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सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा: मुजफ्फराबाद और बहावलपुर में आतंकी ठिकानों पर तेजी से चल रहा निर्माण कार्य

इस्लामाबाद  भारत ने बीते साल मई में ऑरपरेशन सिंदूर लॉन्च करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं। इस दौरान पंजाब में जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर को एक सटीक हमले में तबाह कर दिया गया था। आतंकी मसूद अजहर का गुट जैश अब इस नुकसान से उबरते हुए फिर से सक्रिय हो रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि बहावलपुर में जैश के हेडक्वार्टर में बड़े पैमाने पर निर्माण का काम चल रहा है। इसकी कई इमारतों को बना लिया गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि जैश-ए-मोहम्मद बहावलपुर में अपने मुख्यालय का फिर से निर्माण कर रहा है। पाकिस्तान के पंजाब में N-5 नेशनल हाईवे के पास स्थित 'जामिया सुभान अल्लाह' नाम के इस परिसर की बीते महीने की सैटेलाइट तस्वीरों में यहां भारी मशीनरी और निर्माण वाहन दिखाई दिए हैं। परिसर की मस्जिद को बनाया जा रहा अमेरिका स्थित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी वैंटोर और इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस टीम ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर बताया है कि परिसर स्थित मस्जिद के क्षतिग्रस्त गुंबदों की मरम्मत कर दी गई है। इन पर हाल ही में काम किया गया है। आसपास की कई इमारतों को हाल-फिलहाल में ठीक किया गया है। बहावलपुर जैश का अकेला ठिकाना नहीं है, जहां मरम्मत का काम चल रहा है। 22 अप्रैल की तारीख वाली सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर के मुजफ्फराबाद में भी जैश के ठिकानों पर निर्माण दिखा है। जैश से जुड़े ठिकाने सैयदना बिलाल मस्जिद को बनाया जा रहा है। इस मस्जिद पर भी हमला किया गया था। हालिया तस्वीरें संकेत देती हैं कि बहावलपुर में जैश हेडक्वार्टर का पुनर्निर्माण चल रहा है। परिसर में बने गुंबद अब ठीक दिखाई दे रहे हैं। परिसर में अन्य गतिविधियां भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। इन ठिकाने पर भारी मशीनरी देखी गई है। कई जगहों का निर्माण पूरा हुआ इंटेल लैब के भू-खुफिया शोधकर्ता डेमियन साइमन ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि बहावलपुर स्थित उस ठिकाने पर पुनर्निर्माण का काम चल रहा है, जिसे पहले भारत ने निशाना बनाया था। मरकज सुभान अल्लाह के ऊपर बने गुंबद अब ठीक किए हुए दिखाई दे रहे हैं। यह इसे पूरी तरह से चालू करने की कोशिश है। साइमन का कहना है कि हमलों से क्षतिग्रस्त हुई इमारतों का मलबा हटाया जा रहा है। वहीं मुजफ्फराबाद में सैयदना बिलाल मस्जिद को पूरी तरह से फिर बनाया जा रहा है। भारत के हमलों में मस्जिद की इमारत को जो नुकसान पहुंचा था। उसके बाद मरम्मत करना मुमकिन नहीं था। ऐसे में इसे दोबारा बनवाने का फैसला लिया गया है। FATF की निगरानी पर सवाल पाकिस्तान में आतंकी गुटों की गतिविधियों पर FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की निगरानी है। इसका काम टेरर फाइनेंसिंग को रोकना है। जैश खुलेआम 'सुभान अल्लाह कंपाउंड' को फिर से बनाने के लिए पैसे जुटाने का अभियान चला रहा है। FATF इस मामले में पूरी तरह बेखबर दिख रहा है। ये तस्वीरें दिखाती हैं कि पाकिस्तान में आतंकी गुटों को पनाह मिलना और उनका फलना-फूलना जारी है। जैश सरगना अजहर मसूद अपनी गतिविधियां लगातार कर रहा है।  

यूरोप में आतंक का गुप्त जाल बेनकाब: चैरिटी के नाम पर हमास को मदद, इटली में बड़ी कार्रवाई

इटली  इटली की आतंकवाद-रोधी एजेंसियों ने बड़ा खुलासा करते हुए हमास को अवैध रूप से फंडिंग करने के आरोप में तीन चैरिटी संगठनों से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। अभियोजकों के अनुसार, इन संगठनों ने मानवीय सहायता की आड़ में करीब 7 मिलियन यूरो (लगभग 82 लाख डॉलर) हमास से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचाए।इटली के अभियोजकों ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में मोहम्मद हन्नून भी शामिल है, जो इटली में फिलिस्तीनी एसोसिएशन का अध्यक्ष है। अभियोजकों ने उसे “हमास के इटालियन सेल का प्रमुख” बताया है। गौरतलब है कि यूरोपीय संघ (EU) ने हमास को आधिकारिक तौर पर आतंकी संगठन घोषित कर रखा है।  कैसे होती थी फंडिंग? जांच में सामने आया कि फंडिंग को छुपाने के लिए बैंक ट्रांसफर, विदेशों में स्थित संगठनों के जरिए तथाकथित “ट्रायएंगुलेशन ऑपरेशंस”  का इस्तेमाल किया गया। यह पैसा उन संगठनों तक पहुंचाया गया जो गाज़ा, फिलिस्तीनी इलाकों या इज़राइल में स्थित थे और जिनके हमास से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध थे। इनमें से कई संगठनों को इज़राइल पहले ही अवैध घोषित कर चुका है।  इटली सरकार का सख्त संदेश इटली के गृह मंत्री मातेओ पियांतेडोसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि “यह ऑपरेशन उन गतिविधियों से पर्दा उठाता है, जो फिलिस्तीनी जनता की मदद के नाम पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन और भागीदारी छिपाए हुए थीं।” यूरोप स्तर पर कार्रवाई इस जांच में अन्य EU देशों की एजेंसियों ने भी सहयोग किया। जनवरी 2025 में ही यूरोपीय परिषद ने हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद को फंडिंग करने वाले 12 व्यक्तियों और 3 संस्थाओं पर प्रतिबंध बढ़ाया था, जिससे यह कार्रवाई और अहम हो जाती है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों या संबंधित संगठनों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।