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योगी सरकार का बड़ा कदम: 10 जिलों में आधुनिक रजिस्ट्री कार्यालय और अभिलेखागार बनेंगे

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के दस जिलों में फ्लैट, मकान, प्लाट वगैरह की रजिस्ट्री और आसान होने वाली है। इन जिलों में दस उप निबंधक कार्यालयों और अभिलेखागारों का शिलान्यास किया गया है। योगी सरकार में स्टांप और पंजीयन राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बुधवार को लखनऊ से ही इनका वर्चुअल शिलान्यास किया। मथुरा, कुशीनगर, झांसी, गोण्डा, मुरादाबाद, अमरोहा, सीतापुर, हरदोई, लखनऊ और बाराबंकी जनपदों में विभिन्न जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार रजिस्ट्री कार्यालयों में आने वाले आमजन को हर अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इन नए और विस्तारित भवनों के निर्माण से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को विलेखों के पंजीकरण और शासकीय अभिलेखों के सुरक्षित रख-रखाव में अत्यधिक सुगमता होगी। सभी दस जिलों में भव्य कार्यक्रम आयोजित इस वर्चुअल शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के सभी 10 शिलान्यास स्थलों पर भव्य स्थानीय समारोहों का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। आगरा मंडल के मथुरा जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य तेजवीर सिंह, सांसद हेमामालिनी, विधान परिषद सदस्य योगेश चौधरी, विधान परिषद सदस्य ओमप्रकाश सिंह तथा विधायक श्रीकान्त शर्मा उपस्थित रहे। गोरखपुर मंडल वहीं गोरखपुर मंडल के कुशीनगर जनपद के कप्तानगंज में आयोजित समारोह में सांसद विजय कुमार दूबे तथा विधायक विनय प्रकाश गोंड ने सहभागिता की। झांसी मंडल के झांसी जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में सांसद अनुराग शर्मा, विधायक राजीव  सिंह पारीछा तथा विधायक रवि शर्मा मौजूद रहे। देवीपाटन मंडल देवीपाटन मंडल के गोण्डा जनपद के सदर में आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में विधायक प्रतीक भूषण सिंह, विधान परिषद सदस्य अवधेश कुमार सिंह (मंजू सिंह) तथा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने हिस्सा लिया। मुरादाबाद मंडल मुरादाबाद मंडल के अंतर्गत मुरादाबाद जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में विधायक रितेश कुमार गुप्ता उपस्थित रहे, जबकि इसी मंडल के अमरोहा जनपद के हसनपुर में आयोजित समारोह में सांसद श्री कवंर सिंह तंवर, विधायक महेन्द्र सिंह खड़गवंशी तथा विधान परिषद सदस्य डा० हरि सिंह ढिल्लो ने भागीदारी की। लखनऊ मंडल के सीतापुर जनपद के सदर में आयोजित भव्य कार्यक्रम में राज्य मंत्री कारागार सुरेश राही, राज्य मंत्री नगर विकास राकेश राठौर तथा विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान सम्मिलित हुए। लखनऊ मंडल लखनऊ मंडल के ही हरदोई जनपद के सदर में आयोजित समारोह में सांसद जय प्रकाश, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल तथा विधान परिषद सदस्य अशोक कुमार अग्रवाल ने सहभागिता की। लखनऊ जनपद के मोहनलालगंज में आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में विधायक अमरेश कुमार रावत मौजूद रहे। अयोध्या मंडल अयोध्या मंडल के बाराबंकी जनपद के सदर में आयोजित कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य अंगद कुमार सिंह उपस्थित रहे। इन सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में रजिस्ट्री कार्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए राज्य सरकार के इस जनहितैषी प्रयास की सराहना की।

उत्तर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री प्रक्रिया बदली, रिश्तों के प्रमाण के लिए अब अलग दस्तावेज जरूरी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री वगैरह में आधार कार्ड को सिर्फ पहचान और पते का दस्तावेज माना जाएगा। उस पर दर्ज माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य संबंधों की जानकारी को रिश्ते का प्रमाण नहीं माना जाएगा। यूपी में संपत्तियों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब रजिस्ट्री कार्यालयों में आधार कार्ड को केवल पहचान और पते के प्रमाण के रूप में ही स्वीकार किया जाएगा। आधार कार्ड पर लिखी माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य पारिवारिक संबंधों की जानकारी को कानूनी रूप से रिश्ते का प्रमाण नहीं माना जाएगा। इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने सभी रजिस्ट्री कार्यालयों के लिए नया आदेश जारी कर दिया है। रिश्ते साबित करने के लिए दूसरे कागज देने होंगे। आदेश के अनुसार, जहां भी किसी आवेदन, योजना और विलेख में पारिवारिक संबंध का सत्यापन आवश्यक होगा, वहां आवेदकों को वैध सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। रिश्ते की पुष्टि के लिए जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकारी संबंधी अभिलेख या सरकार द्वारा मान्य अन्य दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। अब तक कई मामलों में संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान लोग आधार कार्ड पर दर्ज पारिवारिक जानकारी के आधार पर रिश्तों का सत्यापन करवा लेते थे। खास तौर पर विरासत, उत्तराधिकार या पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण के मामलों में आधार कार्ड का उपयोग किया जाता था। आगे से आधार कार्ड दिखाकर ऐसा करना बंद हो जाएगा। आधार कार्ड सिर्फ पहचान और पते का दस्तावेज महानिरीक्षक निबंधन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार कार्ड केवल किसी व्यक्ति की पहचान और पते का प्रमाण है, न कि पारिवारिक संबंधों का। इसी स्पष्टीकरण के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। रजिस्ट्री से पहले तैयार कराने होंगे दस्तावेज नए नियम के लागू होने के बाद संपत्ति खरीदारों, विक्रेताओं और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में शामिल लोगों को रजिस्ट्री से पहले अपने संबंधों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने होंगे। यदि किसी मामले में पारिवारिक संबंध साबित करना आवश्यक होगा, तो केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं माना जाएगा। निबंधन विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और गलत दस्तावेजों या रिश्तों के आधार पर होने वाले विवादों पर भी अंकुश लगेगा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि रजिस्ट्री कराने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित कर लें, ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। अब फैमिली प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में इन नियमों का पालन किया जाएगा।

इंदौर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री में अव्वल, 21% राजस्व का योगदान अकेले इंदौर का

इंदौर  पंजीयन विभाग के 2025-26 के राजस्व आंकड़ों के अनुसार इंदौर जिले ने एक बार फिर पूरे प्रदेश में सबसे अधिक कमाई कर अपना दबदबा कायम रखा है। इंदौर ने पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित किया है। यहां कुल 2673.44 करोड़ की आय हुई है। वहीं भोपाल दूसरे, ग्वालियर तीसरे, जबलपुर चौथे और उज्जैन पांचवें स्थान पर रहा। भोपाल 1903.67, ग्वालियर 852.92 करोड़, जबलपुर 772.25 करोड़, उज्जैन 440.50 करोड़ की आय दे पाए हैं, जबकि इंदौर के महू नाका कार्यालय ने प्रदेश में चौथे नंबर पर कमाई दर्ज कराई है। इंदौर जिले के चारों कार्यालय इस बार भी प्रदेश में शीर्ष पर रहे। मोती तबेला स्थित पंजीयन कार्यालय ने 614.69 करोड़, ढक्कनवाला कुआं स्थित पंजीयन कार्यालय ने 674.06 करोड़, विजयनगर स्थित पंजीयन कार्यालय ने 756.98 करोड़, जबकि महू नाका स्थित पंजीयन कार्यालय ने 627.71 करोड़ रुपए की कमाई की। कुल मिलाकर इंदौर जिले का संयुक्त राजस्व 2673.44 करोड़ रुपए रहा, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। उधर, भोपाल-1 कार्यालय की 481.37 करोड़ रुपए, भोपाल-2 की 997.22 करोड़ रुपए, भोपाल-3 कार्यालय की कमाई 425.08 करोड़ रुपए दर्ज की गई। जबकि ग्वालियर जिले के दोनों कार्यालयों ने क्रमश: 396.58 करोड़ और 456.34 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया। जबलपुर जिले में जबलपुर के दोनों कार्यालयों ने क्रमश: 371.36 करोड़ और 400.89 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया, जबकि सिंहस्थ के कारण उज्जैन से जो उम्मीद की जा रही थी वह पूरी नहीं हो सकी। इस वर्ष उज्जैन जिले ने मात्र 440.50 करोड़ रुपए की कमाई की। इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया दरअसल, इंदौर ने पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 215.7 करोड़ रुपये अधिक राजस्व जुटाया है। वर्ष 2024-25 में जहां यह आंकड़ा 2528 करोड़ रुपये था, वहीं इस बार यह बढ़कर 2743.7 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह वृद्धि शहर में तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट कारोबार और निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। दस्तावेज पंजीयन के मामले में भी इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2025-26 में जिले में एक लाख 91 हजार 400 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5124 अधिक हैं। वरिष्ठ जिला पंजीयक अमरेश नायडू के अनुसार इंदौर में संपत्ति बाजार लगातार विस्तार कर रहा है और आने वाले समय में यह आंकड़े और भी ऊंचाई छू सकते हैं। प्रदेश के प्रमुख चार शहरों का राजस्व     इंदौर – 2743.7 करोड     भोपाल – 1943.64 करोड़     ग्वालियर – 870.9 करोड़     जबलपुर – 789.7 करोड़ मार्च में सर्वाधिक राजस्व इंदौर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में सर्वाधिक राजस्व मार्च माह में 537.09 करोड़ रुपये जुटाया गया। इसी माह में सर्वाधिक 29086 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। दिसंबर माह में भी पंजीयन कार्यालय द्वारा 17441 दस्तावेज पंजीकृत किए गए और 238.28 करोड़ रुपये राजस्व जुटाया गया। सबसे कम राजस्व अप्रैल माह में 114.48 करोड़ रुपये राजस्व जमा हुआ और 7944 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। विजयनगर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इंदौर जिले में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन विजयनगर स्थित पंजीयन कार्यालय ने किया। आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र ने लक्ष्य के विरुद्ध 90.83 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की। यह प्रदर्शन न केवल जिले के भीतर सर्वोच्च रहा, बल्कि प्रदेशभर के कई बड़े कार्यालयों से भी बेहतर साबित हुआ। वर्ष-दर-वर्ष तुलना में भी इस कार्यालय की वृद्धि दर 11.63 प्रतिशत रही। यह आकड़े दर्शाते हैं कि जिले में संपत्ति पंजीयन की गतिविधियां तेज हुई हैं और बाजार की स्थिति में भी सुधार हुआ है। वर्ष 2024-25 में कार्यालय ने 677.75 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढक़र 756.98 करोड़ रुपए पहुंच गया। क्षेत्र में संपत्ति के पंजीयन, क्रय-विक्रय और वाणिज्यिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इंदौर-महूनाका ने भी दिखाया दम महू नाका स्थित पंजीयन कार्यालय ने लक्ष्य के 81.85 प्रतिशत के टारगेट को पूरा किया है। महू नाका क्षेत्र ने सबसे अधिक राजस्व में बढ़ोतरी करते हुए इंदौर को पहले पायदान पर खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। 22.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी से इस क्षेत्र ने पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की, जिसने जिले की रैंकिंग को ऊपर बनाए रखने में भूमिका निभाई। मोती तबेला स्थित कार्यालय लक्ष्य का केवल 61.41 प्रतिशत ही हासिल कर पाया। इंदौर-2 कार्यालय मार्च में 79.85 प्रतिशत का लक्ष्य पूरा कर पाया। पिछले वर्ष की तुलना में 2.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं ढक्कनवाला कुआं स्थित पंजीयन कार्यालय ने धीमी, लेकिन संतुलित प्रगति हासिल की। किसने पिछले वर्ष के मुकाबले कम कमाई की आंकड़ों के अनुसार कुल 4 कार्यालयों में पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व में गिरावट दर्ज हुई। इन कार्यालयों ने कम कमाई की- ग्वालियर-1 ने माइनस 1.96% ,ग्वालियर-2 ने माइनस 2.17% इंदौर-1 में माइनस 6.10% व उज्जैन भी 9.69 प्रतिशत कमी की सूची में सबसे निचले पायदान पर है। यहां सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है। उज्जैन ने 102 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध केवल 61.85त्न प्राप्त किया और सबसे अधिक 9.69 प्रतिशत की कमी दर्ज की।

भोपाल में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रियों में तेजी, सात दिनों में 4,399 रजिस्ट्रियां, 96.61 करोड़ रुपये का कारोबार

भोपाल  जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 में 740 स्थानों पर प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि होना लगभग तय है। इसका प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति ने केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया है, जिस पर गुरुवार को बैठक भी आयोजित की गई है। ऐसे में प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि का असर प्रॉपर्टी के कारोबार में दिखाई देने लगा है। नवरात्र के शुभ मुहूर्त और वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों में पंजीयन कार्यालयों में जमकर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। जानकारी के अनुसार आईएसबीटी, परी बाजार और बैरसिया में स्थित पंजीयन कार्यालयों में सुबह 10 से देर रात तक दस्तावेज रजिस्टर्ड करने का काम तेजी से किया जा रहा है। 19 मार्च से शुरू हुए नवरात्र के साथ अब तक सात दिन में करीब चार हजार 399 रिकॉर्ड रजिस्ट्रियां हुई हैं, जिनसे लगभग 96.61 करोड़ रुपये का राजस्व विभाग को प्राप्त हुआ है। कार्यालयों में बुधवार को भी बड़ी संख्या में लोग जमीन, मकान, प्लॉट और रीसेल प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने पहुंचे। सुबह से शुरू हुआ काम रात करीब आठ बजे तक चलता रहा, इस दौरान एक दिन में रिकॉर्ड 820 रजिस्ट्रियों के साथ 19.23 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। प्रॉपर्टी के खरीदारों की संख्या बढ़ते देख विभाग ने कार्यालय का समय बढ़ाते हुए सात बजे कर दिया है और प्रति सब रजिस्ट्रार को 65 स्लॉट कर दिए हैं। ऐसे में अब एक दिन में 13 सब रजिस्ट्रार 800 रजिस्ट्रियां कर सकेंगे। 31 मार्च तक जारी रहेगा रजिस्ट्रियों का सिलसिला वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के पास पहुंच चुका है। बोर्ड प्रस्ताव को पास कर देता है तो जिले के 740 स्थानों पर औसत 12 प्रतिशत वृद्धि होगी। वहीं अनेक स्थान ऐसे हैं जहां पर 30 प्रतिशत से लेकर 150 प्रतिशत तक प्रापर्टी की दरें बढ़ जाएंगी। ऐसे में वर्तमान दरों पर रजिस्ट्री करवाने के लिए 31 मार्च तक रजिस्ट्रियों का सिलसिला जारी रहेगा। सात दिन में हुईं रजिस्ट्रियां और राजस्व दिन रजिस्ट्री राजस्व गुरुवार65307 शुक्रवार5925.54 शनिवार3172.50 रविवार377 09 सोमवार58541 मंगलवार 67812.40 बुधवार82019.23 कुल 4,39996.61 (नोट- राशि करोड़ों रुपये में) संपदा टू सॉफ्टवेयर से मिल रही रफ्तार वरिष्ठ जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा ने बताया कि संपदा टू सॉफ्टवेयर बेहतर तरीके से काम कर रहा है। सब रजिस्ट्रार तय समय पर लोगों की रजिस्ट्रियां कर रहे हैं, ऐसे में प्रति आधा घंटे में एक दर्जन रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। इसके जरिए लोग आसानी से स्लॉट भी बुक कर पा रहे हैं।

भोपाल में खुलेगा नया साइबर पंजीयन ऑफिस, प्रदेश के सभी जिलों की रजिस्ट्री अब होगी केंद्रीकृत

 इंदौर  मध्य प्रदेश में संपत्ति की रजिस्ट्री की प्रक्रिया में बदलाव कर अब भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित पंजीयन भवन में साइबर पंजीयन कार्यालय तैयार किया जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद प्रदेश के किसी भी जिले की रजिस्ट्री यहां हो सकेगी। खरीदार को संबंधित जिले में जाने की जरूरत नहीं रहेगी। जानकारों का कहना है कि इस प्रक्रिया से संपत्तियों की निगरानी व्यवस्था प्रभावित होगी। जिले की जिन संपत्तियों पर आपत्तियां हैं या न्यायालयीन विवाद हैं, उनकी भोपाल में निगरानी कैसे होगी। स्टे वाली संपत्तियों की रजिस्ट्रियां भी लोग आसानी से भोपाल में करवा सकेंगे। पंजीयन विभाग ने अक्टूबर में भोपाल में साइबर पंजीयन कार्यालय खोलने का नोटिफिकेशन जारी किया था। कार्यालय शुरू करने की तैयारी जारी है, जल्द ही साइबर सब रजिस्ट्रारों की नियुक्ति की जाएगी। इसके बाद रजिस्ट्री का कार्य शुरू होगा। वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के किसी भी जिले में रहने वाला खरीदार यहां से रजिस्ट्री करवा सकेगा। भोपाल कार्यालय में ट्रायल रजिस्ट्री का काम हो चुका है, जहां विदेश में बैठे खरीदारों ने रजिस्ट्री कराई थी। स्टे वाली संपत्ति की रजिस्ट्री रोक नहीं पाएंगे पंजीयन कार्यालय अभिभाषक व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष प्रमोद द्विवेदी का कहना है कि पंजीयन विभाग को आधुनिक सिस्टम से इंदौर के बाहर रजिस्ट्री कराने के लिए नई व्यवस्था करनी होगी। जिलों का लक्ष्य भी प्रभावित होगा, जिसकी भरपाई कैसे की जा सकेगी। आपत्ति वाली, न्यायालयीन विवाद और स्टे वाली संपत्ति की रजिस्ट्री को रोक नहीं पाएंगे, क्योंकि विभाग के पास अभी निगरानी का सिस्टम नहीं है। इनकी निगरानी जिला स्तर पर ही होती है। यहां पर भी लोग विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री एक पंजीयन कार्यालय में रुकने पर दूसरे में जाकर करवा लेते हैं। प्रशासनिक पकड़ होगी कमजोर व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष प्रमोद द्विवेदी बताते हैं कि भोपाल में सभी जिलों की रजिस्ट्रियां होने से जिला स्तर पर प्रशासनिक पकड़ भी कमजोर होगी। अभी अवैध कालोनियों और विवादित संपत्तियों पर जिला प्रशासन स्थानीय स्तर पर निगरानी करते हुए रजिस्ट्री की प्रक्रिया रुकवा देता है, इससे आमजन के साथ धोखाधड़ी नहीं होती। भोपाल में यह निगरानी प्रभावित होगी।