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खड़गवाँ से बेलबहरा मार्ग को मिलेगा नया रूप, रायपुर में आवागमन होगा आसान

रायपुर : खड़गवाँ जनपद के ग्राम पंचायत बेलबहरा से ग्राम लालपुर मार्ग होगा सुगम, आवागमन को मिलेगा बड़ा लाभ सुखाड़ नाला पर पुल निर्माण को पाँच करोड़ बारह लाख रुपये की मिली प्रशासकीय मंजूरी रायपुर मनेंद्रगढ़ विधानसभा के खड़गवाँ जनपद के ग्राम पंचायत बेलबहरा से ग्राम लालपुर मार्ग पर सुखाड़ नाला पर पुल निर्माण के लिए पाँच करोड़ बारह लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति लोक निर्माण विभाग द्वारा मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत दी गई है। इस परियोजना से क्षेत्रवासियों को मनेंद्रगढ़ मुख्यालय की स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा साथ ही खडगंवा और बैंकुंठपुर की दूरी भी घटेगी। पुल निर्माण से क्षेत्र की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसके पूरा होते ही पेंड्रा गौरेला मरवाही जिला नजदीक हो जाएगा, जिससे आवागमन सुगम बनेगा। वर्तमान में इस मार्ग पर नियमित परिवहन सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन पुल बनने के बाद बस सेवा शुरू होने की संभावना बढ़ेगी। स्थानीय विधायक और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री  अरुण साव को मनेंद्रगढ़ की समस्त जनता की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित कर उनका आभार प्रकट किया है । स्थानीय नागरिकों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि पुल निर्माण से विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों का शहरों से सीधा संपर्क स्थापित होगा।

मध्य प्रदेश के 5 जिलों में संकरी गलियों का चौड़ीकरण, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू

भोपाल   मेट्रोपॉलिटन रीजन की संकरी सड़कें भी अब चार लेन की होंगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के लिए पॉलिसी में इसे शामिल किया गया है। सड़कों की चौड़ाई न्यूनतम 12 मीटर रखी गई है। निर्माण एजेंसियों को बीडीए और टीएंडसीपी के माध्यम से इसके लिए सूचित कर दिया गया है। अब इसी आधार पर प्लानिंग तय होगी। भोपाल समेत राजगढ़, सीहोर, विदिशा, रायसेन को शामिल कर करीब 12 हजार 99 वर्ग किमी क्षेत्र का बीएमआर तय किया जा रहा है। टीएंडसीपी से नई कॉलोनियों को मंजूरी में 12 मीटर रोड चौड़ाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसमें सबसे बड़ी चुनौती पुरानी बसाहटें रहेगी। यहां तीन मीटर से भी कम की गलियां हैं। मुख्यमार्ग भी सात से दस मीटर तक है। ऐसे में यहां 12 मीटर की न्यूनतम चौड़ाई लाना बड़ी चुनौती है। इस दायरे में आने वाले मकान और दुकानों को तोड़कर सड़कों का चौड़ीकरण किया जाएगा। इसलिए जरूरी चौड़ी सड़कें रीजन में 2,524 गांव शामिल किए जा रहे हैं। भोपाल से ट्रैफिक और आबादी का भार घटाते हु़ए पास के जिलों का भोपाल की तरह विकास करना इसका मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए भोपाल से संबंधित जिलों की आपसी कनेक्टिविटी तो जरूरी है, बीएमआर में शामिल क्षेत्रों में भविष्य की बसाहट, ट्रैफिक को देखते हुए चौड़ी सड़कें जरूरी हैं। बीएमआर में सुनियोजित विकास के तहत पॉलिसी बीएमआर में सुनियोजित विकास के तहत पॉलिसी तय हो रही है। हमारी टीम इसके लिए काम कर रही है। समग्र विकास की अवधारणा को लेकर चल रहे हैं। 

गुरुग्राम में 3 प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण से जाम और गड्ढों की समस्या में होगी कमी

गुरुग्राम  गुरुग्राम में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से लोगों को सड़कों पर गड्ढे और जाम से राहत दिलाने के लिए शहर की तीन सड़कों की मरम्मत करने के साथ ही इनकी चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से 12 किलोमीटर लंबी तीन सड़कों की मरम्मत की जाएगी। इसका ठेका जारी कर काम शुरू कर दिया गया है, जो एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों के गड्ढे भरने के साथ इन्हें चौड़ा किया जाएगा, जिससे कि लोगों को जाम से राहत मिल सके। इन सड़कों पर होगा काम पीडब्ल्यूडी के अनुसार 4.70 किलोमीटर गुरुग्राम-अलवर मार्ग से सोहना होते हुए दौला तक सड़क, 2.79 किलोमीटर सोहना से संपकी-नांगली तक नए सिरे सड़क सुधार होगा। इसके अलावा चार किलोमीटर तक गढ़ी बाजिदपुर से स्कूल तक जाने वाली सड़क निर्माण होगा। इस पर साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। मॉनसून से खराब हुई सड़कों की मरम्मत करना और गड्ढे भरना, यातायात की भीड़ को कम करना। सड़कों का चौड़ीकरण कर आवागमन को सुगम बनाना है। सड़कों पर गड्ढ़ों से वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा इन सड़कों का मरम्मत और निर्माण कार्य तेजी से शुरू होगा। इन सड़कों पर गड्ढे होने के साथ लोग परेशानी झेल रहे हैं। स्थानीय निवासियो ने कहा कि विभाग की ओर से अनदेखी के कारण सड़कों पर गड्ढे होने से हादसे हो रहे हैं। इस कारण वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। प्रदूषण होने से भी लोगों को परेशानी रहती है। चरनदीप सिंह, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी, ''तीन सड़कों की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम अलॉट कर दिया गया है। इस साल के अंत तक सड़कों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया जाएगा। सड़क के चौड़ीकरण होने से लोगों को राहत मिलेगी। इन सड़कों पर जाम से भी राहत मिलेगी।'' दौलताबाद रोड चौड़ा करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी वहीं, द्वारका एक्सप्रेसवे को गुरुग्राम रेलवे स्टेशन से जोड़ रही दौलताबाद रोड (सेक्टर-104 और सेक्टर-105 की विभाजित सड़क) को चौड़ा करने या एलिवेटिड बनाने की संभावनाओं को तलाशा जाएगा। शुक्रवार को शहरी विकास के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी की अध्यक्षता में बैठक हुई। ढेसी ने अधिकारियों को गुरुग्राम रेलवे स्टेशन को जोड़ रही सड़कों में सुधार लाने के दिशा-निर्देश जारी किए। मौजूदा समय में दौलताबाद रोड की चौड़ाई 30 मीटर है। इसे पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने तैयार किया है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की तरफ से तैयार गुरुग्राम-मानेसर विकास योजना के तहत इस रोड की चौड़ाई 84 मीटर प्रस्तावित है। मौजूदा रोड के दोनों तरफ घनी आबादी है। सूरत नगर, राजेंद्रा पार्क और लक्ष्मण विहार कॉलोनियां इसके दोनों तरफ विकसित हैं। सड़कों पर खामियां दूर करने के आदेश गुरुग्राम में सड़क सुरक्षा माह जनवरी-2026 के अंतर्गत शुक्रवार को डीसीपी ट्रैफिक डॉ. राजेश मोहन ने शहर के व्यस्त आर्टिमिस सिग्नल (रेड लाइट टी-पॉइंट) और आर्टिमिस आंबेडकर चौक का निरीक्षण किया। उन्होंने यातायात बाधाओं को समझा और सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए अधिकारियों को आदेश दिए। निरीक्षण के दौरान डीसीपी ट्रैफिक ने स्पष्ट किया कि शहर के प्रमुख चौराहों और ब्लाइंड स्पॉट्स पर नियमित निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने तकनीकी संसाधनों जैसे सीसीटीवी और अन्य निगरानी प्रणालियों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डॉ. राजेश मोहन ने कहा कि यातायात निरीक्षक और जोनल अधिकारी सिविल अथॉरिटीज के साथ बेहतर तालमेल बिठाएं ताकि सड़कों की बनावट या संकेतों से जुड़ी खामियों को तुरंत दूर किया जा सके। डीसीपी ने मौके पर संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि केवल चालान काटना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि चालान प्रक्रिया के साथ-साथ वाहन चालकों के साथ जागरुकता गतिविधियों को भी प्रभावी रूप से चलाया जाए।

73 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण परियोजना, 10 मीटर चौड़ी सड़क से UP तक यात्रा आसान होगी

अशोकनगर   अशोकनगर में 201 करोड़ रुपए की लागत से ईसागढ़ व चंदेरी की राह आसान होगी, साथ ही उप्र को जोड़ने बाले रास्ते तक मजबूत व चौड़ी सड़क की सुविधा मिलेगी। इससे जिले के दो विकासखंडों के बीच यातायात सुगम हो जाएगा। इससे लोगों को ऊबड़-खाबड़ व ऊंचे नीचे रास्ते की समस्या से निजात मिलेगी। मामला पारसौल राजघाट रोड का है। पारसौल से ईसागढ़, जंधार, डाकोनी व चंदेरी होते हुए राजघाट तक 201 करोड़ रुपए की लागत से 73 किमी लंबी सड़क का निर्माण (road construction) हो रहा है। राजघाट से यह सड़क उप्र के रास्ते से जुड़ जाएगी। जर्जर हो चुकी यह सड़क पहले साढ़े पांच मीटर चौड़ी थी, लेकिन इसका चौड़ीकरण कर 10 मीटर चौड़ाई में निर्माण होना है। इसके लिए निर्माण शुरू हो गया है, कई जगहों पर खुदाई का काम चल रहा है और जुलाई 2027 में निर्माण पूर्ण होना है। घाटियों को काटकर समतल होगा मार्ग, फिर निर्माण मध्य प्रदेश राज्य सड़‌क विकास प्राधिकरण (MPRDC)इस सड़क का निर्माण कर रहा है। विभाग के अधिकारियों के मुताविक अभी सड़क धाटियों की वजह से कई जगहों पर ऊंची तो कहीं वलान है, लेकिन इसके निर्माण के लिए धाटियों की खुदाई करके समत्तल रास्ता किया जाएगा और इसके बाद सड़क निर्माण होगा। ताकि आवाजाही में ढलान व घाटी की समस्या वाहन चालकों को न रहे। आबादी बस्तियों में सीसी सड़क बनेगी और शेष हिस्से में डामरीकरण की सड़क होगी। 2027 तक पूरा होगा कार्य- MPRDC पारसौल से ईसागढ़-चंदेरी होते हुए राजघाट तक सड़क निर्माण चल रहा है जिसकी घाटियों व ढलानों को समतल कर सड़क बनाई जाना है। निर्माण कार्य चल रहा है और जुलाई 2027 तक निर्माण पूर्ण हो जाएगा। वहीं साढ़े पांच मीटर चौड़ी व 30 किमी लंबी अशोकनगर-थूबोन मार्ग का 7.16 करोड़ रुपए लागत से नवीनीकरण किया गया है। – दीपक नामदेव, इंजीनियर, एमपीआरडीसी

ओंकारेश्वर-महेश्वर-धामनोद फोरलेन सड़क परियोजना, महेश्वर में पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

महेश्वर मालवा निमाड़ का टूरिस्ट सर्किट अब रोड कनेक्टिविटी के हिसाब से सरकार मजबूत कर रही है। इंदौर-उज्जैन और इंदौर खंडवा मार्ग को छहलेन और फोरलेन करने के बाद सरकार ने बड़वाह धामनोद मार्ग को भी फोरलेन करने का फैसला लिया है। इस पर ढाई हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। 62 किलोमीटर लंबी इस सड़क में महेश्वर पर्यटन स्थल भी आता है। इस सड़क के बनने से ओंकारेश्वर जाने वाले पर्यटक महेश्वर भी जाना ज्यादा पसंद करेंगे, क्योंकि फोरलेन बनने के बाद ओंकारेश्वर से महेश्वर जाने में एक घंटे से भी कम समय लगेगा। फोरलेन सड़क के लिए किसानों की जमीनें भी ली जाएंगी, क्योंकि बड़वाह से धामनोद तक 100 से ज्यादा गांव हैं। इसमें नांद्रा, कतरगांव, धरगांव, छोटी खरगोन, जलूद मंडलेश्वर सहित दस से ज्यादा गांवों के मुख्य इलाके दो लेन सड़क के आसपास ही बसे हैं। नर्मदा घाटी वाला हिस्सा होने के कारण इस मार्ग पर गांवों में ज्यादा बायपास भी नहीं बन सकते हैं। इस कारण भू-अर्जन के लिए भी पैसा स्वीकृत किया गया है। इस मार्ग में दस बायपास बनेंगे। इसके अलावा पांच बड़े ब्रिज, 23 छोटे ब्रिज, 7 बड़े जंक्शन और 56 छोटे जंक्शन बनाए जाएंगे। बड़वाह से महेश्वर तक दस से ज्यादा किलोमीटर में सड़क सिंगल लेन भी है। यहां वाहनों की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रहती है। सड़क बनने के बाद वाहन 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जा सकेंगे।   यह होगा सड़क बनने से फायदा इस सड़क के बनने से महेश्वर, ओंकारेश्वर और मांडू के बीच कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी। बड़वाह से महेश्वर की दूरी 40 किलोमीटर और महेश्वर से मांडू की दूरी 60 किलोमीटर है।सड़क के आसपास बसे गांवों का विकास होगा। तेजी से बसाहट बढ़ेगी। सड़क बनने से जमीनों के भाव बढ़ेंग।इंदौर से ओंकारेश्वर जाने वाले पर्यटक महेश्वर होते हुए एक दिन में इंदौर आ सकेंगे। फिलहाल दोनों स्थलों पर जाने में काफी वक्त लगता है।

सड़क का सच सामने आया: मंत्री प्रतिमा बागरी ने नई सड़क की क्वालिटी पर जताई नाराजगी

 सतना  मोहन सरकार में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री प्रतिमा बागरी एक बार फिर चर्चा में हैं. अपने विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर निकली महिला मंत्री एक सड़क के घटिया निर्माण कार्य पर आगबबूला हो गईं. उन्होंने कार से उतरकर नई सड़क को पैर से कुरेदा तो डामर और गिट्टी अलग हो गई. इसके बाद मंत्री ने मौके पर ही ठेकेदार का अनुबंध रद्द करने सहित निर्माण एजेंसी पर एक्शन के निर्देश दिए. लोक निर्माण विभाग (PWD) ने हाल ही में सतना जिले की  कोठी तहसील में पौड़ी से मनकहरी के बीच करीब 3 किमी लंबी सड़क का सुधार कार्य किया था. लेकिन सड़क पर बिछाई गई डामर की परत न तो तय मोटाई की थी और न ही क्वालिटी सही थी. इसी बीच, रविवार को क्षेत्रीय विधायक और राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का एक कार्यक्रम के सिलसिले में उसी सड़क से निकलना हुआ, यहां उन्होंने कार से उतरकर सड़क की क्वालिटी देखी और एक पैसे से दबाव डाला तो एक हिस्सा अलग हो गया. पैरे से कुरेदते हुए तंज कसते हुए वह बोलीं- ''ये रोड बनी है, ये रोड बनी है… पूरी रोड निकाल दो इस तरह से… धक्का मारने पर पूरी रोड निकाल दो…''  इस दौरान मंत्री प्रतिमा बागरी ने PWD के कार्यपालन यंत्री बीआर सिंह से जवाब मांगा, तो उन्होंने मामले को हल्के फुल्के अंदाज में टालने की कोशिश की. इई ने कहा, ''कुछ हिस्सों को अस्वीकृत किया गया है…'' हालांकि, देखने में पूरी सड़क ही मानकों के विपरीत लग रही थी. महिला मंत्री ने मौके पर ही इसे गंभीर लापरवाही बताया और कार्यपालन यंत्री को कड़ी फटकार लगाई. उन्होंने साफ कर दिया कि सरकारी निर्माण कार्यों में क्वालिटी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं. MP कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने इस मामले में बीजेपी सरकार को घेरा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ''मध्यप्रदेश की मंत्री अपनी ही भाजपा सरकार पर खराब सड़क पर सवाल खड़े करती हुईं.

पंजाब में ग्रामीण कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव: AI सर्वे और मेगा लिंक रोड परियोजना से गाँवों में आया बदलाव

मोहाली  पंजाब में ग्रामीण विकास को गति देने के लिए आम आदमी पार्टी सरकार ने लिंक सड़कों के नवीनीकरण और उन्नयन की ऐतिहासिक परियोजना शुरू की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य की 30,237 लिंक सड़कों में से 7,373 सड़कों (19,491.56 किमी) को उन्नत बनाने पर 4,150.42 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यह परियोजना ग्रामीण परिवहन और कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने का लक्ष्य रखती है। परियोजना की सबसे विशेष बात यह है कि सड़कों का पूरा सर्वे AI-आधारित आधुनिक तकनीक द्वारा किया गया। इस डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया से वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन संभव हुआ और 383.53 करोड़ रुपये की सरकारी बचत भी हुई। यह पंजाब में पहली बार है जब ग्रामीण सड़क उन्नयन में इतनी उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया। निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने “सड़क बुनियादी ढांचा विकास बैठक” आयोजित की, जिसमें संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सड़क की मजबूती और टिकाऊपन से कोई समझौता नहीं होगा। सड़क सुरक्षा पर भी सरकार ने खास ध्यान दिया है। 91.83 करोड़ रुपये की सुरक्षा परियोजना के तहत स्कूलों, सार्वजनिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के पास चेतावनी संकेत, ज़ेबरा क्रॉसिंग, स्पीड लिमिट बोर्ड और हर 2 किमी पर साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मान का कहना है कि “लिंक सड़कें ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती हैं।” नई सड़कों से किसानों और ग्रामीणों को बाज़ारों, मंडियों और शहरों तक तेज़ और आसान पहुंच मिलेगी। यह परियोजना न केवल यात्रा को सुगम बनाएगी, बल्कि ग्रामीण पंजाब को नई दिशा देकर हर गांव में विकास की मजबूत नींव डालेगी।

भोपाल वेस्टर्न बायपास के नए अलाइनमेंट को मिली मंजूरी, 36 किमी सड़क के लिए 6000 पेड़ होंगे कटेंगे

भोपाल  भोपाल और सागर में पेड़ों की कटाई को लेकर पिछले दिनों मप्र हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की थी। अधिकारियों ने जब कोर्ट को बताया कि भोपाल में 244 पेड़ों में से 112 को रिलोकेट किया गया है और इसकी तस्वीरें कोर्ट के सामने पेश की गईं तो कोर्ट इन्हें देखकर भड़क गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे ट्रांसप्लांटेशन से पेड़ नहीं बचते, मर जाते हैं। कोर्ट की यह टिप्पणी इस समय इसलिए मायने रखती है, क्योंकि भोपाल में वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को सरकार ने मंजूरी दे दी है। करीब 36 किमी लंबे इस बायपास के निर्माण के लिए 6 हजार से ज्यादा पेड़ों को काटा या शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि कम से कम पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए बायपास के नए अलाइनमेंट को मंजूरी दी गई है। वहीं भोपाल के अमझरा गांव में 90 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को दी गई है। पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि 6 हजार पेड़ों को काटने के बाद जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई इतनी जल्दी नहीं हो सकेगी। बहरहाल, वेस्टर्न बायपास के 4 हजार रुपए करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने 2981 करोड़ रुपए की प्रशासकीय मंजूरी भी जारी की है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर बनने वाली यह सड़क न केवल भोपाल को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाएगी, बल्कि इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम के बीच एक हाई-स्पीड कॉरिडोर भी बनेगा.। पहले जानिए क्यों बदला वेस्टर्न बायपास का अलाइनमेंट पहले यह बायपास मंडीदीप के पास इकायाकलां से शुरू होकर फंदा तक बनना था, लेकिन अब यह 11 मील स्थित प्रतापपुर से शुरू होकर फंदा कलां तक जाएगा। नए रूट में वन क्षेत्र 6.1 किमी से घटकर 5.45 किमी रह गया है। सड़क विकास निगम के अधिकारियों का तर्क है कि रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन और समसगढ़ स्थित पुराने शिव मंदिर को बचाने के लिए रूट में बदलाव किया गया है। हालांकि, इस बदलाव के पीछे की कहानी कुछ और ही बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पुराने रूट पर कई नेताओं, अधिकारियों और रसूखदारों की जमीनें आ रही थीं, जिन्हें बचाने के लिए अलाइनमेंट बदला गया। पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने इस मामले की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रोजेक्ट को जानबूझकर प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बदला गया है। सड़क के लिए कटेंगे 6463 पेड़ भोपाल वेस्टर्न बायपास का निर्माण पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 416.25 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिसमें लगभग 45 हेक्टेयर वन भूमि भी शामिल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस भूमि पर मौजूद 6463 पेड़ों को या तो काटा जाएगा या फिर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। वन विभाग ने पेड़ों की कटाई की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी है। इसके तहत क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए भोपाल के अमझरा गांव में 90 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को उपलब्ध कराई गई है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि हजारों पुराने और घने पेड़ों के कटने से होने वाले पारिस्थितिक नुकसान की भरपाई महज नए पौधे लगाकर नहीं की जा सकती। यह बायपास कोलार और हुजूर तहसील के उन इलाकों से गुजरेगा, जो अपनी हरियाली के लिए जाने जाते हैं। बाघों के मूवमेंट के लिए 1.5 किमी लंबे पुल बनेंगे चूंकि नया रूट भी रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन के करीब से गुजर रहा है, इसलिए वन्यजीवों, विशेषकर बाघों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।     वाय-डक्ट का निर्माण: बाघों और अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित मूवमेंट के लिए 6 अलग-अलग स्थानों पर कुल 1480 मीटर लंबे वाय-डक्ट (ऊंचे पुल) बनाए जाएंगे। इससे जानवर नीचे से बिना किसी बाधा के आवाजाही कर सकेंगे और ट्रैफिक ऊपर से गुजरता रहेगा।     साउंड प्रूफ फेंसिंग: पूरे बायपास को साउंड प्रूफ बनाया जाएगा। सड़क के दोनों ओर 10 मीटर ऊंची फेंसिंग की जाएगी, ताकि वाहनों के शोर से वन्यजीव परेशान न हों और वे सड़क पर न आ सकें। अब जानिए बायपास के फायदे पर्यावरणीय चिंताओं के बावजूद इस बायपास के बनने से भोपाल और आसपास के क्षेत्र को 4 बड़े फायदे होंगे…     समय और ईंधन की बचत: इंदौर जाने वाले वाहनों को अब शहर के अंदर से नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे उनकी दूरी 21 किलोमीटर कम हो जाएगी। डेढ़ घंटे का सफर महज 30 मिनट में पूरा होगा।     हाई-स्पीड कनेक्टिविटी: यह बायपास निर्माणाधीन इंदौर-भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड 6-लेन हाईवे से जुड़ेगा, जिससे माल ढुलाई और आना-जाना आसान होगा।     शहर को जाम से मुक्ति: भारी वाहन शहर के बाहर से ही निकल जाएंगे, जिससे भोपाल वासियों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी।     एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच: जबलपुर, मंडीदीप और नर्मदापुरम से आने वाले वाहन बिना शहर में प्रवेश किए सीधे एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। जनवरी से शुरू होगी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य सरकार से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद अब अगले महीने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद नए साल में जनवरी से ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट के लिए 23 गांवों की जमीनें अधिगृहीत की जाएंगी।

ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से इंदौर-उज्जैन की यात्रा होगी आसान और तेज, 48.10 किमी का ब्लू प्रिंट तैयार

इंदौर  सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इंदौर और उज्जैन के बीच सफर को आसान बनाया जा रहा है। अब एमपीआरडीसी एक नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर तैयार करने जा रहा है। पितृ पर्वत से शुरू होकर चिंतामन गणेश मंदिर के पास सिंहस्थ बायपास तक जाने वाला यह नया हाईवे 48.10 किमी लंबा होगा। निर्माण को लेकर टेंडर खुल गया है। लुधियाना की कंपनी सीगल इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्रालि ने सबसे कम बोली लगाई। अधिकारियों के मुताबिक सालभर के भीतर सड़क का काम शुरू किया जाएगा। इन दिनों जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से इंदौर से उज्जैन की यह दूरी महज तीस मिनट में तय की जा सकेगी। हाईवे को एक्सेस कंट्रोल्ड फोरलेन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी चौड़ाई 60 मीटर होगी। प्रोजेक्ट पर करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 1089 करोड़ रुपये निर्माण पर और बाकी राशि भूमि अधिग्रहण पर किसानों को दी जाएगी। इंदौर और उज्जैन जिलों में 175 हेक्टेयर से अधिक जमीन लेना है। अकेले इंदौर जिले में ही 650 किसानों की जमीन से सड़क निकाली जाएगी। हातोद और सांवेर तहसील के किसान प्रभावित होंगे। अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में जमीन को लेकर सर्वे किया जाएगा। गाइडलाइन पर मुआवजा दिया जाएगा। प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युटी मोड पर विकसित होगा और कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले वर्ष से निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। एटीएमएस और सीसीटीवी भी पूरे मार्ग पर एटीएमएस सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इससे मार्ग की लगातार निगरानी रखी जा सकेगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से सिंहस्थ मेले और वीआईपी मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन को काफी सुगम बनाएगी। इसके साथ ही मौजूदा इंदौर-उज्जैन रोड पर वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर और तेज यात्रा अनुभव मिलेगा। चार स्थानों से होंगी एंट्री ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का ब्लू प्रिंट तैयार हो चुका है। हाईवे को जोड़ने के लिए चार स्थानों से वाहनों की एंट्री रखी जाएगी, जिसमें इंदौर और उज्जैन के अलावा वेस्टर्न बायपास क्रासिंग और उज्जैन-बदनावर रोड क्रासिंग भी शामिल है। सड़क जंबूड़ी हप्सी, हातोद, कांकरिया बोर्डिया, पोटलोद, मगरखेड़ी, लिंबा पीपल्या समेत कई गांवों से होकर निकलेगा, जबकि हाईवे पर टोल व्यवस्था मौजूदा स्टेट हाईवे की तरह होगी। इसमें इंदौर और उज्जैन दोनों ओर से अलग-अलग टोल प्वाइंट तय किए जाएंगे। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी     प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर निकाले गए हैं। कागजी प्रक्रिया पूरी होने में थोड़ा समय लगेगा। अभी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। सालभर में निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। – गगन भाबर, डिविजनल मैनेजर, एमपीआरडीसी  

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से लुडेग क्षेत्र को मिली बड़ी सौगात

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से लुडेग क्षेत्र को मिली बड़ी सौगात पूनापारा से लबनीपारा तक 5 किलोमीटर सड़क निर्माण को मिली मंजूरी ग्रामीण संपर्क मार्ग हेतु 5 करोड़ 41 लाख रुपए की मिली प्रशासकीय स्वीकृति रायपुर मुख्यमंत्री के पहल से ग्राम पंचायत लुडेग के पूनापारा से लबनीपारा मुख्य बस्ती तक लगभग 5 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्ष 2024-25 के बजट में शामिल इस कार्य के लिए  पाँच करोड़ इकतालीस लाख तेरह हजार रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। वित्त विभाग ने इस पर प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है।            जिले के ग्रामीण अंचलों में सड़क सुविधा को सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लुड़ेग क्षेत्रवासियों को सौगात दी है।  ग्रामीणों को कई स्तरों पर मिलेगा लाभ        लुडेग क्षेत्र की यह सड़क लंबे समय से कच्ची होने के कारण ग्रामीणों के दैनिक जीवन में कई बाधाएँ पैदा करती थी। वर्षा ऋतु में रास्ता खराब होने से आवागमन अत्यंत कठिन हो जाता था। कृषि उपज को बाजार या मंडी तक पहुँचाने में अतिरिक्त समय और श्रम लगता था, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। विद्यालय और महाविद्यालय जाने वाले विद्यार्थियों को भी प्रतिदिन असुविधा का सामना करना पड़ता था। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर ग्रामीणों तक नहीं पहुँच पाती थीं और आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने में भी विलंब होता था। सड़क निर्माण पूर्ण होने पर इन सभी समस्याओं का समाधान होगा तथा ग्रामीणों के जीवन में व्यापक सुधार आएगा। क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जबकि सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देगा। मुख्यमंत्री श्री साय की संवेदनशील पहल          ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदृष्टि और संवेदनशीलता लगातार सामने आ रही है। राज्य सरकार द्वारा सुदूर अंचलों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए योजनाबद्ध रूप से कार्य किया जा रहा है। लुडेग क्षेत्र के लिए स्वीकृत यह सड़क राज्य शासन की प्राथमिकता में ग्रामीण विकास को दिए जा रहे महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। ग्रामीणों में उत्साह, मुख्यमंत्री के प्रति आभार-         पूनापारा, लबनीपारा और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की स्वीकृति मिलने पर खुशी व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि इस निर्णय से उनके लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष और प्रतीक्षा का अंत हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सड़क न केवल आवागमन को सुगम बनाएगी बल्कि क्षेत्र की समग्र प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।