इसके बावजूद पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी की भूमिका केवल सीमित थी या वह बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा था।  गौरतलब है कि NEET 2026 पेपर लीक मामले में राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां हो रही हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें बड़ी रकम के लेनदेन के जरिए अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाए गए।  अब सीहोर कनेक्शन सामने आने के बाद जांच और तेज हो गई है. राजस्थान पुलिस आरोपी शुभम खैरनार से पूछताछ के आधार पर उसके संपर्कों, आर्थिक लेनदेन और शैक्षणिक नेटवर्क की पड़ताल कर रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। 

2 भाइयों से शुरू हुआ NEET लीक कांड! डॉक्टर से 30 लाख में खरीदा पेपर, जांच में चौंकाने वाला खुलासा

 जयपुर राजस्थान के सीकर से जुड़े NEET 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को लगातार बड़े खुलासे मिल रहे हैं. जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड तक फैला हुआ था और परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लाखों रुपये में बेचे जा रहे थे. मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां पेपर लीक के पूरे सिंडिकेट को खंगालने में जुटी हैं।  सूत्रों के मुताबिक जांच में पता चला है कि गुरुग्राम के एक डॉक्टर से जमवारामगढ़ निवासी दो भाई मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल ने 26 और 27 अप्रैल को करीब 30 लाख रुपये में कथित तौर पर NEET का पेपर खरीदा था. इसके बाद दिनेश बिवाल ने यह पेपर अपने बेटे को दिया, जो सीकर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था. जांच एजेंसियों का दावा है कि इसके बाद 29 अप्रैल को यही पेपर कई अन्य छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचाया गया।  बिवाल के 4 बच्चों का पिछले साल नीट में हुआ था चयन जांच में यह भी सामने आया है कि दिनेश बिवाल के परिवार के चार बच्चों का पिछले साल NEET में चयन हुआ था. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें करीब एक महीने पहले ही जानकारी मिल गई थी कि परीक्षा का पेपर लीक होकर उपलब्ध कराया जाएगा. इसी भरोसे पर उन्होंने पहले से तैयारी कर रखी थी।  मामले में एक और बड़ा खुलासा देहरादून से गिरफ्तार आरोपी राकेश कुमार मंडवारिया को लेकर हुआ है. जांच एजेंसियों के अनुसार राकेश ने करीब 700 छात्रों तक पेपर पहुंचाने का काम किया था. बताया जा रहा है कि पेपर पहले डिजिटल माध्यम से भेजा गया और बाद में उसका प्रिंट निकालकर भी बेचा गया. जांच एजेंसियां अब उन छात्रों और अभिभावकों की पहचान करने में जुटी हैं जिन्होंने कथित तौर पर पैसे देकर पेपर हासिल किया था।  सीकर, जो देशभर में मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है, अब जांच एजेंसियों के रडार पर है. जांच में सामने आया है कि यहां कुछ छात्रों और कोचिंग संचालकों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप बना रखे थे, जिनके जरिए प्रश्नपत्र और उत्तर साझा किए गए. एजेंसियां अब इन ग्रुप्स के एडमिन और सदस्यों की डिजिटल डिटेल खंगाल रही हैं।  पेपर लीक से छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा इस मामले में हरियाणा से यश यादव नाम के आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि उसने भी छात्रों को पेपर बेचने का काम किया था. पुलिस और जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर आखिर मूल स्रोत से कैसे बाहर आया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।  पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है. कई छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. वहीं जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए लगातार छापेमारी और पूछताछ की जा रही है। 

CBI जांच की राह आसान? नीतीश सरकार ने नीट छात्रा हत्याकांड में दी सिफारिश, गृह मंत्री बोले

पटना   बिहार सरकार ने पटना के चित्रगुप्त नगर में नीट छात्रा से हुई दरिंदगी मामले की जांच सीबीआई से करने का आग्रह किया है। शनिवार को उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत सरकार से पटना में हुए नीट छात्रा की हत्या के मामले (कांड संख्या- 14/26) को सीबीआई से जांच का आग्रह किया है। घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन निश्चित किया जाए। इस मामले में 17 दिनों की जांच के बाद बिहार पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। इधर मृत छात्रा के परिजनों ने एसआईटी की जांच पर सवाल उठाया है। कहा है कि पुलिस सही दिशा में जांच नहीं कर रही है। शुक्रवार को पीड़िता की मां की डीजीपी विनय कुमार के साथ मुलाकात हुई थी। डीजीपी आवास से निकलने के बाद वे काफी गुस्से में दिखीं। यहां तक कह दिया कि पुलिस बिक गई है। यहां उनकी बेटी को न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। मीडिया कर्मियों से मां, भाई और मामा ने बताया कि डीजीपी ने कहा है कि रेप नहीं हुआ था, छात्रा ने आत्महत्या कर ली थी, यह बात मान जाइए। उन्हें गृह मंत्री सम्राट चौधरी से मिलने के लिए कहा गया। पीड़ित परिवार के वकील ने भी बताया कि पुलिस की जांच से परिवार के लोग संतुष्ट नहीं है। ये बातें तब सामने आईं जब एफएसएल की जांच रिपोर्ट में मृत छात्रा के अंतःवस्त्र से पुरुष स्पर्म के अवशेष पाए गए। एसआईटी बड़े पैमाने पर डीएनए टेस्ट की कार्रवाई कर रही है। परिजनों समेत 30 से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल अबतक लिए जा चुके हैं। छात्रा के शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की संभावना से इनकार नहीं किया गया। उसके शरीर पर खरोंच के भी निशान पाए गए। शुक्रवार की शाम सम्राट चौधरी ने डीजीपी और मुख्य सचिव को आवास पर तलब किया और जांच से संबधित जानकारी ली। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को जांच में पूरी पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया। उसके बाद यह मामला जांच के लिए सीबीआई को सुपुर्द कर देने का निर्णय लिया गया। अब सीबीआई फ्रेश केस दर्ज कर मामले की जांच करेगी। हालांकि, परिजनों ने कभी सीबीआई जांच की लिखित मांग नहीं किया।

पटना में NEET छात्रा की मौत: कपड़ों पर मिला ‘स्पर्म’, DNA जांच से सुलझेगा मामला

पटना पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले में पुलिस ने अहम जानकारी दी है. पुलिस ने आधिकारिक तौर पर माना है कि जांच में नए सबूत मिले हैं. पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले में जांच के दौरान उसके कपड़ों से मानव शुक्राणु (Human sperm) मिलने की पुष्टि हुई है. अब पुलिस DNA जांच के जरिए आरोपी और अन्य संदिग्धों से इसका मिलान करेगी. वहीं, मामले में समय पर कार्रवाई न करने के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. पुलिस के अनुसार, मृत छात्रा के परिजनों ने 10 जनवरी 2026 को उसके कुछ कपड़े पुलिस को सौंपे थे. इन कपड़ों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर फॉरेंसिक जांच (FSL) के लिए भेजा गया था. एफएसएल जांच रिपोर्ट में यह सामने आया है कि घटना के समय पहने गए छात्रा के कपड़े से ह्यूमन स्पर्म मिले हैं. अब एफएसएल इन स्पर्म की डीएनए प्रोफाइल तैयार कर रही है. पुलिस ने बताया कि तैयार की जा रही डीएनए प्रोफाइल का मिलान पहले से गिरफ्तार आरोपी और एसआईटी (विशेष जांच टीम) द्वारा चिन्हित अन्य संदिग्ध लोगों के डीएनए से किया जाएगा, ताकि सच्चाई सामने आ सके. पुलिस अधिकारियों पर गिरी गाज इस मामले में एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद पटना पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं. जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में चित्रगुप्त नगर थाने की थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाने के अवर निरीक्षक हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. पटना एसएसपी कार्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दोनों अधिकारियों ने सूचना जुटाने और समय पर कार्रवाई करने में गंभीर चूक की, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है. फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई डीएनए रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी.क्या था मामला पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला जनवरी 2026 में सामने आया था. छात्रा शहर के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र में रहती थी. उसकी अचानक मौत के बाद परिवार ने इसे सामान्य मौत मानने से इनकार किया और गंभीर आरोप लगाए. परिजनों का कहना था कि छात्रा के साथ कुछ गलत हुआ है, इसलिए पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए. परिजनों ने 10 जनवरी 2026 को पुलिस को छात्रा के कुछ कपड़े सौंपे, जिनके बारे में उनका दावा था कि छात्रा ने घटना के समय ये कपड़े पहने हुए थे. पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत इन कपड़ों को जब्त कर फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा. FSL की रिपोर्ट आने के बाद मामला गंभीर FSL की रिपोर्ट आने के बाद मामला और गंभीर हो गया. रिपोर्ट में बताया गया कि छात्रा के कपड़ों से मानव स्पर्म के अवशेष मिले हैं. इसके बाद FSL द्वारा डीएनए प्रोफाइल तैयार की जा रही है, ताकि इस डीएनए का मिलान पहले से गिरफ्तार आरोपी और SIT द्वारा चिन्हित अन्य संदिग्ध लोगों से किया जा सके. इस मामले की जांच में शुरुआती स्तर पर लापरवाही सामने आने के बाद पटना पुलिस ने कड़ा कदम उठाया. केस की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि चित्रगुप्त नगर थानाध्यक्ष और कदमकुआं थाने के एक अवर निरीक्षक ने समय पर सूचना जुटाने और जरूरी कार्रवाई करने में गंभीर चूक की. इसके बाद पटना एसएसपी के आदेश पर दोनों पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.

NEET छात्रा मौत कांड: आरोपी मनीष हॉस्टल में रहता था, सेक्स रैकेट चलाने के आरोप से हड़कंप

पटना पटना के शंभू हॉस्टल में नीट छात्रा मौत मामले में गिफ्तार हॉस्टल मकान मालिक मनीष रंजन पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि वह लड़कियों के हॉस्टल में ही ऊपरी तल्ले पर रहता था। उसका आपराधिक इतिहास भी है। पुलिस अब हॉस्टल के संचालिका शंभू अग्रवाल की पत्नी नीलम अग्रवाल और उनके दो बेटों की तलाश कर रही है। घटना के बाद से सभी फरार है। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने उसे पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की मांग की है। यह भी कहा है कि वह बड़े रसूखदारों को लड़कियों की सप्लाई भी करता था। नीट छात्रा मौत मामले में एक के बाद एक कड़ी खुल रही है। पता चला है कि मकान मालिक मनीष रंजन हॉस्टल के ऊपर एक फ्लैट में रहता था। उसके मकान में नीलम अग्रवाल नाम की महिला अपने पति शंभू अग्रवाल के नाम पर चला थी। उसने केयर टेकर के तौर पर नीतू के बहाल कर रखा था। नीतू ही लड़की को लेकर अस्पताल गई थी। नीलम अग्रवाल के दो बेटे भी हैं जो घटना के बाद से फरार हैं। 13दिनों के बाद भी नीलम अग्रवाल तक पुलिस नहीं पहुंची है। हॉस्टल से अन्य लड़कियां शिफ्ट हो गई हैं। लड़कियों ने बताया कि कभी भी हॉस्टल की सुरक्षा जांच नहीं होती थी। तीन साल से रहने वाली एक लड़की ने बताया कि भी किसी एजेंसी ने वहां आकर जांच पड़ताल नहीं किया। एक बड़ी जानकारी यह मिली है कि पांच जनवरी को जब छात्रा जहानाबाद से पटना आई थी उस दिन मनीष रंजन का मोबाइल लोकेशन भी इसी रूट पर था। पुलिस अब यह छानबीन कर रही है कि यह महज एक संयोग है या साजिश। इस कांड के बाद यह भी खुलासा हुआ है कि पटना में लड़कियों का हॉस्टल चलाने को लेकर कोई निश्चित प्रोटोकॉल का पालन नहीं होता। सैकड़ों की संख्या में हॉस्टल चलाए जा रहे हैं। लेकिन कोई ऑथोरिटी इनकी चेक नहीं करता। संचालक जिस प्रकार से चाहें, अपना हॉस्टल चलाते हैं। पुलिस भी इन्हें लेकर संवेदनशील नहीं दिखती। कई लड़कियों ने बताया कि बदमाश लड़के फब्ती कस कर भाग जाते हैं। उन्हें पकड़ने वाला कोई नहीं है।

वेटरनरी UG काउंसलिंग: NEET में 144 नंबर पाने वाले अभ्यर्थियों को भी मिलेगा प्रवेश का अवसर

 जबलपुर  वेटरनरी विश्वविद्यालय ने बैचलर आफ वेटरनरी साइंस यानी यूजी की सीटों पर प्रवेश देने के लिए पहली ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू कर दी है। बुधवार से शुरू हुई काउंसलिंग में इस बार नीट में 720 नंबर में से 144 नंबर पाने वाले सामान्य वर्ग के छात्र और छात्राओं को इस काउंसलिंग में भाग लेने का अवसर मिलेगा। ओबीसी में 127 नंबर और एसटी-एससी में 113 नंबर कटआफ रखा है। दरअसल, अभी तक मेरिट के आधार पर कटआफ नंबर अधिक रखा जाता था, लेकिन नीट के जरिए परीक्षा होने के बाद वेटरनरी कौंसिल आफ इंडिया ने सभी वेटरनरी विश्वविद्यालयों और कालेजों को नीट के न्यूनतम आहर्ता मान्य करने को कहा है। इसके बाद वेटरनरी विश्वविद्यालय ने इस बार यूजी की ऑनलाइन काउंसलिंग में कटआफ में नीट की न्यूनतम आहर्ता को रखा है। वहीं मेडिकल की पहली काउंसलिंग का इंतजार कर रहे वेटरनरी विश्वविद्यालय ने भी एमपी आनलाइन के जरिए अपनी यूजी कोर्स की काउंसलिंग शुरू तो कर दी है, लेकिन इस बार भी सेशन सितंबर के अंतिम सप्ताह या फिर अक्टूबर से ही शुरू हो सकेगा। पहले मध्य प्रदेश, फिर दूसरे राज्यों को अवसर पहले चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग में एमपी के विद्यार्थियों को फ्री सीट की काउंसलिंग में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इसके बाद जो सीट खाली होगी, उसमें दूसरे राज्यों के छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। वहीं पैमेंट सीट पर मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के विद्यार्थियों को लिए ओपन रखी गई है। यूजी काउंसलिंग का शेड्यूल     20 से 26 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन होगा।     25 अगस्त को सीट आवंटित की जाएंगी।     27 अगस्त को मेरिट के आधार पर लिस्ट जारी होगी।     28 से 31 अगस्त तक च्वाइंस फीलिंग का अवसर होगा।     2 सितंबर को फाइनल रिजल्ट आएगी     3 से 8 सितंबर तक कालेज में दस्तावेजों की जांच करानी होगी। 8 सितंबर तक प्रवेश दिया जाएगा     वेटरनरी की यूजी सीटों पर ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू कर दी गई है। इस बार हमने नीट की न्यूनतम आहर्ता को मेरिट लिस्ट बनाकर जारी किया है। काउंसलिंग में प्रवेश लेने वाले छात्रों को आठ सितंबर तक प्रवेश दे दिया जाएगा। – प्रो.मनदीप शर्मा, कुलपति, वेटरनरी विवि जबलपुर।  

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोबारा नीट यूजी परीक्षा पर रोक, काउंसलिंग पर भी लगाई रोक

इंदौर   हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने सोमवार को एनईईटी-यूजी के छात्रों की दोबारा परीक्षा कराने के आदेश जारी किए थे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने इसके खिलाफ युगलपीठ में अपील की। मंगलवार को जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी। 4 मई को आयोजित की गई थी परीक्षा डिप्टी एडवोकेट जनरल रोमेश दवे ने बताया कि, 4 मई को एनटीए ने पूरे देश में परीक्षा आयोजित की थी। इंदौर में उस दिन आंधी-तूफान व बारिश हुई थी। इंदौर के कुछ सेंटर्स की बिजली गुल हो गई थी। इसको लेकर कुछ छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। दोबारा परीक्षा लेने की मांग की थी। एमपी हाई कोर्ट युगलपीठ में एकलपीठ के फैसले पर लगाई रोक मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट की युगलपीठ में सुनवाई हुई। एनटीए की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा। उन्होंने एकलपीठ के फैसले पर स्टे दिए जाने की मांग रखते हुए कहा कि इस फैसले को लागू करना गलत होगा। परीक्षा में 22 लाख छात्रों ने भाग लिया था। इन 75 छात्रों के लिए अलग से पेपर सेट करना होगा, उसमें ये बात भी सामने आ सकती है कि 22 लाख छात्र ये आरोप लगाएं कि उनका पेपर टफ था, जबकि इनका सरल। ऐसे में नई कंट्रोवर्सी खड़ी हो जाएगी। छात्रों के वकील ने किया विरोध कोर्ट में याचिका दायर करने वाले छात्रों के वकील ने विरोध करते हुए कहा कि काउंसलिंग शुरू हुई तो उस स्थिति में उनका भविष्य उलझ जाएगा। सेशन शुरू होने पर उनका नुकसान होगा। कोर्ट ने सोमवार को जारी आदेश पर फिलहाल रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही छात्रों को नोटिस जारी करते हुए जवाब पेश करने के लिए कहा है। अब 10 जुलाई को सुनवाई हो सकती है।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 75 छात्रोंको मिलेगा री-एग्जाम का मौका, एग्जाम सेंटरों पर बिजली गुल हुई थी

इंदौर  नीट यूजी की परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. NEET-UG परीक्षा में बिजली गुल होने के कारण 75 छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी. इसके लिए इंदौर हाईकोर्ट ने एनटीए को आदेश दिए हैं. बता दें कि 4 मई 2025 को हुई NEET-UG परीक्षा में बिजली कटौती की समस्या थी. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को दोबारा परीक्षा कराने और जल्द रिजल्ट जारी करने के लिए हाइकोर्ट के आदेश दिए हैं. इसके तहत, केवल 3 जून 2025 से पहले याचिका दायर करने वाले 75 छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा होगी. ऐसे तय होगी रैंक बिजली कटौती के कारण परीक्षा में आई परेशानी के लिए जिन याचिकाकर्ताओं ने याचिका लगाई थी, उनकी परीक्षा दोबारा से आयोजित की जाएगी. इनकी रैंक केवल दोबारा होने वाली परीक्षा के अंकों पर आधारित होगी. कोर्ट के आदेश के अनुसार, केवल 3 जून 2025 से पहले याचिका दायर करने वाले 75 छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा होगी. जज ने कोर्ट की लाइट बंद करवाई जज ने मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में बिजली बंद करवाकर छात्रों की असुविधा का अनुभव किया. बिजली कटौती के कारण छात्रों को असुविधा हुई, जबकि उनकी कोई गलती नहीं थी. मामला 9 जून 2025 का है. इसमें NTA ने पावर बैकअप का दावा किया. छात्रों के वकील ने बताया कि कई केंद्रों पर जनरेटर और पर्याप्त रोशनी नहीं थी.