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सहारा इंडिया की 75 लंबित शिकायतें, 4 साल बाद CID करेगी खुलासा

भोपाल   4 साल बाद जागी उम्मीद की किरण, अब CID खोलेगी दबी हुई फाइलों के राज। अपनी गाढ़ी कमाई के लिए दर-दर भटक रहे लाखों परिवारों को मिली बड़ी राहत। बरसों का इंतज़ार, आंखों में आंसू और अपनी ही मेहनत की कमाई को वापस पाने की जद्दोजहद… सहारा इंडिया में पैसा निवेश करने वाले लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों की यह कहानी अब एक नया मोड़ लेने वाली है। पुलिस मुख्यालय में पिछले चार सालों से धूल फांक रही शिकायतों की फाइलें अब फिर से खुल गई हैं। क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने इस महा-घोटाले की कमान अपने हाथों में ले ली है।। ​​सहारा इंडिया का यह संकट सिर्फ कागजों पर दर्ज आंकड़ा नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के सपनों के टूटने की दास्तां है।     ​फंसा हुआ पैसा: ₹6,689 करोड़ (मध्य प्रदेश के 9.66 लाख निवेशकों का)।     ​अब तक वापसी: ऊंट के मुंह में जीरे के समान, केवल ₹355 करोड़।     ​बड़ा गैप: 9.66 लाख निवेशकों में से केवल 1.55 लाख के आवेदन ही अब तक प्रक्रिया में आ पाए हैं। ​2. CID का 'एक्शन प्लान' और रिफंड की नई उम्मीद ​CID की शुरुआती जांच में टीकमगढ़, विदिशा, अशोकनगर, गुना, सागर और मैहर जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी सामने आई है।     ​पोर्टल से जुड़ाव: CID अब उन निवेशकों की पहचान कर रही है जिन्होंने अभी तक 'सहारा रिफंड पोर्टल' पर आवेदन नहीं किया है।     ​घर-घर दस्तक: विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी पीड़ित छूट न जाए, ताकि रिफंड की प्रक्रिया को गति दी जा सके। ​3. EOW की रडार पर 'जमीन का खेल' ​सहारा समूह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) सहारा की 312 एकड़ जमीन के संदिग्ध सौदों की पड़ताल कर रहा है। आरोप है कि पैसे को सेबी-सहारा के संयुक्त खाते में जमा करने के बजाय अन्य कंपनियों में 'डायवर्ट' कर दिया गया। ​4. अन्य चिटफंड कंपनियां भी निशाने पर ​केवल सहारा ही नहीं, बल्कि केएमजे, परिवार डेयरी और सक्षम जैसी अन्य चिटफंड कंपनियां भी अब जांच के घेरे में हैं। इन कंपनियों ने भी दोगुना मुनाफा और रियल एस्टेट का झांसा देकर लोगों को करोड़ों का चूना लगाया है। पुलिस की चेतावनी:  ​ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पैसा लौटाने की प्रक्रिया भले ही जारी हो, लेकिन एमपी में अब भी 90% निवेशक खाली हाथ हैं। CID की यह सक्रियता उन बुजुर्गों और परिवारों के लिए एक नई उम्मीद है जिन्होंने अपनी बेटियों की शादी या बुढ़ापे के सहारे के लिए पाई-पाई जोड़कर सहारा में जमा की थी।

सहारा इंडिया मुश्किल में: EPFO ने थमाया कुर्की नोटिस

लखनऊ  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने सहारा इंडिया ग्रुप पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है. कंपनी द्वारा लाखों कर्मचारियों के लिए जमा न किए गए 1180 करोड़ रुपये के भविष्य निधि (पीएफ) और पेंशन बकाया के खिलाफ ईपीएफओ ने सहारा की संपत्तियों पर कुर्की का नोटिस जारी कर दिया है. यह कदम सहारा की लंबे समय से चली आ रही वित्तीय अनियमितताओं के बीच आया है, जहां कंपनी के एजेंटों को कर्मचारी मानते हुए उनके पीएफ योगदान को अनिवार्य ठहराया गया है. यदि बकाया समय पर जमा नहीं किया गया, तो ईपीएफओ कानून के तहत संपत्ति जब्ती और ब्याज सहित दंड की प्रक्रिया तेज कर देगा. ईपीएफओ की लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने सहारा इंडिया को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया है कि 15 दिनों के अंदर 1180 करोड़ रुपये जमा किए जाएं. यह राशि मुख्य रूप से 2010-2012 के दौरान सहारा के ‘कमीशन एजेंटों’ के पीएफ और पेंशन दावों से जुड़ी है. ईपीएफओ का तर्क है कि ये एजेंट वास्तव में कंपनी के कर्मचारी थे, जिनके लिए पीएफ योगदान अनिवार्य था. यदि देरी हुई, तो धारा 8बी से 8जी के तहत बिना अतिरिक्त नोटिस के वसूली की कार्रवाई शुरू हो जाएगी, जिसमें ब्याज और जुर्माना भी जोड़ा जाएगा. अनुमान है कि कुल बकाया ब्याज सहित 3500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. ये है मामला सहारा इंडिया पर यह कार्रवाई 2013 से चल रही जांच का नतीजा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पिछले साल चार महीने का समयसीमा तय की थी, जिसके बाद ईपीएफओ ने 15 फरवरी को आदेश जारी किया. कंपनी ने लंबे समय तक एजेंटों को ‘सदस्य’ बताकर पीएफ दायित्व से बचने की कोशिश की, लेकिन अदालती फैसले ने इसे कर्मचारी ही माना. ईपीएफओ के अधिकारियों के अनुसार, सहारा के पास 10 लाख से अधिक ऐसे ‘कर्मचारी’ थे, जिनके दावे अब लंबित हैं. सहारा का संकट गहराया सहारा इंडिया ग्रुप पहले से ही सेबी के बॉन्ड घोटाले, जमीन घोटालों और निवेशकों के 9000 करोड़ के रिफंड के मामले में उलझा हुआ है. हाल ही में झारखंड सीआईडी ने 400 करोड़ के लैंड स्कैम में सब्राटा रॉय के बेटों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. अब ईपीएफओ का यह नोटिस कंपनी की संपत्तियों—जैसे रियल एस्टेट और वित्तीय परिसंपत्तियों—पर सीधा खतरा पैदा कर रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कुर्की हुई, तो सहारा की लिक्विडिटी और बिक्री योग्य संपत्तियों पर असर पड़ेगा.