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कर्मवीर सम्मान–2026 से नवाजे जाएंगे संतोष चौबे, साहित्य और शिक्षा जगत में योगदान का सम्मान

 संतोष चौबे होंगे कर्मवीर सम्मान–2026 से सम्मानित भोपाल माधवराव सप्रे संग्रहालय, भोपाल द्वारा अपने 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में वरिष्ठ कवि–कथाकार, विश्व रंग के निदेशक एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे को प्रतिष्ठित 'कर्मवीर सम्मान–2026' से सम्मानित किया जाएगा।  यह सम्मान समारोह 19 जून (शुक्रवार) को सुबह 10.30 बजे सप्रे संग्रहालय, भोपाल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल के मुख्य आतिथ्य और तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक तथा वैश्विक हिंदी पत्रकारिता के अध्येता डॉ. जवाहर कर्नावट को भी कर्मवीर सम्मान प्रदान किया जाएगा। साथ ही इतिहास एवं पुरातत्व के अध्येता डॉ. सुभाष अत्रे, संस्कृति मर्मज्ञ श्री श्रीराम तिवारी तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री नुरूल हसन 'नूर' भी सम्मानित होंगे।  इस अवसर पर मध्यप्रदेश अभिलेखागार के पूर्व संचालक श्री शंभुदयाल गुरू द्वारा प्रदत्त साहित्य से इतिहास प्रभाग का शुभारंभ भी होगा।

संतोष चौबे होंगे कर्मवीर सम्मान–2026 से सम्मानित

भोपाल माधवराव सप्रे संग्रहालय, भोपाल द्वारा अपने 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में वरिष्ठ कवि–कथाकार, विश्व रंग के निदेशक एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति  संतोष चौबे को प्रतिष्ठित 'कर्मवीर सम्मान–2026' से सम्मानित किया जाएगा।  यह सम्मान समारोह 19 जून (शुक्रवार) को सुबह 10.30 बजे सप्रे संग्रहालय, भोपाल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद पटेल के मुख्य आतिथ्य और तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष  रघुनंदन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक तथा वैश्विक हिंदी पत्रकारिता के अध्येता डॉ. जवाहर कर्नावट को भी कर्मवीर सम्मान प्रदान किया जाएगा। साथ ही इतिहास एवं पुरातत्व के अध्येता डॉ. सुभाष अत्रे, संस्कृति मर्मज्ञ  राम तिवारी तथा वरिष्ठ पत्रकार  नुरूल हसन 'नूर' भी सम्मानित होंगे।  इस अवसर पर मध्यप्रदेश अभिलेखागार के पूर्व संचालक  शंभुदयाल गुरू द्वारा प्रदत्त साहित्य से इतिहास प्रभाग का शुभारंभ भी होगा।

भारतीय भाषाओं को आगे ले जाने का काम कर रही विश्वरंग की पहल : संतोष चौबे

“आरंभ” – विश्वरंग मुंबई 2025 का भव्य समापन मुंबई  ‘आरंभ – विश्वरंग मुंबई 2025’ के दो  दिवसीय आयोजन मुंबई विश्वविद्यालय के ग्रीन प्रौद्योगिकी सभागार में विविध सत्रों के साथ सम्पन्न हुआ। पूरे दिन चले कार्यक्रमों में भारतीय भाषा, सिनेमा, साहित्य, विज्ञान संचार और रंगमंच की समृद्ध परंपराओं को नए दृष्टिकोण से अवगत कराया। इस अवसर पर विश्वरंग निदेशक और रबिन्द्र नाथ टैगोर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की पहचान है। आज बातचीत, रचनात्मकता, पढ़ाई-लिखाई और तकनीक के क्षेत्र में इसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विश्वरंग की पहल हिंदी और भारतीय भाषाओं को और आगे ले जाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम की शुरुआत “भारतीय सिनेमा का भाषा और संस्कृति के विकास में योगदान” विषयक सत्र से हुई। इस अवसर पर ‘विश्वरंग संवाद – सिनेमा विशेषांक’ का विमोचन किया गया। सत्र में पुरुषोत्तम अग्रवाल, अशोक मिश्रा, अनंग देसाई, रूमी जाफरी, अजय ब्रह्मात्मज, सलीम आरिफ और छाया गांगुली की उपस्थिति रही। रूमी जाफरी ने अपनी पुस्तक ‘भोपाली टप्पे’ का एक प्रसंग साझा किया, वहीं सलीम आरिफ ने ‘शोले’ और ‘लागान’ का उदाहरण देते हुए सिनेमा के सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डाला। अजय ब्रह्मात्मज ने हिंदी में लेखन और कथा–संरचना पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई, अशोक मिश्रा ने सिनेमाई भाषा और बोली के प्रयोग पर अपने विचार प्रस्तुत किए। अनंग देसाई ने सिनेमा उद्योग में अपने अनुभव साझा किए और पुरुषोत्तम अग्रवाल ने साहित्य–सिनेमा के संबंध पर विस्तार से चर्चा की, सत्र का संचालन रवींद्र कात्यायन ने किया।  इसके पश्चात "मायानगरी का रंग संसार" सत्र का आयोजन हुआ इस सत्र में वामन केंद्रे, जयंत देशमुख, प्रीता माधुर, अतुल तिवारी और अखिलेंद्र मिश्रा ने मंचकला, रंग–प्रस्तुति और नाट्य–परंपराओं पर अपने विचार साझा किए।अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने हिंदी रंगमंच की विशेषताओं, उसकी चुनौतियों और उसके सशक्त प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने थिएटर को रचनात्मकता की वास्तविक प्रयोगशाला बताते हुए नए कलाकारों के लिए इसकी अनिवार्यता पर बल दिया। जयंत देशमुख ने मंच को समाज का जीवंत प्रतिरूप बताया, जबकि अतुल तिवारी ने हबीब तनवीर के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस सत्र के दौरान ‘रंग संवाद – हबीब तनवीर अंक’ का विमोचन किया गया। इसके पश्चात “भारतीय भाषाओं में विज्ञान संचार” सत्र की अध्यक्षता विश्वरंग निदेशक श्री संतोष चौबे ने की। वक्ताओं में कृष्ण कुमार मिश्रा, मनीष मोहन गोरे, रमाशंकर, समीर गांगुली, नरेंद्र देशमुख, डॉ. कुलवंत सिंह और रीता कुमार शामिल रहे। सत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विज्ञान तब तक जनसामान्य तक प्रभावी रूप से नहीं पहुँच सकता, जब तक वह लोगों की भाषा में सरल, सहज और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत न हो। संतोष चौबे ने कहा कि विश्वरंग जनभाषाओं के माध्यम से विज्ञान संचार को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस अवसर पर ‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिये – नवंबर 2025’ अंक का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम के आखिरी सत्र में “शताब्दी समारोह – धर्मवीर भारती : विश्व साहित्य चेतना के रचनाकार” शीर्षक सत्र विशेष आकर्षण रहा। इस सत्र की मुख्य अतिथि श्रीमती पुष्पा भारती रहीं। वक्ताओं में संतोष चौबे, विश्वनाथ सचदेव, हरि मृदुल और हरीश पाठक शामिल हुए। वक्ताओं ने धर्मवीर भारती के साहित्य, उनकी दृष्टि, रचनात्मकता और सांस्कृतिक योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत किए। श्रीमती पुष्पा भारती ने धर्मवीर भारती के लेखन को संवेदना, विचार–गहराई और सृजनशीलता का विशिष्ट उदाहरण बताया। सत्र के अंत में ‘गुनाहों का देवता’ के 189वें संस्करण का औपचारिक विमोचन किया गया। दिवस के समापन पर श्री संतोष चौबे ने घोषणा की कि आगामी भव्य आयोजन ‘विश्वरंग 2025’ का  27, 28 और 29 नवंबर को भोपाल में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “मुंबई से आरंभ हुई यह सांस्कृतिक यात्रा भोपाल में अपने उत्कर्ष पर पहुँचेगी और भारतीय भाषा, साहित्य और संस्कृति के वैश्विक विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगी।”