samacharsecretary.com

बेटियों ने पैरा एशियन गेम्स में लहराया परचम, पदक जीतकर रचा नया इतिहास

 नई दिल्‍ली  हाल ही में जापान में संपन्न एशियन पैरा गेम्स में अपने अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करते हुए देश की बेटियों ने इतिहास रच दिया। इस बार खिलाड़ियों ने पदक जीतने के साथ ही दुनिया के सामने नए मानक भी स्थापित किए। इन खिलाड़ियों की क्षमता सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इनकी कहानियां भी लोगों को प्रेरित करने वाली हैं। पदक जीतने वाली कुछ बेटियों की जीवनयात्रा पर दिनेश दीक्षित की रिपोर्ट… 1.शीतल ने पैरों से लिखी सफलता की कहानी जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के पहाड़ों से निकली छोटी सी दिखने वाली शीतल देवी अपनी मेहनत और जज्बे से सफलता के उस आसमान पर पहुंच चुकी है, जहां पहाड़ों की ऊंचाइयां भी अब बौनी दिखने लगी हैं। वह कहती भी हैं कि कमजोरी हमारे मस्तिष्क में होती है, शरीर में नहीं, बस लक्ष्य संधान कर सही मेहनत करते चलो। पैरा एशियाई खेलों में तीरंदाजी में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर शीतल ने यह साबित भी कर दिया। यह पहला अवसर नहीं है, पिछले पैरा एशियाई खेलों में भी उन्होंने अपने लिए यही पैमाना तय किया था और अब फिर उसे दोहरा भी दिया। इतना ही नहीं उन्होंने विश्व रिकार्ड की बराबरी की और नया एशियाई रिकार्ड भी रच डाला। निरंतर प्रदर्शन दोहराने के दबाव पर शीतल ने कहा कि मैं पुरानी गलतियों के बारे में सोचकर दबाव में नहीं आती। आगे के निशाने पर लक्ष्य साधती हूं और यही सफलता का साधन भी है। शीतल का जीवन कभी भी आसान नहीं था। किश्तवाड़ के एक दूरदराज के गांव में जीवन हर दिन नई चुनौती पेश करता है। बचपन में दुर्लभ बीमारी के कारण उनके दोनों हाथ अविकसित रह गए, पर शीतल ने हार नहीं मानी और पैरों से लिखना, खाना और अन्य कार्य करने सीखे। बचपन से ही पैरों के सहारे वह पेड़ों पर चढ़ जाती थीं। यही उनकी मानसिक मजबूती का प्रमाण भी है और यही अंदाज आगे उनके जीवन के साथ खेल में भी काम आया। उनका बचपन आसान नहीं था। परिवार उन्हें संभालता था, पर समाज से ताने उनकी नियति बन चुके थे। हालांकि, इन सबका जवाब शीतल ने अपने खेल से दिया। सेना के अधिकारियों की उन पर नजर पड़ी और उनको कृत्रिम हाथ लगावाने का प्रयास किया पर वह सफल नहीं हो पाया। बाद में सेना के सहयोग से ही वह मां वैष्णोदेवी खेल केंद्र पहुंचीं। यहीं उन्होंने मुंह से पकड़कर और पैरों से धनुष थाम तीर चलाना सीखा। निरंतर मेहनत और एकाग्रता ने उन्हें वह मुकाम दिला दिया, जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता था। उनके पिता महेंद्र सिंह भी कहते हैं कि आज शीतल जिस मुकाम पर हैं, उन्हें देखकर आश्चर्य होता है। यह सब उसने अपनी मेहनत और सरकार की मदद से हासिल किया साथ ही प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का असर है कि वह हर चुनौती को पार करने में सफल हो रही है। 2.अभावों से जूझकर चमकीं संजना सपने देखने से ज्यादा मुश्किल उन्हें हकीकत में बदलने का सफर होता है। खासकर तब, जब सुविधाओं का अभाव हो और हर कदम पर परिस्थितियों से लड़ना पड़े। झारखंड के लोहरदगा के शास्त्री नगर ढोढ़हा टोली की संजना कुमारी ने इन्हीं मुश्किलों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा। पैरा बैडमिंटन में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने अभाव ज्यादा दिनों तक रास्ता नहीं रोक सकते। उनकी यह उपलब्धि परिवार के त्याग, गुरु के मार्गदर्शन और एक बेटी के अदम्य साहस की कहानी है। अब संजना का सपना पैरालिंपिक में देश के लिए पदक जीतना है। संजना कहती हैं, दिव्यांगजनों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी और खेल के क्षेत्र में सीमित अवसरों के बीच मैंने पैरा बैडमिंटन को अपना भविष्य बनाने का फैसला किया। खेल की दुनिया में आगे बढ़ने का निर्णय भी मेरा था। शुरुआत में स्वजन को आश्चर्य हुआ और उन्हें मेरी सुरक्षा व भविष्य को लेकर चिंता भी, लेकिन मेरा जुनून कम नहीं हुआ। आखिरकार मेरी मेहनत और दृढ़ निश्चय देखकर स्वजन ने भी साथ देने का फैसला किया। संजना कहती हैं, संघर्ष की शुरुआत रांची में प्रशिक्षण के दौरान काफी कठिन रही। मैं रोजाना प्रशिक्षण केंद्र के लिए अकेले निकलती थी और रात आठ बजे लौटती थी, लेकिन थकान और असुविधाओं के बीच भी लक्ष्य स्पष्ट रहा। प्रशिक्षण के बाद हमने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से लखनऊ में प्रशिक्षक गौरव खन्ना से संपर्क किया और स्वजन मुझे लखनऊ लेकर गए। वहां करीब दो लाख रुपये प्रतिमाह खर्च होने की जानकारी मिली। मजबूरी में मुझे वापस लौटना पड़ा। हालांकि, बाद में गौरव जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि परिवार रहने और खाने का खर्च उठाए, बाकी प्रशिक्षण और खेल से जुड़ी सुविधाओं के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस सहयोग ने मुझे आगे बढ़ने का अवसर दिया। पांच साल से अधिक समय से मेरी की जिंदगी का बड़ा हिस्सा प्रशिक्षण केंद्रों में बीत रहा है। मैं घर आती भी हूं तो मुश्किल से एक-दो सप्ताह ही परिवार के साथ रह पाती हूं। मैंने अब तक 11 देशों में विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए हैं। यदि सरकार और खेल संस्थाओं से और मदद मिले तो मैं और पदक जीतने का प्रयास करूंगी। बेटियों के लिए संजना का संदेश है कि आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरें। अनुशासन बनाए रखें, मेहनत करें और हार से डरकर पीछे न हटें। खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सपनों को सच करने का माध्यम भी है। 3.बहन का सपना पूरा करने उतरीं कोकिला जूडो में रजत पदक जीतने वाली दृष्टिबाधित खिलाड़ी कोकिला कौशिक ने संघर्षों के बीच अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। उनकी जिंदगी और खेल यात्रा अब फिल्म के माध्यम से भी लोगों के सामने आएगी। हरियाणा के हिसार की कोकिला की सफलता के पीछे परिवार का लंबा संघर्ष है। उनकी बड़ी बहन सफलता जूडो खिलाड़ी थीं, लेकिन कंधे की चोट के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा। बहन के अधूरे सपने को आगे बढ़ाने के लिए कोकिला ने जूडो चुना। बेटी के करियर को आगे बढ़ाने के लिए पिता कृष्ण कुमार कौशिक ने करीब पचास लाख रुपये खर्च किए। कोकिला की मां सुमन शर्मा एथलीट रही हैं, जबकि भाई कुशल कौशिक कुश्ती खिलाड़ी हैं। खेल से … Read more

पैरा एशियन गेम्स में भारत ने रचा इतिहास, पिछला रिकॉर्ड टूटा

नागोया   भारत ने पैरा एशियन गेम्स में अबतक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारत ने आइची-नागोया में 30 स्वर्ण सहित कुल 114 पदक जीते और हांग्झू खेलों का अपना रिकॉर्ड तोड़ दिया। भारत ने पैरा एशियन गेम्स के पिछले संस्करण में 27 स्वर्ण सहित कुल 108 पदक जीते थे जो उसका इन खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। लेकिन इस बार पैरा एथलीटों ने अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भारत ने इस तरह अपने अभियान का अंक रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ किया। पैरा एशियाड में भेजा था 168 एथलीटों का दल भारत ने इस बार इन खेलों में 168 खिलाड़ियों का दल भेजा था जो 2023 में हांग्झू में हुए पिछले चरण में हिस्सा लेने वाले दल की संख्या से लगभग आधा था। भारतीय खिलाड़ियों ने हांग्झू में 27 स्वर्ण सहित 108 पदक जीते थे जो उस समय देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। शुक्रवार को पहली बार स्वर्ण पदक जीतने में पैरा एथलेटिक्स का दबदबा नहीं रहा बल्कि बैडमिंटन खिलाड़ियों, तीरंदाजों और निशानेबाज मोना अग्रवाल ने भी भारत के पदकों की संख्या बढ़ाने में अहम योगदान दिया। इस तरह भारत ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदकों के साथ अपना अभियान पूरा किया।   पदक तालिका में किस स्थान पर भारत? भारत फिलहाल पदक तालिका में चौथे स्थान पर है, लेकिन शनिवार को कुछ स्पर्धाओं के फाइनल होने के कारण उसकी स्थिति बदल सकती है। भारत का उन स्पर्धाओं में कोई खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले रहा है। अभियान के आखिरी दिन भारत ने नौ स्वर्ण पदक जीते जो इस चरण में उसका एक दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। ये स्वर्ण पदक तीरंदाजी, निशानेबाजी, बैडमिंटन और एथलेटिक्स में मिले। एथलेटिक्स ने हमेशा की तरह भारत के लिए पदक संख्या में इजाफा किया। इस स्पर्धा में भारत ने कुल 65 पदक जीते जो 2023 के मुकाबले 12 अधिक हैं। शुक्रवार को हालांकि बैडमिंटन खिलाड़ियों ने भी सुर्खियां बटोरीं और तीन स्वर्ण पदक जीते। इनमें पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार के व्यक्तिगत वर्गों के स्वर्ण पदक शामिल हैं।   तीरंदाजों का शानदार प्रदर्शन एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय तीरंदाजों ने शानदार प्रदर्शन किया है। हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने पुरुष रिकर्व युगल स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन को 5-1 से हराकर शीर्ष स्थान हासिल किया। वहीं, महिला रिकर्व युगल स्पर्धा में भारत की भावना चौधरी और पूजा जात्यान को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। उन्हें फाइनल में चीन की जोड़ी के खिलाफ 0-6 से हार मिली। निशानेबाज मोना अग्रवाल ने महिला 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में 357.5 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड बनाया, जबकि हनी ने पुरुषों की भाला फेंक एफ37/38 स्पर्धा में 60.49 मीटर का थ्रो कर नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया। निशानेबाज मोना अग्रवाल ने महिला 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पैरा एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन पुरुषों की 400 मीटर टी64 स्पर्धा में संदीप ने विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि हमवतन अजय कुमार ने कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके अलावा निमिषा चक्कुंगलपरंबिल ने महिला लंबी कूद टी47 और प्रमोद बिजारनिया ने पुरुष 1500 मीटर टी46 स्पर्धा में रजत पदक जीते। हालांकि, चक्का फेंक में प्रवीण शर्मा और गोला फेंक में अमीषा रावत चौथे स्थान पर रहे। भारत के संदीप ने पुरुषों की 400 मीटर टी64 फाइनल में 52.28 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने इस प्रदर्शन के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया। भारत के अजय कुमार ने भी इस स्पर्धा में पदक जीता। उन्होंने 53.61 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया। उनका समय गेम्स रिकॉर्ड रहा। भारत के हनी ने एथलेटिक्स में देश का मान बढ़ाया। उन्होंने पुरुषों की भाला फेंक एफ37/38 स्पर्धा में 60.49 मीटर का विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता।   भाला फेंक में क्लीन स्वीप भारत के स्टार पैरा भाला फेंक एथलीट सुमित अंतिल ने शुक्रवार को पैरा एशियन गेम्स में पुरुषों की एफ 42-44/61-64 संयुक्त स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अपने खिताब का बचाव किया। वहीं, इस स्पर्धा में भारत ने तीनों पदक अपने नाम किए। दो बार के पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता और विश्व रिकॉर्ड धारक 28 वर्षीय सुमित ने अपने दूसरे प्रयास में 72.46 मीटर दूर भाला फेंककर स्वर्ण पदक हासिल किया। एफ42 वर्ग में हिस्सा लेने वाले महेंद्र गुर्जर ने 59.03 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता, जबकि एफ44 वर्ग के संदीप संजय सरगर ने 64.48 मीटर भाला फेंककर कांस्य पदक हासिल किया।  

जेवलिन थ्रो में भारत को दोहरी सफलता, प्रदीप कुमार और आयुष वर्मा ने जीते मेडल

नई दिल्ली ऐसा बहुत ही कम होता है कि किसी एक ही इवेंट में एक ही देश के दो मेडल आएं। हालांकि, भारत के साथ जापान के आइची-नागोया में खेले जा रहे पैरा एशियाई खेलों में ऐसा हुआ है। जेवलिन थ्रो में एफ53/54 इवेंट में भारत के हिस्से दो मेडल आए हैं। प्रदीप कुमार ने यहां सिल्वर जीता तो वहीं आयुष वर्मा ने ब्रॉन्ज पर कब्जा जमाया। प्रदीप कुमार ने अपनी बेस्ट थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने 27.54 मीटर की थ्रो की और कुल 901 अंक हासिल किए। वहीं, आयुष वर्मा ने 17.88 की थ्रो के साथ तीसरा स्थान हासिल करते हुए ब्रॉन्ज जीता। उनके कुल 793 अंक रहे। ईरान के इरफान बोनडोरी ने 30.24 मीटर की थ्रो और 986 अंकों के साथ गोल्ड मेडल जीता। दूसरी बार हुआ ऐसा दोनों ही खिलाड़ियों ने अपनी बेस्ट थ्रो करते हुए एक ही इवेंट में दो मेडल जीते। हालांकि, यह इन खेलों में दूसरी बार है जब भारत ने जेवलिन थ्रो में एक ही इवेंट में दो मेडल अपने नाम किए हैं। पहले दिन रिंकू हुड्डा और अजीत सिंह ने एफ46 इवेंट में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीते थे। टेबल टेनिस में भी हुआ कमाल वहीं, टेबल टेनिस में भी भारत की झोली में मेडल आए हैं। सोनलबेन पटेल ने महिला सिंगल्स क्लास 3 इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। उन्हें सेमीफाइनल में साउथ कोरिया की यून जियू ने 0-3 (7-11, 5-11, 6-11) से मात दी। उनसे पहले भाविना पटेल ने भी देश की झोली में ब्रॉन्ज मेडल डाला था। भाविना को महिला सिंगल्स 4-5 के सेमीफाइनल में चीन का झांग बियान के खिलाफ 0-3 से हार मिली। टेबल टेनिस में प्राची पांडे ने भारत को तीसरा ब्रॉन्ज दिलाया। महिला सिंगल्स क्लास 6 में उन्हें ईराक की अल डायनी नाजिल्लाह से हार का सामना करना पड़ा । ईराकी खिलाड़ी ने 3-0 से जीत हासिल की।