samacharsecretary.com

राष्ट्रपति भवन में शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान, परिवार ग्रहण करेगा

रांची  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में दिशाेम गुरू शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान प्रदान करेंगी। उनकी पत्नी रूपी सोरेन यह सम्मान ग्रहण करेंगी। रूपी सोरेन अस्वस्थ हैं, फिर भी वह सम्मान लेने दिल्ली गई हैं। विधायक कल्पना सोरेन सोमवार को अपनी सास को लेकर दिल्ली गईं। अलंकरण समारोह में परिवार के अन्य सदस्य भी हो सम्मिलित हो सकते हैं। राज्य गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले शिबू सोरेन को देश का यह तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना झारखंड के लिए गौरव की बात है। उन्हें यह मरणोपरांत सम्मान लोक कल्याण और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण के लिए उनके आजीवन संघर्ष और योगदान को देखते हुए प्रदान किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने इसी वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने उन्हें यह सम्मान देने की घोषणा की थी। नशा छोड़ो, खेती करो, मुर्गी-बत्तख पालन करो और शिक्षा को गले लगाओ झारखंड के नायक दिशोम गुरू शिबू सोरेन नशे को विनाश का कारण मानते थे। उनके अधिसंख्य भाषण नशा छोड़ने, खेती तथा मुर्गी-बत्तख पालन करने तथा शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहते थे। नशे के खिलाफ उनकी कट्टर सोच, शिक्षा के प्रति प्रबल समर्थन और खेती-पशुपालन से आत्मनिर्भरता की उनकी अपील ने लाखों आदिवासियों का प्रेरणा स्रोत बन गया। उनके भाषणों ने लाखों आदिवासियों के जीवन की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। तभी तो उनका पूरा जीवन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष का पर्याय रहा। गुरूजी हमेशा कहते थे कि नशा आदिवासी समाज को खोखला कर रहा है। यह हमें कमजोर बनाता है, हमारी जमीन और सम्मान छीनता है। वे अपनी सभाओं में हमेशा कहते थे कि नौकरी के पीछे मत भागो। पशुपालन करो। उनका कहना था कि आदिवासी समाज की असली ताकत उसकी जमीन, संस्कृति और मेहनत है। झारखंड के कई गांवों में उनके अनुयायी आज भी खेती और पशुपालन को अपनाकर उनके बताए रास्तों पर चल रहे हैं। शिक्षा के संबंध में उनका कहना था कि शिक्षा ही वह चाबी है, जो आदिवासियों को शोषण से मुक्ति दिला सकती है। … जब उनकी अंत्येष्ठि में उमड़ा जनसैलाब, मिट गया था आम और खास का भेद दिशोम गुरू शिबू सोरेन की लोकप्रियता का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि उनकी अंत्येष्टि के मौके पर नेमरा में पूरा जनसैलाब उमड़ पड़ा था। क्या आम और क्या खास, लाखों लोग वहां पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने नम आंखों से उन्हें “अंतिम जोहार” किया था। पूरे झारखंड समेत पड़ोसी राज्यों से लोग अपने प्रियनेता को विदाई देने पहुंचे थे। माटी पुत्र को विदाई देते समय प्रकृृति भी रो पड़ी थी। लोग अपने प्रिय नेता की एक झलक पाने को उतावला दिखे।

धर्मेंद्र का सुनहरा साल: पद्म भूषण के साथ जीते कई सम्मान, हिट फिल्मों का ना-टूटे वाला रिकॉर्ड

मुंबई अभिनेता धर्मेंद्र का सोमवार को निधन हो गया है। इस मौके पर आज हम आपको उनके रिकॉर्ड और उनके अवॉर्ड के बारे में बताने वाले हैं। धर्मेंद्र ने बॉलीवुड को शोले, धरम वीर, सीता और गीता, यमला पगला दीवाना और लोफर जैसी कई बेहतरीन फिल्में दी हैं। एक्टर के अलावा धर्मेंद्र प्रोड्यूसर और राजनेता हैं। अपने बेहतरीन काम के लिए उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। धर्मेंद्र को मिला पद्म भूषण धर्मेंद्र को सिनेमा में योगदान देने के लिए कई अवॉर्ड और सम्मान दिए गए थे। उन्हें साल 2012 में भारत सरकार की तरफ से भारत का तीसरा सबसे बड़ा अवॉर्ड पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। नेशनल फिल्म अवॉर्ड साल 1990 में फिल्म 'घायल' रिलीज हुई थी। इसमें धर्मेंद्र के अलावा सनी देओल, मीनाक्षी शेषाद्रि, ओम पुरी और अमरीश पुरी थे। इस फिल्म ने 1990 में सबसे अच्छी फिल्म का नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीता था। फिल्मफेयर अवॉर्ड साल 1991 में धर्मेंद्र की अदाकारी वाली फिल्म 'घायल' को बेस्ट फिल्म के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया। साल 1997 में धर्मेंद्र को लाइफटाइम अचीवमेंट फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया। उनकी फिल्में आई मिलन की बेला, फूल और पत्थर, मेरा गांव मेरा देश, यादों की बारात, रेशम की डोरी, नौकर बीवी का और बेताब को फिल्मफेयर नामांकन मिला। एक साल में कई हिट फिल्में देने का रिकॉर्ड धर्मेंद्र ऐसे अभिनेता हैं जिनके नाम कई हिट फिल्में देने का रिकॉर्ड है। साल 1973 में उन्होंने आठ हिट फिल्में दी थीं। साल 1987 में उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा और नौ हिट फिल्में दीं। उनके इस रिकॉर्ड को अब तक कोई भी बॉलीवुड एक्टर नहीं तोड़ सका। 300 से ज्यादा फिल्मों में किया काम धर्मेद्र के नाम एक रिकॉर्ड यह भी है कि उन्होंने बॉलीवुड की 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। साल 1960 में उन्होंने फिल्म 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' से बॉलीवुड में कदम रखा था। फिल्मों में बेहतरीन अदाकारी की वजह से उन्हें 'ही-मैन' के नाम से जाना जाने लगा।