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सहारा रिफंड के आंकड़ों पर बड़ा सवाल, 18 लाख से ज्यादा जमाकर्ता कहां गए?

नई दिल्ली सहारा इंडिया के अभी भी लाखों निवेशक अपने मूलधन को पाने के लिए परेशान हैं। इसबीच एक बड़ी खबर यह आ रही है कि सहारा इंडिया पोर्टल पर रजिस्टर्ड 18 लाख से अधिक जमाकर्ता 'गायब' हैं। दरअसल, यह खुलासा एक RTI कार्यकर्ता ने की है। बड़ौत बागपत के रहने वाले RTI एक्टिविस्ट नौशाद अली ने सूचना के अधिकार के तहत केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय से दो बार सूचनाएं मांगी थी। पहली सूचना 24 अक्टूबर 2025 को और दूसरी 28 जुलाई 2026 को। केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय ने दोनों का उत्तर भी दिया, लेकिन आंकड़ों में काफी बदलाव दिखा। नौशाद के मुताबिक पहली सूचना के जवाब में उन्हें बताया गया कि 10 नवंबर 2025 तक कुल 1,67,96,469 जमाकर्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें से 1,40,45,099 ने डॉक्यूमेंट्स सफलतापूर्वक जमा किए। इनमें से केवल 34,35,874 वैध जमाकर्ताओं को 17 नवम्बर 2025 तक 6,621.85 करोड़ रुपये उनके आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे लौटाए गए। कुल क्लेम की गई रकम 95,732.50 करोड़ रुपये बताई गई। दूसरी सूचना में क्या मिला जवाब वहीं, दूसरी सूचना के तहत दिनांक 28 जुलाई 2026 के उत्तर में 3 सितंबर 2026 को कहा गया कि अब तक 1,49,48,879 जमाकर्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें से 41,56,693 आवेदनों का सत्यापन हुआ और इन्हें 9,267.89 करोड़ रुपये दिए गए। 4 सितम्बर 2026 तक यही राशि बांटी गई। परन्तु कुल 3,95,02,796 आवेदनों में कमियां पाई गईं। दूसरी सूचना में 1867590 जमाकर्ता ‘गायब’ इन दोनों उत्तरों का मिलान करने पर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पहले उत्तर में रजिस्ट्रेशन की संख्या 1,67,96,469 थी, जबकि बाद वाले उत्तर में यह घटकर 1,49,48,879 रह गई। यानी करीब 1867590 जमाकर्ता ही गायब हाो गए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए या आंकड़े गलत हैं? आरटीआई कार्यकर्ता नौशाद अली ने लाइव हिन्दुस्तान को बताया कि केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय ने इस अंतर का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। इतने बड़े अन्तर को छिपाना या अनदेखा करना सिस्टम की कार्यशैली पर प्रश्न उठाता है। बता दें 8 सितंबर 2026 में सरकार ने लेटेस्ट जानकारी देते हुए बताया था कि सहारा के 41.56 लाख जमाकर्ताओं को ₹9,267 करोड़ वापस किए जा चुके हैं और लगभग 20 लाख आवेदन प्रोसेसिंग के लिए बाकी है। दावे में कमी है तो दोबारा आवेदन का मौका मंत्रालय ने बताया है कि जिन जमाकर्ताओं के दावों को कमियों के कारण सत्यापित नहीं किया जा सका है, उनके लिए CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल पर दोबारा आवेदन (Re-submission) की सुविधा शुरू की गई है। जमाकर्ता पोर्टल पर अपनी कमियों को देखकर उन्हें दूर करने के बाद फिर से दावा जमा कर सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार रिफंड की पूरी प्रक्रिया 29 मार्च 2023 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में चल रही है। RTI जवाब में कहा गया है कि प्रक्रिया की निगरानी सहकारिता मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की देखरेख में की जा रही है। अगर किसी जमाकर्ता का दावा पहले खारिज या सत्यापित नहीं हुआ है, तो उसे पोर्टल पर कमियों की जानकारी देखकर उन्हें दूर कर दोबारा दावा जमा करने की सुविधा दी गई है।

सहारा की 88 संपत्तियां होंगी नीलाम, रिफंड प्रक्रिया को मिलेगी रफ्तार – देखें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली सहारा ग्रुप (Sahara Group) एक बार फिर चर्चा में है, रिफंड (Refund) को लेकर निवेशकों में एक उम्मीद जगी है. सहारा इंडिया में सबसे ज्यादा बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से निवेशक हैं. कुछ लोगों ने अपनी सारी गाढ़ी कमाई सहारा इंडिया में जमा कर दी थी. लेकिन अब सहारा ग्रुप की संपत्तियां बेचकर निवेशकों के पैसे लौटाने की बात कही जा रही है. दरअसल, Sahara India Commercial Corporation Ltd. (SICCL) ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी लगाई है, जिसमें वह अपनी कुछ प्रमुख अचल संपत्तियों को Adani Properties Pvt. Ltd. को एकमुश्त (Single Block) बेचने की अनुमति मांगी है. रिपोर्ट के मुताबिक सहारा इंडिया ग्रुप की 88 से अधिक संपत्तियां इस सौदे के तहत बेचने की तैयारी चल रही है. यानी इन संपत्तियों को बेचकर, निवेशकों के पैसे लौटाए जाएंगे. केंद्र सरकार ने साल 2022 में बताया था कि सहारा इंडिया ग्रुप की कंपनियों में कुल निवेशकों का संख्या करीब 13 करोड़ है, और इन निवेशकों के 1.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक फंसे हुए हैं. बता दें, सहारा इंडिया का मामला साल 2012 से चल रहा है, जब सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की दो कंपनियों को निवेशकों का पैसा लौटाने का आदेश दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक SEBI-सहारा एस्क्रो अकाउंट में करीब 26.25 हजार करोड़ रुपये जमा है. पिछले दो वर्षों में सुप्रीम कोर्ट (SC) के आदेश पर सेबी ने Sahara निवेशकों को करीब ₹5053 करोड़ लौटा दिए हैं. जिन निवेशकों ने Cooperative Societies of Sahara Group में पैसे जमा किए थे, उन्हें वापस किए गए हैं. बिकने वाली सहारा की ये संपत्तियां: सहारा ग्रुप के पास बड़ी संपत्ति के तौर पर Aamby Valley City है, जो महाराष्ट्र के पुणे में है, ये टाउनशिप लगभग 8,810 एकड़ में फैला हुआ है. सहारा के मुंबई एयरपोर्ट के पास Hotel Sahara Star है, लखनऊ में सहारा शहर और Sahara Ganj Mall है. इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड जैसे कई राज्यों कई संपत्तियां फैली हुई हैं. हालांकि कितने में सभी संपत्तियों का सौदा हुआ है, इसका खुलासा नहीं हुआ है. इसपर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2025 को होगी. अगर अदालत संपत्ति सौदे पर अपनी मुहर लगाती है तो फिर सहारा ग्रुप की तमाम संपत्तियों की ब्रिकी का रास्ता साफ हो जाएगा. सहारा ग्रुप का बिजनेस रियल-एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी (होटल), मीडिया-चैनल, फाइनेंस/इंश्योरेंस और रिटेल में फैला हुआ था. सहारा समूह ने उत्तर भारत (UP, Bihar, Jharkhand, Rajasthan) में बड़े-बड़े आवासीय/प्लॉट और कृषि/विकास योग्य जमीन खरीदी थी. वहीं हाल के वर्षों में कई जमीनों को ED समेत तमाम जांच एजेंसियों ने अटैच कर रखा है. सहारा समूह ने न्यूयॉर्क के The Plaza Hotel में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी. बाद में यह संपत्ति साल 2018 में कतरी फंड (Qatar fund) को बेची दी गई. वहीं सहारा ग्रुप (Sahara Group) के पास मौजूद करीब 19 संपत्तियों की लीज़ समीक्षा हो रही है, क्योंकि इनमें से कुछ लीज समाप्त हो चुकी है, कुछ पर कब्जा है, और कुछ को सील कर दिया गया है. लखनऊ स्थित 'सहारा बाजार' की जमीन की कीमत लगभग ₹200 करोड़ आंकी गई है. रिफंड के लिए कहां करें अप्लाई बता दें, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहारा रिफंड पोर्टल (https://mocrefund.crcs.gov.in) ल़ॉन्च किया था, जिसके माध्यम से निवेशकों के पैसे लौटाए जा रहे हैं. सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि करीब 26 लाख निवेशकों को अब तक 5,053 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके हैं. वहीं, 13.34 लाख नए निवेशकों ने भी क्लेम किया है, जिसकी कुल राशि 27,849 करोड़ रुपये बैठती है. अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक करीब 32 लाख और निवेशक अपना दावा दर्ज कर सकते हैं. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों को पैसे लौटाने की डेडलाइन 31 दिसंबर 2025 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है. इससे लाखों निवेशकों को राहत मिलेगी.