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शुभेंदु सरकार लाने जा रही सख्त कानून, बिना सुनवाई एक साल की हिरासत के प्रस्ताव पर विवाद तेज

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सराकार अगले सप्ताह विधानसबा में दो अहम विधेयक पेश करने वाली है। इन विधेयकों के जरिए समाज विरोधी गतिविधियों की परिभाषा को विस्तार दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इन विधेयकों में बिना किसी सुनवाई के 12 महीने तक की हिरासत का प्रावधान होगा। इसके अलावा अपराधियों की संपत्ति की नीलामी करके पीड़ितों की भरवाई का भी प्रावधान किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026 और पश्चिम बंगाल कानून व्यवस्था (संशोधन) विधेयक अगले सप्ताह विधानसभा में पेश किए जाएंगे। इसी तरह के कानून उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी बनाए गए थे जिनपर विवाद भी हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य सुनियोजित अपराध, उगाही, अवैध खनन, तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है। अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में ऐसा प्रावधान है कि बिना सुनवाई के ही किसी अपराधी को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई अपराधी किसी को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाता है तो उसकी संपत्तियों की नीलामी करके उसकी भरपाई की जाएगी। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक असामाजिक गतिविधियों में, अवैध खनन, बालू का खनन, उत्खनन, वन्य संपदा का दोहन भी शामिल है। विधेयकों पर होने लगा बवाल टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और समाज विरोधी गतिविधियां नियंत्रण विधेयक 2026 विवादास्पद कानून है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानुन और मीसा से भी ज्यादा कठोर कानून बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के ही एक साल तक हिरासत में रखा जा सके, उसमें न्यायिक सुरक्षा कहां रही। ऐसे में शक के आधार पर ही पुलिस को बेहिसाब ताकत मिल जाती है। सोमवार को यूसीसी विधेयक भी होगा पेश पश्चिम बंगाल की सरकार सोमवार को बजट सत्र के दौरान ही यूसीसी विधेयक भी पेश करने वाली है। इसके साथ ही दो अन्य विधेयक पेश किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सार्वजनिक अव्यवस्था, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और तोड़फोड़ जैसी गतिविधयों से निपटना बताया गया है। बीजेपी का कहना है कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को रोकना ही इसका मकसद है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही इस तरह के कड़े कानून को लेकर घोषणा कर दी थी। यह नया कानून 1972 के पुराने कानून की जगह लेने वाला है। अधिकारियों ने कहा कि यह विधेयक उन घटनाओं के लिए तैयार किया गया है जिनमें हिंसक भीड़ पुलिस स्टेशनों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाती थी। विधेयक में क्या प्रावधान है इस प्रस्तावित कानून में कई अपराधों को गैरजमानती श्रेणी में रखा जाएगा। इसके अलावा संगठित अपराध, उनकी फंडिंग करने वालों, अवैध हथियार, विस्फोटक, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को परिभाषित किया गया है। इस विधेयक में 'गुंडा' ऐसे व्यक्ति को बताया गया है जो कि आदतन असामाजिक गतिविधियों का हिस्सा होता है और किसी गिरोह या फिर सिंडिकेट में शामिर रहता है। इसके अलावा बीएनए, शस्त्र अधिनियम, अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम, एनडीपीएस ऐक्ट के तहत जिसके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई हो उसे भी गुंडा माना जाएगा। इस विधेयक में हिरासत के नियमें में बदलाव के साथ ही एक साल तक प्रतिबंध, आवागमन पर रोक, पुलिस के पास नियमित रिपोर्टिंग, असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने पर धन, संपत्ति और दस्तावेजों की तलाशी का अधिकारी भी दिया गया है। अगर कोई इसका विरोध करता है तो यह संज्ञेय या फिर गैर जमानती अपराध माना जाएगा। चर्चा है कि यूसीसी कानून बनाने से पहले ही सरकार विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून ला रही है।  

शुभेंदु सरकार का बड़ा विस्तार, 35 मंत्रियों को मिला मौका; जानें किसे कौन सा पद

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार बनाने के तीन हफ्ते बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। आज सुबह 11 बजे से कोलकाता के नबन्ना में भाजपा के 35 विधायकों को राज्यपाल आरएन रवि ने मंत्री पद की शपथ दिलाई।  इस विस्तार से मंत्रिमंडल का आकार बढ़ गया, जिसमें अभी अधिकारी और 9 मई को शपथ लेने वाले उनके पांच कैबिनेट सहयोगी शामिल हैं। शुभेंदु कैबिनेट में अब 13 कैबिनेट मंत्री, 19 राज्य मंत्री और 3 स्वतंत्र प्रभार मंत्री हो गए हैं।  कौन बना कैबिनेट मंत्री? पश्चिम बंगाल में इस बार मंत्रिमंडल में क्षेत्र और अनुभव को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। कैबिनेट में इस बार अनुभवी और युवा नेताओं को जगह दी गई।  जिन 13 चेहरों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है उनमें     दीपक बर्मन     तापस रॉय     डॉ शंकर घोष     मनोज कुमार उरांव     अर्जुन सिंह     गौरी शंकर घोष     स्वपन दासगुप्ता     जगन्नाथ चट्टोपाध्याय     कल्याण चक्रवर्ती     अजय पोद्दार     सारद्वत मुखर्जी     दूध कुमार मंडल     अनूप कुमार दास मंत्रिपरिषद कितनी बड़ी होगी? 35 नए मंत्रियों के शामिल होने के साथ ही पश्चिम बंगाल मंत्रिपरिषद की संख्या बढ़कर 41 हो गई। पांच कैबिनेट मंत्री पहले ही शपथ ले चुके हैं, जो महिलाओं (अग्निमित्रा पॉल), मतुआ समुदाय (अशोक कीर्तनिया), राजबंशी समुदाय (निसिथ प्रमाणिक) और आदिवासियों (क्षुदीराम टुडू) का प्रतिनिधित्व करते हैं। पार्टी नेताओं ने बताया कि मंत्रिपरिषद के विस्तार से अन्य समुदायों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा। 91वें संवैधानिक संशोधन के तहत किसी भी राज्य की कैबिनेट का आकार विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यों वाली विधानसभा में मंत्रियों की अधिकतम अनुमत संख्या 44 है। इस हिसाब से अधिकारी सरकार के पास अभी भी इस सीमा से तीन पद कम हैं। इन विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ सोमवार को शपथ लेने वालों में दीपक बर्मन, अर्जुन सिंह, शंकर घोष, गौरी शंकर घोष, तापस रॉय, स्वप्न दासगुप्ता, डीके मंडल, राजेश महता, इंद्रनील खान, मालती रेवा रॉय, जॉयल मुर्मू, अशोक डिंडा, आनंदमय बर्मन, शांतनु प्रमाणिक, पूर्णिमा चक्रवर्ती, उमेश रॉय और मनोज कुमार ओरान शामिल हैं। भाजपा ने हालिया विधानसभा चुनाव में 294 सदस्यीय सदन में 208 सीटें जीतकर पहली बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाई थी। मुख्यमंत्री अधिकारी ने नौ मई को शपथ ली थी। उस समय उनके साथ केवल पांच अन्य मंत्रियों को शामिल किया गया था और मंत्रियों की संख्या छह थी। नए मंत्रियों के शामिल होने के बाद मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 41 हो जाएगी, जो संवैधानिक सीमा के भीतर है। संविधान के अनुसार 294 सदस्यीय विधानसभा में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 44 हो सकती है। बंगाल सरकार का फॉर्मूला एजेंसी वार्ता ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि मंत्रिमंडल विस्तार में देरी क्षेत्रीय संतुलन और विभिन्न जिलों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए की गई। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि पार्टी की चुनावी सफलता राज्य के लगभग हर जिले के समर्थन से मिली है, इसलिए अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को मंत्रिमंडल में समायोजित करने के प्रयास किए गए। राजनीतिक हलकों की नजर अब इस बात पर है कि किन विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिलती है और महत्वपूर्ण विभाग किसे सौंपे जाते हैं। माना जा रहा है कि शपथ ग्रहण के तुरंत बाद विभागों का बंटवारा भी घोषित किया जा सकता है। पहले 9 मंत्री हुए थे शामिल शुभेंदु के साथ भाजपा विधायकों दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निसिथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी। छह सदस्यीय मौजूदा मंत्रिमंडल भाजपा के सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के प्रयास को दर्शाता है जिसमें ब्राह्मण, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आदिवासी, मतुआ और राजबंशी समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। कैबिनेट विस्तार के जरिए भाजपा का क्या लक्ष्य है? कैबिनेट विस्तार में व्यापक सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर जोर दिया गया है। मौजूदा मंत्रिमंडल में पहले से ही महिलाओं, आदिवासियों, मतुआ और राजबंशी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता शामिल हैं।  

CM शुभेंदु अधिकारी ने किया एलान, पश्चिम बंगाल में अगस्त से शुरू होगी Census 2027 की तैयारी

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को ऐलान किया कि राज्य में जनगणना 1 अगस्त से शुरू होगी और अगले साल फरवरी के आखिर तक चलेगी. उन्होंने साफ कहा कि जनगणना का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और सभी लोगों से इसमें हिस्सा लेने की अपील की।  शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय नबान्ना में 'जनगणना, 2027' के पहले चरण से जुड़ी एक बैठक में शामिल हुए. इसी बैठक के बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल में जनगणना को लेकर बड़ी जानकारी दी।  उन्होंने बताया कि बंगाल में जनगणना 1 अगस्त से शुरू होगी और अगले साल फरवरी के आखिरी दिन रात 12 बजे तक चलेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का राजनीति से कोई संबंध नहीं है।  मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जहां पूरे देश में जनगणना का काम काफी आगे बढ़ चुका है, वहीं पश्चिम बंगाल इस मामले में पिछड़ा हुआ है. उन्होंने कहा, देश जनगणना में काफी आगे निकल चुका है, लेकिन हम पीछे रह गए हैं।  इसके साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु ने राज्य के कुछ हिस्सों में आबादी के बदलते ढांचे का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने इसके लिए बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लगती 600 किलोमीटर लंबी सीमा पर अभी तक पूरी बाड़ नहीं लग पाई है. इसकी वजह यह बताई कि पिछली राज्य सरकार ने BSF को जमीन नहीं सौंपी, जिससे बाड़ लगाने का काम अटका रहा. नतीजा यह हुआ कि घुसपैठ होती रही और राज्य के कुछ इलाकों में आबादी की बनावट बदल गई।  मुख्यमंत्री शुभेंदु ने जनगणना को सरकारी काम और योजनाओं के लिए बेहद जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि सही आंकड़े होंगे तभी सरकार ठीक से काम कर पाएगी और लोगों तक सही फायदे पहुंच पाएंगे. उन्होंने बंगाल के सभी लोगों से अपील की कि वे इस जनगणना में जरूर हिस्सा लें। 

CM शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों को चेताया, बोले- ‘खिलाने पर पैसा क्यों बर्बाद करें’

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार अवैध बांग्लादेशियों को लेकर एक्शन मोड में आ गई हैं. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को कड़ी चेतावनी दी है। शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को चेताते हुए कहा कि जल्दी-जल्दी भागो. हम इन्हें जेल में रखकर इन्हें खिलाना नहीं चाहते हैं. हमें अपना पैसा इन्हें जेल में रखकर खिलाने में क्यों बर्बाद करना चाहिए? हमने पुलिस से इन्हें सीधे बांग्लादेश भेजने को कह दिया है।  इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर बहुत बड़ा कदम उठाया था. राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए विशेष 'होल्डिंग सेंटर' बनाने के निर्देश जारी किए थे।  शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी की गई थी. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों को बनाने के लिए सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने को कहा है।  क्या है बंगाल की 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' नीति? बंगाल में बीजेपी सरकार की नई 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' नीति के बीच स्टेट बॉर्डर के कई पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े समूह इकट्ठा होने लगे हैं. उत्तरी 24 परगना और मालदा से आ रही तस्वीरों और वीडियो से पता चलता है कि राज्य का घुसपैठ रोधी अभियान अब सिर्फ सियासी बयानबाजी से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्रवाई का रूप ले चुका है।  उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर मंगलवार सुबह 100 से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते थे. ये लोग कथित तौर पर बंगाल के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे. विदेशी नागरिकों को देश से निकालने और उनके लिए होल्डिंग सेंटर बनाने के संबंध में सरकार की हालिया घोषणाओं के बाद वे चेकपॉइंट पर पहुंचे।  बता दें कि बीजेपी ने इस साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया था. अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है।