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MP में 2 मार्च से निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 1.5 लाख यात्रियों को होगा असर

भोपाल  मध्य प्रदेश में नई परिवहन नीति के खिलाफ निजी बस संचालकों ने मोर्चा खोल दिया है। बस ऑपरेटरों ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। यह हड़ताल होली के त्यौहार से ठीक दो दिन पहले शुरू होने वाली है, जिससे प्रदेशभर में यात्रियों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। बस एसोसिएशन का विरोध सरकार की नई परिवहन नीति को लेकर है। उन्होंने परमिट प्रक्रिया पर सवाल उठाए है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि रूट आवंटन और रिन्यूअल की प्रक्रिया को जटिल और महंगा बनाया गया है।  डीजल की बढ़ती कीमतों के बावजूद किराए में संशोधन का कोई लचीला प्रावधान नहीं है। परमिट नियमों के उल्लंघन पर भारी आर्थिक दंड और परमिट निरस्त करने के सख्त नियम बनाए गए है। ऑपरेटरों का आरोप है कि सरकारी और नगर परिवहन को प्राथमिकता देकर निजी बसों के रूट सीमित किए जा रहे हैं।  बता दें प्रदेश में वर्तमान में लगभग 28,000 बसें संचालित होती हैं, जिनमें ऑल इंडिया परमिट और स्टेज कैरिज बसें शामिल हैं। यदि यह हड़ताल होती है, तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। रोजाना सफर करने वाले करीब 1.5 लाख यात्रियों का आवागमन बाधित होगा। इससे ड्राइवरों, कंडक्टरों, मैकेनिकों और बुकिंग एजेंटों सहित हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। होली के कारण ट्रेनों में पहले से ही भारी वेटिंग है। ऐसे में बसों का बंद होना यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। फिलहाल, परिवहन विभाग की ओर से इस चेतावनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बस संचालकों ने भोपाल, इंदौर और ग्वालियर सहित कई जिलों में आरटीओ को ज्ञापन सौंपना शुरू कर दिया है।  सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है सम्मेलन में बस संचालकों ने एकमत होकर कहा कि जब सरकार की अपनी बसें ही नहीं है तो यह सेवा सरकारी कैसे हुई? सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है। पहले ही जनता का पैसा सरकार सूत्र सेवा बसों के रूप में बर्बाद कर चुकी है। अब फिर से द्वेष और दुर्भावना से जनता और ऑपरेटरों को धोखे में रख निजी कंपनियों को फायदा देने के मकसद से बसों से स्थायी परमिटों पर संचालन कर रहे। बस ऑपरेटर के परमिट सरकार छीनना चाहती है और बस ऑपरेटरों को बेरोजगार करना चाहती है। आंदोलन की चेतावनी हड़ताल की रणनीति तय करने के लिए सागर में संगठन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें रायसेन समेत कई जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग की गई और चेतावनी दी गई कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है तो प्रदेश में दैनिक यात्रियों, छात्रों और व्यापारिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे, 2 मार्च से करेंगे हड़ताल सरकार का अड़ियल रवैया देख बस ऑपरेटरों में गहरा रोष है। जिसको लेकर बस ऑपरेटरों ने निर्णय लिया है कि वे अगले एक से दो दिनों में प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखेंगे। मांगें नहीं मानी गई तो 2 मार्च से प्रदेश के सभी बस ऑपरेटर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। इसके लिए शासन जिम्मेदार होगा। बैठक में प्रदेश की सभी यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन किया है। क्या है 'मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना'? सरकार अप्रैल 2026 से इस योजना को शुरू करने का लक्ष्य रख रही है। इसके तहत लगभग दो दशक बाद परिवहन सेवा को फिर से सरकारी नियंत्रण में लाने की तैयारी है। सरकार का दावा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच किफायती, सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। खासकर उन ग्रामीण रूटों पर जहां अभी निजी बसों की कमी है या कनेक्टिविटी खराब है। सरकार खुद बसें नहीं खरीदेगी, बल्कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर काम करेगी। बसों की निगरानी सरकार करेगी, ट्रैकिंग के लिए बनेगा ऐप योजना के तहत बसें निजी ऑपरेटर्स की होंगी, लेकिन उनका नियंत्रण और निगरानी सरकार के पास होगी। बसों की ट्रैकिंग, ई-टिकटिंग और टाइम-टेबल के लिए एक मोबाइल एप और डैशबोर्ड बनाया जाएगा। इस सम्मेलन के दौरान मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन, बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष संतोष पांडेय, खंडवा जिले से प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुनील आर्य, जिला अध्यक्ष राजीव शर्मा, सिमरन चावला, रूपल आजमानी और सुरेश राउत समेत प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बस ऑपरेटर मौजूद थे। अनुबंध व्यवस्था लागू न की जाए बस ऑपरेटर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष कुशल मिश्रा ने प्रदेश सरकार द्वारा जो नई नीति लाई गई है, जिसके तहत प्राइवेट बस वालों से अनुबंध कराया जाएगा. उसी विषय पर आज हमारी पत्रकार वार्ता थी. हमारी 22 तारीख को सागर जिले में यूनियन की बैठक हुई थी, जिसमें यह निर्णय लिया गया है कि आगामी 2 मार्च से प्रदेश में बसों की हड़ताल होगी, क्योंकि कोई भी प्राइवेट बस संचालक अनुबंध नहीं करना चाहता है. हमारी मांग यही है कि यह अनुबंध व्यवस्था लागू न की जाए. यदि सरकार को गाड़ियां चलानी हैं, तो वह अपनी खुद की गाड़ियां चलाए, अपने मार्ग स्वयं तय करे और कंप्यूटर प्रणाली से संचालन करे. इसमें प्राइवेट बस संचालकों को क्यों शामिल किया जा रहा है.

पटवारी-आरआई 15 दिन बाद हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटे

मुंगेली. जिले के लोरमी तहसील में पिछले 15 दिनों से चल रहा पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और तहसीलदार के बीच का गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। कलेक्टर के मार्गदर्शन और हस्तक्षेप के बाद उनके निर्देशन में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के अधिकारियों तथा पटवारी-आरआई संगठनों के बीच बैठक आयोजित की, जिसमें आपसी सामंजस्य से समाधान निकाल लिया गया। इसके बाद हड़ताली पटवारी और राजस्व निरीक्षक अपने-अपने कार्य पर लौट आए। दरअसल, पटवारी और राजस्व निरीक्षक संघ ने लोरमी तहसील में पदस्थ तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया था। हड़ताली कर्मचारियों का आरोप था कि तहसीलदार द्वारा कार्य के दौरान अनावश्यक दबाव और प्रताड़ना दी जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर 29 जनवरी से लोरमी तहसील के पटवारी और आरआई अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब तीन दिनों के लिए जिला पटवारी–आरआई संघ ने भी समर्थन दे दिया। वहीं कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ (नायब तहसीलदार एवं तहसीलदार) ने तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की स्थिति में जोरदार विरोध दर्ज कराने की बात कही थी। संघ पदाधिकारियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी नाराजगी और मांगें रखी थीं। लगातार बढ़ते गतिरोध और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं कलेक्टर द्वारा बुलाई गई बैठक में सभी पक्षों को विस्तार से सुना गया। बैठक में आपसी संवाद, संयम और प्रशासनिक मर्यादा बनाए रखते हुए कार्य करने पर सहमति बनी। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की जो भी जायज मांगें या शिकायतें हैं, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए। इससे पहले उन्होंने मीटिंग में राजस्व प्रकरणों के मामलों का तेजी से निपटारा करने के निर्देश दिए, साथ ही शासन एवं जिला प्रशासन के प्राथमिकता वाले कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के भी निर्देश दिए।

हड़ताल का असर: कई जगह कर्मचारी सिर्फ सांकेतिक विरोध में शामिल, स्कूल और बाजार सामान्य

भोपाल  केंद्र सरकार की ' नो वर्क नो पे' (No Work No Pay) सहित अन्य जनविरोधी और कॉर्पोरेट परस्त आर्थिक नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी गुरुवार को देशव्यापी आम हड़ताल का बिगुल फूंका गया है। ग्वालियर में भी इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को छोड़कर सभी राष्ट्रीयकृत बैंक इस हड़ताल में शामिल होने जा रहे हैं। नए लेबर लॉ समेत कई मुद्दों के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संगठन आज हड़ताल कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में इसका मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है।जबलपुर और इटारसी में डिफेंस फैक्टरियों के सामने कर्मचारियों ने प्रदर्शन ​​किया। इटारसी में एक घंटा विरोध करने के बाद कर्मचारी काम पर लौट गए। हालांकि, इन जगह स्कूल, कॉलेज और बाजार खुले हुए हैं। हड़ताल में ट्रेड यूनियन के संयुक्त मोर्चा- आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा, बैंक, बीमा, केंद्रीय कर्मचारी, बीएसएनएल के संगठन शामिल हैं।मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया, हड़ताल में सरकारी के साथ प्राइवेट बैंक भी शामिल होंगे। भारतीय स्टेट बैंक यूनियन ने हड़ताल का समर्थन किया है, लेकिन वह सीधे तौर पर हड़ताल में शामिल नहीं रहेगा। हड़ताल का असर बीमा सेक्टर पर भी पड़ेगा। भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल रहेंगे। वहीं, बीएसएनएल-डाक विभाग में भी हड़ताल का असर दिखाई देगा। बीओआइएसयूइयू के एजीएस सौरभ सिकरवार ने बताया कि ग्वालियर में राष्ट्रीयकृत 11 बैंकों की 70 शाखाओं के 900 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी इस हड़ताल में 'नो वर्क-नो पे' के आधार पर शामिल होंगे। हड़ताल के चलते कल सुबह 9 से 11 बजे तक फूलबाग स्थित बैंक ऑफ इंडिया के सामने जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान बैंक, बीमा, बीएसएनएल, डाक, आयकर और आंगनबाड़ी जैसे विभागों में भी काम पूरी तरह ठप रहेगा।  हड़ताल में ये भी शामिल ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश के प्रवक्ता वीके शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ देशभर के दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों एवं सौ से अधिक स्वतंत्र ट्रेड यूनियंस के आह्वान पर देशभर के 25 अधिकारी- इस राष्ट्रव्यापी आम हड़‌ताल में भाग लेंगे। इस हड़ताल में बैंक, बीमा, केंद्र, बीएसएनएल, पोस्टल, आयकर, आंगनबाड़ी, आशाकर्मी, मध्यान्ह भोजन कर्मी, खेतिहर मजदूर, किसान संघ, पेंशनर्स, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, हम्माल मजदूर सभा आदि से संबंधित यूनियंस के साथ-साथ इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआइयूटीयूसी, सेवा समेत दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों एवं अन्य संस्थानों में कार्यरत ट्रेड यूनियंस के सदस्य भाग ले रहे हैं। संगठनों की प्रमुख मांगें     चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और उनसे जुड़े नियमों को रद्द करने की मांग।     ड्राफ्ट सीड बिल को वापस लेने की मांग।     बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करने की मांग।     SHANTI Act (न्यूक्लियर एनर्जी से संबंधित कानून) को वापस लेने की मांग।     मनरेगा की बहाली की मांग।     विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को रद्द करने की मांग।

US ट्रेड डील से न्यू लेबर कोड तक, इन मांगों को लेकर देशव्यापी भारत बंद

नई दिल्ली  संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते, केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में 12 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। आंदोलन को INTUC, AITUC, CITU, HMS सहित कई राष्ट्रीय यूनियनों का समर्थन प्राप्त है। संगठनों का दावा है कि करीब 30 करोड़ मजदूर हड़ताल में भाग ले सकते हैं. बंद के समर्थन में कई बैंक यूनियनों के शामिल होने से देशभर में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है. AIBEA, AIBOA और BEFI जैसी यूनियनों ने हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज धीमा रह सकता है. किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? परिवहन सेवाएं कई राज्यों में प्रभावित हो सकती हैं. बस, ऑटो और ट्रक यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक और निजी परिवहन बाधित हो सकता है. बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है. बैंकिंग सेवाओं में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं और चेक क्लीयरेंस में देरी संभव है. हालांकि, बैंक औपचारिक रूप से बंद नहीं रहेंगे. ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी.बाजार और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है. कई व्यापारिक संगठनों और मंडियों ने हड़ताल को समर्थन दिया है, जिससे थोक और खुदरा बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रह सकते हैं. सरकारी कार्यालयों में ट्रेड यूनियनों के प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रह सकती है, जिससे कामकाज धीमा हो सकता है. स्कूल और कॉलेजों के संबंध में स्थानीय प्रशासन स्थिति के अनुसार निर्णय ले सकता है. परिवहन और सुरक्षा कारणों से कुछ जिलों में छुट्टी घोषित की जा सकती है. SKM की किसानों से अपील ट्रेड यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में संगठित और असंगठित क्षेत्रों के लाखों मजदूर शामिल हो सकते हैं. एसकेएम ने किसानों से अपील की है कि वे भारी संख्या में प्रदर्शनों में शामिल हों और औद्योगिक श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाएं. उनका कहना है कि सरकार की नीतियां केवल कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं, जिससे आम जनता की आजीविका पर सीधा हमला हो रहा है.  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने समर्थन किया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट साझा कर लिखा, 'आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक की आवाज बुलंद करने सड़कों पर हैं. मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी. किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आखिरी सहारा भी छिन सकता है.' उन्होंने सरकार पर किसानों-मजदूरों की आवाज को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए आगे लिखा, 'जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नजरअंदाज किया गया. क्या मोदी जी अब सुनेंगे? या उन पर किसी 'grip' की पकड़ बहुत मजबूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूं.' कौन-सी सेवाएं रहेंगी सामान्य? अस्पताल, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी. दमकल विभाग, हवाई यात्रा और एयरपोर्ट संचालन पर असर नहीं पड़ेगा. डिजिटल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं भी चालू रहेंगी. क्या 12 फरवरी को बैंक बंद रहेंगे? भारतीय रिजर्व बैंक या किसी बैंक की ओर से 12 फरवरी को आधिकारिक अवकाश घोषित नहीं किया गया है. शाखाएं खुली रहेंगी, लेकिन यूनियन की भागीदारी के कारण सेवाओं में आंशिक बाधा आ सकती है. अगर आप 12 फरवरी को बाहर निकलने की प्लान बना रहे हैं तो अपने शहर की परिवहन व्यवस्था की स्थिति पहले से जांच लें. बैंकिंग कार्यों को संभव हो तो ऑनलाइन निपटाएं और बाजार या सरकारी कार्यालय जाने से पहले स्थानीय अपडेट अवश्य देखें. बंद की वजह: किन मुद्दों पर आंदोलन? कई किसान, मजदूर और कर्मचारी संगठनों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:     भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध     चार नए लेबर कोड वापसी की मांग     सरकारी उपक्रमों के निजीकरण का विरोध     पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली     न्यूनतम वेतन में वृद्धि     निर्माण और बिजली क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा     कृषि संबंधित कानूनों और नीतियों में बदलाव की मांग कई राज्यों में बस, ऑटो-रिक्शा और ट्रक यूनियनों के भी हड़ताल में शामिल होने की संभावना है, जिससे परिवहन सेवाओं पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है. किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? 1. परिवहन सेवाएं कई राज्यों में बस, ऑटो और लॉरी ड्राइवर्स यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक व निजी परिवहन प्रभावित हो सकता है. बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था में बाधा आने की संभावना है.  2. बैंकिंग सेवाएं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं. चेक क्लीयरेंस में देरी की आशंका बनी हुई है. हालांकि, बैंक बंद नहीं होंगे और ऑनलाइन लेन-देन व एटीएम सेवाएं सामान्य रहेंगी. 3. बाजार और व्यापार कई व्यापारिक संगठनों और मंडियों ने हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है, जिससे बड़े शहरों में थोक और खुदरा बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रह सकते हैं. 4. सरकारी कार्यालय ट्रेड यूनियनों के अधिक प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहने की संभावना, जिससे सरकारी कामकाज धीमा हो सकता है. 5. स्कूल और कॉलेज सुरक्षा और परिवहन समस्याओं को देखते हुए, कुछ राज्यों में जिला प्रशासन स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर सकता है. जो सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी     एंबुलेंस, अस्पताल और अन्य आपातकालीन सेवाएं     दमकल विभाग     हवाई यात्रा और एयरपोर्ट संचालन     डिजिटल बैंकिंग और एटीएम क्या बैंक औपचारिक रूप से बंद रहेंगे? नहीं. भारतीय रिजर्व बैंक या किसी भी बैंक ने 12 फरवरी को अवकाश घोषित नहीं किया है. शाखाएं खुली रहेंगी, लेकिन यूनियन भागीदारी के कारण सेवा में रुकावट आ सकती है.

शनिवार को ओला, उबर और रैपिडो की हड़ताल, यूनियन ने नितिन गडकरी को लिखा पत्र, हस्तक्षेप की अपील

नई दिल्ली ओला, उबर या रैपिडो जैसे कैब, बाइक और ऑटो सर्विस देने वाले एप्स पर काम करने वाले चालकों के यूनियन ने 7 फरवरी 2026 को देश के प्रमुख शहरों में हड़ताल का एलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन को 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' नाम दिया गया है, जिसके चलते यात्रियों को कार और ऑटो बुक करने में खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है। TGPWU ने किया हड़ताल का नेतृत्व तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने राष्ट्रीय मजदूर संगठनों के साथ मिलकर इस हड़ताल का नेतृत्व किया है। यूनियन का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां ड्राइवरों का अंतहीन शोषण कर रही हैं। यूनियन का कहना है कि सरकार द्वारा कोई न्यूनतम किराया (Minimum Fare) तय न होने के कारण कंपनियां अपनी मर्जी से रेट तय करती हैं। साथ ही कंपनियों की मनमानी के कारण ड्राइवरों की आय अनिश्चित हो गई है, जिससे वे गरीबी के जाल में फंस रहे हैं। इसके अलावा रेगुलेशन की कमी के कारण वर्किंग आवर्स और सुरक्षा मानकों को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। यूनियन ने नितिन गडकरी को लिखा पत्र यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि लंबे समय से लंबित इन समस्याओं के कारण लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स का भविष्य दांव पर लगा है। ड्राइवरों की मांग है कि सरकार एक पारदर्शी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करे ताकि एग्रीगेटर कंपनियों के एकाधिकार को खत्म किया जा सके।  

निगम कर्मचारियों की हड़ताल कल से शुरू, जरूरी सेवाओं पर नहीं पड़ेगा असर

रायपुर रायपुर नगर निगम के सभी अधिकारी और कर्मचारी छत्तीसगढ़ राज्य अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन की 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में 29, 30 और 31 दिसंबर को आंदोलन करेंगे. इस दौरान 29 और 30 दिसंबर को निगम मुख्यालय और सभी 10 जोनों में अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय में काली पट्टी लगाकर कार्य करेंगे, जबकि 31 दिसंबर को एक दिन का सामूहिक अवकाश लेकर रैली निकालते हुए सामूहिक हड़ताल में शामिल होंगे. रायपुर नगर पालिक निगम अधिकारी-कर्मचारी एकता संघ ने स्पष्ट किया है कि सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा. इसी कारण 29 और 30 दिसंबर की कार्य करते हुए विरोध दर्ज किया जाएगा. 31 दिसंबर को रैली और धरना-प्रदर्शन में शामिल होंगे. 27 दिसंबर को छत्तीसगढ़ राज्य अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी, राज्य पदाधिकारी उमेश मुदलियार और रायपुर जिला संयोजक पीताम्बर पटेल ने रायपुर नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर आंदोलन की जानकारी दी और समर्थन मांगा है. एकता संघ के कार्यकारी अध्यक्ष प्रमोद जाधव ने फेडरेशन की सभी मांगों को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की. बताया कि 29 दिसंबर की प्रतिनिधिमंडल महापौर मीनल चौबे और आयुक्त विश्वदीप से मिलकर आगामी 10 वर्षों के लिए प्रस्तावित निगम सेटअप में सभी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को समान अवसर और शीघ्र विभागीय पदोन्नति देने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपेगा.

डॉक्टरों की हड़ताल से प्रभावित स्वास्थ्य सेवाएं, हिमाचल में OPD बंद, आपात सेवाएं जारी

शिमला हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर संकट में आ गई हैं। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला के रेजिडेंट डॉक्टरों ने आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में OPD और रूटीन ऑपरेशन पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। हालांकि, इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी। हड़ताल के पहले दिन ही मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज इलाज के लिए निजी अस्पतालों या पड़ोसी राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं। SOP जारी, फिर भी हालात चिंताजनक मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट (DMER) ने हड़ताल को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है। इसमें कहा गया है कि इलाज और पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि OPD पूरी तरह बंद हैं और मरीज बिना इलाज लौट रहे हैं। सीएम के आश्वासन के बावजूद हड़ताल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा मांगें मानने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। शुक्रवार को सीएम और डॉक्टरों के बीच बैठक भी हुई थी, लेकिन बात नहीं बनी।शनिवार से डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। 3000 से ज्यादा डॉक्टर हड़ताल पर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) के समर्थन में हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) और स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स (SAMDCOT) भी उतर आई हैं। इससे करीब 3000 डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। क्या है पूरा विवाद? 22 दिसंबर को IGMC में पल्मोनरी डिपार्टमेंट के डॉक्टर राघव निरूला और एक मरीज के बीच मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था। दोनों पक्षों में विवाद हुआ, जिसके बाद सरकार ने जांच करवाई। जांच रिपोर्ट में डॉक्टर और मरीज—दोनों को दोषी बताया गया। 24 दिसंबर को सरकार ने डॉ. राघव निरूला को टर्मिनेट कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों में आक्रोश फैल गया। मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। AIIMS दिल्ली के डॉक्टर भी RDA के समर्थन में आ गए हैं। डॉक्टरों की प्रमुख मांगें डॉ. राघव निरूला की बर्खास्तगी वापस ली जाए IGMC परिसर में हुई हिंसा के दोषियों पर FIR दर्ज हो डॉक्टरों को जान से मारने की धमकी देने वालों पर कार्रवाई हो अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट शनिवार को भी अस्पतालों की OPD बंद रही। मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ेगा।

हरियाणा :डॉक्टरों की स्ट्राइक से तीन जिलों में व्यवस्था बाधित, CMO ने कहा- हड़ताल विफल

हिसार  हरियाणा के सभी नागरिक अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टर सोमवार से दो दिन की हड़ताल पर रहेंगे। अपनी मांगों को लेकर हरियाणा चिकित्सा सेवा संघ (एचसीएमएसए) के बैनर तले उन्होंने दो दिन का सामूहिक अवकाश लिया है। चिकित्सा सुविधा ना मिलने से लोगों को परेशानी हो सकती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि लोगों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ कुलदीप सिंह ने कहा कि सभी जिला अस्पतालों को छूट दी गई है कि वे आवश्यकतानुसार बाहर से स्पेशलिस्ट डॉक्टर बुला सकेंगे। इसका पूरा खर्च स्वास्थ्य विभाग वहन करेगा। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), डेंटल, आयुष विभाग के डॉक्टरों की ड्यूटी भी हड़ताल के दौरान ओपीडी में लगाई गई है। दूसरी ओर हड़ताल पर जाने वाले डॉक्टरों का कहना है कि सोमवार व मंगलवार को स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखी जाएंगी।  सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो बुधवार से बेमियादी हड़ताल पर जाएंगे। वहीं, गुरुग्राम की सीएमओ डॉ. अलका सिंह ने बताया कि आपातकालीन सेवाएं पूर्व की भांति चालू रहेंगी। गंभीर और भर्ती मरीजों के उपचार पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इलेक्टिव सर्जरी नहीं की जाएंगी। एचसीएमएसए के प्रधान डॉ. राजेश ख्यालिया ने कहा कि उनकी तरफ से कई बार बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने का मौका दिया जा चुका है। काफी समय से इन मांगों की तरफ से किसी तरह का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अब हड़ताल के दौरान आने वाली परेशानी को लेकर एसोसिएशन नहीं बल्कि सरकार जिम्मेदार होगी। हां जिला वाइज जानिए कैसा रहा हड़ताल का असर…. कैथल : डॉक्टरों की हड़ताल पूरी तरह से असफल रही। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरों की टीम बुलाकर मरीजों का इलाज करवाया गया। हालांकि कैथल के करीब 50 डॉक्टर हड़ताल पर रहे, लेकिन उतने ही डॉक्टरों को बाहर से बुलाकर मरीजों का इलाज करवाया गया। इस संबंध में सिविल अस्पताल के प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर दिनेश कंसल ने कहा कि इलाज रोजाना की तरह सुचारू रहा। सभी तरह के टेस्ट, इमरजेंसी सेवाएं व ऑपरेशन सुचारू रहे। फतेहाबाद : फतेहाबाद में हड़ताल का कोई ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है। 70 में से 67 डॉक्टर हड़ताल पर रहे हैं। 10 डॉक्टर अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से बुलाए गए हैं। जिनके जरिए ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं जारी रही। फतेहाबाद में चर्म रोग विशेषज्ञ और मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी प्रभावित रही। सीएमओ डॉ.बुधराम ने कहा है कि मरीजों को अभी तक कोई परेशानी नहीं हुई है। व्यवस्था सही चल रही है। हिसार : हिसार की चीफ मेडिकल ऑफिसर(CMO) डॉक्टर सपना गहलावत ने हिसार में नागरिक अस्पताल में 1600 से 2000 तक की ओपीडी रोजाना होती है। डॉक्टरों की हड़ताल का असर न हो इसके लिए तमाम बंदोबस्त किए हैं। सीएमओ ने बताया कि हमने आयुष के डॉक्टर और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की भी मदद ली है। हिसार जिले में 157 डॉक्टरों में से 22 फिलहाल ड्यूटी पर हैं। सीएमओ ने बताया कि हम हड़ताली डॉक्टरों को मनाने की कोशिश भी कर रहे हैं कि वह ड्यूटी पर वापस आएं। गुरुग्राम: गुरुग्राम में 70 फीसदी डॉक्टर हड़ताल पर हैं, जिसके कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। अकेले जिला अस्पताल में सोमवार को 2 से ढाई हजार को ओपीडी होती है। पीएमओ डॉक्टर लोकवीर ने डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर बताया कि रात में ही सरकार की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए थे। ओपीडी, लेबर रूप, इमरजेंसी आदि सभी सेवाएं चल रही है। डॉक्टर सभी मरीजों को देख रहे है। आयुष और अन्य डॉक्टरों की मदद से सभी सुविधाएं चल रही है। डॉक्टरों की दो मांगें -पहली सीधी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) की भर्ती रोकना। -पहले से ही स्वीकृत किए गए संशोधित संवर्धित सेवा संवितरण (एसीपी) संरचना की अधिसूचना जारी करना। डॉक्टरों के साथ बातचीत जारी है। लोगों को परेशानी नहीं आने देंगे। -कुलदीप सिंह, स्वास्थ्य महानिदेशक। 

जनसंपर्क विभाग कर्मचारी पेन डाउन हड़ताल पर, काम प्रभावित

मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग में पेन डाउन हड़ताल बाहरी हस्तक्षेप’ के विरोध में अधिकारियों-कर्मचारियों का सामूहिक आक्रोश भोपाल  मध्य प्रदेश के जनसंपर्क विभाग में राज्य प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के एक अधिकारी की पदस्थापना को लेकर उपजे असंतोष ने सोमवार को राज्यभर में व्यापक रूप ले लिया। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस आदेश को “विभाग की गरिमा और पेशेवर संरचना के विरुद्ध” बताते हुए आज सुबह 11 बजे से अनिश्चितकालीन पेन डाउन हड़ताल की शुरुआत कर दी। आयुक्त से भेंट के बाद उभरा निर्णय सोमवार सुबह आयुक्त जनसंपर्क श्री दीपक सक्सेना से प्रतिनिधिमंडल की भेंट के बाद, विभागीय कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि जब तक आरएएस अधिकारी श्री गणेश जायसवाल की जनसंपर्क विभाग में पदस्थापना संबंधी आदेश निरस्त नहीं किया जाता, तब तक सभी अधिकारी-कर्मचारी कलम बंद रखेंगे और नियमित कार्य बाधित रहेंगे। विभागीय ढाँचे में ‘बाहरी हस्तक्षेप’ का विरोध जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह विभाग अपनी विशिष्ट कार्यप्रणाली, लेखन-कौशल, मीडिया प्रबंधन, संचार रणनीति और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर आधारित है, जिसे वर्षों से प्रशिक्षित जनसंपर्क कैडर के अधिकारियों-कर्मचारियों ने अपनी मेहनत से आगे बढ़ाया है। उनके अनुसार— “यह राजस्व अथवा प्रशासनिक प्रवृत्ति वाला विभाग नहीं, बल्कि राज्य सरकार और जनता के बीच संचार सेतु का संवेदनशील और रचनात्मक मंच है। इसमें बाहरी सेवाओं के हस्तक्षेप से कार्य-प्रवाह प्रभावित होता है और विभाग की विशेषज्ञता कमजोर पड़ती है।” रात–दिन सरकारी संदेशों का संप्रेषण करने वाले विभाग का आक्रोश जनसंपर्क विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इस बात से भी क्षुब्ध हैं कि वे दिन-रात सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और जनहितकारी योजनाओं को जनता तक पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं, परंतु विभाग में अनायास एवं अप्रासंगिक पदस्थापना से उनकी विशेषज्ञता और स्वायत्तता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो जाता है। मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा अधिकारियों ने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, जो स्वयं जनसंपर्क विभाग के मंत्री भी हैं, को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए आदेश को वापस लेना चाहिए।उनका मत है कि विभाग की संवैधानिक और प्रशासनिक गरिमा बनाए रखने के लिए श्री गणेश जायसवाल की नियुक्ति संबंधी आदेश रद्द करना अत्यावश्यक है। प्रदेशभर में कार्य ठप होने की संभावना हड़ताल के चलते समाचार-संकलन, प्रेस नोट, कार्यक्रम कवरेज, सरकारी विज्ञापन, योजनाओं के प्रचार-प्रसार और मीडिया संवाद जैसी गतिविधियाँ प्रभावित हो गई हैं। यदि यह स्थिति लंबी चली तो प्रदेश सरकार के जनसंपर्क संबंधी कार्यों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

आज 9 जुलाई को बड़े स्तर पर भारत बंद की तैयारी, बैंकिंग, इंश्योरेंस, पोस्टल सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी शामिल हो सकते

नई दिल्ली आज बुधवार को बड़े स्तर पर भारत बंद की तैयारी है। अनुमान है इस बंद में बैंकिंग, इंश्योरेंस, पोस्टल सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। यह हड़ताल 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने बुलाई है और इसे भारत बंद का नाम दिया है। यह भारत बंद सरकार की मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों के विरोध में बुलाया गया है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की अमरजीत कौर ने कहाकि हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक कर्मचारियों के भाग लेने की उम्मीद है। किसान और ग्रामीण कर्मचारी भी देशभर में इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनेंगे। हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा कि हड़ताल के कारण बैंकिंग, डाक, कोयला खनन, कारखाने, राज्य परिवहन सेवाएं प्रभावित होंगी। सरकार की नीतियों पर सवाल भारत बंद कर रहे संगठनों ने पिछले साल श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को 17-सूत्रीय मांगों का एक चार्टर सौंपा था। इनका कहना है कि सरकार पिछले 10 वर्षों से वार्षिक श्रम सम्मेलन का आयोजन नहीं कर रही है। यह मजदूरों-कर्मचारियों के हितों के खिलाफ फैसले ले रही है। मजदूर संगठनों के मंच ने यह आरोप भी लगाया कि आर्थिक नीतियों के कारण बेरोजगारी बढ़ रही है, जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं, मजदूरी में गिरावट आ रही है और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बुनियादी नागरिक सुविधाओं में सामाजिक क्षेत्र के खर्च में कटौती हो रही है। ये सभी गरीबों, निम्न आय वर्ग के लोगों के साथ मध्यम वर्ग के लिए और अधिक असमानता और अभाव पैदा कर रहे हैं। इस बात का लगाया आरोप मंच ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी विभागों में युवाओं को नियमित नियुक्तियां देने के बजाय रिटायर्ड लोगों को ही काम पर रखने की नीति देश को आगे नहीं ले जाएगी। वजह, 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम आयु की है। वहीं, बेरोजगारों की संख्या 20 से 25 साल के आयु वर्ग के लोगों में सबसे अधिक है। बयान में कहा गया है कि हम सरकार से बेरोजगारी पर ध्यान देने, स्वीकृत पदों पर भर्ती करने, अधिक नौकरियों के सृजन, मनरेगा श्रमिकों के कार्य दिवसों एवं मजदूरी में बढ़ोतरी के साथ शहरी क्षेत्रों के लिए भी समान कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए ईएलआई (रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना लागू करने में व्यस्त है। यह भी हड़ताल में रहेंगे शामिल एनएमडीसी लिमिटेड और अन्य गैर-कोयला खनिज, इस्पात, राज्य सरकार के विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के श्रमिक नेताओं ने भी हड़ताल में शामिल होने का नोटिस दिया है। श्रमिक नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है और ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर लामबंदी करने का फैसला किया है। श्रमिक संगठनों ने इसके पहले 26 नवंबर, 2020, 28-29 मार्च, 2022 और पिछले साल 16 फरवरी को भी इसी तरह की देशव्यापी हड़ताल की थी।  देशभर में आज  9 जुलाई को भारत बंद का ऐलान किया गया है। यह बंद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर बुलाया है। इनमें बैंक, बीमा, डाक, कोयला खदान, हाईवे और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टरों के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस विरोध प्रदर्शन को ' भारत बंद ' नाम दिया गया है। यूनियनों का कहना है कि सरकार की नीतियां कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाली और मजदूरों के खिलाफ हैं। ग्रामीण भारत से किसान और खेतिहर मजदूर भी इस बंद में शामिल होंगे। अडानी ने किसे दिया बिना शर्त 12600 करोड़ रुपये का ऑफर? इस कंपनी को खरीदने का है प्लान बंद में इन ट्रेड यूनियनों का समर्थन इस हड़ताल में कई प्रमुख राष्ट्रीय संगठन शामिल हैं। इनमें ये शामिल हैं:     इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)     ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)     हिंद मजदूर सभा (HMS)     सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU)     ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC)     ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC)     सेल्फ एम्प्लॉयड वीमेंस एसोसिएशन (SEWA)     ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU)     लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF)     यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC) क्या खुला है, क्या बंद रहेगा? इस हड़ताल से कई क्षेत्रों पर असर पड़ने की उम्मीद है। इनमें बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, डाक विभाग, कोयला खनन और कारखाने, राज्य परिवहन सेवाएं, सरकारी कार्यालय शामिल हैं। एनएमडीसी और स्टील व खनिज क्षेत्रों की कई सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल में शामिल होने की पुष्टि की है। हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के उद्योगों और सेवाओं में मजबूत भागीदारी देखने को मिलेगी। क्या बैंक बंद रहेंगे? बैंकिंग यूनियनों ने अलग से बंद के कारण सेवाओं में व्यवधान की पुष्टि नहीं की है। लेकिन, बंद आयोजकों के अनुसार वित्तीय सेवाएं प्रभावित होंगी। बंद आयोजकों ने कहा कि हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सहकारी बैंकिंग क्षेत्रों के कर्मचारी शामिल हैं। इससे कई क्षेत्रों में शाखा सेवाएं, चेक क्लीयरेंस और ग्राहक सहायता जैसी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस का क्या होगा? 9 जुलाई को स्कूल, कॉलेज और प्राइवेट ऑफिस खुले रहने की उम्मीद है। हालांकि, परिवहन संबंधी समस्याओं के कारण कुछ क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। ट्रेड यूनियनों और सहयोगी ग्रुप की ओर से कई शहरों में विरोध मार्च और सड़क प्रदर्शन किए जाने से सार्वजनिक बसें, टैक्सियां और ऐप-आधारित कैब सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे स्थानीय यात्रा और लॉजिस्टिक्स संचालन में देरी या रद्द होने की संभावना है। क्या रेल सेवाएं प्रभावित होंगी? 9 जुलाई को देशव्यापी रेलवे हड़ताल की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम की आशंका है, जिससे कुछ क्षेत्रों में ट्रेन सेवाएं बाधित हो सकती हैं या उनमें देरी हो सकती है। रेलवे यूनियनों ने औपचारिक रूप से भारत बंद में भाग नहीं लिया है। लेकिन, पहले हुईं इस तरह की हड़तालों में देखा गया है कि प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशनों के पास या पटरियों पर प्रदर्शन करते … Read more