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लाल किला विस्फोट कनेक्शन की जांच तेज, जम्मू-कश्मीर में NIA ने कारोबारी को घेरा

जम्मू-कश्मीर लालकिला ब्लास्ट मामले में एनआईए टी कीम जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में छापेमारी कर रही है। जानकारी के मुताबिक एनआईए की टीम सुबह-सुबह ही हंदवाड़ा के गुलोरा इलाके में एक कारोबारी के ठिकाने पर पहुंची और फिर छापेमारी शुरू हो गई। सूत्रों का कहना है कि एनआईए को लालकिला ब्लास्ट की साजिश को लेकर कुछ सुराग मिले हैं जो कि यहां से जुड़े हैं। छापेमारी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अन्य 9 जगहों पर भी छापेमारी अधिकारियों के अनुसार, श्रीनगर, बारामुला, कुपवाड़ा और कुलगाम जिलों में उन व्यक्तियों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली गई, जिन्हें विस्फोट के पीछे कथित "आतंकी मॉड्यूल" से जुड़ा माना जा रहा है। इस विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गयी थी और 32 अन्य घायल हुए थे। एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, "जम्मू-कश्मीर के विभिन्न स्थानों पर नौ जगहों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।" सूत्रों के अनुसार, बारामुला जिले के रफियाबाद निवासी डॉ. बिलाल नसीर मल्ला के घर पर भी तलाशी ली गई, जिसे इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। कुपवाड़ा जिले के लंगेट क्षेत्र में भी छापेमारी जारी है। इसके अलावा श्रीनगर के नौगाम इलाके और दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में भी कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। एनआईए इस मामले में अब तक कई डॉक्टरों सहित 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इस विस्फोट का मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी हमले में ही मारा गया था। गौरतलब है कि पिछले साल 10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी के लाल किले के पास भीड़भाड़ वाले इलाके में विस्फोटकों से भरी कार में धमाका हुआ था, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी और अन्य 32 घायल हो गए थे।  

लालकिला विस्फोट चार्जशीट: ED का दावा, डॉक्टरों की भूमिका सामने आई

नई दिल्ली फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 260 पेज की चार्जशीट दाखिल की है. जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. इसमें डॉक्टर्स की भर्ती मामले में भी बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने बिना पुलिस वेरिफिकेशन के ही नवंबर 2025 के 'लाल किला ब्लास्ट' से जुड़े संदिग्ध डॉक्टरों की भर्ती की थी. इनको रखने से पहले अल फलाह ने पुलिस वेरिफिकेशन ही नहीं करवाई थी। बता दें कि इन तीन डॉक्टरों में से दो को NIA ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरा डॉक्टर वही सुसाइड बॉम्बर था, जिसने धमाके को अंजाम दिया था।    चार्जशीट में ये भी कहा गया है कि अल फलाह ने मेडिकल इंस्पेक्टर को बेवकूफ बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में नकली मरीजों को भर्ती किया, ताकि उनको ऐसा लगे कि बहुत मरीज और जरूरी सुविधाएं हैं,जिससे कि कॉलेज की डिग्री की मान्यता बनी रहे। ED ने यूनिवर्सिटी के 61 साल के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ PMLA के तहत दिल्ली की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है. ईडी ने इस मामले में पहले ही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी।जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी से जुड़े फंड्स को गलत तरीके से डायवर्ट किया गया और इनके असली स्रोत को छुपाया गया।

लेडी टेररिस्ट की दास्तान: टूटी शादी, खतरनाक रिश्ते और शाहीन का रहस्य

 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किले के समीप हुए धमाके से एक दिन पहले एजेंसियों ने एक महिला डॉक्टर को पकड़ा था. यह महिला थी डॉक्टर शाहीन शाहिद. जम्मू कश्मीर पुलिस और यूपी एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई में डॉक्टर शाहीन को पकड़ा था. शाहीन का नाम उसी आतंकी नेटवर्क से जुड़ा है, जिस नेटवर्क का नाम दिल्ली ब्लास्ट में आया है. दिल्ली ब्लास्ट में 10 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए थे. लेडी टेररिस्ट डॉक्टर शाहीन शाहिद कौन है, जिसे जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-उल-मोमिनीन का इंडिया हेड बताया जा रहा है? दरअसल, डॉक्टर शाहीन का नाम फरीदाबाद से दो डॉक्टर्स की गिरफ्तारी के बाद आया था. एजेंसियों के मुताबिक डॉक्टर मुजम्मिल अहमद, डॉक्टर उमर नबी और शाहीन शाहिद, तीनों मेडिकल प्रोफेशन की आड़ में व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क चला रहे थे. शाहीन को मोस्ट वांटेड आतंकी मसूद अजहर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-उल मोमिनीन का इंडिया हेड बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि वह जैश आतंकी मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के निर्देश पर काम कर रही थी. शाहीन की गिरफ्तारी के बाद उसके लखनऊ स्थित घर पर भी जम्मू कश्मीर पुलिस और यूपी एटीएस ने छापेमारी की. इस संयुक्त कार्रवाई में शाहीन के भाई डॉक्टर परवेज अंसारी को भी पकड़ा गया, जो इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं. डॉक्टर शाहीन के लखनऊ वाले घर से कई दस्तावेज, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन भी एजेंसियों ने अपने कब्जे में लिया है. कानपुर में लेक्चरर थी शाहीन डॉक्टर शाहीन कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) में भी लेक्चरर रह चुकी है. शाहीन ने 2006 में बतौर लेक्चरर जीएसवीएम जॉइन किया था. कॉलेज के रिकॉर्ड्स के मुताबिक 2013 में वह बिना अनुमति अवकाश पर चली गई और कॉलेज की ओर से कई नोटिस भेजे जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने 2021 में शाहीन की सेवा समाप्त कर दी थी. जीएसवीएम कॉलेज के लोग बताते हैं कि शाहीन शांत रहती थी. 2013 के बाद से उसने सभी के साथ संपर्क तोड़ लिए थे. महाराष्ट्र के जफर से हुई थी शादी डॉक्टर शाहीन शाहिद की शादी महाराष्ट्र के जफर हयात के साथ हुई थी. हालांकि, यह रिश्ता बहुत लंबा नहीं चला और 2015 में शाहीन का तलाक हो गया. पति से तलाक के बाद शाहीन हरियाणा के फरीदाबाद शिफ्ट हो गई. यहीं वह डॉक्टर मुजम्मिल के संपर्क में आई थी. बाद में वह मसूद अजहर की बहन सादिया के सीधे संपर्क में आ गई थी. शाहीन की कार से राइफल और जिंदा कारतूस भी मिले थे, जिन्हें आतंकी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है. NIA कर रही विदेशी कॉन्टैक्ट्स की जांच इस केस की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है. NIA डॉक्टर शाहीन शाहिद के अकादमिक रिकॉर्ड के साथ ही सोशल मीडिया कनेक्शन और विदेशी संपर्कों की भी जांच कर रही है. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि शाहीन शाहिद का पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के साथ सोशल मीडिया के जरिये संपर्क में रही होगी. भारत में कट्टरपंथी महिलाओं का नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश में भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल का शक एजेंसियों को है.