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जहरीली हवा और संकरी सुरंगों में फंसे खनिकों की तलाश, दुनिया भर के गोताखोर जुटे

नई दिल्ली  घुप अंधेरा, जहरीली हवा, कीचड़ से भरी सुरंगें और ऐसा पानी जिसमें हाथ तक दिखाई न दे। लाओस के शायसोम्बौन प्रांत की एक खतरनाक गुफा में फंसे खनिकों को बचाने के लिए पिछले 11 दिनों से दुनिया के कई देशों के एक्सपर्ट गोताखोर मौत से मुकाबला कर रहे हैं। यह ऑपरेशन अब 2018 के मशहूर थाईलैंड ‘थाम लुआंग’ गुफा बचाव अभियान से भी ज्यादा जोखिम भरा माना जा रहा है। 21 मई को सोना और अन्य कीमती खनिज तलाशने गए सात ग्रामीण खनिक अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण गुफा में फंस गए। लगातार बारिश से गुफा का प्रवेश द्वार बंद हो गया और बाहर निकलने के रास्ते पूरी तरह खत्म हो गए। सबसे अहम बात यह रही कि एक खनिक किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा और उसने प्रशासन को सूचना दी। यही घटना बाकी लोगों की जिंदगी बचाने की उम्मीद बनी। 'कॉफी' जैसा गंदा पानी और दम घोंटने वाली हवा राहत अभियान में शामिल गोताखोरों के मुताबिक गुफा के भीतर का पानी इतना गंदा था कि दृश्यता लगभग शून्य थी। बचावकर्मियों ने इसे 'कॉफी-कलर्ड वॉटर' यानी कॉफी जैसा गाढ़ा और भूरा पानी बताया। गुफा की कई सुरंगें केवल 60 सेंटीमीटर चौड़ी थीं। तुलना करें तो एक बड़ी पिज्जा का व्यास करीब 50 सेंटीमीटर होता है। ऐसे में गोताखोरों को ऑक्सीजन सिलेंडर उतारकर शरीर सिकोड़ते हुए अंदर बढ़ना पड़ा। इसके अलावा गुफा के भीतर चमगादड़ों की बीट से पैदा हुई हाइड्रोजन सल्फाइड गैस मौजूद थी, जिससे बेहोशी या दम घुटने का खतरा बना हुआ था। दुनिया भर के एक्सपर्ट जुटे शुरुआत में लाओस और थाईलैंड की टीमें मौके पर पहुंचीं। बाद में जापान, मलेशिया, इंडोनेशिया, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ भी अभियान में शामिल हुए। टीम में फिनलैंड के मशहूर गुफा गोताखोर मिक्को पासी भी शामिल थे, जिन्होंने 2018 के थाई गुफा बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि पासी ने साफ कहा कि यह मिशन थाईलैंड ऑपरेशन से कहीं ज्यादा खतरनाक है। उनके मुताबिक, यह प्राकृतिक गुफा नहीं बल्कि सालों से हाथों से खोदी गई अस्थिर खदान है। कई हिस्सों में मिट्टी कभी भी ढह सकती थी। संकरी सुरंगों में एक समय पर केवल एक गोताखोर ही निकल सकता था। पांचवें दिन तक सिर्फ सवाल ही सवाल शुरुआती दिनों में सबसे बड़ा सवाल था कि खनिक जीवित भी हैं या नहीं। अगर वे जिंदा हैं तो क्या उन्हें बाहर निकाला जा सकेगा? बचावकर्मियों को यह भी डर था कि जिन लोगों ने कभी डाइविंग उपकरण नहीं देखे, उन्हें ऑक्सीजन रेगुलेटर और सिलेंडर के सहारे बाढ़ भरी सुरंगों से कैसे निकाला जाएगा? गुफा के बाहर परिवारों का जमावड़ा लगा रहा। महिलाएं और बच्चे लगातार प्रार्थना करते रहे। छठे दिन मिली पहली बड़ी सफलता 27 मई को अभियान में बड़ी सफलता मिली। पांच खनिक गुफा के भीतर प्रवेश द्वार से करीब 300 मीटर दूर एक चट्टान पर बैठे मिले। वे भूखे, कमजोर और डिहाइड्रेटेड थे लेकिन होश में थे। एक खनिक ने कहा कि मां-पिता चिंता मत करो। मैं अभी मजबूत हूं। मैं घर वापस आऊंगा। थाई गोताखोर नोरासेद पलासिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अब मदद पहुंच चुकी है। इसके बाद उन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स, खाना, पानी और थर्मल कंबल दिए गए। हर सेकंड मौत का खतरा खनिकों को बाहर निकालना सबसे मुश्किल हिस्सा था। गोताखोरों को पूरी तरह अंधे पानी में केवल स्पर्श के सहारे रास्ता तय करना पड़ा। कई जगह ऑक्सीजन टैंक निकालकर शरीर को धक्का देकर सुरंग पार करनी पड़ी। घबराहट और ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ा। इस बीच मौसम विभाग ने भारी बारिश और तूफान की चेतावनी भी जारी कर दी थी। डर था कि दोबारा बारिश हुई तो गुफा पूरी तरह डूब सकती है। आखिरकार बाहर निकले चार खनिक पानी लगातार पंप करके बाहर निकाला गया। जलस्तर घटने के बाद चार खनिक खुद बाहर निकलने में सफल रहे। वे कीचड़ से लथपथ थे और बाहर आते ही जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद उन्हें ऑक्सीजन दी गई और थर्मल फॉइल कंबलों से ढका गया। ऑस्ट्रेलियाई गोताखोर जोश रिचर्ड्स ने कहा कि मैं अंदर जाने के लिए वेटसूट पहन ही रहा था कि तभी वे खुद बाहर निकल आए। अभी भी दो खनिक लापता अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। बचाव दल के मुताबिक दो खनिक अब भी लापता हैं। जीवित बचे लोगों ने बताया कि वे शायद गुफा में 500 मीटर और अंदर चले गए थे। थाई रेस्क्यू ग्रुप ‘मेट्टा थाम रेस्क्यू कलासिन’ के प्रमुख केंगकाज बोंगकावोंग ने कहा कि टीम अब और गहराई वाले हिस्से में खोज करेगी, लेकिन वह इलाका बेहद ज्यादा पानी से भरा और बेहद खतरनाक है। थाईलैंड और लाओस मिशन में बड़ा अंतर     लाओस मिशन                          थाईलैंड मिशन (2018)     7 खनिक फंसे                         13 बच्चे और कोच फंसे     5 मिले, 2 अब भी लापता             सभी सुरक्षित निकाले गए     अस्थिर सोने की खदान                प्राकृतिक गुफा     60 सेंटीमीटर तक संकरी सुरंगें       अपेक्षाकृत चौड़े रास्ते     जहरीली गैस का खतरा                गैस का बड़ा खतरा नहीं     आंशिक रूप से खुद बाहर निकले    पूरी तरह गोताखोरों पर निर्भर बचाव     प्रवेश द्वार से 300 मीटर दूर मिले    कई किलोमीटर अंदर फंसे थे दुनिया की नजर इस मिशन पर यह अभियान अब दुनिया के सबसे कठिन और खतरनाक गुफा बचाव अभियानों में गिना जा रहा है। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद और खतरा दोनों बढ़ रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजर उन दो लापता खनिकों पर टिकी है, जिन तक पहुंचना शायद अब तक का सबसे मुश्किल चरण साबित हो सकता है।  

हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित निकाले गए 2 बच्चे, दलदली जमीन और टूटी सीढ़ी ने बढ़ाईं मुश्किलें

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सिद्धार्थनगर के नवगढ़ तहसील क्षेत्र के ग्राम बेलसड़ तप्पा थरौली में पानी की टंकी पर हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया। रील बनाने के लिए टंकी पर चढ़े पांच बच्चों में से सीढ़ी टूटने के कारण तीन नीचे गिर गए, जिनमें एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। वहीं दो बच्चे टंकी के ऊपर ही फंस गए थे। सीएम के निर्देश पर अलर्ट हुआ प्रशासन घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल संज्ञान लिया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि फंसे बच्चों को सुरक्षित निकालने में कोई ढिलाई न बरती जाए। सीएम योगी के निर्देश के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने हालात की गंभीरता को देखते हुए राहत आयुक्त से हेलीकॉप्टर की मांग की, जिसे तत्काल स्वीकृति मिल गई। चुनौतीपूर्ण हालात में चला रेस्क्यू सीएम योगी के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में कई बाधाएं सामने आईं। टंकी के आसपास जलभराव के कारण जमीन दलदली हो गई थी, जिससे भारी मशीनरी जैसे जेसीबी और क्रेन का उपयोग संभव नहीं हो सका। टंकी की ऊंचाई और टूटी सीढ़ी के कारण ऊपर पहुंचना जोखिम भरा था, बावजूद इसके प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमों ने लगातार प्रयास जारी रखा। एयरफोर्स की मदद से बच्चों को उतारा गया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर भारतीय वायुसेना से सहायता ली गई। गोरखपुर से हेलीकॉप्टर मंगवाया गया, जिसने रविवार सुबह मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। एयरफोर्स की टीम ने अत्यंत सावधानी से दोनों फंसे बच्चों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित नीचे उतार लिया।

सीक्रेट मिशन,24 घंटे तक दुश्मन की जमीन पर पिस्तौल लेकर छिपा रहा अमेरिकी जांबाज, सैकड़ों सैनिकों ने बचाई जान

वॉशिंगटन अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज ने शनिवार की रात एक जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन में ईरान में फंसे अपने एक लापता एयरफोर्स ऑफिसर को ईरान में घुसकर रेस्क्यू कर लिया.  इस मिशन के दौरान रेस्क्यू टीम का कोई भी सदस्य हताहत नहीं हुआ और घायल ऑफिसर को इलाज के लिए सीधे कुवैत भेज दिया गया है. दरअसल, शुक्रवार को ईरान ने अमेरिका के F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराया था. जेट गिरने के बाद दोनों क्रू मेंबर्स ने इजेक्ट कर लिया था. पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स ऑफिसर दुश्मन के इलाके में फंस गया और लगभग एक दिन तक सिर्फ एक पिस्तौल के साथ छिपा रहा. जबकि ईरानी सेना ने उसे ढूंढने के लिए पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी थी और स्थानीय लोगों को इनाम का लालच भी दिया था. हालांकि, जिस इलाके में F-15E जेट गिरा वहां सरकार के खिलाफ काफी विरोध है, इसी वजह से ऑफिसर को छिपने में मदद मिली. उधर, ईरान में फंसे ऑफिसर तक पहुंचने के लिए अमेरिकी सेना का अधिकारियों में होड़ लगी थी, जिसमें अंततः सैकड़ों अमेरिकी कमांडो ने बाजी मार ली. 'कम्युनिकेशन डिवाइस की मदद…' न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस ट्रूप्स शामिल थे. साथ में दर्जनों अमेरिकी युद्ध विमान, हेलिकॉप्टर, साइबर, स्पेस और अन्य इंटेलिजेंस क्षमताओं का इस्तेमाल किया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान में फंसे अमेरिकी ऑफिसर एक बीकन और सुरक्षित कम्युनिकेशन डिवाइस की मदद से रेस्क्यू टीम के संपर्क में था. जब अमेरिकी कमांडो ऑफिसर के करीब पहुंचे तो वहां जबरदस्त गोलीबारी शुरू हो गई. अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ऑफिसर की लोकेशन के पास बढ़ रहे ईरानी काफिलों पर बमबारी की, ताकि उन्हें दूर रखा जा सके. इस मिशन में दर्जनों युद्धक विमानों, हेलीकॉप्टरों और साइबर व इंटेलिजेंस क्षमताओं का इस्तेमाल किया गया. सीआईए ने भी 'अनकन्वेंशनल असिस्टेड रिकवरी' के जरिए नागरिकों से संपर्क साधने में अहम भूमिका निभाई. 'बेस में फंसे अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान' रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि इस ऑपरेशन के आखिरी पलों में रेस्क्यू टीम को एक तकनीकी दिक्कत का भी सामने करना पड़ा, जब कमांडो और ऑफिसर को ले जाने वाले दो ट्रांसपोर्ट विमान ईरान के एक रिमोट बेस पर फंस गए. कमांडरों ने तुरंत फैसला लेते हुए तीन नए विमान वहां भेजे. पुराने दोनों खराब विमानों को बम से उड़ा दिया गया, ताकि वो ईरान के हाथ न लग सकें. इसके बाद सभी सैन्य कर्मियों और बचाए गए ऑफिसर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. सबसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने इस रेस्क्यू को इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण और जटिल ऑपरेशंस में से एक बताया है. सैकड़ों सैनिकों की भागीदारी और दुश्मन की जमीन पर इस तरह की कार्रवाई ने अमेरिकी सैन्य ताकत का लोहा मनवाया है. फिलहाल घायल ऑफिसर की हालत स्थिर है और वह कुवैत में विशेषज्ञों की निगरानी में है. इस सफल मिशन ने अमेरिकी खेमे में नई ऊर्जा भर दी है.