samacharsecretary.com

बच्चों से जुड़े अपराध में लंबी जद्दोजहद: MP में तेजी, दिल्ली में 4.5 साल लगते हैं केस सुलझाने में

भोपाल  मध्य प्रदेश में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने की रफ्तार देश के कई बड़े राज्यों और महानगरों की तुलना में काफी बेहतर है। राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) में इन मामलों के ट्रायल (विचारण) में लगने वाला औसत समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों के मुकाबले काफी कम है। एमपी में 380 दिन में फैसला, दिल्ली में साढ़े 4 साल विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी 2024 के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में एक पॉक्सो मामले के निपटारे में औसतन 380 दिन का समय लगता है। इसकी तुलना यदि अन्य राज्यों से की जाए, तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली है।     दिल्ली: यहां पॉक्सो केस के ट्रायल में औसतन 1639.5 दिन (लगभग 4.5 साल) लग रहे हैं।     गुजरात: यहां न्याय मिलने में औसतन 1292.5 दिन का समय लगता है।     उत्तर प्रदेश: यहां भी ट्रायल में औसतन 861 दिन लगते हैं, जो एमपी से दोगुने से भी अधिक है। देशभर में 2.24 लाख से ज्यादा मामले लंबित मंत्रालय ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो अधिनियम के तहत कुल 2,24,572 मामले लंबित थे। इन मामलों के त्वरित निपटान के लिए वर्तमान में देश भर में 774 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय कार्य कर रहे हैं, जिनमें 398 विशेष तौर पर केवल पॉक्सो (ई-पॉक्सो) कोर्ट हैं। चाइल्ड फ्रेंडली न्याय प्रणाली पर सरकार का फोकस सरकार पीड़ितों को सुविधाजनक माहौल देने के लिए न्यायालय परिसरों के भीतर सुभेद्य साक्षी निक्षेपण केन्द्रों (VWDC) के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसके माध्यम से बच्चों के लिए डरावने न्यायिक वातावरण के बजाय एक 'चाइल्ड फ्रेंडली' माहौल तैयार किया जा रहा है। इसके लिए अब तक 10,000 से अधिक प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदार मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। इसलिए, कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा और अपराधों की जांच व अभियोजन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए कई कदम उठा रही है। 2.45 मामले अभी भी पेंडिंग न्याय में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों और विशेष POCSO अदालतों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। 31 दिसंबर 2025 तक, देश भर में 774 FTSCs और 398 e-POCSO अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों ने 3.66 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है, जबकि लगभग 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं। 22 राज्यों में 880 फास्ट ट्रैक अदालत इसके अलावा, 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 880 फास्ट-ट्रैक अदालतें भी चल रही हैं। ये अदालतें गंभीर अपराधों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और लंबी बीमारियों से पीड़ित लोगों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करती हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि मध्य प्रदेश में इन 880 अदालतों में से एक भी फास्ट-ट्रैक अदालत कार्यरत नहीं है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 373 और महाराष्ट्र में 102 ऐसी अदालतें हैं। मध्य प्रदेश में 67 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें, जिनमें POCSO अदालतें भी शामिल हैं, कार्यरत हैं। अब ट्रायल को भी समझ लीजिए     ट्रायल का औसत समय: विशेष रूप से उस अवधि को दर्शाता है जो अदालत में 'ट्रायल' (विचारण) की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंतिम फैसले तक लगती है।     ट्रायल की शुरुआत: कानूनी प्रक्रिया में ट्रायल तब शुरू माना जाता है, जब पुलिस अपनी जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर देती है और अदालत उस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करती है।     अवधि की गणना: दस्तावेजों में 'औसत विचारण समय' की गणना उन दिनों के आधार पर की गई है जो फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) और अनन्य पॉक्सो (e-POCSO) न्यायालयों में मामले की सुनवाई चलने और फैसला आने के बीच व्यतीत हुए हैं।     केस दर्ज होने से अंतर: आमतौर पर केस दर्ज होने (FIR) और विचारण (Trial) शुरू होने के बीच 'जांच' का समय होता है। जो 380 दिन (मध्य प्रदेश के लिए) का आंकड़ा दिया गया है, वह मुख्य रूप से अदालती कार्यवाही (Trial) में लगने वाला समय है।     त्वरित निपटान का लक्ष्य: इन विशेष न्यायालयों का उद्देश्य ही यह है कि विचारण की इस अवधि को कम किया जाए ताकि पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े। मंत्री बोले- जितना जल्दी न्याय मिलेगा, तभी हम कहेंगे न्याय हुआ पॉक्सो के मामलों के जल्द निपटारे पर मप्र के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा- न्याय जितने जल्दी मिले, तभी हम कह सकते हैं कि न्याय हुआ। अन्यथा जितना देरी होगी उतना अन्याय की दिशा में हम बढे़ेंगे। मप्र के लिए हमें यह संतोष है कि जो शिकायतें हुई उनका जितना जल्दी हो सके न्याय दिलाने का प्रयास किया है।

POCSO केस में कथावाचक श्रवण दास फंसे, पुलिस ने दर्ज किया पीड़िता का बयान, मौनी बाबा पर भी सवाल

दरभंगा दरभंगा में प्रसिद्ध कथावाचक श्रवण दास और उनके गुरु राम उदित दास उर्फ मौनी बाबा के खिलाफ गंभीर आरोपों में महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पीड़िता की मां के आवेदन पर दोनों के खिलाफ पोक्सो एक्ट की धारा 4/6/64(1) सहित BNS की धारा 351(2), 352, 89 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस बात की पुष्टि डीएसपी सदर राजीव कुमार ने की है। उन्होंने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण भी कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पचाढ़ी मठ के महंत और राम जानकी मंदिर, बलभद्रपुर के महंत राम उदित दास के शिष्य एवं कथावाचक श्रवण दास पर एक नाबालिग युवती ने शादी का झांसा देकर लंबे समय तक शारीरिक शोषण का आरोप लगाया था। युवती ने मामले से जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी किए थे, जिनमें कथावाचक के साथ बंद कमरे में शादी से जुड़े दृश्य भी सामने आए थे। पीड़िता की मां द्वारा महिला थाना में दिए गए आवेदन के अनुसार, कथावाचक श्रवण दास ने नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर शादी का झांसा दिया और करीब एक वर्ष तक उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। इस दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई, जिसके बाद आरोपी ने दो बार दवा खिलाकर गर्भपात कराया। इससे लड़की को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसकी हालत गंभीर हो गई। बाद में परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के बाद उसकी जान बच सकी। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि कथावाचक श्रवण दास ने पीड़िता के घर में ही किराए पर कमरा ले रखा था और घर में कोई नहीं होने पर वह नाबालिग के साथ दुष्कर्म करता था। पीड़िता की मां का आरोप है कि जब इस पूरे मामले की जानकारी महंत मौनी बाबा को दी गई, तो उन्होंने लड़की के बालिग होने पर शादी कराने का आश्वासन दिया। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथावाचक श्रवण दास और नाबालिग लड़की की बंद कमरे में शादी दिखाई दे रही है। आरोप है कि 29 नवंबर 2024 को महंत मौनी बाबा ने अपने भतीजे कथावाचक श्रवण दास की शादी गुपचुप तरीके से करवा दी और पीड़िता के परिजनों पर मामला दर्ज नहीं कराने का दबाव बनाया। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथावाचक ने अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी। साथ ही 8 से 10 लोगों के साथ घर पर आकर केस न करने का दबाव बनाया गया। इस पूरे मामले पर डीएसपी सदर राजीव कुमार ने बताया कि कथावाचक के खिलाफ कांड संख्या 182/25 दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं मामले की जांच कर रहे हैं, एफएसएल टीम से भी जांच कराई जा रही है। पीड़िता का बयान कोर्ट में दर्ज कराया जा रहा है और मेडिकल जांच भी कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

केरल में POCSO मामला: मां को अपराध के लिए उकसाने का दोषी पाया, अदालत ने कही यह बात

तिरुवनंतपुरम केरल की एक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने महिला और उसके पुरुष साथी को 180 साल की सजा सुनाई है। दरअसल, पुरुष पर महिला की 12 साल की बेटी के साथ बार-बार बलात्कार के आरोप थे। वहीं, महिला पर आरोप थे कि उसने बेटी के खिलाफ रेप में आरोपी की मदद की और उसे अपराध के लिए उकसाया भी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बताया था कि महिला अपनी बच्ची को शारीरिक संबंध बनाते हुए देखने के लिए मजबूर भी करती थी।  रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने दोनों को 180 साल की सजा और दोनों को ही 11.7 लाख रुपये जुर्माना देने की सजा सुनाई है। जज अशरफ एएम ने पाया है कि दोनों पॉक्सो और आईपीसी और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के कई प्रावधानों के तहत आरोपी हैं। एक ओर जहां आरोपी पलक्कड़ का रहने वाला है। वहीं, पीड़िता की मां और इस केस में दूसरी आरोपी तिरुवनंतपुरम से है। विशेष लोक अभियोजक सोमसुंदरन ए ने कहा कि महिला पति और बच्ची के साथ तिरुवनंतपुरम में रहती थी और फोन पर बातचीत के जरिए 33 साल के आरोपी के संपर्क में आई थी। इसके बाद वह आरोपी के साथ भाग गई थी और दोनों पलक्कड़ और मलप्पुरम में साथ रहे। खास बात है कि इस दौरान बच्ची भी उनके साथ ही थी। महिला की उम्र 30 साल है। अभियोजन ने बताया है कि महिला के साथी ने दिसंबर 2019 और नवंबर 2020 के बीच बच्ची के साथ कई बार यौन हिंसा की। यही सिलसिला दिसंबर 2020 से अक्तूबर 2021 तक चला। केस में मां को यौन उत्पीड़न के लिए उकसाने का दोषी पाया गया है। अभियोजन के आरोप हैं कि आरोपी मां अपराध की गवाह है और वह नाबालिग बच्ची को मजबूर करती थी कि वह दोनों को संबंध बनाते हुए देखे। इसके अलावा महिला पर बच्ची को पोर्न वीडियो दिखाने और बीयर पिलाने के आरोप भी लगाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, सोमसुंदरन का कहना है कि महिला ने बच्ची को धमकाया था कि उसके दिमाग में सीसीटीवी लगाया गया और अगर वह किसी को कुछ बताएगी तो उन्हें पता चला जाएगा। कैसे सामने आया मामला रिपोर्ट के अनुसार, सोमसुंदरन का कहना है कि महिला मलप्पुरम थाने पहुंची थी और उसने माता-पिता पर आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज नहीं देने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा, 'पुलिस ने महिला के पैरेंट्स को सर्टिफिकेट देने के लिए कहा था। जब वह महिला के घर पहुंचे और कहा कि वह पोती को देखना चाहते हैं, तो आरोपी ने इनकार कर दिया।' उन्होंने कहा, 'बाद में पड़ोसियों ने बताया कि घर में बच्ची की हालत खराब है और उसे भोजन भी नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने चाइल्ड लाइन से संपर्क किया और बच्ची को स्नेहिता सेंटर पहुंचाया। यहां बच्ची ने उसके साथ हुई वारदात को बताया।' कोर्ट के आदेश हैं कि जुर्माने की रकम पीड़िता को दी जाए। खास बात है कि जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दोनों पर 20 महीने की सजा और बढ़ जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में 7 अगस्त को पॉक्सो कार्यशाला, बाल अधिकारों पर होगा फोकस

भोपाल  लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पोक्सो अधिनियम) विषय पर जागरूकता और प्रशिक्षण के लिए मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा 7 अगस्त (गुरुवार) को एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया तथा बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष द्रविंद्र मोरे उपस्थित रहेंगे। कार्यशाला में पूरे प्रदेश से महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, पुलिस तथा जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पोक्सो अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना, बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों पर अधिकारियों को संवेदनशील बनाना और उन्हें विधिक जानकारी व प्रशिक्षण प्रदान करना है। कार्यशाला में बाल संरक्षण के क्षेत्र में नीति निर्धारण से लेकर ज़मीनी कार्यान्वयन तक की प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने पर भी मंथन किया जाएगा।