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Ram Mandir Donation Theft Case: CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तत्काल सुनवाई से किया इंकार

अयोध्या अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आखिर इस मामले में इतनी जल्द सुनवाई की आवश्यकता क्या है। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है, इसलिए नियमित सुनवाई अवकाश समाप्त होने के बाद ही संभव होगी। ऐसे में मामले की सुनवाई 12 जुलाई के बाद होने की संभावना है। यह याचिका अधिवक्ता अनूप अवस्थी की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के धन और मंदिर में आए चढ़ावे के उपयोग में अनियमितताएं हुई हैं। याचिका में सीबीआई जांच की मांग याचिकाकर्ता ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि मामले की जांच सीबीआई अधिकारी की अगुवाई में गठित विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो सके। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच आवश्यक है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने केवल तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार करने से इनकार किया है। अब अवकाश समाप्त होने के बाद नियमित पीठ के समक्ष इस याचिका पर सुनवाई होगी। तब तक मामले में सीबीआई जांच या एफआईआर दर्ज करने को लेकर कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया गया है।याचिका कर्ता ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दाखिल की है. याचिका दाखिल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि मामले में लगे आरोप काफी गंभीर हैं, ऐसे में जल्द सुनवाई होना जरूरी है. शख्स ने कहा कि जिस तरह से प्रशासन का रवैया रहा है, वह भी कई तरह के सवाल खड़े करता है. याचिकाकर्ता ने कहा कि जल्द सुनने की जरूरत इस वजह से भी है, क्योंकि सबूत के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी हुई है।  सात अभियुक्तों के ठिकानों पर रेड आपको बता दें इस मामले में पुलिस ने रविवार को आठ में से सात अभियुक्तों के ठिकानों पर सुबह से देर शाम तक ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान आरोपियों की संपत्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर उन्हें जब्त किया। पुलिस इनकी जांच कर संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल करेगी। साथ ही इनके घरों से कुछ सोने-चांदी के गहने, सिक्के और नकदी भी बरामद की है। लगातार कार्रवाई के बीच पुलिस ने घर और अन्य ठिकानों पर मिले परिजनों से कई-कई घंटे पूछताछ की। टीमें देर शाम खबर लिखे जाने तक विभिन्न ठिकानों पर जांच व तलाशी अभियान में जुटी रहीं। विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में गठित छह टीमों ने सुबह करीब सात बजे अभियान शुरू किया। सभी टीमों के साथ एक-एक लेखपाल और महिला पुलिस कर्मी खासतौर पर रहे। इस दौरान आरोपी रामशंकर यादव ‘टिन्नू’, मनीष यादव, अविनाश शुक्ल, लवकुश मिश्र, अनुकल्प मिश्र, रमाशंकर मिश्र, करुणेश पांडेय के परिजनों से लंबी पूछताछ भी की गई। संतों को नौकरशाही का दखल मंजूर नहीं राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण को लेकर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग के बीच सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की नियुक्ति की मंदिर निर्माण समिति चेयरमैन और ट्रस्ट के पदेन सदस्य नृपेन्द्र मिश्र ने हिमायत की है। उनके इस सुझाव को संत समाज ने अस्वीकार्य ही नहीं बल्कि ध्वनि मत से विरोध का प्रस्ताव भी पारित कर दिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अध्यक्ष और मणिराम छावनी पीठाधीश्वर महंत नृत्यगोपाल दास के 88वें जन्मोत्सव समारोह के अंतिम दिन देश भर से आए संतों के बीच यह प्रस्ताव रामकथा के व्यास पीठ से मुख्य वक्ता और आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने रखा।

Ram Mandir Trust: भर्ती में गड़बड़ी मिली तो नहीं मिलेगी राहत, सिफारिश वाले कर्मचारियों पर ट्रस्ट सख्त

 अयोध्या अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच जारी है जो हर दिन नए मोड़ ले रही है. इस सब के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है. सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने उन कर्मचारियों की नियुक्तियों की समीक्षा शुरू कर दी है, जिन्हें निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के बजाय सिफारिश के आधार पर नियुक्त किया गया था. जांच में यदि किसी नियुक्ति में नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।  नियुक्तियों की प्रक्रिया जांच के दायरे में बताया जा रहा है कि यह फैसला हाल ही में सामने आए कथित दान चोरी प्रकरण के बाद लिया गया है. इस मामले के बाद ट्रस्ट अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई स्तरों पर समीक्षा कर रहा है. इसी क्रम में नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाई गई है।  सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में सभी नियुक्तियां केवल तय नियमों और निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुसार ही हों. इसके लिए पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और यह देखा जा रहा है कि किन कर्मचारियों की भर्ती नियमानुसार हुई तथा किन मामलों में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।  सिफारिश से भर्ती कर्मचारियों की जांच जानकारी के मुताबिक, ट्रस्ट उन सभी नियुक्तियों का ब्योरा जुटा रहा है, जिन पर सिफारिश या अन्य माध्यमों से भर्ती किए जाने के आरोप लगे थे. यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों को सेवा से हटाने सहित अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।  ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का मानना है कि राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय महत्व के धार्मिक स्थल के संचालन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. इसी उद्देश्य से प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह नियमबद्ध बनाने पर जोर दिया जा रहा है।  हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है. लेकिन माना जा रहा है कि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे इन कदमों को मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने और व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। 

अयोध्या प्रकरण में नया मोड़: इस्तीफों की पुष्टि के बाद ट्रस्ट की पारदर्शिता पर विवाद गहराया

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे सवाल यही है कि सबूत सुरक्षित हैं या नहीं? शनिवार को तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के त्यागपत्र की पुष्टि के बाद घटनाक्रम की समयरेखा को देखें तो कई ऐसे बिंदु सामने आते हैं, जिन पर जवाब अब भी बाकी हैं। एफआईआर होने तक सभी आठ आरोपी भी मंदिर में पहले जैसे ही आते-जाते रहे। अंदर उनसे काम लिया जा रहा था या नहीं, इसकी भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। सवाल उठता है कि मंदिर के अंदर किसी की निगरानी थी या नहीं या जो कठघरे में हैं उन्हीं के हवाले छोड़कर सभी मौन हैं। चंपत राय ने क्यों कहा- कुछ उल्लेखनीय नहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, विशेषकर महामंत्री चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा को कथित अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, तो सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने या जांच की पहल करने में देरी क्यों हुई। अखिलेश यादव के बयान के बाद चंपत राय ने वीडियो जारी कर यहां तक कहा था कि ट्रस्ट में नियमित ऑडिट होता है। कोई उल्लेखनीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है। मगर अब रुपयों की बरामदगी और गिरफ्तारी ने साफ कर दिया कि गड़बड़ी तो थी। जांच के दौरान भी आरोपी कार्य करते रहे ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रारंभिक स्तर पर सब कुछ सामान्य था तो एसआईटी जांच की आवश्यकता क्यों महसूस हुई। जांच की निष्पक्षता को लेकर भी विपक्ष और कई सामाजिक कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि एसआईटी गठन से लेकर एफआईआर दर्ज होने तक जिन आठ कर्मचारियों पर आरोप लगे, वे अपने पदों पर कार्यरत रहे। साथ ही ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी भी अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे। 23 जून को आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में भी संबंधित पदाधिकारी व्यवस्थाओं की कमान संभालते दिखाई दिए। राम भक्तों का विश्वास बनाए रखने की चुनौती यहीं से एक और महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है-क्या जांच शुरू होने और एफआईआर दर्ज होने के बीच संबंधित लोगों की संस्थान तक निरंतर पहुंच से संभावित साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका थी। फिलहाल इसका कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है और न ही एसआईटी या सरकार ने ऐसा कोई निष्कर्ष जारी किया है। अब इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी चुनौती केवल दोषियों को सजा दिलाने की नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के विश्वास को बनाए रखने की है। आने वाले दिनों में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया ही तय करेगी कि कथित हेराफेरी की वास्तविक जिम्मेदारी किस पर है और क्या जांच के दौरान साक्ष्यों की सुरक्षा तथा ट्रस्ट की भूमिका पर उठे सवालों के संतोषजनक उत्तर मिल पाते हैं। 24 घंटे में बदली तस्वीर, पहले इनकार, फिर इकरार राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में आठ आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद अगले 24 घंटे में घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला कि अयोध्या से लेकर देशभर में इसकी चर्चा होने लगी। शुक्रवार दोपहर अचानक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, लेकिन शुरुआत में ट्रस्ट से जुड़े लगभग हर व्यक्ति ने इससे इनकार किया। गोपाल राव का प्रचार माध्यम पर निशाना कारसेवकपुरम से लेकर कार्यशाला तक मौजूद सेवादारों का कहना था कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यह भी बताया गया कि चंपत राय पूरे दिन कारसेवकपुरम स्थित अपने आवास 'भरत कुटी' से बाहर नहीं निकले। ट्रस्ट के व्यवस्था प्रभारी गोपाल राव ने भी मुस्कुराते हुए कहा, ‘प्रचार माध्यमों को देखकर लगता है कि ये लोग चंपत राय जी का इस्तीफा लेकर ही मानेंगे।’ उनके इस बयान के बाद भी अटकलों का दौर थमा नहीं। उधर सोशल मीडिया पर इस्तीफे की चर्चा लगातार तेज होती गई। अयोध्या में लोग एक-दूसरे को फोन कर इसकी पुष्टि करने की कोशिश करते रहे। विपक्षी दलों ने भी इसे मुद्दा बनाते हुए सोशल मीडिया पर सरकार और ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया। नासिक से सबसे पहले इस्तीफे की पुष्टि सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने इसे बड़े स्तर की कार्रवाई की शुरुआत बताते हुए दावा किया कि अब ‘बड़ी मछलियों’ पर भी कार्रवाई तय है। इसके बावजूद न तो ट्रस्ट और न ही विश्व हिंदू परिषद की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई। करीब 24 घंटे बाद शनिवार को घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। नासिक में मौजूद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरी ने कुछ पत्रकारों के व्हाट्सएप संदेशों का जवाब देते हुए चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र की पुष्टि कर दी। इस्तीफे के बाद सोना-चांदी के सुरक्षित होने का दावा इसके तुरंत बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। प्रेस विज्ञप्ति में केवल इस्तीफों की पुष्टि ही नहीं की गई, बल्कि पहली बार यह भी स्पष्ट किया गया कि रामलला को समर्पित चांदी की ईंटें, सोना-चांदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान समर्पण सुरक्षित हैं तथा उनका पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध है। इस तरह महज 24 घंटे में इनकार से आधिकारिक पुष्टि तक का घटनाक्रम पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।

राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: सभी आरोपियों के ठिकानों पर छापे, पुलिस करेगी कस्टडी रिमांड की मांग

अयोध्या अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. इस केस की जांच कर रही टीमों ने रविवार को अयोध्या में रहने वाले सभी आरोपियों के घरों पर छापेमारी की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अपनी जांच में तेजी ला रही है, ताकि इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों का पूरी तरह खुलासा हो सके. पुलिस इस मामले के हर एक पहलू को गहराई से देख रही है, जिससे सच्चाई सामने आ सके. जांच टीम ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए अयोध्या में रहने वाले आरोपियों के घरों पर कार्रवाई की है. पुलिस की अलग-अलग टीमें अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, करुणेश पांडे और रमा शंकर मिश्रा के घर पहुंचीं. इन सभी ठिकानों पर पुलिस पूरी बारीकी से तलाशी ले रही है, ताकि केस से जुड़े अहम सबूत जुटाए जा सकें. जांच टीमें एक-एक घर के कोने खंगाल रही हैं ताकि कोई भी सबूत छूटने न पाए. दो नाम छोड़कर बाकी सभी के परिवारों से पूछताछ कार्रवाई के दौरान लोकल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस इन आरोपियों के परिवार के सदस्यों से कड़ी पूछताछ कर रही है. हालांकि, जांच टीम सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और प्रतापगढ़ के रहने वाले अविनाश शुक्ला को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों के परिजनों से सवाल-जवाब करने में जुटी है. साथ ही पुलिस आस-पड़ोस में रहने वाले लोगों से भी इन आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है. पुलिस यह जानना चाहती है कि इन लोगों की गतिविधियां पिछले कुछ समय में कैसी रही हैं. इस मामले की गहराई से जांच कर रही टीमें सिर्फ चोरी की कड़ियों को ही नहीं जोड़ रहीं, बल्कि आरोपियों की कमाई के जरियों का भी पता लगा रही हैं. अपराध के जरिए जो पैसा या संपत्ति जुटाई गई है, उसके सोर्स को ट्रेस किया जा रहा है. आरोपियों के पास मौजूद संपत्तियां कहां से आईं और उनके पास फंड कहां से आ रहा था, इसकी पूरी हिस्ट्री निकाली जा रही है. पुलिस बैंकों के खातों और लेन-देन की भी जांच कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि पैसे को कहां-कहां भेजा गया या किस काम में इस्तेमाल किया गया. इस मामले में गिरफ्तार किए गए ये सभी आरोपी राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और कैश को गिनने के काम से जुड़े हुए थे. जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि इन्होंने वहीं से पैसों का हेरफेर किया. जांच टीमों ने अब तक इस मामले में करीब 79 लाख 85 हजार रुपये बरामद कर लिए हैं. इस मामले में पुलिस ने चोरी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया है. यह बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई तीन सदस्यों की SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है. कोर्ट ने दो दिन पहले ही सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक के लिए जेल भेजा था. पुलिस सोमवार को इन सभी आरोपियों को दोबारा कोर्ट में पेश करेगी. मामले की कड़ियों को जोड़ने और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस अदालत से इन सभी की कस्टडी रिमांड मांगेगी, ताकि बाकी की रकम और संपत्ति का भी पता लगाया जा सके.

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा घटनाक्रम, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि

 अयोध्या उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रभु श्री राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद ने अब तक का सबसे बड़ा रूप ले लिया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास (ट्रस्ट) के महामंत्री चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. पिछले कई दिनों से चल रही सियासी और धार्मिक बयानबाजी के बीच, ट्रस्ट ने खुद आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन दोनों बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफे प्राप्त होने की पुष्टि की है।  आगामी बैठक में होगा इस्तीफे पर अंतिम फैसला ट्रस्ट की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर परिसर में सुनी जा रही अप्रिय और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से पूरा न्यास स्तब्ध, आहत और अत्यंत दुखी है. समस्त रामभक्तों और रामसेवकों के प्रतिनिधि के रूप में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. न्यास ने स्पष्ट किया है कि महामंत्री चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्र से त्यागपत्र प्राप्त हो चुका है, जिस पर न्यास अपनी आगामी बैठक में विचार कर अंतिम निर्णय लेगा।  चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित अफवाहों पर विराम लगाते हुए और देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए ट्रस्ट ने कहा कि जिन भक्तों ने प्रभु श्री राम की सेवा में चांदी की ईंटें, सोने के आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तुएं न्यास के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से सौंपी थीं, वे सभी वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका एक-एक पैसे का पूरा हिसाब उपलब्ध है।  दानपात्र चोरी मामले में FIR दर्ज वहीं, मंदिर के दानपात्रों से राशि गायब होने की घटना को लेकर ट्रस्ट ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के विशेष जांच दल (SIT) से एक अंतरिम प्रतिवेदन (प्रारंभिक रिपोर्ट) प्राप्त हुई है. इस रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट के निवेदन पर पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक FIR दर्ज कर ली गई है और दोषियों के खिलाफ वैधानिक व कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी है।  भ्रामक अफवाहों से बचने की अपील प्रेस विज्ञप्ति के अंत में ट्रस्ट ने बेहद कड़े शब्दों में कहा है कि कुछ असामाजिक, अधार्मिक और स्वार्थी तत्व इस पूरे विवाद की आड़ में सनातन धर्म पर लांछन लगाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।  ट्रस्ट ने सभी रामभक्तों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर प्रसारित की जा रही भ्रामक और निराधार अफवाहों से स्वयं बचें और समाज के अन्य लोगों को भी इसका शिकार होने से बचाएं. ट्रस्ट को पूरा विश्वास है कि विवाद के ये बादल जल्द छटेंगे और सत्य का प्रकाश सबके सामने आएगा। 

Exclusive: राम मंदिर को दान की गई चांदी की ईंटें कहां हैं? SIT जांच में हुआ बड़ा खुलासा

राम मंदिर को दान की गई चांदी की ईंटों पर खुलासा अयोध्या के राम मंदिर में दान की गई चांदी की ईंटों को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे थे. कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि मंदिर को दान में मिली चांदी की ईंटों का कोई हिसाब नहीं है और उनका पता नहीं चल रहा. लेकिन अब इस पूरे मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है।  मिली जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच के दौरान एसआईटी ने चांदी की ईंटों से जुड़े सभी रिकॉर्ड की भी जांच की. जांच में पाया गया कि सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे कई दावे और आरोप रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते. खासतौर पर अनुराग रस्तोगी द्वारा दान की गई चांदी की ईंटों को लेकर किए गए दावों को जांच में सही नहीं पाया गया।  एसआईटी के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अभिलेखों में चांदी के दान का पूरा विवरण दर्ज है. रिकॉर्ड के मुताबिक, पहली बार 21 जुलाई 2020 और 28 जुलाई 2020 के दौरान कुल 38 किलोग्राम चांदी दान में हासिल हुई थी. इसके बाद 29 जुलाई 2020 को 25.576 किलोग्राम चांदी की ईंटें ट्रस्ट को दान में मिलने का भी पूरा रिकॉर्ड मौजूद है।  चांदी की ईंटें बैंक लॉकर में सुरक्षित जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि दान में मिली इन चांदी की ईंटों को कहीं गायब नहीं किया गया. एसआईटी के मुताबिक, ट्रस्ट की तय प्रक्रिया के तहत इन चांदी की ईंटों को गलाकर सुरक्षित रूप में बैंक के लॉकर में रखवा दिया गया है. यानी सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोप कि चांदी की ईंटें लापता हैं, जांच में फर्जी साबित हुए।  हालांकि, चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला अभी भी जांच के दायरे में है. इस मामले में एसआईटी की सिफारिश पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और आठ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है. इन पर दान राशि की चोरी, आपराधिक साजिश, अमानत में खयानत और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं. पुलिस और एसआईटी दोनों मामले की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही हैं।  चढ़ावे में कैसे हुए घपलेबाजी? सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में कर्मचारियों की निगरानी, कैश काउंटिंग, सीसीटीवी व्यवस्था और दान राशि को मंदिर से बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कई खामियां भी सामने आई हैं. इन्हीं कमियों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है. इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और इसके सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है।  यानी, जहां चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच अभी जारी है, वहीं दान में मिली चांदी की ईंटों को लेकर फैले कई दावों को एसआईटी ने रिकॉर्ड के आधार पर खारिज कर दिया है. जांच एजेंसियों का कहना है कि इस फर्जी दावे मामले में आगे भी सभी सच्चाई की पड़ताल की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।   

Ayodhya News: चंदा चोरी विवाद के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा ने छोड़ा राम मंदिर ट्रस्ट

अयोध्या  राम मंदिर दान प्रकरण में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख का असर साफ देखने को मिला है. राम जन्मभूमि ट्रस्ट के दो सदस्य चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में कठोर संस्तुति के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया. एसआईटी की सिफारिश पर मामले में पहली एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है. इस्तीफों को जांच में हुई कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है ।  सूत्रों के अनुसार, यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद सामने आया है. इससे पहले इसी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पहली एफआईआर दर्ज की गई. एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कई अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।  एसआईटी फिलहाल कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है. जांच एजेंसी आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों, मोबाइल रिकॉर्ड और कथित लेन-देन की पड़ताल में जुटी है. सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ कड़ी सिफारिशें की गई थीं, जिसके बाद जांच की रफ्तार और तेज हुई।  इसी क्रम में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों को भी जांच से जोड़कर देखा जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के संकेत दे चुके हैं. सरकार का कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या जिम्मेदारी तय होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।  फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब अभी आने बाकी हैं. क्या एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में और बड़े खुलासे होंगे? क्या जांच का दायरा और बढ़ेगा? और क्या ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव देखने को मिलेगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच के साथ सामने आएंगे।  चढ़ावे से जुड़े मामले में 8 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ है केस राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी की जांच के बीच गुरुवार को बड़ा कदम उठाया गया. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ. एफआईआर में राम शंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को नामजद किया गया है।  इनके खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज है. सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) को सौंपे जाने के बाद यह कार्रवाई हुई. पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश की जा रही है।  ट्रस्ट से जुड़े कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई है मामले की शिकायत इस पूरे मामले की शिकायत कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई, जो सितंबर 2025 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था. फरवरी 2025 में ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उनकी जगह कृष्ण मोहन का चयन किया गया. हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन ने 1970 के दशक में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई की थी. इसके बाद उन्होंने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में करीब छह वर्ष तक काम किया और फिर भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर महाराष्ट्र कैडर में सेवाएं दीं. साल 2012 में रिटायर होने के बाद वह सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे। 

राम मंदिर को बम से उड़ाने की साजिश नाकाम! संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, पाकिस्तानी नंबरों से संपर्क का खुलासा

अयोध्या  एनआईए और एटीएस ने अयोध्या के राम मंदिर को बम से उड़ाने की साजिश भंड़ाफोड़ किया है। यूपी के संदिग्ध आतंकी को कर्नाटक के दावणगेरे से गिरफ्तार किया है। संदिग्ध आतंकी ने अयोध्या में राम मंदिर को निशाना बनाने की साजिश कबूली है। आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान के नंबर, कुछ संदिग्ध व्हाट्सएप ग्रुप और हथियारों के साथ लिए गए फोटो मिले हैं। आरोपी को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज करके पूछताछ शुरू की गई है। आरोपी के संबंध में यूपी सरकार को भी सूचना भेजी गई है। इसके बाद सहारनपुर में भी छानबीन शुरू की गई है। इससे पहले दिनभर चर्चा रही कि आरोपी शाहजहांपुर का निवासी है। वहां भी कई टीमें दिनभर छानबीन में लगी रहीं। कर्नाटक के दावणगेरे जिले के हरिहर में एनआईए, एटीएस और पुलिस ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गंगोह थाना क्षेत्र के लखनौती गांव के सुहैल को  गिरफ्तार किया। सुहैल फिलहाल हरिहर के पास औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्री में पेंटर के रूप में काम कर रहा था और सामान्य मजदूर की तरह रहकर अपनी पहचान छिपाए हुए था। आरोपी से एटीएस और पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो उसने खुलासा किया कि अयोध्या के राम मंदिर में बम विस्फोट करने की साजिश कर रहे थे। 20 साल के सुहैल के मोबाइल की जांच के दौरान पाकिस्तान का एक नंबर सेव मिला है, जिन्हें राणा बॉय के नाम से सुरक्षित किया गया था। इन नंबरों पर व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से बातचीत की पुष्टि हुई है। आरोपी के मोबाइल गैलरी में हथियारों के साथ खिचवाए गए कुछ फोटो भी मिले हैं, जिन्हें जांच के लिए सुरक्षित किया गया है। सहारनपुर के एसपी ग्रामीण मयंक पाठक ने बताया कि बुधवार शाम कर्नाटक से थाना गंगोह एक फोन कॉल आई थी। कॉल करने वाले अधिकारी ने बताया कि सहारनपुर निवासी सुहेल के संबंध में एक ई-मेल भेजी गई है और उसे कर्नाटक में गिरफ्तार किया गया है। मामले में विस्तृत जानकारी मिलने पर जांच-पड़ताल की जाएगी। सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि किसी एजेंसी की ओर से सहयोग मांगा जाता है तो स्थानीय पुलिस आवश्यक कार्रवाई करेगी। ऐसे बनाई धमाकों की साजिश सुहैल ने खुलासा किया कि उसके साथ कई अन्य लोग भी साजिश में शामिल हैं। इन सभी लोगों को पाकिस्तान से ही निर्देश मिल रहे थे और अयोध्या के राम मंदिर में धमाकों की साजिश की जा रही थी। पता किया जा रहा है कि सुहैल के अलावा अन्य कौन कौन इस साजिश में शामिल है। माना जा रहा है कि स्लीपर सेल का इस्तेमाल इस काम के लिए किया जा रहा है। आरोपी के मोबाइल की जांच में ये भी खुलासा हुआ कि वह मैमन जट और राणा भाई संगठन का सक्रिय सदस्य है। दावणगेरे के पुलिस अधीक्षक शेखर एच. टेक्कनवार ने बताया कि आरोपी सुहैल व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी मूल के व्यक्तियों के संपर्क में था। ये भी बताया कि इससे पहले चार जून को भी तुमकुरु और दावणगेरे जिलों से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो पाकिस्तानी मूल के संदिग्ध आरोपियों के संपर्क में थे। एडीजी भानु भास्कर के अनुसार कर्नाटक पुलिस ने एक संदिग्ध आतंकी सुहेल की गिरफ्तारी की सूचना भेजी है। सूचना के बाद यूपी एटीएस और एसटीएफ इस प्रकरण में स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में लगी है। युवक के गांव और उससे संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है।

PMO ने मांगा राम मंदिर चंदे का ब्योरा, ट्रस्ट ने कहा- मामला जांच के दायरे में

अयोध्या अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे में हेराफेरी व चोरी मामले अब नया खुलासा हुआ है.  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जिला प्रशासन को संदर्भित पत्र पर एसआइटी जांच का हवाला देते हुए वित्तीय जानकारी देने से इन्कार कर दिया है।  प्रधानमंत्री कार्यालय ने अयोध्या के स्थानीय बीजेपी नेता रजनीश सिंह के द्वारा लिखे गए पत्र पर जब जिला प्रशासन ने राममंदिर ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी तो  जांच का हवाला देकर ट्रस्ट ने आए हुए संपत्ति का विवरण देने से मना कर दिया।  बीजेपी नेता रजनीश सिंह ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन चंदा चढ़ना और जमीन खरीद फरोख्त में गड़बड़ियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. रजनीश सिंह ने पीएमओ से मांग की थी कि मंदिर ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अब तक के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करे।   बीजेपी नेता ने पीएमओ से की शिकायत राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर बीजेपी के स्थानीय नेता डा. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यलय को दो बार पत्र लिखा. रजनीश सिंह ने पहली बार नौ जून को प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था।  उन्होंने मांग की थी कि मंदिर ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अपनी शुरुआत से लेकर अब तक के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे. इसके बाद दूसरी बार उन्होंने 12 जून को एक और पत्र लिखकर राम मंदिर के चढ़ावा को सार्वजनिक करने की मांगी की. 13 जून को एसआईटी गठित कर दी गई थी।  पीएमओ ने मांगा ट्रस्ट के चंदे का हिसाब बीजेपी नेता के पत्र को संज्ञान में लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यलय (पीएमओ) ने जिला प्रशासन को संदर्भित किया.  पीएमओ को मिली शिकायत के लिए अयोध्या जिला प्रशासन को भेजा गया था. जिला प्रशासन ने इस मामले को लेकर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट से संपर्क किया।   सूत्रों की मुताबिक 23 जून को अयोध्या के एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को लिखे एक पत्र में एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने पीएमओ द्वारा शिकायत में मांगी गई जानकारी के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के चंपतराय से संपर्क किया था।  चंपत राय ने नहीं दिया चंदे का हिसाब  अयोध्या एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी के मुताबिक चंपत राय ने यह कहकर कुछ भी जानकारी देने से मना कर दिया कि फिलहाल एसआईटी जांच चल रही है  और जांच पैनल सभी जरूरी रिकार्ड और जानकारी इकट्ठा कर रहा है.  इसीलिए अभी मांगी गई जानकारी नहीं दी जा सकती।  पीएमओ को बीजेपीके  नेता रजनीश सिंह के द्वारा भेजी गई शिकायत में कई जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी. इनमें 'समर्पण निधि' अभियान के जरिए इकट्ठा किए गए कोष, अलग-अलग तरीकों से मिले दान, सोना, चांदी और गहनों के रूप में मिले योगदान, बैंक खाते और वित्तीय लेन-देन, जमीन की खरीद-बिक्री, मंदिर निर्माण और प्रशासन पर खर्च, और आडिट व निरीक्षण रिपोर्ट शामिल हैं।   

राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला: चढ़ावा गिनने वाले कर्मियों की वर्दी से हटेंगी जेबें

अयोध्या  यूपी के अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की SIT जांच के बीच अनुबंध का कड़ाई से अनुपालन हो रहा है। वहीं, जांच के दायरे में आए कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने के साथ ही बैंक प्रबंधन ने गणना कर्मियों के लिए सख्त ड्रेस कोड लागू कर दिया है। अब कर्मियों को बिना जेब वाली वर्दी पहननी होगी। राममंदिर भवन निर्माण समिति चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने एक टीवी इंटरव्यू में सीधे तौर पर बैंक प्रबंधन को ज़िम्मेदार बताया था। उनका कहना था कि जब बैंक के साथ अनुबंध में साफ-साफ नियम बनाए गए तो गणना कर्मियों ने अनदेखी क्यों की। बताया जाता है कि बड़े क्लाइंट की वजह से बैंक ने बनारस की आउटसोर्सिंग करने वाली कंपनी से श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को कर्मचारी उपलब्ध कराए गए। उनके सैलरी भी उसी कंपनी के जरिए दिलवाए गए। सूत्रों की मानें तो 90 फीसदी नियुक्तियां ट्रस्ट पदाधिकारियों ने प्रभाव का इस्तेमाल कर करवाए। यही नहीं, समय-समय पर नियमों में ढील भी इन्हीं पदाधिकारियों की शह पर मिलते रहे। बैंक के बड़े अफसरों का कहना है कि यह तो अनुबंध तो दोतरफा हुए न कि बैंक ने अपनी ओर से कर्मचारी थोपे। कायदे से बैंक के नियमित कर्मचारी ही इस संवेदनशील कार्य में होने चाहिए। समाज से कटे राम मंदिर के कर्मचारी राम मंदिर से महत्वपूर्ण जानकारियां मीडिया में लीक होने के बाद अब मंदिर प्रशासन इसको लेकर सख्त दिखाई दे रहा है। कर्मचारी अब मंदिर के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दे रहे है। मोबाइल लेकर कर्मचारियों के प्रवेश पर अब पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ में कर्मचारियों के परिजन भी किसी से कोई बातचीत नहीं कर रहे है। इसको एसआईटी के खौफ से जोड़कर देखा जा रहा है। मीडिया से बातचीत पर रोक पिछले कई दिनों से राम मंदिर से जुड़ी कई जानकारियां मीडिया को मिल रही है। राम मंदिर प्रशासन महत्वपूर्ण गोपनीय जानकारियां कहां से मीडिया को मिल रही है, इसका पता नहीं कर पा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अब इसको लेकर मंदिर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। इसके बाद अब कर्मचारियों को मीडिया से बातचीत करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस कारण से राममंदिर के बारे कुछ भी बोलने से कर्मचारी बच रहे हैं। कर्मचारी नहीं उठा रहे फोन पहले जो कर्मचारी कभी कभार फोन उठा लेते थे, उन्होंने फोन उठाना पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके साथ कर्मचारियों ने परिजनों को भी मीडिया अथवा अपरिचित व्यक्ति से कोई भी बात करने से मना कर दिया है। इसका असर सोमवार को दिखाई दिया। राममंदिर के किसी भी कर्मचारी को फोन करने पर वह तुरंत इसे काट दे रहा है। मीडिया से बात करने पर उसे खुद के एसआईटी की पूछताछ के दायरे में आने की आशंका लग रही है। दूसरी तरफ एसआईटी जांच को लेकर कर्मचारियों को विभिन्न आशंका सता रही है। अगर पूछताछ के दायरे में आते हैं, तो वह किस तरह से पक्ष रखें। मामले में लगातार नए-नए तथ्य रोज सामने आ रहे है। ऐसे में पूर्व में कई ऐसी चीजें रही हैं, जो इन कर्मचारियों के आंखों के सामने गुजरी है। खास लोगों से इन्होंने इसकी चर्चा भी की है।