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घर में दुकान या कॉम्प्लेक्स चलाना पड़ेगा भारी, भोपाल की 576 कॉलोनियां कार्रवाई के दायरे में

भोपाल मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्तानिया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है। भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्तानिया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है। हाउसिंग बोर्ड-बीडीए की स्थिति हाउसिंग बोर्ड ने भोपाल में 25 से अधिक बड़ी आवासीय कॉलोनियां व टाउनशिप विकसित की है। इनमें अयोध्या नगर क्षेत्र सबसे बड़ा आवासीय परिसर है। बीडीए की 13 से योजनाएं निगम को हस्तांतरित हो हो चुकी है, पर 7 की जिम्मेदारी उसी की है। निगम सीमा के तहत निगम कार्रवाई कर रहा है। नजूल, हाउसिंग बोर्ड, बीडीए के प्रोजेक्ट्स व क्षेत्र को लेकर समीक्षा कर ली जाएगी। कोर्ट के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा।- कर्मवीर शर्मा, संभागायुक्त घर चार इमली में, अरेरा में बनाया व्यावसायिक भवन जब से नगर निगम द्वारा सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई है, मकान में कारोबार को लेकर पोल भी खुल रहे है। कई मामले ऐसे भी सामने आ रहे है, जिनमें भवन मालिक का असली पता किसी और इलाके का है और उसने किसी और रहवासी क्षेत्र में कारोबार के लिए भवन खड़ा किया है। ऐसा ही एक मामला अरेरा ई4/115 प्लॉट का है। इस पर हिंमाश चौरसिया और शुभम चौरसिया के नाम पर अप्रेल 2024 में मैं आवासीय निर्माण की अनुमति दी गई थी। लेकिन यहां कारोबारी भवन बना लिया गया है। अनुमति 0.75 एफएआर के आधार पर दी गई थी। यानी क्षेत्रफल से 75 फीसदी ही दो मंजिला निर्माण की मंजूरी है। लेकिन प्लॉट मालिक ने पूरा व्यावसायिक निर्माण कर लिया। ट्रैफिक पर पड़ेगा असर इमारत वंदेमातरम चौराहा से आगे 1100 क्वार्टर हनुमान मंदिर के बीच चार लेन रोड पर तैयार हो रही है। यहां अरेरा से लेकर कोलार, शाहपुरा, चुनाभट्टी और आसपास के ट्रैफिक गुजरता है। ऐसे में पीक ऑवर्स में चौराहे पर जाम की स्थिति बनेगी जिससे चौराहा भी प्रभावित होगा।

भोपाल में रहवासी इलाकों के कारोबार पर सख्ती, 576 कॉलोनियां कार्रवाई के दायरे में

भोपाल भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्तानिया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है। हाउसिंग बोर्ड-बीडीए की स्थिति हाउसिंग बोर्ड ने भोपाल में 25 से अधिक बड़ी आवासीय कॉलोनियां व टाउनशिप विकसित की है। इनमें अयोध्या नगर क्षेत्र सबसे बड़ा आवासीय परिसर है। बीडीए की 13 से योजनाएं निगम को हस्तांतरित हो हो चुकी है, पर 7 की जिम्मेदारी उसी की है। निगम सीमा के तहत निगम कार्रवाई कर रहा है। नजूल, हाउसिंग बोर्ड, बीडीए के प्रोजेक्ट्स व क्षेत्र को लेकर समीक्षा कर ली जाएगी। कोर्ट के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा।- कर्मवीर शर्मा, संभागायुक्त घर चार इमली में, अरेरा में बनाया व्यावसायिक भवन जब से नगर निगम द्वारा सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई है, मकान में कारोबार को लेकर पोल भी खुल रहे है। कई मामले ऐसे भी सामने आ रहे है, जिनमें भवन मालिक का असली पता किसी और इलाके का है और उसने किसी और रहवासी क्षेत्र में कारोबार के लिए भवन खड़ा किया है। ऐसा ही एक मामला अरेरा ई4/115 प्लॉट का है। इस पर हिंमाश चौरसिया और शुभम चौरसिया के नाम पर अप्रेल 2024 में मैं आवासीय निर्माण की अनुमति दी गई थी। लेकिन यहां कारोबारी भवन बना लिया गया है। अनुमति 0.75 एफएआर के आधार पर दी गई थी। यानी क्षेत्रफल से 75 फीसदी ही दो मंजिला निर्माण की मंजूरी है। लेकिन प्लॉट मालिक ने पूरा व्यावसायिक निर्माण कर लिया। ट्रैफिक पर पड़ेगा असर इमारत वंदेमातरम चौराहा से आगे 1100 क्वार्टर हनुमान मंदिर के बीच चार लेन रोड पर तैयार हो रही है। यहां अरेरा से लेकर कोलार, शाहपुरा, चुनाभट्टी और आसपास के ट्रैफिक गुजरता है। ऐसे में पीक ऑवर्स में चौराहे पर जाम की स्थिति बनेगी जिससे चौराहा भी प्रभावित होगा।

एमपी में शराब नीलामी का 8वां राउंड शुरू, 1 अप्रैल की डेडलाइन, खाली पड़े ठेके और नया दांव

भोपाल  मध्य प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से पहले सभी शराब दुकानों को नीलाम करने की चुनौती से जूझ रहे आबकारी विभाग ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। भारी-भरकम ग्रुप में दुकानें न बिकने के कारण अब सरकार 'सिंगल शॉप' (एकल दुकान) मॉडल पर उतर आई है। यानी अब कोई भी छोटा ठेकेदार केवल एक दुकान के लिए भी बोली लगा सकेगा। भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में ठेकेदारों की बेरुखी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद बेस प्राइज (आरक्षित मूल्य) में भी 10% की कटौती कर दी गई है। क्या है सरकार की मजबूरी? शुरुआती राउंड में विभाग ने पिछले साल की तुलना में बेस प्राइज 20% बढ़ाकर रखा था, लेकिन ठेकेदारों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। आठवें राउंड की बिडिंग तक केवल 60% दुकानें ही नीलाम हो सकी हैं। भोपाल, जबलपुर, रतलाम, कटनी, शाजापुर, आलीराजपुर, दमोह, झाबुआ और नीमच जैसे जिलों में बड़ी संख्या में दुकानें अब भी नहीं बिकी हैं। सरकार को इस साल शराब से 19,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व जुटाना है, जो इस धीमी रफ्तार से खतरे में नजर आ रहा है। ऐसे समझें पूरा खेल: क्यों बदला नियम? पहले दुकानों को बड़े समूहों में नीलाम किया जा रहा था, जिससे छोटे ठेकेदार बाहर हो गए थे और बड़े सिंडिकेट मनमानी कीमत मांग रहे थे। अब एक दुकान-एक बोली के नियम से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। विभाग को उम्मीद है कि इस लचीलेपन से बचे हुए 40% ठेके भी 31 मार्च की रात तक उठ जाएंगे। एक्सपर्ट की राय क्या है? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में शराब की खपत और ठेकेदारों के मुनाफे के गणित में अंतर आया है। सरकार का 20% इजाफा ठेकेदारों को भारी लग रहा था। अब 10% की कटौती और सिंगल शॉप मॉडल ही एकमात्र रास्ता बचा था ताकि 1 अप्रैल से दुकानें बंद न रहें।