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दिल्ली पलूशन बना वजह? सोनिया गांधी को सांस लेने में परेशानी, दोबारा कराया गया एडमिट

नई दिल्ली कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में एडमिट कराया गया है। उन्हें सीने में दर्द की समस्या थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल उनकी स्थिति पूरी तरह सामान्य है और चेस्ट फिजिशियन की निगरानी में उन्हें रखा गया है। अस्पताल के एक सूत्र ने कहा कि वह रूटीन चेकअप के लिए ही आई हैं, लेकिन उन्हें खांसी की समस्या काफी ज्यादा है। विशेष तौर पर दिल्ली में बढ़े हुए पलूशन के चलते उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होती रहती हैं। एक बार फिर से ऐसी ही समस्या उभरने की आशंका है। वह सोमवार की रात को अस्पताल पहुंची थीं और फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं। बीते साल ही वह 79 वर्ष की हुई थीं।   सर गंगा राम अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अजय स्वरूप ने बताया कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उनकी जांच करने पर पाया गया कि उन्हें अस्थमा की समस्या थोड़ी बढ़ गई है। ऐसा सर्दी के मौसम और पलूशन के चलते हुआ है। फिलहाल एहतियात के तौर पर उन्हें एडमिट कर लिया गया है और उनकी सेहत की निगरानी की जा रही है। फिलहाल उनकी सेहत एकदम स्थिर है। उन्हें कुछ दवाएं भी दी जा रही हैं, जिनका उनकी सेहत पर अच्छा प्रभाव पड़ रहा है। उनकी सेहत का जायजा लेने के बाद एक या दो दिन में उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। 2020 में पलूशन के चलते गोवा जाने की डॉक्टरों ने दी थी सलाह इससे पहले भी सोनिया गांधी को पलूशन के चलते समस्याएं होती रही हैं। वर्ष 2020 में डॉक्टरों की सलाह पर दिल्ली के पलूशन से बचाव के लिए वह गोवा भी गई थीं। दिल्ली में एयर क्वॉलिटी ना सुधरने तक उन्हें गोवा में ही रहने की सलाह दी गई थी। चिकित्सकों की मानें तो एक बार फिर से उन्हें पलूशन के चलते समस्या बढ़ी है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत आ रही थी।  

मनरेगा पर हमला बर्दाश्त नहीं, सरकार से आर-पार की लड़ाई को तैयार: सोनिया गांधी का एलान

नई दिल्ली कांग्रेस संसदीय दल की मुखिया सोनिया गांधी ने संसद के दोनों सदनों से पास हो चुके वीबी जी राम जी बिल को लेकर देश के नाम संदेश जारी किया है. इसमें उन्होंने मनरेगा की उपलब्धियों का जिक्र किया है. साथ ही वीबी जी राम जी बिल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. सोनिया गांधी ने कहा मुझे आज भी याद है, 20 साल पहले डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब संसद में मनरेगा कानून आम राय से पास किया गया था। यह ऐसा क्रांतिकारी कदम था, जिसका फायदा करोड़ों ग्रामीण परिवारों को मिला था। खासतौर पर वंचित, शोषित, गरीब और अतिगरीब लोगों के लिए रोजी-रोटी का जरिया बना।रोजगार के लिए अपनी माटी, अपना गांव, अपना घर-परिवार छोड़कर पलायन करने पर रोक लगी।  रोजगार का कानूनी हक़ दिया गया, साथ ही ग्राम पंचायतों को ताकत मिली। मनरेगा के जरिए महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों के भारत की ओर एक ठोस कदम उठाया गया। सोनिया ने कहा पिछले 11 साल में मोदी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार, गरीबों और वंचितों के हितों को नजरअंदाज कर मनरेगा को कमजोर करने की हर कोशिश की, जबकि कोविड के वक़्त ये गरीब वर्ग के लिए संजीवनी साबित हुआ। लेकिन बहुत अफसोस की बात है कि अभी हाल में सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया। न सिर्फ महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, बल्कि मनरेगा का रूप-स्वरुप बिना विचार-विमर्श किए, बिना किसी से सलाह-मशवरा किए, बिना विपक्ष को विश्वास में लिए मनमाने ढंग से बदल दिया गया।अब किसको, कितना, कहां और किस तरह रोजगार मिलेगा, यह जमीनी हकीकत से दूर दिल्ली में बैठकर सरकार तय करेगी। कांग्रेस संसदीय दल की मुखिया सोनिया गांधी ने कहा कांग्रेस का मनरेगा को लाने और लागू करने में बड़ा योगदान था, लेकिन यह पार्टी से जुड़ा मामला कभी नहीं था। ये देशहित और जनहित से जुड़ी योजना थी। मोदी सरकार ने इस कानून को कमजोर करके देश के करोड़ों किसानों, श्रमिकों और भूमिहीन ग्रामीण वर्ग के गरीबों के हितों पर हमला किया है। इस हमले का मुकाबला करने के लिए हम सब तैयार हैं। 20 साल पहले अपने गरीब भाई-बहनों को रोजगार का अधिकार दिलवाने के लिए मैं भी लड़ी थी, आज भी इस काले कानून के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मेरे जैसे कांग्रेस के सभी नेता और लाखों कार्यकर्ता आपके साथ खड़े हैं। 

राउज एवेन्यू कोर्ट का सोनिया गांधी को नोटिस, 1980 वोटर लिस्ट में बिना नागरिकता नाम जोड़ने का सवाल

नई दिल्ली दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया है। यह मामला 1980 की मतदाता सूची में उनके नाम के कथित अनधिकृत रूप से जुड़ा होने को लेकर है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह र्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और जालसाजी का मामला हो सकता है। अदालत 6 जनवरी 2026 को मामले पर अगली सुनावाई करेगी। यह विवाद 1980 के मतदाता पंजीकरण से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज किया गया था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता अप्रैल 1983 में प्राप्त की थी। उनका यह भी कहना है कि 1982 में उनका नाम हटाया गया और 1983 में नागरिकता के बाद फिर जोड़ा गया, जोकि संदिग्ध है। कोर्ट ने सोनिया गांधी को भेजा नोटिस यह विवाद दशकों पुराना है लेकिन हाल ही में फिर से सुर्खियों में आया है। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी ने सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज की थी, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच की मांग की गई थी। मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने 11 सितंबर को इस शिकायत को खारिज कर दिया था। लेकिन इसके बाद विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटीशन दाखिल की। इसपर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी। ये है मामला याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी के अनुसार, सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की 1980 की मतदाता सूची में शामिल किया गया था। लेकिन उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। इस याचिका में सवाल किया गया है कि जब नागरिकता तीन साल बाद मिली तो 1980 में उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल हुआ। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी का कहना है कि किसी गैर-नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करना अपराध है और इस मामले की जांच की जाए कि क्या इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया था। इस मामले में उन्होंने जालसाजी की आशंका भी जताई है।  

भाजपा ने केरल चुनाव में उतारी ‘सोनिया गांधी’, कांग्रेस कैंडिडेट से होगा मुकाबला

मुन्‍नार केरल के मुन्‍नार का पंचायत चुनाव चर्चा में है। इसकी वजह है कि यहां के नल्लत्‍थानी वार्ड से बीजेपी की उम्मीदवार का नाम सोनिया गांधी हैं। यह नाम भले कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष जैसा हो, लेकिन दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है। 34 साल की सोनिया गांधी मुन्‍नार की ही रहने वाली हैं। उनके पिता ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के नाम पर बेटी का नाम रखा था। फिर बेटी की शादी भाजपा नेता से की। अब भाजपा ने सोनिया को वार्ड मेंबर का उम्मीदवार बनाया है। केरल में स्थानीय निकाय के चुनाव दो फेज में है। इसके लिए वोटिंग 9 और 11 दिसंबर को होगी। नतीजे 13 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। कांग्रेस नेता के घर हुआ था जन्म इंडिया टुडे की रिपोर्ट में मलयाली पोर्टल मनोरमा के हवाले से बताया गया है कि मुन्नार के पंचायत चुनाव में भाजपा ने नल्लाथन्नी वार्ड से 34 वर्षीय सोनिया गांधी को टिकट दिया है। उनका जन्म स्थानीय कांग्रेस नेता दुरे राज के घर हुआ था। राज अब दुनिया में नहीं हैं। हालांकि, शादी के बाद हालात बदल गए, क्योंकि भाजपा उम्मीदवार सोनिया गांधी का विवाह भाजपा नेता के साथ हुआ। उनके पति सुभाष भाजपा के पंचायत महासचिव हैं और ओल्ड मुन्नार मुलक्कड़ से उप चुनाव भी लड़ चुके हैं। विवाह के कुछ समय बाद सोनिया गांधी भी भाजपा में सक्रिय हो गईं थीं। यह उनका पहला चुनावी मुकाबला है। उनका सामना कांग्रेस प्रत्याशी मंजुला रमेश और सीपीआईएम नेता वालरमति से होने जा रहा है। 90 साल के बुजुर्ग उम्मीदवार कोच्चि के असमन्नूर गांव में पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों में 90 वर्षीय बुजुर्ग भी शामिल हैं जिनके लिए उम्र महज एक नंबर है और वह पूरे जोश एवं दमखम से अपनी उम्मीदवारी पेश कर रहे हैं तथा लोगों से वोट की अपील कर रहे हैं। नारायणन नायर नामक यह बुर्जुग निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। बुजुर्ग व्यक्ति को हाथ में काला बैग लिए धीरे-धीरे चलते हुए, घर-घर जाकर अपनी कांपती आवाज में लोगों से अपने लिए वोट मांगते देखा जा सकता है। नारायणन नायर दिसंबर में होने वाले स्थानीय पंचायत चुनाव के लिए असमन्नूर ग्राम पंचायत के दूसरे वार्ड से उम्मीदवार हैं। केरल पंचायत चुनाव केरल में स्थानीय निकाय चुनाव, दो चरणों में नौ और 11 दिसंबर को होने वाले हैं जिसका परिणाम 13 दिसंबर को घोषित किया जाएगा। इनमें 941 ग्राम पंचायत, 152 ब्लॉक पंचायत, 14 जिला पंचायत, 87 नगर पालिकाएं और 6 निगम शामिल हैं। पिता ने कांग्रेस नेता से प्रभावित होकर नाम रखा सोनिया का जन्म 1991 में कांग्रेस समर्थक और स्थानीय मजदूर दुरे राज के घर हुआ था। दुरे राज कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से प्रभावित थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को भी वही नाम दे दिया। सोनिया की शादी बीजेपी नेता और पंचायत के जनरल सेक्रेटरी सुभाष से हुई। शादी के बाद सोनिया भी सक्रिय रूप से BJP की राजनीति से जुड़ गईं। सोनिया ने अपने पति और BJP कार्यकर्ता सुभाष के पदचिन्हों पर चलते हुए राजनीति में कदम रखा है। सुभाष फिलहाल पंचायत के जनरल सेक्रेटरी हैं और इससे पहले पुराने मुन्नार मूलक्कड़ा वार्ड के उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। कांग्रेस उम्मीदवार के सामने चुनौती बढ़ी मुन्नार के नल्लत्थानी वार्ड में कांग्रेस उम्मीदवार मंजुला रमेश के सामने इस बार चुनौती कुछ अलग है। BJP प्रत्याशी सोनिया गांधी का नाम सुनते ही लोग चौंक जाते हैं और फिरचर्चा शुरू हो जाती है। चुनावी बैठक हो या घर-घर संपर्क अभियान उम्मीदवार का नाम ही सबसे पहले बातचीत का विषय बन रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस को मुकाबले की हवा अलग तरह से महसूस हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नाम वोटिंग पैटर्न को कितना प्रभावित करेगा, कहना अभी मुश्किल है। लेकिन यह साफ है कि यह केवल एक सामान्य स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि एक ऐसा संयोग है जिसने मुन्नार की राजनीति को राज्यभर में चर्चा का विषय बना दिया है। केरल में 9-11 दिसंबर को वोटिंग केरल में स्थानीय निकाय चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं। मतदान 9 और 11 दिसंबर को होगा, जबकि नतीजे 13 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहे ये चुनाव सेमीफाइनल माने जा रहे हैं, इसलिए राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। कांग्रेस इन निकाय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करना चाहती है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ LDF पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके। लेकिन BJP द्वारा “सोनिया गांधी” नाम की उम्मीदवार उतारने से कांग्रेस की रणनीति में नई चुनौती जुड़ गई है।

वोटर लिस्ट विवाद में सोनिया गांधी पर छाया राहत का सूरज, कोर्ट ने याचिका ठुकराई

नई दिल्ली  कांग्रेस की वरिष्ठ नेता, सांसद और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सोनिया गांधी ने बिना नागरिकता हासिल किए 1980 की वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल कराया। याचिका में दावा किया गया था कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी, जबकि उनका नाम 1980 की दिल्ली की वोटर लिस्ट में शामिल था। याचिका में यह सवाल उठाया गया था कि 1980 में सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में कैसे आया, जबकि उन्होंने नागरिकता 1983 में हासिल की थी। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से क्यों हटाया गया और इसके पीछे क्या वजह थी। इस याचिका में एक और गंभीर सवाल उठाया गया था कि 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल करने के बाद 1980 की वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम किस आधार पर शामिल किया गया? क्या इसके लिए किसी फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया गया था? याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया जाए कि वह इस मामले में मुकदमा दर्ज करे और जांच कर के स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। हालांकि, राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए इस मामले में आगे किसी भी तरह की जांच की आवश्यकता नहीं मानी। बता दें कि बुधवार की सुनवाई में कोर्ट ने इस फैसले को सुरक्षित रख लिया था, जिसे गुरुवार को खारिज कर दिया गया। यह याचिका विकास त्रिपाठी नामक व्यक्ति ने दाखिल की थी। बुधवार की सुनवाई में कोर्ट ने इस मामले पर गुरुवार की शाम 4 बजे के करीब फैसला सुनाए जाने की बात कही थी।