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मिडिल ईस्ट के तनाव से रियल एस्टेट प्रभावित, बढ़ सकते हैं घरों के दाम

मुंबई  रियल एस्टेट डेवलपर्स के संगठनों क्रेडाई (Credai) और नारेडको (Naredco) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान के बीच लंबे समय तक चलने वाला युद्ध निर्माण लागत को बढ़ा सकता है. ईंधन और माल ढुलाई की बढ़ती कीमतों के कारण स्टील और टाइल्स जैसी प्रमुख सामग्रियां महंगी हो सकती हैं. जिससे प्रोजेक्ट की समय-सीमा में देरी हो सकती है और घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं।  यह प्रभाव मुख्य रूप से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और लॉजिस्टिक्स में आने वाली बाधाओं के कारण है, जिसका असर स्टील और अन्य निर्माण सामग्रियों पर पड़ रहा है. इससे डेवलपर्स के मुनाफे पर भी दबाव बढ़ रहा है।  लगभग 20,000 डेवलपर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले इन दोनों संगठनों ने निर्माण सामग्री की संभावित कमी के कारण रियल एस्टेट परियोजनाओं को पूरा करने में होने वाली देरी पर भी चिंता व्यक्त की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक "स्टील, तार, पाइप और यहां तक कि कांच जैसी प्रमुख सामग्रियों की वर्तमान में कमी है. इसके अलावा, ईंधन से जुड़ी चुनौतियों के कारण सिरेमिक निर्माण जैसे क्षेत्र भी प्रभावित हुए हैं।  प्रोजेक्ट को पूरा करने में भी हो सकती है देरी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह "संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो इससे निर्माण लागत में और वृद्धि हो सकती है और प्रोजेक्ट के पूरा होने की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है।  इससे पहले, एनारॉक (Anarock) द्वारा किए गए एक विश्लेषण में कहा गया था कि मार्च की शुरुआत से हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने रियल एस्टेट क्षेत्र को प्रभावित किया है. इसकी वजह से निर्माण सामग्री की लागत बढ़ गई है, सप्लाई चेन बाधित हुई है और परियोजनाओं में देरी या उनके रुकने का जोखिम बढ़ गया है।  स्टील की छड़ों की बढ़ती कीमतों का असर मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद जैसे ऊंची इमारतों वाले बाजारों में निर्माण कार्य पर पड़ने की आशंका है. साथ ही, इससे लग्जरी घरों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि डेवलपर्स द्वारा दरों में 5% से अधिक की वृद्धि किए जाने की संभावना है। 

युद्ध की आग से हिल रहा दुबई का रियल एस्टेट मार्केट, निवेशकों को चिंता

 दुबई सपनों की नगरी दुबई, जहां आसमान छूती कांच की इमारतें और समंदर की लहरों पर बसते आलीशान विला हर किसी को अपनी ओर खींचते हैं. आम इंसान के लिए यह एक ख्वाब है, तो रईसों और बॉलीवुड सितारों के लिए दूसरा घर, लेकिन युद्ध के साए में इसकी चमक फीकी पड़ती दिख रही है।   भीषण संघर्ष और मिसाइल हमलों ने यहां की रौनक को फीका करना शुरू कर दिया है. सवाल सिर्फ पर्यटन का नहीं, बल्कि उन अरबों रुपयों का है जो इस शहर की रियल एस्टेट में लगे हैं. क्या युद्ध की ये चिंगारी दुबई के चमकते भविष्य को झुलसा देगी. दुबई की उस 'सेफ हेवन' वाली छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस शहर को निवेश का सबसे सुरक्षित माना जाता था, क्या अब वहां के करोड़ों के निवेश पर युद्ध का साया मंडरा रहा है।  दुबई का रियल एस्टेट मार्केट पिछले कुछ समय से अपने सबसे बेहतरीन दौर से गुजर रहा था. साल 2025 इसके लिए ऐतिहासिक रहा, जहां 187 मिलियन डॉलर की रिकॉर्ड तोड़ प्रॉपर्टी सेल्स दर्ज की गई. यही नहीं दुनिया भर के हजारों नए करोड़पति अपनी संपत्ति और परिवार के साथ यूएई में शिफ्ट हुए. इसका मुख्य कारण यहां का वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा थी. दुबई की पूरी अर्थव्यवस्था उसकी सुरक्षा और स्थिरता पर टिकी है. लेकिन हाल ही में हुए ईरानी मिसाइल हमलों और क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के माहौल ने इस 'सुरक्षित ठिकाने' वाली छवि को हिलाकर रख दिया है. निवेशकों के मन में अब यह डर बैठने लगा है कि क्या युद्ध की स्थिति में उनकी की संपत्ति सुरक्षित रहेगी।  दुबई का रियल एस्टेट मार्केट खतरे में भारतीय निवेशकों का बड़ा दांव दुबई के रियल एस्टेट की चमक में भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है. कुल ट्रांजैक्शंस का लगभग 25% से 30% हिस्सा भारतीय नागरिकों या एनआरआई (NRIs) का होता है. भारत के कई दिग्गज डेवलपर्स भी वहां बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रहे हैं. युद्ध के इस माहौल ने न केवल व्यक्तिगत निवेशकों, बल्कि इन बड़े भारतीय कॉर्पोरेट्स की चिंता भी बढ़ा दी है।  मार्केट में एक और बड़ी चिंता 'सप्लाई और डिमांड' के संतुलन को लेकर है. साल 2026 तक दुबई में लगभग 1.2 लाख नई रेजिडेंशियल यूनिट्स बाजार में आने वाली हैं. यह संख्या सामान्य वार्षिक आपूर्ति से दोगुनी है।  क्या पीछे हट रहे हैं विदेश खरीदार? अगर युद्ध के तनाव के कारण विदेशी खरीदार पीछे हटते हैं, तो मार्केट में घरों की बाढ़ आ जाएगी. विशेषज्ञों का अनुमान है कि मांग में कमी आने पर प्रॉपर्टी की कीमतें 3% से 7% तक गिर सकती हैं. तनाव का असर जमीन पर दिखने लगा है. इजराइल की स्ट्राइक के बाद से दुबई में प्रॉपर्टी देखने आने वालों की संख्या में भारी कमी आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुर्ज खलीफा जैसे प्रीमियम इलाकों में भी कुछ बड़े निवेशकों ने ऐन वक्त पर डील कैंसिल कर दी है और अपने हाथ खींच लिए हैं।  अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या डरा हुआ एचएनआई (HNI) निवेशक अपना पैसा दुबई से निकालकर भारत के उभरते लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट की ओर ले जाएगा? या फिर यह पूंजी सिंगापुर और लंदन जैसे पारंपरिक सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करेगी. आने वाले कुछ महीने दुबई के भविष्य की दिशा तय करेंगे।  रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि जिन खरीदारों ने पहले ही दुबई में अपने घर बुक कर लिए हैं, वे अब सौदे की शर्तों पर फिर से बातचीत कर सकते हैं या भारी डिस्काउंट की मांग कर सकते हैं. वहीं, नए खरीदार फिलहाल 'देखो और इंतजार करो' (wait-and-watch) की नीति अपना रहे हैं, ताकि स्थिति पूरी तरह स्थिर होने के बाद ही कोई कदम उठा सकें. जानकारों का यह भी कहना है कि कुछ निवेशक अपना पैसा अब दुबई से हटाकर भारत के प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की ओर मोड़ सकते हैं।  विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह संघर्ष लंबा खींचता है, तो मार्केट में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम, नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और निवेशकों के भरोसे में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. आने वाले महीनों में मध्यम वर्ग के खरीदार ज्यादा आक्रामक तरीके से मोलभाव कर सकते हैं, जबकि डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट्स को लॉन्च करने के फैसले को फिलहाल टाल सकते हैं. बड़े निवेशक (HNIs) भी अब बड़े निवेश करने से पहले समय और हालात का दोबारा आंकलन कर रहे हैं और नई प्रतिबद्धताओं को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं. अगर अनिश्चितता का यह दौर जारी रहा, तो कम से कम शॉर्ट-टर्म के लिए दुबई से भारत की ओर पूंजी का एक बड़ा पलायन देखने को मिल सकता है।   

इंदौर में रियल एस्टेट में आया बड़ा उछाल, नवंबर में 43% अधिक रजिस्ट्री, पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन

इंदौर  मध्य प्रदेश का आर्थिक शहर इंदौर अब रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड तोड़ रहा है। नवंबर 2025 में इंदौर जिले में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पिछले साल की तुलना में 43 प्रतिशत तक बढ़ गया। शहर के चारों उप पंजीयन कार्यालयों में यह तेजी साफ नजर आई, जिनमें सबसे ज्यादा उछाल इंदौर-4 में दर्ज किया गया। कुल मिलाकर अप्रेल से नवंबर 2025 तक जिले में पिछले साल की तुलना में 1091 रजिस्ट्रियां ज्यादा हुई हैं। नवंबर महीने में जिले में कुल 14,140 संपत्तियों का पंजीयन हुआ, जबकि नवंबर 2024 में यह संख्या 9905 थीं। इसमें इंदौर-1 में पिछले साल की तुलना में 1262 अधिक रजिस्ट्रियां हुईं। इंदौर-2 में 822, इंदौर-3 में 934 और इंदौर-4 में रिकॉर्ड 1225 रजिस्ट्रियों का उछाल देखने को मिला। यह रुझान बताता है कि खरीदारों का भरोसा अब भी मजबूत है और बाजार की गति तेज होती जा रही है। इंदौर 2, 3 और 4 में खरीद-बिक्री बढ़ी अप्रेल से नवंबर की अवधि में जिले में कुल 1,12,588 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 1,11,497 थी। इंदौर-2, इंदौर-3 और इंदौर-4 क्षेत्रों में खरीद-बिक्री बढ़ी है, वहीं इंदौर-1 में कुछ गिरावट दर्ज की गई। बावजूद पूरे जिले में प्रॉपर्टी बाजार ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेषज्ञों ने बताई प्रॉपर्टी खरीद में तेजी की वजह इंदौर में प्रॉपर्टी खरीद में आई इस तेजी के कई कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में लगातार होती इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, नए मार्गों और रिंग रोड के विस्तार, मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रगति और सुदृढ़ होती कनेक्टिविटी ने रियल एस्टेट को मजबूती दी है। प्रॉपर्टी बाजार बढ़ने के कई और भी कारण 1- रोजगार, स्टार्टअप और आइटी कंपनियों में तेजी शहर में आइटी पार्क, स्टार्टअप इकॉनमी और मल्टीनेशनल कंपनियों की मौजूदगी ने युवाओं और प्रोफेशनल्स का आवागमन बढ़ाया है। इससे मकान, फ्लैट और कमर्शियल स्पेस की मांग लगातार बढ़ रही है। 2- लगातार विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर सुपर कॉरिडोर, रिंग रोड, बीआरटीएस, मेट्रो प्रोजेक्ट, नए फ्लाइओवर और कनेक्टिविटी में सुधार ने शहर को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया है। 3- सेफ और ग्रोथ-ओरिएंटेड सिटी की छवि स्वच्छता में लगातार देश का नंबर-1 शहर रहने से लोगों का विश्वास बढ़ा है। बाहर से आने वाले परिवार इंदौर में बसना पसंद कर रहे हैं, जिससे मकान और प्लॉट की खरीद बढ़ी है। 4- निवेशकों का भरोसा, रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट ज्यादा शहर में प्रॉपर्टी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन फिर भी मेट्रो शहरों की तुलना में सस्ती दरें मिलती हैं। यही कारण है कि लोग इसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के रूप में सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। 5- नई टाउनशिप, हाई-राइज और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की भरमार सुपर कॉरिडोर, पीथमपुर रोड, स्कीम नंबर 94, 114 और बायपास क्षेत्रों में बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट तेजी से विकसित हो रहे हैं। नई टाउनशिप्स की बढ़ती संख्या से लोगों को सुविधाजनक और प्रीमियम आवास विकल्प मिल रहे हैं।

रियल एस्टेट सेक्टर को राहत, पंजाब सरकार ने तय की ये नई शर्तें

लुधियाना आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा फेस्टिवल सीजन के दौरान रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत दी है, जिसके तहत सी एल यू के साथ नक्शा पास करवाने की शर्त से छूट मिल गई है। यहां बताना उचित होगा कि लंबे समय से कोई कालोनी, बिल्डिंग, कमर्शियल प्रोजैक्ट के लिए सी.एल.यू. और नक्शा अलग-अलग पास करवाने का पैटर्न चल रहा था लेकिन 2023 के दोरान सी.एल.यू. के साथ ही नक्शा, ले आऊट पास करवाने की शर्त लगा दी गई। अब सरकार द्वारा निवेश बढ़ाने के अलावा इंडस्ट्री को सुविधाएं मुहैया करवाने के नाम पर जो लगातार मीटिंगें की जा रही है, इस दौरान रियल एस्टेट सैक्टर द्वारा सी.एल.यू. के साथ नक्शा पास करवाने की शर्त खत्म करने की मांग की गई है जिसके मद्देनजर शहरी विकास विभाग द्वारा एक बार फिर सिस्टम में बदलाव कर दिया गया है जिसके मुताबिक सी.एल.यू. के बाद अलग से नक्शा, ले आऊट पास करवाने या लाइसैंस लेने के लिए अप्लाई किया जा सकता है। इस संबंध में नोटीफिकेशन जारी कर दिया गया है जिसके लिए किसी भी रिहायशी या कमर्शियल प्रोजैक्ट का नक्शा पास करवाने से पहले लोन या अन्य विभागों से एन.ओ.सी. लेने के लिए सी.एल.यू. की मंजूरी जरूरी होने का हवाला दिया गया है।हालांकि सी.एल.यू. के साथ नक्शा पास करवाने का पुराना विकल्प भी खुला रखा गया है जो फॉर्मूला नगर निगम में भी लागू होगा। 4 साल की फिक्स की गई है डैडलाइन सी.एल.यू. पास करवाने के लिए 4 साल की डैडलाइन फिक्स की गई है जिसमें पहले 2 साल के लिए वैलिड होगी और फिर 20 फीसदी फीस जमा करने पर 2 साल की एक्सटैंशन मिल सकती है लेकिन यह शर्त मास्टर प्लान में बदलाव पर निर्भर करेगी। 3 महीने में देनी होगी मंजूरी सरकार द्वारा रियल एस्टेट सैक्टर के लोगों द्वारा किसी भी तरह के प्रोजैक्ट को पास करवाने के दौरान होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए 3 महीने के भीतर मंजूरी देना लाजिमी कर दिया है,जिसके तहत 23 दिन में सी.एल.यू. और नक्शा पास करवाने या लाइसेंस देने का फैसला एक महीने के अंदर करना होगा जिसके लिए यह भी तय कर दिया गया है कि किस ऑफिसर के लैवल पर मंजूरी मिलेगी और उसे कितने दिन में फाइल क्लीयर करनी होगी। 

रियल एस्टेट में बूम! ₹35,000 करोड़ के निवेश में भारतीय निवेशक आगे, विदेशियों को दी मात

मुंबई घरेलू पूंजी के सहारे भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के पहले नौ महीनों (जनवरी से सितंबर) के दौरान इस सेक्टर में 4.3 बिलियन डॉलर (₹35,000 करोड़) का बड़ा निवेश हुआ है. यह आंकड़ा पिछले पांच सालों के औसत निवेश को पार कर गया है.  यह निवेश पिछले पांच वर्षों के जनवरी से सितंबर की अवधि के औसत 4 बिलियन डॉलर के प्रवाह से अधिक रहा है, जैसा कि कोलियर्स इंडिया (Colliers India) की एक रिपोर्ट में बताया गया है. यह प्रवृत्ति भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत मज़बूती और रियल एस्टेट बाज़ार में निवेशकों के लगातार विश्वास को दर्शाती है. कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बादल याग्निक ने कहा, "भारतीय रियल एस्टेट में संस्थागत निवेश Q3 2025 (जुलाई-सितंबर तिमाही) में $1.3 बिलियन तक पहुंच गया, जो कि साल-दर-साल 11 प्रतिशत की वृद्धि है'.  घरेलू निवेशकों का बढ़ता दबदबा रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू संस्थागत पूंजी में साल-दर-साल (YoY) 52 प्रतिशत की भारी उछाल दर्ज की गई है, जो $2.2 बिलियन तक पहुंच गई है. यह भारतीय रियल एस्टेट में संस्थागत निवेशकों की बढ़ती गहराई और रुचि को दर्शाता है. घरेलू निवेशकों की सबसे अधिक रुचि ऑफिस और आवासीय (Residential) सेगमेंट में दिखी. तिमाही के दौरान घरेलू निवेश में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा अकेले ऑफिस संपत्तियों का रहा, जो तैयार और निर्माणाधीन दोनों तरह की वाणिज्यिक संपत्तियों के लिए लगातार भूख को दर्शाता है. कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बादल याग्निक ने कहा, "मुख्य एसेट क्लास में निरंतर मांग और घरेलू पूंजी की बढ़ती गहराई के साथ, निवेश की गति स्थिर रहने की संभावना है, भले ही वैश्विक चुनौतियों के कारण विदेशी निवेशक निकट भविष्य में सतर्क बने रहें." ऑफिस सेगमेंट और प्रमुख शहर ऑफिस सेगमेंट में निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है, जो वर्ष 2024 के स्तर के लगभग बराबर है, 2025 के पहले नौ महीनों में ऑफिस सेगमेंट में संस्थागत निवेश $1.5 बिलियन तक पहुंच गया, जो इस अवधि के कुल निवेश का 35 प्रतिशत है. पिछली छमाही की तुलना में Q3 2025 में ऑफिस सेगमेंट में संस्थागत निवेश में जबरदस्त उछाल आया, जो साल-दर-साल 27 प्रतिशत बढ़कर $0.8 बिलियन हो गया.  कोलियर्स इंडिया में राष्ट्रीय निदेशक और अनुसंधान प्रमुख विमल नाडार ने बताया, "ऑफिस संपत्तियों ने कुल तिमाही प्रवाह का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाया, जिसका नेतृत्व तैयार वाणिज्यिक संपत्तियों के उल्लेखनीय अधिग्रहणों ने किया, खासकर चेन्नई और पुणे में." प्रमुख शहर और भविष्य की रणनीति मुंबई इस साल निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे रहा, करीब $0.8 बिलियन के प्रवाह के साथ, मुंबई ने 2025 में कुल संस्थागत निवेश का 19 प्रतिशत आकर्षित किया, जिसका मुख्य कारण ऑफिस और आवासीय संपत्तियों में बड़ी डील्स थीं. इसके बाद बेंगलुरु का स्थान रहा, रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि घरेलू संस्थान निरंतर पूंजी का स्थिर स्रोत बने रहने की उम्मीद है.

रियल एस्टेट क्षेत्र में योगी सरकार ने स्थापित किया नया कीर्तिमान

 ई-नीलामी में लखनऊ, कानपुर, आगरा समेत 7 से अधिक जिलों की संपत्तियां शामिल पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन व पारदर्शी होने से बढ़ा निवेशकों का भरोसा, ई-नीलामी में जमकर लिया हिस्सा विकास कार्यों और जनता के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने में किया जाएगा धन का उपयोग लखनऊ, विजयदशमी के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने योगी सरकार के कुशल नेतृत्व में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। परिषद द्वारा 30 सितंबर 2025 को आयोजित मेगा ई-नीलामी ने रियल एस्टेट क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस नीलामी के माध्यम से परिषद को लगभग ₹1168.43 करोड़ की आय प्राप्त होने की संभावना है, जो अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। यह सफलता योगी सरकार की पारदर्शी नीतियों और निवेशकों के बीच बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। इस मेगा ई-नीलामी में उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों जैसे लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद, गाजियाबाद, और कासगंज आदि महत्वपूर्ण जिलों में स्थित कुल 992 संपत्तियों (391 आवासीय और 601 अनावासीय) को प्रस्तावित किया गया था। इनमें व्यावसायिक भूखंड, ग्रुप हाउसिंग प्लॉट्स, संस्थागत भूखंड, और आईटी सिटी प्लॉट्स के साथ-साथ आवासीय संपत्तियां शामिल थीं। नीलामी की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संपन्न किया गया। पंजीकरण प्रक्रिया 18 सितंबर 2025 से शुरू होकर डिजिटल ऑक्शन पोर्टल के माध्यम से सुगम बनाई गई थी। योगी सरकार के प्रभावी प्रचार-प्रसार और तकनीकी पारदर्शिता के कारण निवेशकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रतिस्पर्धात्मक बोलियां लगाईं। इस नीलामी में निवेशकों का भारी उत्साह न केवल परिषद की विश्वसनीयता को मजबूत किया है, बल्कि प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल को भी दर्शाता है। मेगा ई-नीलामी से प्राप्त होने वाली ₹1168.43 करोड़ की संभावित आय का उपयोग परिषद द्वारा नई आवासीय योजनाओं, आधारभूत संरचना विकास और जनता के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने में किया जाएगा। यह उपलब्धि योगी सरकार की उस नीति को बल देती है, जो प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। उत्तर प्रदेश में निवेशकों का बढ़ रहा विश्वास नीलामी न केवल परिषद की आम जनमानस एवं निवेशकों के बीच लोकप्रियता एवं विश्वास का प्रतीक है, बल्कि प्रदेश में निवेश वातावरण को और अधिक प्रोत्साहन देने वाली है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकारी आवासीय / अनावासीय योजनाएं अब निवेशकों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प बन चुकी हैं। इस प्रकार उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा विजयदशमी के अवसर पर संपन्न कराई गई यह मेगा ई-नीलामी आर्थिक दृष्टि से ऐतिहासिक सफलता है, जिससे संभावित ₹1168 करोड़ की आय परिषद और प्रदेश दोनों की आर्थिक सुदृढ़ता को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगी । प्रदेश में दिख रहा योगी सरकार की नीतियों का असर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पारदर्शी प्रशासन और निवेश-अनुकूल नीतियों का असर साफ दिख रहा है। यह वजह है कि योगी सरकार ने रियल एस्टेट क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। यह मेगा ई-नीलामी न केवल परिषद की लोकप्रियता का प्रतीक है, बल्कि प्रदेश में आर्थिक समृद्धि और विकास के नए द्वार खोलने वाली है। विजयदशमी के अवसर पर प्राप्त यह उपलब्धि योगी सरकार की प्रतिबद्धता और जनकल्याणकारी योजनाओं की सफलता का एक और उदाहरण है। यह नीलामी न केवल परिषद के लिए, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है, जो राज्य की आर्थिक सुदृढ़ता को नई दिशा प्रदान करेगा।

जिसने खरीदा था प्लॉट 5 साल पहले, अब कमा रहा है मोटा मुनाफा – यमुना एक्सप्रेसवे पर 536% तक बढ़ी कीमतें

नई दिल्‍ली यमुना एक्सप्रेसवे, जो कभी सिर्फ एक रास्ता हुआ करता था, अब NCR का सबसे पसंदीदा रियल एस्टेट कॉरिडोर बन गया है, पिछले पांच सालों में यहां के अपार्टमेंट और प्लॉट की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. यहां प्लॉट की कीमतें 500% से ज़्यादा और अपार्टमेंट की कीमतें 158% तक बढ़ गई हैं. इनवेस्टोएक्सपर्ट (InvestoXpert) एडवाइजर्स  की ताज़ा RealX Stats रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2025 के बीच इस कॉरिडोर पर अपार्टमेंट की कीमतें 158% बढ़ी हैं, जबकि प्लॉट की कीमतों में 536% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो पांच गुना से भी ज़्यादा है.   अपार्टमेंट की कीमतों में उछाल अपार्टमेंट खरीदना निवेशकों और खरीदारों, दोनों के लिए एक अच्छा दांव साबित हुआ है. 2020 में जहां एक वर्ग फुट की औसत कीमत 3,950 रुपये थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 10,200 रुपये हो गई. जब NCR के बाकी इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट आई, तब भी यमुना एक्सप्रेसवे पर कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, साल 2025 में ही यहां अपार्टमेंट की कीमतों में 7.37% की बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह साफ है कि यहां घर खरीदना एक बेहतर फैसला है. Chi 3 जैसे इलाकों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है, जहां ज़मीन की कीमतें दस गुना से भी ज़्यादा बढ़कर 1,200 रुपये प्रति वर्ग फुट से 12,950 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं हैं. सेक्टर 22D और Chi Phi में भी पांच साल में कीमतें 400% से ज़्यादा बढ़ी हैं. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कमाल यह जबरदस्त उछाल कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से आया है. इन सबमें सबसे बड़ा कारण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो जेवर में बन रहा है और जिसका उद्घाटन 30 अक्टूबर 2025 को होना है. उम्मीद है कि यह एयरपोर्ट यहां की ग्रोथ में सबसे बड़ा रोल अदा करेगा. इसके अलावा, UER-II एक्सप्रेसवे, YEIDA की इंडस्ट्रियल टाउनशिप, लॉजिस्टिक्स पार्क और बनने वाली फिल्म सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स ने भी यमुना एक्सप्रेसवे को एक आम इलाके से ग्रोथ के बड़े हब में बदल दिया है.  इनवेस्टोएक्सपर्ट एडवाइजर्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर, विशाल रहेजा कहते हैं, "यमुना एक्सप्रेसवे अब NCR के सबसे शानदार रियल एस्टेट कॉरिडोर में से एक बन गया है. प्लॉट की कीमतों में पांच गुना का उछाल दिखाता है कि निवेशकों को इस पर कितना भरोसा है और जेवर एयरपोर्ट और UER-II जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का यहां कितना असर हुआ है. इंडस्ट्रियल क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और प्लांड टाउनशिप के साथ, यह इलाका सिर्फ बढ़ नहीं रहा, बल्कि पूरे NCR का भविष्य तय कर रहा है." अब जब अपार्टमेंट की कीमतें 10,000 रुपये प्रति वर्ग फुट का आंकड़ा पार कर चुकी हैं और प्लॉट ने जबरदस्त रिटर्न दिया है, तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यमुना एक्सप्रेसवे की यह डबल-डिजिट ग्रोथ जारी रहेगी. एयरपोर्ट के खुलने से यहां विकास का एक नया दौर शुरू होने की उम्मीद है.