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एमपी के टॉप पुलिस अधिकारियों की संपत्ति पर सवाल, दिल्ली में लग्जरी फ्लैट से करोड़ों की कमाई

भोपाल मध्य प्रदेश कैडर के एडीजी स्तर के कई अधिकारियों ने भोपाल में कृषि भूमि खरीदी है। कुछ अधिकारियों के पास दिल्ली में फ्लैट भी हैं, जिनसे उन्हें हर साल लाखों रुपये की आय हो रही है। यह जानकारी अधिकारियों द्वारा केंद्र सरकार को दिए गए अचल संपत्ति के ब्योरे में सामने आई है। किसके पास कितनी संपत्ति एडीजी एसएएफ चंचल शेखर के पास भोपाल में 11 हजार 325 वर्गफीट कृषि भूमि है। यह जमीन उन्होंने वर्ष 2009 में 10 लाख रुपये में अपने और पत्नी के नाम से खरीदी थी, जिसकी वर्तमान कीमत एक करोड़ 80 लाख रुपये है। दिल्ली के साउथ वेस्ट क्षेत्र में उनका एक फ्लैट है, जिसे वर्ष 2011 में 17 लाख रुपये में खरीदा गया था और जिसकी वर्तमान कीमत 65 लाख रुपये है। इस फ्लैट से उन्हें प्रतिवर्ष छह लाख 60 हजार रुपये की आय हो रही है।   इसके अलावा वर्ष 2017 में उन्होंने दिल्ली में ही एक करोड़ 70 लाख रुपये का एक और फ्लैट खरीदा, जिसकी वर्तमान कीमत भी उतनी ही है। यह फ्लैट उनके और पत्नी के नाम पर है और इससे उन्हें सालाना एक लाख 80 हजार रुपये की आय होती है। ए साई मनोहर के पास केवल एक संपत्ति एडीजी इंटेलिजेंस ए साई मनोहर के पास केवल एक संपत्ति है, जो दिल्ली में फ्लैट के रूप में है। उन्होंने वर्ष 2024 में यह फ्लैट तीन करोड़ 60 लाख रुपये में खरीदा था और इसकी वर्तमान कीमत भी उतनी ही है। इस संपत्ति से उन्हें प्रतिवर्ष 17 लाख 13 हजार रुपये की आय हो रही है। स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव के पास तीन अचल संपत्तियां हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक फ्लैट शामिल है, जिसे वर्ष 2012 में 40 लाख रुपये में अपने और पत्नी के नाम पर खरीदा गया था। इसकी वर्तमान कीमत सवा करोड़ रुपये है और इससे उन्हें प्रतिवर्ष एक लाख 75 हजार रुपये की आय होती है। संपत्ति का ब्योरा जमा कर दिया भारतीय प्रशासनिक सेवा के मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों ने भी 31 जनवरी की स्थिति में अपनी संपत्ति का ब्योरा जमा कर दिया है, लेकिन इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इनकी संख्या लगभग 365 बताई गई है। संभावना है कि एक सप्ताह के भीतर इनकी अचल संपत्ति की जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी।

अब ऑफिस के चक्कर खत्म: पुलिसकर्मी बटन दबाकर कर सकेंगे छुट्टी

भोपाल प्रदेश के एक लाख से अधिक पुलिसकर्मियों के लिए अच्छी खबर है। छुट्टी और डेपुटेशन आदि के लिए अब उन्हें आवेदन लेकर नहीं घूमना होगा, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट इन्फॉरमेशन सिस्टम (एचआरएमआइएस) के माध्यम से वह कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसकी प्रगति देख सकेंगे। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने एचआरएमआइएस बनाया है, जिसके पहले चरण का काम इस माह पूरा हो जाएगा। इसमें उनकी सेवा पुस्तिका भी स्कैन करके ऑनलाइन की जा रही है। इसके कई मॉड्यूल हैं। इसमें पुलिसकर्मियों को कई सुविधाएं हो जाएंगी। जैसे वे अपनी सालाना गोपनीय रिपोर्ट ऑनलाइन देख सकेंगे। बता दें कि इसके पहले पुलिस में वर्ष 2015 से पर्सनल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (पीआईएस) चलता था, लेकिन इसे अपडेट नहीं किया गया। नई आवश्यकताओं की दृष्टि से तकनीकी तौर पर बहुत अच्छा साबित नहीं हो रहा था, जिससे बंद कर दिया गया।   पीआईएस की कमियों को किया गया दूर इस कारण उसकी जगह एचआरएमआईएस लाया गया है। पीआईएस में जो कमियां थीं, उन्हें इसमें दूर किया है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि अभी तक एक लाख से अधिक पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। लगभग दो लाख का शेष है। सर्विस रिकॉर्ड में वह अपने पुरस्कार, सजा, ली गईं और बकाया छुट्टियों का विवरण ऑनलाइन देख सकेंगे। बता दें स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सहित कई विभागों में पहले से ही एचआरएमआईएस लागू है। कर्मचारियों की उपस्थिति को भी इससे जोड़ा गया है। पुलिस के अधिकारी-कर्मचारियों में लगभग 70 हजार मैदानी पदस्थापना वाले हैं। उनके लिए एचआरएमआईएस से बड़ी सुविधा हो जाएगी।

पुलिसकर्मियों को मिलेगी थाने में स्वास्थ्य सुविधा, भोपाल के जूनियर डॉक्टरों की नई सोच

भोपाल काम के भारी दबाव और अनियमित दिनचर्या के चलते बीमारियों का शिकार हो रहे पुलिसकर्मियों के उपचार के लिए गांधी मेडिकल कालेज (जीएमसी) के जूनियर डाक्टरों ने नई पहल की है। अब खाकी वर्दी वालों को उपचार के लिए अस्पताल की लंबी कतारों में नहीं लगना होगा, बल्कि डॉक्टर खुद थाने पहुंचकर उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करने के साथ ही उन्हें चिकित्सा उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए प्रत्येक पुलिस थाने में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। लाइफस्टाइल बीमारियों की समय रहते पहचान इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल में तेजी से बढ़ रही लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की समय रहते पहचान करना और उनका उपचार शुरू करना है। मालूम हो कि पुलिस की नौकरी में ड्यूटी के घंटे तय नहीं होते। त्योहार हो या वीआइपी मूवमेंट, पुलिसकर्मी घंटों खड़े रहकर ड्यूटी करते हैं। इस भागदौड़ और मानसिक दबाव के कारण उनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां घर कर रही हैं।  

खंडवा पुलिस ने नकली पुलिस बनकर लूट करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का किया पर्दाफाश

500 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगालकर पुलिस ने दो सदस्‍यों को किया गिरफ्तार भोपाल  खंडवा जिले के थाना पदमनगर पुलिस ने नकली पुलिस बनकर लूट की घटनाओं को अंजाम देने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो सदस्यों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। यह गिरोह मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी नकली पुलिस बनकर वारदातों को अंजाम देते थे। दिनांक 12 नवंबर को फरियादी हसमतराय गुरवानी (उम्र 65 वर्ष) निवासी कावेरी स्टेट, थाना पदमनगर ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि दो अज्ञात बाइक सवार व्यक्तियों ने स्वयं को पुलिसकर्मी बताकर उनसे सोने की एक चेन एवं दो अंगूठियां यह कहकर उतरवा लीं कि पास में लूट की घटना हुई है। विरोध करने पर फरियादी पर हमला कर फरार हो गए। इस संबंध में बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार राय के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) श्री महेन्द्र तारनेकर एवं सीएसपी खंडवा श्री अभिनव कुमार बारंगे के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण आर्य के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम द्वारा शहर एवं आवागमन मार्गों पर लगे 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का विश्लेषण किया गया, जिससे तीन संदिग्धों की पहचान की गई। 15 दिसंबर को संदिग्धों के फुटेज अन्य जिलों में प्रसारित किए गए। विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि आरोपी नर्मदापुरम जिले के ईरानी गैंग से जुड़े हैं। इसके आधार पर पदमनगर पुलिस की टीम को नर्मदापुरम भेजा गया, जहाँ तकनीकी साक्ष्य एवं मुखबिरों की मदद से दो आरोपी गटरा उर्फ अप्पा हुसैन उर्फ अयान, पिता अफसर हुसैन, उम्र 25 वर्ष निवासी वार्ड क्रमांक 32, ईदगाह मोहल्ला, थाना कोतवाली, जिला नर्मदापुरम तथा कासिम, पिता अफसर सैय्यद, उम्र 30 वर्ष निवासी ईदगाह मोहल्ला, नर्मदापुरम, मूल निवासी साई बाबा मंदिर के पीछे, अंबीवली मंगलनगर, कल्याण, मुंबई (महाराष्ट्र) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने अपने साथी इकबाल हुसैन के साथ मिलकर उक्त वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया तथा लूटा गया माल उन्होंने अपने साथी इकबाल हुसैन को देना बताया। आरोपियों ने महाराष्ट्र के नागपुर, अमरावती एवं मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के शाहगंज क्षेत्र में भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम देना स्वीकार किया है। आरोपियों द्वारा सुनियोजित तरीके से स्वयं को पुलिसकर्मी बताकर वारदात को अंजाम दिया जाता था। वे अकेले या उम्रदराज राहगीरों को रोककर किसी हालिया अपराध या चेकिंग का हवाला देते हुए विश्वास में लेते थे। इसके बाद सुरक्षा जांच के बहाने पीड़ित से सोने के आभूषण उतरवाकर कागज में रखने को कहते थे। जैसे ही आभूषण उनके हाथ में आते, आरोपी मोटरसाइकिल से तेजी से फरार हो जाते थे। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल जप्त की है। आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है तथा गिरोह के अन्य सदस्यों एवं लूटे गए माल की बरामदगी हेतु आगे की कार्रवाई जारी है। खंडवा पुलिस की यह कार्रवाई तकनीकी दक्षता, सतत निगरानी एवं अंतरजिला समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे नागरिकों में सुरक्षा की भावना सुदृढ़ हुई है। ऐसे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत डायल 112 या नजदीकी थाने में दें।