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स्पीड और स्टंट का रोमांच रायपुर में: नेशनल सुपरक्रॉस चैम्पियनशिप में नन्हे राइडर्स भी लेंगे हिस्सा

रायपुर छत्तीसगढ़ मोटरस्पोर्ट्स एसोसिएशन द्वारा राजधानी के बूढ़ापारा स्थित आउटडोर स्टेडियम में नेशनल सुपरक्रॉस बाइक रेसिंग प्रतियोगिता का आयोजन 8 और 9 नवंबर को किया जा रहा है. एसोसिएशन के अध्यक्ष उज्ज्वल दीपक ने बताया कि इस स्पर्धा में देश भर के लगभग 115 प्रोफेशनल राइडर्स हिस्सा लेने आ रहे हैं. उनकी टीम 7 नवंबर तक राजधानी पहुंच जाएगी. वहीं छत्तीसगढ़ से भी 50 राइडर्स इसकी तैयारी पाटन स्थित ट्रैक पर कर रहे हैं, इनमें से बेस्ट राइडर्स का चयन कर उन्हें इस स्पर्धा में भेजा जाएगा. इस स्पर्धा की थीम सेफ रेसिंग-सेफ राइडिंग-सेफ ड्राइविंग है. स्पर्धा की तैयारी के संबंध में एसोसिएशन के महासचिव अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि आउटडोर स्टेडियम के पूरे ग्राउंड को समतल करने के बाद उसमें राइडर्स की जंपिंग के लिए ट्रैक तैयार हो चुका है. इसकी ऊंचाई लगभग 3-5 फीट तक होगी. चूंकि इस ट्रेक पर राइडर्स को स्पीड नियंत्रित करते हुए अनेक बाधाओं का भी सामना करना पड़ेगा, इसके लिए भी अलग से तैयारी की गई है. वहीं फ्री स्टाइल मोटोक्रॉस के लिए 13 फीट ऊंचा हर्डल ट्रैक भी तैयार किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस रेसिंग में 10 साल से कम उम्र के बच्चे भी प्रदर्शन के लिए उतरेंगे. उन्हें एसोसिएशन की ओर से जांच-पड़ताल के बाद सुरक्षा मानक को ध्यान में रखकर अनुमति दी जाएगी. श्री श्रीवास्तव ने बताया कि देश की सबसे कम उम्र की राइडर्स ऐलिना मंसूर जिन्होंने 9 साल की उम्र में ही नेशनल में भाग लिया था, अभी वह 14 साल की हो चुकी है, वह यहां भाग लेने आ रही है. नामी कंपनियों के राइडर्स का आकर्षण नेशनल सुपरक्रॉस चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए यामहा, टीवीएस और होण्डा जैसी कंपनियों के राइडर्स भी हिस्सा लेने आ रहे हैं. इनकी टीम 8 नवंबर की सुबह राजधानी पहुंच जाएगी. एसोसिएशन के अध्यक्ष उज्ज्वल ने कहा कि यह प्रतियोगिता नेशनल सुपरक्रॉस नियमों के तहत आयोजित की जाएगी. इसमें सुरक्षा के सभी मापदंड तय किये गये हैं.

बालको मेडिकल सेंटर के साइक्लोथॉन में शहरों के साइक्लिस्ट्स ने किया स्वास्थ्य संदेश का प्रचार

रायपुर विश्व स्तन कैंसर जागरूकता माह के दौरान बालको मेडिकल सेंटर ने आज रायपुर के मरीन ड्राइव में ‘बीएमसी साइक्लोथॉन–25’ का आयोजन किया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य, फिटनेस और कैंसर के प्रति जागरूकता को एक साथ जोड़कर समाज में “शर्म छोड़ो – गांठों पर बोलो” का संदेश फैलाना है. इस वर्ष की विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की थीम “Every story is unique, every journey matters” के साथ आयोजित इस साइक्लोथॉन में रायपुर, भिलाई और राजनांदगांव से बड़ी संख्या में साइक्लिंग ग्रुप्स, पैरा ओलंपिक एसोसिएशन के ट्राय-साइक्लिस्ट्स, AIG ट्रैफिक संजय शर्मा और उनके जुम्बा ग्रुप, साथ ही एनआरएएनवीपी की महिला ऑटो चालिकाओं ने जबरदस्त जोश के साथ हिस्सा लिया. कार्यक्रम के दौरान बालको मेडिकल सेंटर की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. भावना सिरोही ने लोगों को कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान और रोकथाम के लिए उपलब्ध वैक्सीन की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि समय पर जांच और जागरूकता ही कैंसर से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है. इस अवसर पर अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और स्टाफ सदस्यों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और समाज को फिटनेस और हेल्थ के महत्व का संदेश दिया. कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया.

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने रायपुर के बैजनाथपुर जलाशय के जीर्णोद्धार कार्य की रखी आधारशिला

रायपुर : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बैजनाथपुर जलाशय जीर्णोद्धार कार्य का किया भूमिपूजन 222.79 लाख की लागत से होगा मरम्मत कार्य, हजारों ग्रामीणों को मिलेगा लाभ रायपुर सूरजपुर जिले के ग्राम बैजनाथपुर (ब) स्थित बैजनाथपुर जलाशय योजना के जीर्णोद्धार कार्य का आज विधिवत भूमिपूजन महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के करकमलों से संपन्न हुआ।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की खुशहाली और सिंचाई संसाधनों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। बैजनाथपुर जलाशय का जीर्णोद्धार क्षेत्र के किसानों को स्थायी जल उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और कृषि उत्पादन को नई गति देगा। सन् 1977 ई. में निर्मित यह जलाशय अब लगभग 48 वर्ष पुराना है। यह जलाशय लंबे समय से क्षेत्र के किसानों को खरीफ फसल के लिए सिंचाई सुविधा प्रदान करता रहा है। बांध की कुल लंबाई 855 मीटर है तथा इसकी जल भराव क्षमता 19.76 मिलियन क्यूबिक फीट  है। जलाशय से निकलने वाली 2250 मीटर लंबी नहर के माध्यम से लगभग 182 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है, जिससे करीब 2600 से अधिक ग्रामीणों को लाभ मिलता है।प्रदेश सरकार द्वारा इस जलाशय के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत कार्य हेतु 222.79 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई है। कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की जलसंचयन क्षमता में वृद्धि होगी और सिंचाई व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग के अधिकारी, कृषि विभाग के कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

रायपुर में ट्रैफिक से राहत का रोडमैप: पाँच मुख्य सड़कों को 6 और 8 लेन तक किया जाएगा चौड़ा

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी में सिक्स लेन सिर्फ रायपुर से सिगमा तक है. बाकी राजधानी को जोड़ने वाली ज्यादातर सड़कें 4 लेन है. इसलिए राजधानी को रफ्तार देने के लिए करीब 5 सिक्स लेन और आठ लेन सड़क बनेगी, इसमें रायपुर-विशाखापट्टनम, रायपुर- लखनादौन, रायपुर – बलौदाबाजार, दुर्ग-आरंग बाइपास सिक्स लेन और सिगमा से बिलासपुर सड़क 8 लेन चौड़ी होगी. ये सड़कें न केवल यात्रियों की दूरी कम करेंगी, बल्कि समय, ईंधन और ट्रैफिक जाम से भी निजात दिलाएंगी. छत्तीसगढ़ में इन सड़कों के प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है. ये प्रोजेक्ट राज्य की परिवहन व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाएंगे. राजधानी से जुड़े होने के कारण उक्त प्रोजेक्ट पूरे होने पर यात्री सुविधा के साथ माल ढुलाई आसान होगी. सड़क विस्तार से कारोबार बढ़ेगा. रायपुर से सारंगढ़ 186 किमी लंबी फोरलेन रायपुर से सारंगढ़ तक की 186 किलोमीटर लंबी सड़क को फोरलेन किया जा रहा है. इसमें रायपुर से धनेली 0 प्वाइंट से 53.1 किमी तक प्रथम चरण में, फिर 85.6 किमी तक दूसरे चरण में और अंत में 186 किमी तक तीसरे चरण में काम किया जाएगा. एनएच ने इस सड़क के एलाइन्मेंट की जानकारी जिला प्रशासन को सौंप दी है. लगभग 35 गांवों की जमीन पर पहले लगी खरीदी-बिक्री की रोक हटा ली गई है. एनएचएआई की टीम ने भूमि अभिलेखों का मिलान भी पूरा कर लिया है. अध्ययन में यह पाया गया कि अधिकतर भूमि पहले से ही नेशनल हाईवे की है, इसलिए मात्र 10% भूमि ही अधिग्रहित की जानी है. डीपीआर लगभग तैयार है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है. यह फोरलेन रायपुर से बलौदाबाजार होते हुए सारंगढ़ जाएगी. इससे न केवल ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह एक नई लाइफलाइन बनेगा. इसका निर्माण दो चरणों में होगा. पहले चरण में ग्राम धनेली (रायपुर) से और वहां से ग्राम बिनौरी तक 72 किमी बनाई जाएगी. रायपुर – लखनादौन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे रायपुर से लखनादौन (मध्यप्रदेश) तक करीब 300 किमी लंबे छह लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे की योजना पर भी काम तेजी से चल रहा है. यह सड़क बालाघाट, सिवनी, छपारा और लखनादौन होते हुए रायपुर को जोड़ेगी और करीब 12 जिलों को इससे फायदा होगा. इस परियोजना की लागत करीब 15,000 करोड़ रुपए आंकी गई है. एनएचएआई ने इसके लिए तीन संभावित रूटों का सर्वे शुरू कर दिया है. इनमें से एक रूट कान्हा और पेंच नेशनल पार्क के पास से होकर गुजरता है, जिससे पर्यावरणीय बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं. रायपुर-बिलासपुर मार्ग 8 लेन रायपुर से बिलासपुर तक नेशनल हाईवे का नए सिरे से चौड़ीकरण होगा. एनएचएआई ने इसकी चौड़ाई बढ़ाकर 8 लेन करने जा रहा है. विभाग ने डीपीआर के लिए टेंडर डाक्यूमेंट्स बनाकर दिल्ली मुख्यालय भेज दिया है. रायपुर से सिमगा तक 8 लेन और सिमगा से बिलासपुर तक सिक्स लेन सड़क बनाई जाएगी. अभी ये सड़क रायपुर से सिमगा तक 6 लेन और सिमगा से बिलासपुर तक 4 लेन है. इसी सड़क को रायपुर से बिलासपुर तक 8 लेन बनाने की योजना पर काम हो रहा है. अफसरों का कहना है कि अगले वित्त वर्ष तक टेंडर जारी कर काम शुरू कर दिया जाएगा. मुंबई-कोलकाता लिंक : दुर्ग – रायपुर होते हुए आरंग तक निर्माण भारतमाला परियोजना के तहत दुर्ग से आरंग के बीच 92.5 किमी लंबे सिक्स लेन इकॉनोमिक कॉरिडोर का भी निर्माण चल रहा है. यह राजनांदगांव, दुर्ग, पाटन, अभनपुर और आरंग तहसीलों से होकर गुजरेगा. यह दुर्ग से रायपुर होते हुए नई राजधानी तक जाने के मौजूदा 70-75 किलोमीटर के सफर को घटाकर 55 किलोमीटर कर देगा. इससे 20 किलोमीटर दूरी घटेगी, बल्कि समय और ईंधन की भी बचत होगी. यह कॉरिडोर मुंबई-कोलकाता आर्थिक कॉरिडोर में शामिल होगा. यह 6 लेन प्रोजेक्ट है. इसकी अनुमानित लागत 2297 करोड़ रुपए है.

रायपुर में नर्स की हत्या का रहस्य गहराया, बॉयफ्रेंड और लव ट्रायंगल पर पुलिस की नजर

रायपुर राजधानी रायपुर में नर्स की हत्या होने से शहर में सनसनी फैल गई है. खून से लथपथ युवती की लाश घर के कमरे में मिली है. यह घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र के लालपुर पटेल चौक की है. लव ट्रायंगल में हत्या होने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. जानकारी के मुताबिक, युवती की दोस्ती दुर्गेश नामक युवक से थी. चिरमिरी के सन्नी नामक युवक से भी पिछले 7 साल से फ्रेंडशिप थी. युवती का बॉयफ्रेंड से विवाद चल रहा था. युवती के सीने में चाकू मारकर मौत के घाट उतारा गया है. मृतका के हाथ में भी चाकू मिला है. कमरे में संघर्ष होने के बाद वारदात को अंजाम देने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस घटना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है. चिरमिरी जिले की रहने वाली थी युवती मृतका की पहचान प्रियंका दास (23) के रूप में हुई है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. जानकारी के मुताबिक, प्रियंका दास पिछले एक माह से पचपेड़ी नाका स्थित किराए के रूम में रह रही थी. वह एमएमआई अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के पद पर काम कर रही थी. प्रियंका दास मूलतः चिरमिरी जिले की रहने वाली है. हत्या की वारदात देर रात्रि होने की आशंका जताई जा रही है. मृतका के सीने पर चाकू के वार के निशान आज सुबह जब प्रियंका की रूम मेट उनसे मिलने उसके कमरे पहुंची तो प्रियंका के हत्या की जानकारी सामने आई. मृतका के सीने पर चाकू के तीन वार पाए गए हैं. टिकरापारा पुलिस और फॉरेंसिक की टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुटी है.

रायपुर में सफाईकर्मियों की ड्यूटी अब 8 घंटे अनिवार्य, तभी मिलेगी सैलरी

 रायपुर शहर की सफाई में काम करने वाले कर्मियों का अब आठ घंटे की पूरी ड्यूटी करनी पड़ेगी। प्रतिदिन आठ घंटे की ड्यूटी होने पर ही उन्हें सैलरी मिलेगी। नगर निगम द्वारा जोन स्तर अनुबंधित किए जाने वाले ठेका सिस्टम को भी खत्म करने जा रहा है। अब निगम हेड ऑफिस से ठेका एजेंसी नियुक्त की जाएगी, जो पूरे शहर में सफाई के लिए कर्मचारी, उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराएगी। नगर निगम की शहरी सरकार ने हाल ही में एमआइसी की बैठक में इस प्रस्ताव पर प्रारंभिक चर्चा की। बैठक में यह भी तय किया गया कि शहर की सफाई व्यवस्था को सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि शहर के वार्डों में सफाई कर्मचारी अक्सर निर्धारित संख्या से कम ड्यूटी पर मिलते थे, जिससे सफाई कार्य में कोताही होती है। इससे शहर की सफाई का स्तर अपेक्षित नहीं रह पाया। अन्य नगर निगमों जैसे भिलाई, बिलासपुर, कोरबा, जगदलपुर और अंबिकापुर में सेंट्रलाइज्ड टेंडर से बेहतर परिणाम मिले हैं। इस नए सिस्टम के तहत पूरे शहर की सफाई के लिए एक बड़ी एजेंसी को आनलाइन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से चुना जाएगा। वार्डवार मानिटरिंग संबंधित जेडएचओ के माध्यम से होगी। हर वार्ड में अलग ठेकेदार की जगह अब एक सेंट्रलाइज्ड ठेका होगा, जिसमें पापुलेशन और वार्ड वाइज सफाई प्लान तैयार किया जाएगा। निगम प्रशासन की चुनौती वर्तमान में नगर निगम हर महीने लगभग 7 करोड़ रुपये 70 वार्डों की सफाई के एवज में अलग-अलग ठेका एजेंसियों को भुगतान करता है। इसके बावजूद कई वार्डों में सफाई पर्याप्त नहीं हो पा रही थी। इस समस्या का समाधान करने के लिए अब केंद्रीकृत सिस्टम लागू किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था से शहरवासियों को साफ-सुथरी गलियां, व्यवस्थित सफाई और बेहतर सार्वजनिक सुविधा उपलब्ध होगी। निगम प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में सेंट्रलाइज्ड टेंडर प्रक्रिया पूरी कर नई प्रणाली लागू कर दी जाएगी। सेंट्रलाइज्ड टेंडर से मिलने वाले फायदे     कर्मचारी को 8 घंटे ड्यूटी करनी होगी और हाजिरी लगाना अनिवार्य होगा।     सफाईकर्मी एक समान वर्दी पहनेंगे, जिससे पहचान आसान होगी।     सफाई के लिए स्पष्ट रूट चार्ट तैयार होगा।     ठेका एजेंसी के काम में मनमानी और गड़बड़ी पर रोक लगेगी।     10 जोन के 70 वार्ड पूरे शहर में एक ही एजेंसी कवर करेगी।     भुगतान में पारदर्शिता और मानिटरिंग में आसानी होगी।

रेलवे स्टेशनों पर बैटरी गाड़ियों के खिलाफ कुलियों का हल्ला, राजनीतिक समर्थन भी साथ

रायपुर रायपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए बैटरी चलित वाहन शुरू करने के फैसले के खिलाफ कुलियों का विरोध नहीं थम रहा है. इस कदम को अपनी आजीविका पर बड़ा संकट बताते हुए बड़ी संख्या में कुलि आज प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर लामबंद हुए. रेलवे लाइसेंसी पोर्टर्स के बैनर तले कुली प्रदर्शन कर रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे कुलियों का कहना है कि रेलवे में आधुनिकीकरण और निजीकरण के कारण उनकी आजीविका पर भीषण संकट मंडरा रहा है. महंगाई के दौर में उनकी सीमित आमदनी से परिवार का पालन-पोषण करना लगभग असंभव हो गया है. रेलवे ने कुलियों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई आदेश जारी किए थे, जैसे उनके बच्चों को रेलवे विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा, परिवार के सदस्यों के लिए निःशुल्क चिकित्सा व्यवस्था, प्रतिवर्ष चार वर्दी प्रदान करना और आधुनिक सुविधाओं से युक्त विश्रामालय उपलब्ध कराना. ये सभी प्रावधान अभी तक जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाए हैं. विशेष रूप से रायपुर मंडल में कुलियों की उपस्थितिऔर स्टेशनों पर बैटरी चालित वाहनों की निःशुल्क सेवा उपलब्ध होने के बावजूद सामान ढोने का ठेकेदारी कार्य एक निजी कंपनी को सौंप दिया है—प्रति यात्री 50 रुपये तथा प्रति लगेज 30 रुपये की दर से. यह कुलियों की आजीविका का हनन है. गौरतलब है कि रेल्वे लायसेंसी पोर्टर्स मजदूर सहकारी संस्था मर्यादित, रायपुर ने 22 सितंबर को मंडल रेल प्रबंधक को ज्ञापन दिया था. जिसमें उन्हें आश्वसन मिला था कि उनके हितों का ध्यान रखा जाएगा, लेकिन कुछ घण्टों बाद बताया गया कि निविदा निरस्त हो सकती है. उन्होंने मांग की है कि निविदा को निरस्त कर कुलियों के रोजी-रोजगार को बचाने की व्यवस्था की जाए. नहीं तो जिस प्रकार 2003 में कुलियों को रेलवे में समायोजित किया गया था, उसी प्रकार पुनः किया जाए. छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी की एंट्री कुलियों ने बताया कि वह आगे की लड़ाई छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के साथ मिलकर लड़ेंगे. ज्ञापन, प्रेस वार्ता, धरना, शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे.

86 किलो चांदी का पर्दाफाश : सारफा कारोबारी ने खुद बुना जाल

 रायपुर राजधानी रायपुर के सदर बाजार इलाके में शुक्रवार रात सराफा कारोबारी राहुल गोयल द्वारा बताई गई 86 किलो चांदी की लूट की कहानी झूठी निकली। पुलिस की सख्त पूछताछ में कारोबारी ने खुद स्वीकार किया कि उसने यह पूरा नाटक अपने आनलाइन सट्टे में 46 लाख रुपये गंवाने के बाद रचा था। ऑनलाइन सट्टे में गंवाए लाखों, बनाई लूट की कहानी पुलिस जांच में राजफाश हुआ कि कारोबारी राहुल गोयल (निवासी अलीगढ़, यूपी) अप्रैल से आनलाइन क्रिकेट सट्टे में लगातार रकम हार रहा था। अब तक उसने करीब 46 लाख रुपये सट्टे में गंवा दिए थे। पैसे की भरपाई के लिए उसने अपनी कंपनी को धोखा देने की योजना बनाई। राहुल रायपुर में शिवा ट्रेडर्स के नाम से फर्म चलाता है, जो आगरा की एक बड़ी कंपनी के लिए सीएफए (क्लियरिंग एंड फारवर्डिंग एजेंट) का काम करता है। 86 किलो चांदी की ‘लूट’ की झूठी कहानी राहुल ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि शुक्रवार रात तीन बजे दो नकाबपोश बदमाशों ने उसके घर में धावा बोलकर 86 किलो चांदी के जेवर लूट लिए। उसने बताया कि बदमाशों ने कट्टा तानकर और चाकू दिखाकर उसे बंधक बना लिया, मुंह दबाकर बेहोश कर दिया और डीवीआर भी साथ ले गए। लेकिन पुलिस जांच में न कोई फिंगरप्रिंट मिले, न रस्सी के निशान और न ही जबरन प्रवेश के सबूत। पूछताछ में खुली पोल पुलिस की क्राइम ब्रांच, एफएसएल टीम और वरिष्ठ अधिकारियों ने जब कारोबारी से देर रात तक पूछताछ की, तो वह बार-बार बयान बदलता रहा। जब सख्ती बढ़ी, तो आखिरकार राहुल टूट गया। उसने स्वीकार किया कि उसने लूट की झूठी कहानी खुद गढ़ी थी, ताकि कंपनी को माल की रकम लौटाने से बच सके। पुलिस ने पाया कि अपार्टमेंट का सीसीटीवी कैमरा कई दिनों से खराब था। यह बात लुटेरों को कैसे पता चली? इस पर भी सवाल खड़े हुए। चांदी बेची, नुकसान छिपाने की कोशिश जांच में सामने आया कि राहुल ने दीवाली के लिए आगरा से 200 किलो चांदी रायपुर मंगाई थी। इसमें से 100 किलो चांदी वापस भेज दी, 14 किलो बेच चुका था, और 40 लाख रुपये की चांदी निजी तौर पर बेचकर उसका पैसा सट्टे में हार गया। बचे हुए 86 किलो की लूट की झूठी कहानी बनाकर वह कंपनी को धोखा देना चाहता था। सट्टा खिलाने वालों पर कब होगी कार्रवाई? इस पूरे मामले ने आनलाइन सट्टे के बढ़ते नेटवर्क पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब पुलिस, ईडी और सीबीआइ जैसी एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं, तब भी ऐसे सट्टा रैकेट कैसे फल-फूल रहे हैं?। फिलहाल पुलिस ने आगरा के संबंधित कारोबारियों को रायपुर बुलाया है और पूछताछ जारी है।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री बोले: अधर्म के खिलाफ संघर्ष करना सबसे बड़ा धर्म

रायपुर मंदिर जाना, पूजा-पाठ करना, कथा-भागवत करना-कराना ही सिर्फ धर्म नहीं है। अधर्म के विरुद्ध आवाज उठाना ही सबसे बड़ा धर्म है। मैं हमेशा अधर्म के खिलाफ आवाज उठाता हूं। घटना चाहे प्रदेश में हो या देश में हो, अधर्म के खिलाफ टिप्पणी करता हूं। ये बातें कुछ विधर्मियों को नहीं पचती हैं, इसलिए मेरे खिलाफ कुछ न कुछ अफवाह फैलाते हैं। मैं किसी धर्म का विरोध नहीं करता। मैं तो सिर्फ सनातन धर्म का समर्थन करता हूं। ये बातें बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कही। गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में शनिवार से पांच दिवसीय हनुमंत कथा की शुरुआत हुई है। मंगलाचरण करने के बाद पं. शास्त्री ने कहा कि बड़े भाग्य से मनुष्य तन मिलता है। उसमें भी भारत जैसा वतन मिला और सनातन जैसा धर्म। पाकिस्तान में जन्म होता तो बम बनाते, कथा सुनने का मौका नहीं मिलता। चीन वालों को देखो तो लगता है कि ब्रह्माजी ने सबको फोटोकापी बना दिया है। 84 लाख योनियों के बाद मनुष्य का तन मिलता है। इसको सार्थक बनाओ। सनातन धर्म में जन्म लेने के बाद भी कथा न सुन पाओ, इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं हो सकता है। रामजी की कृपा के बिना सत्संग में नहीं आ सकते हैं। कथा सुनने आ गए ये महत्वपूर्ण नहीं है। इससे भी महत्वपूर्ण है कि कथा को आत्मा में बैठाना चाहिए। जीवन को ठीक करना है तो कथा सुननी चाहिए। कथा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, आयोजक बसंत अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

छत्तीसगढ़: रायपुर-फर्जी राशन कार्ड की रेस में आगे, दुर्ग भी पीछे नहीं

रायपुर छत्तीसगढ़ में राशन कार्डों का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें रायपुर राजधानी 19,574 फर्जी राशन कार्ड के साथ पहले और दुर्ग 18,112 के साथ दूसरे नंबर पर है। वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत तैयार आंकड़ों की जांच में पता चला कि 46 लाख से अधिक सदस्य संदिग्ध हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की है, जिन्होंने डुप्लीकेट आधार कार्ड, मृत व्यक्तियों के नाम और फर्जी दस्तावेजों से राशन कार्ड में सदस्य जोड़ रखे थे। खाद्य विभाग की ओर से शुरू किए गए भौतिक सत्यापन अभियान में अब तक 1 लाख 93 हजार 67 फर्जी सदस्य चिन्हांकित कर उनके नाम काट दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि यह कार्रवाई राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बेहद अहम है। जिलावार तस्वीर, रायपुर टॉप पर रायपुर में सबसे ज्यादा में 19,574 फर्जी सदस्य उजागर हुए हैं। दुर्ग में 18,112, जांजगीर-चांपा में 17,529, राजनांदगांव में 17,327 और कोरबा में 16,064 भी गड़बड़ी वाले शीर्ष जिलों में शामिल हैं। सरगुजा में 15,626, बलौदाबाजार में 13,833, महासमुंद में 13,308, धमतरी में 10,937 और कवर्धा में 9,987 में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। दूसरी ओर गरियाबंद में 7,027 और कांकेर में 7,669 ऐसे जिले रहे, जहां अपेक्षाकृत कम फर्जी सदस्य मिले। जशपुर में 9,727, बालोद 8,925 और बेमेतरा 8,641 में भी गड़बड़ी सामने आई। सबसे ज्यादा फर्जी सदस्य     रायपुर -19,574     दुर्ग – 18,112     जांजगीर-चांपा – 17,529     राजनांदगांव -17,327     कोरबा -16,064 अभी और हटेंगे 53 हजार नाम जांच टीम के मुताबिक अभी करीब 53 हजार संदिग्ध सदस्यों की जांच बाकी है। इनमें मृतक, पलायन कर चुके लोग और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े सदस्य शामिल हैं। इनके सत्यापन के बाद नाम निरस्त कर दिए जाएंगे। सबसे कम फर्जी सदस्य     गरियाबंद -7,027     कांकेर -7,669     बेमेतरा -8,641     बालोद -8,925     जशपुर -9,727 कैसे हो रही जांच खाद्य विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि जिन परिवारों का ई-केवाईसी पूरा नहीं हुआ है, उनका घर-घर भौतिक सत्यापन कराया जाए। इसके लिए पटवारी, पंचायत सचिव, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और आशा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है। यदि कोई सदस्य गलत या अपात्र पाया जाता है तो उसका नाम तत्काल हटाया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि 31 अक्टूबर तक सभी जिलों का सत्यापन पूरा कर लिया जाए।