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बिहार की राजनीति में हलचल: प्रशांत किशोर बोले- CM नीतीश कुमार छोड़ सकते हैं कुर्सी, BJP की बढ़ी दावेदारी

पटना जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपना पद छोड़ रहे हैं क्योंकि केंद्र में सत्ता में मौजूद भाजपा, जिसने पिछले विधानसभा चुनाव में NDA को “तैयार किया हुआ जनादेश” दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी, अब बिहार में अपना हिस्सा चाहती है। ईद के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में किशोर ने दोहराया कि जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार राज्य का नेतृत्व करने के लिए “शारीरिक और मानसिक रूप से अयोग्य” हैं। ‘मेरी भविष्यवाणी सही साबित हुई’ प्रशांत किशोर ने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि नीतीश कुमार अपनी मर्जी से पद छोड़ रहे हैं या किसी दबाव में ऐसा कर रहे हैं। लेकिन एक तरह से मेरी बात सही साबित हुई है। विधानसभा चुनाव से पहले जब मैंने कहा था कि NDA जीत भी जाए, तब भी उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा, तब मेरी आलोचना हुई थी।” 47 वर्षीय किशोर ने आगे कहा, “मेरी यह भविष्यवाणी कि NDA हार सकती है, भले ही गलत साबित हुई हो, लेकिन नीतीश कुमार के बारे में मेरी बात सही निकली। जो व्यक्ति स्पष्ट रूप से शारीरिक और मानसिक रूप से अयोग्य है, वह कैसे कुछ ही महीनों में, जब गठबंधन को भारी बहुमत मिला हो, मुख्यमंत्री पद छोड़ सकता है?” ‘जनादेश तैयार किया गया था’ IPAC के संस्थापक रहे किशोर, जिन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव अभियान को संभालकर बड़ी सफलता हासिल की थी, ने आरोप लगाया कि पिछले बिहार चुनाव में NDA को जो जनादेश मिला, वह “तैयार किया हुआ” था। उन्होंने कहा, “वोट 10,000 रुपये बांटकर खरीदे गए।” उनका इशारा चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की ओर था, जिसके तहत करीब 1.50 करोड़ महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये ट्रांसफर किए गए थे। भाजपा और केंद्र की भूमिका पर सवाल हल्के-फुल्के अंदाज में किशोर ने यह भी कहा, “केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा, केंद्रीय गृह मंत्री और चुनाव आयोग ने NDA को बड़ा जनादेश दिलाने में अपनी-अपनी भूमिका निभाई होगी। इसलिए यह स्वाभाविक है कि केंद्र की पार्टी अब बिहार में अपना हिस्सा चाहती है।” राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए नीतीश कुमार दिल्ली जा सकते हैं और उनके बाद बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बन सकता है। कौन बनेगा मुख्यमंत्री? जवाब टाला हालांकि जब किशोर से पूछा गया कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठ सकता है, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “मेरी अपनी पार्टी को लेकर की गई भविष्यवाणी ही गलत साबित हुई थी इसलिए इस पर कुछ कहना ठीक नहीं होगा।” ‘बिहार मेरा मिशन, अन्य राज्यों पर नहीं ध्यान’ राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने वाले किशोर, जिन्होंने 2021 में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में लगातार तीसरी बार भारी बहुमत दिलाने के बाद कंसल्टेंसी छोड़ दी थी, ने पड़ोसी राज्यों के चुनावों पर कोई भविष्यवाणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने गृह राज्य बिहार के लिए एक मजबूत विकल्प तैयार करने के उद्देश्य से राजनीति में सक्रिय भूमिका अपनाई है। पिछले चुनाव में मैंने पूरी कोशिश की, और जन सुराज पार्टी की हार को स्वीकार करते हुए अब फिर से जनता के बीच जा रहा हूं। जब तक बिहार में मेरा मिशन पूरा नहीं होता, मैं दूसरे राज्यों के बारे में नहीं सोचूंगा।” निशांत की एंट्री पर क्या बोले? नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री को लेकर पूछे गए सवाल पर किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को सार्वजनिक जीवन में आने का अधिकार है। उन्होंने कहा, “हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं, हालांकि यह बिहार में किसी नेता द्वारा अपने परिवार को आगे बढ़ाने का एक और उदाहरण है।”

प्रशांत किशोर फिर चर्चा में: नई शर्तों के साथ राजनीति से दूरी और मौन व्रत की घोषणा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने वाली जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आखिरकार सामने आ ही गए। पटना में उन्होंने प्रेस वार्ता की। उन्होंने पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि हमलोगों से जरूर कुछ गलती हुई है। इसलिए ऐसा परिणाम दिया। जनता ने हमलोगों को नहीं चुना। जनता ने हमलोगों पर विश्वास नहीं दिखाया। इस हार की जिम्मेदारी पूरी तरह से मेरी है। जिस प्रयास से हमलोग जुड़े थे, उनका विश्वास नहीं जीत पाया। हमलोग सामूहिक तौर पर हारे हैं। जो लोग जीतकर आए, उन्हें मैं बधाई देता हूं। सीएम नीतीश कुमार और भाजपा को बधाई। हमलोग बिहार से गरीबी दूर करने और पलायन कम होने की कामना करते हैं। मैं बिहार की जनता की अपेक्षाओं पर खड़ा नहीं उतर सका, इसके लिए मैं माफी चाहता हूं। प्रायश्चित के तौर पर मैं भितिहरवा गांधी आश्रम में एक दिन का मौन उपवास रखूंगा। जो भी जनसुराज के साथी हैं, सभी लोग भितिहरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे का उपवास रखूंगा। प्रशांत किशोर ने कहा कि गलती हो सकती है। लेकिन, हमने गुनाह नहीं किया है। मैं सिर उठाकर कह सकता हूं कि मैंने कोई गुनाह नहीं किया है। मैंने जातियों का जहर फैलाने का गुनाह नहीं किया। मैंने जनता का मत खरीदने की कोशिश नहीं की। जिस तरह महाभारत में अभिमन्यु को घेरकर छल से मार दिया गया। लेकिन, महाभारत नहीं जीता नहीं गया। जीत उसकी ही हुई जो धर्म के साथ थे। हमलोग फिर से खड़े होंगे। हमलोग जब तक जीतेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं। जब तक व्यवस्था को सुधार नहीं देते तब तक पीछे नहीं हटेंगे। अब दोगुनी मेहनत से बिहार की जनता के लिए काम करेंगे। प्रशांत किशोर ने कहा कि 10 हजार रुपये की बड़ी चर्चा हो रही है। यह बात सही नहीं है। 10 हजार रुपये के लिए जनता अपने बच्चों का भविष्य नहीं बेच सकते हैं। लोगों ने सिर्फ 10 हजार रुपये के लिए अपना वोट नहीं बेचा। चुनाव आयोग पर भी टीका-टिप्पणी करने का वक्त नहीं है। पूरा सरकारी तंत्र लगाया गया यह बताने में कि अगर आप एनडीए को वोट करते हैं, आप दो लाख रुपये दिया जाएगा। इसके लिए 10 हजार रुपये बयाना के तौर पर दिया गया। हर विधानसभा जीविका, आंगनबाड़ी, ममता, प्रवासी मजदूरों को करीब 29 हजार करोड़ रुपये सरकार ने बांट दिए। 40 हजार करोड़ रुपये की योजना लाई। हमलोग आपके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार से मैं अपील करता हूं कि आपने जिन्हें 10 हजार रुपये दिए, उन सभी महिलाओं को दो लाख रुपये दे दीजिए। ताकि वह अपना रोजगार खड़ा कर सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 10 हजार रुपये केवल वोट के लिए खरीदे गए। मैंने जदयू को 25 सीटों से अधिक आने पर मैंने राजनीति से संन्यास लेने की बात कही थी। मैं इस पर अब भी अडिग हूं। नीतीश कुमार को 25 सीट से ज्यादा न आनी चाहिए थी और न आती। लेकिन, 10 हजार रुपये देकर उन्होंने वोट खरीदा। मैंने आज एलान करता हूं कि अगले छह महीने में एनडीए सरकार ने 10 हजार देने वालों को दो लाख रुपये दे देगी तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। मैंने आपको शिकायत करने के लिए नंबर भी जारी कर दिया। यह चौबीसों घंटे सातों दिन चालू रहेगा। अगर आपके खाते में दो लाख रुपये छह महीने के अंदर नहीं आते हैं तो आप इस पर फोन कर जानकारी दें। हमलोग आपके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। 'मैं जनसुराज में किसी पद पर नहीं हूं, इसलिए संन्यास नहीं ले सकता' वहीं जदयू को 25 सीटों से अधिक आने पर सन्यास लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं जनसुराज में किसी पद पर नहीं हूं। इसलिए मैं किस हक से संन्यास लूं। मैंने राजनीति छोड़ने की बात कही थी। मैं इस बात पर अडिग हूं। मैंने राजनीति नहीं कर रहा हूं। नीतीश सरकार ने डेढ़ करोड़ लोगों को 10-10 हजार रुपये दिए हैं। पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान पैसे बांटने दिए, यह उनकी गलती है? इस पर मैंने टिप्पणी नहीं करूंगा। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि हमलोग हारे नहीं हैं। हमलोग तो रेस में ही नहीं हैं। पीके ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी पर भी उठाया सवाल प्रशांत किशोर ने कहा कि मधुबनी क्षेत्र में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल कोई नहीं जानता है। लेकिन, उस क्षेत्र में सवा लाख वोट आया। जो लोग कई साल से वहां राजनीति कर रहे हैं, उन्हें हजार में वोट आया है। कई सीटें ऐसी है कि चुनाव से 10 दिन पहले तय हुआ कि इस सीट से कौन सी पार्टी चुनाव लड़ेगी? इसके बाद उस पार्टी उन सीटों पर एक लाख से ज्यादा वोट आया है। मेरा यही सवाल है कि ऐसी कौन सी विधा है कि यह लोग ऐसा कर दिए। हमलोग तीन साल से उस क्षेत्र में घूमे। करीब 30 प्रतिशत लोगों को उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल नहीं पता था। ऐसे में एक लाख से ज्यादा वोट कैसे आ गया? यह बड़ा सवाल है। पाकिस्तान के इमरान खान का भी पीके ने दिया उदाहरण प्रशांत किशोर ने पाकिस्तानी में इमरान खान के चुनाव लड़ने के मॉडल का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान में इमरान खान ने करीब 25-30 साल पहले अपनी पार्टी शुरू की। उनकी पार्टी ने सात सीटों पर चुनाव लड़ी थे। सभी सीटों पर इमरान खान की पार्टी हार गई। तो मेरे चुनाव लड़ने या नहीं लड़ना फैसला एक अलग विषय है लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि पिछले तीन साल में जनसुराज ने जो भी प्रयास किया, उसे जनता ने स्वीकार नहीं किया। मुझे लालू यादव, नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी, अशोक चौधरी जैसे धुरंधर नेताओं की तरह बिहार की समझ नहीं है। क्योंकि, मैंने भ्रष्टाचार नहीं किया। मुझे नहीं समझ है कि बिहार को जातियों, धर्म के नाम पर बिहार को कैसे बांटा जाए? मुझे नहीं समझ है कि बिहार में 10 हजार रुपया देकर वोट कैसे खरीदे जाए।  

प्रशांत किशोर ने किसे ठेस पहुंचाई? बिहार चुनाव में महागठबंधन और NDA पर असर

 नई दिल्ली 14 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजे महागठबंधन के लिए ही नहीं प्रशांत किशोर की नई नवेली पार्टी जनसूरज पार्टी (JSP) के लिए भी अप्रत्य़ाशित रहे.  238 सीटों चुनाव पर लड़ने वाली जेएसपी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी. पार्टी कr 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई.   फिर भी, JSP ने 35 सीटों पर वोटकटवा की भूमिका निभाई, जहां पार्टी का वोट शेयर विजेता के मार्जिन से ज्यादा रहा. खास यह रहा कि जनसुराज पार्टी ने दोनों ही गठबंधनों को नुकसान पहुंचाया. विपक्ष उन पर बीजेपी का एजेंट होने का आरोप लगाती रही है पर उनकी पार्टी के उम्मीदवारों ने दोनों ही गठबंधनों के प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाया. कभी मोदी-नीतीश के पोल स्ट्रैटेजिस्ट रहे किशोर ने 2022 में JSP लॉन्च कर 'बदलाव' का नारा दिया था. उन्होंने दावा किया था कि पार्टी या तो अर्श पर रहेगी या फर्श पर. जो शायद सही साबित हुआ.  चुनाव प्रचार के दौरान उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ के बारे में कुछ का मानना था कि उनकी सवर्ण जातिगत पहचान के कारण वह बीजेपी के वोट काटेंगे, जबकि अन्य का तर्क था कि वह राज्य से पलायन जैसे मुद्दों पर बात करके सत्ता-विरोधी युवा वोटों को बांटेंगे. हलांकि निश्चित रूप से उनके चलते एक गठबंधन को ज्यादा फायदा मिला है. आइये देखते हैं कि वह कौन सा गठबंधन है जिसे प्रशांत किशोर की स्ट्रैटेजी से अधिक फायदा पहुंचा?  जिन 35 सीटों पर वोटकटवा बने उनमें किसका नुकसान ज्यादा हुआ? प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने जिन 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से 236 पर वह जमानत जब्त करा बैठी, लेकिन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि यह पार्टी कई सीटों पर खेल बिगाड़ने वाली भूमिका भी निभाई है.  35 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के वोट जीत के अंतर से अधिक थे. इनमें से एनडीए ने 19 सीटें जीतीं जबकि महागठबंधन को 14 सीटें मिलीं हैं. एआईएमआईएम और बीएसपी को भी प्रशांत किशोर के प्रत्याशियों के वोट काटने का फायदा एक-एक सीटों पर मिला है. पार्टी ने कुल 3.5 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं जो एआईएमआईएम, बीएसपी आदि के मुकाबले बेहतर है. इसके साथ कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी के मुकाबले भी जनसुराज का वोट परसेंटेज बेहतर ही कहा जाएगा. गौरतलब है कि काग्रेस ने 8.3 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं. हालांकि निश्चित रूप से यह कहना बहुत मुश्किल है कि जन सुराज को किसी सीट पर अंतर से अधिक वोट मिलने से किसे फायदा पहुंचा . क्योंकि यह जानना असंभव है कि जो वोट पीके की पार्टी को मिले वे वोट कहां जाते. पार्टी 115 सीटों पर तीसरे स्थान पर रही और एक सीट दूसरे स्थान पर रही. इसलिए प्रशांत किशोर को एक खेल बिगाड़ने वाले खिलाड़ी के रूप में देखा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.राजनीतिक पारी की शुरूआत में हर प्लेयर करीब-करीब ऐसा ही पर्फार्मेंस देता है. किशोर की पार्टी को मिले वोटों के चलते जेडीयू को 10 सीटें पर जबकि बीजेपी को पांच पर फायदा मिला है. एलजेएपी-आरवी को तीन और आरएलएम को एक सीट मिली है. महागठबंधन में, आरजेडी को नौ सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस को दो. सीपीएम, सीपीआईएमएल-एल और आईआईपी को प्रत्येक में एक-एक सीट मिली है.  'नौवीं फेल तेजस्वी' का नरेटिव बनाना प्रशांत किशोर ने अपने चुनाव अभियान के दौरान लगातार  तेजस्वी यादव को 'नौवीं फेल' का तंज कसकर और 'जंगल राज' का डर दिखाकर ऐसा माहौल बनाया जो आरजेडी की युवा अपील को ध्वस्त कर दिया. JSP का 3.5 प्रतिशत वोट शेयर वोटकटवा बनकर महागठबंधन को 10-15 सीटें खर्च करा गया. किशोर, जो पूर्व स्ट्रैटेजिस्ट हैं, ने यह नरेटिव सोशल मीडिया और रैलियों में चलाकर आरजेडी की छवि को 'अशिक्षित जंगल राज' का प्रतीक बना दिया.  किशोर ने तेजस्वी की शिक्षा पर सीधा हमला बोला. तेजस्वी ने 2015 में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी नौवीं कक्षा की असफलता को 'सामान्य' बताया था, लेकिन किशोर ने इसे 'अक्षमता' का प्रतीक बनाया. अक्टूबर 2025 की रैलियों में किशोर ने कहा, नौवीं फेल नेता बिहार को नौकरी देंगे? पहले खुद पढ़ लो. युवा वोटर (60% आबादी), जो तेजस्वी को 'नई पीढ़ी' मानते थे, ने इसे 'अपमानजनक' पाया . यह नरेटिव आरजेडी के युवा वोट शेयर को 5% गिरा दिया. तेजस्वी ने जवाब दिया, शिक्षा डिग्री से नहीं, काम से आती है. लेकिन किशोर का तीर लग चुका था. यह प्रहार आरजेडी की 'नौकरी देंगे' अपील को फीका कर गया, क्योंकि बेरोजगारी (14.5%) पर युवा असंतोष JSP की ओर गया. किशोर ने तेजस्वी को 'लालू के जंगल राज' का वारिस ठहराकर डर का माहौल बनाया. 1990s के लालू काल की अपराध, भ्रष्टाचार और आर्थिक ठहराव की यादें ताजा कीं. किशोर ने रैलियों में कहा, तेजस्वी का राज लौटेगा. बीजेपी का विरोध सीमित लेवल पर करना प्रशांत किशोर ने बीजेपी का विरोध 'सीमित स्तर' पर रखा,  किशोर का फोकस मुख्य रूप से तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार पर रहा. किशोर ने बीजेपी नेता डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर तमाम गंभीर आरोप लगाए. पर मोदी और शाह के खिलाफ वो खुलकर सामने नहीं आ सके. यह रणनीति एनडीए को सुरक्षित रखते हुए महागठबंधन के खिलाफ नरेटिव बनाने जैसा था. किशोर की JSP ने 'बदलाव' का नारा दिया.बेरोजगारी, प्रवासन, शिक्षा सुधार पर उनकी बातें जिन युवकों ने सुनीं उन्होंने आरजेडी-कांग्रेस की बजाए जनसुराज को वोट देना बेहतर समझा. जाहिर है कि बीजेपी से नाराजगी वाले वोट महागठबंधन को जाते पर वो दो भाग में बंट गए. बेरोजगारी , पलायन आदि के मुद्दे पर बीजेपी से नाराज कुझ वोटर्स के जनसुराज की ओर जाने से स्पष्ट रूप से नुकसान महागठबंधन का ही हुआ.  नीतीश को तेजस्वी पर तरजीह देना महागठबंधन की हुई दुर्गति के लिए एक प्रमुख सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) साबित हुए, जिनकी जनसूरज पार्टी (JSP) ने किशोर ने तेजस्वी यादव को 'नौवीं फेल' और 'जंगल राज का वारिस' ठहराकर नीतीश कुमार के 'सुशासन' को चमकाया.चुनाव प्रचार के दौरान एक बार किसी पत्रकार ने प्रशांत किशोर से पूछा कि आपको नीतीश और तेजस्वी में से किसी एक को चुनना हो तो किसे चुनेंगे? किशोर ने नीतीश कुमार पर अपनी मुहर लगाई थी. जाहिर है कि इसका फायदा एनडीए को मिला.

PK का आगे क्या होगा राजनीतिक सफ़र? उनकी हार के 5 बड़े कारण हुए उजागर

पटना बिहार विधानसभा चुनावों में प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज पार्टी (जेएसपी) की उम्मीदें धराशायी हो गईं। शुरुआती रुझानों में न केवल उन्हें कोई सीट नहीं मिली, बल्कि उनके सबसे मजबूत उम्मीदवार भी किसी मुकाबले में दिखाई नहीं दिए। चुनावी मैदान में किशोर न तो एनडीए को चुनौती दे पाए, न ही महागठबंधन को प्रभावित कर पाए -मतलब कि वे उम्मीद के मुताबिक वोटकटवा भी नहीं बन सके। अब सवाल यह उठता है कि जो उन्होंने जोर-शोर से कहा था- अगर जनता दल यूनाइटेड 25 से अधिक सीटें जीत गया तो मैं संन्यास ले लूंगा- क्या किशोर उस वादे पर कायम रहेंगे? बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजों ने प्रशांत किशोर और उनकी नई राजनीतिक मुहिम जनसुराज पार्टी (जेएसपी) के लिए उम्मीदों के बुलंद पंखों को तोड़ दिया है। शुरुआती रुझानों में पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी, जबकि एग्जिट पोल्स ने 0-5 सीटों का अनुमान लगाया था। खास बात यह रही कि पार्टी के सबसे मजबूत उम्मीदवार भी किसी मुकाबले में नजर नहीं आए। जनसुराज पार्टी के जमावड़े और सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ ने शुरुआती तौर पर यह भरोसा दिया था कि किशोर किसी न किसी रूप में बिहार की राजनीति में सेंध लगाने में सक्षम हैं। लेकिन चुनाव परिणाम यह साबित करते हैं कि जमीन पर उनकी पकड़ लगभग शून्य रही। अब सवाल उठता है कि प्रशांत किशोर अपने चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों पर खरे उतरेंगे या नहीं। संन्यास का वादा और विफलता चुनाव प्रचार के दौरान किशोर ने नेशनल टीवी पर दावा किया था कि अगर जनता दल यूनाइटेड 25 से अधिक सीटें जीतता है तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे। यह वादा इतनी आत्मविश्वास के साथ किया गया था कि उन्होंने पत्रकार से कहा कि यह रिकॉर्डिंग रख लें। अब परिणाम सामने हैं और किशोर के वादे के पालन पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। हार के पीछे पांच प्रमुख कारण:- 1 तेजस्वी यादव को चुनौती देने से पीछे हटना जेएसपी की हार का सबसे बड़ा कारण प्रशांत किशोर का तेजस्वी यादव को चुनौती न देना रहा। शुरुआती घोषणा में उन्होंने राघोपुर से मैदान में उतरकर तेजस्वी की ‘परिवारवाद’ और वादों की पोल खोलने की बात कही थी। लेकिन आखिरकार यह मुकाबला नहीं हुआ, जिससे उनका वैकल्पिक नेता बनने का मौका गंवा गया। 2- मोदी और शाह के खिलाफ खुलकर नहीं बोले किशोर ने केंद्रीय नेताओं नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ सीधे तौर पर हमला नहीं किया। विपक्ष के कई नेता चुनावी मुद्दों पर उनके विरोध में जहर उगल रहे थे, लेकिन किशोर इस लहर का हिस्सा नहीं बने। जनता ने यह महसूस किया कि जेएसपी बीजेपी की ‘बी टीम’ जैसी भूमिका निभा रही है। 3 – शराबबंदी के खिलाफ विवादास्पद रुख किशोर ने शराबबंदी समाप्त करने की घोषणा कर महिलाओं और परिवारों की नाराजगी झेली। बिहार में महिलाओं के लिए यह नीति सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता का प्रतीक मानी जाती है। किशोर का यह कदम युवाओं को लुभाने की कोशिश में महिलाओं के विरोध को जन्म देने वाला साबित हुआ। 4- जाति और धर्म के आधार पर टिकट वितरण किशोर ने चुनाव से पहले घोषणा की थी कि उनकी पार्टी जाति और धर्म से ऊपर उठकर राजनीति करेगी। लेकिन टिकट वितरण में वही पैटर्न अपनाया गया, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हुआ। 5- NDA नेताओं के खिलाफ माहौल नहीं बना पाए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बावजूद किशोर ने इसे केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रखा। जनता तक इस मुद्दे का प्रभाव नहीं पहुंच पाया।

प्रशांत किशोर की राजनीति पर संकट? अपनी ही शर्त से घिरे रणनीतिकार

पटना बिहार में दो चरणों की बंपर वोटिंग के बाद अब मतगणना की बारी है। तमाम एग्जिट पोल्स का अनुमान है कि बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है। आधे दर्जन से अधिक एग्जिट पोल्स में एनडीए को बंपर सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई है। यदि सर्वे सच साबित होते हैं तो ना सिर्फ महागठबंधन के सीएम फेस तेजस्वी यादव को बड़ा झटका लगेगा बल्कि बिहार में अपने लिए जगह तलाश रहे जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के लिए भी अपने बयान पर खड़े रहने की चुनौती खड़ी हो जाएगी। दरअसल, चुनावी रणनीतिकार और अपनी सटीक भविष्यवाणियों के लिए चर्चित रहे प्रशांत किशोर ने बिहार को लेकर एक बड़ा दावा करते हुए अपने राजनीतिक भवष्य को दांव पर लगा दिया। पीके नाम से मशहूर प्रशांत किशोर ने कभी पूरे विश्वास से यह तो दावा नहीं किया कि जन सुराज की ही सरकार बनेगी पर ताल ठोकर जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटें नहीं मिलने की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि नीतीश कुमार की पार्टी को इससे ज्यादा सीटों पर जीत गई तो वह राजनीति छोड़ देंगे। अधिकतर एग्जिट पोल्स में जो भविष्यवाणी की गई है, नतीजे उसके करीब भी रहे तो प्रशांत किशोर खुद से लगाई अपनी शर्त हार सकते हैं। अधिकतर सर्वे में भाजपा-जेडीयू की अगुवाई वाले गठबंधन को 150 से अधिक सीटों पर जीत मिलने की संभावना जताई गई है। एक्सिस माय इंडिया के मुताबिक एनडीए को 121 से 141 सीटें मिल सकती हैं तो महागठबंधन को 98 से 118 सीटों पर जीत मिल सकती है। सर्वे एजेंसी के मुताबिक, जेडीयू का तीर 56-62 सीटों पर विजयी निशाना लगा सकता है। यदि एजेंसी के अनुमान से 15-20 सीटें कम भी जेडीयू को मिलीं तो प्रशांत किशोर के सामने यह चुनौती होगी कि वह अपने बयान पर कायम रहते हुए राजनीति छोड़ने का ऐलान कर देंगे या फिर यूटर्न के लिए कोई नई दलील पेश करेंगे। क्या कहा था प्रशांत किशोर ने? प्रशांत किशोर ने कई टीवी इंटरव्यू और जनसभाओं में जेडीयू को 25 से कम सीटें मिलने का दावा करते हुए कहा था कि यदि यह सच नहीं हुआ तो वह राजनीति छोड़ देंगे। न्यूज 24 को दिए एक इंटरव्यू में भी पीके ने यह दावा किया था। उन्होंने कहा था, 'एनडीए की सरकार बिल्कुल नहीं आ रही है। लिखकर ले लीजिए। दो तीन बातें लिखकर ले लीजिए। नीतीश कुमार नवंबर के बाद मुख्यमंत्री नहीं होंगे, नया मुख्यमंत्री होगी। जेडीयू को, तीर सिंबल को 25 से ज्यादा सीटें नहीं आएंगी। (एंकर ने कहा कि आ गईं तो राजनीति छोड़ देंगे तो प्रशांत किशोर ने दो बार कहा) आ गईं छोड़ देंगे, छोड़ देंगे भाई।' एक अन्य चैनल न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू में जब पीके से पूछा गया कि उन्होंने जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटें आने पर सियासत छोड़ने की बात कही है तो उन्होंने दोहराते हुए कहा,'रिजल्ट के बाद यदि 25 सीट से ज्यादा जदयू को आ जाए यदि जनसुराज भी जीता होगा तो मैं छोड़ दूंगा। मैं इतने दावे के साथ कह रहा हूं नहीं आएंगी 25 सीटें। लिख लो मेरी बात। वजह की बात नहीं है, यह तो शर्त लगाने वाली बात हो गई।'  

प्रशांत किशोर पर EC की नजर: डबल वोटर आईडी को लेकर नोटिस जारी

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के बीच जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर को निर्वाचन आयोग ने नोटिस भेज दिया है। आयोग ने पीके से दो वोटर आईडी रखने के मामले में जवाब मांगा है। प्रशांत किशोर का नाम पश्चिम बंगाल और बिहार, दोनों राज्यों की वोटर लिस्ट में शामिल है। चुनाव आयोग ने उनसे 3 दिन के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। रोहतास जिले की करगहर विधानसभा क्षेत्र के निर्वाची पदाधिकारी सह डीसीएलआर सासाराम की ओर से मंगलवार को यह नोटिस जारी किया गया। नोटिस में लिखा गया है कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार प्रशांत किशोर का नाम बिहार और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों के निर्वाचक सूची में दर्ज है। उनका नाम बिहार में करगहर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में है, जबकि पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा से भी वह मतदाता हैं। आयोग का कहना है कि लोक प्रतिनिधित्व कानून के अनुसार एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में किसी एक व्यक्ति का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है। इन नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कानून के तहत एक साल की जेल या जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। निर्वाची पदाधिकारी ने प्रशांत किशोर से तीन दिनों के भीतर इस पर जवाब आयोग के समक्ष पेश करने को कहा है। दूसरी ओर, जन सुराज पार्टी का कहना है कि प्रशांत किशोर जब पश्चिम बंगाल में रहते थे, तब उन्होंने अपना नाम वहां की मतदाता सूची में दर्ज कराया था। अब वे बिहार में रहते हैं और करहगर से उनका नाम वोट लिस्ट में है। पीके की ओर से पूर्व में ही पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से अपना नाम हटाने का आवेदन कर दिया गया है।