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होर्मुज जलमार्ग पर टोल व्यवस्था की योजना, ईरान ने अमेरिका को दिया नया संकेत

नई दिल्ली पश्चिम एशिया की जंग के बाद अब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर टैक्स लगाने की कवायद तेज कर दी है। चीन में ईरानी राजदूत ने शनिवार को बताया कि तेहरान होर्मुज पर सर्विस टैक्स लगाने की योजना बना रहा है, जल्दी ही इसे लागू किया जाएगा। इसके अलावा अमेरिका के खिलाफ युद्ध के दौरान ईरान का साथ देने और समर्थन करने वाले देशों के साथ इस प्रक्रिया में खास व्यवहार किया जाएगा। बता दें, 28 फरवरी को हुए हमले के बाद से ईरान की तरफ लगातार होर्मुज पर टैक्स लगाने की मांग उठ रही है। हालांकि, अमेरिका ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। बीजिंग में वर्ल्ड पीस फोरम में ईरान का पक्ष रखते हुए राजदूत अब्दोलरेजा रहमानी फजली ने कहा कि अब होर्मुज फ्री नहीं रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अब ओमान के साथ मिलकर इस जलमार्ग के ट्रैफिक को कंट्रोल करने की योजना बना रहा है। फजली ने कहा, "होर्मुज स्ट्रेट ईरान के जल क्षेत्र में आता है। तो निश्चित तौर पर हम इस पर सर्विस फीस लेंगे।" हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सर्विस टैक्स को टोल की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। 'मित्र देशों को देंगे राहत'- ईरान ईरानी राजदूत ने कहा कि इस सर्विस टैक्स का उपयोग जहाजों की निगरानी करने, समुद्री ट्रैफिक से होने वाले पर्यावरणीय असर से निपटने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि जिन देशों ने युद्ध के दौरान ईरान का साथ दिया था। उन्हें इससे राहत मिलेगी। ईरानी राजदूत की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आए हैं, जब अमेरिका और ईरान का शांति समझौता लगातार नाजुक डोर पर टिका हुआ है। ट्रंप प्रशासन का साफ कहना है कि होर्मुज जैसा युद्ध के बाद चलता था, वैसा ही चलता रहेगा। इस पर किसी तरह का कोई टैक्स या सर्विस फीस नहीं लगेगी। होर्मुज स्ट्रेट की वर्तमान स्थिति क्या? 28 फरवरी को शुरु हुए युद्ध के पहले होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खुला हुआ था। ईरान भी इस पर किसी तरह के टैक्स की बात नहीं करता था। लेकिन अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया और पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझने लगी। इसके बाद ईरान में होर्मुज पर टैक्स लगाने की चर्चा तेज हो गई। हाल ही में हुए अमेरिका और ईरान शांति समझौते में 60 दिनों तक होर्मुज को युद्ध पूर्व स्थिति में खोले रखने पर सहमति बनी है। लेकिन 60 दिनों के बाद क्या स्थिति होगी। इस पर अभी कोई बयान सामने नहीं आया है। अमेरिका की तरफ से साफ तौर पर कहा गया है कि होर्मुज पर किसी भी तरह का टैक्स मान्य नहीं होगा। लेकिन सवाल यही है कि क्या तेहरान वाशिंगटन की बात मानेगा? क्योंकि अब उसका दशकों पुराना अमेरिकी हमले का डर खत्म हो चुका है। दूसरी बात, इस युद्ध के दौरान उसे होर्मुज की जमीनी हकीकत का पता चल गया है कि यहां पर एक ड्रोन हमला भी तेल की कीमतों को बढ़ा सकता है। ऐसे में संभव है कि ईरान जल्दी ही इन्हीं हमलों और अन्य परेशानियों से बचाने के लिए होर्मुज सर्विस फीस लागू कर दे। अगर यह फीस लागू होती है, तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी हार साबित हो सकती है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर सुर्खियों में, पाकिस्तान के संयुक्त गश्त प्रस्ताव पर चर्चा तेज

नई दिल्ली  अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। इस दौरान दोनों देशों के बीच किसी भी बात को लेकर आम सहमति नहीं बनी। यह वार्ता भले ही सिर्फ दो देशों के बीच हुई, लेकिन दुनिया की निगाहें इसपर टिकी हुई थीं। इसका सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज था, जिसपर युद्ध के बाद से ही पहरा है। हालांकि, शनिवार को इस समुद्री मार्ग से कम से कम 16 जहाज गुजरे। युद्धविराम के बाद का अब तक का सबसे व्यस्त दिन रहा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS फ्रैंक ई. पीटरसन और USS माइकल मर्फी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन जहाजों को विशेष रूप से ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगों को साफ करने के अभियान में लगाया गया है ताकि जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित किया जा सके। नौसेना की निगरानी करने वाली संस्था 'मैरीन ट्रैफिक' ने बताया कि USS माइकल मर्फी की सुरक्षा में चीन, हांगकांग और लाइबेरिया के झंडे वाले तीन विशाल कच्चे तेल के टैंकरों को सफलतापूर्वक मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने संक्षिप्त संबोधन में होर्मुज (Strait of Hormuz) के फिर से खोलने जैसे संवेदनशील विषय पर किसी भी असहमति का जिक्र नहीं किया। आपको बता दें कि यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। पाकिस्तान का संयुक्त गश्त प्रस्ताव इस्लामाबाद में संपन्न अमेरिका-ईरान सीधी बातचीत में पाकिस्तान ने इस विवादित जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए एक रूपरेखा पेश की है। अल जजीरा अरबी की रिपोर्ट के अनुसार, एक सूत्र ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में संयुक्त गश्त का प्रस्ताव दिया। इसका मकदसद, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इस मार्ग को सुरक्षित और बाधा रहित बनाना है। पाकिस्तान ने सुझाव दिया है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इस रणनीतिक जलमार्ग की निगरानी में संयुक्त तंत्र विकसित किया जाए। होर्मुज का खुलना क्यों जरूरी? दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध के दौरान इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो गई थी। अब जबकि शनिवार को एक ही दिन में 16 जहाजों ने इसे पार किया है, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत के संकेत हैं।