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धोखाधड़ी मामले के बाद बड़ा फैसला, खिलाड़ियों की कारतूस खरीद पर नजर; गन लाइसेंस पर लगी सीमा

भोपाल. भोपाल की फिजाओं में शूटिंग रेंज से आने वाली गोलियों की गूंज अक्सर देश के लिए मेडल जीतने वाले होनहारों की कहानी बयां करती थी। लेकिन, इसी गूंज के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच छिपा था, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया। दरअसल स्पोर्ट्स कोटे के तहत मिलने वाले कारतूस, जो देश का मान बढ़ाने के लिए चलने चाहिए थे, वे चंद रुपयों के लालच में अपराधियों की बंदूकों की खुराक बन रहे थे। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। जांच बैठी तो सच सामने आया कि कई ऐसे लोगों के नाम पर भी कारतूस जारी हो रहे थे, जिन्होंने कभी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा तक नहीं लिया था। भोपाल के 135 शूटर्स की जांच हुई, जिसमें 69 के लाइसेंस रद और 10 के निलंबित कर दिए गए। इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद भोपाल जिला प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' शुरू करते हुए नियमों के पेंच कस दिए हैं। अब तक जो शूटर सालभर में 15 हजार से लेकर 1 लाख तक कारतूस आसानी से ले लेते थे, उनके लिए अब नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब नए नियमों के तहत एक शूटर को एक बार में अधिकतम सिर्फ 500 और सालभर में केवल 1000 कारतूस ही जारी किए जाएंगे। अगर किसी खिलाड़ी को इससे ज्यादा की जरूरत होगी, तो उसे खेल संचालक से बाकायदा सत्यापन कराना होगा। यही नहीं, प्रशासन ने हथियारों की संख्या पर भी कैंची चला दी है। अब नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी भी केवल दो गन के लाइसेंस रख सकेंगे, जबकि पहले उन्हें 8 से 10 बंदूकें रखने की छूट थी। प्रशासन अब हर एक गोली का हिसाब रखने की तैयारी में है। राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें कानून बदलकर कारतूस के 'खोखों' (खाली शेल) का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। अब शूटर्स को यह भी लिखित में देना होगा कि कारतूस किस प्रतियोगिता के लिए खरीदे जा रहे हैं और उनका इस्तेमाल किस शूटिंग रेंज में होगा। 

पंजाब पुलिस पर फायरिंग के आरोपी शूटर राजस्थान से पकड़ा गया, रंगदारी नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना

चंडीगढ़  पंजाब के गैंगस्टर जीशान अख्तर गिरोह पर शिकंजा कसते हुए राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने उसके करीबी सहयोगी चंद्र प्रकाश शर्मा उर्फ चंदू को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पंजाब पुलिस के हवाले कर दिया गया है। पंजाब पुलिस अब आरोपित को संबंधित जिलों में ले जाकर अलग-अलग मामलों में पूछताछ करेगी। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में रंगदारी और शूटआउट से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं। चंदू पर जालंधर के नकोदर में कारोबारी के दफ्तर पर फायरिंग कराने, रंगदारी मांगने और पंजाब पुलिस टीम पर गोली चलाने जैसे गंभीर आरोप हैं। पंजाब पुलिस ने तीन फरवरी को उसे पकड़ने के लिए नाकाबंदी के दौरान कार्रवाई की थी, लेकिन वह पुलिस टीम पर फायरिंग कर भाग निकला। इस दौरान उसके साथी अंकित कुमार और हरजिंदर गुप्ता जवाबी कार्रवाई में घायल हुए थे। जीशान के निर्देश पर चल रहा नेटवर्क पुलिस जांच में सामने आया कि चंदू विदेश में बैठे गैंगस्टर जीशान अख्तर के निर्देश पर पंजाब में रंगदारी नेटवर्क चला रहा था। कारोबारी वर्ग को धमकाकर पैसे वसूलने और विरोध करने वालों पर फायरिंग कर दहशत फैलाने का जिम्मा उसी के पास था। जांच एजेंसियों के अनुसार, 18 जनवरी को नकोदर स्थित बक्शी ट्रैवल्स कार्यालय पर हुई फायरिंग में भी चंदू का नाम सामने आया। कारोबारी से कथित तौर पर रंगदारी मांगी गई थी। रकम नहीं देने पर दफ्तर पर गोलियां चलाकर डराने की कोशिश की गई। इस मामले में पंजाब पुलिस पहले ही दीपक, अंकित कुमार और हरजिंदर गुप्ता समेत कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि चंदू लगातार ठिकाने बदलकर बचता फिर रहा था। राजस्थान में छिप गया था शूटर सूत्रों के मुताबिक, पंजाब से भागने के बाद चंदू राजस्थान के जयपुर, दौसा, लालसोट और परासर धाम इलाके में छिपकर रह रहा था। एजीटीएफ पिछले एक महीने से तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट के आधार पर उसकी तलाश कर रही थी। पुलिस जांच में सामने आया कि चंदू विदेश में बैठे गैंगस्टर जीशान अख्तर के निर्देश पर पंजाब में रंगदारी नेटवर्क चला रहा था। कारोबारी वर्ग को धमकाकर पैसे वसूलने और विरोध करने वालों पर फायरिंग कर दहशत फैलाने का जिम्मा उसी के पास था। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब से भागने के बाद चंदू राजस्थान के जयपुर, दौसा, लालसोट और परासर धाम इलाके में छिपकर रह रहा था। एक महीने से पीछे थी एजीटीएफट एजीटीएफ पिछले एक महीने से तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट के आधार पर उसकी तलाश कर रही थी। मंगलवार रात बांदीकुई में जाल बिछाकर उसे दबोच लिया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि चंदू का पुराना आपराधिक रिकार्ड नहीं था और वह हाल ही में जीशान अख्तर गैंग से जुड़ा था। पुलिस अब उससे गैंग के नेटवर्क, हथियार सप्लाई और पंजाब में सक्रिय अन्य शूटरों को लेकर पूछताछ करेगी। पंजाब पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में रंगदारी और शूटआउट से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।