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Stock Market Crash: सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, निवेशकों को ₹10 लाख करोड़ का झटका

मुंबई  घरेलू शेयर बाजार में आज भारी गिरावट रही। घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन गिरावट दिख रही है। RBI की सख्त पॉलिसी, FII की लगातार बिकवाली और दूसरी वजहों से इन्वेस्टर्स डर गए। कारोबार के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग 2% गिरकर अप्रैल 2025 के बाद सबसे निचले लेवल पर आ गया। इंडेक्स 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर 22,179 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 1,200 पॉइंट से ज्यादा गिरकर 71,400 के लेवल से नीचे फिसला। इस गिरावट ने BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का टोटल मार्केट कैप करीब 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक गिरकर 460 लाख करोड़ रुपये रह गया। रियल्टी, एनर्जी और इंफ्रा में सबसे ज्यादा नुकसान लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा टूटने वाले सेक्टर है निफ्टी रियल्टी इंडेक्स, जिसमें 2.98% की सबसे बड़ी गिरावट आई। इसके अलावा निफ्टी एनर्जी (-2.87%), निफ्टी इंफ्रा (-2.66%), निफ्टी पीएसई (-2.47%), निफ्टी फार्मा (-2.38%) और निफ्टी एफएमसीजी (-2.01%) 2 से 3 फीसदी तक टूट गए। वहीं, भारी बिकवाली के बीच केवल निफ्टी आईटी (+0.04%) मामूली बढ़त बनाकर हरे निशान में टिकने में सफल रहा। कौन से शेयर चमके और किसमें हुई भारी बिकवाली? बाजार में मंदी के बावजूद केवल चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी देखी गई। फोसिस (+0.50%), टेक महिंद्रा (+0.34%) और एक्सिस बैंक (+0.20%) जैसे शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, सबसे बड़ा नुकसान अडानी एंटरप्राइजेज (-5.36%), जेएसडब्ल्यू स्टील (-4.46%), आईटीसी (-4.03%), मैक्स हेल्थकेयर (-3.81%), इंडिगो (-3.55%) और श्रीराम फाइनेंस (-3.24%) में दर्ज किया गया। गिरावट की क्या बड़ी वजह? भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण रहे। RBI ने तीन साल बाद रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया और नीति का रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। इससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी। वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने भी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया। 30 साल की यील्ड 5.71% और 10 साल की 5.3% से ऊपर पहुंच गई। ऐसे में बॉन्ड निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। महंगे कच्चे तेल से भारत में महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है। सेंसेक्स 1045.46 अंक यानी 1.44% गिरावट के साथ 71,593.24 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। आईटीसी में सबसे ज्यादा 4.24 फीसदी गिरावट रही। एनएसई का निफ्टी50 इंडेक्स 371.25 अंक यानी 1.64% फिसलकर 22,231.80 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले कारोबार के दौरान ITC, अडानी पोर्ट्स, इंडिगो, पावर ग्रिड और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 4% तक गिरकर सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। आज की गिरावट के मुख्य कारण: 1) RBI की सख्त पॉलिसी RBI ने करीब चार साल में पहली बार रेपो रेट बढ़ाया है लेकिन मार्केट एनालिस्ट्स ने कहा कि मुश्किल ग्लोबल जियोपॉलिटिकल बैकग्राउंड के बीच सेंट्रल बैंक का अपना रुख 'न्यूट्रल' से 'सख्त' में बदलने का फैसला ज्यादा जरूरी था। जेफरीज को उम्मीद है कि RBI मौजूदा साइकिल में ब्याज दरों में करीब 100 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करेगा। नोमुरा के मुताबिक रुख में बदलाव एक सरप्राइज़ था। 2) बॉन्ड यील्ड 24 साल के हाई पर ग्लोबल बॉन्ड में बिकवाली बढ़ने से बॉन्ड यील्ड कई साल के हाई पर पहुंच गई। अमेरिका में 30-साल के बॉन्ड की यील्ड 5.71% से ऊपर चली गई। बेंचमार्क 10-साल के नोट्स की यील्ड 5.3% से ऊपर है जबकि दो-साल के नोट्स की यील्ड 4.9% के करीब पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से आमतौर पर डेट मार्केट को इन्वेस्टर्स के लिए ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। इससे उभरते इक्विटी मार्केट पर दबाव पड़ता है। 3) कच्चे तेल की कीमत ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें आज 2% तेजी के साथ $102 प्रति बैरल को पार कर गईं। इसकी वजह यह है कि गल्फ और होर्मुज स्ट्रेट में शिपमेंट पर बढ़ते हमलों के बीच इन्वेस्टर्स मिडिल ईस्ट से सप्लाई को लेकर चिंतित हैं। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने बुधवार को कहा कि कतर के उत्तर में एक टैंकर कई प्रोजेक्टाइल से टकरा गया, जिससे कई लोग मारे गए। एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक पिछले हफ्ते क्रूड का स्टॉक 3.2 मिलियन बैरल घटकर 424.1 मिलियन बैरल रह गया। 4) FII की भारी बिकवाली NSE के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक विदेशी इन्वेस्टर्स ने भारतीय बाजार में 6,121 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। FIIs ने बुधवार तक लगातार नौवें सेशन में लगभग 57,000 करोड़ रुपये के भारतीय इक्विटीज बेचे हैं। कुल मिलाकर, सितंबर की शुरुआत से अब तक FIIs 25 में से 20 सेशन में भारतीय इक्विटीज़ के नेट सेलर बने हुए हैं। 5) फेड रेट बढ़ने की चिंता मिनट्स के मुताबिक पिछले महीने फेड के पॉलिसीमेकर्स इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के पीछे के कारण को लेकर बंटे हुए थे। कुछ पार्टिसिपेंट्स एनर्जी और दूसरे प्राइस शॉक के असर को दूर रखने के लिए बढ़ोतरी को जरूरी मान रहे थे। वहीं कुछ इसे उभरती डिमांड से चलने वाली महंगाई से बचने के लिए जरूरी मान रहे थे। CME के ​​फेडवॉच टूल के मुताबिक ट्रेडर्स दिसंबर में बढ़ोतरी की 80% संभावना मान रहे हैं। 6) कमजोर ग्लोबल संकेत ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत मिल रहे हैं। साउथ कोरिया का कोस्पी 2% से ज्यादा गिरा, जबकि जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग 1% से ज्यादा गिरे। वॉल स्ट्रीट और यूरोपियन मार्केट भी पिछले सत्र में लाल निशान पर बंद हुए जबकि डाउ जोन्स फ्यूचर्स आज अमेरिकी स्टॉक मार्केट में और गिरावट का संकेत दे रहे हैं। 7) टेक्निकल लेवल टूटे शेयर मार्केट में गिरावट बीच के कारोबारी घंटों में और तेज हो गई क्योंकि निफ्टी जरूरी सपोर्ट लेवल को तोड़ गया, जिससे बिकवाली तेज हो गई। एक्सिस डायरेक्ट में डेरिवेटिव्स और टेक्निकल रिसर्च के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमांग गोर ने चेतावनी दी थी कि जब तक निफ्टी 22,800 से नीचे है, मार्केट का माहौल बहुत कमजोर बना हुआ है। इसके 52-हफ्ते के सबसे निचले स्तर 22,180 के पास पहुंचने की संभावना है।

शेयर मार्केट में 8 हफ्ते से गिरावट जारी, निवेशकों के ₹26 लाख करोड़ डूबे

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स ने लगातार 8वें हफ्ते गिरावट दर्ज की है। यह करीब 25 वर्षों में सबसे लंबा गिरावट का दौर है। इस गिरावट के चलते 8 हफ्ते में निवेशकों के करीब ₹26 लाख करोड़ डूब गए। यह लगातार गिरावट 2020 में कोविड-19 क्रैश और 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौर से भी लंबी है। अकेले इस सप्ताह निफ्टी में करीब 3.1 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 2.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। सितंबर में भी सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी। बता दें आज 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर घरेलू शेयर बाजार बंद है। इससे पहले 1 अक्टूबर को सेंसेक्स 570 अंक टूटकर 71,909 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 198 अंक गिरकर 22,421 पर। बाजार में गिरावट कितनी बड़ी? आठ हफ्तों की लगातार गिरावट में निफ्टी करीब 8.7 प्रतिशत और सेंसेक्स करीब 8.4 प्रतिशत नीचे आ चुका है। अंकों के लिहाज से देखें तो सेंसेक्स पिछले आठ हफ्तों में 6,590 अंक टूटा। जबकि, निफ्टी में 2,149 अंक की गिरावट आई। इस दौरान बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 26 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घटा और 467 लाख करोड़ रुपये के नीचे आ गया। 4 दिन में FII ने निकाले करीब 35 हजार करोड़ बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का है। 1 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयरों में करीब 9,484 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। इससे पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में उनकी कुल बिकवाली करीब 34,965 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1 अक्टूबर को करीब 10,042 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की। सितंबर में भी विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार के खिलाफ रहा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में FPI की इक्विटी बिकवाली करीब 46 हजार करोड़ रुपये रही। क्यों बेच रहे हैं विदेशी निवेशक? अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल: विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे एक साथ कई वैश्विक संकेत काम कर रहे हैं। पहला कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल है। अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.33-5.34 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है। यह 2002 के बाद का ऊंचा स्तर है। 30 साल की यील्ड भी करीब 5.68 प्रतिशत तक पहुंची। बॉन्ड यील्ड क्यों है शेयर बाजार के लिए खतरा? बॉन्ड यील्ड और बॉन्ड की कीमत उलटी दिशा में चलते हैं। यील्ड बढ़ने का मतलब है कि बॉन्ड की कीमत गिर रही है और निवेशक बॉन्ड बेच रहे हैं। जब सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर ऊंची हो जाती है, तो निवेशकों के लिए कम जोखिम वाला डेट मार्केट ज्यादा आकर्षक हो जाता है। इससे शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश पर दबाव बढ़ता है। बाजार पर कच्चे तेल का भी दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता बढ़ा रही है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में महंगा तेल आयात बिल, महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ा सकता है। 1 अक्टूबर को ग्लेाबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर रहा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता ने कीमतों को बढ़ा दिया है। कमजोर रुपया भी कर रहा परेशान डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। 1 अक्टूबर को रुपया करीब 0.5 प्रतिशत कमजोर होकर 96.31 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह दो महीने का निचला स्तर है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय एसेट्स से मिलने वाले डॉलर रिटर्न को प्रभावित कर सकता है। साथ ही महंगे तेल और कमजोर रुपये का असर घरेलू महंगाई पर भी पड़ सकता है। अब बाजार के लिए सबसे बड़े संकेत क्या होंगे? आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से 4 चीजों पर रहेगी। पहला, FII की बिकवाली रुकती है या नहीं। दूसरा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड किस दिशा में जाती है? तीसरा, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के आसपास रहती है या घटती है और चौथा, रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर के आसपास टिकता है या और कमजोर होता है?

शेयर बाजार में बड़ा नुकसान, निफ्टी 13% गिरा; 102 स्टॉक्स ने गंवाई आधी से ज्यादा वैल्यू

मुंबई  शेयर मार्केट में गुरुवार यानी 01 अक्‍तूबर 2026 को फ‍िर भूचाल आया. सेंसेक्‍स एक वक्‍त 1000 पॉइंट नीचे तक ग‍िर गया था. लेकिन बाजार में इस समय सबसे बड़ा फर्क इंडेक्स और आम शेयरों के प्रदर्शन में दिखाई दे रहा है. निफ्टी 2026 में करीब 13% नीचे है. पहली नजर में यह बड़ी गिरावट जरूर है, लेकिन निफ्टी 500 के अंदर झांकेंगे तो तस्वीर और ज्यादा खराब दिखती है. 500 शेयरों में से 252 शेयर अपने ऑल टाइम हाई से 30% से ज्यादा नीचे आ चुके हैं. यानी आधे से ज्यादा शेयरों में बड़ी चोट लग चुकी है. सबसे बड़ा आंकड़ा 102 शेयरों का है. निफ्टी 500 में शामिल 102 शेयर अपने रिकॉर्ड हाई से 50% से ज्यादा नीचे हैं. जिस शेयर की कीमत कभी 100 रुपये थी, वह अब 50 रुपये से भी नीचे आ चुका है. यानी हर पांच शेयरों में करीब एक शेयर अपने सबसे ऊंचे भाव की आधी कीमत भी नहीं बचा पाया है. 167 शेयर 40% से ज्यादा और 347 शेयर 20% से ज्यादा नीचे हैं। आम तौर पर जब बाजार में बड़ी गिरावट आती है तो माना जाता है कि छोटे शेयर ज्यादा टूटते हैं. लेकिन इस बार बड़ी कंपनियां भी दबाव में हैं. निफ्टी 50 के 18 शेयर अपने 52 हफ्तों के हाई से 20% से ज्यादा नीचे आ चुके थे और इन शेयरों की कुल मार्केट वैल्यू में करीब 31.35 लाख करोड़ रुपये की कमी आई. यानी चोट सिर्फ छोटे निवेशकों के पसंदीदा शेयरों में नहीं है। अब सितंबर की कहानी समझिए सितंबर ने इस गिरावट को और तेज कर दिया. पूरे महीने विदेशी निवेशकों यानी FIIs ने भारतीय शेयरों में करीब 44,013 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की. 2026 में अब तक FIIs करीब 4.03 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. सितंबर की बिकवाली खास इसलिए है क्योंकि महीने के आखिरी चार कारोबारी दिनों में ही करीब 29,175 करोड़ रुपये निकल गए. यानी महीने की करीब दो-तिहाई बिकवाली सिर्फ चार दिनों में हुई। आखिरी दिन तो जैसे बिकवाली का बांध टूट गया 30 सितंबर को FIIs ने एक ही दिन में 10,148 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. यह 23 मार्च के बाद सबसे बड़ी एक दिन की विदेशी बिकवाली रही. उससे एक दिन पहले यानी 29 सितंबर को भी 9,980 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई थी. 28 सितंबर को 5,353 करोड़ और 25 सितंबर को 3,694 करोड़ रुपये निकले. चार दिनों में लगातार बढ़ती बिकवाली ने बाजार पर अचानक दबाव बढ़ा दिया। विदेशी बेच रहे हैं, तो बाजार संभाल कौन रहा है? यहां कहानी का दूसरा पहलू है. घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DIIs सितंबर में हर एक कारोबारी दिन खरीदार रहे. पूरे महीने उन्होंने करीब 76,030 करोड़ रुपये लगाए. 30 सितंबर को जब FIIs ने 10,148 करोड़ रुपये बेचे, उसी दिन DIIs ने 11,272 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. यानी बाहर का पैसा निकल रहा है तो देश का संस्थागत पैसा लगातार बाजार में पैसा लगा रहा है। फिर भी शेयरों की हालत इतनी खराब क्यों? यही सबसे बड़ा सवाल है. अगर घरेलू निवेशक 76 हजार करोड़ रुपये लगा रहे हैं तो बाजार संभल क्यों नहीं रहा? वजह यह है कि पैसा बाजार में आना और हर शेयर को बचाना दो अलग बातें हैं. विदेशी बिकवाली खासकर बड़े और ज्यादा कारोबार वाले शेयरों पर दबाव डाल सकती है. दूसरी तरफ बाजार के कई शेयर पहले से महंगी कीमतों पर कारोबार कर रहे थे. कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी तो उनकी कीमतों में तेज करेक्शन आया। 50% गिर गया मतलब सस्ता हो गया, यह सबसे बड़ा भ्रम मान लीजिए किसी शेयर का भाव 100 रुपये था और वह 50 रुपये पर आ गया. गिरावट 50% हुई. लेकिन अब वह 50 रुपये से वापस 100 रुपये पहुंचने के लिए 100% बढ़ना पड़ेगा. इसलिए सिर्फ यह देखकर कि शेयर अपने हाई से आधा रह गया है, उसे सस्ता मानना सही नहीं है. पहले यह देखना होगा कि कंपनी की कमाई, कर्ज, कारोबार और भविष्य की संभावना में क्या बदलाव आया है. कुछ शेयरों में पुरानी तेजी का हिसाब चुक रहा है कोविड के बाद बाजार में कई थीम बहुत तेजी से चलीं. रेलवे, डिफेंस, सरकारी कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में निवेशकों की भारी दिलचस्पी आई. कई शेयरों के भाव उनकी मौजूदा कमाई से काफी आगे निकल गए. अब जब कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ी, तो कीमत नीचे आने लगी. इसे ऐसे समझिए. पहले उम्मीद के दम पर भाव चढ़ा, अब असली कमाई के हिसाब से भाव की दोबारा जांच हो रही है। निफ्टी बचा हुआ दिख रहा है क्योंकि बड़ी कंपनियां पूरी तस्वीर नहीं हैं निफ्टी 50 में सिर्फ 50 बड़ी कंपनियां हैं. लेकिन भारतीय शेयर बाजार में हजारों कंपनियां लिस्टेड हैं. इसलिए निफ्टी का 13% नीचे होना यह नहीं बताता कि हर कंपनी 13% नीचे है. कुछ शेयर मामूली नीचे होंगे, कुछ 20-30% नीचे और कुछ 50-60% तक टूट चुके हैं. यही वजह है कि किसी निवेशक का पोर्टफोलियो निफ्टी से दोगुना-तिगुना ज्यादा गिर सकता है। विदेशी निवेशकों की अगली चाल पर बाजार की नजर सितंबर में सिर्फ कैश मार्केट में बिकवाली नहीं हुई. विदेशी निवेशकों ने इंडेक्स फ्यूचर्स में भी करीब 3.75 अरब डॉलर की बिकवाली की. सितंबर सीरीज में उनकी इंडेक्स फ्यूचर्स की नेट शॉर्ट पोजिशन करीब 1.84 लाख कॉन्ट्रैक्ट से बढ़कर 2.67 लाख कॉन्ट्रैक्ट हो गई. इसका मतलब बाजार के डेरिवेटिव हिस्से में भी विदेशी निवेशकों की सावधानी बढ़ी है। तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने आग में घी का काम किया बाजार पर दबाव सिर्फ विदेशी निवेशकों की बिकवाली से नहीं आया. कच्चे तेल की ऊंची कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी चिंता बढ़ा रही हैं. भारत तेल का बड़ा आयातक है. तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ता है और रुपये पर दबाव आ सकता है. वहीं अमेरिकी बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न मिलने पर विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिका में पैसा लगाना ज्यादा आकर्षक हो सकता है. सितंबर में दोनों चीजों ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया । SIP वाला पैसा अभी बाजार की ढाल बना हुआ है घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी इस पूरी कहानी का दूसरा मजबूत पक्ष है. अगस्त में SIP के जरिए 32,297 करोड़ रुपये का … Read more

शेयर बाजार में भारी गिरावट, Sensex 850 अंक लुढ़का; निवेशकों में मचा हड़कंप

मुंबई   घरेलू शेयर बाजार के लिए हफ्ते का पहला दिन बेहद खराब साबित हुआ. सोमवार 28 सितंबर को बाजार खुलते ही निवेशकों को तगड़ा झटका लगा. सेंसेक्स शुरुआती मिनटों में ही 850 अंक से ज्यादा नीचे लुढ़क गया. इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग मानी जा रही है. दरअसल अमेरिका ईरान के बीच चल रही तनातनी से कच्चे तेल का भाव 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।  कच्चे तेल में लगी आग का असर ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. ब्रेंट फ्यूचर्स 2.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 106.49 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. इस महीने में अब तक इसकी कीमतों में लगभग 18 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है. वहीं अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स भी 1.5 प्रतिशत बढ़कर 93.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. कच्चे तेल के इस उबाल ने सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया. सोमवार सुबह गिफ्ट निफ्टी 23,111 अंकों पर था, जिससे साफ हो गया था कि बाजार की शुरुआत बहुत सुस्त रहने वाली है. जैसे ही 9:15 बजे ट्रेडिंग शुरू हुई, हालात तेजी से बिगड़े. महज दो मिनट के भीतर 9:17 बजे सेंसेक्स 512 अंक टूटकर 73,383.70 पर आ गया. गिरावट का ये सिलसिला यहीं नहीं थमा, बल्कि 9:40 बजे तक सेंसेक्स 870 अंक का गोता लगा चुका था।  अमेरिका ईरान के बीच बढ़ा तनाव बाजार में मची इस तबाही के पीछे वैश्विक टेंशन मुख्य कारण है. अमेरिका ईरान के बीच शांति वार्ता फिलहाल पूरी तरह से अधर में लटक गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के ईरानी प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. ट्रंप का कहना है कि ईरान सिर्फ समझौता करने के लिए बेताब है. वहीं ईरान का स्पष्ट रुख है कि इस विवाद को केवल कूटनीति से सुलझाया जा सकता है. मध्य पूर्व में हालात तब से ज्यादा खराब हैं जब फरवरी के अंत में अमेरिका इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे. इस युद्ध ने तेल बाजार को पूरी तरह से अनिश्चितता में धकेल दिया है।  बाजार खुलते ही Sensex-Nifty में तेज गिरावट सोमवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। BSE Sensex शुक्रवार के 73,895.74 के स्तर से 73,734 के आसपास खुला और शुरुआती कारोबार में गिरावट बढ़ गई। कुछ ही देर में सेंसेक्स 73,000 के स्तर से नीचे चला गया और करीब 850 अंक तक फिसलता दिखाई दिया। NSE Nifty 50 भी दबाव में रहा। शुक्रवार को 23,140.50 पर बंद हुआ निफ्टी सोमवार को 23,000 के नीचे चला गया। शुरुआती कारोबार में इंडेक्स करीब 22,900 के आसपास कारोबार करता नजर आया। बैंकिंग और IT शेयरों पर भी दबाव बाजार में बिकवाली का असर कई प्रमुख सेक्टरों में दिखाई दिया। बैंकिंग और आईटी शेयरों में दबाव ने प्रमुख इंडेक्स की गिरावट को और बढ़ाया। इससे पहले भी बाजार में लगातार कमजोरी के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे कच्चे तेल को प्रमुख चिंता के तौर पर देखा जा रहा था। आपके मूल ड्राफ्ट में दिए गए ₹6 लाख करोड़ से ज्यादा मार्केट-कैप घटने के आंकड़े को प्रकाशित करने से पहले उसी समय के BSE market-cap डेटा से दोबारा मिलाना बेहतर रहेगा, क्योंकि शुरुआती कारोबार में यह आंकड़ा लगातार बदलता है। क्यों गिर रहा है शेयर बाजार? बाजार की ताजा गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल शामिल है। सोमवार को रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की उस पहल को खारिज कर दिया, जिसमें संघर्ष खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रस्ताव शामिल था। इसके बाद तेल बाजार में फिर दबाव बढ़ा। Brent crude शुरुआती कारोबार में करीब $106 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बनी चिंता भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। 25 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब ₹3,693.93 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹2,838 करोड़ की खरीदारी की थी। सितंबर में अब तक FII की बिकवाली भी काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। इससे पहले 25 सितंबर को खत्म सप्ताह में Sensex 0.54% और Nifty 0.88% नीचे रहा था। दोनों बेंचमार्क लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए थे। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार को कमजोर करने में विदेशी निवेशकों (FII) का भी बड़ा हाथ है. विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने 36.94 अरब रुपये (385.54 मिलियन डॉलर) के शेयर बेचे. इस महीने अब तक उन्होंने 1.8 अरब डॉलर की निकासी कर ली है. अगर इस पूरे साल की बात करें तो ये आंकड़ा 25.86 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. इसी भारी बिकवाली की वजह से निफ्टी 50 व बीएसई सेंसेक्स लगातार सात सत्रों तक गिरे थे, जो रिकॉर्ड पर उनकी सबसे लंबी गिरावट में से एक है।  शुक्रवार की तेजी पर फिरा पानी सोमवार की इस भारी गिरावट ने शुक्रवार की रिकवरी को पूरी तरह से धो दिया. पिछले हफ्ते शुक्रवार को बाजार में थोड़ी राहत देखने को मिली थी. तब बैंकिंग, ऑटो, गैस शेयरों में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स 315.20 अंक चढ़कर 73,895.74 पर बंद हुआ था. उस दिन निफ्टी ने भी 77.40 अंकों की छलांग लगाई थी. शुक्रवार को एक्सिस बैंक, महिंद्रा, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस जैसे शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी. इनमें एक्सिस बैंक सबसे ज्यादा 2.82 प्रतिशत चढ़ा था. लेकिन सोमवार को खुलते ही इस सारी बढ़त पर पानी फिर गया. निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है, जिससे बाजार में आगे भी काफी उतार-चढ़ाव रहने की आशंका बनी हुई है। 

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी ओपनिंग के साथ लुढ़के

मुंबई  शेयर बाजार में सोमवार को खराब शुरुआत हुई. ट्रेडिंग ओपन होने के साथ ही मार्केट के दोनों इंडेक्स गिरावट के साथ रेड जोन में कारोबार करते हुए नजर आए. जहां एक ओर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स खुलने के साथ ही 250 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने भी हफ्ते के पहले कारोबारी दिन गिरावट के साथ शुरुआत की. इस बीच टेक कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरे हुए नजर आए. आइए जानते हैं बाजार में इस गिरावट के पीछे के बड़े कारण क्या हैं।  Sensex-Nifty खुलते ही धड़ाम  शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत पर नजर डालें, तो बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,515 की तुलना में गिरावट के साथ 76,446 पर खुला और अगले ही पल फिसलते हुए 264 अंक टूटकर 76,251 पर आ गया. कुछ ऐसा ही हाल एनएसई के निफ्टी इंडेक्स का देखने को मिला. पिछले शुक्रवार के अपने बंद 23,897 की तुलना में ये मामूली गिरावट के साथ 23,883 पर खुला और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए 23,818 तक टूट गया।  IT शेयर खुलते ही बिखरे स्टॉक मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही लगभग 1519 शेयरों ने बढ़त के साथ शुरुआत की, तो वहीं 1224 शेयर ऐसे थे, जो गिरावट के साथ रेड जोन में खुले, इसके अलावा 261 शेयरों की फ्लैट ओपनिंग हुई. सप्ताह के पहले दिन आई इस गिरावट के बीच आईटी कंपनियों के शेयर क्रैश नजर आए और इनमें बड़ी गिरावट देखने को मिली।  बीएसई की लार्जकैप कंपनियों में शामिल Infosys Share (2.60%), Tech Mahindra Share (1.75%), HCL Tech Share (1.60%), TCS (1%) की गिरावट में कारोबार करते हुए नजर आए. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Bharat Forge Share (1.90%), Mphasis Share (1.75%), Persistent Share (1.70%), Godrej Properties Share (1.40%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे।  बाजार टूटने के चार बड़े कारण पहला कारण: शेयर बाजार में आई इस गिरावट के पीछे के बड़े कारणों की बात करें, तो इनमें सबसे पहला अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में मची उथल-पुथल को माना जा सकता है. Brent Crude का दाम तेज उछाल के साथ 97 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा था, जिससे दुनिया में महंगाई का जोखिम बढ़ा है और शेयर बाजार निवेशकों का सेंटीमेंट खराब हुआ है।  दूसरा कारण: अमेरिका-ईरान के बीच टेंशन जारी है, जो कम होने का नाम नहीं ले रही है. ताजा अपडेट की बात करें, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अब ईरान को लेकर सोशल मीडिया पर एक साथ कई पोस्ट शेयर की गई हैं, जिनमें उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था, तेल और करेंसी को निशाना बनाया है. एक पोस्ट में तेहरान के नक्शे पर ट्रंप की तस्वीर भी लगाई गई, तो वहीं एक पोस्ट में दावा किया गया कि ईरान का तेल निर्यात तेजी से गिर रहा है. इससे मिडिल ईस्ट टेंशन बढ़ती नजर आ रही है।  तीसरा कारण: बाजार बिखरने का तीसरा कारण विदेशी बाजारों का मिलाजुला रुख रहा. दरअसल, एक ओर जहां जापान और साउथ कोरिया के शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ कारोबार करते हुए नजर आए. तो वहीं अन्य एशियाई स्टॉक मार्केट में हांगकांग का हैंगसेंग, ब्रिटेन के एफटीएसई-100, CAC, DAX गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे. यही नहीं भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख संकेतक माना जाने वाला Gift Nifty ओपनिंग के साथ ही फिसलकर कारोबार कर रहा था और खबर लिखे जाने तक करीब 90 अंक टूट गया था।  चौथा कारण: Share Market में गिरावट में सोमवार को सबसे बड़ा रोल आईटी स्टॉक्स निभाते हुए नजर आए. दरअसल, इंफोसिस, एचसीएल, टीसीएस, टेक महिंद्रा समेत तमाम IT Stock खुलने के साथ ही तेजी से फिसलते चले गए. निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 1 फीसदी टूटा हुआ नजर आया और इसका असर शेयर बाजार पर देखने को मिला। 

वैश्विक तनाव घटते ही बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स में तूफानी तेजी, निवेशकों की हुई चांदी

मुंबई  अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की खबर का असर अब दुनिया भर के बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और भारतीय शेयर बाजार ने भी आज यानी 15 जून को दमदार शुरुआत की है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1100 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी में भी शानदार तेजी देखने को मिली. ग्लोबल मार्केट से मिल रहे मजबूत संकेतों ने निवेशकों का जोश हाई कर दिया है।  सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों के बीच आज सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की.सुबह करीब 9:17 बजे BSE सेंसेक्स 1,154.98 अंक यानी 1.53 फीसदी की तेजी के साथ 76,682.94 के स्तर पर कारोबार करता दिखा.वहीं 9:18 बजे NSE निफ्टी 50 इंडेक्स 341.30 अंक यानी 1.44 फीसदी चढ़कर 23,964.20 के स्तर पर पहुंच गया.बाजार में शुरुआती घंटों से ही खरीदारी का माहौल देखने को मिला।  चौतरफा खरीदारी से बाजार में रौनक, सभी सेक्टर्स में छाई हरियाली भारतीय शेयर बाजार के ब्रॉडर मार्केट्स में शानदार तेजी देखने को मिल रही है. बाजार खुलने के साथ ही हर तरफ खरीदारी का माहौल है, जिसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 (Nifty Midcap 100) और निफ्टी स्मॉलकैप 100 (Nifty Smallcap 100) इंडेक्स 1.3-1.3 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं. बीएसई (BSE) के तमाम सेक्टोरल इंडेक्स पूरी तरह हरे निशान में रंगे हुए हैं. सेंसेक्स, मिडकैप, स्मॉलकैप से लेकर बैंकिंग इंडेक्स तक में 1.3% से लेकर 2% से ज्यादा का तूफानी उछाल दर्ज किया जा रहा है, जो बाजार में निवेशकों के तगड़े भरोसे और चौतरफा हरियाली को दिखाता है।        निफ्टी रियल्टी (Nifty Realty) में सबसे ज्यादा 2.59 प्रतिशत का उछाल आया.     निफ्टी सीमेंट (Nifty Cement) 2.46 प्रतिशत की मजबूती के साथ दूसरे स्थान पर रहा.     निफ्टी ऑटो (Nifty Auto) में 1.92 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई.     इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.85% ), निफ्टी ऑयल एंड गैस (1.83%) और निफ्टी पीएसयू बैंक (1.77% )  बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं. दूसरी ओर, आज हेल्थकेयर शेयरों पर थोड़ा दबाव दिखा, जिसमें निफ्टी फार्मा (Nifty Pharma) 0.17 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.05 प्रतिशत टूटकर कारोबार करते दिखे. अमेरिका-ईरान समझौते से निवेशकों का बढ़ा भरोसा बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर समझौते की घोषणा हुई है.निवेशकों का मानना है कि इस समझौते से ग्लोबल टेंशन कम होगी और एनर्जी मार्केट पर दबाव घटेगा. यही वजह है कि दुनियाभर के शेयर बाजारों में राहत की लहर देखने को मिल रही है।  पहले दिए संकेत, अब किया ऐलान  डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान के साथ जल्द शांति समझौता होने के संकेत दे दिए थे और अब इसका ऐलान भी कर दिया है. Donald Trump ने यूएस-ईरान शांति समझौते का ये ऐलान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने अकाउंट पर पोस्ट के जरिए किया।      उन्होंने कहा कि, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है, सभी को बधाई! मैं इसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बिना किसी रोक-टोक के खोलने और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी देता हूं.' उन्होंने आगे कहा कि, 'दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन चालू करो, तेल की सप्लाई शुरू होने दो!' एशियाई बाजारों में भी दिखा जबरदस्त जोश अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबर के बाद एशियाई शेयर बाजारों में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली।      जापान का निक्केई इंडेक्स 4.68 फीसदी बढ़कर 69,108.03 पर पहुंच गया।      दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.64 फीसदी की तेजी के साथ 8,581.47 पर कारोबार करता दिखा।      ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 इंडेक्स 1.44 फीसदी चढ़कर 8,930.6 पर पहुंच गया।      न्यूजीलैंड का NZX 50 इंडेक्स 0.28 फीसदी बढ़कर 13,431.14 पर पहुंचा, जबकि सिंगापुर का STI 0.76 फीसदी मजबूत होकर 5,025.8 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।  ट्रंप के ऐलान के बाद WTI और ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार देर रात सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है.वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा कि इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होंगे.इस घोषणा के बाद तेल बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई।  युद्ध खत्म होने और तेल सप्लाई को लेकर चिंताएं कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली.जुलाई डिलीवरी वाले WTI क्रूड फ्यूचर्स 4.77 फीसदी गिरकर 80.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए.वहीं अगस्त डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी टूटकर 83.77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा.ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर से नीचे फिसल गया, जिसे बाजार के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है। 

बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1800 अंक टूटा, निफ्टी 23,000 से नीचे फिसला

मुंबई  जिसका डर था वही हुआ, विदेशों से मिल रहे खराब संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार खुलते ही क्रैश (Stock Market Crash) हो गया. अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान का युद्ध बढ़ने और मिडिल ईस्ट में हाई पर पहुंची टेंशन के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ने बाजार का सेंटीमेंट सप्ताह के पहले दिन खराब किया है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (BSE Sensex) ओपनिंग के साथ ही 1800 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) भी खुलते के कुछ देर बाद 575 अंक के आसपास बिखर गया. इस बीच BSE लार्जकैप में शामिल सभी शेयर लाल निशान पर कारोबार करते हुए नजर आए।  सेंसेक्स-निफ्टी खुलती ही क्रैश शेयर मार्केट में सप्ताह के पहले दिन सोमवार को खुलने के साथ ही हड़कंप मचा हुआ नजर आया है. बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 74,532.96 की तुलना में बुरी तरह टूटकर 73,732 पर ओपन हुआ. इसके कुछ ही मिनटों में ये गिरावट और भी तेज हो गई, जिसके चलते Sensex करीब 1600 अंक गिरकर 72,977 के लेवल पर आ गया. वहीं इसके कुछ मिनटों बाद ही ये गिरावट और बढ़ गई और सेंसेक्स1800 अंक से ज्यादा फिसलकर 72,724 पर कारोबार करने लगा।  न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि एनएसई का निफ्टी-50 भी खुलने के साथ ही धड़ाम हो गया. ये इंडेक्स अपने पिछले शुक्रवार के बंद 23,114 की तुलना में फिसलकर 22,824 पर ओपन हुआ था और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए ये मिनटों में 480 अंक की भारी गिरावट के साथ 22,634 के लेवल पर आ गया और कुछ देर के कारोबार के बाद 575 अंक टूटकर 22,538 पर ट्रेड करता दिखा। खुलते ही धड़ाम हो गए ये शेयर सोमवार को बाजार में आए भूचाल का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बीएसई लार्जकैप में शामिल सभी 30 शेयर गिरावट के साथ लाल निशान पर ओपन हुए. सबसे ज्यादा गिरावट वाले स्टॉक्स को देखें, तो Tata Steel Share (4%), SBI Share (3%), Bajaj Finance Share (2.67%), HDFC Bank Share (2.60%), IndiGo Share (2.50%), Titan Share (2.50%), BEL Share (2.49%), Adani Ports Share (2.40%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे।  विदेशी बाजारों से मिले थे गिरावट के संकेत  भारतीय शेयर बाजार के लिए पहले से ही विदेशों से निगेटिव सिग्नल मिल रहे थे. सोमवार को सभी एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा हुआ नजर आया. जापान का निक्केई इंडेक्स 4.10 फीसदी टूटकर 50,800 के लेवल तक गिरकर कारोबार कर रहा था, तो वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स करीब 3 फीसदी फिसलकर 24,532 पर ट्रेड करता दिखा।  यही नहीं साउथ कोरिया के कोस्पी में कारोबार की शुरुआत के बाद ही अचानक बड़ा क्रैश आ गया और ये 5.10 फीसदी टूटकर 5,409 पर आ गया. इसके अलावा DAX (2.01%), CAC (1.90%) और FTSE-100 (1.50%) टूटे हुए थे।   

सेंसेक्स में 1000 अंक की गिरावट, 6 लाख करोड़ का नुकसान… भीषण जंग ने शेयर बाजार को चकरा दिया

मुंबई  ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जंग से भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी जा रही है. सेंसेक्‍स 2743 अंक या 3.38% टूटकर 78543 पर खुला, जबकि निफ्टी 519 अंक या 2.06 फीसदी गिरकर 24659 अंक पर खुला. बैंक निफ्टी में 1300 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट रही. हालांकि कुछ देर बाद ही शेयर बाजार संभला हुआ नजर आया. सेंसेक्‍स 1000 अंंक या 1.21 फीसदी गिरकर 80,282 अंक पर कारोबार कर रहा था और निफ्टी 300 अंक टूटकर 24900 के नीचे था.   इसके अलावा, कच्‍चे तेल के दाम में 10 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट आई है. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अगर ये जंग और आगे बढ़ती है तो गिरावट ज्‍यादा हावी हो सकती है. वहीं कच्‍चा तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं.  BSE टॉप 30 के 29 शेयर भारी गिरावट पर रहे, सिर्फ बीईएल के शेयर में 1 फीसदी की तेजी रही. इंडिगो के शेयर करीब 5 फीसदी, एल एंड टी के शेयर करीब 4 फीसदी, अडानी पोर्ट 3 फीसदी और एटर्नल के शेयरों में 2 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.  सेक्‍टर्स की बात करें तो ऑटो,  एफएमसीजी, आईटी, बैंक, हेल्‍थकेयर, फाइनेंशियल और बाकी सभी सेक्‍टर्स लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे, सिर्फ मेटल सेक्‍टर में तेजी रही, क्‍योंकि निवेशक सेफ असेट में पैसा लगा रहे हैं. सभी सेक्‍टर में करीब 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.   6 लाख करोड़ डूबे  शेयर बाजार में भारी गिरावट के कारण निवेश्‍कों को आज तगड़ा नुकसान हुआ. बीएसई मार्केट कैप में बड़ी गिरावट देखने को मिली. शुकवार को बीएसई मार्केट कैप 463.50 लाख करोड़ रुपये पर था, जो सोमवार को घटकर  457.50 लाख के करीब पहुंच गया. यह निवेशकों की वैल्‍यूवेशन में 6 लाख करोड़ रुपये की कमी है.  162 शेयरों में लोअर सर्किट  ईरान पर हमले के कारण शेयर बाजार में आज गिरावट देखी जा रही है. इस बीच, बीएसई पर एक्टिव 3,660 शेयरों में से 510 शेयर उछाल पर रहे, जबकि 2,985  शेयरों में गिरावट रही और  165 शेयर अनचेंज रहे. 43 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई पर क्‍लोज हुए और 663 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर थे और 162 शेयरो में लोअर सर्किट रहा.  एशियाई मार्केट में भी कोहराम भारतीय बाजार के साथ ही बाकी एशियाई बाजारों में भी कोहराम देखा गया. जापान का निक्केई 225 874.07 पॉइंट्स नीचे 57,976.20 पर खुला. चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 11.08 पॉइंट्स (-0.27%) नीचे 4,151.80 पर खुला,  हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स शुरुआती ट्रेड में 2% से ज़्यादा गिरा और 324.96 पॉइंट्स (-1.22%) नीचे 26,305.58 पर खुला. इसके अलावा,  ताइवान स्टॉक एक्सचेंज का मेन इंडेक्स 2.3% तक गिरा.  यह 137.01 पॉइंट्स नीचे 35,277.48 पर खुला.

US-China ट्रेड वार का झटका! खुलते ही धराशायी हुआ बाजार, टॉप 10 स्टॉक्स में भारी गिरावट

मुंबई  शेयर बाजार में सप्ताह के पहले दिन कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ लाल निशान पर हुई. डोनाल्ड ट्रंप के चीन पर 100% टैरिफ के ऐलान का असर एशियाई शेयर बाजारों के साथ ही भारतीय स्टॉक मार्केट पर भी देखने को मिला. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स जहां ओपनिंग के बाद कुछ ही मिनटों में 400 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी 120 अंक के आस-पास की गिरावट लेकर कारोबार कर रहा था. शुरुआती कारोबारी में Tata Motors से लेकर Go-Digit तक के शेयर सबसे ज्यादा बिखरे हुए नजर आए.  विदेशों से मिल रहे थे खराब संकेत  शेयर मार्केट में कारोबार की खराब शुरुआत के संकेत पहले ही विदेशी बाजारों से मिल रहे थे. दरअसल, चीन पर 100% ट्रंप टैरिफ के ऐलान के बाद सोमवार को एशियाई बाजारों में जब कारोबार शुरू हुआ, तो जापान से लेकर हांगकांग और साउथ कोरिया तक के मार्केट क्रैश नजर आए.  शुरुआती कारोबार में Nikkei 491.64 अंक लेकर 48.088.80 पर, हांगकांग का Hang Seng 534.33 अंक फिसलकर 25,756 पर, तो साउथ कोरिया के KOSPI 38.31 अंक टूटकर 3,572.29 पर कारोबार कर रहा था. अन्य एशियाई बाजारों में भी तेजी गिरावट देखने को मिली थी. खुलते ही बुरी तरह फिसले इंडेक्स सोमवार को शेयर बाजार ओपन होने के साथ ही दोनों इंडेक्स बुरी तरह फिसलकर खुले और फिर टूटते ही चले गए. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 82,500.82 की तुलना में टूटकर रेड जोन में खुला और खुलने के बाद 82,049 तक फिसल गया. इसी तरह एनएसई का निफ्टी-50 ने भी लाल निशान पर कारोबार की शुरुआत की. इस इंडेक्स ने अपने पिछले बंद 25,285.35 की तुलना में फिसलकर 25,177 पर ओपनिंग की और फिर ये फिसलते हुए 25,152 पर आ गया.  सबसे ज्यादा टूटे ये 10 शेयर  सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों की बात करें, तो बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल टाटा मोटर्स (1.80%) और इंफोसिस का शेयर (1.20%) की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. वहीं मिडकैप कंपनियों में Kaynes Share (3.68%), Tata Comm (2.40%), Patanjali Share (1.90%) और Go-Digit Share (1.87%) फिसलकर ट्रेड कर रहा था. इस बीच स्मॉलकैप कैटेगरी पर नजर डालें, तो BLS Share (11.93%), BLSE (7%), Reliance Power (5.02%) और Timex Share (3.12%) की गिरावट में कारोबार कर रहा था. हालांकि, शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद भी आरती इंडस्ट्रीज, यूनोमिंडा, ग्लैंडफार्मा, एमआरएफ और मुथूट फाइनेंस जैसे कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते हुए दिखाई दिए. 

ट्रंप की घोषणा का असर: 5 बड़ी फार्मा कंपनियों के शेयर धड़ाम

मुंबई   डोनाल्‍ड ट्रंप ने गुरुवार देर रात फार्मा समेत कई सेक्‍टर पर टैरिफ का ऐलान कर दिया.फार्मा पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है, जिसका असर आज भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है. भारतीय शेयर बाजार आज दबाव में कारोबार कर रहा है. सेंसेक्‍स 412.67 अंक गिरकर 80,747.01 पर है और निफ्टी 115 अंक गिरकर 24,776 पर कारोबार कर रहा है. वहीं फार्मा शेयर, जिनका अमेरिका में बड़ा एक्‍सपोजर है, आज बिखर गए. ट्रंप टैरिफ के ऐलान के बाद भारत के 5 फार्मा शेयर तेजी से बिखरे हैं, जिसमें अरबिंदो, ल्यूपिन, डीआरएल, सन और बायोकॉन शामिल हैं. Arvindo Pharma आज 1.91 फीसदी गिरकर 1,076 रुपये पर कारोबार कर रहा है. Lupin शेयर में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो 1918.60 रुपये पर कारोबार कर रहा है. सन फार्मा के शेयर करीब 3.8 फीसदी टूटकर 1580 पर कारोबार कर रहा है. Cipla के शेयर में 2 फीसदी की गिरावट आई है. Strides Pharma Science 6 फीसदी, नैट्को फॉर्मा 5 फीसदी, बॉयोकॉन 4 फीसदी, ग्‍लैनफार्मा 3.7%, डिविलैब 3%, IPCA लैब 2.5% और Zydus life 2 % टूटे हैं. मैनकाइंड फार्मा में भी 3.30 फीसदी की गिरावट रही.  बीएसई टॉप 30 शेयरों की बात करें तो सबसे ज्‍यादा ग‍िरावट सनफार्मा के शेयर में 3.8 फीसदी की रही. इसके बाद इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एशियन पेंट्स जैसे 25 शेयर 2 फीसदी तक टूटे हैं. बाकी 5 शेयरों में तेजी है. भारी दबाव में ये सेक्‍टर्स टैरिफ ऐलान के बाद आज फार्मा सेक्‍टर में सबसे बड़ा दबाव दिखाई दे रहा है. यह सेक्‍टर 1.80  फीसदी टूट चुका है. इसके अलावा, H-1B वीजा के कारण आईटी 1.30 फीसदी और हेल्‍थकेयर सेक्‍टर 1.50 फीसदी टूटकर कारोबार कर रहे हैं. 88 शेयर 52वीक के लो पर  बीएसई के 3,073 शेयरों में से 864 शेयरों में तेजी देखी जा रही है, जबकि 2,062 शेयर गिर हुए हैं. 147 शेयरों में कोई एक्‍शन नहीं दिखाई दे रहा है. 76 शेयरों में अपर सर्किट और 65 शेयरों में लोअर सर्किट लगा है. 88 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर कारोबार कर रहे हैं.  निवेशकों को तगड़ा नुकसान  शेयर बाजार में गिरावट से निवेशकों को आज भी तगड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है. बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन आज 454 लाख करोड़ हो चुका है, जबकि कल 457 लाख करोड़ रुपये था. इसका मतलब है कि निवेशकों को करीब 3 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है.