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सांसदों को चेतावनी: समय पर न पहुंचे तो हाजिरी कटेगी, सैलरी भी प्रभावित होगी

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र में लोकसभा सचिवालय सांसदों की हाजिरी को लेकर एक नई शुरुआत करने जा रहा है। अब सांसदों की हाजिरी सदन के भीतर सीट पर बैठकर ही डिजिटल तरीके से लग पाएगी। यदि कोई सांसद देरी से सदन में पहुंचता है और तब तक हंगामे या किसी और वजह से सदन दिनभर के लिए स्थगित हो जाता है तो फिर माननीय की उस दिन की हाजिरी नहीं लग पाएगी। उन्हें एक दिन के वेतन-भत्ते से हाथ धोना पड़ेगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम यह प्रावधान करने जा रहे हैं कि सदन में पहुंचकर ही हाजिरी लगाई जा सकेगी। अभी तक सदन के बाहर हाजिरी के लिए जो रजिस्टर होता था, अब उसे हटा देंगे। ऐसे सांसद जो रजिस्टर में हाजिरी लगाकर चले जाते थे, या सदन स्थगित होने के बाद पहुंचते थे, उनके लिए मुश्किल होगी। उन्हें सदन में जाना ही होगा। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही डिजिटल हो चुकी है। अब उसमें एआई का इस्तेमाल परीक्षण के तौर पर चल रहा है। इसमें काफी निगरानी और सावधानी की जरूरत है। अभी परीक्षण के तौर पर वक्ताओं के भाषणों के अनुवाद में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। बाद में लोग उसे चेक करते हैं। यह 80 फीसदी तक सटीक है। ओम बिरला ने यह जानकारी 86वें ऑल इंडिया प्रिज़ाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बातचीत में दी. उन्होंने बताया कि संसद परिसर में सदन के बाहर से हाजिरी लगाने की पुरानी व्यवस्था अब समाप्त कर दी जाएगी. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अब केवल सदन के अंदर सीट पर बैठने पर ही उपस्थिति दर्ज होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश सदन स्थगित हो जाता है, तो उसके बाद कोई भी सदस्य हाजिरी दर्ज नहीं कर सकेगा. इस कदम से सांसदों को रोज़ाना कार्यवाही की शुरुआत से ही सदन में उपस्थित रहने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. ओम बिरला ने कहा कि यह फैसला पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि उपस्थिति वास्तविक भागीदारी को दर्शाए, न कि केवल संसद परिसर में मौजूद रहने को. उन्होंने बताया कि लोकसभा कक्ष में हर सीट पर निर्धारित कंसोल पहले से ही लगाए जा चुके हैं. यह सुधार संसदीय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और सत्रों की उत्पादकता बढ़ाने की व्यापक पहल का हिस्सा है. लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संसद में एआई टूल्स के इस्तेमाल को लेकर परीक्षण किया जा रहा है और संभावित त्रुटियों से निपटने के लिए मैनुअल सत्यापन की व्यवस्था भी की गई है. चुनिंदा बैठकों में रियल-टाइम ट्रांसलेशन का प्रयोग हो रहा है, जो आने वाले महीनों में पूरी तरह लागू किया जाएगा. इसके अलावा सांसदों को 24×7 शोध सहायता सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं. ओम बिरला ने विधानसभा सत्रों की घटती संख्या पर भी चिंता जताई और कहा कि विधायी संस्थाओं की प्रभावशीलता, जवाबदेही और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सदन के संचालन की जिम्मेदारी भले ही अध्यक्ष की हो, लेकिन सुचारू कार्यवाही सरकार और सदस्यों के सहयोग पर निर्भर करती है. सांसदों की उपस्थिति से जुड़ा यह कदम संसद की गरिमा को मजबूत करने वाला बताया जा रहा है और कई सदस्यों ने इसका स्वागत किया है. उल्लेखनीय है कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा और केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा. आईटी कंपनी की मदद से इसे 100 फीसदी सटीक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि मानसून सत्र से अनुवाद को पूरी तरह से एआई संचालित कर देंगे। इससे फायदा यह होगा कि अभी अनुवाद के कारण चार घंटे में कार्यवाही का ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड होता है। एआई के इस्तेमाल से यह आधे घंटे में हो जाएगा। अनुसंधान में भी एआई का इस्तेमाल किया जाएगा। विपक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए जेल जाने पर मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान से जुड़े विधेयक पर संसदीय समिति में विपक्ष शामिल नहीं हुआ लेकिन अब विपक्ष की तरफ से संकेत दिए गए हैं कि वह अपने विचार रखना चाहता है। इस बारे में पूछे जाने पर बिरला ने कहा कि यदि वे आते हैं तो उनके विचारों को समाहित करने का प्रयास किया जाएगा। बजट सत्र पर विपक्ष के संभावित रुख पर बिरला ने कहा कि वे चाहते हैं सदन चले। विपक्ष को अपनी बात चर्चा में रखनी चाहिए। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में वह हर बात रख सकता है। विधानसभाएं न्यूनतम 30 दिन चले ओम बिरला ने कहा कि लखनऊ में चल रहे पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में कहा, ज्यादातर विधानसभाएं साल में 30 दिन भी नहीं चल पा रही हैं। सम्मेलन में संकल्प पारित करेंगे कि विधानसभाएं न्यूनतम 30 दिन चले। कुछ का रिकॉर्ड अच्छा है। असीमित न हो अधिकार एक प्रश्न के उत्तर में बिरला ने कहा कि स्पीकरों के अधिकारों पर भी कई बैठकों में चर्चा हुई है। वे चाहते हैं कि स्पीकर के अधिकार असीमित नहीं होने चाहिए। पेपरलेस सदन बिरला ने कहा,संसद के अलावा सभी विधानसभाओं को पेपरलेस बनाया जा चुका है। अनेक विधानसभाओं की कार्यवाही यूट्यूब पर लाइव भी हो रही है। इसी साल सभी विधानसभाओं का पूरी तरह से डिजिटलीकरण हो जाएगा। महाभियोग पर रिपोर्ट का इंतजार जस्टिस वर्मा के खिलाफ लाए गए महाभियोग पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को लेकर ओम बिरला ने कहा कि समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही रिपोर्ट आएगी उस पर आगे बढ़ा जाएगा। बजट सत्र में महाभियोग पर अभी कह नहीं सकते।

‘आवास से संसद तक होगा कब्जा’, इंकलाब मंच के तख्तापलट वाले बयान से मचा सियासी हड़कंप

ढाका बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा की आग शांत होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। इंकलाब मंच ने आज यानी रविवार से ढाका और राजधानी से बाहर भी प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। इंकलाब मंच ने आ देशव्यापी बंद का आह्वान किया है। सुबह 11 बजे से ही बंद शुरू हो गया है। वहीं इंकलाब मंच के सदस्यों ने यूनुस सरकार को ‘तख्तापलट’ तक की चेतावनी दे डाली है। इंकलाब मंच मे फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया कि ढाका में शाहबाग इलाके में जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। शुक्रवार से ही यहां बहुत सारे कार्यकर्ता धरने पर बैठे हैं। शनिवार को भी ढाका में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन के चलते जाम लग गया। इंकलाब मंच ने ढाका, सिलहेट, चट्टोग्राम और कुश्तिया में प्रदर्शन किए। शाहबाग में इंकलाब मंच के सदस्य अब्दुल्ला ने कहा कि आज तो हम शाहबाग में हैं लेकिन कल तक जमुना तक कब्जा हो जाएगा। बता दें कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के आवास का नाम जमुना है। अल जबर ने कहा कि शुक्रवार से ही इतने सारे लोग धरने पर बैठे हैं लेकिन यूनुस के कान में आवाज नहीं पहुंच रही है। लोग इतनी ठंड में भी घरों को छोड़कर सड़कों पर बैठे हैं। ऐसे में लोगों का विश्वास सरकार से उठ रहा है। तख्तापलट की धमकी द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक जबर ने कहा, अगर आपको लगता है कि सचिवालय और कैंट के अंदर आपका नियंत्रण है तो यह गलत है। उन्होंने कहा कि 12 दिसंबर को हादी की नमाज-ए-जनाजा के दौरान अगर हम चाहते तो सरकार बदल देते। तुम्हारा जमुना और कैंट भी तुम्हें बचा नहीं सकता था।  

संविधान सदन में आज ‘वंदे मातरम’ पर मंथन—10 घंटे की चर्चा में पीएम मोदी की मौजूदगी

नई दिल्ली  भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद के शीतकालीन सत्र में इस ऐतिहासिक गीत पर विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। लोकसभा में यह चर्चा सोमवार को होगी, जिसके लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस विशेष बहस में हिस्सा लेंगे। चर्चा का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के इस प्रेरक गीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करना है। इस निर्णय पर सहमति 30 नवंबर को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई ऑल-पार्टी मीटिंग और लोकसभा व राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठकों में बनी। राज्यसभा में भी एनडीए सदस्यों ने वंदे मातरम पर विशेष चर्चा की जोरदार वकालत की। सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए सभी राजनीतिक दलों को इसमें सहभागी बनने का आग्रह किया है। ‘वंदे मातरम’ का इतिहास भारत ने 1950 में ‘वंदे मातरम’ को अपने राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया था। इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में संस्कृतनिष्ठ बंगाली में लिखा था। यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है, जिसका प्रकाशन 1882 में किया गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ जनमानस में जोश भरने वाला प्रमुख गीत बना। इसके 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने पिछले दिनों स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे स्वतंत्रता संग्राम की अमर धरोहर बताते हुए युवाओं से इसका अधिकाधिक गान करने की अपील की थी। संसद में सत्र की तैयारी और राजनीतिक हलचल लोकसभा BAC की बैठक में कांग्रेस ने विशेष गहन संशोधन (SIR) और चुनावी सुधारों पर बहस की मांग की, पर सरकार ने ‘वंदे मातरम’ की चर्चा को प्राथमिकता दी। तृणमूल कांग्रेस ने भी लोकसभा में इस विशेष चर्चा का समर्थन किया। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक सोमवार सुबह मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में अपनी रणनीति तय करेगा।   शीतकालीन सत्र का एजेंडा शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें 15 बैठकें होंगी। इस सत्र में 10 नए विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें परमाणु ऊर्जा, उच्च शिक्षा, राष्ट्रीय राजमार्ग और बीमा क्षेत्र सुधार से जुड़े बिल शामिल हैं। इसके अलावा, 2025–26 के प्रथम अनुपूरक अनुदान मांगों पर भी विस्तृत चर्चा होगी।  

संसद का शीतकालीन सत्र गर्माने को तैयार: SIR पर घिरने की तैयारी, सरकार 14 अहम बिल लाने को तैयार

 नई दिल्ली संसद के शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है, जो 19 दिसंबर तक चलेगा. संसद सत्र हंगामेदार रहने के आसार हैं. नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ नई एफआईआर को लेकर कांग्रेस नाराज है. इसके अलावा देश में चल रहे एसआईआर प्रक्रिया को लेकर घमासान मच सकता है.  देश के 12 राज्यों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने संसद में सरकार को घेरने का प्लान बनाया है. इसके अलावा दिल्ली आत्मघाती बम धमाके और दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की खराब स्थिति पर चर्चा की मांग कर सत्र को हंगामेदार बनाने के आसार जता दिए हैं. वहीं, सरकार इस सत्र में असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने समेत 14 विधेयकों के जरिये अपने सुधार के एजेंडे पर आगे बढ़ाने की तैयारी की है. सरकार ने कहा कि संसद की कार्यवाही अच्छी तरह चलनी चाहिए और वह गतिरोध की स्थिति को टालने के लिए विपक्षी दलों के साथ बातचीत जारी रखेगी. सरकार 14 बिल कराएगी पास संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कुल 15 बैठकें होंगी. इस दौरान सरकार का फोकस 14 विधेयक पास कराने की है. सरकार दिवाला कानून, बीमा कानून, सिक्योरिटीज मार्केट, कॉर्पोरेट कानून, राष्ट्रीय राजमार्ग, उच्च शिक्षा आयोग, एटॉमिक एनर्जी, जीएसटी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सेस बिल संसद में पेश करेगी.  शीतकालीन सत्र के दौरान अनुदानों की अनुपूरक मांगों का पहला बैच भी प्रस्तुत किया जाएगा, उन पर चर्चा की जाएगी और मतदान होगा. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई, जिसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मैं सकारात्मक रूप से कह रहा हूं कि हम विपक्ष की बात सुनने के लिए तैयार हैं, संसद सबकी है, देश की है.  उन्होंने कहा कि संसद में हर मुद्दे पर चर्चा करने का एक तरीका होता है. नियम होते हैं, परंपराएं होती हैं.' संसद की कार्यवाही अच्छी तरह चलनी चाहिए और सभी गतिरोध को टालने के लिए विपक्षी दलों के साथ बातचीत जारी रखेंगे.  सरकार को संसद में घेरेगा विपक्ष शीतकालीन सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी विपक्ष ने कर ली है. एसआईआर प्रक्रिया के मुद्दे पर विपक्ष पूरी तरह से एकजुट है. कांग्रेस से लेकर टीएमसी, समाजवादी पार्टी और DMK तक ने वोटर लिस्ट रिवीजन (एसआईआर) के खिलाफ संसद में सरकार के घेरने की तैयारी की है. विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा कराने की बात सरकार से की है. सोनिया गांधी के नेतृव में कांग्रेस की पार्लियामेंट्री स्ट्रेटजी ग्रुप की बैठक में सभी नेताओं ने एक सुर में यह मांग उठाई कि एसआईआर के मुद्दे पर चर्चा कराई जानी चाहिए. राहुल गांधी ने कहा कि एसआईआर में बीएलओ की आत्महत्या गंभीर मुद्दा है और इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा. उन्होंने कहा कि एसआईआर के नाम पर पिछड़े, दलित, वंचित गरीब वोटरों को लिस्ट से हटाकर बीजेपी अपनी मनमाफिक वोटर लिस्ट तैयार कर रही है. इसे मुद्दे को सांसद उठाना होगा. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि सभी सांसद अपने-अपने इलाकों के स्थानीय मुद्दों को सदन में उठाएं. उन्होंने आंतरिक सुरक्षा को एक बड़ा मुद्दा बताया और कहा कि दिल्ली में हुआ आतंकी हमला एक बड़ी चूक है. बैठक में उन्होंने कहा कि एयर पॉल्यूशन के मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए सरकार पर दबाव बनाना होगा. कांग्रेस से लेकर सपा, टीएमसी सहित तमाम विपक्षी दलों ने एसआईआर के साथ ही दिल्ली में आतंकी हमले, की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. साथ ही उन्होंने वायु प्रदूषण, विदेश नीति, किसानों की स्थिति, महंगाई, बेरोजगारी और कुछ अन्य विषयों पर सत्र के दौरान चर्चा कराने का आग्रह किया. संसद सत्र में होगा टकराव शीतकालीन सत्र में सरकार का एक बड़ा फोकस नेशनल सॉन्ग, 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर प्रस्तावित चर्चा है. सरकार इस गीत पर चर्चा करान चाहती है. यह एक ऐसा टॉपिक जिसे पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में यह आरोप लगाकर फिर से उठाया कि कांग्रेस ने 1937 में कई लाइनें हटा दीं. एक ऐसा काम जिसने उनके अनुसार विभाजन के बीज बोए हैं.   सरकार ने साफ कर दिया है कि एसआईआर का मुद्दा संसद में नहीं उठाया जा सकता. सरकार का कहना है कि वोटर रोल में बदलाव चुनाव आयोगका एक रूटीन प्रोसेस है और इस पर संसद में बहस नहीं हो सकती. उसने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव निकाय ने पहले ही कोर्ट के गाइडेंस के हिसाब से काम किया है. ऐसे में साफ है कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की संभावना है.