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बंदूक छोड़ विकास की राह पर बढ़े युवा, सुकमा में आत्मसमर्पण के बाद बदल रही जिंदगी की तस्वीर

जब बंदूक छूटी, तो हाथों में आया सुनहरा भविष्य :  सुकमा में आत्मसमर्पित युवाओं की जिंदगी लिख रही विकास की नई कहानी जिन हाथों में कभी हथियार थे, अब वे बनाएंगे गरीबों के आशियाने सोड़ी हूंगी और पदम रैनू जैसे युवाओं के जीवन में लौटी उम्मीद, हुनर ने दिया सम्मान से जीने का नया आधार सुकमा में पुनर्वास की अनूठी पहल बनी राष्ट्रीय मिसाल, 280 से अधिक आत्मसमर्पित युवाओं को मिला रोजगार का रास्ता रायपुर, बस्तर की पहचान लंबे समय तक संघर्ष, भय और नक्सल हिंसा के साये से जुड़ी रही है। सुकमा जैसे जिले के घने जंगलों में ऐसी कई पीढ़ियां बड़ी हुईं, जिन्होंने विकास से ज्यादा बंदूक की आवाज सुनी, स्कूल से ज्यादा भय देखा और सपनों से ज्यादा संघर्षों का सामना किया। लेकिन आज उसी सुकमा से एक ऐसी कहानी निकलकर सामने आ रही है, जो केवल बदलाव की नहीं, बल्कि उम्मीद और विश्वास की कहानी है। यह कहानी उन युवाओं की है, जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता चुना था, लेकिन आज वे अपने हाथों में निर्माण के औजार लेकर समाज के विकास में भागीदार बनने की तैयारी कर रहे हैं। यह कहानी उन बेटियों की है, जिन्होंने जंगलों की अनिश्चित जिंदगी छोड़कर आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना है। यह कहानी उस प्रशासनिक संवेदनशीलता की है, जिसने आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को केवल मुख्यधारा में लौटने का अवसर नहीं दिया, बल्कि उन्हें सम्मान के साथ जीने का नया आधार भी दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित पुनर्वास और कौशल विकास कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन सुकमा और एसबीआई आरसेटी के संयुक्त प्रयासों से 25 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। यह प्रशिक्षण केवल रोजगार देने का माध्यम नहीं, बल्कि जिंदगी को नए सिरे से गढ़ने का अवसर बन गया है। जंगलों की खामोशी से निर्माण स्थलों की रौनक तक इन युवाओं का अतीत संघर्षों से भरा रहा है। जंगलों में बिताए वर्षों ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में जीना सिखाया, लेकिन भविष्य के सपने देखने का अवसर नहीं दिया। आज जब वे प्रशिक्षण केंद्र में ईंट जोड़ना, दीवार खड़ी करना और मकान बनाना सीख रहे हैं, तब वे केवल भवन निर्माण नहीं सीख रहे, बल्कि अपनी टूटी हुई उम्मीदों को भी फिर से जोड़ रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आधुनिक निर्माण तकनीक, माप-जोख, चिनाई, प्लास्टर और भवन निर्माण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। आने वाले समय में यही युवा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित विभिन्न निर्माण कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे। जिन हाथों में कभी हथियार थे, वही हाथ अब किसी गरीब परिवार के सपनों का घर खड़ा करेंगे। सोड़ी हूंगी : अब जिंदगी में डर नहीं, सपनों की जगह है कोंटा क्षेत्र के अरलमपल्ली गांव की रहने वाली सोड़ी हूंगी उन महिलाओं में शामिल हैं, जिनके जीवन ने यह साबित किया है कि अवसर मिले तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, बदलाव संभव है। हूंगी बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब जीवन में हर दिन अनिश्चितता थी। लेकिन आत्मसमर्पण के बाद प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा, सम्मान और सीखने का अवसर दिया। आज वे राजमिस्त्री का प्रशिक्षण ले रही हैं और अपने भविष्य को लेकर उत्साहित हैं। उनकी आंखों में आत्मविश्वास झलकता है जब वे कहती हैं, अब हम किसी पर बोझ नहीं रहेंगे। अपने हाथों की मेहनत से कमाएंगे और परिवार का सहारा बनेंगे। हूंगी जैसी कई महिलाओं के लिए यह प्रशिक्षण केवल रोजगार नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वतंत्र पहचान का माध्यम बन गया है। ’पदम रैनू: ‘सरकार ने हमें भटकने से बचाया’ जगरगुंडा के मंडीमरका गांव के निवासी ’पदम रैनू’ की कहानी भी उतनी ही भावुक और प्रेरणादायक है। जंगलों में बीते वर्षों को याद करते हुए वे कहते हैं कि वहां जीवन केवल संघर्ष और अनिश्चितता का पर्याय था। न रहने का ठिकाना, न भविष्य की कोई गारंटी। हर दिन नई चिंता होती थी। लेकिन आज हमें रहने की सुविधा मिली है, सीखने का अवसर मिला है और सबसे बड़ी बात यह कि सम्मान मिला है। सरकार ने हमें भटकने से बचाया और जीने का नया रास्ता दिखाया। पदम की यह बात केवल उनकी व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि उन सैकड़ों युवाओं की आवाज है, जिनके जीवन में पुनर्वास योजनाओं ने नया विश्वास पैदा किया है। एक पहल जिसने बदल दी दो तस्वीरें जिला प्रशासन की यह पहल केवल आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास तक सीमित नहीं है। इसका सकारात्मक प्रभाव जिले के विकास पर भी दिखाई दे रहा है। सुकमा के अनेक दूरस्थ क्षेत्रों में लंबे समय से कुशल राजमिस्त्रियों की कमी महसूस की जाती रही है। इससे प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य निर्माण कार्यों की गति प्रभावित होती थी। अब प्रशिक्षित युवा न केवल अपने लिए रोजगार का रास्ता बना रहे हैं, बल्कि जिले के विकास कार्यों को भी नई गति देने वाले हैं। इस प्रकार एक ही पहल ने दो बड़े लक्ष्य साध लिए हैं, एक ओर युवाओं को सम्मानजनक जीवन का अवसर मिला, दूसरी ओर विकास कार्यों को स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन प्राप्त हुआ। 280 से अधिक युवाओं की जिंदगी में आया बदलाव कलेक्टर अमित कुमार बताते हैं कि आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि व्यक्ति को समाज का जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनाने की यात्रा है। इसी सोच के साथ अब तक लगभग 280 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य है कि पुनर्वासित युवाओं को ऐसा कौशल मिले, जिससे वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। यही कारण है कि प्रशिक्षण के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्स्थापन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बदलते बस्तर की नई पहचान आज सुकमा की यह कहानी केवल सरकारी योजना की सफलता नहीं है। यह उस विश्वास की जीत है, जो कहता है कि हर व्यक्ति को दूसरा अवसर मिलना चाहिए। यह उस संवेदनशील शासन व्यवस्था की कहानी है, जिसने भटके हुए युवाओं में भी संभावनाएं देखीं। यह उस बदलते बस्तर की कहानी है, जहां अब विकास की चर्चा होती है, रोजगार की बात होती है और सपनों को सच करने की कोशिश होती है। कभी जिन पगडंडियों पर भय … Read more

बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ

बदलते बस्तर की नई तस्वीर, बंदूक के साए से सुशासन की छांव तक बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ पहुँचविहीन गांव मैलासुर, दंतेषपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका में ग्रामीणों को दी सौगात स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया निर्माण की तत्काल स्वीकृति रायपुर बस्तर के सुदूर वनांचलों से डर और उपेक्षा का अंधेरा अब छंटने लगा है, और इसकी गवाह बनी सुकमा की वो तस्वीरें जहां जिले के मुखिया खुद दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना जनता के द्वार पहुंचे रहे हैं। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने कोंटा विकासखंड के धुर नक्सल प्रभावित रहे और पहुंचविहीन गांवों भेज्जी, मैलापुर, दंतेशपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का ऐतिहासिक दौरा किया। सालों से मुख्यधारा से कटे इन गांवों के उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों पर जब अधिकारियों का काफिला मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला, तो यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के मन में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाने का सफर बन गया। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। चौपाल पर संवाद और श्सुशासन परिसरश् की सराहना अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे श्सुशासन परिसरश् का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर अमित कुमार ने दुर्गम घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में बने परिसर की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया। इस बहुद्देशीय परिसर में एक ही बाउंड्रीवाल के भीतर स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन को समेटा गया है, जो ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सारी मूलभूत सुविधाएं देने का बेहतरीन मॉडल है। सुशासन शिविर के दौरान मैलासुर पंचायत में अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और निर्माणाधीन कार्यों को समय पर पूरा करने का संकल्प दोहराया। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगातें प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीणों की सेहत और बच्चों की शिक्षा पर रहा। कलेक्टर ने संवेदनशील पहल करते हुए भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में इसके लिए तत्काल जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए। गछनपाल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के रहने के लिए स्टाफ क्वार्टर को मंजूरी दी गई, ताकि चौबीसों घंटे इलाज की सुविधा मिल सके। शिक्षा की लौ को मजबूत करने के लिए दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश के मौसम से पहले हर हाल में पूरा करने का निर्देश शिक्षा विभाग को दिया गया, साथ ही अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। पेयजल, आजीविका और कृषि को मिला नया जीवन गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता लाने के लिए कलेक्टर ने आजीविका के नए द्वार खोले। मैलासुर और दंतेषपुरम के ग्रामीणों की मांग पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हाँकन किया गया और ग्रामीणों को मछली बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दंतेषपुरम में एक नए डैम और तालाब निर्माण की बड़ी स्वीकृति दी गई, साथ ही क्रेड़ा विभाग को पानी टंकी बनाने के निर्देश दिए गए। मैलासुर और बोदराजपदर में पेयजल संकट को खत्म करने के लिए नए हैंडपंप और बोरिंग की तत्काल मंजूरी दी गई। पीएचई विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन का काम पूरा हो चुका है, वहां बिना देरी किए तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए। और जहाँ काम पूरा नहीं हुआ है वहां तेजी से कार्य पूरा कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाये।  कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में श्सुशासन परिसरश् और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण वाकई प्रेरणादायी है। कलेक्टर ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो चुके इन अंतिम छोर के गांवों तक विकास की रफ्तार पहुंचाना है। बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण तक शासन की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच सके। सड़कों से जुड़ेंगे दिल और रास्ते, विकास की रफ्तार होगी तेज बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे पहुंचविहीन रास्तों को अब पक्की सड़कों की मजबूती मिलने जा रही है। कलेक्टर ने बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेशपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजेएसवाई) का तत्काल प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारीयांे को दिए। आरईएस विभाग द्वारा डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी मुआयना किया गया। मोटरसाइकिल के पहियों से शुरू हुआ प्रशासन का यह सफर सुकमा के इन दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिख गया है, जो यह साबित करता है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर की पहचान बंदूक से नहीं, बल्कि सुशासन और समृद्धि से हो रही है। केलक्टर के निरीक्षण के दौरान एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, एडिशनल एसपी मनोज तिर्की, कार्यपालन अभियंता पीएमजेएसवाई रविंद्र ताती, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रितिश टंडन, बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर सहित अन्य जिलाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।

नक्सल क्षेत्र में स्वास्थ्य क्रांति, मिनपा हेल्थ सेंटर ने बदली सेवाओं की तस्वीर

रायपुर  अत्यंत सुदूर, पहुंचविहीन एवं संवेदनशील क्षेत्र सुकमा जिले का मिनपा स्वास्थ्य केंद्र आज सेवा, संघर्ष और समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल बन चुका है। जो स्वास्थ्य सेवाएं वर्ष 2022 में सीमित संसाधनों और झोपड़ीनुमा अस्थायी व्यवस्था से प्रारंभ हुई थीं, वही आज राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) मूल्यांकन तक पहुंचकर एक नई उपलब्धि दर्ज कर रही हैं। उस समय क्षेत्र की भौगोलिक कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को गांव तक पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लगातार गांव-गांव पहुंचकर हेल्थ कैंप संचालित किए और उपचार के साथ-साथ जनमानस में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का वातावरण तैयार किया। मितानिन, एएनएम, सीएचओ, सुपरवाइजर, सेक्टर मेडिकल ऑफिसर सहित मैदानी स्वास्थ्य अमले की सतत मेहनत एवं जिला प्रशासन के सहयोग से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत हुआ। वर्षों की इसी निरंतर मेहनत और सेवा भावना का परिणाम है कि दिनांक 15 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक (NQAS) मूल्यांकन दल द्वारा मिनपा स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण एवं मूल्यांकन सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। मिनपा की यह यात्रा केवल एक अस्पताल के विकास की कहानी नहीं, बल्कि विषम परिस्थितियों में भी जनसेवा के संकल्प को जीवंत रखने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण का प्रेरक उदाहरण है।  

17 मरीज रेफर, 14 आयुष्मान कार्ड, 11 को मुफ्त चश्मा, स्वास्थ्य बस्तर अभियान की बड़ी सफलता

रायपुर स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र के मरीज को बेहतर इलाज दिलाने के लिए स्वास्थ्य टीम ने सराहनीय प्रयास किया। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा मार्गदर्शन में पोटकपल्ली स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुटेपढ़ गांव से मरीज को पहले किस्टाराम और फिर जिला अस्पताल सुकमा तक पहुंचाया। इस दौरान मरीज ने कुल 310 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया, जिससे समय पर उपचार संभव हो सका। यह सफलता सतत स्क्रीनिंग, प्रभावी काउंसलिंग, समय पर रेफरल और मजबूत फॉलो-अप व्यवस्था के कारण संभव हो पाई। सेक्टर मेडिकल ऑफिसर के समन्वय और स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत ने इस अभियान को और अधिक प्रभावी बना दिया। दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अभियान के अंतर्गत किस्टाराम और मरईगुड़ा के अंदरूनी गांवों से कुल 17 मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। इनमें से 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर बनाकर प्रिंट किए गए, ताकि इलाज के दौरान आर्थिक परेशानी न हो। वहीं 2 अस्थमा और 2 पैरों में सूजन से पीड़ित मरीजों को विशेष जांच और उपचार के लिए भेजा गया। इसके साथ ही कोंटा क्षेत्र से आए मरीजों की आंखों की जांच कर 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरित किया गया, जबकि मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को ऑपरेशन की सलाह दी गई। मरईगुड़ा सेक्टर और पोटकपल्ली टीम के स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों ने यह साबित कर दिया कि स्वास्थ्य बस्तर अभियान दूरस्थ क्षेत्रों के लिए वास्तव में जीवनदायी पहल बनकर उभर रहा है।

मुख्यधारा में लौटे युवा, अब करेंगे मतदान: सुकमा में 116 आत्मसमर्पितों को मिला मतदाता अधिकार

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में लौट रहे आत्मसमर्पित युवाओं को अब लोकतंत्र से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक पहल की है। सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्र में निवासरत 116 हितग्राहियों का मतदाता परिचय पत्र (वोटर आईडी कार्ड) बनाकर उन्हें मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया गया है। जिला शासन के इस सकारात्मक कदम से अब ये पुनर्वासित युवा अपने मताधिकार का प्रयोग कर पंच, सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य,  विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का चयन कर सकेंगे। इतना ही नहीं, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को और मजबूत करते हुए अब वे भविष्य में स्वयं भी चुनाव लड़ने के पात्र बन गए हैं। यह बदलाव उनके जीवन में सम्मान, अधिकार और आत्मविश्वास की नई शुरुआत माना जा रहा है। सरकार की नीति से बदली जिंदगी जिला प्रशासन द्वारा बताया गया कि छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति का लाभ आत्मसमर्पित युवाओं को लगातार दिया जा रहा है। पुनर्वास केंद्र में निवासरत 116 हितग्राहियों के राशन कार्ड, जॉब कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड पंजीयन के साथ-साथ पीएम आवास योजना सर्वे भी पूरा कराया गया है। इससे उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलना सुनिश्चित हो गया है। कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर कदम पुनर्वासित युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा उन्हें विभिन्न प्रकार के कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कृषि उद्यमिता प्रशिक्षण में 48 हितग्राही, सिलाई मशीन प्रशिक्षण में 5 हितग्राही, कृषि उद्यमी एवं राजमिस्त्री प्रशिक्षण में 265 हितग्राही, वाहन चालक प्रशिक्षण में 14 हितग्राही और मुर्गी पालन प्रशिक्षण में 25 हितग्राही कुल मिलाकर 317 पुनर्वासित युवा कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल पुनर्वासित युवाओं को पहचान और अधिकार दिला रही है, बल्कि उन्हें एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर भी कर रही है।

सुरक्षाबलों की बड़ी जीत: सुकमा में 22 नक्सलियों ने डाले हथियार, ‘लाल आतंक’ कमजोर

सुकमा नक्सल मुक्त भारत अभियान के तहत सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सुकमा जिले में 22 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। इसमें एक महिला नक्सली भी शामिल है। इस घटना को नक्सलवाद के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार की नीतियों का असर आत्मसमर्पण की यह प्रक्रिया अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित शाह और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस बड़ी सफलता में जिला रिजर्व गार्ड, जिला पुलिस बल, क्षेत्रीय फील्ड टीम, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और कोबरा बटालियन की सराहनीय भूमिका रही। सुरक्षाबलों द्वारा लंबे समय से चलाए जा रहे सघन तलाशी व घेराबंदी अभियानों के कारण नक्सली संगठनों पर लगातार दबाव बना हुआ था। पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर नक्सलियों ने छोड़े हथियार प्रशासन के अनुसार, सरकार की पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति, बेहतर जीवन की संभावनाओं और विकास कार्यों के विस्तार से प्रभावित होकर नक्सलियों ने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को नियमानुसार पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।  प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे नक्सल मुक्त भारत अभियान की दिशा में एक मजबूत कदम बताया है। उनका कहना है कि आने वाले समय में नक्सलवाद के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शांति, विकास और विश्वास का माहौल और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। यह कदम क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

नियद नेल्लानार गांवों के 14 ग्रामीणों के जीवन में आई रोशनी

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के “सुशासन“ और “अंत्योदय“ के संकल्प को साकार करते हुए सुकमा जिले के दूरस्थ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार निरंतर जारी है। इसी कड़ी में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के  मार्गदर्शन में  जिले के 14 मोतियाबिंद मरीजों का सफल उपचार कराकर उनके जीवन में नई रोशनी लाई गई है। शासन की महत्वाकांक्षी “नियद नेल्लानार“ (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत विशेष स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से कोंटा विकासखंड में स्थित दूरस्थ गांव मुकर्रम, पटेलपारा, सरपंचपारा और किस्टाराम जैसे पहुंचविहीन क्षेत्रों के मरीजों की पहचान की गई थी। इन चिन्हित 14 मरीजों को जिला प्रशासन द्वारा विशेष वाहन की व्यवस्था कर बेहतर उपचार हेतु जगदलपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहाँ उनका सफल ऑपरेशन संपन्न हुआ। ऑपरेशन के पश्चात सभी मरीजों को आई असिस्टेंट की देखरेख में जगरगुंडा और किस्टाराम से सुरक्षित जिला अस्पताल सुकमा लाया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, मरीजों की रिकवरी और बेहतर फॉलो-अप के लिए उन्हें अगले 4 दिनों तक जिला अस्पताल में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाएगा। इस दौरान मरीजों के ठहरने और भोजन की निरूशुल्क व्यवस्था जिला प्रशासन के द्वारा की गई है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन का यह प्रयास दर्शाता है कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से अब शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुदूर वनांचलों के अंतिम व्यक्ति तक सीधे पहुँच रही हैं। स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने वाले मरीजों ने इस संवेदनशील पहल के लिए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।

नक्सलगढ़ से राष्ट्रीय स्तर तक: सुकमा के स्वास्थ्य केंद्रों को NQAS प्रमाणन मिला

रायपुर  सुकमा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के निरंतर प्रयासों ने आज एक नया इतिहास रच दिया है। सुकमा ज़िले के घोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बुड़दी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर गगपल्ली और आयुष्मान आरोग्य मंदिर किस्टाराम को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स(NQAS) प्रमाण पत्र से नवाजा गया है। यह उपलब्धि केवल एक सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रशासन 'अंतिम व्यक्ति' तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के अपने संकल्प को सिद्ध कर रहा है। कठिन चुनौतियों के बीच 'क्वालिटी' का कीर्तिमान सुकमा जैसे संवेदनशील ज़िले में, जहाँ भौगोलिक परिस्थितियाँ और सुरक्षा की चुनौतियाँ अक्सर बाधा बनती हैं, वहां के स्वास्थ्य केंद्रों का राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। इन केंद्रों ने सेवा प्रावधान, मरीज के अधिकार और संक्रमण नियंत्रण जैसे 8 कड़े मानकों पर 70% से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी उत्कृष्टता साबित की है। प्रशासन की रणनीति और सफलता के सूत्र ज़िला प्रशासन ने इन केंद्रों में बुनियादी ढाँचे और नैदानिक देखभाल को बेहतर बनाने के लिए  नियद नेल्लानार के अंतर्गत विशेष कार्ययोजना तैयार की गई थी जिसमें सतत मॉनिटरिंग- दुर्गम क्षेत्रों में दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। संक्रमण नियंत्रण- अस्पतालों में स्वच्छता और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट को प्राथमिकता दी गई। रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण- मरीजों को न केवल उपचार मिले, बल्कि उनके अधिकारों और सम्मान का भी पूरा ध्यान रखा गया। कलेक्टर ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि सुकमा जिले के 3 स्वास्थ्य केंद्रों को NQAS सर्टिफिकेट मिलना जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों का राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना यह दर्शाता है कि प्रशासन की प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य के जरिए विकास को गति देना है।  क्या है NQAS और इससे क्या बदलेगा NQAS सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बनाया गया एक सख्त फ्रेमवर्क है। इस प्रमाणन के बाद अब इन केंद्रों को भारत सरकार की ओर से वित्तीय प्रोत्साहन भी मिलेगा। इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य सुविधाओं के और अधिक विस्तार और रखरखाव के लिए किया जाएगा, जिससे भविष्य में स्थानीय ग्रामीणों को और भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

नक्सल मोर्चे पर झटका: सुकमा में सुरक्षाबलों ने हथियार, IED और विस्फोटक सामग्री पकड़ी

सुकमा सुकमा जिले के मेटागुड़ा क्षेत्र में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त अभियान में नक्सलियों द्वारा जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में छिपाकर रखे गए हथियार, विस्फोटक एवं अन्य नक्सली उपयोग में आने वाला सामान बरामद किया है। जानकारी के मुताबिक, मेटागुड़ा से डी/203 कोबरा, 131 बटालियन सीआरपीएफ एवं जिला बल सुकमा की संयुक्त पार्टी ग्राम पीनाचांदा, बोटेतोंग एवं आसपास के जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियान के लिए रवाना हुई थी। अभियान के दौरान ग्राम बोटेतोंग के जंगलों में नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से छिपाकर रखी गई डंप सामग्री को बरामद किया गया। सुरक्षा बलों की सतर्कता से माओवादियों के मंसूबे विफल हो गए। जिले में लगातार संचालित एंटी नक्सल ऑपरेशन से नक्सल संगठन को निरंतर नुकसान पहुंच रहा है और आगे भी अभियान जारी रहेगा।