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तमिलनाडु विधानसभा में दिए बयान पर बढ़ी उदयिनिधि की कानूनी मुश्किलें

नई दिल्ली सनातन के खिलाफ अक्सर जहर उगलने वाले डीएमके विधायक और तमिलनाडु के नेता विपक्ष उदयनिधि स्टालिन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री विजय के सामने विधानसभा में सनातन को खत्म करना ही होगा कहने वाला मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। गौरतलब है कि कुछ साल पहले भी उदयनिधि ने सनातन पर इसी तरह की टिप्पणी की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार भी लगाई थी। हालांकि, इस बार टिप्पणी तमिलनाडु विधानसभा के भीतर की गई है। लाइव लॉ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर करते हुए उदयनिधि द्वारा सनातन धर्म को खत्म करने वाली टिप्पणी का जिक्र है। यह अर्जी एक अवमानना याचिका के तहत दाखिल की गई है। शाहीन अब्दुल्ला बनाम भारत संघ मामले में दायर एक रिट याचिका से कनेक्ट है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। यह अवमानना याचिका अमिता सचदेवा नाम की वकील ने दायर की। अर्जी में क्या कहा गया? अर्जी में कहा गया है कि हेट स्पीच और इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के साफ आदेश के बाद भी पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ ऐक्शन नहीं लिया। हालांकि, यह याचिका उनके पुराने बयान पर 29 अप्रैल को दायर की गई थी, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ बेंच ने स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन अब फिर से इसमें जोड़ा गया है कि तमिलनाडु विधानसभा की कार्रवाही के दौरान भी उदयनिधि ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही है। सनातन वाले बयान पर उदयनिधि की आई सफाई इससे पहले, सितंबर, 2023 में एक कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया से की थी और इसे खत्म किए जाने की बात कही थी। तब भी मामले पर काफी विवाद हुआ था और भाजपा समेत तमाम दलों के नेताओं ने हमला बोला था। हालांकि, अब तमिलनाडु वाली टिप्पणी पर उदयनिधि की सफाई आई है। उन्होंने कहा है कि हम किसी भी भगवान की आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि जाति के आधार पर जो भेदभाव होता आया है, उसका विरोध करते हैं। 'मैं डरने वाला इंसान नहीं हूं' एक्स पर एक पोस्ट में, विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि ने कहा, "जब मैंने तमिलनाडु विधानसभा में बात की, तो मैंने कहा था कि लोगों को बांटने वाली जाति व्यवस्था को खत्म कर देना चाहिए। कुछ लोग इस बात के लिए मेरी आलोचना करते हैं। मैं डरने वाला इंसान नहीं हूं। द्रविड़ आंदोलन विरोध से ही उभरा था। इस लिहाज से, मैं एक छोटी सी सफाई देना चाहूंगा।'' अपनी सफाई देते हुए उदयनिधि ने कहा कि जाति व्यवस्था को खत्म करने का मतलब धर्म या पूजा का विरोध नहीं समझा जाना चाहिए। जब मैं कहता हूं कि जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए, तो इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को भी मंदिर नहीं जाना चाहिए। सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए, न सिर्फ मंदिर में, बल्कि समाज में भी।"

काशी में यज्ञ-हवन के बीच 11 लोगों ने किया धर्म परिवर्तन, बोले- ‘अब नटराज शिव की शरण में’

वाराणसी धर्मनगरी वाराणसी के सेवापुरी विकास खंड अंतर्गत बाराडीह भूसौला गांव में आस्था और भक्ति का एक अलग ही नजारा देखने को मिला। यहां तीन मुस्लिम परिवारों के 11 सदस्यों ने पूरी श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाज के साथ 'घर वापसी' करते हुए सनातन धर्म को स्वीकार किया। धर्म जागरण मंच काशी जिला द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में यज्ञ, हवन और मंत्रोच्चार के बीच इन लोगों ने हिंदू धर्म में लौटने की घोषणा की। सनातन धर्म अपनाने वाले सभी लोग 'नट' बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। भुसवला पेट्रोल पंप के पीछे आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सफी नट, मुख्तार और वकील के परिवारों ने भाग लिया। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि उनके पूर्वजों ने करीब चार पीढ़ी पहले डर और प्रलोभन के वश में आकर सनातन धर्म को छोड़ दिया था और इस्लाम स्वीकार कर लिया था। लेकिन उनके मन में हमेशा से अपने मूल जड़ों के प्रति सम्मान बना रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम धर्म की मान्यताओं के बीच उन्हें एक 'घुटन' महसूस होती थी और वे लंबे समय से अपने आराध्य की शरण में लौटना चाहते थे। नटराज भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था कार्यक्रम के दौरान इन परिवारों ने बताया कि नट बिरादरी सदियों से 'नटराज' भगवान शिव की उपासक रही है। उन्होंने कहा, "हम लोग जन्मजात नटराज शिव के भक्त हैं। चार पीढ़ियों का अंतराल भले ही रहा हो, लेकिन हमारी सांस्कृतिक विरासत और भक्ति भगवान शिव से ही जुड़ी है। अब हम भगवान नटराज शिव की शरण में वापस आ गए हैं और आजीवन उन्हीं की आराधना करेंगे।" वैदिक अनुष्ठान और नए नामकरण शुद्धि कार्यक्रम के दौरान पंडितों और धर्म जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य यज्ञ संपन्न कराया। 11 सदस्यों ने हवन कुंड में आहुति डाली, जिसके बाद उन्हें गंगाजल से पवित्र किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी को माथे पर तिलक-चंदन लगाया गया और कलाई पर रक्षा सूत्र (कलावा) बांधकर सनातन धर्म में उनका स्वागत किया गया। घर वापसी करने वाले सदस्यों ने अपने पुराने नामों को त्यागकर सनातन धर्म के अनुरूप नए नाम भी स्वीकार किए। सामाजिक संगठनों की मौजूदगी इस धार्मिक अनुष्ठान के अवसर पर धर्म जागरण मंच के जिला संयोजक प्रदीप, रामाश्रय और आनंद समेत दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि इन परिवारों ने बिना किसी दबाव के अपनी स्वेच्छा से घर वापसी की है। बाराडीह भूसौला गांव और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना की खासी चर्चा है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय स्तर पर सतर्कता भी बरती गई।

आमिर से अंगद बने युवक ने किया घर वापसी, अब महादेवगढ़ मंदिर में चौकीदार

खंडवा  मध्य प्रदेश के खंडवा शहर स्थित महादेवगढ़ मंदिर में एक और मुस्लिम युवक ने सनातन के प्रति प्रेम दिखाते हुए घर वापसी की। आमिर से अंगद बने युवक ने कहा कि मैं महादेव का चौकीदार बनना पसंद करता हूं। अब वह मंदिर की चौकीदारी करेगा। सनातन धर्म में वापसी जानकारी के अनुसार क्षेत्र के कोटवाड़ा निवासी आमिर खान पेशे से चौकीदार है। आमिर ने मंदिर पहुंचकर पुजारी से सनातन धर्म में वापसी की प्रार्थना की। इसके बाद मंदिर समिति के संचालक अशोक पालीवाल ने उसकी भावना का सम्मान करते हुए तत्काल आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराईं।  

परिवार संग सलाम बने ‘राजवीर’, पं. धीरेंद्र शास्त्री के सान्निध्य में अपनाया सनातन धर्म

रायपुर राजधानी के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में चल रही हनुमंत कथा के तीसरे दिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाई। इस कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम परिवार ने हिंदू धर्म अपनाया। मुर्रा भट्टी के रहने वाले सलाम ने आज सनातन धर्म को अपना लिया। उन्होंने कहा कि मैं पहले भी पूजा-पाठ करता था लेकिन घर वाले मना करते थे। आज जब यहां घर वापसी का कार्यक्रम चल रहा था तो उन्होंने भी सनातन धर्म को अपनाने का सोचा और अब वे आज से सनातन धर्म को अपना लिया है। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उनसे कहा कि आप एक शपथ पत्र बनाकर एक कॉपी कलेक्टर को जरुर दें, आपका सनातन धर्म में स्वागत है। गंगाजल पिलाया जाए और तिलक लगाकर स्वागत किया गया। आज से सलमान राजवीर के नाम से जाना और पहचाना जाएगा। अपने प्रवचन में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भववान कहते हैं जीवन में माया और भक्ति का पहरा है। तुम्हें खुद नाचना है तो माया को चुनो, अगर मुझे नचाना है तो भक्ति। भगवान की भक्ति को प्राप्त करोगे तो परमात्मा तुम्हारे सामने नृत्य करेंगे। अगर तुम भगवान की माया को पाओगे तो तुम्हें संसार में नाचना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि जो पति को पतन से बचाए वही पत्नी है। पहले के जमाने में पत्नियां अपने पतियों को पतन से बचाती थी लेकिन आज के जमाने में जो तुम्हें करना है शो करो। केंवट को देने के लिए जब रामजी के पास कुछ नहीं था तब सीता जी भगवान राम से कहती हैं कि आपके हाथ में कुछ नहीं है पर आपके दूसरे वाले हाथ मतलब हमारे हाथ में तो कुछ है उसे ही दे दो। आपका हाथ और हमारा हाथ दो नहीं है क्योंकि आपके हाथ पर हमारा हाथ हमारे पिताजी ने रख करके आपको दान किया हुआ है। अब जो कुछ भी हमारा है वह आपका है। माताओं की आदत होती है बचत करने की। दिव्य दरबार में पहली अर्जी लगी हर्ष की हनुमंत कथा के तीसरे दिन सोमवार को बागेश्वर पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिव्य दरबार लगाया। दिव्य दरबार में पहली अर्जी हर्ष की लगी। लेकिन पहली सुनवाई शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारी की हुई। उन्होंने अपने पुत्रों से संबंधित समस्याएं बताई। पंडित जी ने कहा कि पहले छोटे पुत्र की समस्याएं सुलझाएंगे। इसके बाद बड़े पुत्र की। इसके बाद जिन लोगों की अर्जी लगी। उन्होंने अपनी समस्याएं बताई। जिन लोगों की अर्जी लगी उनमें बहुत सारे लोगों ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री से माइक से अपनी समस्याओं को सार्वजनिक नहीं करने का आग्रह किया। पंडित जी ने माइक हटाकर उनकी समस्याएं सुनी, उन्हें समाधान बताया। शुभम नाम के एक युवा पंडित धीरेंद्र शास्त्री की पेंटिंग लेकर पहुंचा। उसकी भी अर्जी लगी। उन्होंने कहा कि गायक बनना चाहता हूं। उन्होंने भगवान रामजी का भजन भी सुनाया।