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प्रशांत किशोर का समस्तीपुर दौरा: नव निर्माण के संकल्प के साथ कार्य की शुरुआत

समस्तीपुर समस्तीपुर में जन सुराज के संस्थापक और रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहुंचे। वे बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत जिले के रोसड़ा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठनात्मक मजबूती और आने वाली रणनीति पर चर्चा की। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जन सुराज का यह अभियान केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सही मायनों में जनता की आवाज बनना है। उन्होंने कहा कि वे साथियों से संवाद करने, उनकी राय सुनने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए यहां आए हैं। शराबबंदी कानून पर किया तंज प्रशांत किशोर ने शराबबंदी कानून पर तंज कसते हुए कहा कि यदि शराबबंदी कानून से महिलाओं को इतना ही फायदा हो रहा है, तो इसे पूरे देश में लागू क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि सिर्फ बिहार के लोगों को ही इसका तथाकथित फायदा क्यों मिल रहा है। एनडीए सरकार को बिहार के साथ ही पूरे देश में इसे लागू करना चाहिए, ताकि सभी लोगों को इसका लाभ मिल सके। जन सुराज के साथियों ने गांधी आश्रम, चंपारण से जो बिहार को बदलने का संकल्प लिया था, चुनाव परिणाम आने के बाद भी जन सुराज के साथी पीछे हटने वाले नहीं हैं। वे एक बार पुनः बिहार के नव निर्माण को लेकर कार्य शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले जन सुराज के साथियों को फिर से संगठित किया जाए और उन्हें पुनः प्रेरित किया जाए। इसके लिए प्रत्येक जिले में जाकर लोगों से मुलाकात की जा रही है। उनसे यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि किन कारणों से वे पिछड़ गए और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है। जन सुराज किन मुद्दों को लेकर आगे बढ़े, इस पर भी विचार किया जा रहा है। मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार मुन्ना, जेपी सिंह, ललन यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय सिंह, विश्वनाथ चौधरी, सुरेंद्र गुप्ता, इंदु गुप्ता, रोहित पासवान, अभिषेक आनंद सहित अन्य मौजूद थे।

प्रशांत किशोर का दावा — बिहार में बदलाव की लहर, जनता जन सुराज को देख रही विकल्प के रूप में

गया जी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान के बाद जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर (पीके) ने कहा है कि इस बार रिकॉर्ड मतदान बदलाव का संकेत है। उन्होंने दावा किया कि बिहार की 60% से अधिक जनता परिवर्तन चाहती है और जन सुराज को अब एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में देख रही है। गयाजी  में मीडिया से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “आजादी के बाद पहली बार बिहार में इतना ज्यादा वोटिंग प्रतिशत देखने को मिला है। यह दिखाता है कि लोग बदलाव के लिए वोट कर रहे हैं। पिछले 30 वर्षों से बिहार की राजनीति में कोई ठोस विकल्प नहीं था, लेकिन जन सुराज के आने से लोगों को एक नया रास्ता मिला है।” पीके ने कहा कि इस बार प्रवासी मजदूर चुनाव के “एक्स फैक्टर” बन गए हैं। “छठ के बाद जो प्रवासी मजदूर बिहार में रुके हुए थे, उन्होंने खुद वोट किया और अपने परिजनों को भी वोटिंग के लिए प्रेरित किया। महिलाओं से ज्यादा इस बार प्रवासी मजदूरों की भूमिका अहम रही है। यही लोग बिहार में बदलाव की बयार ला रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि 14 नवंबर को बिहार का इतिहास लिखा जाएगा, क्योंकि जनता ने इस बार लोकतंत्र के पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। पीके ने कहा, “दो करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट किया है। यह दिखाता है कि जनता अब डर की राजनीति से बाहर निकल चुकी है।” राजनीतिक हमले करते हुए उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार के डर से लालू यादव को और लालू के डर से नीतीश कुमार को वोट देने की मजबूरी अब खत्म हो गई है। जनता को अब असली विकल्प मिल गया है।” पीके ने एनडीए और राजद-कांग्रेस गठबंधन दोनों पर निशाना साधते हुए कहा, “सम्राट चौधरी कहते हैं कि पार्टी का चेहरा साफ है, लेकिन बिहार में आज भी असुरक्षा का माहौल है। पहले जनता झेलती थी, अब नेता और मंत्री झेल रहे हैं।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी जिसमें कहा गया था कि राजद और कांग्रेस एक-दूसरे का बाल नोचेंगे। पीके ने कहा, “बाल नोचेंगे या सिर नोचेंगे, यह उनका काम है, लेकिन बिहार की जनता ने कल दिखा दिया कि अब उन्हें एक नया विकल्प मिल गया है।” अंत में उन्होंने कहा, “अब चुनाव सिर्फ सत्ता तय नहीं करता, बल्कि यह भी तय करता है कि विपक्ष में कौन होगा और कौन जनता के मुद्दों पर सड़क पर उतरेगा। जन सुराज की सबसे बड़ी सफलता यही है कि उसने बिहार को विकल्प दिया है।”

प्रशांत किशोर की रणनीति पर असर? जन सुराज प्रत्याशी के नामांकन वापसी से बढ़ी मुश्किलें

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की हलचल के बीच सीतामढ़ी सीट  से बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद ज्याउद्दीन खान  ने नामांकन वापस ले लिया है। यह फैसला जन सुराज के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इस कदम ने जिले की राजनीति में भूचाल ला दिया है। नामांकन वापसी के बाद ज्याउद्दीन ने फेसबुक पर अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज के हितों को देखते हुए और अपने शुभचिंतकों की परेशानियों को समझते हुए, उन्होंने अपनी दूसरी बार कुर्बानी दी है। ज्याउद्दीन के इस फैसले के बाद वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। अटकलें लगााई जा रही हैं कि पार्टी के भीतर किसी आंतरिक कलह का ही यह नतीजा है या फिर किसी अन्य दल के दबाव में यह फैसला लिया गया है. मोहम्मद ज्याउद्दीन खान को क्षेत्र में एक मजबूत और लोकप्रिय उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा था। उनके मैदान से हटने के बाद पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। साथ ही सीतामढ़ी विधानसभा सीट पर मुकाबला अब सीधे NDA और महागठबंधन के बीच सिमट गया है। पहले जहां मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा था, वहीं अब जन सुराज समर्थक वोट दो प्रमुख गठबंधनों में बंटने की संभावना है। इससे किसी एक बड़े गठबंधन को सीधा फायदा मिल सकता है।

प्रशांत किशोर: चुनाव नहीं लड़ूंगा, जनसुराज की जीत पर भ्रष्ट नेताओं-नौकरशाहों पर होगा एक्शन

पटना जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बुधवार को एलान किया कि वह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला पार्टी ने उसके व्यापक हित में लिया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर जन सुराज पार्टी बिहार चुनाव जीतती है, तो इसका राष्ट्रव्यापी असर होगा। राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल जाएगी। बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पार्टी ने फैसला किया है कि मैं विधानसभा चुनाव न लड़ूं, और इसी कारण राघोपुर से तेजस्वी यादव के खिलाफ हमने किसी और उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। यह फैसला पार्टी के व्यापक हित में लिया गया है। अगर मैं चुनाव लड़ता, तो जरूरी संगठनात्मक कार्यों से मेरा ध्यान भटकता। सरकार बनने के एक महीने के भीतर यह कानून बनाया जाएगा प्रशांत किशोर ने कहा कि हमने बिहार को भू-माफिया, बालू माफिया और तमाम तरह के माफियाओं से मुक्त करने का वादा किया है। इसी दिशा में हमने छह बड़े वादे किए हैं, जिनमें फर्जी शराबबंदी नीति को खत्म करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के एक महीने के भीतर एक कानून बनाया जाएगा, जिसके तहत 100 सबसे भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की पहचान की जाएगी। मुझे पूरा यक़ीन है कि ये लोग अभी से पूजा-पाठ कर रहे होंगे कि हम सत्ता में न आएं। इन भ्रष्ट लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा और उनकी अवैध संपत्ति जब्त कर राज्य के खजाने में जमा की जाएगी, ताकि बिहार के विकास में उसका इस्तेमाल हो सके। यह वही विकास है जो इन लोगों की वजह से रुका पड़ा है, हम या तो भारी जीत दर्ज करेंगे या पूरी तरह हार जाएंगे जब उनसे उनकी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया, तो 48 वर्षीय प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि हम या तो भारी जीत दर्ज करेंगे या पूरी तरह हार जाएंगे। मैंने पहले भी कहा है कि हमें या तो 10 से कम सीटें मिलेंगी या 150 से ज्यादा। बीच का कोई रास्ता नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि अगर बिहार में त्रिशंकु विधानसभा बनती है, तो क्या जन सुराज एनडीए या इंडिया गठबंधन को समर्थन देगा, इस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि त्रिशंकु जनादेश की कोई संभावना नहीं है। पीके ने यह भी कहा कि अगर हमें 150 से कम सीटें मिलती हैं। अगर जनसुराज को 120 या 130 सीटें भी आती हैं तो वह मेरी नजर में हार होगी। अगर हम अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो हमें बिहार को देश के 10 सबसे विकसित राज्यों में शामिल करने का जनादेश मिलेगा। लेकिन, अगर जनता ने हमारे ऊपर पर्याप्त भरोसा नहीं जताया। हम अपनी सड़क और समाज की राजनीति को आगे बढ़ाते रहेंगे। बिहार में सत्ताधारी एनडीए की हार तय है जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दावा किया कि बिहार में सत्ताधारी एनडीए की हार तय है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब सत्ता में वापस नहीं लौटेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन की सीटों और उम्मीदवारों को लेकर असमंजस की स्थिति से साफ है कि हालात उनके पक्ष में नहीं हैं। पीके ने दावा किया एनडीए की विदाई तय है और नीतीश कुमार अब दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। पिछली विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने चुनाव की घोषणा से कुछ दिन पहले ही बगावत कर दी थी और नीतीश कुमार की पार्टी के खिलाफ कई उम्मीदवार उतार दिए थे, जिनमें से अधिकांश प्रभावशाली नहीं थे, लेकिन इसका नतीजा यह हुआ कि जदयू की सीटें घटकर 43 पर आ गई थीं। 

प्रशांत किशोर फंसे, राघोपुर में आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज

पटना जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पर तेजस्वी यादव के चुनावी गढ़ राघोपुर में आचार संहिता उल्लंघन का केस दर्ज हुआ है। हाजीपुर के पुलिस उपाधीक्षक सुबोध कुमार के अनुसार, एफआईआर वैशाली जिले के राघोपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई।  बताया जा रहा है कि राघोपुर अंचालाधिकारी दीपक कुमार के आवेदन पर प्रशांत किशोर  (Prashant Kishor) के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है। दरअसल, शनिवार को प्रशांत किशोर राघोपुर पहुंचे थे, जहां पर उन्होंने जनता से संवाद किया था। इस बीच, जब प्रशांत किशोर से इस घटनाक्रम के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया, "मेरे खिलाफ कई एफआईआर लंबित हैं। एक और हो जाए।" जब यह बताया गया कि चुनाव आयोग उन्हें प्रचार करने से रोक सकता है, तो 47 वर्षीय जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने कहा, "कोई बात नहीं। अगर वे मुझे रोकेंगे, तो मैं रुक जाऊंगा।" उनकी पार्टी ने अब तक राज्य विधानसभा की 243 सीटों में से 51 के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि किशोर खुद राघोपुर में तेजस्वी यादव के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर को होंगे और मतगणना 14 नवंबर को होगी।  

प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए चिराग पासवान बोले, उनके आरोप तात्कालिक राजनीति में हैं

पटना केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मंगलवार को कहा कि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीति की शैली आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल जैसी है। यहां पत्रकारों से बात करते हुए, लोक जनशक्ति (रामविलास) के अध्यक्ष ने याद दिलाया कि केजरीवाल भी किशोर की तरह राजनीति में पैर जमाने की कोशिश में "एक के बाद एक आरोप" लगाते रहे, लेकिन "दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद चुप हो गए"। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से एक के बाद एक आरोप लगा रहे हैं। केवल एक जांच ही बता सकती है कि उनके आरोप तथ्यों पर आधारित हैं या केवल बदनामी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "जो भी हो, मेरा मानना ​​है कि बिहार में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, वे अपना बचाव करने में पूरी तरह सक्षम हैं। उनमें से एक ने तो मानहानि का नोटिस भी दिया है। समय आने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।" इशारा जेडी(यू) के राष्ट्रीय महासचिव और मंत्री अशोक चौधरी की ओर था, जिन्होंने हाल ही में किशोर को 200 करोड़ रुपये के बेनामी ज़मीन लेनदेन के आरोप में मानहानि का नोटिस भेजा था।