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बांग्लादेश की राजनीति में हलचल, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वापसी और सजा पर दिया बयान

नई दिल्ली बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और दो साल पहले हुए सत्ता परिवर्तन की वजह से अपना देश छोड़कर भारत आने वाली शेख हसीना ने वापसी को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह इसी साल बांग्लादेश वापस लौट जाएंगी। उन्होंने अवामी लीग को सिर्फ एक दल नहीं, बल्कि अपनी ताकत बताया। बांग्लादेश में साल 2024 के मध्य में बड़े पैमाने पर विरोध और हिंसा हुई थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री आवास तक भीड़ पहुंच गई। इसके चलते उन्हें अपने देश को छोड़कर भागना पड़ा और भारत से अच्छे संबंध होने की वजह से वे नई दिल्ली में तब से रह रही हैं। हसीना ने साफ कर दिया है कि इस साल के आखिरी में वह बांग्लादेश लौट जाएंगी। हसीना को बांग्लादेश में फांसी की सजा मिली हुई है। शेख हसीना के भारत आने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद से भी हटा दिया गया था। उनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर काफी गुस्सा था। हालांकि, बाद में पूरी दुनिया को पता चल गया कि वह आंदोलन कोई बांग्लादेश के भलाई के लिए नहीं, बल्कि उसे और कट्टरता की ओर ले जाने के लिए ही था। हसीना के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार चली, जिसमें जमकर दंगे हुए। हिंदुओं को जमकर प्रताड़ित किया गया। कई को तो जिंदा ही मार डाला गया और ज्यादातर के मंदिरों, घरों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इस साल फरवरी में हुए आम चुनाव में बांग्लादेश में यूनुस से बांग्लादेश का पीछा छूटा और तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने। इसके बाद, भारत और बांग्लादेश के संबंध बेहतर होने लगे हैं। ‘मैं इसी साल बांग्लादेश वापस लौट जाऊंगी’ एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में जब शेख हसीना से पूछा गया कि आपने कई बार संकेत दिया है कि आप जल्द ही बांग्लादेश लौट सकती हैं, तो इस पर उन्होंने जवाब दिया, ''मेरी वापसी कोई पर्सनल एम्बिशन का सवाल नहीं है। यह एक बहुत बड़े सवाल से जुड़ा है। बांग्लादेश के लोगों के पॉलिटिकल राइट्स, लोकतंत्र की बहाली, कानून का राज स्थापित करना बहुत जरूरी है। मैं सत्ता के लिए राजनीति नहीं करती हूं और बांग्लादेश के लोगों की भलाई के लिए राजनीति करती हूं। मैं बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के सोनार बांग्ला बनाने के सपने को पूरा करने के लिए राजनीति में आई और उसे पूरा करने के लिए काम करती हूं। मैं साफ-साफ कह देना चाहती हूं कि हर रुकावट और साजिश को पार करते हुए मैं इस साल अपने देश वापस लौट जाऊंगी।'' मौत की सजा को बताया गैर-कानूनी शेख हसीना ने बांग्लादेश में मिली मौत की सजा पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला मेरे लिए न्याय नहीं है। यह गैर-कानूनी, गैर-संवैधानिक और राजनीति से प्रेरित है। ज्यूडिशियरी को अवामी लीग की लीडरशिप से बदला लेने के लिए एक जरिया बना दिया गया। इस तरह की कोशिशें पहले भी हुईं, तब भी फेल रहीं, अब भी फेल रहेंगी। उन्होंने आगे कहा कि मैं मौत से नहीं डरती हूं। 1975 में मैंने अपने पिता, अपने भाइयों और लगभग अपने पूरे परिवार को खो दिया। 21 अगस्त को मुझे ग्रेनेड से मारने की कोशिश हुई थी। मेरे खिलाफ कई बार साजिशें रची गईं, लेकिन हर बार उससे बाहर आई। उन्होंने आगे कहा कि मैं बांग्लादेश के लोगों के लिए हमेशा खड़ी रही हूं। पांच बार जनता के वोटों से प्रधानमंत्री चुनी गई और देश के विकास के लिए लगातार काम किया। शेख हसीना ने आगे बताया कि अवामी लीग कोई कागज का संगठन नहीं है। यह एक ऐसी ताकत है, जोकि बंगाल की मिट्टी, बंगाल के लोगों, बंगाल के इतिहास और बंगाली राष्ट्र की पहचान में बसी हुई है। 77 साल के इतिहास में अवामी लीग पर कई बार हमले हुए हैं, कई बार खून भी बहा है और उस पर बैन भी लगाया गया, लेकिन हर बार यह लोगों की ताकत से वापस उठ खड़ी हुई है।

शेख हसीना ने उजागर किया मोदी का संकट-सहयोग, बोलीं—ऐसी मदद कोई नहीं भूल सकता

नई दिल्ली  भारत में शरण लेने वालीं बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि मुश्किल समय में भारत के लोगों और पीएम मोदी ने उनकी मदद की थी। खास बात है कि बांग्लादेश की कोर्ट ने हसीना को मौत की सजा सुनाई है। हालांकि, उनके प्रत्यर्पण को लेकर स्थिति साफ नहीं है। मीडिया से बातचीत में हसीना से सवाल किया गया कि पीएम मोदी ने उनकी मदद कैसे की। इसपर उन्होंने जवाब दिया, 'मैं निजी बातचीत या रिश्तों के बारे में बात नहीं करना चाहती। हालांकि, मैं आपको यह बता सकती हूं कि मैं भारत के लोगों और उनकी तरफ से लगातार मिल रहे समर्थन की आभारी हूं।' बांग्लादेश के मौजूदा हालात के बारे में पीएम मोदी की भूमिका पर भी उनसे सवाल किया गया। हसीना ने जवाब दिया, 'भारत बहुत ही अहम पड़ोसी है। मैं प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन और हमारे देशों के बीच पुराने संबंधों की कद्र करती हूं। व्यक्तिगत और कूटनीतिक रूप से भी मैं संकट में मिले शरण के प्रति आभारी हूं। भारत के साथ मजबूत द्विपक्षीय रिश्ते बांग्लादेश के हित में है। ये क्षेत्रीय स्थिरता को लंबे समय तक टिकाए रखने में मदद कर सकते हैं।' अमेरिका की भूमिका? हसीना से बांग्लादेश संकट में अमेरिका की भूमिका की अफवाहों को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने कहा, 'अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से कोई भूमिका होने से इनकार किया है और अब तक पब्लिक डोमेन में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जो इसके खिलाफ हो। बगैर सबूत आरोप लगाने के कारण स्थिरता को बहाल करने, जिम्मेदार का पता करने और राष्ट्रीय एकता की राह से भटकने का जोखिम होता है।' बेटे के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट बांग्लादेश में एक विशेष न्यायाधिकरण ने हसीना के निर्वासित बेटे साजिब वाजेद जॉय के खिलाफ गुरुवार को गिरफ्तारी वारंट जारी किया। यह वारंट मानवता के खिलाफ अपराध करने के आरोप में उनकी मां को मौत की सजा सुनाने के एक महीने बाद जारी किया गया है। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) के एक अभियोजक ने संवाददाताओं को बताया, 'न्यायाधिकरण ने जुलाई के विद्रोह के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराध करने के लिए उनके (जॉय के) विरुद्ध दर्ज मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।' उन्होंने बताया कि आईसीटी मामलों के तत्कालीन कनिष्ठ मंत्री जुनैद अहमद पलक के विरुद्ध भी इसी प्रकार का वारंट जारी किया गया था। पलक पहले से ही जेल में हैं। आईसीटी-बीडी ने पूर्व प्रधानमंत्री और उनके तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन को दबाने के प्रयासों के लिए मौत की सजा सुनाई। यह फैसला उनकी गैर हाजिरी में सुनाया गया है।