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राष्ट्रीय पार्टी बनने की राह पर सपा! असम चुनाव में उम्मीदवार उतारने की तैयारी में अखिलेश यादव

लखनऊ लोकसभा चुनाव 2024 में जबरदस्‍त सफलता हासिल करने के बाद समाजवादी पार्टी ने राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लक्ष्‍य पर नजर गड़ा दी है। इस रणनीति के तहत पार्टी पहली बार असम विधानसभा चुनाव में हिस्‍सा लेने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है सपा पांच से 10 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार उतार सकती है। जल्‍द ही इसका आधिकारिक ऐलान किया जाएगा। असम में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बताया जा रहा है कि सपा असम के मुस्लिम बहुल इलाकों में अपने प्रत्‍याशी उतारेगी। सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव भी वहां चुनाव प्रचार करने जा सकते हैं। महाराष्‍ट्र में दो और गुजरात में 1 सपा विधायक यूपी के बाहर की बात करें तो सपा के महाराष्‍ट्र में दो विधायक और गुजरात में एक विधायक हैं। यह राष्‍टीय पार्टी के मानक से काफी कम है। दरअसल, राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए लोकसभा या विधानसभा चुनावों में न्‍यूनतम चार राज्‍यों में कुल वैध वोटों का कम से कम 6 प्रतिशत होना जरूरी है। साथ ही लोकसभा में कम से कम चार सीटें होना चाहिए या लोकसभा चुनावों में कम से कम तीन अलग राज्‍यों से कुल सीटों का 2 प्रतिशत यानी 11 सीटें जीती हों। देखा जाए तो सपा के पास लोकसभा में इससे कहीं ज्‍यादा सीटें हैं पर वह एक ही राज्‍य उत्‍तर प्रदेश में है। इसलिए वह राष्‍ट्रीय पार्टी के मानकों को पूरा नहीं करती। यूपी में सपा के 37 सांसद गौरतलब है कि 2024 में सपा ने लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। सीटों के लिहाज से सपा बीजेपी और कांग्रेस के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। उसके पास 37 सांसद हैं। सपा ने बीजेपी के गढ़ माने जाने वाली कई सीटों पर अपना परचम लहराया था। इसमें अयोध्‍या उल्‍लेखनीय है। असम में इसी साल होने हैं विधानसभा चुनाव राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्‍त करने के लिए समाजवादी पार्टी की नजर असम विधानसभा चुनावों पर है। असम में इसी साल तक चुनाव होने हैं। सपा अपने परंपरागत मुस्लिम वोटों पर नजर गड़ाए हुए हैं। इसी रणनीति के तहत सपा असम के मुस्लिम बहुल इलाकों में ही प्रत्‍याशी खड़ा करने की योजना बनाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सपा 5 से 10 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार खड़े कर सकती है।

क्यों दादरी बना सपा का चुनावी लॉन्चपैड? 2027 के चुनाव से पहले पार्टी की बड़ी सियासी चाल

लखनऊ समाजवादी पार्टी 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर पूरे प्रदेश में समाजवादी समानता भाईचारा रैली करेगी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 मार्च को नोएडा के दादरी से इसकी शुरुआत करेंगे। इसके बाद ये रैलियां प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित की जाएंगी। इस रैली की जिम्मेदारी समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी संभालेंगे।  नोएडा से इस अभियान की शुरूआत के पीछे माना जा रहा है कि पार्टी इस कमजोर गढ़ में अपने को मजबूत दिखाने का संदेश देना चाहती है। पार्टी का मानना है कि अगर इन इलाकों में संगठन मजबूत किया गया, तो चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है विधानसभा चुनावों के करीब 11 महीने पहले नोएडा से शुरू होने वाली इस रैली की तर्ज पर प्रदेश के सभी जिलों में रैली का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए समाजवादी पार्टी के नेता स्थानीय स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। इन रैलियों के आयोजन के जरिये सपा की कोशिश उन विधानसभा क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने पर है, जहां समाजवादी पार्टी को 2022 विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। रैलियों की शुरुआत के साथ ही समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनावों के उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। जातीय समीकरणों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि ऐसे नेताओं को प्रत्याशी बनाया जाए, जिनकी विधानसभा क्षेत्र में स्वीकार्यता हो। इसके अलावा टिकट के चयन में एसआईआर में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं का भी अहमियत दी जाएगी। सपा हर सीट पर प्रत्याशियों को टिकट देने के लिए सर्वे भी करा रही है। पार्टी शुभ संकेत के रूप में देख रही पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अखिलेश यादव ने 2012 में  गौतमबुद्धनगर से साइकिल यात्रा की शुरुआत की थी। उसी वर्ष समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी। एक बार फिर नोएडा से अभियान की शुरुआत को उसी ‘शुभ संकेत’ से जोड़कर देखा जा रहा है। नोएडा को लेकर लंबे समय से राजनीतिक मिथक भी रहा है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है। वह छह महीने के भीतर कुर्सी गवां देता है। इसी कारण मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान अखिलेश यादव नोएडा नहीं गए थे। 2017 और 2022 के चुनावों में भी उन्होंने अभियान की शुरुआत दूसरे जिलों से की, लेकिन सत्ता हासिल नहीं कर सके।  

फॉर्म-7 पर सियासत गरमाई: सपा ने भाजपा पर लगाया वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप

चंदौली जिले में मतदाता सूची से नाम कटवाने की कथित साजिश को लेकर सियासत गरमा गई है. समाजवादी पार्टी ने भाजपा नेताओं पर फॉर्म-7 के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है. सपा का दावा है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में वैध मतदाताओं के सैकड़ों नाम हटाने की कोशिश की जा रही है, जिसमें खासतौर पर मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया गया है. सपा नेताओं का आरोप है कि कई बूथों पर अन्य स्थानों पर भरे गए फॉर्म-7 को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) पर दबाव बनाकर स्वीकार कराया गया. वहीं, भाजपा के कुछ बूथ लेवल एजेंट (BLA) द्वारा फॉर्म-7 देने से इनकार किए जाने का भी दावा किया गया है, जिसके ऑडियो साक्ष्य होने की बात कही जा रही है. इतना ही नहीं, सपा का यह भी आरोप है कि कुछ लोग गांव-गांव घूमकर मतदाताओं को नाम कटवाने की धमकी दे रहे हैं, जिससे आम जनता में भय का माहौल है. निष्पक्ष जांच की मांग इन सभी आरोपों को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर लिखित शिकायत सौंपी और निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. जिलाधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि मतदाता सूची से एक भी वैध नाम नहीं कटेगा. पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी. सत्यनारायण राजभर, जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी ने कहा, यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है. भाजपा सुनियोजित तरीके से मतदाता सूची में हेरफेर कर चुनाव प्रभावित करना चाहती है. समाजवादी पार्टी इसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी.