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प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का करियर मार्गदर्शन यूनिसेफ के सहयोग से दिया जायेगा

सांदीपनि विद्यालयों में यूनिसेफ के सहयोग से चलेगा कॅरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम नोडल शिक्षक की मदद से सभी विद्यार्थियों के करियर डायरी और फोल्डर होंगे तैयार प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का करियर मार्गदर्शन यूनिसेफ के सहयोग से दिया जायेगा भोपाल प्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों का करियर मार्गदर्शन यूनिसेफ के सहयोग से दिया जायेगा। कॅरियर रिफ्रेशर प्रशिक्षण के द्वारा प्रत्येक विद्यालय के एक नोडल शिक्षक को संसाधनों को उपयोग करने के लिये सक्षम बनाया जा रहा है। नोडल शिक्षक के माध्यम से ही विद्यालय में कॅरियर मार्गदर्शन प्रदान करने वाली गतिविधियां संचालित की जायेंगी। कॅरियर मार्गदर्शन के संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त लोक शिक्षण कार्यालय ने प्रदेश के समस्त सांदीपनि विद्यालय के प्राचार्यों को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश जारी किये हैं। विद्यालय स्तर पर गतिविधियों का संचालन नोडल शिक्षक एवं कक्षा शिक्षक की सहायता से सभी विद्यार्थियों से कॅरियर इनफॉर्मेशन डायरी और कॅरियर फोल्डर तैयार कराया जायेगा, जिसमें हर माह की कॅरियर संबंधी जानकारी संधारित कराई जायेगी। कॅरियर गतिविधियों का संचालन राज्य स्तर से जारी कॅरियर कैलेंडर के अनुसार विद्यालयों में नियमित रूप से संचालित कराया जायेगा। निर्देश में यह भी कहा गया है कि विद्यालय समय सारणी में विद्यार्थियों के कॅरियर मार्गदर्शन के लिये कम से कम 2 पीरियड प्रति माह आवंटित किये जायें। विद्यालय में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार कॅरियर नोडल शिक्षक एवं सहयोगी शिक्षकों के माध्यम से कॅरियर मार्गदर्शन सत्रों की योजना बनाकर सुव्यवस्थित संचालन करवाया जाये। कॅरियर गाइडेंस में प्रशिक्षित नोडल शिक्षक के माध्यम से विद्यालय के कक्षा 9 से 12 तक अध्यापन कराने वाले अन्य 2 शिक्षकों को भी शाला स्तर पर प्रशिक्षित करके उनका सहयोग लिया जाये। प्रार्थना सभा में मिलेगी विस्तृत जानकारी विद्यालय में प्रार्थना सभा में कॅरियर गाइडेंस के तहत किसी एक डोमेन से संबंधित एक या दो कॅरियर कार्ड की संक्षिप्त जानकारी सप्ताह में किन्हीं 3 दिनों में साझा की जा सकती है। इस प्रक्रिया से विद्यार्थी कॅरियर के प्रति रूचि लेकर स्वयं कार्ड पढ़कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेगा। निर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक सांदीपनि विद्यालय में एक कॅरियर कार्नर बनाया जाये जिसमें कॅरियर संबंधी सामग्री, कॅरियर कार्ड, पोस्टर, ब्रोशर और विद्यार्थी द्वारा बनाई गई सामग्री प्रदर्शित की जाये। कॅरियर मेला का आयोजन सांदीपनि विद्यालय के प्राचार्यों से इस शैक्षणिक सत्र में जनवरी माह में कॅरियर मेला आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के लिये कहा गया है। विद्यालय स्तर पर मॉनिटरिंग के लिये प्राचार्यों से कहा गया है कि कॅरियर मार्गदर्शन से संबंधित विमर्श पोर्टल की मॉनिटरिंग फार्म को नोडल शिक्षक की सहायता से भरवाया जाये। प्राचार्य द्वारा कम से कम 2 कॅरियर मार्गदर्शन कक्षाओं का अवलोकन करके संबंधित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन दिया जाये। राज्य स्तर की गतिविधियां राज्य स्तर कॅरियर मार्गदर्शन के लिये आवश्यक संसाधन जिनमें 501 करियर कार्डस् हिन्दी एवं अंग्रेजी में, पोस्टर, ब्रोशर और 7 एजुकेशनल वीडियो को विमर्श पोर्टल पर अपलोड कराया जा रहा है। प्रत्येक माह में नोडल शिक्षकों के साथ एक घंटे की ऑनलाइन समीक्षा की जायेगी। इस वर्ष अक्टूबर एवं दिसंबर में कॅरियर  संबंधित विषयों पर वेबिनार के आयोजन का भी किया जाना प्रस्तावित है।  

पालक, विद्यार्थी और शिक्षक शिक्षा व्यवस्था में आए सुधार से प्रसन्न

रायपुर : युक्तियुक्तकरण से संबलपुर स्कूल में शिक्षकों की बहाली, पढ़ाई को मिली रफ्तार राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा रही  पालक, विद्यार्थी और शिक्षक शिक्षा व्यवस्था में आए सुधार से प्रसन्न रायपुर प्रदेशभर में शालाओं में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में बालोद जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड स्थित पीएमशासकीय प्राथमिक शाला संबलपुर में शिक्षकों की वर्षों पुरानी कमी अब दूर हो गई है। शिक्षकों की पदस्थापना से अब विद्यालय में अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था न केवल व्यवस्थित हुई है, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्राप्त हो रही है। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के अंतर्गत यहां दो नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिससे विद्यालय में अब कुल पांच शिक्षक कार्यरत हैं। विद्यालय में शिक्षकों की इस बहुप्रतीक्षित नियुक्ति को लेकर शाला विकास समिति, पालकगण और ग्रामीणों ने प्रसन्नता जाहिर की है। साहित्यकार एवं शिक्षाविद बिरेन्द्र निरोटी तथा शाला विकास समिति के अध्यक्ष गंगाराम निषाद ने राज्य शासन की इस पहल की सराहना करते हुए बताया कि विद्यालय में 150 से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं, किंतु पूर्व में केवल तीन शिक्षक कार्यरत थे। अब दो अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना से कक्षाएं नियमित और विषयवार संचालित हो रही हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी हिमांशु मिश्रा ने जानकारी दी कि युक्तियुक्तकरण के तहत विद्यालय में श्रीमती बसंती टिकेश्वर और राबिन नागवंशी की नियुक्ति की गई है। वर्तमान में विद्यालय में प्रधानपाठक श्रीमती वीणा ठाकुर, अनिल दिल्लीवार और श्रीमती सुनीता सहित कुल पाँच शिक्षक शिक्षण कार्य कर रहे हैं। विद्यालय में शिक्षकों की संख्या बढ़ने से विद्यार्थियों में पढ़ाई को लेकर उत्साह बढ़ा है। पालकों ने बताया कि अब बच्चे घर आकर स्कूल की गतिविधियों के बारे में खुशी से चर्चा करते हैं। शासन की इस पहल से न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति (ड्रॉपआउट) पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है। ग्रामीणों ने इस सकारात्मक पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शिक्षा विभाग के प्रति आभार जताया है और विश्वास व्यक्त किया है कि ऐसी योजनाएं शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएंगी।

दो शिक्षकों की पदस्थापना से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, बच्चों व पालकों में दिखा उत्साह

रायपुर : युक्तियुक्तकरण से बदली तस्वीर : पतरापारा महलोई प्राथमिक शाला में पढ़ाई को मिली रफ्तार राज्य शासन द्वारा प्रारंभ की गई युक्तियुक्तकरण नीति का प्रभाव अब गांव-गांव में नजर आने लगा दो शिक्षकों की पदस्थापना से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, बच्चों व पालकों में दिखा उत्साह रायपुर राज्य शासन द्वारा प्रारंभ की गई युक्तियुक्तकरण नीति का प्रभाव अब गांव-गांव में नजर आने लगा है। रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पतरापारा महलोई स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षकों की नई पदस्थापना से शैक्षणिक वातावरण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। पहले यह स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा था, लेकिन अब दो शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति के बाद पढ़ाई में नई ऊर्जा और दिशा आई है। विद्यालय में वर्तमान में कक्षा 1 से 5 तक कुल 78 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। पूर्व में एक ही शिक्षक के भरोसे सभी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा था, जिससे न केवल शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी, बल्कि विद्यार्थियों को विषय आधारित शिक्षा भी सीमित रूप से मिल पा रही थी। अब दो शिक्षकों की उपस्थिति से समयबद्ध, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित हुआ है। विद्यालय के परिवेश में आए इस सकारात्मक बदलाव से पालकों में भी उत्साह का माहौल है। अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने आई श्रीमती प्रमिला परजा ने कहा कि अब उनके बच्चे घर लौटकर स्कूल की पढ़ाई और गतिविधियों के बारे में खुशी से बताते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में उन्हें इस बात की चिंता रहती थी कि एक शिक्षक इतने सारे बच्चों को कैसे सम्हालेंगे, लेकिन अब दो शिक्षकों की नियुक्ति से बच्चों को ध्यानपूर्वक पढ़ाया जा रहा है और वे पढ़ाई में भी अधिक रुचि लेने लगे हैं। राज्य शासन की इस पहल से न केवल बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिला है, बल्कि ड्रॉपआउट दर में भी गिरावट की उम्मीद जताई जा रही है। शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता से बच्चों की पढ़ाई अब नियमित और व्यवस्थित रूप से हो रही है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सीधा सुधार देखा जा रहा है। युक्तियुक्तकरण योजना के तहत की गई यह पहल ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है। इससे बच्चों को न केवल उनके गांव में ही बेहतर शिक्षा मिल रही है, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव भी मजबूत हो रही है।  

युक्ति युक्तकरण से सुदूरवर्ती गाँव सांचरबहार के शिक्षकविहीन स्कूल को मिला शिक्षक

रायपुर  इस  गाँव में शिक्षा की मशाल जल चुकी है…स्कूल खोलकर यहाँ के विद्यार्थियों को शिक्षा से न सिर्फ जोड़ा जा चुका है..अब वर्षों से शिक्षकविहीन इस विद्यालय में नियमित शिक्षक की नियुक्ति से विद्यार्थियों के साथ गाँव के लोगों में खुशियों का वातावरण है। शिक्षकविहीन की श्रेणी में आने वाले इस विद्यालय में राज्य शासन के फैसलों के बाद अतिशेष शिक्षको के युक्ति युक्तकरण की अपनाई गई प्रक्रिया ने यहाँ ज्ञान की नई रोशनी और उम्मीदों का दीया जला दिया है।        कोरबा ब्लॉक के सुदूरवर्ती ग्राम सांचरबहार ग्राम पंचायत नकिया का आश्रित ग्राम है। इस विद्यालय में वर्षों से नियमित शिक्षक पदस्थ नहीं था। स्कूल खुलने के साथ ही गाँव के लोगों की आस थी कि उनके बच्चे भी सही ढंग से पढ़ाई कर पाएंगे, दुर्भाग्यवश उनकी आस अधूरी ही थी, क्योंकि नियमित शिक्षक नहीं होने का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता था। अब जब विद्यालय में नियमित शिक्षक की नियुक्ति हुई है, तो गांव में उत्सव जैसा माहौल है।      गाँव में रहने वाली वृद्धा मैसो बाई खुश है कि स्कूल को नियमित शिक्षक मिल गया है अब उनका नाती-नतिनी ठीक से पढ़ाई कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि रिया और आशीष विद्यालय जाते हैं। गाँव की महिला राजकुमारी बाई ने बताया कि उनका बेटा प्रमेन्द्र स्कूल जाता है। पहले आसपास के विद्यालयों से किसी शिक्षक को स्कूल भेजकर काम चलाया जाता था। अब नियमित शिक्षक आ जाने से हम सभी खुश है कि हमारे गाँव के स्कूल और बच्चों की नई पहचान बनेगी और उनकी पढ़ाई भी आसान होगी।       शासन की युक्ति युक्तकरण से इस विद्यालय में नियुक्त सहायक शिक्षक शेखरजीत टंडन ने बताया कि विद्यालय शहर से बहुत दूर है और अभी नई नियुक्ति के साथ ही लेमरू में ठहरने की व्यवस्था कर वहाँ से नियमित विद्यालय आते हैं। उन्होंने बताया कि बारिश में आवागमन थोड़ा चुनौती है, आने वाले समय में रास्ता पक्का हो जाने के साथ ही समस्या दूर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि युक्ति युक्तकरण के काउंसिलिंग प्रक्रिया में उन्होंने इस विद्यालय का चयन किया है। विद्यालय में अभी 11 बच्चे दर्ज है और उन्हें खुशी है कि सुदूरवर्ती गाँव सांचरबहार के विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ने का उन्हें अवसर मिला। उन्होंने बताया कि इससे पहले दूरस्थ क्षेत्र श्यांग के स्कूल में भी पदस्थ रहकर अध्यापन कर चुके हैं, अब सांचरबहार के शासकीय प्राथमिक शाला में नियुक्त है।

दमोह : सेंट जॉन्स सीनियर स्कूल अब अभिभावकों के 6 करोड़ 25 लाख रुपए लौटाने पड़ेंगे

 दमोह  दमोह स्थित सेंट जॉन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल को बड़ा झटका लगा है। राज्य समिति ने सेंट जॉन्स स्कूल की अपील को खारिज कर दिया है। अपील खारिज होने के बाद अब विद्यार्थियों के अभिभावकों के 6 करोड़ 25 लाख से ज्यादा रुपए लौटाने पड़ेंगे। 2 लाख रुपए की शास्ति भी जमा करनी होगी। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम 2017 एवं नियम 2020 के अन्तर्गत गठित जिला समिति ने स्कूल प्रशासन को दोषी पाया है। जिला प्रशासन की गठित जिला समिति ने जांच में स्कूल प्रंबधन को दोषी पाया है। इन वर्षों की अधिक फीस करनी होगी वापस जांच में पाया गया है कि सरप्लस के बाद भी सेंट जॉन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल द्वारा सत्र 2022-23 में 2,160 विद्यार्थियों से 1 करोड़ 95 लाख 28 हजार 600 रुपए, सत्र 2023-24 में 2,179 विद्यार्थियों से 2 करोड़ 7 लाख 16 हजार 340 रुपए व सत्र 2024-25 में 2,234 विद्यार्थियों से 2 करोड़ 23 लाख 41 हजार 350 इस प्रकार वसूली गई। कुल फीस 6 करोड़ 25 लाख 86 हजार 290 रुपए अधिक वसूली गई है। जिसे जिला समिति द्वारा 30 दिवस के भीतर विद्यार्थियों या अभिभावकों के खाते में फीस वापस किए जाने का आदेश जारी किया गया है।

उज्जैन में बदली छुट्टी ! रविवार को खुलेंगे स्कूल, सोमवार को छुट्टी, क्यों लिया गया ये फैसला?

उज्जैन  उज्जैन में सावन,भादो माह में निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी के चलते जिला प्रशासन ने सोमवार को कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के शासकीय ओर प्राइवेट स्कूलों में छुट्टी रखने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के अनुसार सोमवार को स्कूल की छुट्टी रहेगी और बच्चों को पढ़ाई का नुकसान ना हो, इसके लिए रविवार को स्कूल खोले जाएंगे। बता दें कि 11 जुलाई से सावन की शुरुआत हो रही है और इस बार बाबा महाकाल की कुल छह सवारियां महाकाल मंदिर से निकलेंगी। उज्जैन कलेक्टर रौशन सिंह ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी करने को कहा है। उज्जैन में स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर से सावन ओर भादो माह में श्री बाबा महाकाल की सावरी निकली जाती है। श्रावण महीने में भगवान महाकाल की निकलने वाली सवारी में भीड़ को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सवारी निकलने के दौरान सवारी मार्ग को बंद किया जाता है,जिस वजह से सड़कों पर जाम भी लग जाता है। भगवान महाकालेश्वर की सवारी महाकालेश्वर मंदिर के सभा मण्डप में सोमवार शाम 4 बजे पूजन-अर्चन के बाद निकाली जाती है। मंदिर के द्वार पर गॉड ऑफ ऑनर दिया जाता है। उसके बाद शहर के गुदरी चौराहा,बक्षी बाजार,कहारवाड़ी से होते हुए रामघाट शिप्रा तट पर पहुंचती है। यहां भगवान महाकाल का जलाभिषेक होने के बाद पूजन-अर्चन किया जाता है,उसके बाद सवारी रामानुजकोट,मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक,खाती समाज मंदिर,सत्यनारायण मंदिर,ढाबा रोड,टंकी चौराहा,छत्री चौक,गोपाल मंदिर,पटनी बाजार,गुदरी बाजार होती हुई महाकालेश्वर मन्दिर में वापस आती है। इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी संख्या रहती है। उज्जैन कलेक्टर रौशन सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह हम इस बार भी व्यवस्था करेंगे। इसमें भक्तों और स्कूल के बच्चों को कोई परेशानी नहीं होगी। इसको लेकर जल्द ही शिक्षा विभाग अलग से ऑर्डर जारी करेगा। जिसमें उज्जैन नगर निगम क्षेत्र के सभी निजी और सरकारी स्कूलों पर निर्णय लागू होगा। महाकाल की पहली सवारी 14 जुलाई,द्वितीय सवारी 21 जुलाई,तृतीय सवारी 28 जुलाई, चतुर्थ सवारी 4 अगस्त को श्रावण मास में निकाली जाएगी। इसी तरह भादौ मास में पंचम सवारी 11 अगस्त को रहेगी ओर महाकाल की राजसी सवारी सोमवार 18 अगस्त को निकलेगी इस दिन स्थानीय अवकाश रहेगा। इसलिए रविवार को स्कूल नहीं लगाने पड़ेंगे। उज्जैन कलेक्टर रौशन सिंह के अनुसार हर साल बाबा महाकाल की सवारी वाले दिन बड़ी संख्या में भक्त उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसे में स्कूलों की बस भीड़ में फंस जाती है और बच्चे और श्रद्धालु परेशान होते हैं। इसको लेकर जिला प्रशासन ने फैसला किया है कि मंदिर से निकलने वाली 5 सवारी के दिन स्कूलों का अवकाश रहेगा। इसकी जगह एक दिन पहले रविवार को स्कूल लगेंगे। इस बार 11 जुलाई से श्रावण का महीना शुरू हो रहा है। पहली सवारी 14 जुलाई को रहेगी।