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किसान मुद्दों पर प्रदेश में गर्माई राजनीति, कांग्रेस करेगी आज आंदोलन और जाम

भोपाल  मध्य प्रदेश में किसानों के मुद्दों को लेकर सियासत तेज हो गई है। आज 7 मई को कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करने जा रही है, जिसमें मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में नेशनल हाईवे जाम कर किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है, जिससे कई जिलों में यातायात प्रभावित होने की आशंका है। भोपाल में पीसी शर्मा ने बताया कि सरकार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। बार-बार खरीदी और स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाने से सिस्टम की कमजोरी उजागर हो गई है। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया के पहले 14 दिनों में केवल 9.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा गया है। इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसान स्लॉट बुकिंग, रजिस्ट्रेशन पर्ची अपलोड करने और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को गेहूं का दाम 2625 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाए। साथ ही, जिन किसानों ने कम कीमत पर गेहूं बेचा है, उन्हें अंतर की राशि “भावांतर योजना” के तहत सीधे उनके बैंक खातों में दी जाए। इसके अलावा, पार्टी ने मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस के इस आंदोलन के कारण 11 जिलों में करीब 747 किलोमीटर तक यातायात प्रभावित होने की संभावना है। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन किसानों के हित में किया जा रहा है, जबकि प्रशासन ने भी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस की मांगें पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जाए और कम कीमत पर बेचे गए गेहूं का अंतर भावांतर योजना के तहत सीधे खातों में डाला जाए। साथ ही मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी जवाब मांगा गया है। मंत्री बोले- वेयरहाउस की क्षमता में 20% बढ़ाई मध्यप्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री और विभाग द्वारा गेहूं खरीदी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की अनुमति थी, लेकिन किसानों के अधिक पंजीयन को देखते हुए केंद्र सरकार से इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन करा लिया गया है। मंत्री ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और अब तक करीब 15 लाख स्लॉट बुक हो चुके हैं। 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी भी हो चुकी है। राजपूत ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए तौल कांटे बढ़ाए गए हैं और वेयरहाउस की क्षमता में 20% तक की बढ़ोतरी की गई है, ताकि भंडारण में दिक्कत न आए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री खुद औचक निरीक्षण कर रहे हैं और वे स्वयं भी विभिन्न केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना- कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते और आंदोलन का ढोंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने के कारण कांग्रेस इस तरह के कदम उठा रही है, लेकिन हाईवे जाम से आम जनता को परेशानी होगी। राजपूत ने कहा कि सड़कों को जाम करने से लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और इससे आम नागरिकों को अनावश्यक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। उन्होंने कांग्रेस से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की। मंत्री ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में कांग्रेस की स्थिति कमजोर है और पार्टी को आंदोलन करने के बजाय आत्ममंथन करने की जरूरत है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले कांग्रेस ने आज तक अन्नदाता की चिंता नही की कांग्रेस को तो यह बात कहने का भी अधिकार नहीं हैं। हमारी सरकार बनने के बाद हम अन्नदाता को किसान सम्मान निधि दे रहे हैं। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी की जा रही हैं, जबकि बारदाने का संकट था। जीतू पटवारी को किसानों से माफी मांगना चाहिए। वो बताएं कि 2003-04 के पहले उन्होंने अन्नदाता के लिए क्या किया? जीतू पटवारी को आत्ममंथन और आत्मचिंतन करने की जरुरत है।

अनुमति के बिना प्रदर्शन पड़ा भारी, ग्रामीण कांग्रेस के 8 नेता हिरासत में

भिलाई. उतई पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन के मामले में दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर समेत 8 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। इन्होंने मासूम से अनाचार के मामले में पिछले माह प्रदर्शन किया था। कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस बल द्वारा अनुमति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने कहा गया, जो उपलब्ध नहीं कराया गया। पुलिस ने बताया, 12 अप्रैल की शाम मिनीमाता चौक पर 50-60 लोगों ने नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। पुतला दहन के दौरान ड्यूटी पर तैनात आरक्षक गिरधारी मंडावी के दोनों हाथ, आरक्षक अविनेश प्रताप सिंह के दाहिने हाथ एवं आरक्षक टिकेंद्र साहू को आंख के पास चोट आई। पुलिस ने जिलाध्यक्ष समेत पूर्व पार्षद प्रहलाद वर्मा, नेता प्रतिपक्ष द्वारिका प्रसाद साहू, धर्मेंद्र बंजारे, सत्यप्रकाश कौशिक, लोचन यादव और दिवाकर गायकवाड़ को गिरफ्तार किया। सभी को मुचलके पर छोड़ दिया गया।

फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक पर किसानों की ‘1 करोड़ प्रति एकड़’ की मांग, आंदोलन की धमकी

फिरोजपुर फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक प्रोजेक्ट का किसानों ने विरोध करना शुरू कर दिया गया है। जिले के तीन गांवों के किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार जमीन का उचित मुआवजा नहीं देती, तब तक उनके गांव में रेल लाइन बिछाने नहीं दी जाएगी और केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट का धरने लगाकर विरोध किया जाएगा।गांव कुतुबद्दीन वाला, दुला सिंह वाला और कालेके हिटाड़ में 121 एकड़ सात कनाल छह मरले भूमि सरकार द्वारा प्रोजेक्ट के लिए एक्वायर करने की योजना है और इसमें 60 से 65 घर भी प्रभावित होते हैं।  सरकार की ओर से गांव • एक करोड़ प्रति एकड़ मुआवजे की मांग कर रहे किसान • फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक के लिए जमीन का किया जा रहा अधिग्रहण प्रोजेक्ट के लिए होगा 165.69 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण बता दें कि 13 वर्ष से लटकते आ रहे फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार की ओर से नवंबर 2025 में 764 करोड़ की राशि जारी करने की घोषणा की जा चुकी है। प्रोजेक्ट के तहत मल्लांवाला से पट्टी तक 25.72 किलोमीटर का रेल ट्रैक बिछने के बाद फिरोजपुर से अमृतसर की दूरी भी कम होगी। सरकार द्वारा दो जिलों में 165.69 हेक्टेयर भूमि एक्वायर करनी है, जिसमें फिरोजपुर की 70.01 हेक्टेयर और तरनतारन के आठ गांवो की 95.68 हेक्टेयर भूमि शामिल है। कालेके हिटाड़ गांव के किसान मनदीप सिंह ने कहा कि उसके पास छह एकड़ भूमि है। अगर सरकार उनकी भूमि ले लेगी तो घर में काफी दिक्कत आ जाएगी। सरकार जमीन की कीमत कम लगा रही है, जो कि सही नहीं है। 33 से 35 लाख प्रति एकड़ मुआवजा देंगे: एसडीएम जीरा के एसडीएम अरविन्द्रपाल सिंह ने कहा कि किसानों को 33 से 35 लाख प्रति एकड़ के मुताबिक मुआवजा देने का निर्णय हुआ है। प्रशासन की ओर से प्रोजेक्ट पर कार्य किया जा रहा है। रुपये का मुआवजा किसानों को देने के लिए बजट बनाया गया था। भारतीय किसान यूनियन तोतेवाला के प्रांतीय अध्यक्ष सुख गिल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा भूमि एक्वायर करने के नाम पर किसानों के साथ सीधे तौर पर धक्का किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रति एकड़ एक करोड़ से सवा करोड़ का मुआवजा दिया जाना चाहिए। अगर उचित मुआवजा न मिला तो रेल ट्रैक बनने नहीं दिया जाएगा। रेलवे स्टेशनों पर धरने दिए जाएंगे। किसान मलूक सिंह, बचित्र सिंह, परमजीत व पाला सिंह ने कहा कि जिन किसानों की भूमि एक्वायर की जानी है, उनका बैंकों का कर्ज माफ करने के अलावा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। दुल्ला सिंह वाला में धुस्सी बांध के इन साइड में 3.80 लाख प्रति एकड़ कलेक्टर रेट 4.98 लाख प्रति एकड़ और धुस्सी बांध के 3.87 लाख प्रति एकड़ रेट निर्धारित किया गया है। तीन वर्ष पहले प्रशासन द्वारा 30 करोड़ 99 लाख।   

भाकियू का हंगामा: हापुड़ कूच के दौरान टोल प्लाजा पर टकराव, पुलिस पर हमला

  हाथरस पूर्व मंत्री द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी के विरोध में भारतीय किसान यूनियन ने शुक्रवार को कई जिलों में भारी बवाल कर दिया। भाकियू कार्यकर्ताओं ने हाथरस में पुलिस के साथ हाथापाई और धक्का-मुक्की की और दरोगा के पैर पर गाड़ी चढ़ाई दी। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। हापुड़ कूच कर रहे कई कार्यकर्ताओं को अलीगढ़ के गभाना टोल प्लाजा पर रोका गया तो वहां भी कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद भी उन्हें रोका नहीं जा सका। सैकड़ों कार्यकर्ता दर्जनों गाड़ियों से टोल प्लाजा पार करके निकल गए। वहीं भाकियू के बवाल को देखते हुए हापुड़, बुलंदशहर में भारी तादाद में पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया है। कुछ दिन पहले एक ढाबे के शुभारंभ के दौरान पूर्व मंत्री मदन चौहान द्वारा किसान नेताओं पर अभद्र टिप्पणी की गई थी। जिसके विरोध में भाकियू ने पूर्व मंत्री के आवास के घेराव का ऐलान किया था। शुक्रवार को कई जिलों से भाकियू कार्यकर्ता पूर्व मंत्री का आवास घेरने के लिए प्रदर्शन करते हुए हापुड़ के लिए कूच कर गए। कार्यकर्ताओं का हुजूम दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ हापुड़ जा रहे कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिलों में रोक लिया गया। इसको लेकर हाथरस में एसपी सिटी एटा और भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित किसान पीछे हटने को तैयार नहीं थे। तनाव उस समय और बढ़ गया जब कार्यकर्ताओं ने पुलिस घेरा तोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान एक गाड़ी कस्बा इंचार्ज के पैर पर चढ़ गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उत्तेजित भीड़ ने सीओ की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की। पूर्व मंत्री के आवास पर भारी पुलिस तैनात, सियासत गरमाई सलारपुर में हुई तीखी नोकझोंक के बाद भारतीय किसान यूनियन (भानु) और पूर्व मंत्री मदन चौहान के बीच का विवाद अब चरम पर पहुँच गया है। पूर्व मंत्री के आवास के घेराव के ऐलान के बाद शुक्रवार को गढ़मुक्तेश्वर की सड़कों पर तनाव का माहौल पैदा हो गया। पूर्व मंत्री के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। टकराव की आशंका को देखते हुए जिले के कई थानों की पुलिस को मौके पर बुलाया गया है। बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद सलारपुर में हुई एक नोकझोंक के बाद शुरू हुआ, जिसने अब बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। कार्यकर्ताओं में मदन चौहान की टिप्पणियों को लेकर गहरा रोष है। पूर्व मंत्री के खिलाफ धरना देने हरदोई, लखनऊ से गढ़मुक्तेश्वर पहुंचे सैकड़ों किसान बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव चितौड़ा में स्थित एक ढाबे के शुभारंभ के दौरान पूर्व मंत्री मदन चौहान और भाकियू भानू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह के बीच हुई नोकझोक ने बढ़ा रूप ले लिया है। सोशल मीडिया से शुरू हुए विवाद अब धरना प्रदर्शन तक पहुंच गया है। एक ओर जहां पूर्व मंत्री ने अपने आवास पर हवन पूजन करने की बात कहीं है वहीं दूसरी और हापुड़ जनपद के अलावा भाकियू भानू गुट के पदाधिकारी लखनऊ, हरदोई, संभल, बदायूं आदि जनपद से गढ़ पहुंच गए है। हालांकि पुलिस ने किसान संगठन के कई नेताओं को नजर बंद कर लिया है, लेकिन बहारी जनपदों के किसान गढ़ में पहुंच गए है। इस को लेकर पुलिस का सिरदर्द बढ़ गया है। क्या था मामला गांव चितौड़ा निवासी कुछ युवकों ने यूपी 37 के नाम से एक ढाबे का संचालन किया है। उसके शुभारंभ कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता एंव पूर्व मंत्री मदन चौहान को भी कार्यक्रम में बुलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान होटल संचालन के लिए भानु प्रताप ने एक ब्यान दिया। दिए गए ब्यान में उन्होंने कहा कि यह ढाबा किसान यूनियन के पदाधिकारियों का है इसको खुब चलावें, खूब खांवे और भाजपा को हरावें का ब्यान दिया। इस ब्यान को सुनकर उनके पड़ोस में बैठे मदन चौहान भड़क गए। पूर्व मंत्री ने उनके ब्यान की निंदा की उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ब्यान देना काफी गलत है। इस दौरान पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष में जमकर नोकझोक हुई। एक वीडियो में तो मदन चौहन ने भानु प्रताप पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को गाली देने का आरोप लगाया। इस दौरान कार्यक्रम नोकझोक का अखाड़ा बन गया। मौके पर काफी भीड़ एकत्र हो गई। पूरे घटना क्रम की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग तरह तरह की चर्चा शुरू हो गई।

पंजाब में कल किसानों का रेल रोको आंदोलन, गेहूं खरीद में देरी के खिलाफ तीन घंटे तक ट्रेनें रोकी जाएंगी

चंडीगढ़  केंद्र की एजेंसियों द्वारा पंजाब में गेहूं की खरीद ठप होने के विरोध में आजाद किसान मोर्चा (एकेएम ) ने बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है।  मोर्चे के वरिष्ठ नेताओं सुख गिल मोगा, सतनाम सिंह हरिके, जसबीर सिंह आहलूवालिया, परमजीत सिंह जब्बोवाल और नछत्तर सिंह ने कहा कि किसानों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ 17 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक पूरे पंजाब में रेलों का चक्का जाम किया जाएगा। नेताओं ने बताया कि यह प्रदर्शन किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) से जुड़ी विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त सहयोग से किया जाएगा। इस दौरान राज्यभर में शांतिपूर्ण तरीके से रेल यातायात रोककर सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचाई जाएगी। सुख गिल मोगा ने कहा कि गेहूं की खरीद में हो रही देरी के कारण किसानों को मंडियों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों की लापरवाही के चलते अनाज मंडियों में पड़ा है, जिससे किसान आर्थिक और मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। किसान नेताओं ने केंद्र और पंजाब सरकार से मांग की कि गेहूं की खरीद तुरंत शुरू की जाए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मोर्चे ने किसानों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में इस प्रदर्शन में शामिल होकर इसे सफल बनाएं, ताकि मंडियों में पड़ी गेहूं की फसल को खराब होने से बचाया जा सके और सरकारों को सबक सिखाया जा सके। इस मौके पर विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिनमें बीकेयू, पंजाब किसान यूनियन, बाढ़ पीड़ित किसान संघर्ष कमेटी, भारतीय किसान मजदूर यूनियन समेत कई जत्थेबंदियों के नेता शामिल थे।

ईरान संकट पर पाकिस्तान सतर्क, रक्षा मंत्री का बयान—युद्ध भड़का तो पड़ेंगे गंभीर असर

इस्लामाबाद ईरान पर हमलों का विरोध पाकिस्तान में हिंसक भी हुआ। अमेरिकी दूतावास को निशाने पर भी लिया गया, तो सांसदों ने भी विरोध के सुर बुलंद किए। संसद में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के संबोधन के दौरान भी 'जाली बोर्ड ऑफ पीस से बाहर निकलो' के नारे लगे। वहीं, अब तो रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहना शुरू कर दिया है कि जंग पाकिस्तान के लिए खतरनाक है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में जायनिज्म (यहूदियों का आंदोलन) को मुस्लिम दुनिया में अस्थिरता की मुख्य वजह बताया है और इसे मानवता के लिए खतरा बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान पर चल रहा युद्ध पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन की जमीन पर इजरायल के कायम होने से लेकर आज तक इस्लामी दुनिया पर जो भी बड़ी-बड़ी मुसीबतें आई हैं, जो भी युद्ध थोपे गए हैं, उनमें जायनिस्ट विचारधारा और इजरायल का सीधा हाथ दिखता है। ख्वाजा आसिफ ने ईरान के बारे में कहा कि ईरान समझौते के लिए तैयार था, इसके बावजूद उन पर युद्ध थोपा गया है। यह सब जायनिस्ट एजेंडा का हिस्सा है, जिसमें इजराइल का प्रभाव पाकिस्तान की सरहद तक लाने की कोशिश शामिल है। अफगानिस्तान, ईरान और भारत को मिलाकर पाकिस्तान विरोधी एजेंडा बनाया जा रहा है, ताकि पाकिस्तान की सरहदें असुरक्षित हो जाएं, हर तरफ से दुश्मन घेर लें और पाकिस्तान कमजोर हो जाए। वहीं, पाकिस्तान की पूर्व राजदूत ने पीस बोर्ड से हटने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि शरीफ सरकार को ट्रंप का गाजा बोर्ड छोड़ देना चाहिए। पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने कहा कि नवाज शरीफ की सरकार को ट्रंप के बनाए “बोर्ड ऑफ पीस” से बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान को शुरुआत में ही इस बोर्ड में शामिल नहीं होना चाहिए था। लोधी ने आरोप लगाया कि "ट्रंप सरकार कई देशों पर हमले कर चुकी है और गाजा में इजरायली कार्रवाई में उसकी भूमिका रही है।"

ईरान के खामेनेई के मारे जाने पर भारत में शिया मुसलमान कर रहे प्रदर्शन

लखनऊ. इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई है। इसके बाद ईरान में लोग सड़कों पर उतर पड़े हैं। खामेनेई के समर्थक सड़कों पर मातम मना रहे हैं और अमेरिका-इजरायल का विरोध कर रहे हैं। खामेनेई की मौत के मातम से भारत भी अछूता नहीं है। यहां कश्मीर में कई जगहों पर लोग खामेनेई की तस्वीरों के साथ सड़कों पर उतरे और इजरायल-अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की। लोग 'खामेनेई जिंदाबाद' जैसे नारे भी लगा रहे थे। कश्मीर में प्रदर्शन की वजह यह है कि खामेनेई को फिलिस्तीन समर्थक नेता के तौर पर जाना जाता था। इसके अलावा शिया समुदाय के मुसालमान खामेनेई से काफी हमदर्दी रखते थे। कश्मीर के शिया मुसलमानों में खामेनेई की काफी लोकप्रियता थी और इसीलिए लोग उनकी मौत का मातम मनाने सड़कों पर उतर पड़े हैं। वहीं बेंगलुरु के पास शिया बहुल एक गांव में सन्नाटा पसरा है। लोगों का कहना है कि वे खामेनेई की मौत से बेहद दुखी हैं। पुलवामा और श्रीनगर में सड़कों पर उतरे लोग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कश्मीर के पुलवामा और श्रीनगर में शिया बहुल इलाकों में लोग काले झंडे और बैनर लेकर सड़कों पर निकल पड़े और इजरायल-अमेरिका विरोधी नारे लगाने लगे। रविवार को ही ईरान ने अली खामेनेई की मौत की पुष्टि की है। इसके बाद ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर का ऐलान भी कर दिया है। अली खामेनेई के बेटे मोर्तजा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाने की तैयारी है। लखनऊ में भी प्रदर्शन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी शिया मुसलमानों की संख्या काफी है। यहां भी लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए। लोगों ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, अमेरिका बात भी कर रहा था और युद्ध की धमकी भी दे रहा था। हमारे नेता ने घुटने नहीं टेके। एक हजार खामेनेई खड़े हो जाएंगे और जंग होकर रहेगी। लखनऊ में शिया समुदाय ने तीन दिन के शोक का भीऐलान किया है। कांग्रेस ने भी की इजरायल-अमेरिका के हमले की निंदा जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक जताया और रविवार के लिए तय सभी राजनीतिक गतिविधियां स्थगति कर दीं।अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गई है। पीसीसी के एक प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी ईरान के सर्वोच्च नेता पर किए गए इन हवाई हमलों की कड़ी निंदा करती है और इसे अमेरिका व इजराइल की ओर से अमानवीय, बर्बर और कायरतापूर्ण कृत्य करार देती है।

30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों का भोपाल में प्रदर्शन, जेपी परिसर में जुटे कर्मचारी, न्याय यात्रा की तैयारी

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे लगभग 30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी भोपाल में प्रदर्शन कर रहे हैं। मप्र संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में कर्मचारी जेपी परिसर में पहुंच गए हैं और नारेबाजी कर रहे हैं। दोपहर एक बजे न्याय यात्रा शुरू होगी, जो मुख्यमंत्री निवास तक जाएगी। जहां 9 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशव्यापी हड़ताल आगे भी जारी रखेंगे। बुधवार से शुरू हुई हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं व्यापक रूप से प्रभावित हो सकती हैं। संघ के अनुसार मंगलवार रात को ही कई कर्मचारी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से भोपाल के लिए बस, ट्रेन व किराए के वाहन से निकल गए थे, जो दोपहर तक यहां पहुंचेंगे। पुलिस ने की अस्पताल परिसर में बैरिकेडिंग कर्मचारियों की न्याय यात्रा के मद्देनजर पुलिस ने जेपी अस्पताल परिसर के गेट पर बैरिकेडिंग कर कर्मचारियों को रोकने की तैयारी कर ली है। पुलिस उन्हें परिसर से बाहर नहीं निकलने देगी। उधर, कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें न्याय यात्रा निकालने की अनुमति दी गई है। समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कौरव ने बताया कि 2 फरवरी से संविदा कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है। विभाग के अधिकारी हमारी मांगों को अनदेखा कर रहे हैं। यही कारण है कि बीते दो दिन से हम काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जाता रहे थे। आज संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं से न्याय यात्रा निकाल कर राजधानी में अपना विरोध दर्ज कराएंगे। जिससे हमारी मांगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच सकें। उन्होंने बताया कि यह यात्रा मुख्यमंत्री निवास तक जाएगी। इसके लिए प्रदेशभर से कर्मचारी आए हैं, सभी एक तरह का सामूहिक अवकाश लेकर इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। यदि आज भी हमारी मांगे नहीं मानी जाती हैं तो सभी संविदा कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे। 30 हजार कर्मचारी, पूरे प्रदेश में असर संघ के अनुसार प्रदेश के जिला अस्पताल, सिविल हॉस्पिटल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, संजीवनी क्लिनिक और पोषण पुनर्वास केंद्रों सहित विभिन्न इकाइयों में 30 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी रिपोर्टिंग कार्य, सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, कुपोषित बच्चों की देखरेख और अन्य कई स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। संघ का कहना है कि यदि हड़ताल होती है तो अस्पतालों की व्यवस्थाएं प्रभावित होंगी और मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। रिक्त पदों पर समायोजन या नियमितीकरण की मांग कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सेवाएं दे चुके आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना शर्त तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए या संविदा में मर्ज किया जाए। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर ठोस नीति बनाकर स्थायी समाधान करने तथा न्यूनतम 21 हजार रुपये वेतन निर्धारित करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। 9 सूत्रीय मांगों में क्या शामिल संघ द्वारा प्रस्तुत 9 सूत्रीय मांगों में श्रम विभाग की 1 अप्रैल 2024 से लागू वेतन वृद्धि का 11 माह का एरियर भुगतान, निजी आउटसोर्स एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर सीधे खातों में वेतन भुगतान, शासकीय अवकाश की सुविधा, नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण, स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी का लाभ शामिल हैं। संघ का आरोप है कि दोहरी और दमनकारी नीति के कारण वर्षों से कर्मचारियों का शोषण हो रहा है, जबकि वे 12 से 14 घंटे तक कार्य कर अस्पतालों की रीढ़ बने हुए हैं। सामूहिक हड़ताल रहेगी जारी संघ ने बताया कि आंदोलन के चौथे चरण में 25 फरवरी 2026 से प्रदेशभर के कर्मचारी सामूहिक हड़ताल में शामिल रहेंगे। यदि मांग नहीं मानी गई तो यह हड़ताल जारी रहेगी। कोमल सिंह ने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो हड़ताल की पूरी जिम्मेदारी शासन और विभाग की होगी। कई बार पत्र, ज्ञापन और प्रदर्शन के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण कर्मचारियों में आक्रोश है। अब न्याय यात्रा के जरिए सीधे मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। कर्मचारियों का दावा है कि वे स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके भविष्य की सुरक्षा के बिना स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती संभव नहीं है।

नौ सूत्रीय मांगों को लेकर आउटसोर्स कर्मचारी करेंगे हड़ताल, काली पट्टी में जताया विरोध

ग्वालियर मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर राज्य के 30 हजार से अधिक आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन नौ सूत्रीय मांगों को लेकर किया जा रहा है। संघ ने बताया कि कर्मचारी 17 और 18 फरवरी को भी काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और 23 एवं 24 फरवरी को सामूहिक हड़ताल पर रहेंगे। इस आंदोलन में शासकीय मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, संजीवनी क्लिनिक और पोषण पुनर्वास केंद्रों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की रूपरेखा तय, काली पट्टी बांधकर जताएंगे विरोध जिला अध्यक्ष चित्रवीर पटेल के नेतृत्व में कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा से मुलाकात की। उन्होंने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट की। तृतीय चरण (16-18 फरवरी) में प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे। अंतिम चरण (23-24 फरवरी) में कर्मचारी काम बंद कर सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और भोपाल की सड़कों पर उतरकर "हल्ला बोल" प्रदर्शन करेंगे।  भोपाल में करेंगे हल्ला बोल प्रदर्शन मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर  17 और 18 फरवरी को कर्मचारी कार्यस्थल पर काली पट्टी बांधकर विरोध करेंगे। इसके बाद 23 और 24 फरवरी को प्रदेशभर के आउटसोर्स कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और राजधानी भोपाल में हल्ला बोल प्रदर्शन करेंगे।  स्थायी समाधान निकालने पर जोर संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना किसी शर्त के विभाग में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए। वैकल्पिक रूप से, उन्हें बिना शर्त संविदा में मर्ज किया जाए। कर्मचारियों की मांग है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार की तर्ज पर एक ठोस नीति बनाकर उनके लिए स्थायी समाधान निकाला जाए। इसके अतिरिक्त, निजी आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा वेतन भुगतान में हो रही अनियमितताओं को रोकने के लिए सभी जिलों में इन एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर विभाग द्वारा सीधे कर्मचारियों के खातों में वेतन भुगतान की व्यवस्था लागू की जाए। चतुर्थ श्रेणी पदों पर नहीं होगी नियुक्ति जानकारी के लिए बता दें कि मध्यप्रदेश के किसी भी विभाग में अब चतुर्थ श्रेणी के पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होगी। सरकार ने इन पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्ति करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके पहले ही सरकार चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया बंद कर चुकी है।  वित्त विभाग द्वारा 31 मार्च 2023 को विभागों में चतुर्थ श्रेणी पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारी रखने को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसमें रिक्त पदों पर तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर पद पूर्ति जरूरी होने पर आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं लेने की छूट थी, लेकिन बजट के अभाव में नियुक्तियां नहीं की जा सकती थीं। दो साल पहले 2023 में वित्त विभाग ने नियमित भर्तियां पूरी होने तक आउटसोर्स सेवाएं लेने के निर्देश जारी किए थे। इसमें बजटीय प्रावधान के अनुसार विभाग प्रमुख आउटसोर्स एजेंसी चयनित कर सेवाएं ले सकते थे। अब इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है। नौ सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी, वेतन बढ़ाने की मांग आउटसोर्स कर्मचारियों ने सरकार के सामने नौ सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें मुख्य रूप से विभाग में समायोजन की मांग शामिल है। एनएचएम के अंतर्गत सेवाएं दे चुके कर्मियों को रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए या संविदा में मर्ज किया जाए। आउटसोर्स कर्मियों का न्यूनतम वेतन 21,000 रुपये निर्धारित हो और अप्रैल 2024 से रुकी हुई 11 माह के एरियर राशि का तत्काल भुगतान किया जाए। रेगुलर कर्मचारियों की तरह छुट्टियां, स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए। नियमित भर्तियों में आउटसोर्स कर्मियों को 50 प्रतिशत आरक्षण मिले। निजी आउटसोर्स एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर विभाग सीधे कर्मचारियों के खातों में भुगतान करे। स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की आशंका: मरीजों की बढ़ेगी परेशानी हॉस्पिटल मैनेजमेंट के लिए बड़ी चुनौती राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के जिला अस्पतालों, पीएचसी और सीएचसी में वार्ड बॉय, कंप्यूटर ऑपरेटर, सफाई कर्मी और अन्य तकनीकी पदों पर बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी तैनात हैं। इनके दो दिवसीय अवकाश पर जाने से ओपीडी रजिस्ट्रेशन, लैब टेस्टिंग और वार्डों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप होने की आशंका है। इनका कहना है कि हम लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर गुहार लगा रहे हैं, लेकिन केवल आश्वासन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर हमारे लिए भी ठोस नीति बनाई जाए, अन्यथा हमें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। – चित्रवीर पटेल, जिला अध्यक्ष, म.प्र. संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ।

हजारों छात्र सड़क पर, यूजीसी नियमों पर विरोध-समर्थन में पुलिस से भिड़ंत

पटना यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद सियासत चरम पर है। बिहार की राजधानी पटना में यूजीसी नियमों के समर्थन में सोमवार को हजारों की संख्या में छात्र सड़क पर उतर गए। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में यूजीसी के नए समानता नियमों से रोक हटाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान पटना पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प हो गई। पुलिस ने दो छात्र नेताओं को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए छात्र नेताओं में अमर आजाद और मनीष यादव शामिल हैं। पुलिस दोनों को पकड़कर कोतवाली थाने ले गई। दरअसल, यूजीसी नियमों के समर्थन में छात्र संगठनों की ओर से सोमवार को पटना में मार्च निकाला गया। पटना कॉलेज से गांधी मैदान तक मार्च कर रहे स्टूडेंट्स को पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग को हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। इस दौरान गहमागहमी की स्थिति बन गई। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वाटर कैनन की गाड़ियां भी बुलाई गई हैं। प्रदर्शनकारी भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पटना यूनिवर्सिटी के विभिन्न छात्रावासों में रहने वाले हजारों छात्र इस मार्च में शामिल हुए। बता दें कि यूजीसी ने पिछले महीने यूनिवर्सिटी एवं कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्र-छात्राओं के साथ भेदभाव को रोकने के लिए नए नियमों को लागू किया था। सवर्ण वर्ग के छात्र-छात्राओं ने इस पर आपत्ति जताई और वापस लेने की मांग की गई। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट गया तो शीर्ष अदालत ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। यूजीसी नियमों का जहां सवर्ण वर्ग के लोग विरोध कर रहे हैं, वहीं दलित एवं पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राएं एवं संगठन इसके समर्थन में हैं। फिलहाल अदालत ने यूजीसी और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।