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समाजवादी पार्टी पर राजभर का बड़ा हमला, बोले- जल्द होगा बड़ा विभाजन, कई नेता छोड़ेंगे साथ

लखनऊ यूपी में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा सियासी दावा किया है कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है. राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी को चिट्ठी सौंपी है. खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाला का मास्टरमाइंड कौन है, पूरा उत्तर प्रदेश जानता है. शिकंजा कस रहा है तो सपा परेशान है.राजभर का कहना है कि महाराष्ट्र, बंगाल छोड़िए, समूची सपा भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है. बंगाल में टीएमसी के 20 सांसद बगावत कर चुके हैं. जबकि महाराष्ट्र में शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 6 सांसद टूटने के कयास लगाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र और बंगाल में बड़ी बगावत दो दलों में देखने को मिल रही है।  योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी (सपा) को बड़ा झटका लगेगा. राजभर ने यहां तक कह दिया कि महाराष्ट्र और बंगाल छोड़िए, पूरी समाजवादी पार्टी भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है।  राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो रही है. सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं. ऐसे माहौल में राजभर का यह दावा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।  सपा पर क्यों साधा निशाना ? ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि जैसे-जैसे विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियों का शिकंजा कस रहा है, वैसे-वैसे सपा नेताओं की बेचैनी बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट परियोजना से जुड़े मामलों को लेकर पूरा उत्तर प्रदेश जानता है कि इन प्रकरणों में कौन लोग चर्चा के केंद्र में रहे हैं. राजभर के मुताबिक, जब जांच आगे बढ़ती है तो कुछ लोगों की परेशानी भी बढ़ती है. हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी नए साक्ष्य या संभावित दल-बदल करने वाले नेताओं का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका दावा बड़ा माना जा रहा है. राजभर ने अपने बयान में सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है।   पहले भी अखिलेश यादव पर हमलावर रहे हैं राजभर यह पहली बार नहीं है जब ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला हो. पिछले कुछ समय से दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती गई है. हाल ही में राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लंबी पोस्ट लिखी थी, जिसने राजनीतिक हलकों में काफी सुर्खियां बटोरी थीं. उस पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव के विदेश दौरे को निशाने पर लिया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि अगर घूमने ही जाना था तो लंदन और पेरिस की जगह काशी, अयोध्या, मथुरा, नैमिषारण्य या मां विंध्यवासिनी धाम चले जाते।  राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि यदि अखिलेश प्रदेश के धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर जाते तो स्थानीय व्यापारियों को रोजगार मिलता. फूल बेचने वाले, मिठाई विक्रेता, छोटे होटल कारोबारी और परिवहन से जुड़े लोगों को भी लाभ होता. उन्होंने कहा था कि ऐसे दौरों से उत्तर प्रदेश के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता और देश-दुनिया में सकारात्मक संदेश जाता. राजभर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि शायद अब अखिलेश यादव को लंदन और पेरिस ज्यादा पसंद आने लगे हैं और उन्हें विदेशी पर्यटन स्थलों पर जाना ज्यादा अच्छा लगता है।  नया भारत और नया उत्तर प्रदेश देखिए अपनी पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव को सलाह भी दी थी कि उन्हें देश और उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना चाहिए. उन्होंने लिखा था कि अब देश बदल चुका है और नया भारत तथा नया उत्तर प्रदेश विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है. काशी से अयोध्या, मथुरा से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं में बड़ा बदलाव आया है. राजभर ने कहा था कि अपने देश की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों को देखने में एक जिंदगी भी कम पड़ सकती है। 

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर पलटवार, बोले – सपा का लोकतंत्र और संविधान से कोई लेना-देना नहीं

जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण सपा का राजनीतिक पाखंड, अखिलेश की राजनीति परिवारवाद और स्वार्थवाद पर आधारित लखनऊ, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा हमेशा से लोकतंत्र के विरोध में रही है। आज वही पार्टी कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सत्ता पाने की साजिश कर रही है, यह वही कांग्रेस है जिसने देश पर आपातकाल थोपकर लोकतंत्र को कुचला था। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव जिस कांग्रेस के साथ मंच साझा कर रहे हैं, उसी कांग्रेस ने जयप्रकाश नारायण जी जैसे लोकतंत्र के प्रहरी को जेल में डाला था। एक तरफ आप जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हैं, दूसरी तरफ उन्हीं को जेल भेजने वालों से गठबंधन करते हैं, यह राजनीतिक पाखंड है। सपा का लोकतंत्र या संविधान से कोई लेना-देना नहीं ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा को लोकतंत्र या संविधान से कोई लेना-देना नहीं, उनका मकसद केवल सुर्खियां बटोरना और सत्ता की कुर्सी पर बैठना है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की राजनीति परिवारवाद और स्वार्थवाद पर आधारित है, जबकि भारतीय जनता पार्टी सर्व समाज की पार्टी है, जो बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के बनाए संविधान के अनुरूप काम कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि जयप्रकाश नारायण जी की जयंती भाजपा पूरे देश और दुनिया में मना रही है, क्योंकि इमरजेंसी के दौरान सबसे अधिक जनसंघ और आरएसएस के कार्यकर्ता जेलों में बंद किए गए थे। वहीं कई समाजवादी भी जेल भेजे गए थे, लेकिन सपा आज उनका त्याग भुलाकर कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता की सौदेबाजी कर रही है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जनता सब जानती है। सपा अब लोकतंत्र की नहीं, केवल सत्ता की पार्टी बन चुकी है। भाजपा जनता की सेवा और संविधान की रक्षा के लिए काम करती रहेगी।

विधान परिषद सदस्य डॉ. निर्मल ने समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना

लगाया आरोप: सपा सरकार में गंजिंग करने से भी डरती थीं महिलाएं जातिवाद का जहर घोलकर समाज में वैमनस्यता फैला रही है सपा: लालजी प्रसाद लखनऊ, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव शुरू से ही आरक्षण और दलितों के मसीहा बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विरोधी हैं। सपा शासन में मुख्यमंत्री रहते अखिलेश यादव ने दलित कर्मचारियों के प्रोन्नति में आरक्षण खत्म किया। वह चाहते तो  दलितों के साथ ही पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों के लिए भी प्रोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था लागू कर सकते थे। सपा दलितों के साथ ही पिछड़ा वर्ग की भी विरोधी है। बाबा साहब के खिलाफ अपमानजनक बातें करते हैं सपा के नेता डॉ. निर्मल ने आरोप लगाया कि सपा सांसद ने ही लोकसभा में दलित कर्मचारियों के प्रोन्नति में आरक्षण के बिल को फाड़ा। इतना ही नहीं, सपा के कई नेता बाबा साहब के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर अपमानजनक बात करते रहे, अब दलितों का वोट पाने की खातिर वह आरक्षण और अम्बेडकर की बात करने लगे हैं। जातिवाद समाप्त करने को संकल्पित है योगी सरकार एमएलसी डॉ. निर्मल ने कहा कि राज्य की योगी सरकार प्रदेश से जातिवाद खत्म करने को कृतसंकल्पित है तो ऐसे में अखिलेश यादव को दलितों के साथ ही पिछड़ा वर्ग को जोड़ने और उनके अधिकारों की बात याद आ रही है। मुख्यमंत्री जी हजरतगंज में जीएसटी कम होने से आम जन को होने वाले फायदे बता रहे थे, इस पर उनका कहना कि योगी जी गंजिंग करने गये थे। यह बेहद गलत है। सपा शासनकाल में तो कोई भद्र पुरुष या महिला स्वतंत्र होकर गंजिंग भी नहीं कर सकती थी। सपा के गुण्डाराज में महिलाएं घर में रहकर ही खुद को ज्यादा सुरक्षित समझतीं थीं। अखिलेश को दर्द, जमीन पर कब्जा नहीं कर पा रहे सपा के गुंडे डॉ. निर्मल ने कहा कि चाहे जमीनों पर कब्जा करने का मामला हो या नियुक्तियों में धांधली करके एक जाति विशेष को नौकरी देने का, सपा सरकार में यह सब संभव था, लेकिन योगी जी के नेतृत्व में चल रही राज्य सरकार में अब सपा के कथित गुंडे न तो दलितों और न ही सामान्य व्यक्ति की जमीन पर कब्जा कर पा रहे हैं। यही दर्द अखिलेश जी को है। यही वजह है कि योगी सरकार की जनहित की योजनाएं हों या जातिवादी व्यवस्था को खत्म करने की पहल, सपा इन सभी का विरोध कर रही है, लेकिन वंचित समाज के लोग अब समझ चुके हैं कि उनकी भलाई किसके साथ रहने में है। अब वे दोबारा सपा नेताओं के बहकावे में आने वाले नहीं हैं।

‘मस्जिद या पार्टी दफ्तर?’— सपा सांसदों की मीटिंग पर BJP ने खड़ा किया सवाल

नई दिल्ली समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव के दिल्ली में संसद भवन के बगल वाली मस्जिद में कथित तौर पर बैठक करने को लेकर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने आरोप लगाया कि अखिलेश ने इस मस्जिद को सपा का दफ्तर बना दिया है. जिसपर अब सपा मुखिया ने जवाब दिया है. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि वो लोगों में दूरियां देखना चाहती है, इसीलिए मेरे मस्जिद जाने पर विवाद खड़ा कर रही है. आस्था जोड़ती है…हालांकि, बीजेपी चाहती है कि लोग एकजुट न होकर बंटे रहें. हमारी सभी धर्मों में आस्था है. न्यूज एजेंसी से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा- मीडिया भी बीजेपी के चक्कर में फंस गई. आस्था जोड़ती है. किसी भी धर्म में कोई भी आस्था हो वो जोड़ती है. बीजेपी को तकलीफ है कि कोई आपस में जुड़े नहीं. बीजेपी लोगों में दूरियां देखना चाहती है. बीजेपी को तकलीफ है तो हम क्या करें. बीजेपी के हथकंडे को लोग जानते हैं. बीजेपी का हथियार ही धर्म है. वहीं, अखिलेश यादव द्वारा कथित तौर पर मस्जिद के अंदर बैठक करने पर समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने कहा- "क्या अब हमें मंदिर और मस्जिद जाने के लिए भाजपा से लाइसेंस लेना होगा…" दरअसल, बीते दिन अखिलेश यादव संसद भवन के बगल की मस्जिद में सपा नेताओं के साथ बैठे थे. जैसे ही उनकी तस्वीर सामने आई, इसको लेकर बीजेपी ने मुद्दा बनाना शुरू कर दिया. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने तस्वीर शेयर करते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश ने इस मस्जिद को सपा कार्यालय बना दिया है. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने इसको लेकर कड़ी आपत्ति जताई. साथ ही इसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने का ऐलान भी किया. तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कई सपा सांसद मस्जिद के अंदर अखिलेश यादव के साथ मौजूद हैं. इसमें रामपुर के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी नजर आ रहे हैं. वह इस मस्जिद के इमाम हैं. फिलहाल, बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दकी ने ऐलान किया है कि 25 जुलाई को जुमे की नमाज के बाद इसी मस्जिद में अखिलेश और उनके सांसद द्वारा की गई कथित बैठक का विरोध करेंगे. उधर, इस पूरे मामले में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने भी विरोध जताया है. बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने मस्जिद के अंदर हुई कथित पॉलिटिकल मीटिंग को मुसलमानों की भावनाओं को आहत करने वाला बताया है. उन्होंने अखिलेश से माफी की मांग की है. शादाब शम्स के मुताबिक, मस्जिदें आस्था का केंद्र होती हैं और वहां पर नमाज पढ़ी जाती है, ना कि सियासी बैठक की जाती है.