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छत्तीसगढ़ी संस्कृति से प्रभावित दिखे रणदीप हुड्डा, रायपुर में की खुलकर तारीफ

रायपुर बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा रविवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे. रायपुर पहुंचने पर उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए छत्तीसगढ़ी संस्कृति और फिल्मों की खुलकर तारीफ की. एक्टर रणदीप ने कहा कि उन्होंने पहले भी छत्तीसगढ़ एक्सप्लोर किया है. राज्य में तैयार हो रही फिल्में अपनी भाषा और संस्कृति को करीब से जानने का एक माध्यम है. छत्तीसगढ़ की संस्कृति काफी समृद्ध है. लोगों में नक्सली समस्या को लेकर भ्रम था, लेकिन ऐसा नहीं है. छत्तीसगढ़ में काफी डेवलपमेंट हुआ है.   वीर सावरकर सबसे इंस्पायरिंग फिल्म : एक्टर रणदीप एक्टर रणदीप हुड्डा ने अपनी फिल्म वीर सावरकर को लेकर भी बातचीत की. उन्होंने बताया कि कोई भी इंसान अच्छे से अच्छा और बुरे से बुरा किरदार निभा सकता है. अलग-अलग रोल में खुद को ढालना एक बड़ा चैलेंज है. उन्होंने वीर सावरकर फिल्म को उनके जीवन की सबसे प्रेरणादायक फिल्म बताया. रणदीप ने कहा- फिटनेस उनके काम का हिस्सा फिल्म इंडस्ट्री में एक्टर रणदीप अपने गजब के बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर भी चर्चा में रहते हैं. रायपुर में एक्टर ने कहा कि फिटनेस उनके काम का हिस्सा है और इसके लिए लक्ष्य होना जरूरी है. यह शरीर बेशकीमती, इसका ध्यान रखना बेहद जरूरी है. इस दौरान उनके साथ मंत्री राजेश अग्रवाल भी मौजूद थे. रणदीप ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर उन्हें मंत्री राजेश को फिट बनाना हो, तो वह उन्हें कमरे में बंद कर देंगे और खाने के लिए कुछ नहीं देंगे.

रणदीप हुड्डा बने ‘पृथ्वीराज योद्धास’ के सह-मालिक, आर्चरी प्रीमियर लीग में होगी नई पारी की शुरुआत

मुंबई,  बॉलीवुड स्टार रणदीप हुड्डा अपनी पत्नी एवं पूर्व राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज़ लिन लैशराम के साथ अब खेल की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। रणदीप और लिन ने दूरदर्शी लीडर डॉ. विकास गर्ग के साथ मिलकर दिल्ली की टीम 'पृथ्वीराज योद्धास' के को-ओनर्स बनने की घोषणा की है। यह टीम पहली बार आयोजित होने जा रही आर्चरी प्रीमियर लीग (एपीएल ) में हिस्सा लेगी, जो 02 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2025 तक यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित की जाएगी। लिन के लिए यह कदम सिर्फ एक नया बिज़नस नहीं, बल्कि उस खेल में वापसी है जिसने उनके बचपन को दिशा दी। अपने पिता से प्रेरित होकर, जो मणिपुर आर्चरी एसोसिएशन के अध्यक्ष थे, लिन ने दस साल की उम्र में तीरंदाज़ी शुरू की और अपनी पहली सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने टाटा आर्चरी अकादमी में ट्रेनिंग ली, कई मेडल जीते और 1998 में जूनियर नेशनल चैंपियन बनीं। चोट के कारण उन्होंने खेल से दूरी बना ली, लेकिन तीरंदाज़ी के प्रति उनका प्यार कभी खत्म नहीं हुआ। रणदीप हुड्डा ने कहा, तीरंदाज़ी हमेशा से लिन के जीवन का हिस्सा रही है, और अब उन्हें इस खेल में फिर से जुड़ते देखना बेहद सुखद है। हमारा मकसद इन युवा खिलाड़ियों को सपोर्ट करना और भारत में आर्चरी को और करीब लाना है। इस तरह की लीग्स से नए टैलेंट को इंटरनेशनल खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलता है, जिससे भारत का टैलेंट पूल और मज़बूत होता है और हम अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं जीत सकते हैं।" लिन लैशराम ने अपने भाव साझा करते हुए कहा, "आर्चरी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया अनुशासन, धैर्य और दृढ़ता। भले ही मुझे प्रतिस्पर्धात्मक तीरंदाज़ी छोड़नी पड़ी, लेकिन खेल के प्रति मेरा प्यार कभी खत्म नहीं हुआ। अब एक टीम ओनर के रूप में वापसी करना और युवा तीरंदाजों को प्रोत्साहित करना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। मैं चाहती हूं कि और लोग, खासकर लड़कियां, धनुष और बाण उठाएं और इस खेल का आनंद लें।"