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ईरान संकट पर पाकिस्तान सतर्क, रक्षा मंत्री का बयान—युद्ध भड़का तो पड़ेंगे गंभीर असर

इस्लामाबाद ईरान पर हमलों का विरोध पाकिस्तान में हिंसक भी हुआ। अमेरिकी दूतावास को निशाने पर भी लिया गया, तो सांसदों ने भी विरोध के सुर बुलंद किए। संसद में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के संबोधन के दौरान भी 'जाली बोर्ड ऑफ पीस से बाहर निकलो' के नारे लगे। वहीं, अब तो रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहना शुरू कर दिया है कि जंग पाकिस्तान के लिए खतरनाक है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में जायनिज्म (यहूदियों का आंदोलन) को मुस्लिम दुनिया में अस्थिरता की मुख्य वजह बताया है और इसे मानवता के लिए खतरा बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान पर चल रहा युद्ध पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन की जमीन पर इजरायल के कायम होने से लेकर आज तक इस्लामी दुनिया पर जो भी बड़ी-बड़ी मुसीबतें आई हैं, जो भी युद्ध थोपे गए हैं, उनमें जायनिस्ट विचारधारा और इजरायल का सीधा हाथ दिखता है। ख्वाजा आसिफ ने ईरान के बारे में कहा कि ईरान समझौते के लिए तैयार था, इसके बावजूद उन पर युद्ध थोपा गया है। यह सब जायनिस्ट एजेंडा का हिस्सा है, जिसमें इजराइल का प्रभाव पाकिस्तान की सरहद तक लाने की कोशिश शामिल है। अफगानिस्तान, ईरान और भारत को मिलाकर पाकिस्तान विरोधी एजेंडा बनाया जा रहा है, ताकि पाकिस्तान की सरहदें असुरक्षित हो जाएं, हर तरफ से दुश्मन घेर लें और पाकिस्तान कमजोर हो जाए। वहीं, पाकिस्तान की पूर्व राजदूत ने पीस बोर्ड से हटने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि शरीफ सरकार को ट्रंप का गाजा बोर्ड छोड़ देना चाहिए। पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने कहा कि नवाज शरीफ की सरकार को ट्रंप के बनाए “बोर्ड ऑफ पीस” से बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान को शुरुआत में ही इस बोर्ड में शामिल नहीं होना चाहिए था। लोधी ने आरोप लगाया कि "ट्रंप सरकार कई देशों पर हमले कर चुकी है और गाजा में इजरायली कार्रवाई में उसकी भूमिका रही है।"

ईरान के खामेनेई के मारे जाने पर भारत में शिया मुसलमान कर रहे प्रदर्शन

लखनऊ. इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई है। इसके बाद ईरान में लोग सड़कों पर उतर पड़े हैं। खामेनेई के समर्थक सड़कों पर मातम मना रहे हैं और अमेरिका-इजरायल का विरोध कर रहे हैं। खामेनेई की मौत के मातम से भारत भी अछूता नहीं है। यहां कश्मीर में कई जगहों पर लोग खामेनेई की तस्वीरों के साथ सड़कों पर उतरे और इजरायल-अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की। लोग 'खामेनेई जिंदाबाद' जैसे नारे भी लगा रहे थे। कश्मीर में प्रदर्शन की वजह यह है कि खामेनेई को फिलिस्तीन समर्थक नेता के तौर पर जाना जाता था। इसके अलावा शिया समुदाय के मुसालमान खामेनेई से काफी हमदर्दी रखते थे। कश्मीर के शिया मुसलमानों में खामेनेई की काफी लोकप्रियता थी और इसीलिए लोग उनकी मौत का मातम मनाने सड़कों पर उतर पड़े हैं। वहीं बेंगलुरु के पास शिया बहुल एक गांव में सन्नाटा पसरा है। लोगों का कहना है कि वे खामेनेई की मौत से बेहद दुखी हैं। पुलवामा और श्रीनगर में सड़कों पर उतरे लोग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कश्मीर के पुलवामा और श्रीनगर में शिया बहुल इलाकों में लोग काले झंडे और बैनर लेकर सड़कों पर निकल पड़े और इजरायल-अमेरिका विरोधी नारे लगाने लगे। रविवार को ही ईरान ने अली खामेनेई की मौत की पुष्टि की है। इसके बाद ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर का ऐलान भी कर दिया है। अली खामेनेई के बेटे मोर्तजा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाने की तैयारी है। लखनऊ में भी प्रदर्शन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी शिया मुसलमानों की संख्या काफी है। यहां भी लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए। लोगों ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, अमेरिका बात भी कर रहा था और युद्ध की धमकी भी दे रहा था। हमारे नेता ने घुटने नहीं टेके। एक हजार खामेनेई खड़े हो जाएंगे और जंग होकर रहेगी। लखनऊ में शिया समुदाय ने तीन दिन के शोक का भीऐलान किया है। कांग्रेस ने भी की इजरायल-अमेरिका के हमले की निंदा जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक जताया और रविवार के लिए तय सभी राजनीतिक गतिविधियां स्थगति कर दीं।अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गई है। पीसीसी के एक प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी ईरान के सर्वोच्च नेता पर किए गए इन हवाई हमलों की कड़ी निंदा करती है और इसे अमेरिका व इजराइल की ओर से अमानवीय, बर्बर और कायरतापूर्ण कृत्य करार देती है।

30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों का भोपाल में प्रदर्शन, जेपी परिसर में जुटे कर्मचारी, न्याय यात्रा की तैयारी

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे लगभग 30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी भोपाल में प्रदर्शन कर रहे हैं। मप्र संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में कर्मचारी जेपी परिसर में पहुंच गए हैं और नारेबाजी कर रहे हैं। दोपहर एक बजे न्याय यात्रा शुरू होगी, जो मुख्यमंत्री निवास तक जाएगी। जहां 9 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशव्यापी हड़ताल आगे भी जारी रखेंगे। बुधवार से शुरू हुई हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं व्यापक रूप से प्रभावित हो सकती हैं। संघ के अनुसार मंगलवार रात को ही कई कर्मचारी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से भोपाल के लिए बस, ट्रेन व किराए के वाहन से निकल गए थे, जो दोपहर तक यहां पहुंचेंगे। पुलिस ने की अस्पताल परिसर में बैरिकेडिंग कर्मचारियों की न्याय यात्रा के मद्देनजर पुलिस ने जेपी अस्पताल परिसर के गेट पर बैरिकेडिंग कर कर्मचारियों को रोकने की तैयारी कर ली है। पुलिस उन्हें परिसर से बाहर नहीं निकलने देगी। उधर, कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें न्याय यात्रा निकालने की अनुमति दी गई है। समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कौरव ने बताया कि 2 फरवरी से संविदा कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है। विभाग के अधिकारी हमारी मांगों को अनदेखा कर रहे हैं। यही कारण है कि बीते दो दिन से हम काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जाता रहे थे। आज संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं से न्याय यात्रा निकाल कर राजधानी में अपना विरोध दर्ज कराएंगे। जिससे हमारी मांगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच सकें। उन्होंने बताया कि यह यात्रा मुख्यमंत्री निवास तक जाएगी। इसके लिए प्रदेशभर से कर्मचारी आए हैं, सभी एक तरह का सामूहिक अवकाश लेकर इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। यदि आज भी हमारी मांगे नहीं मानी जाती हैं तो सभी संविदा कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे। 30 हजार कर्मचारी, पूरे प्रदेश में असर संघ के अनुसार प्रदेश के जिला अस्पताल, सिविल हॉस्पिटल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, संजीवनी क्लिनिक और पोषण पुनर्वास केंद्रों सहित विभिन्न इकाइयों में 30 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी रिपोर्टिंग कार्य, सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, कुपोषित बच्चों की देखरेख और अन्य कई स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। संघ का कहना है कि यदि हड़ताल होती है तो अस्पतालों की व्यवस्थाएं प्रभावित होंगी और मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। रिक्त पदों पर समायोजन या नियमितीकरण की मांग कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सेवाएं दे चुके आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना शर्त तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए या संविदा में मर्ज किया जाए। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर ठोस नीति बनाकर स्थायी समाधान करने तथा न्यूनतम 21 हजार रुपये वेतन निर्धारित करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। 9 सूत्रीय मांगों में क्या शामिल संघ द्वारा प्रस्तुत 9 सूत्रीय मांगों में श्रम विभाग की 1 अप्रैल 2024 से लागू वेतन वृद्धि का 11 माह का एरियर भुगतान, निजी आउटसोर्स एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर सीधे खातों में वेतन भुगतान, शासकीय अवकाश की सुविधा, नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण, स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी का लाभ शामिल हैं। संघ का आरोप है कि दोहरी और दमनकारी नीति के कारण वर्षों से कर्मचारियों का शोषण हो रहा है, जबकि वे 12 से 14 घंटे तक कार्य कर अस्पतालों की रीढ़ बने हुए हैं। सामूहिक हड़ताल रहेगी जारी संघ ने बताया कि आंदोलन के चौथे चरण में 25 फरवरी 2026 से प्रदेशभर के कर्मचारी सामूहिक हड़ताल में शामिल रहेंगे। यदि मांग नहीं मानी गई तो यह हड़ताल जारी रहेगी। कोमल सिंह ने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो हड़ताल की पूरी जिम्मेदारी शासन और विभाग की होगी। कई बार पत्र, ज्ञापन और प्रदर्शन के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण कर्मचारियों में आक्रोश है। अब न्याय यात्रा के जरिए सीधे मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। कर्मचारियों का दावा है कि वे स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके भविष्य की सुरक्षा के बिना स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती संभव नहीं है।

नौ सूत्रीय मांगों को लेकर आउटसोर्स कर्मचारी करेंगे हड़ताल, काली पट्टी में जताया विरोध

ग्वालियर मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर राज्य के 30 हजार से अधिक आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन नौ सूत्रीय मांगों को लेकर किया जा रहा है। संघ ने बताया कि कर्मचारी 17 और 18 फरवरी को भी काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और 23 एवं 24 फरवरी को सामूहिक हड़ताल पर रहेंगे। इस आंदोलन में शासकीय मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, संजीवनी क्लिनिक और पोषण पुनर्वास केंद्रों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की रूपरेखा तय, काली पट्टी बांधकर जताएंगे विरोध जिला अध्यक्ष चित्रवीर पटेल के नेतृत्व में कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा से मुलाकात की। उन्होंने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट की। तृतीय चरण (16-18 फरवरी) में प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे। अंतिम चरण (23-24 फरवरी) में कर्मचारी काम बंद कर सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और भोपाल की सड़कों पर उतरकर "हल्ला बोल" प्रदर्शन करेंगे।  भोपाल में करेंगे हल्ला बोल प्रदर्शन मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर  17 और 18 फरवरी को कर्मचारी कार्यस्थल पर काली पट्टी बांधकर विरोध करेंगे। इसके बाद 23 और 24 फरवरी को प्रदेशभर के आउटसोर्स कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और राजधानी भोपाल में हल्ला बोल प्रदर्शन करेंगे।  स्थायी समाधान निकालने पर जोर संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना किसी शर्त के विभाग में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए। वैकल्पिक रूप से, उन्हें बिना शर्त संविदा में मर्ज किया जाए। कर्मचारियों की मांग है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार की तर्ज पर एक ठोस नीति बनाकर उनके लिए स्थायी समाधान निकाला जाए। इसके अतिरिक्त, निजी आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा वेतन भुगतान में हो रही अनियमितताओं को रोकने के लिए सभी जिलों में इन एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर विभाग द्वारा सीधे कर्मचारियों के खातों में वेतन भुगतान की व्यवस्था लागू की जाए। चतुर्थ श्रेणी पदों पर नहीं होगी नियुक्ति जानकारी के लिए बता दें कि मध्यप्रदेश के किसी भी विभाग में अब चतुर्थ श्रेणी के पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होगी। सरकार ने इन पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्ति करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके पहले ही सरकार चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया बंद कर चुकी है।  वित्त विभाग द्वारा 31 मार्च 2023 को विभागों में चतुर्थ श्रेणी पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारी रखने को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसमें रिक्त पदों पर तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर पद पूर्ति जरूरी होने पर आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं लेने की छूट थी, लेकिन बजट के अभाव में नियुक्तियां नहीं की जा सकती थीं। दो साल पहले 2023 में वित्त विभाग ने नियमित भर्तियां पूरी होने तक आउटसोर्स सेवाएं लेने के निर्देश जारी किए थे। इसमें बजटीय प्रावधान के अनुसार विभाग प्रमुख आउटसोर्स एजेंसी चयनित कर सेवाएं ले सकते थे। अब इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है। नौ सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी, वेतन बढ़ाने की मांग आउटसोर्स कर्मचारियों ने सरकार के सामने नौ सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें मुख्य रूप से विभाग में समायोजन की मांग शामिल है। एनएचएम के अंतर्गत सेवाएं दे चुके कर्मियों को रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए या संविदा में मर्ज किया जाए। आउटसोर्स कर्मियों का न्यूनतम वेतन 21,000 रुपये निर्धारित हो और अप्रैल 2024 से रुकी हुई 11 माह के एरियर राशि का तत्काल भुगतान किया जाए। रेगुलर कर्मचारियों की तरह छुट्टियां, स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए। नियमित भर्तियों में आउटसोर्स कर्मियों को 50 प्रतिशत आरक्षण मिले। निजी आउटसोर्स एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर विभाग सीधे कर्मचारियों के खातों में भुगतान करे। स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की आशंका: मरीजों की बढ़ेगी परेशानी हॉस्पिटल मैनेजमेंट के लिए बड़ी चुनौती राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के जिला अस्पतालों, पीएचसी और सीएचसी में वार्ड बॉय, कंप्यूटर ऑपरेटर, सफाई कर्मी और अन्य तकनीकी पदों पर बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी तैनात हैं। इनके दो दिवसीय अवकाश पर जाने से ओपीडी रजिस्ट्रेशन, लैब टेस्टिंग और वार्डों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप होने की आशंका है। इनका कहना है कि हम लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर गुहार लगा रहे हैं, लेकिन केवल आश्वासन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर हमारे लिए भी ठोस नीति बनाई जाए, अन्यथा हमें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। – चित्रवीर पटेल, जिला अध्यक्ष, म.प्र. संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ।

हजारों छात्र सड़क पर, यूजीसी नियमों पर विरोध-समर्थन में पुलिस से भिड़ंत

पटना यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद सियासत चरम पर है। बिहार की राजधानी पटना में यूजीसी नियमों के समर्थन में सोमवार को हजारों की संख्या में छात्र सड़क पर उतर गए। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में यूजीसी के नए समानता नियमों से रोक हटाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान पटना पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प हो गई। पुलिस ने दो छात्र नेताओं को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए छात्र नेताओं में अमर आजाद और मनीष यादव शामिल हैं। पुलिस दोनों को पकड़कर कोतवाली थाने ले गई। दरअसल, यूजीसी नियमों के समर्थन में छात्र संगठनों की ओर से सोमवार को पटना में मार्च निकाला गया। पटना कॉलेज से गांधी मैदान तक मार्च कर रहे स्टूडेंट्स को पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग को हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। इस दौरान गहमागहमी की स्थिति बन गई। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वाटर कैनन की गाड़ियां भी बुलाई गई हैं। प्रदर्शनकारी भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पटना यूनिवर्सिटी के विभिन्न छात्रावासों में रहने वाले हजारों छात्र इस मार्च में शामिल हुए। बता दें कि यूजीसी ने पिछले महीने यूनिवर्सिटी एवं कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्र-छात्राओं के साथ भेदभाव को रोकने के लिए नए नियमों को लागू किया था। सवर्ण वर्ग के छात्र-छात्राओं ने इस पर आपत्ति जताई और वापस लेने की मांग की गई। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट गया तो शीर्ष अदालत ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। यूजीसी नियमों का जहां सवर्ण वर्ग के लोग विरोध कर रहे हैं, वहीं दलित एवं पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राएं एवं संगठन इसके समर्थन में हैं। फिलहाल अदालत ने यूजीसी और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

‘होम डिलीवरी चालू है’ के पोस्टर संग शराब का ठेला, देवास में कांग्रेस ने किया प्रतीकात्मक प्रदर्शन

देवास शहर के नोवेल्टी चौराहे पर मंगलवार को युवा कांग्रेस ने अनोखा प्रदर्शन किया। शहर में गली-गली बिक रही अवैध शराब को लेकर आबकारी विभाग को घेरा। ठेले पर शराब की खाली बोतलें सजाकर बाजार में निकले। इस पर लिखा कि शराब की होम डिलीवरी चालू है। आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठाए सवाल युकां पूर्व जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह गौड़ ने कहा कि पिछले दिनों युवा कांग्रेस द्वारा आबकारी विभाग में ज्ञापन देकर शहर में चल रहे अवैध शराब कारोबार को लेकर शिकायत दर्ज करवाई गई थी। विभाग को स्पष्ट रूप से चेताया गया था कि शहर के कई इलाकों में डायरी सिस्टम के नाम पर अवैध रूप से शराब बेची जा रही है और शराब दुकानों के आसपास अवैध अहाते संचालित हो रहे हैं, लेकिन 10–15 दिन बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।   अवैध अहातों और डायरी सिस्टम पर रोक की मांग आबकारी विभाग की लापरवाही के कारण गली–मोहल्लों में खुलेआम शराब बिक रही है। इसी के विरोध में ठेले पर शराब की बोतलें रखकर प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया है। हमारी मांग है कि शराब दुकानों के पास बने अवैध अहाते तुरंत बंद किए जाएं। शहर में चल रहे डायरी सिस्टम पर रोक लगे। अवैध शराब बिक्री करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

हिंदुओं पर हमलों के विरोध में उबाल: दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के सामने गूंजे राम-कृष्ण के नारे

नई दिल्ली बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की कथित तौर पर भीड़ द्वारा हत्या किए जाने के बाद नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर शुक्रवार को भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों और धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कई जगह पुलिस से झड़प की खबरें भी सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने “भारत माता की जय”, “यूनुस सरकार होश में आओ” और “हिंदू हत्या बंद करो” जैसे नारे लगाए। आक्रोशित भीड़ ने सुरक्षा बैरिकेड्स को धक्का दिया, जिससे कम से कम दो परतों के बैरिकेड टूट गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस का पुतला भी फूंका। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “अगर आज हम आवाज़ नहीं उठाएंगे तो कल हर कोई दीपू बन जाएगा।” दरअसल, बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के बालुका इलाके में 18 दिसंबर को 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। आरोप है कि हत्या के बाद उसके शव को आग के हवाले कर दिया गया। बताया गया कि घटना कथित ईशनिंदा के आरोप से जुड़ी थी। इस घटना ने भारत समेत कई देशों में आक्रोश पैदा किया है। बांग्लादेश पुलिस ने इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार करने की पुष्टि की है। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों को पहले से ही हाई अलर्ट पर रखा गया था। हाई कमीशन के बाहर तीन स्तरों की बैरिकेडिंग की गई थी। पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया और बाद में दोबारा बैरिकेडिंग बहाल की। प्रोटेस्ट के दौरान एक शख्स बिलखते हुए कहता है- ये देश राम का है। ये देश कृष्ण का है। हम किसी को नहीं मारते, लेकिन हमारी बहन बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है। इधर, बांग्लादेश ने भारत में अपने राजनयिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। बांग्लादेश ने नई दिल्ली और सिलीगुड़ी में हुई घटनाओं के बाद भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया। बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने कहा कि राजनयिक परिसरों के खिलाफ हिंसा और धमकी अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन है। वहीं भारत ने सुरक्षा में चूक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नई दिल्ली में हुआ प्रदर्शन अल्पकालिक था और किसी तरह का खतरा नहीं था।  

कलेक्टर-विधायक से संबंधों का धौंस बताने वाली शिक्षिका के खिलाफ स्टूडेंट्स का विरोध, हटाने की मांग पर अड़े

दंतेवाड़ा स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल बारसूर के छात्र-छात्राएं अपनी शिक्षिका को हटाने की मांग को लेकर स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। छात्रों का आरोप है कि शिक्षिका माधुरी उइके पिछले तीन वर्षों से उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। छात्रों ने बताया कि शिक्षिका माधुरी स्कूल में उनके साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करती है और अभिभावकों को लेकर भी आपत्तिजनक बातें करती हैं। जब शिकायत करने की बात करते हैं तो शिक्षिका उन्हें धमकाती है और कहती हैं कि उनके कलेक्टर और विधायक से सीधे संबंध हैं इसलिए उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता। बच्चों का यह भी आरोप है कि महिला शिक्षिका और बीईओ बयान बदलने का दबाव बना रहे हैं। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग कर चुके हैं बच्चे छात्राओं ने बताया कि उन्होंने बीते दिन सामूहिक रूप से कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिक्षिका के खिलाफ ज्ञापन सौंपा था और कार्रवाई की मांग की थी। शुक्रवार को वे अभिभावकों के साथ स्कूल तो पहुंचे, लेकिन कक्षाओं में जाने के बजाय स्कूल परिसर के बाहर ही धरने पर बैठ गए। छात्रों ने कहा कि जब तक शिक्षिका को स्कूल से नहीं हटाया जाता, तब तक वे क्लास में नहीं बैठेंगे। छात्रों का आरोप – शिक्षिका के व्यवहार से स्कूल का माहौल हुआ खराब छात्रों का यह भी आरोप है कि शिक्षिका के व्यवहार से स्कूल का माहौल खराब हो गया है। कई शिक्षक भी परेशान हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता भी छात्रों के समर्थन में धरने में शामिल हुए। उनका कहना है कि शिक्षिका की वजह से न केवल बच्चे, बल्कि कई शिक्षक भी असंतुष्ट हैं। पिछले दो वर्षों में कई कर्मचारी स्कूल छोड़ चुके हैं। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से मांग की है कि शिक्षिका माधुरी उइके को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए, ताकि स्कूल का वातावरण दोबारा सामान्य हो सके।