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मध्य प्रदेश में बिजली नेटवर्क होगा मजबूत, 17 सबस्टेशन और 400 किमी नई लाइनों से ग्रामीणों-किसानों को मिलेगा लाभ

 भोपाल  एमपी में बड़े स्तर पर ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। बिजली की बढ़ती मांग और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति को मजबूत करने के लिए प्रोजेक्ट काम शुरू किया है। एमपी पावर पर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा प्रदेश में 17 नए सबस्टेशन और करीब 400 किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण की परियोजना पर काम किया जा रहा है। परियोजना से प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति का नेटवर्क मजबूत होगा। प्रोजेक्ट के तहत कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे हो चुके हैं। हरदा जिले के सोडलपुर में 132/33 केवी और सोडलपुर-सुल्तानपुर 132 केवी डीसीएसएस ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण पूरा हो चुका है। इससे करीब 1 लाख ग्रामीण लाभान्वित हुए हैं। सीहोर जिले के जवारजोड़ में 132/33 केवी तथा आष्टा-सोनकच्छ 132 केवी लाइन के कार्य से करीब 75 हजार लोगों को लाभ मिला है। रायसेन के पठारी में और गैरतगंज पंठारी में भी करीब 75 हजार किसानों और ग्रामीणों को फायदा पहुंचा है। रतलाम जिले के धोधर व जावरा दालोदा भी करीब 75 हजार लोग लाभान्वित हुए हैं। वहीं देवास जिले के चौबाराधीरा में 132/33 केवी और सोनकच्छ चौबाराधीरा 132 केवी डीसीएसएस ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण से करीब 1 लाख लोगों को विद्युत सुविधा मिली है। बुरहानपुर जिले में बहादुरपुर-बड़गांव 132 केवी डीसीएसएस ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण भी पूरा किया जा चुका है, जिससे करीब 75 हजार किसान और ग्रामीण लाभान्वित हुए हैं। एआइएस का रखरखाव आसान एआइएस (एयर इंसुलटेड सब स्टेशन का रखखाव आसान होता है। भविष्य में इसका विस्तार करना भी आसान है। रायसेन और खरगोन जिलों में 2-2 सब स्टेशन बन रहे हैं। हरदा, नर्मदा पुरम, रतलाम, अलीराजपुर, राजगढ़, देवास, सीहोर, गुना, बैतूल, उज्जैन जिलों में एक एक सब स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही करीब 400 किमी लंबी ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण किया जा रहा है। इन प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य बिजली के ट्रांसमिशन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाना है, जिससे भविष्य में बढ़ने वाली ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। मंडीदीप जीआइएस स्टेशन का 80% कार्य पूर्ण मंडीदीप में जीआइएस स्टेशन का 80% काम पूरा हो गया है ये मार्च तक पूरा हो जाएगा। मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) पीथमपुर और भोपाल में भी जीआइएस स्टेशन का जल्द निर्माण शुरू करने वाला है। मंडीदीप के जीआइएस स्टेशन से औद्योगिक ग्रोथ के लिए हाईटेक पावर बैकअप मिलेगा। साथ ही 1 लाख से ज्यादा आबादी को भी फायदा होगा। भोपाल के दक्षिण व पश्चिम हिस्सों को ट्रांसमिशन नेटवर्क से भी मजबूती मिलेगी। गैस इंसुलेटेड (जीआइएस) तकनीक में स्विचगियर के प्रमुख हिस्से सीलबंद धातु आवरण में रहते हैं। धूल, नमी और प्रदूषण से होने वाले फॉल्ट और ट्रिपिंग की आशंका भी कम रहती है। ऐसे सब स्टेशन का निर्माण पारंपरिक सब स्टेशन के मुकाबले 70 से 90% कम जमीन में होता है। एक जीआइएस स्टेशन 400 केवी सब स्टेशन क्षेत्र को लंबे समय तक विश्वसनीय ट्रांसमिशन क्षमता उपलब्ध कराएगा। प्रोजेक्ट से विकास की रफ्तार बढ़ी मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रस्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट हेड अक्षय प्रधान ने बताया कि प्रोजेक्ट से प्रदेश के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के साथ बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता में सुधार की उम्मीद हैं। नए सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइनों का यह नेटवर्क औद्योगिक, कृषि और घरेलू बिजली जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा। मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क, विश्वसनीय बिजली व्यवस्था की दिशा में ये परियोजना एक अहम कदम साबित होगी। बिजली व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में इन सब स्टेशंस और जीआइएस स्टेशन का खास रोल रहेगा। इन परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने आवश्यक स्वीकृतियां भी हो चुकी हैं। कुछ सब स्टेशंस के शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों को लाभमिलने भी लगा है। मंडीदीप में जीआइएस का सिविल वर्क 80% पूरा हो चका है। मार्च तक ये भी शुरू हो जाएगा। – प्रद्युम्न सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री

बिजली हड़ताल से फरीदाबाद में संकट, ब्लैकआउट के चलते कारोबार को 1000 करोड़ की चपत

फरीदाबाद. बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने औद्योगिक नगरी की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। देर रात तक लोग सड़कों पर उतर गए और जाम लगा दिया। गांवों से लेकर शहर की कालोनियों और ग्रेटर फरीदाबाद की ऊंची-ऊंची सोसायटी तक बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर घरेलू उपभोक्ताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक इकाइयों और कारोबार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि ग्रेटर फरीदाबाद की कई सोसायटी में बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए जनरेटर पर निर्भरता बढ़ गई है। दिन हो या रात, जनरेटर चलने से लोगों को शोर और ईंधन की खपत जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। निजीकरण के विरोध में जनता पर पड़ रही मार बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का उद्देश्य निजीकरण के विरोध में अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाना है, लेकिन इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की दिनचर्या पर दिखाई दे रहा है। बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से घरों में जरूरी कामकाज से लेकर दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की गतिविधियां तक प्रभावित हो रही हैं। बिजली पर निर्भर उपकरणों का संचालन बाधित होने से लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रहे विवाद का समाधान कब निकलेगा। उद्योगों की रफ्तार पर लगा ब्रेक फरीदाबाद की पहचान देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में होती है। यहां बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां बिजली पर निर्भर हैं। बिजली आपूर्ति में व्यवधान आने से उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। मशीनों के संचालन, माल तैयार करने और समय पर ऑर्डर पूरा करने के लिए निर्बाध बिजली जरूरी है। हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित हो गया। आपूर्ति बाधित होने पर उद्योगों को वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ते हैं, जिससे परिचालन खर्च बढ़ सकता है। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है तो इसका असर उत्पादन, आपूर्ति शृंखला और कारोबार पर और गहरा हो सकता है। उद्योग जगत के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। ग्रेटर फरीदाबाद में जनरेटर के सहारे सोसायटियां ग्रेटर फरीदाबाद की बहुमंजिला सोसायटियों में बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए जनरेटर का इस्तेमाल बढ़ गया है। लिफ्ट, पानी की मोटर, कॉमन एरिया की लाइट और अन्य जरूरी सुविधाओं के संचालन के लिए बैकअप व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है। जनरेटर लगातार चलने से ईंधन की खपत बढ़ती है। इसके साथ ही शोर और धुएं से जुड़ी परेशानी भी निवासियों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। बिजली संकट के बीच लोगों को यह भी चिंता सता रही है कि यदि आपूर्ति सामान्य होने में देरी हुई तो वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भरता और बढ़ेगी। समाधान की राह देख रहे उपभोक्ता निजीकरण के मुद्दे पर कर्मचारियों और सरकार के बीच जारी खींचतान का खामियाजा आम लोगों को नहीं भुगतना चाहिए। बिजली जैसी बुनियादी सुविधा प्रभावित होने से घरेलू जीवन, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों पर एक साथ असर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि बातचीत के माध्यम से विवाद का जल्द समाधान निकाला जाए और बिजली आपूर्ति सामान्य रखने के लिए प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। शहरवासियों और उद्योगों को राहत तभी मिलेगी, जब बिजली व्यवस्था पटरी पर लौटेगी और हड़ताल के कारण पैदा हुआ संकट समाप्त होगा।

MP में बिजली संकट की आशंका! बारिश की कमी और कोयले की सप्लाई बनी चिंता

भोपाल  मध्य प्रदेश में चल रहा ऊर्जा संकट फिलहाल कम होता नजर आ रहा है। राज्य में बिजली की अधिक मांग के बावजूद आपूर्ति पूरी करने की कवायद की जा रही है। 17 अक्टूबर को प्रदेश में बिजली की 16975 मेगावाट मांग पूरी की गई। बीते साल इसी सीजन में यह मांग 32% कम 12685 मेगावाट थी। इस तरह पिछले साल की तुलना में 32% अधिक बिजली आपूर्ति का रिकार्ड बना है, जबकि सितंबर के अंतिम और अक्टूबर के पहले व दूसरे सप्ताह में गंभीर ऊर्जा संकट गहराया। मांग 17 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई थी। आपूर्ति 11-12 हजार मेगावाट पर ही अटक गई थी। हालांकि संकट अभी टला नहीं है। बारिश कम हुई है, इसलिए हाइडल प्लांटों को हमेशा चालू रखना संभव नहीं है। कोयले की आपूर्ति कभी भी अटक सकती है। वहीं, सौर ऊर्जा को स्टोर रखने के लिए मप्र अभी तैयार नहीं हुआ है। पहले फेल, अब मैनेजमेंट उ लॉ विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा इसलिए हो सका, क्योंकि खंडवा थर्मल पावर प्लांट में 1200 मेगावाट क्षमता की बंद दो यूनिट चालू करा दी गई। बीरसिंहपुर की 210 मेगावाट, जेपी बीना की 160 मेगावाट, लेनको पावर की 273 मेगावाट, एनटीपीसी मोहदा की 111 मेगावाट क्षमता की यूनिटें चालू करा ली है। ये मेंटेनेंस व तकनीकी खराब के कारण बंद थीं। उधर ओंकारेश्वर, गांधीसागर व सरदार सरोवर की यूनिटें भी चालू हो चुकी हैं। विशेषज्ञों की माने तो यह प्रबंधन पहले ही कर लिया गया होता तो लोगों को ऊर्जा संकट नहीं झेलना पड़ता। अभी यूनिटें खराब, 10 दिन बाद 939 मेगावाट बिजली विभाग का दावा है कि प्रदेश को 10 दिन बाद 939 मेगावाट बिजली और मिलने लगेंगी। अभी यूनिटें खराब हैं। बाकी मेंटेनेंस के लिए बंद की गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 160 मेगावाट की जेपी बीना यूनिट, 107 मेगावाट की मोहदा एनटीपीसी यूनिट, 296 मेगावाट की बीरसिंहपुर यूनिट का मेंटेनेंस चल रहा है। यह नवंबर के पहले सप्ताह में चालू हो जाएंगी। वहीं, गाडरवारा में एनटीपीसी की 376 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट मंगलवार से चालू होनी है।  

ग्वालियर जिला अस्पताल में बिजली संकट से हड़कंप, 6 घंटे बंद रही बिजली; 7 ऑपरेशन टले

ग्वालियर. जिला अस्पताल मुरार में शनिवार को करीब छह घंटे बिजली गुल रहने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। बिजली आपूर्ति बाधित होने का सबसे ज्यादा असर ऑपरेशन, जांच और ब्लड बैंक पर पड़ा। नेत्र और सर्जरी विभाग में ऑपरेशन के लिए चिन्हित सात मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़े। इनमें नेत्र विभाग में चार और सर्जरी विभाग के तीन मरीज शामिल हैं। वहीं एक्स-रे और सीटी जांच भी घंटों बंद रही। जांच के लिए इंतजार कर रहे कई मरीज बिजली नहीं आने पर बिना जांच कराए ही वापस लौट गए। बिना बिजली मरीज रहे परेशान जनरेटर से सीटी जांच के लिए बिजली सप्लाई शुरू की गई, इसके बाद जांच हो सकीं। बिजली गुल होने के दौरान अस्पताल के ओपीडी हिस्से में जनरेटर से आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन अस्पताल के अन्य हिस्सों में बिजली नहीं होने से मरीज और उनके स्वजन परेशान होते रहे। आर्थोपेडिक विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल नजर आए। पंखे और कूलर बंद होने के कारण स्वजन हाथ के पंखे से मरीजों को हवा करते दिखाई दिए। ऑपरेशन के बाद मरीजों को इस वार्ड में शिफ्ट किया जाता है ऐसे में संक्रमण का खतरा बना रहा। ब्लड बैंक में तापमान नियंत्रण बिगड़ा बिजली गुल होने से ब्लड बैंक में भी तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था प्रभावित हुई। ब्लड खराब होने की आशंका को देखते हुए ब्लड बैंक प्रभारी ने अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद ब्लड बैंक के लिए आरएमओ डॉक्टर जेपीएन शर्मा, सहायक प्रबंधक डॉक्टर राजेश बिरथरिया ने जनरेटर से अस्थायी बिजली व्यवस्था कराई। हालांकि, इस दौरान रक्त लेने पहुंचे मरीजों के स्वजन को भी इंतजार करना पड़ा। रोजाना 150 एक्स-रे, छह घंटे बाद शुरू हुई जांच अस्पताल में ओपीडी के दौरान रोजाना करीब 150 एक्स-रे किए जाते हैं। शनिवार को बिजली गुल रहने के कारण एक्स-रे जांच करीब छह घंटे प्रभावित रही। बिजली बहाल होने के बाद ही एक्स-रे सहित अन्य जांच दोबारा शुरू हो सकीं।

8 करोड़ बकाया पर बिजली विभाग की कार्रवाई, कुम्हारी नपा के कनेक्शन काटे

भिलाई नगर. कुम्हारी नगर पालिका क्षेत्र में विद्युत विभाग ने 8 करोड़ बकाया बिल के चलते कार्रवाई करते हुए लगभग 20 प्रमुख स्थानों का बिजली कनेक्शन काट दिया। बिजली कटने की वजह से शहर में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और खेल गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। मिली जानकारी के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के दौरान कुम्हारी नगर पालिका पर विद्युत विभाग का बकाया बिल लगभग 5 करोड़ रुपये था। समय पर भुगतान न होने और बकाया राशि जमा न किए जाने के कारण यह राशि बढ़कर अब लगभग 8 करोड़ रुपये हो चुकी है। विद्युत विभाग द्वारा बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद बकाया राशि का भुगतान न किए जाने पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए 23 सितंबर को बिजली काटने की कार्रवाई की है। बिजली कनेक्शन काटे जाने का सीधा असर स्थानीय युवाओं पर पड़ा है। अटल परिसर तथा बैडमिंटन कोर्ट का बिजली कनेक्शन काट दिए जाने के कारण यहां रोजाना बैडमिंटन खेलने और अभ्यास करने आने वाले दर्जनों युवा साथी खेल सुविधाओं से वंचित हो गए हैं। वहीं कुम्हारी के सबसे प्रमुख स्थानों में से एक, स्टेशन चौक स्थित ओवरब्रिज के नीचे पूरी तरह से अंधेरा पसरा हुआ है, जिससे रात के समय आवाजाही करने वाले लोगों को दुर्घटना और सुरक्षा का भय सताता रहता है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे लगी कई स्ट्रीट लाइटें भी पिछले कई महीनों से बंद पड़ी हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। बुनियादी सुविधाओं पर पड़ा असर: बिजली विभाग की इस कार्रवाई की गाज शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी गिरी है। कुम्हारी के सभी सार्वजनिक शौचालयों, पंप हाउसों और अन्य लगभग 20 महत्वपूर्ण स्थानों का बिजली कनेक्शन काट दिया गया है। पंप हाउस बंद होने से कई वार्डों में पेयजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों ने कहा है कि इस समस्या का शीघ्र समाधान निकाला जाए और बिजली आपूर्ति जल्द बहाल की जाए।

पंजाब में बिजली संकट बढ़ा, रोपड़ में उत्पादन घटकर 120MW तक पहुंचा

पटियाला  राज्य में भीषण गर्मी के बीच बिजली की खपत नित नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन दूसरी ओर बिजली उत्पादन व्यवस्था चरमराती दिख रही है। पटियाला से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली संकट से जूझ रहे पावरकॉम को एक और बड़ा झटका लगा है। बुधवार सुबह रोपड़ थर्मल प्लांट का एक और यूनिट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बंद हो गया। इस नए संकट के बाद अब रोपड़ थर्मल प्लांट के कुल चार में से तीन यूनिट पूरी तरह से ठप पड़ चुके हैं। कुल 840 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले इस महत्वपूर्ण प्लांट से इस समय पावरकॉम को महज 120 मेगावाट बिजली ही हासिल हो पा रही है। प्लांट के अधिकांश यूनिट बंद होने से राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर बेहद बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बिजली जनरेशन कम होने से कई इलाकों में लोगों को अघोषित बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बाजारों में सप्लाई लाइन ठीक न होने से रोजाना तारों में स्पार्किंग हो रही है। घंटों तक बिजली बंद रहती है। लुधियाना के चौड़ा बाजार स्थित हजूरी रोड पर मंगलवार देर रात तारों में भयानक स्पार्किंग हुई और इलाके की लाइट गुल हो गई। सुबह तक इलाके में बिजली गुल रही। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लग रहे बिजली कटों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल आज डिप्टी कमिश्नर दफ्तर लुधियाना में प्रदर्शन करेगा। राहत: प्राइवेट सेक्टर के दोनों थर्मल प्लांट एक्टिव दूसरी तरफ, राहत की बात केवल इतनी है कि प्राइवेट सेक्टर के दोनों बड़े थर्मल प्लांट, यानी राजपुरा और तलवंडी साबो, अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी प्लांट के यूनिट बार-बार ठप होने से बिजली की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। मांग तोड़ रही रिकॉर्ड गौरतलब है कि मौजूदा सीजन में राज्य के भीतर बिजली की मांग 17,300 मेगावाट से भी ऊपर पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा राज्य के पावर सेक्टर के इतिहास में अब तक किसी एक दिन की सबसे ज्यादा मांग का नया रिकॉर्ड है। इतनी भारी मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम को अब मुख्य रूप से सेंट्रल सेक्टर से बिजली की भारी खरीद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर जल्द ही रोपड़ प्लांट के खराब यूनिट्स को ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम जनता को लंबे पावर कट का सामना करना पड़ सकता है। पंजाब में बिजली की डिमांड-सप्लाई व जनरेशन के बारे में जानिए…     प्राइवेट प्लांटों में पूरी कैपेसिटी से बन रही बिजली: पंजाब में प्राइवेट थर्मल प्लांटों से बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 3,380 मेगावाट है। इसमें से 1,980 मेगावाट बिजली का उत्पादन तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के 3 यूनिटों में होता है। प्रत्येक यूनिट में 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।     1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही: तलवंडी साबो में आजकल कुल 1,700 मेगावाट के आसपास बिजली पैदा हो रही है। वहीं, दूसरा प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा में है, जिसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इसमें आजकल 1,300 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही है।     तीन में से एक प्लांट की स्थिति चिंताजनक: पंजाब में 3 सरकारी थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,300 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। रोपड़ थर्मल प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 840 मेगावाट है। इसमें 4 यूनिट हैं। दो यूनिट कल से बंद हैं। जो दो यूनिट चालू हैं, वे भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे।     लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट: रोपड़ में कुल 200 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में कुल 4 यूनिट हैं। आज चारों यूनिट चल रहे हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है और आज यहां 805 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। गोइंदवाल में तीसरा सरकारी थर्मल प्लांट है, जिसमें 2 यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल क्षमता 520 मेगावाट है। आज एक यूनिट में करीब 430 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।     हाइड्रो प्रोजेक्टों से मदद मिल रही: पंजाब में छोटे-बड़े हाइड्रो प्रोजेक्टों से रात में 830 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और दिन में इसे घटाकर 500 मेगावाट के आसपास रखा जा रहा है। बिजली संकट को कम करने में हाइड्रो प्रोजेक्टों का इस समय अहम योगदान निभा रहा है।     सोलर प्रोजेक्ट से रात में बिजली नहीं बन रही: पंजाब में सोलर प्रोजेक्ट्स के जरिए दोपहर के समय 450 मेगावाट के करीब बिजली का उत्पादन हो रहा है। रात के समय सोलर प्रोजेक्ट्स से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से रात के समय बिजली संकट ज्यादा गहरा रहा है।     केंद्रीय पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीद: पंजाब में इन दिनों बिजली की डिमांड 16,000 मेगावाट के पार चल रही है। एक तरफ बिजली की डिमांड बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन में कमी आ रही है। डिमांड और उत्पादन के गैप को कम करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) केंद्रीय पूल से बिजली ले रहा है।     महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर: PSPCL केंद्रीय पूल से करीब 11,700 मेगावाट तक बिजली खरीद रहा है। PSPCL को केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बिजली कट लग रहे हैं। आगे स्थिति और खराब हुई तो लोगों को गर्मी में बिजली के लंबे कटों का सामना करना पड़ेगा। बाजार में स्पार्किंग से आग लगने का खतरा हजूरी रोड के दुकानदार मोहित का कहना है कि पूरी मार्केट में तारों का जाल बिछा हुआ है। हल्की सी हवा या बरसात होती है तो स्पार्किंग शुरू हो जाती है। उनका कहना है कि कई बार अफसरों को इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। यह पूरी मार्केट कपड़ों की है। इस तरह स्पार्किंग होने से कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने बताया कि देर रात से सुबह तक बिजली सप्लाई बंद रही। अफसरों को फोन कर रहे हैं, तो वे फोन नहीं उठा रहे।

बिजली कटौती को लेकर पंजाब में बढ़ा आक्रोश, किसान-उद्योगपति सड़कों पर; सरकार ने लिया बड़ा फैसला

जालंधर पंजाब में बिजली कटौती को लेकर हाहाकार मच गया है। बिजली कटों से परेशान लोगों सड़कों पर उतर आए। वहीं राजनीतिक दलों ने भी सरकार का विरोध किया। लगातार बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने पीएसपीसीएल के सीएमडी आईएएस बसंत गर्ग को हटा दिया और उनकी जगह गुरकीरत किरपाल सिंह को नया सीएमडी नियुक्त कर दिया।  सरकार का दावा-संकट खत्म वहीं विरोध के बीच बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया कि पंजाब ने बिजली संकट पर काबू पा लिया है। 13 सितंबर सुबह सात बजे से बिजली की कमी के कारण कोई कट नहीं लगाया गया और आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्र को 24 घंटे बिजली मिल रही है।  सौंद के अनुसार, दो निजी ताप विद्युत संयंत्रों की तकनीकी खराबियां दूर कर दी गई हैं और एक अन्य निजी प्लांट से करीब 100 मेगावाट बिजली मिलनी शुरू हो गई है। किसानों को सिंचाई के लिए आठ के बजाय 10 घंटे बिजली देने का भी दावा किया गया। उन्होंने बिजली संकट के लिए केंद्र से कोयले में कटौती और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने को भी कारण बताया। मंत्री ने कहा कि राज्य के पास करीब 17,000 मेगावाट तक की मांग पूरी करने की क्षमता है। जगह-जगह फूटा गुस्सा सोमवार को पटियाला में पावरकॉम मुख्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेसियों को रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारें मारीं और प्रदेश कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। जगरांव में किसानों ने चार घंटे धरना देने के बाद जगरांव-जालंधर मार्ग जाम कर दिया। फरीदकोट में भी किसानों ने पावरकॉम कार्यालय का घेराव किया।    लुधियाना में डाइंग उद्योगपतियों ने वर्धमान चौक पर लुधियाना-चंडीगढ़ रोड जाम किया। उन्होंने रोजाना करीब 14 घंटे बिजली कटौती का आरोप लगाया। उद्योगपतियों के अनुसार इससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और श्रमिक फैक्टरियां छोड़ रहे हैं। उन्होंने बिजली की दर करीब आठ से बढ़कर 9.50 रुपये प्रति यूनिट होने और एक फैक्टरी का बिल 15 लाख से बढ़कर 18 लाख रुपये तक पहुंचने का दावा किया। रिकॉर्ड 17,405 मेगावाट मांग, 1,478 मेगावाट उत्पादन ठप पंजाब में सोमवार को बिजली की मांग 17,405 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। 18 जुलाई को 17,452 मेगावाट की सर्वाधिक मांग दर्ज हुई थी। मांग के दबाव के बीच करीब 1,478 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित रही। रोपड़, लहरा मोहब्बत और तलवंडी साबो थर्मल की कुछ इकाइयां कम क्षमता पर चलीं, जबकि पानी की कमी से हाइडल की पांच इकाइयां बंद रहीं। पावरकॉम के मुताबिक इसके बावजूद उद्योग, शहर और गांव में कोई कट नहीं लगाया गया।     

बिजली संकट पर CM मान का बड़ा ऐलान, पंजाब के सभी 5 थर्मल प्लांटों के लिए कोयले की पर्याप्त व्यवस्था

 चंडीगढ़ पंजाब में बिजली संकट को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि प्रदेश में बिजली की समस्या अब खत्म होने वाली है। उन्होंने कहा कि झारखंड की कोयला खदानों में बाढ़ का पानी भरने के कारण कोयले की शॉर्टेज हुई थी, जिसका असर पूरे देश में बिजली उत्पादन पर पड़ा। पंजाब भी इससे अछूता नहीं रहा, लेकिन अब कोयले की उपलब्धता को लेकर रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में उनकी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत हुई है। वह खुद भी दो-चार दिन बाद रांची जाकर हेमंत सोरेन से मुलाकात कर उनका धन्यवाद करेंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड की पचवाड़ा कोयला खदान से मिलने वाला कोयला केवल सरकारी थर्मल प्लांटों में इस्तेमाल किया जा सकता है। पंजाब के दो निजी थर्मल प्लांटों को इस व्यवस्था के तहत कोयला उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। मान ने बताया कि पंजाब सरकार ने कोल इंडिया से अनुरोध किया था कि निजी थर्मल प्लांटों को भी कोयला उपलब्ध करवाया जाए। कोल इंडिया ने इस पर सहमति दे दी है। अब झारखंड सरकार की स्थानीय स्तर पर जरूरी मंजूरी भी मिल गई है। इससे पंजाब के पांचों थर्मल प्लांटों को आने वाले दिनों में पर्याप्त कोयला मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयले की उपलब्धता बढ़ने के साथ बंद पड़ी बिजली उत्पादन इकाइयों को भी चलाने में मदद मिलेगी और प्रदेश में बिजली की स्थिति सामान्य होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट किसी एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि झारखंड की खदानों में बाढ़ के कारण पूरे देश में कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। मनप्रीत बादल पर भी साधा निशाना मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मनप्रीत बादल को किसी एक पार्टी में रहना चाहिए, क्योंकि आज बहुत ज्यादा पार्टियां हो गई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मनप्रीत बादल आजकल किस पार्टी में हैं। पिछले साल से 3500 मेगावाट ज्यादा मांग सौंद ने कहा कि सितंबर में इस वर्ष पंजाब की बिजली मांग पिछले वर्षों की तुलना में करीब 3500 मेगावाट अधिक है। इसके बावजूद पावरकाम की ओर से उपलब्ध सभी स्रोतों से अधिकतम स्तर पर बिजली उत्पादन करवाया जा रहा है। हालांकि राज्य में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। पिछले कुछ दिनों की तुलना में बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन मांग में अपेक्षित कमी नहीं आई है। ऐसे में बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार और पावरकाम के सामने चुनौती अभी भी बनी हुई है। उद्योग और किसान जता चुके हैं नाराजगी बिजली कटौती को लेकर पंजाब का औद्योगिक क्षेत्र लगातार चिंता जताता रहा है। खासकर रात के समय बिजली प्रतिबंध और उत्पादन प्रभावित होने से उद्योगों की लागत और डिलीवरी शेड्यूल पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।  किसानों की ओर से भी धान के सीजन में पर्याप्त बिजली आपूर्ति की मांग लगातार उठाई जाती रही है। ऐसे में बिजली मंत्री का पावर कट खत्म होने का दावा उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए राहत की खबर है। हालांकि 16 हजार मेगावाट से अधिक की लगातार मांग के बीच अगले दिनों में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना पावरकाम के लिए बड़ी चुनौती होगी।  

पंजाब में बढ़ी बिजली की डिमांड, 2173 MW उत्पादन ठप; मंत्री बोले- कल से लंबे कट नहीं

लुधियाना लुधियाना में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही।लुधियाना में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया कि पंजाब में अब बिजली के लंबे कट नहीं लगेंगे, कल यानी 15 सितंबर से कट लगने बंद हो जाएंगे। प्राइवेट बिजली प्लांट भी सरकार ने ठीक करवाए हैं। इसके लिए करीब 200 सरकारी मुलाजिम लगाए। मंत्री ने कहा कि किसानों को पहले की तुलना में ज्यादा बिजली दी जा रही है। अब 8 घंटे की बजाय किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस साल पिछले साल की तुलना में बिजली की डिमांड 3,500 मेगावाट ज्यादा है। इधर, बिजली की डिमांड लगातार 16 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) इस समय अलग-अलग स्रोतों से अधिकतम स्तर पर बिजली पैदा करवा रहा है। कायले की कमी के चलते बिजली की कुल जनरेशन 5,743 मेगावाट तक ही पहुंची है। पिछले दिनों के मुकाबले पंजाब में बिजली की जनरेशन तो बढ़ी है, लेकिन डिमांड कम नहीं हो रही है। डिमांड पूरी करने के लिए PSPCL को सीधे केंद्रीय पूल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे बिजली कट लग रहे हैं। अघोषित बिजली कटों से परेशान लुधियाना के डाइंग उद्यमियों ने आज चंडीगढ़ रोड के वर्धमान चौक पर धरना देने का ऐलान किया है। वहीं, दूसरी तरफ बिजली कटों को लेकर कांग्रेस पटियाला में PSPCL मुख्यालय के बाहर धरना देगी।   बिजली उत्पादन कहां से कितना हो रहा, जानिए… सरकारी थर्मल प्लांट: पंजाब में तीन सरकारी थर्मल प्लांटों के 10 यूनिट हैं। पहला सरकारी प्लांट रोपड़ में है और यहां चार यूनिट हैं। इन चार यूनिटों की बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 840 मेगावाट है, जबकि इनमें 487 मेगावाट ही बिजली पैदा हो रही है। दूसरा प्लांट लहरा मोहब्बत में है। इस प्लांट में भी चार यूनिट हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है, जबकि यहां 801 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। तीसरा प्लांट गोइंदवाल में है और इसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट है, जबकि इसमें 501 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। इस तरह सरकारी प्लांटों से कुल उत्पादन 1,786 मेगावाट है। सरकारी दो प्लांट लगभग पूरी क्षमता से चल रहे हैं, जबकि रोपड़ प्लांट में अभी भी उत्पादन क्षमता से काफी कम है। प्राइवेट थर्मल प्लांट: पंजाब में दो प्राइवेट थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 3,380 मेगावाट बिजली पैदा करने की है। तलवंडी साबो में तीन यूनिट हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,980 मेगावाट है। सोमवार को तीनों यूनिट ऑपरेशनल हैं और इनसे 1,701 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। वहीं, दूसरा प्लांट राजपुरा में है और इसमें दो यूनिट हैं। दोनों की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इन दोनों यूनिटों में आज कुल 1,321 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। दोनों प्राइवेट प्लांटों को मिलाकर 3,022 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। हाइड्रो प्रोजेक्ट्स: पंजाब के पास रणजीत सागर डैम इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के अलावा चार और हाइड्रो प्रोजेक्ट हैं। रणजीत सागर डैम की क्षमता 600 मेगावाट बिजली पैदा करने की है, जिसमें दिन के समय कम बिजली पैदा की जा रही है। सोमवार सुबह 9 बजे के करीब चार में से दो टरबाइन चलाई जा रही हैं, जिनसे 240 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। शानन प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तैयार: यू.बी.डी.सी. हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर हाउस से 44 मेगावाट, मुकेरियन हाइडल प्रोजेक्ट के अलग-अलग यूनिटों से 193 मेगावाट, आनंदपुर साहिब हाइडल प्रोजेक्ट से 112 मेगावाट व शानन प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तैयार की जा रही है। इस तरह हाइड्रो प्रोजेक्टों से कुल 639 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। रात के समय हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से उत्पादन 830 मेगावाट तक किया जा रहा है। सोलर व अन्य प्लांट: पंजाब में बड़ी संख्या में सोलर प्लांट लगे हैं। इनसे बिजली का उत्पादन काफी मात्रा में हो रहा है। दिन के समय सोलर प्लांट व अन्य स्रोतों से 350 से 400 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। हालांकि, रात के समय इन प्लांटों से जनरेशन शून्य हो जाती है। सुबह 9 बजे के करीब सोलर प्लांट व अन्य स्रोतों से कुल 341 मेगावाट के करीब बिजली उत्पादन हो रहा है। केंद्रीय पूल: पंजाब में बिजली की डिमांड पूरी करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड सीधे तौर पर केंद्रीय पूल पर निर्भर है। पंजाब में जितनी जनरेशन होती है, उसके बाद डिमांड और सप्लाई में जो गैप रहता है, उसे पूरा करने के लिए केंद्रीय पूल से बिजली खरीदी जाती है। सोमवार को केंद्रीय पूल से करीब 11 हजार मेगावाट के करीब बिजली खरीदी जा रही है। पंजाब में बढ़ी बिजली की मांग पंजाब में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी और यूनिटों में तकनीकी खराबी से उत्पादन प्रभावित है। मानसून की बारिश कम होने से खेतों में ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी है।  उमस भरी गर्मी के कारण घरेलू बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है। मांग और उपलब्धता में बड़े अंतर के कारण उद्योगों से लेकर खेतीबाड़ी क्षेत्र और शहरों व गांवों में लंबे कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगपतियों किसानों और आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। सितंबर में लगातार 16 हजार मेगावाट से ज्यादा मांग छह सितंबर को छोड़कर सितंबर में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट से अधिक रही। एक सितंबर को 16116 मेगावाट, दो को 16530, तीन को 16485, चार को 16182, पांच को 16254, सात को 16219, आठ और नौ को 16505, 10 को 16432, 11 को 16619 और 12 सितंबर को 16519 मेगावाट मांग रही। शनिवार को 16519 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग के मुकाबले पावरकाम को सभी स्रोतों से केवल 4503 मेगावाट बिजली उपलब्ध हुई। करीब 2173 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा। तकनीकी खराबी से राजपुरा का 700 मेगावाट का एक नंबर और तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का दो नंबर यूनिट बंद रहा। 840 मेगावाट क्षमता वाले रोपड़ थर्मल से केवल 488 मेगावाट बिजली मिली। 920 मेगावाट क्षमता वाले लहरा मुहब्बत प्लांट से 804 मेगावाट उत्पादन हुआ। पावरकाम अधिकारियों के अनुसार सर्दियों में रोपड़ और लहरा मुहब्बत थर्मलों का सालाना रखरखाव नहीं हुआ था। अब तकनीकी खराबी के कारण यूनिट … Read more

बिजली आपूर्ति में यूपी का शानदार प्रदर्शन, 135 में 74 दिन देश में रहा नंबर-1

बिजली आपूर्ति में यूपी का दमदार प्रदर्शन, 135 में 74 दिन देश में रहा अव्वल कोयला संकट के बावजूद योगी सरकार ने संभाले रखी बिजली व्यवस्था, जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे आपूर्ति 24 मई से 22 दिनों तक सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को कटौती मुक्त बिजली आपूर्ति भारी बारिश से कोयला आपूर्ति प्रभावित, फिर भी प्रदेश में बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार सक्रिय सीआईएल समेत संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर कोयले और ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने में जुटी योगी सरकार लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किए जाने का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। एक मई से अब तक 135 दिनों में प्रदेश ने 74 दिन देश में सर्वाधिक विद्युत मांग की आपूर्ति की, जबकि 37 दिन दूसरे स्थान पर रहा। यानी 135 दिनों में 111 दिन उत्तर प्रदेश ने देश के शीर्ष दो राज्यों में रहते हुए बिजली की मांग पूरी की। प्रदेश में 24 मई से अब तक 22 दिनों में सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई। हालांकि देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा और जलभराव के चलते कोयला खदानों में उत्पादन एवं आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों के तापीय विद्युत संयंत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। यूपीपीसीएल के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भी कोयले की कमी और गीले कोयले के कारण तापीय उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। विभिन्न विद्युत इकाइयों में तकनीकी एवं अन्य कारणों से ट्रिपिंग के चलते उपलब्धता में कमी आई है। इसके बावजूद योगी सरकार ने विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखे हैं। दिन के समय सामान्य आपूर्ति दिन के समय प्रदेश में विद्युत आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। हालांकि पीक समय में विद्युत उपलब्धता कम होने और पावर एक्सचेंज में महज 2-3 प्रतिशत तक सीमित क्लीयरेंस के कारण ग्रामीण क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तहसील एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में रात्रिकालीन सीमित रोस्टरिंग की जा रही है। वहीं जिला मुख्यालयों में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश सरकार की ओर से निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड समेत संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। कोयले और ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। योगी सरकार का फोकस उपभोक्ताओं को अधिकतम राहत देने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल कर आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने पर है।