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तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव: द्रविड़ दलों का 50 साल पुराना दबदबा खत्म, नई सत्ता की शुरुआत

 तमिलनाडु तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक नया युग की शुरूआत हो गई है। 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के संस्थापक जोसेफ विजय ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। यह राज्य में पहली बार है जब किसी गैर-द्रविड़ पार्टी ने सरकार बनाई है। नई सरकार के गठन के साथ ही डीएमके और एआईएडीएमके का दशकों पुराना दबदबा खत्म हो गया है। विजय के साथ में  9 और मंत्रियों ने सपथ ली है। अब विजय को 13 मई तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा। विजय के साथ जिन नौ मंत्रियों ने सपथ ली है आइये उनके बार में हम आपको बताते है। एन आनंद 61 साल के एन आनंद को लोग 'बुसी आनंद' के नाम से भी जानते हैं। वह विजय के सबसे भरोसेमंद साथी माने जाते हैं। साल 2006 में वह पुडुचेरी से विधायक चुने गए थे। अब उन्होंने चेन्नई की टी नगर सीट से जीत हासिल की है। वह टीवीके के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और पहले विजय रसिगर मंदरम के प्रमुख  के तौर पर काम कर चुके हैं। आधव अर्जुना बास्केटबॉल खिलाड़ी और बिजनेसमैन रहे आधव अर्जुना अब राजनीति में सक्रिय हैं। वह बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं। वह वीसीके पार्टी छोड़कर टीवीके में शामिल हुए थे। पार्टी के महासचिव के रूप में उन्होंने चुनाव अभियान में बड़ी भूमिका निभाई और चेन्नई की विल्लिवाक्कम सीट से जीत दर्ज की। राजमोहन अरुमुगम डिजिटल प्लेटफॉर्म 'पुट चटनी' से मशहूर हुए राजमोहन ने युवाओं और नए वोटरों को पार्टी से जोड़ने में मदद की। प्रचार सचिव के तौर पर उन्होंने सोशल मीडिया और यूट्यूब वीडियो के जरिए पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुँचाया। उनके मजाकिया अंदाज और रील्स को युवाओं ने काफी पसंद किया। सी टी आर निर्मल कुमार 44 साल के निर्मल कुमार टीवीके की डिजिटल रणनीति के मुख्य चेहरा हैं। उनके पास बीजेपी और एआईएडीएमके के सोशल मीडिया सेल में काम करने का अनुभव है। उन्होंने व्हाट्सएप और मीम नेटवर्क का एक बड़ा जाल तैयार किया, जिससे 2025 और 2026 के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी का दबदबा बना रहा। के जी अरुणराज पूर्व आईआरएस अधिकारी और डॉक्टर अरुणराज ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर टीवीके जॉइन की। वह पार्टी में प्रचार और नीति के महासचिव हैं। उन्होंने तमिलनाडु, बिहार और महाराष्ट्र में आयकर विभाग में सेवा दी है। उन्होंने तिरुचेंगोडु सीट से चुनाव जीता है। के ए सेंगोट्टैयन 50 साल से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव रखने वाले सेंगोट्टैयन पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। वह एआईएडीएमके के दिग्गज नेता रहे हैं और नवंबर 2025 में टीवीके में शामिल हुए। उन्होंने गोबीचेट्टीपलयम सीट से नौवीं बार जीत हासिल की है। वह पार्टी की कार्यकारी समिति के मुख्य समन्वयक हैं। कीर्तना एस कीर्तना एस विजय की कैबिनेट में फिलहाल इकलौती महिला मंत्री हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास 22.6 लाख रुपये की संपत्ति और 12.8 लाख रुपये की देनदारी है। उनकी सालाना कमाई 6.4 लाख रुपये है और उन पर कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पी वेंकटरमणन 48 साल के वेंकटरमणन ने मायलापुर सीट से 70,070 वोटों के साथ जीत दर्ज की है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उन पर कोई आपराधिक केस नहीं है। उनके पास कुल 5.4 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें 3.2 करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है। केटी प्रभु पेशे से डेंटिस्ट डॉ. केटी प्रभु ने शिवगंगा की करैकुडी सीट से चुनाव जीता है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 11.4 करोड़ रुपये है। उनकी सालाना आय 54.6 लाख रुपये है और उन पर 3.3 करोड़ रुपये की देनदारी है।

AAP से टीवीके तक: नए राजनीतिक दलों की पहली ही चुनाव में चौंकाने वाली एंट्री

नई दिल्ली तमिल फिल्मों के सुपरस्टार विजय ने अपनी सियासी पारी के आगाज से न सिर्फ सबको हैरान कर दिया, बल्कि उनकी पार्टी तमिलागा वेट्री कषगम (टीवीके) अपने गठन के दो साल के भीतर ही देश के उन चंद सियासी 'स्टार्टअप' में शामिल हो गई जो अपने पहले ही चुनाव में सत्ता तक पहुंचने में सफल रहे। टीवीके अब आम आदमी पार्टी, असम गण परिषद और तेलुगु देशम पार्टी जैसी पार्टियों की जमात में शामिल हो गयी है जो अपने पहले चुनाव में ही सत्तासीन हो गए। AAP ने भी किया था कमाल आम आदमी पार्टी ने 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी सियासी पारी की शुरुआत की थी और 70 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीती थीं और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी। असम गण परिषद 1985 में अपने गठन के तुरंत बाद सत्ता पर काबिज हुई थी। तेदेपा ने अपने गठन के एक साल बाद 1983 में आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में 201 सीटें जीतकर भारी बहुमत के साथ जीत हासिल की थी। सभी को नहीं मिली सफलता कुछ राजनीतिक दल अपने आगाज के साथ ही कामयाबी के शिखर पर पहुंच गए, लेकिन कई ऐसे दल भी रहे जिन्होंने अस्तित्व में आने के बाद अपने पहले चुनाव में शानदार दस्तक दी, लेकिन सत्ता में आने के लिए इंतजार करना पड़ा। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की 'जन सुराज पार्टी' चौतरफा चर्चा के बावजूद सफलता हासिल नहीं कर सकी। इसी तरह अभिनेता कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मय्यम 2021 को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली। शुरुआत से ही चर्चा में रही टीवीके टीवीके ने शुरू से ही जोरदार चर्चा पैदा की और अतीत में फिल्मी सितारों द्वारा बनाए गए कई राजनीतिक 'स्टार्टअप' के दक्षिण में अच्छे प्रदर्शन की तर्ज पर तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में इससे काफी उम्मीदें थीं। टीवीके ने तमिलनाडु के दो मुख्य दलों द्रमुक और अन्नाद्रमुक को पछाड़कर सब को हतप्रभ कर दिया। बिहार और यूपी में आईं नई पार्टियां बिहार और उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई राजनीतिक दल सियासी 'स्टार्टअप' के रूप में सामने आए, जिनमें कुछ नाकाम हुए और कुछ सीमित दायरे में कायम हैं। बिहार में पुष्पम प्रिया चौधरी की 'प्लूरल्स पार्टी' भी एक ऐसा दल है जो चर्चा के बावजूद कुछ सफलता हासिल नहीं कर सकी। जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा बिहार में सीमित दायरे में अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं। उत्तर प्रदेश में निषाद पार्टी, पीस पार्टी, अपना दल (सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) जैसी कुछ ऐसे ही दल हैं।

सांसदों के टूटने से AAP संकट में, संसद में NDA को मिला रणनीतिक बढ़त

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए ये हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. सात दिनों के अंदर पार्टी ने राज्यसभा में अपने 10 में से 7 सांसदों को खो दिया. इसे एक सोचा-समझा राजनीतिक ऑपरेशन बताया जा रहा है. इसकी वजह से संसद में सियासत का गणित पूरा तरह बदल गया है. बुधवार, 22 अप्रैल की सुबह जब अरविंद केजरीवाल को इस तरह के किसी कदम अंदेशा हुआ, तो उन्होंने तुरंत अपने सांसदों को फोन मिलाना शुरू किया. कुछ ने फोन उठाए, कुछ ने गोल-मोल जवाब दिए और कुछ ने फोन ही नहीं उठाए. केजरीवाल शुक्रवार सुबह तक संदीप पाठक को फोन करते रहे और उन्हें भरोसा दिया गया कि पाठक उनके ही साथ हैं. लेकिन शुक्रवार दोपहर तक पाठक सीधे बीजेपी मुख्यालय पहुंच गए और सत्ताधारी पार्टी का दामन थाम लिया. पहले आप सांसदों का विलय सोमवार, 27 अप्रैल को होना था. गृह मंत्री पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार से लौटकर सभी सांसदों से मिलने वाले थे. लेकिन फिर बीजेपी को पता चला कि केजरीवाल को इस साजिश की भनक लग गई है और वो सांसदों को मनाने की कोशिश में जुट गए हैं. ऐसे में इस 'ऑपरेशन' की तारीख बदल दी गई और शाह की गैर-मौजूदगी में ही शुक्रवार को मिशन को अंजाम दे दिया गया. इस ऑपरेशन के मुख्य किरदार 1. राघव चड्ढा: पर्दे के पीछे के रणनीतिकार राघव चड्ढा इस पूरे ऑपरेशन के फील्ड कमांडर बताए जा रहे हैं. शराब नीति मामले के बाद से ही वो पार्टी से दूरी बनाए हुए थे. लंदन में उनकी आंखों की सर्जरी के दौरान ही बीजेपी से बातचीत का रास्ता साफ हुआ. वापस आकर उन्होंने एक-एक करके दूसरे सांसदों को भरोसे में लिया. 2. संदीप पाठक: सबसे बड़ा झटका संदीप पाठक वो शख्स हैं जिन्होंने पंजाब में AAP की ऐतिहासिक जीत की नींव रखी थी. केजरीवाल को सबसे ज्यादा दुख पाठक के जाने का हुआ क्योंकि वो आखिरी मिनट तक केजरीवाल को वफादारी का भरोसा दिलाते रहे और फिर सीधे राघव चड्ढा के साथ बीजेपी में शामिल हो गए. 3. हरभजन सिंह: पहले ही तय था रुख पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का जाना चौंकाने वाला नहीं था. सूत्रों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान ही BCCI से आए एक फोन ने उनका रुख साफ कर दिया था. वो पहले से ही बीजेपी के प्रभाव क्षेत्र में थे. 4. उद्योगपति सांसदों की 'मजबूरी' राजिंदर गुप्ता (ट्राइडेंट ग्रुप), विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल (LPU) जैसे सांसदों का आधार राजनीति से ज्यादा व्यापार था. अशोक मित्तल के संस्थानों पर विलय से ठीक 9 दिन पहले ED की छापेमारी हुई थी. इन सांसदों के लिए केंद्र सरकार के साथ चलना एक व्यावसायिक जरूरत भी थी. बीजेपी को क्या मिला? राजनीतिक रूप से पंजाब में बीजेपी को शायद तुरंत बड़ा फायदा न मिले, क्योंकि इनमें से ज्यादातर सांसद जमीनी नेता नहीं हैं. लेकिन संसदीय गणित में बीजेपी को बंपर जीत मिली है: बीजेपी सांसदों की संख्या 113 पहुंच गई है और NDA ने पहली बार राज्यसभा में साधारण बहुमत पार कर लिया है. अब सरकार को 'वन नेशन वन इलेक्शन' जैसे बड़े बिल पास कराने के लिए क्षेत्रीय दलों के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी. विपक्ष अब राज्यसभा में बिलों को नहीं रोक पाएगा. शुक्रवार शाम तक AAP के पास राज्यसभा में सिर्फ 3 सांसद (संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल) रह गए. केजरीवाल ने इसे पंजाबियों के साथ धोखा बताया, लेकिन बीजेपी के लिए 2027 के पंजाब मिशन का असली खेल अब शुरू हुआ है.

प्रशांत किशोर फिर चर्चा में: नई शर्तों के साथ राजनीति से दूरी और मौन व्रत की घोषणा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने वाली जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आखिरकार सामने आ ही गए। पटना में उन्होंने प्रेस वार्ता की। उन्होंने पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि हमलोगों से जरूर कुछ गलती हुई है। इसलिए ऐसा परिणाम दिया। जनता ने हमलोगों को नहीं चुना। जनता ने हमलोगों पर विश्वास नहीं दिखाया। इस हार की जिम्मेदारी पूरी तरह से मेरी है। जिस प्रयास से हमलोग जुड़े थे, उनका विश्वास नहीं जीत पाया। हमलोग सामूहिक तौर पर हारे हैं। जो लोग जीतकर आए, उन्हें मैं बधाई देता हूं। सीएम नीतीश कुमार और भाजपा को बधाई। हमलोग बिहार से गरीबी दूर करने और पलायन कम होने की कामना करते हैं। मैं बिहार की जनता की अपेक्षाओं पर खड़ा नहीं उतर सका, इसके लिए मैं माफी चाहता हूं। प्रायश्चित के तौर पर मैं भितिहरवा गांधी आश्रम में एक दिन का मौन उपवास रखूंगा। जो भी जनसुराज के साथी हैं, सभी लोग भितिहरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे का उपवास रखूंगा। प्रशांत किशोर ने कहा कि गलती हो सकती है। लेकिन, हमने गुनाह नहीं किया है। मैं सिर उठाकर कह सकता हूं कि मैंने कोई गुनाह नहीं किया है। मैंने जातियों का जहर फैलाने का गुनाह नहीं किया। मैंने जनता का मत खरीदने की कोशिश नहीं की। जिस तरह महाभारत में अभिमन्यु को घेरकर छल से मार दिया गया। लेकिन, महाभारत नहीं जीता नहीं गया। जीत उसकी ही हुई जो धर्म के साथ थे। हमलोग फिर से खड़े होंगे। हमलोग जब तक जीतेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं। जब तक व्यवस्था को सुधार नहीं देते तब तक पीछे नहीं हटेंगे। अब दोगुनी मेहनत से बिहार की जनता के लिए काम करेंगे। प्रशांत किशोर ने कहा कि 10 हजार रुपये की बड़ी चर्चा हो रही है। यह बात सही नहीं है। 10 हजार रुपये के लिए जनता अपने बच्चों का भविष्य नहीं बेच सकते हैं। लोगों ने सिर्फ 10 हजार रुपये के लिए अपना वोट नहीं बेचा। चुनाव आयोग पर भी टीका-टिप्पणी करने का वक्त नहीं है। पूरा सरकारी तंत्र लगाया गया यह बताने में कि अगर आप एनडीए को वोट करते हैं, आप दो लाख रुपये दिया जाएगा। इसके लिए 10 हजार रुपये बयाना के तौर पर दिया गया। हर विधानसभा जीविका, आंगनबाड़ी, ममता, प्रवासी मजदूरों को करीब 29 हजार करोड़ रुपये सरकार ने बांट दिए। 40 हजार करोड़ रुपये की योजना लाई। हमलोग आपके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार से मैं अपील करता हूं कि आपने जिन्हें 10 हजार रुपये दिए, उन सभी महिलाओं को दो लाख रुपये दे दीजिए। ताकि वह अपना रोजगार खड़ा कर सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 10 हजार रुपये केवल वोट के लिए खरीदे गए। मैंने जदयू को 25 सीटों से अधिक आने पर मैंने राजनीति से संन्यास लेने की बात कही थी। मैं इस पर अब भी अडिग हूं। नीतीश कुमार को 25 सीट से ज्यादा न आनी चाहिए थी और न आती। लेकिन, 10 हजार रुपये देकर उन्होंने वोट खरीदा। मैंने आज एलान करता हूं कि अगले छह महीने में एनडीए सरकार ने 10 हजार देने वालों को दो लाख रुपये दे देगी तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। मैंने आपको शिकायत करने के लिए नंबर भी जारी कर दिया। यह चौबीसों घंटे सातों दिन चालू रहेगा। अगर आपके खाते में दो लाख रुपये छह महीने के अंदर नहीं आते हैं तो आप इस पर फोन कर जानकारी दें। हमलोग आपके लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। 'मैं जनसुराज में किसी पद पर नहीं हूं, इसलिए संन्यास नहीं ले सकता' वहीं जदयू को 25 सीटों से अधिक आने पर सन्यास लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं जनसुराज में किसी पद पर नहीं हूं। इसलिए मैं किस हक से संन्यास लूं। मैंने राजनीति छोड़ने की बात कही थी। मैं इस बात पर अडिग हूं। मैंने राजनीति नहीं कर रहा हूं। नीतीश सरकार ने डेढ़ करोड़ लोगों को 10-10 हजार रुपये दिए हैं। पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान पैसे बांटने दिए, यह उनकी गलती है? इस पर मैंने टिप्पणी नहीं करूंगा। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि हमलोग हारे नहीं हैं। हमलोग तो रेस में ही नहीं हैं। पीके ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी पर भी उठाया सवाल प्रशांत किशोर ने कहा कि मधुबनी क्षेत्र में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल कोई नहीं जानता है। लेकिन, उस क्षेत्र में सवा लाख वोट आया। जो लोग कई साल से वहां राजनीति कर रहे हैं, उन्हें हजार में वोट आया है। कई सीटें ऐसी है कि चुनाव से 10 दिन पहले तय हुआ कि इस सीट से कौन सी पार्टी चुनाव लड़ेगी? इसके बाद उस पार्टी उन सीटों पर एक लाख से ज्यादा वोट आया है। मेरा यही सवाल है कि ऐसी कौन सी विधा है कि यह लोग ऐसा कर दिए। हमलोग तीन साल से उस क्षेत्र में घूमे। करीब 30 प्रतिशत लोगों को उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का सिंबल नहीं पता था। ऐसे में एक लाख से ज्यादा वोट कैसे आ गया? यह बड़ा सवाल है। पाकिस्तान के इमरान खान का भी पीके ने दिया उदाहरण प्रशांत किशोर ने पाकिस्तानी में इमरान खान के चुनाव लड़ने के मॉडल का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान में इमरान खान ने करीब 25-30 साल पहले अपनी पार्टी शुरू की। उनकी पार्टी ने सात सीटों पर चुनाव लड़ी थे। सभी सीटों पर इमरान खान की पार्टी हार गई। तो मेरे चुनाव लड़ने या नहीं लड़ना फैसला एक अलग विषय है लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि पिछले तीन साल में जनसुराज ने जो भी प्रयास किया, उसे जनता ने स्वीकार नहीं किया। मुझे लालू यादव, नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी, अशोक चौधरी जैसे धुरंधर नेताओं की तरह बिहार की समझ नहीं है। क्योंकि, मैंने भ्रष्टाचार नहीं किया। मुझे नहीं समझ है कि बिहार को जातियों, धर्म के नाम पर बिहार को कैसे बांटा जाए? मुझे नहीं समझ है कि बिहार में 10 हजार रुपया देकर वोट कैसे खरीदे जाए।  

PK का आगे क्या होगा राजनीतिक सफ़र? उनकी हार के 5 बड़े कारण हुए उजागर

पटना बिहार विधानसभा चुनावों में प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज पार्टी (जेएसपी) की उम्मीदें धराशायी हो गईं। शुरुआती रुझानों में न केवल उन्हें कोई सीट नहीं मिली, बल्कि उनके सबसे मजबूत उम्मीदवार भी किसी मुकाबले में दिखाई नहीं दिए। चुनावी मैदान में किशोर न तो एनडीए को चुनौती दे पाए, न ही महागठबंधन को प्रभावित कर पाए -मतलब कि वे उम्मीद के मुताबिक वोटकटवा भी नहीं बन सके। अब सवाल यह उठता है कि जो उन्होंने जोर-शोर से कहा था- अगर जनता दल यूनाइटेड 25 से अधिक सीटें जीत गया तो मैं संन्यास ले लूंगा- क्या किशोर उस वादे पर कायम रहेंगे? बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजों ने प्रशांत किशोर और उनकी नई राजनीतिक मुहिम जनसुराज पार्टी (जेएसपी) के लिए उम्मीदों के बुलंद पंखों को तोड़ दिया है। शुरुआती रुझानों में पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी, जबकि एग्जिट पोल्स ने 0-5 सीटों का अनुमान लगाया था। खास बात यह रही कि पार्टी के सबसे मजबूत उम्मीदवार भी किसी मुकाबले में नजर नहीं आए। जनसुराज पार्टी के जमावड़े और सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ ने शुरुआती तौर पर यह भरोसा दिया था कि किशोर किसी न किसी रूप में बिहार की राजनीति में सेंध लगाने में सक्षम हैं। लेकिन चुनाव परिणाम यह साबित करते हैं कि जमीन पर उनकी पकड़ लगभग शून्य रही। अब सवाल उठता है कि प्रशांत किशोर अपने चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों पर खरे उतरेंगे या नहीं। संन्यास का वादा और विफलता चुनाव प्रचार के दौरान किशोर ने नेशनल टीवी पर दावा किया था कि अगर जनता दल यूनाइटेड 25 से अधिक सीटें जीतता है तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे। यह वादा इतनी आत्मविश्वास के साथ किया गया था कि उन्होंने पत्रकार से कहा कि यह रिकॉर्डिंग रख लें। अब परिणाम सामने हैं और किशोर के वादे के पालन पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। हार के पीछे पांच प्रमुख कारण:- 1 तेजस्वी यादव को चुनौती देने से पीछे हटना जेएसपी की हार का सबसे बड़ा कारण प्रशांत किशोर का तेजस्वी यादव को चुनौती न देना रहा। शुरुआती घोषणा में उन्होंने राघोपुर से मैदान में उतरकर तेजस्वी की ‘परिवारवाद’ और वादों की पोल खोलने की बात कही थी। लेकिन आखिरकार यह मुकाबला नहीं हुआ, जिससे उनका वैकल्पिक नेता बनने का मौका गंवा गया। 2- मोदी और शाह के खिलाफ खुलकर नहीं बोले किशोर ने केंद्रीय नेताओं नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ सीधे तौर पर हमला नहीं किया। विपक्ष के कई नेता चुनावी मुद्दों पर उनके विरोध में जहर उगल रहे थे, लेकिन किशोर इस लहर का हिस्सा नहीं बने। जनता ने यह महसूस किया कि जेएसपी बीजेपी की ‘बी टीम’ जैसी भूमिका निभा रही है। 3 – शराबबंदी के खिलाफ विवादास्पद रुख किशोर ने शराबबंदी समाप्त करने की घोषणा कर महिलाओं और परिवारों की नाराजगी झेली। बिहार में महिलाओं के लिए यह नीति सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता का प्रतीक मानी जाती है। किशोर का यह कदम युवाओं को लुभाने की कोशिश में महिलाओं के विरोध को जन्म देने वाला साबित हुआ। 4- जाति और धर्म के आधार पर टिकट वितरण किशोर ने चुनाव से पहले घोषणा की थी कि उनकी पार्टी जाति और धर्म से ऊपर उठकर राजनीति करेगी। लेकिन टिकट वितरण में वही पैटर्न अपनाया गया, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हुआ। 5- NDA नेताओं के खिलाफ माहौल नहीं बना पाए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बावजूद किशोर ने इसे केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रखा। जनता तक इस मुद्दे का प्रभाव नहीं पहुंच पाया।

सीमांचल पर सियासी संग्राम: अमित शाह ने राहुल-तेजस्वी पर लगाया बड़ा आरोप

पूर्णिया गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्णिया के बनमनखी में चुनावी सभा की। उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार किया। अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने महागठबंधन पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य के आधे हिस्से ने पहले ही कांग्रेस-राजद गठबंधन को नकार दिया है। एनडीए बिहार में 160 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी। मैं सीमांचल में आया है। मैं सीमांचल वालों की बात जानने आया हूं। आप बताओं सीमांचल से घुसपैठियों को बाहर निकालना चाहिए या नहीं निकालना चाहिए। यह अभी-अभी राहुल गांधी और लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव घुसपैठियों बचाव यात्रा लेकर निकले थे। वह चाहते हैं सीमांचल घुसपैठियों का अड्डा बने। घुसपैठिये हमारे गरीबों का हक छीनते हैं। उन्होंने कहा कि हमलोग न केवल घुसपैठियों को निकालेंगे, बल्कि जमीन अधिग्रहण को भी जमींदोज कर देंगे। राहुल गांधी और लालू प्रसाद घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं गृह मंत्री ने कहा कि भक्त प्रह्लाद और महर्षि मेंही की भूमि को मैं प्रमाण करता हूं। बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री को मैं प्रमाण करता हूं। इस चुनाव में दो खेमे लगे हैं। एक ओर बिखरा हुआ ठगबंधन और दूसरे ओर पांच पांडवों वाला एनडीए है। आधे बिहार ने वोट डाल दिए हैं। पहले चरण में लालू-राहुल की पार्टी का सूफड़ा साफ हो गया। बिहार में एनडीए सरकार बनने वाली है। मोदी-नीतीश के नेतृत्व में बिहार आगे बढ़कर एक विकसित राज्य बनने जा रहा है। अगले पांच साल में सीमांचल में एक-एक अवैध गतिविधि को भाजपा और एनडीए की सरकार उखाड़ फेकेंगी। हमारी मतदाता सूची से घुसपैठिये निकालने चाहिए या नहीं निकालने चाहिए। यह राहुल गांधी और लालू प्रसाद घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं। लेकिन, आप दोनों कान खोलकर सुन लें कि हमलोगों उन्हें सीमांचल की धरती से निकाल कर उनके देश भेज कर रहेंगे। 'अगर थोड़ी सी गलती हुई तो जंगलराज वापस आ जाएगा' अमित शाह ने कहा कि थोड़ी सी गलती हुई तो जंगलराज वापस आ जाएगा। अमित शाह ने कहा कि दिनदहाड़े यहां पर एमएलए की हत्या हुई थी। नीतीश कुमार ने जंगलराज समाप्त कर दिया है। अब यह जंगलराज नए चेहरे के साथ, नए भेष बदलकर वापस आ रहा है। इसलिए कमल छाप पर बटन दबाइए और एनडीए को जिताने का काम कीजिए। गृह मंत्री ने कहा कि लालू की पार्टी शहाबुद्दीन के बेटे को टिकट दिया और शहाबुद्दीन के लिए अमर रहे का नारा लगाया। तेजस्वी यादव कान खोलकर सुन लो अब बिहार की धरती पर शहाबुद्दीन और ओसामा की जगह नहीं रही।

मोदी की गारंटी दम तोड़ चुकी — PCC चीफ बैज का PM मोदी से 21 सवालों वाला हमला

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर 1 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर के एकदिवसीय दौरे पर आने वाले हैं। उनके आगमन से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री से 21 सवालों की सूची जारी करते हुए कहा कि मोदी सरकार की गारंटी दम तोड़ चुकी है। क्या राज्योत्सव में इसका जवाब देंगे। इसके अलावा कांग्रेस ने रोजगार, किसानों, महिलाओं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी जवाब मांगा है। कांग्रेस के 21 सवाल पीएम मोदी से     मोदी की गारंटी दम तोड़ चुकी है क्या आप राज्योत्सव में इसका जवाब देंगे?     आपने 1 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा था, दो साल में 40 हजार नौकरी भी मिली नहीं।     संविदा कर्मचारियों को 100 दिन में नियमितीकरण करने का वादा कब पूरा होगा?     हर विवाहित महिला को महतारी वंदन के तहत 1000 रुपये प्रतिमाह देने का वादा था, काफी महिलाओं के नाम काटे गए, आपने 500 रुपये में सिलेंडर देने की बात कही थी?     आपके राज में हत्या, लूट, बलात्कार, आगजनी बढ़ी, कानून-व्यवस्था चरमराई?     छत्तीसगढ़ में बांग्लादेशी घुसपैठी आ रहे, पाकिस्तान से ड्रग्स आ रहे, इस पर लगाम क्यों नहीं?     सेंट्रल पुल में चावल क्यों नहीं खरीदा जा रहा, सोसाइटियों में आज भी धान का उठाव नहीं?     आपकी सरकार में साढ़े 18 लाख पीएम आवास दिए जाने की बात कही गई थी। शहरी और ग्रामीण कितने आवास स्वीकृत हुए? डिटेल बताएं?     किसानों को यूरिया-DAP की किल्लत क्यों?     प्रदेश में कितने स्कूल खोले गए, आपके राज में 10,000 से ज्यादा स्कूल बंद क्यों किए?     महादेव सट्टा ऐप चल रहा, शराब माफिया बेलगाम – कार्रवाई क्यों नहीं?     कोल माइंस बेचा जा रहा, अवैध रूप से पेड़ भी काटे जा रहे?     आपने हॉफ बिजली बिल योजना बंद कर, बिजली के दाम चार गुना बढ़ाए, लेकिन बिहार में 125 यूनिट फ्री बिजली ऐसा क्यों?     बस्तर बाढ़ पीड़ितों को केंद्र सरकार ने राहत पैकेज क्यों नहीं दिया?     छत्तीसगढ़ की यात्री ट्रेनें ही क्यों रद्द होती हैं?     नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेशीकरण क्यों?     एनएमडीसी मुख्यालय बस्तर में कब खुलेगा?     बस्तर के खनिज संसाधनों को बेचा जा रहा?     रायपुर के इकलौते मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भटक रहे लोग, एक ही बेड पर दो प्रसूताएं क्यों?     सरकारी अस्पतालों में दवाएं और इलाज क्यों नहीं?     2 करोड़ नौकरी और लोगों के खाते में 15 लाख खाते में कब देंगे? भाजपा पर हमला कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा के बयान “कांग्रेस दिल्ली से नहीं, इटली से चलने वाली पार्टी” पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि भाजपा में पर्ची से मुख्यमंत्री बनते हैं, वे पसंदीदा मंत्री तक नहीं चुन पाते, दिल्ली से पर्ची आती है। भाजपा नेता कांग्रेस के लिए भी वही सपना देख रहे हैं। घुसपैठियों पर बैज का पलटवार घुसपैठियों को लेकर डिप्टी CM विजय शर्मा के बयान पर PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि आप गृह मंत्री हैं, सारे अधिकार आपके पास हैं। पाकिस्तान से ड्रग्स आ रहा है, बांग्लादेशी घुसपैठिए आ रहे हैं, कार्रवाई कौन करेगा? राज्योत्सव में बाहरी कलाकारों पर सवाल राज्योत्सव में बाहरी कलाकारों को बुलाने पर दीपक बैज ने कहा कि हम पहले दिन से कह रहे, स्थानीय कलाकारों को भी बाहरी कलाकारों जितना ही सम्मान और मंच मिलना चाहिए। ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान है जारी – दीपक बैज ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान को लेकर दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस का हस्ताक्षर अभियान जारी है। 10 से 12 लाख हस्ताक्षर फॉर्म आएंगे, जिन्हें हम AICC को भेजेंगे, चुनाव आयोग को भेजेंगे। चुनाव आयोग द्वारा यह बात कही जा रही थी कि राहुल गांधी को हलफनामा देना चाहिए। आम जनता इस पर सवाल उठा रही है।

श्याम बिहारी जायसवाल का पलटवार: सीएम साय और भूपेश बघेल के दौरे गिन लें, तब बात करें कांग्रेस वाले

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका के जिलों के दौरे पर सवाल उठाए जाने पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांग्रेस को चुनौती दे डाली. उन्होंने कहा कि राज्यपाल सर्वेसर्वा होते हैं, अच्छा है वे दौरा कर रहे हैं. रहा सवाल मुख्यमंत्री के दौरे का तो कांग्रेस नेता निकाल कर देख लें कि बीते दो सालों में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कितना दौरा किया. मुख्यमंत्री कहीं ज्यादा दौरे कर रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मीडिया से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. बिरनपुर मामले में सुनवाई को लेकर कांग्रेस के बयान पर कहा कि कांग्रेस को लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है. मामला न्यायालय में हैं, इस पर कांग्रेस कैसे टिप्पणी कर सकती है. न्यायालय जो भी तय करेगा वो मान्य होना चाहिए. वहीं ट्रिपल आईटी में छात्राओं की AI से बनाई गई अश्लील फोटो पर मंत्री ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यजनक है. ऐसी हरकतें न केवल शर्मनाक हैं, बल्कि हतोत्साहित करने वाली भी हैं. कॉलेज प्रबंधन ने आरोपी छात्र को निलंबित किया है. छात्र पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है. मैं इस मामले में शिक्षा मंत्री से बात करूंगा. इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई जरूरी है. जिसने भी यह दुस्साहस किया, उसे बख्शा नहीं जाएगा. युवा पीढ़ी को सबक देने के लिए कठोर कदम उठाना जरूरी है. धान का एक-एक दाना खरीदने प्रतिबद्ध वहीं कांग्रेस ने 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग पर मंत्री जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस जब सरकार में थी, जो भी करती थी सब जायज. फसल की स्थिति और मौसम को देखकर ही खरीदी की तारीख तय होगी. अगर 1 नवंबर उपयुक्त हुआ तो उसी दिन से खरीदी, नहीं तो 15 नवंबर से. रिपोर्ट लेकर ही फैसला लिया जाएगा. सरकार अच्छी क्वालिटी का धान खरीदना चाहती है, ताकि भंडारण और रखरखाव बेहतर हो. राज्य सरकार एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है. सारे चमचे, घोड़े और गधे कांग्रेस में कांग्रेस में जिला अध्यक्ष बनने के लिए जमकर हो रही लॉबिंग पर श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस दिशाहीन और व्यक्तिवादी पार्टी है. दो साल हो गया कांग्रेस संगठन चुनाव नहीं करा सकी. अब होटलों में पार्टी चल रही है, लोग लॉबिंग कर रहे हैं. कांग्रेस जब भी चुनाव कराती है, विवाद हो जाता है. सारे चमचे, घोड़े और गधे कांग्रेस में पाए जाते हैं. कांग्रेस के नेता इसकी व्याख्या अच्छे से कर सकते हैं. जहां-जहां भूपेश के पैर पड़े, वहां सूपड़ा साफ वहीं कांग्रेस ने बिहार में विधानसभा चुनाव प्रचार में शामिल नहीं किए जाने पर भाजपा नेताओं को अयोग्य बताए जाने पर मंत्री ने कहा कि जब-जब संतों के पैर पड़ते है, तब वहां उद्धार हो जाता है. जहां-जहां भूपेश बघेल के पांव पड़े, वहां सूपड़ा साफ हो गया. राहुल गांधी ने भी कई जगह पदयात्रा की. जहां-जहां राहुल गांधी गए, वहां से साफ हो गए.

प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए चिराग पासवान बोले, उनके आरोप तात्कालिक राजनीति में हैं

पटना केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मंगलवार को कहा कि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीति की शैली आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल जैसी है। यहां पत्रकारों से बात करते हुए, लोक जनशक्ति (रामविलास) के अध्यक्ष ने याद दिलाया कि केजरीवाल भी किशोर की तरह राजनीति में पैर जमाने की कोशिश में "एक के बाद एक आरोप" लगाते रहे, लेकिन "दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद चुप हो गए"। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से एक के बाद एक आरोप लगा रहे हैं। केवल एक जांच ही बता सकती है कि उनके आरोप तथ्यों पर आधारित हैं या केवल बदनामी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "जो भी हो, मेरा मानना ​​है कि बिहार में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, वे अपना बचाव करने में पूरी तरह सक्षम हैं। उनमें से एक ने तो मानहानि का नोटिस भी दिया है। समय आने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।" इशारा जेडी(यू) के राष्ट्रीय महासचिव और मंत्री अशोक चौधरी की ओर था, जिन्होंने हाल ही में किशोर को 200 करोड़ रुपये के बेनामी ज़मीन लेनदेन के आरोप में मानहानि का नोटिस भेजा था।  

छात्रसंघ चुनाव की उठाई मांग, जॉस्लिन नंदिता चौधरी ने महिलाओं को राजनीति में सक्रिय होने की दी अपील

जोधपुर जोधपुर में पहुंचीं दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र नेता जोस्लिन नंदिता चौधरी ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए क्योंकि यह निर्णय लेने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण स्थान है। जॉस्लिन रविवार को जोधपुर पहुंचीं, जहां एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने उनका स्वागत किया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अभिभावकों को भी चाहिए कि वे बच्चों को सपोर्ट करें, चाहे वे लड़के हों या लड़कियां। उन्होंने अपने चुनावी अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उन्हें लोगों का बहुत प्यार और समर्थन मिला, जिससे काफी कुछ सीखने को भी मिला। जॉस्लिन ने कहा, “यह पहली बार हुआ जब राजस्थान से दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव में टिकट आई। इतनी दूर जाकर चुनाव लड़ने का अनुभव काफी प्रेरणादायक रहा। मैं ऐसे क्षेत्र से आती हूं, जहां वर्षा भी ठीक से नहीं होती, लेकिन वहां के किसान कभी आत्महत्या नहीं करते। यह अपने आप में बड़ी सीख है।” उन्होंने आगे कहा कि राजस्थान में भी छात्र संघ चुनाव होने चाहिए क्योंकि यहां के छात्र-छात्राएं राजनीति में सक्रिय हैं और मध्यम वर्ग से आने वाले छात्र छात्र राजनीति के जरिए आगे बढ़ सकते हैं। जॉस्लिन ने बताया कि सभी नेता उनके प्रेरणा स्रोत हैं और उन्होंने उनसे सीखकर ही आगे बढ़ने का प्रयास किया है। चुनाव के दौरान संसाधनों और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। मारवाड़ के लोगों ने हमेशा सहयोग किया और किसी भी कमी को महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने अंत में कहा कि वे हमेशा छात्र हितों के लिए काम करती रहेंगी और मेहनत के साथ आगे बढ़ती रहेंगी।