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PWD ने 40 हजार किमी सड़कों का सेफ्टी ऑडिट कराया, सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन की अहम शुरुआत

भोपाल  एमपी में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) पहली बार सड़कों का अनिवार्य रूप से रोड सेफ्टी ऑडिट करवाने जा रही है। एनएचएआइ के एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा निर्मित स्टेट हाई-वे सहित अन्य जिला मार्ग और मुख्य जिला मार्ग की सड़कों का रोड सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा। जिसमें सड़कों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से विभिन्न मापदंडों में परखा जाएगा। सुरक्षा के मापदंडों पर होगी परख प्री-डिजाइन स्टेज से लेकर कंस्ट्रक्शन तक सेफ्टी का ऑडिट विभिन्न चरणों में किया जाएगा। उसके बाद सड़क की शुरुआत होने के बाद भी उसे सुरक्षा के मापदंडों पर फिर परखा जाएगा। जहां कमी सामने आएगी उसको दोबारा दुरुस्त किया जाएगा। ऑडिट के दौरान जो सड़कें विभाग द्वारा बनाई गई हैं उनकी खामियों को सुरक्षा कारणों के तहत चिह्नित किया जा रहा है।  40 हजार किमी सड़कों का कराया ऑडिट PWD विभाग द्वारा बनाई गई प्रमुख मौजूदा सड़कों का भी विभाग द्वारा सेफ्टी ऑडिट करवाया गया। जिसमें प्रमुख रूप से 441 खामियां पाई गई हैं। इनमें से करीब 200 खामियां ऐसी थीं, जिनमें थोड़े बहुत सुधार की आवश्यकता रही। जिन्हें ठीक कर दिया गया। वहीं 200 से ज्यादा ऐसी भी गलतियां चिह्नित की गईं जिनमें कंस्ट्रक्शन से जुड़ा काम करना था। जैसे अंधा मोड़, क्यूकल अंडर पास और सेफ क्रॉसिंग का निर्माण करना, जिस पर भी विभाग द्वारा लगभग काम पूरा कर लिया गया है। सड़क हादसों को रोकने की दिशा में यह बड़ी पहल साबित होगी। तकनीकी खामी के कारण नहीं होगी दुर्घटना इसलिए रोड सेफ्टी ऑडिट पर विभाग का जोर रोड सेफ्टी ऑडिट से सड़क पर किसी तकनीकी खामी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है। इसमें सड़क की डिजाइन, साइन बोर्ड, रोशनी, गति नियंत्रण, पैदल यात्रियों व साइकिल चालकों की सुरक्षा और ब्लैक स्पॉट्स का आकलन किया जाता है।  कई बार सड़कें बनने के बाद छोटी-छोटी खामियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन जाती हैं, जिन्हें ऑडिट के जरिए सुधारा जा सकता है। यह प्रक्रिया नई सड़कों के निर्माण से पहले, निर्माण के दौरान और उपयोग में आने के बाद भी की जाती है। तीन चरणों में ऐसे होगा सेफ्टी ऑडिट 1. प्री-डिजाइन स्टेज -सड़क की आवश्यकता और स्थान का अवलोकन – ट्रैफिक वॉल्यूम-वाहन के प्रकार – स्कूल, अस्पताल और बाजार जैसे प्वॉइंट का चयन। 2. डिजाइन स्टेज -रोड चौड़ाई, -कर्व, ग्रेड और जंक्शन डिजाइन -फुटपाथ, स्टॉप और अन्य ट्रैक -ड्रेनेज, लाइटिंग, साइन बोर्ड और मार्किंग -कंस्ट्रक्शन स्टेज वर्क जोन सेफ्टी – बैरिकेडिंग और डायवर्जन – रात की विजिबिलिटी और चेतावनी संकेत प्री-ओपनिंग – सड़क खोलने से पहले निरीक्षण – सभी साइन, मार्किंग और स्पीड ब्रेकर की जांच – ब्लैक स्पॉट की पहचान पोस्ट-ओपनिंग – दुर्घटना डेटा का विश्लेषण – ट्रैफिक का अध्ययन – सुधारात्मक उपाय

भोपाल में रोड विस्तार के लिए 7 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई, NHAI के दावे पर उठे सवाल

भोपाल देश में विकास बनाम पर्यावरण की बहस अभी थमी भी नहीं थी कि अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक और चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आ रही है. झीलों और हरियाली के लिए पहचाने जाने वाले भोपाल में अब विकास के नाम पर हज़ारों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने वाली है. मामला शहर के बीचोबीच स्थित अयोध्या बायपास का है, जहां सड़क चौड़ीकरण की आड़ में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई शुरू हो चुकी है. जिस विकास की बात की जा रही है, उसकी कीमत भोपाल की हरियाली को चुकानी पड़ रही है. अयोध्या बायपास, जो भोपाल के सबसे व्यस्त और अहम मार्गों में से एक है, अब फोर लेन से सिक्स लेन बनने जा रहा है. इसके साथ ही दोनों ओर दो-दो लेन की सर्विस रोड भी तैयार की जाएगीए जिसके बाद यह सड़क 10 लेन की हो जाएगी. इस परियोजना के तहत हजारों पेड़ों की कटाई होनी है. जैसे ही यह जानकारी सामने आई, पर्यावरणविदों, प्रकृति प्रेमियों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी फैल गई. सवाल उठने लगे कि क्या ट्रैफिक समाधान का यही एकमात्र रास्ता है, और क्या हर बार विकास की कीमत पेड़ों को चुकानी पड़ेगी? इस पूरे प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI के पास है. एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर देवांश नुवल का तर्क है कि आने वाले वर्षों में ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ेगा और सड़क चौड़ीकरण से जाम की समस्या से राहत मिलेगी.  मामला NGT तक पहुंचा और NGT के निर्देश पर एक विशेष समिति का गठन किया गया, जिसने पूरे प्रोजेक्ट और पेड़ों की स्थिति की जांच की. जांच के बाद समिति ने 10 हजार की बजाय 7,871 पेड़ों की कटाई को सशर्त मंजूरी दी. इन शर्तों के मुताबिक, काटे जाने वाले हर एक पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाए जाएंगे. यानी लगभग 80 हज़ार पौधरोपण का दावा किया गया है. NHAI का कहना है कि पौधरोपण सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसकी निगरानी भी की जाएगी और पौधों के जीवित रहने की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञ इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि वर्षों पुराने, बड़े और छायादार पेड़ों की भरपाई केवल पौधे लगाकर नहीं की जा सकती. एक पेड़ बनने में दशकों लगते हैं और उसका पर्यावरणीय योगदान किसी नए पौधे से तुरंत पूरा नहीं हो सकता. भोपाल के रहने वाने नितिन सक्सेना ने इन पेड़ों की कटाई को लेकर एनजीटी में याचिका भी लगाई लेकिन पेड़ों की कटाई को रोक नहीं पाए विकास की रफ्तार तेज है, लेकिन उसकी कीमत भी कम नहीं. आज सड़कें चौड़ी होंगी, ट्रैफिक सुगम होगा, लेकिन क्या कल शहर सांस ले पाएगा? कागजों पर दस गुना पौधरोपण के वादे हैं, मगर जमीन पर गिरते पुराने पेड़ उस भरोसे को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं. भोपाल, जो कभी हरियाली की पहचान था, अब एक अहम मोड़ पर खड़ा है जहां फैसला सिर्फ सड़क का नहीं, आने वाली पीढ़ियों की सांसों का भी है

भोपाल में अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना: NHAI ने जताई जन-सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता

भोपाल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को सुरक्षित, सुगम एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। NHAI का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित न होकर आम नागरिकों को सुरक्षित, सुविधाजनक एवं निर्बाध आवागमन उपलब्ध कराना है, जिससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो तथा आर्थिक एवं सामाजिक विकास को गति मिले। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहरी विस्तार, नए आवासीय क्षेत्रों के विकास तथा यातायात गतिविधियों में निरंतर वृद्धि के साथ एक प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में विकसित हो रही है। इस परिप्रेक्ष्य में शहर की प्रमुख सड़कों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी दिशा में अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना एक महत्वपूर्ण एवं आवश्यक पहल है। वर्तमान में अयोध्या बायपास की यातायात वहन क्षमता लगभग 40,000 वाहनों प्रतिदिन है, जबकि इस मार्ग पर वर्तमान में ही लगभग 45,000 वाहन प्रतिदिन आवागमन कर रहे हैं। आसपास विकसित हो रही आवासीय कॉलोनियों से यातायात सीधे मुख्य मार्ग पर आने के कारण इस खंड पर यातायात दबाव बढ़ता जा रहा है तथा दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इस मार्ग पर वर्तमान में तीन ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए गए हैं। यह परियोजना आम नागरिकों के लिए क्यों आवश्यक है ? * अयोध्या बायपास पर चिन्हित तीन प्रमुख ब्लैक स्पॉट्स का सुधार एवं निराकरण किया जा रहा है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी एवं जन-सुरक्षा सुनिश्चित होगी। * सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण किया जा रहा है, जिससे कॉलोनियों से आने-जाने वाले स्थानीय वाहनों को पृथक मार्ग उपलब्ध होगा और मुख्य कैरिज-वे पर यातायात दबाव कम होगा। * पूरे बायपास को छह लेन में विकसित किया जा रहा है। इसका डिज़ाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह वर्ष 2050 तक के अनुमानित यातायात दबाव को सुचारु रूप से संभाल सके। * बेहतर एवं चौड़ी सड़क उपलब्ध होने से यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत तथा प्रदूषण में कमी आएगी। * उन्नत लेआउट एवं सुरक्षित डिज़ाइन से वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी तथा दुर्घटनाओं की संभावना में कमी आएगी।  पर्यावरण संरक्षण के प्रति NHAI की संवेदनशीलता एवं ठोस पहल  NHAI का यह प्रयास केवल अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास एवं पर्यावरण संतुलन को समान प्राथमिकता देने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्राधिकरण प्रारंभ से ही ग्रीन हाईवे की अवधारणा में विश्वास रखता है। परियोजना के अंतर्गत जिन वृक्षों की कटाई प्रस्तावित है, उनमें से लगभग 5,000 वृक्ष टिम्बर श्रेणी के हैं। वृक्ष कटाई के विकल्पों एवं प्रतिपूरक उपायों के संबंध में केंद्रीय अधिकार समिति (CEC) को NHAI द्वारा विभिन्न विकल्प प्रस्तुत किए गए हैं।  प्रतिपूरक,विकल्प एवं अतिरिक्त पौधारोपण के प्रमुख बिंदु :  * वृक्ष कटाई के प्रतिपूरक उपाय के रूप में कुल 81,000 पौधों का रोपण किया जाएगा। * ये पौधे भोपाल शहर एवं इसके आसपास विभिन्न चिन्हित स्थानों पर लगाए जाएंगे। * अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना के साथ-साथ 10,000 पौधे अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाए जाएंगे। इसके अंतर्गत एवेन्यू प्लांटेशन का पुनः सघनीकरण (Re-densification) किया जाएगा, जिसमें छायादार, फलदार एवं शेड-बेयरिंग प्रजातियों के वृक्ष दोनों ओर रोपे जाएंगे। * इन सभी पौधों की 15 वर्षों तक देखरेख, संरक्षण एवं अनुरक्षण की पूर्ण जिम्मेदारी NHAI द्वारा वहन की जाएगी, जिस पर लगभग ₹20 करोड़ का अनुमानित व्यय प्रस्तावित है। इस संबंध में केंद्रीय अधिकार समिति को पूर्व में अवगत कराया जा चुका है। * इसके अतिरिक्त, नगर निगम के सहयोग से 10,000 अतिरिक्त पौधों का रोपण किया जाएगा। नगर निगम द्वारा NHAI को विभिन्न पार्क, रिक्त भूमि एवं सड़क किनारे की उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराई गई है, जहां स्थानीय, छायादार एवं उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।  झिरनिया एवं जागरियापुर क्षेत्र में वृहद पौधारोपण :  * पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत, भोपाल जिला प्रशासन द्वारा झिरनिया एवं जागरियापुर क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराई गई है। * यह भूमि राजस्व वन (Revenue Forest) की है, जो वर्तमान में रिक्त अवस्था में है। * यहां 61,000 से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा तथा इस क्षेत्र को विकसित वन क्षेत्र (Developed Forest Area) के रूप में विकसित किया जाएगा। * इस संबंध में भी केंद्रीय अधिकार समिति को जानकारी प्रदान की जा चुकी है। समिति के निर्देशानुसार जून 2026 तक सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली जाएंगी, ताकि अगले मानसून  के दौरान पौधारोपण कार्य समयबद्ध रूप से किया जा सके। NHAI यह भी स्पष्ट करता है कि वृक्षों की कटाई को न्यूनतम रखने के उद्देश्य से परियोजना के डिज़ाइन में आवश्यक संशोधन किए गए हैं, जिससे पहले की तुलना में कम वृक्षों की कटाई की जा रही है। यह सीमित कटाई यातायात एवं सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के दृष्टिगत आवश्यक है।  पूर्व में किए गए पौधारोपण कार्य  यह उल्लेखनीय है कि NHAI निरंतर पौधारोपण करता रहा है और इसे अपनी सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी मानता है। पिछले मानसून सत्र में भोपाल के समीप झिरनिया ग्राम के पास सोनकच्छ टोल प्लाज़ा क्षेत्र में लगभग 50,000 पौधे मियावाकी तकनीक से लगाए गए, जो वर्तमान में 10–12 फीट तक विकसित हो चुके हैं। यह पौधारोपण कम्पेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन का भाग नहीं, बल्कि ग्रीन हाईवे पहल के अंतर्गत NHAI की नियमित जिम्मेदारी के तहत किया गया था। यह तथ्य इस बात का प्रमाण है कि NHAI पर्यावरण संरक्षण को केवल नीतिगत स्तर पर नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी प्रभावी रूप से लागू करता है। NHAI यह स्पष्ट करता है कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना की योजना बनाते समय हरित आवरण का विकास प्राधिकरण की प्राथमिकता होती है। परियोजना के क्रियान्वयन से पूर्व एवं उसके साथ-साथ अफॉरेस्टेशन, पौधारोपण एवं हरियाली विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। NHAI का मानना है कि सड़क विकास के साथ-साथ ग्रीन हाईवे का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे। NHAI आम नागरिकों को आश्वस्त करता है कि अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना को पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है, जिससे जन-सुरक्षा सुनिश्चित हो, यात्रा सुगम बने, समय की बचत हो और पर्यावरण संरक्षित रहे।

खराब सड़क निर्माण पर सख्त हाईकोर्ट: NHAI को नोटिस, सड़क सुधारने के निर्देश

  इंदौर  मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट की इदौर खंडपीठ ने NHAI (National Highways Authority of India भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के बनाए गए 8.5 किलोमीटर के हाईवे (सड़क) को लेकर लगी याचिका मामले में 15 दिसंबर तक जवाब मांगा है। गड्ढों के कारण हो रहे हादसे याचिकाकर्ता के एडवोकेट के मुताबिक 106 करोड रुपए की लागत से बनी सड़क 6 महीने में उखड़कर गड्ढे में तब्दील हो गई है। मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने NHAI से 15 दिसंबर तक जवाब मांगा है। याचिका में बताया गया है कि सड़क पर हुए गड्ढों के कारण हादसे हो रहे हैं। इंदौर सेंधवा हाईवे का मामला इंदौर हाईकोर्ट ने NHAI को सड़क ठीक करने के निर्देश दिए हैं। साल 2009 से 2024 के बीच 3000 से ज्याद एक्सीडेंट में 450 से ज्यादा मौतें हो चुकी है। घाट को कम करने के लिए 8.5 किलोमीटर का रोड का निर्माण किया था। जनहित याचिका लगने के बाद ही इंदौर सेंधवा हाईवे का यह रोड बनाया गया था।

15 मौतों पर सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान: हादसे पर NHAI व राज्य सरकार को नोटिस

 राजस्थान सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान के फलौदी में हुए दर्दनाक सड़क हादसे, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए, पर स्वतः संज्ञान लिया। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय विश्नोई की पीठ ने राजमार्गों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें, जिसमें राजस्थान के राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित ढाबों और अन्य स्थापनाओं की संख्या एवं स्थिति का ब्योरा दिया जाए। इसके साथ ही अदालत ने सड़क की स्थिति के संबंध में भी रिपोर्ट तलब की। पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एस. नाडकर्णी को मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया और निर्देश दिया कि राजस्थान के मुख्य सचिव को पक्षकार के रूप में शामिल किया जाए, ताकि वे मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें। राजस्थान सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पूर्ण सहयोग करेगी और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर न्यायालय की हर प्रकार से सहायता करेगी। अदालत ने इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में हुए समान सड़क हादसे का भी संज्ञान लिया और निर्देश दिया कि आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव को भी पक्षकार बनाया जाए, ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग सुरक्षा और सड़क किनारे ढांचों के नियमन के लिए एक समन्वित नीति और दृष्टिकोण अपनाया जा सके।

आवारा पशुओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों व एजेंसियों को कार्रवाई के आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अहम निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि सभी आवारा पशुओं को सड़कों, राज्य के हाईवे और राष्ट्रीय राजमार्गों से हटाया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे लेकर राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नगरपालिकाओं को भी निर्देश जारी किया है। इतना ही नहीं कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आवारा पशुओं को हटाने के लिए हाईवे निगरानी टीमें बनाई जाएं जो उन्हें पकड़ कर सड़कों से हटाएगी और शेल्टर होम्स में रखेगी। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में आगे आवारा कुत्तों के मुद्दे पर भी आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए और उन्हें शेल्टर होम में जगह दी जाए। साथ ही उन्हें टीकाकरण के बाद भी उसी इलाके में न छोड़े जाने के निर्देश दिए गए हैं।   सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों- जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कुत्तों के काटने के मामलों में चौंकाने वाली बढ़ोतरी की बात कही और आदेश दिया कि अधिकारी आवारा कुत्तों को पकड़ने के बाद उन्हें शेल्टर में टीके दिए जाएं। इसके बाद उन्हें पुरानी जगहों पर न छोड़ा जाए। इसके अलावा सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों के दोबारा न घुसने देने के इंतजाम भी तय हों। कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 13 जनवरी को करेगी।  

NHAI का बड़ा कदम: दिल्ली की सड़कों पर मिलेगी स्मूद ड्राइविंग, UER-II का विस्तार शुरू

 नई दिल्ली दिल्ली-NCR में बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए NHAI एक नया मार्ग विकसित कर रहा है। यह प्रोजेक्ट UER-II का 17 किलोमीटर लंबा विस्तार होगा, जो अलीपुर से शुरू होकर NH-709B (दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे) पर ट्रोनिका सिटी तक जाएगा। दिल्ली की रिंग रोड, NH-44, NH-48 और बरापुल्ला एलिवेटेड कॉरिडोर पर दबाव कम होगा। हरियाणा और राजस्थान से देहरादून की ओर जाने वाले ट्रैफिक के लिए तेज और सुगम रास्ता मिलेगा। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सड़कों की जाम समस्या में राहत मिलेगी। कितना बड़ा है ये प्रोजेक्ट? सितंबर को NHAI ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए बोली मंगाई। इसमें 5 महीने में फिजिबिलिटी स्टडी और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। इस स्टडी का खर्च 2.32 करोड़ रुपये होगा। अनुमान है कि इस 17 किलोमीटर लंबे हाईवे को बनाने में 3350 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आएगी। यह प्रोजेक्ट न केवल भव्य है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर की ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान भी साबित हो सकता है। क्या-क्या होगा खास? NHAI की योजना में इस हाईवे को बनाने से पहले हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखा जाएगा। पहले चरण में ट्रैफिक एनालिसिस, रास्ते के विकल्प और इलाके की टोपोग्राफी तय की जाएगी। लेन कॉन्फिगरेशन और बिजली-पानी की लाइनों, जंगल की मंजूरी जैसी पहलुओं पर भी निगरानी होगी। प्रोजेक्ट का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी जांचा जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। दूसरे चरण में कॉरिडोर का स्ट्रक्चरल डिजाइन, मिट्टी और पानी की जांच, चौराहों का डिजाइन, ड्रेनेज प्लान, ट्रैफिक साइनेज, लागत अनुमान और टोल स्कीम का निर्धारण इस हाईवे का निर्माण न केवल मजबूत होगा, बल्कि यह स्मार्ट और पर्यावरण के अनुकूल भी होगा। आवारा पशुओं का भी ध्यान राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हाईवे पर आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए सुरक्षित पशु आश्रय बनाने की योजना शुरू की है। योजना के तहत हाईवे के आसपास ऐसे स्थान विकसित किए जाएंगे, जहां पशुओं के लिए चारा भंडारण, खाने की जगह और केयरटेकर्स के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एनएचएआई का कहना है कि इस कदम से न केवल सड़क हादसों में कमी आएगी, बल्कि पशुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। आवारा पशु अक्सर हाईवे पर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं, और इस पहल से उनकी सुरक्षा के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी। स्थानीय विरोध और चुनौतियां इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्तरी दिल्ली के कुछ गांवों में विरोध भी हो रहा है। मुंडका-बक्करवाला खंड पर टोल प्लाजा को लेकर स्थानीय लोग नाराज हैं। एनएचएआई को इन मुद्दों को सुलझाने के लिए कदम उठाने होंगे, ताकि प्रोजेक्ट सुचारू रूप से आगे बढ़ सके। एनएचएआई के मुताबिक, इस विस्तार के पूरा होने के बाद UER-II दिल्ली के उत्तर, पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम हिस्सों के साथ-साथ गुरुग्राम तक जाने वाले ट्रैफिक के लिए एक अहम बायपास बन जाएगा। यह द्वारका एक्सप्रेसवे के साथ मिलकर दिल्ली की रिंग रोड को बायपास करेगा। भविष्य में UER-II का दूसरा 65 किलोमीटर लंबा पूर्वी विस्तार ट्रोनिका सिटी से गाजियाबाद होते हुए नोएडा तक जाएगा।

जल संसाधन मंत्री सिलावट ने कहा: इंदौर बायपास फ्लाईओवर निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए

एनएचएआई इंदौर बायपास पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर के कार्य शीघ्र करे पूर्ण: जल संसाधन मंत्री  सिलावट मंत्री  सिलावट ने एनएचएआई के अधिकारियों के साथ की बैठक भोपाल  जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इंदौर बायपास पर निर्माणाधीन अर्जुन बरोदा, झलारिया और कनाडिया फ्लाई ओवर का कार्य शीघ्र पूर्ण किया जाए। साथ ही रोड चौड़ीकरण, सर्विस रोड दुरुस्ती और बंद लाइट चालू करने का कार्य भी प्राथमिकता के साथ किया जाए, जिससे यातायात सुचारू हो और ट्रैफिक जाम की समस्या समाप्त हो। मंत्री  सिलावट ने बुधवार को मंत्रालय में एनएचएआई और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में एनएचएआई के रीजनल ऑफिसर  एस.के. सिंह, एमपीआरडीसी के चीफ इंजीनियर  राकेश जैन, प्रमुख अभियंता जल संसाधन  विनोद कुमार देवड़ा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री  सिलावट ने निर्देश दिए कि लक्षित कार्य तय समय-सीमा में पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें, जिससे जनता को परेशानियों का सामना न करना पड़े। मंत्री  सिलावट ने इन कार्यों के लिए अधिकारियों की सहमति से समय-सीमा भी निर्धारित की। एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि निर्धारित समय सीमा के अनुसार 15 जनवरी 2026 तक अर्जुन बरोदा का फ्लाई ओवर और 30 जनवरी 2026 तक झलारिया का फ्लाई ओवर पूर्ण होकर प्रारंभ हो जाएगा। इसी प्रकार 31 मार्च 2026 तक कनाडिया (एमआर 10) का फ्लाई ओवर, दीपावली के पहले फ्लाई ओवर के दोनों तरफ की सर्विस रोड की मरम्मत और डामरीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। आगामी 10 दिनों में पूरे मार्ग पर लाइट भी लगा दी जाएगी। मंत्री  सिलावट ने निर्देश दिए कि इन मार्गों पर यातायात बाधित न हो इसके लिए एनएचएआई स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस के साथ समन्वय कर व्यवस्था सुनिश्चित करें।  

हाइवे पर अवैध कट पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, NHAI ने शुरू किया सुधार अभियान

भोपाल  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग (NHAI) पर रोजाना भीषण हादसे हो रहे हैं। भारत सरकार भी समय-समय पर एडवाइजरी जारी कर रहा है। लेकिन, हाईवे के किनारे बने ढाबा और पेट्रोल पंप हादसों को न्योता दे रहे हैं।जिसके चलते ना सिर्फ हाईवे के बीच में वाहन खड़े हो रहे हैं बल्कि दुर्घटना भी तेजी से बढ़ी है। एनएच 30 के स्लीमनाबाद से जबलपुर होते हुए धूमा (सिवनी) तक अवैध तरीके से 60 से अधिक स्टापेज बनाए गए हैं। जिसके लिए ढाबा और पेट्रोल पंप संचालकों ने दोनों सड़कों के बीच में मिट्टी से भरकर बराबर कर दिया है। ऐसे में अब राइट से लेफ्ट और लेफ्ट से राइट जाने वाले वाहन कहीं से भी टर्न हो जाते हैं, नतीजन बड़ी दुर्घटना हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के चेयरमैन बीते एक माह से मध्यप्रदेश के दौरे पर हैं। उन्होंने देखा कि इंदौर, भोपाल, नरसिंहपुर में हाइवे पर अवैध डिवाइडर कट बनाए गए हैं। फायदे के लिए हाईवे पर कर लिया कब्जा कटनी जिले के स्लीमनाबाद से लेकर जबलपुर होते हुए नागपुर रोड में धूमा के बीच में एनएचएआई ने जांच की। इस दौरान 60 से अधिक स्थानों में हाईवे के बीच में अवैध रास्ता और स्टापेज बने मिले। एनएचएआई की तरफ से नोटिस भी दिए गए, लेकिन स्थिति जस की तस है। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी कमेटी ने इस और ध्यान देते हुए राज्य सरकार और एनएचएआई को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बीते एक सप्ताह के दौरान 50 से अधिक ऐसे स्थानों को जेसीबी मशीन की मदद से ध्वस्त किया गया है। शिवहरे ढाबे की सबसे खराब स्थिति जबलपुर-धूमा के पास में शिवहरे ढाबा और पेट्रोल पंप है। दोनों के मालिक एक ही है। इन्होंने अपने फायदे और अधिक से अधिक ग्राहकों को रोकने के लिए हाईवे के बीच में मिट्टी डालकर प्लेन कर दिया। ऐसे में नागपुर से जबलपुर और जबलपुर से नागपुर जाने वाली अधिकतर गाड़ी इसी ढाबे या फिर पेट्रोल पंप पर रुकती है। एनएचएआई ने कई बार नोटिस जारी किया है। पुलिस से शिकायत भी की, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। बुधवार को एनएचएआई के अधिकारियों ने हाइवे के बीच में बिछाई गई मिट्टी को जेसीबी से अलग किया है। हिदायत दी है कि अगर फिर से ऐसा कृत्य किया जाता है, तो कानूनी कार्रवाई करते हुए FIR कराई जाएगी। एनएचएआई का शुरू हुआ अभियान सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के चेयरमैन जस्टिस अभय मनोहर सप्रे सड़कों पर हो रहे हादसे को जानने के लिए लगातार अलग-अलग रोड में घूम-घूमकर देख रहे हैं। हाल ही में जस्टिस अभय मनोहर जब इंदौर, भोपाल और नरसिंहपुर दौरे पर थे, तब उन्होंने देखा कि हाईवे के बीच में अवैध तरीके से रोड को कट करते हुए डिवाइडर बनाए गए हैं, जिसके चलते वाहन चालक कहीं से भी गाड़ी को टर्न कर देता है। जिसके चलते गंभीर सड़क हादसे होते है। चेयरमैन जस्टिस अभय मनोहर के सख्त निर्देश के बाद राज्य सरकार और एनएचएआई ने अवैध डिवाइडर कट बनाने वालों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। जबलपुर में बीते एक सप्ताह के दौरान 50 से अधिक वह स्थान जहां पर कि डिवाइडर बनाए गए थे, उन्हें बंद किए गए हैं। लोकल लोग बनाते हैं दबाव एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने दैनिक भास्कर से कहा कि कई दिनों से हिदायत दी जा रही है कि पेट्रोल पंप और ढाबे के सामने अवैध तरीके से बनाए गए डिवाइडर कट को बंद कर दिया जाए, क्योंकि इससे दुर्घटनाएं हो रही है, लेकिन लोकल के लोगों के कारण हमारी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। धीरे-धीरे ये लोग अपनी सुविधा अनुसार हाईवे पर डिवाइडर कट बनाते चले गए। जब हाईवे बनाया जा रहा था, तब यह प्लान किया था कि बीच में जो जगह छोड़ी गई है, उसमे पौधे लगेंगे। लेकिन, रोड किनारे के ढाबे और पेट्रोल पंप संचालकों ने अनअथोराइज एक्सेस बना रखे हैं। कई बार इन्हें समझाया भी, पर नहीं माने। एक सप्ताह में पूरे अवैध डिवाइडर खत्म किए जाएंगे एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू का कहना है कि एक सप्ताह के भीतर जितने भी अवैध डिवाइडर कट बने हैं, उन्हें खत्म किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में अब दोबारा कोई इस तरह का काम ना करता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर भी थाने में दर्ज करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि एनएचआई की एक टीम अब लगातार ऐसे लोगों पर निगरानी भी रखेगी, जो कि हाईवे में अवैध काम करते है। एनएचएआई के मुताबिक हाईवे में अभी तक स्लीमनाबाद से धूमा के बीच 40 लोगों की जान गई हैं, जिसमें 6 लोगों ने अवैध डिवाइडर के चलते जान गंवाई है। 8 अगस्त को चेयरमैन लेंगे बैठक सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के चेयरमैन इन दिनों मध्यप्रदेश के दौरे में है। अभी तक उन्होंने भोपाल,इंदौर सहित कई अन्य जिलों में जाकर हाईवे और सड़क की स्थिति देखी। 8 अगस्त को चेयरमैन जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार मे होगी। जिसमें कलेक्टर,एसपी सहित ट्रैफिक पुलिस, एनएचएआई, स्टेट हाईवे के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी की बैठक में भी अवैध डिवाइडर कट की समीक्षा की जाएगी। हाईवे पर अचानक नहीं लगा सकते ब्रेक…मानें जाएंगे दोषी, क्या बोली सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है. इस फैसले में कोर्ट ने ये स्पष्ट किया कि हाईवे पर बिना चेतावनी अचानक वाहन रोकना लापरवाही माना जाएगा. कोर्ट ने ये टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान की जिसमें एक गंभीर सड़क हादसे में एक युवक का पैर काटना पड़ा. ये मामला साल 2017 में तमिलनाडु के कोयंबटूर से जुड़ा हुआ है. हाईवे पर अचानक ब्रेक बन सकता है बड़ा खतरा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नेशनल हाईवे तेज स्पीड से सफर के लिए बनाए जाते हैं. ऐसे में अगर कोई ड्राइवर अचानक गाड़ी रोकता है और पीछे आने वाले वाहनों को संकेत नहीं देता है, तो ये न सिर्फ उसकी बल्कि दूसरों की जान को भी खतरे में डाल सकता है. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के कई हाईवे पर शोल्डर या स्पीड … Read more

इंदौर-देवास बायपास मामले में याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने पहली सुनवाई में ही दिया फैसला

इंदौर  इंदौर-देवास बायपास और इंदौर-सांवेर मार्ग की जर्जर हालत को लेकर दायर जनहित याचिका को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में निराकृत कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इसी विषय पर पूर्व से ही एक जनहित याचिका विचाराधीन है, ऐसे में नई याचिका की आवश्यकता नहीं है। यदि याचिकाकर्ता चाहें तो अपनी बात पूर्व याचिका में रख सकते हैं। यह याचिका नरेंद्र जैन द्वारा एडवोकेट अनिल ओझा के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने बायपास की खराब हालत, लगातार लग रहे जाम और फ्लाइओवर निर्माण के चलते उत्पन्न ट्रैफिक समस्या को आधार बनाया था। याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दे इंदौर-देवास बायपास पर हाल ही में लगातार 36 घंटे लंबा ट्रैफिक जाम लगा, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। याचिकाकर्ता के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को पहले से इस संभावित स्थिति की जानकारी थी, फिर भी कोई वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं किया गया। अर्जुन बड़ौद क्षेत्र में निर्माणाधीन फ्लाइओवर के चलते सड़क पर लंबे जाम की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे एम्बुलेंस, स्कूल बसें और आम नागरिक बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। कोर्ट की टिप्पणी सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर पहले से ही एक जनहित याचिका लंबित है। शासन की ओर से यह जानकारी अदालत को दी गई। इस पर न्यायालय ने नई याचिका को निरस्त कर दिया और याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे अपनी बात पहले से लंबित याचिका में ही रखें। बायपास की हालत बनी चिंता का विषय इंदौर-देवास बायपास और इंदौर-सांवेर रोड की हालत लंबे समय से खराब बनी हुई है। बारिश के मौसम में गड्ढों और निर्माण कार्य के कारण हालात और बिगड़ जाते हैं। हालिया जाम की स्थिति ने प्रशासन और NHAI की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों की मांग स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया पर सक्रिय समूहों की मांग है कि- निर्माण कार्य की स्पष्ट टाइमलाइन जारी की जाए। वैकल्पिक मार्गों की ठोस योजना बनाई जाए। NHAI और जिला प्रशासन समयबद्ध तरीके से निर्माण कार्य पूर्ण करें।