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हर्षोल्‍लास एवं धूम-धाम के साथ मनाया जाएगा गणतंत्र दिवस

अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक श्री चंचल शेखर ने बैठक लेकर सौंपी जिम्‍मेदारियाँ भोपाल हर साल की तरह इस साल भी हर्षोल्‍लास एवं धूम-धाम के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। प्रदेश का मुख्‍य समारोह 26 जनवरी को जहाँगीराबाद स्थित लाल परेड मैदान में आयोजित होगा। बीटिंग द रिट्रीट समारोह का आयोजन 29 जनवरी को किया जाएगा। इन दोनों आयोजनों की तैयारी के सिलसिले में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एस.ए.एफ श्री चंचल शेखर ने सोमवार को संबंधित अधिकारियों की बैठक ली। नवीन पुलिस मुख्यालय केभूतल स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक में श्री शेखर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियों को गणतंत्र दिवस की गरिमा को ध्‍यान में रखकर अंतिम रूप दें। उन्‍होंने गणतंत्र दिवस परेड के लिए विभिन्‍नईकाईयों से बल बुलाना, परेड मैदान की साफ सफाई, सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, दर्शकों और आमंत्रित अतिथियों की बैठक व्यवस्था सहित झांकी एवं चिकित्सा व्यवस्था आदि के लिए विभिन्न अधिकारियों को जिम्मेदारियाँ सौंपी। बीटिंग द रिट्रीट में बजने वाली धुनों का चयन, आतिशबाजी एवं विद्युत व्यवस्था के संबंध में भी उन्‍होंने आवश्‍यक निर्देश दिए और अधिकारियों को जवाबदेही भी सौंपी। बैठक में तय किया गया कि गणतंत्र दिवस समारोह के लिए परेड रिहर्सल 4 जनवरी से शुरू होगी। फुल ड्रेस फायनलरिहर्सल 24 जनवरी को की जाएगी। बैठक मेंपुलिस महानिरीक्षक एसएएफ श्री इरशाद वली, उप पुलिस महानिरीक्षक विसबलमध्‍य क्षेत्र श्री ओमप्रकाश त्रिपाठी, सेनानी 7 वीं वाहिनी श्री हितेश चौधरीसहित पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के पुलिस अधिकारी तथा लोक निर्माण विभाग, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, नगर निगम, महिला बाल विकास के अधिकारी मौजूद थे। ’’बीटिंग द रिट्रीट’’ का आयोजन 29 जनवरी को होगा ’’बीटिंग दरिट्रीट’’ सैन्य व अर्द्ध सैन्य बलों की प्राचीन परम्परा है। युद्ध के बाद जब सैन्य टुकड़ियाँ वापस अपने कैम्पों में आती थीं तो तनाव कम करने के लिए बैण्ड वादन इत्‍यादि मनोरंजक एवं सांस्‍कृतिक कार्यक्रम रखे जाते थे। भारत में इस कार्यक्रम के साथ ही गणतंत्रदिवस के कार्यक्रमों का औपचारिक समापन होता है। मध्यप्रदेश में गणतंत्र दिवस समारोह का समापन 29 जनवरी को भोपाल के मोतीलाल नेहरु स्टेडियम में ’’बीटिंग द रिट्रीट’’ समारोह आयोजन के साथ होगा।  

भारत के गणतंत्र दिवस पर यूरोप की बड़ी मौजूदगी, चीफ गेस्ट और FTA पर अहम बातचीत

 नई दिल्ली गणतंत्र दिवस 2026 भारत के लिए हर मायनों में ख़ास होने जा रहा है. चाहे कूटनीति हो या विश्व स्तर पर आर्थिक रिश्तों के लिहाज़ से. इस बार गणतंत्र दिवस 2026 में चीफ गेस्ट के तौर पर यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व को आमंत्रित किया गया है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा समारोह में शामिल होंगे.  माना जा रहा है कि जब ये दो शीर्ष नेता भारत आएंगे तो भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते और शिखर सम्मेलन भी आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है, जहां दोनों पक्षों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर ज़रूर चर्चाएं और संभावित समझौते पर फोकस रहेगा.  दोनों नेताओं का नई दिल्ली दौरा भारत और EU के बीच सबसे हाई लेवल पर एक नए रणनीतिक और आर्थिक तालमेल का संकेत देती हैं। गणतंत्र दिवस पर EU के टॉप नेताओं को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाना एक मजबूत प्रतीकात्मक महत्व रखता है। इसके साथ अपने राजनयिक और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के नई दिल्ली के इरादे को दिखाता है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा ऐसे समय दिल्ली आ रहे हैं जब भारत-EU संबंधों में तेजी आई है। खासकर फरवरी 2025 में EU कमिश्नरों की भारत यात्रा के बाद दोनों काफी करीब आए हैं। यह दौरा व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी और लोगों के बीच आदान-प्रदान में सहयोग बढ़ाने का रास्ता तैयार करेगा। भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) ने 8 दिसंबर को नई दिल्ली में लंबे समय से अटके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत फिर से शुरू की थी। इसमें दोनों पक्षों का लक्ष्य इस साल के आखिर तक दशक भर पुरानी बातचीत को खत्म करना है। यह बैठक एक अहम समय पर हो रही है, क्योंकि भारत और EU इस महत्वाकांक्षी समझौते में बची हुई कमियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत में सामान और सेवाओं के व्यापार, निवेश नियमों, सरकारी खरीद और रेगुलेटरी स्टैंडर्ड, से जुड़े बाकी मुद्दों को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है। इसमें सैनिटरी और टेक्निकल जरूरतें शामिल हैं। कुछ मुख्य मुद्दे अभी भी बने हुए हैं, जिनमें EU का प्रस्तावित कार्बन टैक्स, ऑटोमोबाइल और स्टील के लिए मार्केट एक्सेस, मूल नियम और सेवाओं में रुकावटें शामिल हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। जबकि EU पक्ष का नेतृत्व यूरोपियन कमीशन में ट्रेड के डायरेक्टर-जनरल सबाइन वेयांड कर रही हैं। भारत ने EU के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) पर भी चिंता जताई है, जो 1 जनवरी से लागू होगा। यह स्टील, एल्यूमीनियम और अन्य कार्बन-इंटेंसिव सामानों के निर्यात पर उनके कार्बन फुटप्रिंट से जुड़े अतिरिक्त टैक्स लगाकर असर डाल सकता है। भारत और यूरोपीय संघ लंबे समय से एफटीए को लेकर चर्चा कर रही है. बिज़नेस, इन्वेस्टमेंट, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन जैसे विषयों पर यह समझौता दोनों पक्षों के लिए स्ट्रैटेजिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. अब गणतंत्र दिवस पर यूरोपियन यूनियन के दो शीर्ष नेताओं की मौजूदगी साफ़ इस बात की संकेत दे रही है कि यूरोपियन यूनियन भारत के साथ रिश्तों को महज़ कूटनीतिक लेवल पर नहीं, बल्कि आर्थिक साझेदारी के नए लेवल पर ले जाना चाहते हैं. यूरोपीय संघ-भारत व्यापार वार्ता और गणतंत्र दिवस समारोह 2026 का एक ही समय के आसपास होने की वजह से यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण बन जाता है. राजनियक हलकों का मानना है कि भारत आर्थिक शक्तियों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को प्रायोरिटी दे रहा है. यह भारत की बैलेंस्ड और मल्टीलेटरल विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है. इस साल यानि 2025 में भारत ने गणतंत्र दिवस में चीफ गेस्ट के तौर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल हुए थे. राष्ट्रपति पद संभालने के बाद प्रबोवो की यह भारत की पहली यात्रा थी. 1950 के बाद यह चौथा मौका रहा जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए.  

भारत ने तोड़ी परंपरा: इस बार गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि यूरोपीय कमीशन व परिषद के अध्यक्ष

नई दिल्ली अगले साल गणतंत्र दिवस परेड में भारत दुनिया की एक सबसे ताकतवर हस्ती को आमंत्रित करने वाला है. इसमें न तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम है और न ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का. इसमें फ्रांस, इंग्लैंड या जर्मनी जैसे सुपरपावर के हेड का भी नाम नहीं है. ये भी स्वाभाविक है कि इसमें चीन के राष्ट्रपति का भी नाम नहीं ही है. ऐसे में ये ताकतवर हस्तिंयां कौन हैं. तो उनके नाम हैं- उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा. भारत पहली बार परंपरा से हटकर इन्हें आमंत्रित कर रहा है. लेयेन यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष हैं जबकि कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं. रिपोर्ट के मुताबिक औपचारिक निमंत्रण और स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है, जिसके पूरा होने पर नई दिल्ली और ब्रुसेल्स द्वारा जल्द ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी. भारत के नजरिये में गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि आमंत्रण अत्यंत प्रतीकात्मक महत्व रखता है. नई दिल्ली रणनीति और आतिथ्य का संतुलन बनाते हुए मुख्य अतिथि का चयन करती है, जिसमें सामरिक-कूटनीतिक कारण, व्यापारिक हित और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इस बार ईयू नेतृत्व को आमंत्रित करना भारत-ईयू संबंधों में तेजी से आए उभार का स्पष्ट संकेत है, विशेषकर फरवरी 2025 से जब ईयू के कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स ने भारत का दौरा किया था. 27 सदस्यीय ईयू के साथ भारत के संबंध पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली प्रशासन की अनिश्चित नीतियों के बीच ईयू ने 20 अक्टूबर को एक नया सामरिक एजेंडा अपनाया, जिसमें भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को उच्च स्तर पर ले जाने का संकल्प है. व्यापार समझौते पर वार्ता इसमें भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) की चल रही वार्ताओं को अंतिम रूप देना, प्रौद्योगिकी, रक्षा-सुरक्षा और जन-संपर्क सहयोग को गहरा करना शामिल है. जनवरी में ईयू नेताओं के भारत आने पर दिल्ली में ही भारत-ईयू लीडर्स समिट आयोजित होगा, जो मूल रूप से 2026 की शुरुआत में निर्धारित था. इससे दोनों पक्षों के वार्ताकारों पर दिसंबर तक एफटीए को पूरा करने का दबाव बढ़ गया है – यह प्रतिबद्धता फरवरी में हुई आर्थिक साझेदारी बैठकों में ली गई थी. गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में ईयू नेतृत्व की उपस्थिति न केवल कूटनीतिक जीत होगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करेगी. यह आमंत्रण भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ नीति का हिस्सा है, जिसमें वह अमेरिका, रूस और यूरोप जैसे सभी प्रमुख शक्ति केंद्रों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है. ट्रंप प्रशासन की अनिश्चितता के बीच ईयू के साथ गठजोड़ भारत को व्यापार, निवेश और रक्षा प्रौद्योगिकी में नई संभावनाएं देगा. एफटीए पूरा होने पर भारत को ईयू बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जो उसके निर्यात को बढ़ावा देगी. साथ ही, रक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग से भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बल मिलेगा. जनवरी समिट में दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन, डिजिटल गवर्नेंस और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी चर्चा करेंगे. यह ऐतिहासिक आमंत्रण भारत-ईयू साझेदारी के नए युग की शुरुआत है. जब 26 जनवरी 2026 को राजपथ पर ईयू झंडा लहराएगा, तो यह न केवल राजनयिक सफलता होगी, बल्कि वैश्विक सहयोग की नई मिसाल भी कायम करेगा. दोनों पक्षों के बीच विश्वास और सहयोग की यह यात्रा अब निर्णायक मोड़ पर है.