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‘नाम बदलकर श्रेय लूट रही सरकार’—मोहल्ला क्लीनिक विवाद पर सौरभ भारद्वाज के गंभीर आरोप

नई दिल्ली दिल्ली की राजनीति में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मोहल्ला क्लीनिकों और पुरानी डिस्पेंसरियों का नाम बदलकर ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ रख रही है और इसे नई उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार 370 आरोग्य मंदिर खोलने का दावा कर रही है, लेकिन मुख्यमंत्री को जनता को यह बताना चाहिए कि इनमें से कितने केंद्र नई इमारतों में संचालित हो रहे हैं और कितने पहले से चल रही स्वास्थ्य सुविधाओं में ही नाम बदलकर शुरू किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन 370 में से कितने पहले मोहल्ला क्लीनिक थे, कितने दिल्ली सरकार की डिस्पेंसरियां थीं और कितने एमसीडी की स्वास्थ्य इकाइयां थीं। आप नेता ने आरोप लगाया कि सरकार जमीन पर कोई नई स्वास्थ्य संरचना खड़ी करने के बजाय पूर्ववर्ती अरविंद केजरीवाल सरकार के दौरान शुरू किए गए मोहल्ला क्लीनिकों का नाम बदलकर वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अधिकांश आरोग्य मंदिर उन्हीं भवनों में चल रहे हैं जहां पहले से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध थीं और वहां तैनात डॉक्टर, फार्मासिस्ट व अन्य स्टाफ भी वही हैं। सौरभ भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि सीएम रेखा गुप्ता ने मोहल्ला क्लीनिकों के स्टाफ से वादा किया था कि किसी की नौकरी नहीं जाएगी, लेकिन बाद में कई कर्मचारियों को हटाया गया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल कर्मचारियों के परिवारों पर आर्थिक संकट आया है, बल्कि सरकार की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। आप नेता ने कहा कि दिल्ली की जनता सच्चाई जानती है और केवल नाम बदलने से स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति नहीं सुधरती। उन्होंने मुख्यमंत्री से पारदर्शिता बरतते हुए विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितने नए आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं और कितने पुराने ढांचे को ही नया नाम दिया गया है।

सौरभ भारद्वाज की विवादित टिप्पणी: आखिर LG के लिए ऐसी कठोर कामना क्यों?

नई दिल्ली दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक सौरभ भारद्वाज एलजी वीके सक्सेना पर भगवान के प्रकोप और उन्हें पीड़ा मिलने की कामना कर रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आप सरकार को पंगु बनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जानबूझकर ऐसे अधिकारियों की तैनाती की गई जिससे कामकाज में बाधा आए। उन्होंने भाजपा और पीएम मोदी पर भी निशाना साधा है। दरअसल, सौरभ भारद्वाज की यह प्रतिक्रिया उस घटनाक्रम पर आई है जिसके तहत जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने दिल्ली जल बोर्ड के 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। आप नेता का कहना है कि उनकी सरकार से जो अधिकार छीन लिए गए थे उसका इस्तेमाल अब भाजपा सरकार कैसे कर रही है।   'ईश्वर से मेरी प्रार्थना' शीर्षक के साथ एक पोस्ट में सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पिछले दस लंबे वर्षों से दिल्ली की AAP सरकार को जानबूझकर पंगु बना दिया गया। एक चुनी हुई राज्य सरकार की बुनियादी और जायज शक्तियों को छीनकर मोदी प्रशासन ने गवर्नेंस को एक संघर्ष में बदल दिया। उन्होंने कहा, ‘BJP और उसकी केंद्र सरकार ने बार बार यह तर्क दिया कि चूंकि दिल्ली एक राजधानी है इसलिए अधिकारियों के ट्रांसफर की शक्ति राज्य सरकार को नहीं दी जा सकती। उन्होंने चुनी हुई सरकार के प्रतिनिधियों के लिए भ्रष्ट या लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक ऐक्शन लेना असंभव बना दिया।’ 'सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार लौटाए तो कानून बनाकर छीना' भारद्वाज ने कहा कि जब मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने न्यायपूर्ण तरीके से ये शक्तियां दिल्ली सरकार को लौटा दी थीं तब उन्हें एक अनैतिक और असंवैधानिक कानून के जरिए फिर से छीन लिया गया। केंद्र सरकार ने मतदाताओं की आवाज को दबा दिया। उन्होंने पूछा कि आज आज उसी कानून के रहते एक मंत्री अधिकारियों का ट्रांसफर और सस्पेंशन कैसे कर सकता है? 'भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को संरक्षण' भारद्वाज ने कहा कि एजी साब ने सिस्टेमैटिक तरीके से अकुशल और लापरवाह अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों में तैनात किया था। भ्रष्टाचार और खुलेआम अनुशासनहीनता की अनगिनत शिकायतों के बावजूद उन अधिकारियों को LG द्वारा संरक्षण दिया गया और वे संवेदनशील पदों पर बने रहे। यह एक क्रूर विडंबना है कि मंत्रियों को एक चपरासी तक का तबादला करने की अनुमति नहीं दी गई फिर भी उनसे हर दिन डिलीवरी के बारे में सवाल पूछे गए। जानबूझकर ऐसी बाधाएं पैदा कीं जिससे गरीबों को कष्ट: भारद्वाज आप नेता ने पीएम पर निशाना साधाते हुए कहा, ‘यह श्री नरेंद्र मोदी के असली चेहरे और उनके गवर्नेंस के स्टाइल को उजागर करता है। यह एक ऐसे नेता को उजागर करता है जो राजनीतिक लाभ के लिए अपने ही देश के लोगों को दंडित करने के लिए तैयार है। इस प्रशासन ने जानबूझकर ऐसी बाधाएं पैदा कीं जिससे लाखों गरीब निवासियों को भारी कष्ट झेलना पड़ा। CS नरेश कुमार और हेल्थ सेक्रेटरी एसबी दीपक कुमार जैसे अधिकारियों की हरकतों ने (LG विनय सक्सेना के संरक्षण में) सबसे कमजोर वर्ग के लिए बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का गला घोंट दिया। उन्होंने कैंसर के मरीजों या डायलिसिस पर निर्भर लोगों तक को नहीं बख्शा। यह पूरी तरह से संवेदनहीन और निर्दयी है।’ भारद्वाज ने कहा- भगवान के प्रकोप का सामना करना पड़े भारद्वाज ने एलजी और अन्य अधिकारियों को पीड़ा मिलने की प्रार्थना की। उन्होंने लिखा, 'मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि गरीबों की इस पीड़ा को पैदा करने के लिए जिम्मेदार सभी लोग (एलजी दिल्ली, नरेश कुमार और एसबी दीपक कुमार और अन्य) भगवान के प्रकोप का सामना करें और उन्हें उनकी इस क्रूरता के लिए वैसी ही पीड़ा मिले।'  

प्रदूषण पर व्यंग्य बना कानूनी मुसीबत, सांता क्लॉज वीडियो को लेकर AAP नेताओं पर केस दर्ज

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने AAP नेता सौरभ भारद्वाज, संजय झा और आदिल अहमद खान के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह FIR सांता क्लॉज़ से जुड़ा एक वीडियो बनाकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दर्ज की गई है। इस मामले में प्राप्त शिकायत के अनुसार 17 और 18 दिसंबर 2025 को इन नेताओं ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स से एक वीडियो पोस्ट किया था। यह वीडियो कनॉट प्लेस में किए गए एक राजनीतिक स्किट (प्रदर्शन) से जुड़ा है। वीडियो में सांता क्लॉज, जो कि ईसाई समुदाय के लिए एक पवित्र और सम्मानित धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीक हैं, को मजाकिया और अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। वीडियो में सांता क्लॉज को सड़क पर बेहोश होकर गिरते हुए दिखाया गया और उन्हें राजनीतिक संदेश देने के लिए एक प्रॉप (साधन) की तरह इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, वीडियो में नकली CPR करते हुए सांता क्लॉज का मजाक भी उड़ाया गया, जिससे सेंट निकोलस और क्रिसमस पर्व की पवित्रता को ठेस पहुंची। शिकायत में कहा गया है कि यह सब जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया, ताकि ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा सके। एडवेंट के अंतिम दिनों में धार्मिक प्रतीक का इस तरह राजनीतिक इस्तेमाल करना ईसाई धर्म का अपमान माना गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, सार्वजनिक रूप से किसी धार्मिक प्रतीक का मजाक उड़ाना BNS की धारा 302 का उल्लंघन है। दिल्ली पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। यह मामला अधिवक्ता खुशबू जॉर्ज की शिकायत पर दर्ज किया गया है। आम आदमी पार्टी ने उन्हें भाजपा कार्यकर्ता बताया है। साथ ही भाजपा नेताओं के साथ उनके कुछ फोटोज भी शेयर किए हैं। ‘तब भाजपा के किसी ईसाई कार्यकर्ता की धार्मिक भावना आहत नहीं हुई’ उधर इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'सांता क्लॉज की स्किट पर FIR हो गई है। सोशल मीडिया और आप लोगों की ताक़त से आज भाजपा बहुत परेशान हैं। ये सोशल मीडिया की ताक़त है कि भाजपा सरकार को प्रदूषण पर जवाब देना पड़ रहा है, AQI पर चर्चा हो रही है। सांता क्लॉज की स्किट से हमने प्रदूषण के मुद्दे को जन जन तक पहुँचाया, जिससे दिल्ली और केंद्र की सरकार को काफ़ी परेशानी है। ये सोशल मीडिया की ताक़त है कि अरावली पर्वतमाला पर सरकार बैकफुट पर आई है। कुलदीप सिंह सेंगर वाला मामला और उत्तराखंड की अंकिता भंडारी वाला मामला भी उल्टा पड़ रहा है।' इसके आगे उन्होंने लिखा, 'अब डराने, धमकाने के लिए ED, CBI, दिल्ली पुलिस की FIR का दौर चल रहा है। संघियों का प्रॉपगेंडा अब एक्सपोज़ हो रहा है तो डर रहे हैं। अभी इनको और Expose करना है और भी डराना है। भाजपा के ही कार्यकर्ता अब ईसाई का मुखौटा लगाकर कह रहे है , उनकी धार्मिक भावना आहत हो गई, और पुलिस FIR दर्ज कर रही है। जब दिल्ली के लाजपत नगर में सांता क्लॉज की टोपियाँ खींची गई, धमकाया गया, गाली देकर भगाया गया, तब किसी भाजपा के ईसाई कार्यकर्ता की धार्मिक भावना आहत नहीं हुई। जिसकी धार्मिक भावना आहत हुई है उनकी भाजपा के नेताओं के साथ तस्वीर ही तस्वीर है, इनको मुफ्त की पब्लिसिटी नहीं देना।'  

सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत, सौरभ भारद्वाज बोले—‘प्रणाली को ठीक करना जरूरी’

नई दिल्ली  आम आदमी पार्टी के नेताओं ने रियलिटी चेक कर दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया कि दिल्ली में भाजपा सरकार आने के बाद सरकारी अस्पतालों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। मुफ्त दवा, टेस्ट और सर्जरी जैसी मूलभूत सुविधाएं अब केवल नाम मात्र की रह गई हैं। 'आप' दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने बीते गुरुवार को राजीव गांधी अस्पताल का निरीक्षण किया था, वहीं शुक्रवार को कोंडली के विधायक कुलदीप कुमार ने लाल बहादुर शास्त्री (एलबीएस) अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने दावा किया कि यहां मरीजों को निर्धारित दवाइयों का आधा हिस्सा भी अस्पताल से नहीं मिल रहा है और ज्यादातर महंगी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। कुलदीप कुमार ने बताया कि डॉक्टरों द्वारा मरीजों को 8 से 10 दवाइयां लिखी जा रही हैं, लेकिन अस्पताल से केवल 1 या 2 सस्ती दवाइयां ही दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भाजपा सरकार की नाकामी को उजागर करती है। केजरीवाल सरकार के समय में महंगी से महंगी दवाइयां, टेस्ट और सर्जरी पूरी तरह मुफ्त हुआ करती थीं। आम आदमी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान कई मरीजों ने अपनी शिकायतें बताईं। एक बुजुर्ग मरीज ने कहा कि उन्हें केवल दो दवाइयां दी गईं, जबकि बाकी पर ‘कट’ लगाकर बाहर से लाने को कहा गया। एक अन्य मरीज ने शिकायत की कि सात दवाइयों में से केवल एक मिली, बाकी छह बाहर से खरीदनी पड़ीं। कुछ मरीजों ने यह भी बताया कि पहले सभी दवाइयां अस्पताल में मिल जाती थीं, पर अब 'बाहर से लो' कहकर भेज दिया जाता है। कुलदीप कुमार ने कहा कि इमरजेंसी में भी दवाइयों की भारी कमी है और मरीजों को जन औषधि केंद्र की ओर भेजा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इन दुकानों को अस्पतालों के बाहर जानबूझकर खुलवाया है ताकि गरीब मरीजों से पैसे वसूले जा सकें। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा राज में सरकारी अस्पताल खुद बीमार हो गए हैं। प्रदूषण से बढ़ती बीमारियों और अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिलने से दिल्लीवासियों पर दोहरी मार पड़ रही है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार में मरीजों को दवा, टेस्ट और सर्जरी सब कुछ मुफ्त मिलता था, जबकि अब वर्तमान सरकार ने गरीबों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि जमीनी सच्चाई यह है कि मरीजों को न दवाइयां मिल रही हैं, न टेस्ट फ्री हो रहे हैं। गरीब लोग सुबह से लाइन में लगते हैं और दोपहर तक दवा के लिए भटकते रहते हैं।