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तेजस Mk1A को लेकर बड़ा अपडेट, इंजन की कमी दूर; जल्द IAF में शामिल होने की उम्मीद

नई दिल्ली भारतीय वायु सेना के वाइस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने स्वदेशी लड़ाकू जेट LCA तेजस मार्क 1ए की मौजूदा स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL ने इसकी पुष्टि कर दी है कि शुरुआत में देरी का मुख्य कारण अमेरिका से आने वाला इंजन था।  इंजनों की कमी के कारण कार्यक्रम में देरी हुई. अब इंजन मिल चुके हैं. जेटों पर लगा दिए गए हैं. जेट को वायु सेना में शामिल करने से पहले उचित और गहन परीक्षण किए जा रहे हैं. एयर मार्शल दीक्षित के अनुसार अभी दो या तीन बिंदु बाकी हैं जिन्हें पूरा करना बाकी है।  उनका मानना है कि एक या दो महीने के अंदर इन मुद्दों को दूर कर लिया जाएगा. उसके बाद जेट को शामिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा. भारत LCA तेजस मार्क 1ए के शामिल होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. यह बयान वायु सेना की तैयारियों और स्वदेशी कार्यक्रमों की प्रगति को रेखांकित करता है।  इंजन की कमी और वर्तमान प्रगति LCA तेजस मार्क 1ए भारतीय वायु सेना के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है. यह तेजस परिवार का एडवांस वर्जन है जिसमें कई सुधार किए गए हैं. पहले चरण में इंजनों की आपूर्ति में देरी हुई थी जिससे उत्पादन और परीक्षण प्रभावित हुए. अब यह समस्या हल हो चुकी है. इंजन लगने के बाद जेटों पर परीक्षण चल रहे हैं।  इन परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेट सभी परिचालन जरूरतों को पूरा करे. सुरक्षा और विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी जा रही है. वायु सेना उप प्रमुख का बयान बताता है कि तकनीकी चुनौतियां अब अंतिम चरण में हैं. बाकी बचे मुद्दों को जल्द सुलझा लिया जाएगा।  एक बार ये बिंदु पूरे हो जाएं तो जेट को स्क्वॉड्रन में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यह विकास स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक संकेत है. LCA तेजस मार्क 1ए के शामिल होने से भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता में इजाफा होगा।  यह जेट आधुनिक एवियोनिक्स, बेहतर रडार और हथियार प्रणालियों से लैस है. स्वदेशी जेट होने के कारण रखरखाव और अपग्रेड आसान होगा. विदेशी निर्भरता कम होने से लंबी अवधि में लागत भी नियंत्रित रहेगी. वायु सेना लंबे समय से इस जेट का इंतजार कर रही है क्योंकि पुराने जेटों को बदलने की जरूरत है।  परीक्षण प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक पूरा करना जरूरी है. किसी भी कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा. एचएएल और वायु सेना दोनों मिलकर काम कर रहे हैं ताकि जेट पूरी तरह तैयार अवस्था में शामिल हो. एक-दो महीने का समय बाकी मुद्दों को दूर करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है. उसके बाद उत्पादन और डिलीवरी की गति बढ़ सकती है।  यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है. स्वदेशी लड़ाकू जेट का सफल शामिल होना रक्षा क्षेत्र में आत्मविश्वास बढ़ाएगा. वायु सेना उप प्रमुख के बयान से साफ है कि देरी के कारणों को समझा गया है और अब समाधान की दिशा में काम हो रहा है. परीक्षण पूरा होने के बाद जेट को जल्द सेवा में लेने की उम्मीद है. भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर लक्ष्य हासिल करने की कोशिश में जुटी हैं। 

तेजस विमानों का बेड़ा हुआ पूरा, वायुसेना को मिली नई ताकत; स्वदेशी जेट तैयार

नई दिल्ली हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने शुक्रवार को भारतीय वायुसेना को पूरी तरह स्वदेशी 20 तेजस विमानों की डिलीवरी का अनुबंध पूरा कर लिया। अंतिम खेप में दो सीट वाले दो तेजस प्रशिक्षण विमान वायुसेना को सौंपे गए। इसके साथ ही एचएएल ने वायुसेना के लिए 70 एचटीटी-40 बेसिक प्रशिक्षण विमानों की डिलीवरी के अनुबंध की भी शुरुआत की। निजी विमानन कंपनी पवनहंस को चार ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर भी सौंपे गए। बेंगलुरु में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू की मौजूदगी में विमानों और हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी की गई। अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2010 में रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच हुए एफओसी अनुबंध के तहत 20 तेजस विमानों की आपूर्ति होनी थी। इनमें 16 एक सीट वाले लड़ाकू विमान और चार दो सीट वाले प्रशिक्षण विमान शामिल थे। पहले ही दिए जा चुके हैं 16 लड़ाकू विमान सभी 16 लड़ाकू विमानों और दो प्रशिक्षण विमानों की आपूर्ति पहले ही की जा चुकी थी। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए स्वदेश में विकसित प्रौद्योगिकियां समय की मांग हैं। अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया। क्या है इन विमानों की खासियत एचटीटी-40 (हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40) स्वदेश में डिजाइन और विकसित किया गया प्रशिक्षक विमान है, जिसे भारतीय रक्षा सेवाओं की शुरुआती प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। एचएएल के एक बयान के अनुसार, एलसीए एफओसी प्रिशक्षु विमान एक हल्का, हर मौसम में काम करने वाला और कई तरह की भूमिकाएं निभाने वाला 4.5-जेनरेशन का विमान है, जिसे मुख्य रूप से वायुसेना की प्रशिक्षण ज़रूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। बयान के अनुसार, '' इन तकनीकों ने भारत को एक उन्नत दो-सीट वाला लड़ाकू विमान क्षमता विकसित करने और उसे संचालित करने में सक्षम बनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में ऐसा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जो असैन्य और सैन्य विमानन दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा कर सके। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक संगठनों के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं देखना चाहिए।' अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए सिंह ने वैज्ञानिकों और अभियंताओं से भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया।

लद्दाख से थार तक तेजस की ताकत बढ़ाएगा F404 इंजन, GE ने HAL को दिए 3 नए इंजन

बेंगलुरु  भारत का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस की ताकत बढ़ने वाली है. LCA तेजस Mk1A प्रोग्राम को बड़ा बढ़ावा मिला है. अमेरिकी कंपनी  GE Aerospace ने बताया कि उसने भारत को तीन पावरफुल फाइटर जेट इंजन सौंपे हैं. इन इंजन को तेजस में लगाया जाएगा. कंपनी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को इसी साल अगस्त में ये इंजन दिए. यह डिलीवरी ऐसे समय में हुई है जब F404 इंजनों की सप्लाई में देरी के कारण तेजस Mk1A के उत्पादन और डिलीवरी कार्यक्रम पर असर पड़ा था. HAL पहले ही कह चुका है कि उसकी उत्पादन लाइन तैयार है, लेकिन विमानों की अंतिम डिलीवरी इंजन उपलब्धता पर निर्भर है।  क्या है F404-IN20 इंजन? F404-IN20, GE की F404 सीरीज का वह वैरिएंट है जिसे खास तौर पर भारतीय तेजस के लिए डेवलेप किया गया है. यह इंजन आफ्टरबर्नर के साथ करीब 84 kN (19,000 lbf) का मैक्सिमम थ्रस्ट पैदा करता है, जो तेजस को सुपरसोनिक गति और जबरदस्त मैन्युवरिंग क्षमता देता है. कहा जा सकता है कि यह इंजन केवल एक नॉर्मल अपग्रेड नहीं, बल्कि फाइटर जेट को हर मोर्चे पर घातक बनाने वाला पावरहाउस है।  लद्दाख से लेकर रेगिस्तान तक अचूक प्रहार इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका हर तरह के मौसम और इलाके में असरदार रहना है. यह इंजन लद्दाख के माइनस तापमान और लेह जैसे हाई-एल्टीट्यूड एयरबेसों से लेकर थार के 50 डिग्री तापमान वाले रेगिस्तान तक बिना पावर लॉस के काम करता है. इसके लिए इसमें खास सिंगल-क्रिस्टल टर्बाइन ब्लेड्स और एडवांस कूलिंग सिस्टम लगाए गए हैं।  यह इंजन पूरी तरह फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) टेकनोलॉजी से लैस है. यह सिस्टम ईंधन की खपत को बेहतर बनाती है और डॉगफाइट के दौरान पायलट को तुरंत थ्रॉटल रिस्पॉन्स देती है।  तेजस Mk1A के लिए क्यों अहम है यह डिलीवरी? भारत का तेजस प्रोग्राम इंजन की कमी के चलते लगातार डिले हो रहा था.  अब तीन नए इंजन मिलने से HAL को तैयार एयरफ्रेम को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी. भारतीय वायुसेना ने फिलहाल 180 तेजस Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है. ऐसे में अब इन इंजनों की जल्द डिलीवरी होने की संभावना बढ़ गई।  MiG-21 की जगह लेगा तेजस भारतीय वायुसेना पुराने MiG-21 बेड़े को चरणबद्ध तरीके से हटा रही है. ऐसे में तेजस Mk1A ही भविष्य के फ्रंटलाइन फाइटर स्क्वाड्रनों की रीढ़ बनने जा रहा है. F404-IN20 इंजन के साथ तेजस  लद्दाख जैसे हाई-एल्टीट्यूड बेस, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान और  पश्चिमी सीमा के फॉरवर्ड एयरबेस पर तैनात किए जा सकेंगे।  क्या हैं तेजस Mk1A की खासियतें? तेजस Mk1A, मौजूदा तेजस Mk1 का एडवांस वैरिएंट है. यह फाइटर जेट AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, BVR मिसाइल क्षमता, बेहतर मेंटेनेंस प्रोफाइल, कम ऑपरेटिंग लागत और आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता जैसी खासियतों के साथ भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा। 

भारत की ऐतिहासिक फाइटर जेट फैक्ट्री अब तेजस पर फोकस, रफाल और सुखोई के युग से आगे

नासिक भारत की वायु सेना को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा बदलाव हो रहा है. नासिक शहर की वह बड़ी फैक्ट्री, जो पहले रूसी लड़ाकू विमानों को जोड़ने का काम करती थी, अब भारत के अपने बनाए विमानों पर ध्यान दे रही है. यह फैक्ट्री लगभग 1000 रूसी विमान बना चुकी है. अब यह तेजस लड़ाकू विमान और एचटीटी-40 ट्रेनर विमान बनाने में जुटी है. वहां से पहली बार स्वदेशी तेजस एलसीए एमके1ए विमान की उड़ान दिखेगी.  पुराने दिनों की यादें: रूसी विमानों का कारखाना नासिक की यह फैक्ट्री भारत का सबसे बड़ा लड़ाकू विमान बनाने वाला केंद्र है. यह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का हिस्सा है. पहले यह फैक्ट्री सोवियत यूनियन (अब रूस) के डिजाइन वाले विमानों को जोड़ती थी. यहां से निकले विमान भारतीय हवाई सेना की ताकत बने.     मिग-21 का जादू: यह फैक्ट्री ने 575 मिग-21 विमान बनाए. मिग-21 को 'बाइसन' भी कहते हैं. यह छोटा लेकिन तेज विमान था, जो दुश्मनों को डराता था.     सु-30एमकेआई की ताकत: इसके अलावा, सु-30एमकेआई जैसे बड़े विमान भी यहां जोड़े गए. कुल मिलाकर, लगभग 1000 रूसी मूल के विमान इस फैक्ट्री से बने. ये विमान भारत को विदेश से मिले थे, लेकिन यहां जोड़कर तैयार किए जाते थे. इससे भारत की हवाई सेना मजबूत हुई, लेकिन अब समय बदल गया है. भारत अब खुद के विमान बना चुका है.  नया दौर: स्वदेशी विमानों की शुरुआत अब नासिक की फैक्ट्री को नया रूप दिया गया है. पुराने हैंगर (बड़े गोदाम जैसे कमरे) को साफ-सुथरा और आधुनिक बनाया गया. पुराने उपकरण हटा दिए गए. अब नए जिग्स, फिक्सचर और टूल्स लगाए गए हैं, जो भारतीय डिजाइन वाले विमानों के लिए हैं.     निवेश का जुगाड़: इस बदलाव पर 500 करोड़ रुपये खर्च हुए. फैक्ट्री का इलाका 13 लाख वर्ग फुट का है. यह बहुत बड़ा है.     तेजस एलसीए एमके1ए: यह भारत का अपना लड़ाकू विमान है. यह हल्का, तेज और चालाक है. नासिक में नई असेंबली लाइन बनी है. यहां पहले साल में 8 तेजस विमान बनेंगे. बाद में और तेजी से बनाए जा सकेंगे.     एचटीटी-40 ट्रेनर: यह बेसिक ट्रेनर विमान है. पायलटों को फाइटर जेट उड़ाना सिखाने के लिए. यह विमान पूरी तरह भारतीय डिजाइन का है. बेंगलुरु और नासिक दोनों जगह बन रहा है, ताकि जल्दी डिलीवरी हो. फैक्ट्री के अधिकारी कहते हैं कि नई लाइन पूरी तरह तैयार है. इसमें 30 से ज्यादा जिग्स हैं, जो विमान के मुख्य हिस्सों जैसे सेंटर फ्यूजलेज, फ्रंट फ्यूजलेज, रियर फ्यूजलेज, विंग्स और एयर इंटेक को जोड़ने के लिए हैं. उत्पादन की क्षमता: कितने विमान बनेंगे? भारत को हर साल ज्यादा विमान चाहिए. पुराने विमान जैसे मिग-21 को रिटायर कर दिया गया है. वायु सेना को 30-40 नए विमान सालाना चाहिए.     नासिक की भूमिका: यहां से 8 तेजस सालाना.     बेंगलुरु की मदद: वहां दो और लाइनें हैं. कुल मिलाकर, एचएएल 24 विमान सालाना बना सकेगी.     सु-30 का हिस्सा: फैक्ट्री का कुछ हिस्सा अभी भी सु-30एमकेआई के लिए है. जल्द 15 नए सु-30 के ऑर्डर पूरे होंगे. आत्मनिर्भरता की उड़ान नासिक की फैक्ट्री अब भारत की शान है. पहले रूसी जेट्स, अब स्वदेशी तेजस. यह बदलाव दिखाता है कि भारत अब खुद मजबूत हो रहा है. हवाई सेना को नई ताकत मिलेगी. आने वाले दिनों में और तेजी से उत्पादन होगा.