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चंडीगढ़ में नर्सिंग कॉलेज चेयरमैन पर आरोप: 8 छात्राओं ने किया कोर्ट में खुलासा

हिसार हरियाणा के हिसार स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज के चेयरमैन को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। चेयरमैन जगदीश गोस्वामी पर छात्राओं के यौन उत्पीड़न और SC/ST एक्ट जैसी धाराओं के तहत FIR हुई थी। गोस्वामी करीब 3 महीने जेल में रहा।  इस मामले में अब कोर्ट का ऑर्डर आने के बाद छात्राओं के लगाए आरोप सामने आए हैं। जिसमें छात्राओं ने कहा- जबरन बाथरूम में फंसाकर उनकी ब्रा स्ट्रैप खींचने की कोशिश की। हॉस्टल में आकर पैर दबाने को कहा। सोते वक्त गुपचुप ढंग से चादर हटा दी। ऐसे ही कई गंभीर आरोप छात्राओं ने लगाए। हालांकि इस मामले में गोस्वामी के वकील ने कहा था कि कई छात्राओं ने एफिडेविट दिया कि सब गलतफहमी में हुआ है। जो अब सुलझ गया है। वहीं कोर्ट ने कहा कि आरोपी पर पहले कोई केस नहीं है। ट्रायल में ही आरोपों की सच्चाई पता चलेगी। जिसमें समय लगेगा। इसलिए उसे जमानत दी जाती है। 27 मार्च को जमानत के बाद अब इसकी केस की कॉपी से छात्राओं के बयान सामने आए हैं। कॉलेज की 8 छात्राओं की चेयरमैन को लेकर शिकायत पढ़ें.. 1. बाथरूम में फंसाया, टी-शर्ट उतारी, बासी रोटी खाने को कहा एक लड़की ने अपने साथ हुई 3 घटनाओं के बारे में बताया। उसने कहा- एक बार जब वह हॉस्टल में अपने कमरे में जा रही थी, तो जगदीश गोस्वामी ने उसे टेबलेट दिखाने के लिए बुलाया और बाथरूम में फंसाकर उसका शारीरिक उत्पीड़न करने का प्रयास किया। उसने उसके कंधे, कमर और ब्रेस्ट को छूने की कोशिश की। उसने उसकी टी-शर्ट उतारने के बाद ब्रा की स्ट्रैप भी खींचने की कोशिश की। इसके बाद उसने लगातार उसे परेशान किया, जिसमें थप्पड़ मारना, बाल खींचना, कान मरोड़ना और अनचाहा स्पर्श शामिल था। दूसरी घटना में लड़की ने बताया कि जगदीश गोस्वामी हॉस्टल आया और उसे दूसरी लड़की के कमरे में बुलाया और उससे अपने पैर दबाने को कहा। जब उसने मना कर दिया, तो उसने कहा, "क्या तुम इतनी बड़ी हो गई हो कि मुझे मना करोगी?" और जबरदस्ती उससे पैर दबवाने की कोशिश की। तीसरी घटना में छात्रा ने कहा कि जब वह खाना लेने हॉस्टल मेस गई, तो उसने उससे पूछा कि उसे क्या चाहिए। उसने जवाब दिया "रोटी"। उसने हॉस्टल मेस से एक बासी रोटी उठाई और कहा- यह लो और जाओ, यही खाने लायक है। 2. गोस्वामी कमरे में आया, चादर हटाई, शॉर्ट्स में थी दूसरी छात्रा का आरोप था कि 20 अप्रैल 2025 को वह अपने रूम में सो रही थी। इसी दौरान जगदीश गोस्वामी उसके कमरे में आया। उसने उसकी कमर से चादर हटाई और कहा, "ओह, मैंने तुम्हारे शरीर को छुआ है, इसे फिर से ढक लो।" उस समय छात्रा ने सनड्रेस और शॉर्ट्स पहने हुए थे। 3. खत्म करने की धमकी दी, सिर पर सेब रखवाया, पीछे से तीर मारा तीसरी छात्रा ने कहा- जब से मैंने स्ट्राइक में हिस्सा लिया, तब से उसे पर्सनली टारगेट किया जा रहा था और उसे धमकी दे रहा था कि “मैं तुम्हें खत्म कर दूंगा।” कॉलेज मैनेजमेंट और चेयरमैन के फीस बढ़ाने के बाद, स्टूडेंट्स का एक ग्रुप अपनी शिकायतों पर बात करने के लिए इकट्ठा हुआ। उसने बातचीत के दौरान एक सवाल उठाया। अगले दिन, जब वह और उसकी क्लासमेट लगभग 11:15 बजे ब्रेक के समय टहल रहे थे, तो चेयरमैन ने उसे बुलाया और अपने घर पर पर्सनली मिलने के लिए कहा। चेयरमैन ने उसे टारगेट प्रैक्टिस के लिए अपने सिर पर एक सेब रखने को कहा। जब उसने अपनी क्लासमेट के सामने मना किया, तो पीछे से उस पर एक तीर चला दिया गया। छात्रा ने कहा- कई बार, उसे बहुत ज्यादा तकलीफ हुई, जिसके बारे में पूरे स्टाफ को पता था। इसके बावजूद, जब उसे आराम की जरूरत थी, तो उसे ऊपर नहीं जाने दिया गया, न ही कोई दवा दी गई। उससे कहा गया कि वह हॉस्पिटल तभी जाएगी, जब उसकी हालत और खराब हो जाएगी और खराब सेहत के बावजूद उसे भर्ती रहना पड़ा। हालांकि, उसने जींद सिविल चार्ज 500 रुपए होने की वजह से हॉस्पिटल जाने से मना कर दिया। छात्रा ने आगे कहा- इंस्पेक्शन के दौरान उससे काम करवाया गया। उस समय, फिसलकर गिरने की वजह से उसके पैर में फ्रैक्चर था और उसके पास PGI खानपुर से इस बारे में एक मेडिकल रिपोर्ट थी। उसे न तो किसी हॉस्पिटल ले जाया गया और न ही कोई मेडिकल सुविधा दी गई। बार-बार घर जाने की शिकायत करने के बावजूद उसे जाने नहीं दिया गया। जब उसका भाई उसे लेने आया, तो उन्होंने झूठा दावा किया कि उन्हें उसकी हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं है। 4. मेरे भाई को बॉयफ्रेंड कहा, गुंडा भी बताया चौथी छात्रा ने कहा- दिवाली से कुछ दिन पहले मुझे मेरा भाई लेने आया था। हमें खाटू श्याम जाना था। शुरू में स्टाफ ने मुझे जाने से मना कर दिया। जब मैंने विरोध किया तो स्टाफ मेंबर्स ने मेरे भाई के साथ बुरा बर्ताव किया। उन्होंने आगे पूछा कि क्या वह मेरा बॉयफ्रेंड है, जबकि वह हर बार मुझे लेने आता था और मेरी फोटो भी आउटपास पर है। जब मैंने यह बात प्रिंसिपल से कही, तो उन्होंने कहा- तुम्हारा भाई गुंडा है। 5. मेरे चेहरे पर गंदा पानी डाला, घर आने को कहा पांचवीं छात्रा ने कहा- चेयरमैन जगदीश गोस्वामी ने मुझे और मेरी फ्रेंड को नई कार खरीदने के मौके पर मिठाई बांटने के लिए बुलाया। उन्होंने मुझे आगे बुलाया और पूछा, “तुम्हारे हाथ में क्या है?” फिर उन्होंने मेरे चेहरे पर गंदा पानी डाल दिया, जिससे उसके कपड़े गीले हो गए और पूछा, “क्या तुम गुस्से में हो?” मैंने जवाब दिया, “सर, प्लीज अपनी मिठाई रख लो।” वहां जमा हुए सभी लोगों ने कहा कि यह एक मजाक था और उससे अपने कपड़े साफ करने को कहा, यह कहते हुए कि इससे कोई नुकसान नहीं है। चेयरमैन ने दूसरी लड़कियों के साथ भी तीन-चार बार बेइज्जती वाली हरकतें कीं। छात्रा ने आगे बताया- एक दिन, जब वह अपनी क्लासमेट के साथ क्लास जा रही थी, तो चेयरमैन ने उन्हें बुलाया और कहा कि वे अपने सिर पर सेब रखकर खड़ी हों। फिर उन्होंने शीशे … Read more

नर्सिंग कॉलेजों में अब महिलाओं को नहीं मिलेगा 100% आरक्षण, पुरुष उम्मीदवारों को 13 जनवरी तक करने होंगे आवेदन

जबलपुर  मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और ट्यूटर के कुल 286 पदों पर अब महिला उम्मीदवारों को 100% आरक्षण नहीं मिलेगा। एमपी हाईकोर्ट ने पुरुष उम्मीदवारों की याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में विभिन्न फैकल्टी की भर्ती में पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल किया जाएगा। यह जानकारी मंगलवार को हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की ओर से दी गई। ईएसबी के अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है, किंतु लिखित निर्देश की कॉपी अभी नहीं मिली। जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता नौशाद अली द्वारा इस भर्ती में महिला अभ्यर्थियों को दिए जा रहे 100 फीसद आरक्षण को चुनौती दी गई है। सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 पदों पर सीधी भर्ती वकील विशाल बघेल ने कहा- 16 दिसंबर को प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती के जरिए विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर के सभी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए थे। आवेदन की अंतिम तिथि 7 जनवरी थी। पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर किया गया था बघेल ने बताया कि इस मामले में जितने भी पुरुष उम्मीदवार हैं, जो मध्य प्रदेश से डिग्रीधारी हैं और वो महिलाओं के बराबर ही योग्यता रखते हैं। उन्हें सिर्फ इस आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया गया था कि वह पुरुष हैं। जबलपुर निवासी नौशाद अली और अन्य याचिकाकर्ताओं ने याचिका दाखिल की। कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में इन भर्तियों में पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया। जबकि भर्ती नियम और अपेक्स काउंसिल आईएनसी के सभी मापदंड लिंग भेद की अनुमति नहीं देते हैं। इन सबके बाद भी लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से की जा रही भर्ती में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 (2) और भर्ती के नियमों की अनदेखी की जा रही है। याचिका में आरोप- 50% आरक्षण सीमा का उल्लंघन हुआ याचिका में आरोप लगाया गया कि सरकार की इस भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50% आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 16(2) के तहत यह सीधे-सीधे लिंग भेदभाव है। इसके अलावा मध्य प्रदेश शासन ने आरक्षण नीति बनाई हुई है। महिलाओं को आरक्षण देने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। उसके साथ-साथ भर्ती नियम-2023 बनाया है। इनमें भी कहीं ये नहीं लिखा है कि पुरुषों को सिर्फ पुरुष होने के आधार पर भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जाएगा। इस मामले में 29 दिसंबर को हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया था। मंगलवार को भी प्रिंसिपल बेंच में सुनवाई हुई। सरकार ने मौखिक रूप से कहा कि अब भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को भी शामिल किया जाएगा। 68 पदों पर भर्ती में पुरुषों को अपात्र करार दिया था बता दें मामला सामने आने के बाद सरकार ने ट्यूटर के 218 विज्ञापित पदों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया था, लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के कुल 68 पदों पर भर्ती में पुरुषों को अपात्र करार देते हुए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। उनकी ओर से बताया गया कि आवेदन की अंतिम तिथि सात जनवरी है। ऐसे में कोर्ट ने अगली सुनवाई सात जनवरी को निर्धारित कर सरकार को लिखित जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पक्ष रखा। उनका आरोप है कि 16 दिसंबर को ईएसबी द्वारा जारी ग्रुप-1 सब ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 के विज्ञापन में 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर सहित कुल 286 पदों पर महिला उम्मीदवारों को 100 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इनमें पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर किया जाना न सिर्फ भर्ती नियम तथा इंडियन नेशनल काउंसिल के मापदंडों का उल्लंघन है। बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 और सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का भी उल्लंघन है। विज्ञापन के अनुसार, आवेदन 24 दिसंबर से आमंत्रित किए गए थे। सात जनवरी, 2026 इसकी अंतिम तिथि है।