samacharsecretary.com

दुनिया के सामने आई सच्चाई: भारत के दुश्मनों को पनाह देता पाकिस्तान

इस्लामाबाद पाकिस्तान अभी भी भारत के खिलाफ सक्रिय आतंकवादी समूहों का गढ़ बना हुआ है। अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस (CRS) की हालिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान में कई प्रमुख आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं, जो जम्मू-कश्मीर और भारत पर केंद्रित हैं। इस रिपोर्ट में एक परेशान करने वाला संदेश है- भारत, विशेषकर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर को निशाना बनाने वाले आतंकी संगठन पाकिस्तानी धरती से बेखौफ और बिना किसी रोक-टोक के अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। 25 मार्च को जारी CRS की 'इन फोकस' रिपोर्ट में 15 आतंकी संगठनों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इनमें से कई गुटों को अमेरिका द्वारा 'विदेशी आतंकवादी संगठन' (FTO) घोषित किया जा चुका है। रिपोर्ट में 'भारत और कश्मीर-केंद्रित आतंकी समूहों' से लगातार बने हुए खतरों की ओर इशारा किया गया है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं-     लश्कर-ए-तैयबा (LeT)     जैश-ए-मोहम्मद (JeM)     हरकत-उल जिहाद इस्लामी (HUJI)     हरकत उल-मुजाहिदीन (HuM)     हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) प्रमुख आतंकी संगठनों की स्थिति लश्कर-ए-तैयबा (LeT): 1980 के दशक के अंत में बने इस संगठन को 2001 में FTO घोषित किया गया था। यह अभी भी पाकिस्तान के पंजाब और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार, 'वर्तमान में जेल में बंद हाफिज सईद के नेतृत्व वाले इस गुट ने प्रतिबंधों से बचने के लिए अपना नाम बदलकर 'जमात-उद-दावा' कर लिया है।' इसके पास 'कई हजार लड़ाके' हैं और इसी संगठन ने 2008 के मुंबई हमलों की साजिश रची थी, जिसमें 166 लोग मारे गए थे। जैश-ए-मोहम्मद (JeM): साल 2000 में मसूद अजहर द्वारा स्थापित इस गुट को भी 2001 में FTO घोषित किया गया था। इसने 2001 के भारतीय संसद हमले में लश्कर का साथ दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, जैश के पास लगभग 500 हथियारबंद आतंकी हैं जो भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में काम करते हैं। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में 'मिलाना' है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 'जैश ने खुले तौर पर अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा की हुई है।' हिज्बुल मुजाहिदीन (HM): 1989 में बने इस कश्मीर-केंद्रित समूह को 2017 में अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके पास लगभग 1500 कैडर (आतंकी) हैं जो 'कश्मीर की आजादी या जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान में विलय' की मांग करते हैं। ये समूह अल-कायदा और भारतीय उपमहाद्वीप में इसके सहयोगी संगठन (AQIS) जैसे वैश्विक संगठनों के साथ मिलकर काम करते हैं। पाकिस्तान की विफलता और मदरसों की भूमिका रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान आतंकी गुटों को खत्म करने में नाकाम रहा है। हवाई हमलों और लाखों 'खुफिया-आधारित ऑपरेशनों' सहित कई बड़े सैन्य अभियान, अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इन आतंकवादी समूहों को हराने में विफल रहे हैं। 2014 के 'नेशनल एक्शन प्लान' का उद्देश्य भी इन गुटों को खत्म करना था, लेकिन ये आज भी मौजूद हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, पाकिस्तान ने 2023 में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए "कुछ कदम" उठाए थे, लेकिन वहां के मदरसे अभी भी ऐसे सिद्धांत पढ़ा रहे हैं जो "हिंसक चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा" दे सकते हैं। पीड़ित भी और समर्थक भी: पाकिस्तान का दोहरा चरित्र दक्षिण एशिया विशेषज्ञ के. एलन क्रोनस्टेड द्वारा तैयार की गई यह CRS रिपोर्ट पाकिस्तान को 'पीड़ित और समर्थक' दोनों के रूप में चित्रित करती है। एक तरफ जहां इस्लामाबाद खुद घरेलू हिंसा (अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववाद और खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ते हालात) से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह उन आतंकी नेटवर्कों की मेजबानी कर रहा है जो लंबे समय से भारत को निशाना बनाते आए हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी और अन्य गुटों को पांच व्यापक, और अक्सर आपस में जुड़े हुए, वर्गों में बांटा गया है।     वैश्विक स्तर पर सक्रिय     अफगानिस्तान-केंद्रित     भारत और कश्मीर-केंद्रित     घरेलू स्तर पर सक्रिय     सांप्रदायिक (शिया-विरोधी) भारत का रुख पाकिस्तान की इन गुटों को पूरी तरह से खत्म करने में अक्षमता या अनिच्छा के कारण पड़ोसियों के साथ उसका तनाव बना हुआ है। भारत लगातार इस बात पर कायम है कि स्थायी शांति के लिए सीमा पार आतंकवाद पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है। पाकिस्तानी धरती पर मौजूद आतंकी ढांचे के बारे में अमेरिका के इस ताज़ा आकलन ने भारत के इस रुख को और मजबूती दी है।  

खाटूश्यामजी मंदिर में आतंकियों की एंट्री से अफरा-तफरी, बाद में खुला राज—ATS की मॉक ड्रिल थी

जयपुर विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर परिसर शुक्रवार को उस समय सुरक्षा छावनी में तब्दील हो गया, जब मंदिर में आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर एटीएस (Anti-Terrorist Squad) की टीम ने अचानक धावा बोल दिया। हथियारों से लैस जवानों की त्वरित कार्रवाई और घेराबंदी को देखकर परिसर में हड़कंप मच गया, लेकिन कुछ ही देर बाद जब सच्चाई सामने आई तो सभी ने राहत की सांस ली। त्वरित कार्रवाई और जवाबी हमला आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही एटीएस के जवानों ने मोर्चा संभाला और योजनाबद्ध तरीके से मंदिर परिसर में प्रवेश किया। कुछ ही मिनटों के भीतर टीम ने कड़ा संघर्ष करते हुए दो काल्पनिक आतंकवादियों को ढेर कर दिया। कार्रवाई के दौरान जवानों ने उनके कब्जे से भारी मात्रा में हथियार और बारूद बरामद करने का प्रदर्शन भी किया। सुरक्षा परखने के लिए था अभ्यास जैसे ही एटीएस के अधिकारियों ने इसे मॉकड्रिल घोषित किया, वहां मौजूद श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन की चिंता दूर हुई। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता की जांच करना, भीड़भाड़ वाले संवेदनशील स्थानों पर क्विक रिस्पॉन्स टाइम को मापना और मंदिर की सुरक्षा घेराबंदी और समन्वय को और अधिक पुख्ता करना है। चौथी बार हुआ सुरक्षा अभ्यास गौरतलब है कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र खाटू श्याम मंदिर की संवेदनशीलता को देखते हुए एटीएस अब तक यहां चार बार मॉकड्रिल कर चुकी है। इस सफल अभ्यास के दौरान एटीएस टीम के साथ मंदिर सुरक्षा गार्ड प्रभारी रघुनाथ सिंह, मंदिर समिति के लक्ष्मीकांत रंगलालका सहित अन्य सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी भी मुस्तैद रहे।

आतंकियों की नई साजिश: 26-26 पर हमले, दिल्ली से अयोध्या तक मंदिरों पर बढ़ा अलर्ट

नई दिल्ली दिल्ली समेत कई शहरों को गणतंत्र दिवस से पहले दहलाने की साजिश का खुलासा हुआ है। पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई जैश-ए-मोहम्मद के साथ ‘कोड 26-26’ के नाम से आतंकी वारदात को अंजाम देने में जुटी है। इस खुफिया इनपुट के बाद देश के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम और कड़े कर दिए गए हैं। खुफिया एजेंसियों ने इस साजिश का पता चलने के बाद दिल्ली पुलिस, जम्मू-कश्मीर पुलिस सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया है। इस खतरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पहली बार एक विशेष वांटेड नोटिस जारी किया है, जिसमें अल-कायदा (एक्यूआईएस) के संदिग्ध आतंकी और दिल्ली निवासी मोहम्मद रेहान की तस्वीर शामिल की गई है। इंटेलिजेंस एजेंसियों की सोशल मीडिया पर नजर इस इनपुट के बाद देश की राजधानी दिल्ली में सुरक्षाबलों को अलर्ट पर रखा गया है क्योंकि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और पंजाब बेस्ड गैंगस्टर्स हमला कर सकते हैं. इंटेलिजेंस एजेंसियों की सोशल मीडिया पर भी लगातार नजर है, जहां kashmiri Resistance Group का FalconSquad लगातार धमकी दे रहा है. मुस्लिम युवकों को भड़काया जा रहा है. दिल्ली के आतंकी मोहम्मद रेहान को लेकर अलर्ट दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आतंकियों के पोस्टर चस्पा किए गए हैं. पोस्टर में पहली बार दिल्ली के आतंकी की तस्वीर लगाई गई है. इस आतंकी का नाम मोहम्मद रेहान है. पोस्टर में मोहम्मद रेहान का पता नॉर्थ ईस्ट दिल्ली का चौहान बांगर बताया गया है. ये आतंकी 2016 से फरार है. जब एजेंसियों ने संभल में अलकायदा का मॉड्यूल बस्ट किया था, तभी दिल्ली का रहने वाला ये आतंकी फरार हो गया था. जम्मू में हाई अलर्ट पर सुरक्षाबल उधर,गणतंत्र दिवस से पहले जम्मू में सुरक्षाबल हाई अलर्ट पर हैं. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि आतंकी घुसपैठ की कोशिशें तेज कर सकते हैं. यही वजह है कि जम्मू में सुरक्षा व्यवस्था कई गुना बढ़ा दी गई है. बीएसएफ पूरी तरह मुस्तैद है. सीमा पर गश्त को और सख्त किया गया है. नदी-नालों के किनारे, जंगलों और दुर्गम इलाकों की गहन तलाशी ली जा रही है.ड्रोन और सुरंगों के जरिए घुसपैठ की चुनौतियां बनी हुई हैं. सेना और सीआरपीएफ के साथ ही जम्मू-कश्मीर पुलिस भी सीमावर्ती इलाकों के साथ ही आंतरिक क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रही है. कहां है संदिग्‍ध आतंकवादी मोहम्‍मद रेहान? सूत्रों के मुताबिक मोहम्मद रेहान उस समय अंडरग्राउंड हो गया था, जब उत्तर प्रदेश के संभल में अलकायदा से जुड़े एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया था. तब से ही सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हुई हैं. अब गणतंत्र दिवस से पहले जारी इस अलर्ट के बीच उसकी तस्वीर सार्वजनिक कर आम लोगों से भी मदद मांगी जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाई जा सके. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकियों का मकसद भीड़भाड़ वाले इलाकों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर देश में दहशत फैलाना और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना हो सकता है. इसी कारण रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन और प्रमुख बाजारों में भी तलाशी अभियान तेज कर दिए गए हैं. कई राज्यों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीमें बनाकर विशेष गश्त कराई जा रही है. देशभर में अलर्ट सरकारी सूत्रों ने बताया कि किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है. इंटेलिजेंस इनपुट को लेकर रोजाना उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की जा रही है. आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे सतर्क रहें, किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें और अफवाहों पर ध्यान न दें. गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस देश का सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है, जिसमें राजधानी दिल्ली में भव्य परेड और समारोह आयोजित होते हैं. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहतीं. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन खतरे की गंभीरता को देखते हुए पूरे देश में हाई अलर्ट जारी रखा गया है, ताकि किसी भी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके. पोस्टर में शाहिद फैसल का भी नाम है, जिसे बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट सहित दक्षिण भारत में कई धमाकों का मास्टरमाइंड बताया गया है। खुफिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आतंकी समूह गणतंत्र दिवस से पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ हमले करने की फिराक में जुटे हैं। निशाने पर बड़े मंदिर सीक्रेट ‘कोड 26-26’ का मतलब है गणतंत्र दिवस से पहले बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देना। आतंकियों के निशाने पर देश के बड़े मंदिर हैं, ताकि माहौल बिगाड़ा जा सके। इनमें अयोध्या का राम मंदिर और जम्मू का रघुनाथ मंदिर भी शामिल है। पुलिस फोर्स के अलावा सीमावर्ती इलाकों में बीएसएफ को भी पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे उत्तर भारत की सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है।

स्लीपर सेल हुई सक्रिय, अयोध्या-काशी और राम मंदिर पर था आतंकी हमला तय

लखनऊ अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक अयोध्या का राम मंदिर और वाराणसी आतंकियों के निशाने पर था, जिसके लिए उन्होंने मॉड्यूल तैयार कर रखा था. अयोध्या में भी आतंकी विस्फोट करना चाहते थे. इसके लिए गिरफ्तार हो चुकी शाहीन ने अयोध्या के स्लीपर मॉड्यूल को एक्टिवेट कर रखा था. अयोध्या में ये सारे घटनाक्रम को अंजाम तक पंहुचाते उससे पहले ही इन आतंकियों की गिरफ्तारी और विस्फोटक बरामद हो गए. सूत्र बताते हैं की दरअसल, लाल किला में ब्लास्ट करने की योजना नहीं थी. ऐसा अभी तक जांच में लग रहा है. क्योंकि विस्फोटक में टाइमर या किसी दूसरी चीज़ो का इस्तेमाल नहीं किया गया. हड़बड़ी और जल्दबाज़ी में ब्लास्ट हो गया. अस्पताल और भीड़भाड़ वाली जगहें निशाने पर थीं आतंकियों से पूछताछ में पता चला है की ये मॉड्यूल अस्पतालो को टारगेट करना चाहता था ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को नुकसान हो. इन आतंकियों के हिट लिस्ट में अस्पताल और भीड़ भाड़ वाली जगह थी. लगातार छापेमारी के बाद भारी मात्रा में विस्फोटक व हथियार बरामद करने के बाद सुरक्षा एजेंसीज के सामने इस वक़्त सबसे बड़ी चुनौती है बचे हुए 300 किलोग्राम के अमोनियम नाइट्रेट को बरामद करना. जिसका अभी तक पता नहीं चल पाया है. सूत्रों की माने तो 2900 किलोग्राम विस्फोटक अबतक एजेंसी बरामद कर चुकी है. 300KG अमोनियम नाइट्रेट की खोज जारी अलग-अलग जरियों से आया 300 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट अभी भी आतंकियों ने कहीं छिपा रखा है, जिसके लिए देश के कई हिस्सों में छापेमारी चल रही है. जांच और सुरक्षा एजेंसियां लगातार छापेमारी कर पूरे मॉड्यूल का खुलासा करने की कोशिश कर रही है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार आतंकियों तक ये विस्फोटक बांग्लादेश के रास्ते नेपाल और फिर हिन्दुस्ततान आया था. किसी फर्टीलाइजर से उक्त अमोनियम नाइट्रेट को चोरी से हासिल किया गया है. आतंकियों द्वारा कुल 3200 किलोग्राम की खेप आई है.  

लखनऊ RSS दफ्तर पर हमले की तैयारी, गुजरात में ISIS के आतंकियों पर कार्रवाई

अहमदाबाद गुजरात एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने सेंट्रल एजेंसियों के साथ संयुक्त अभियान में बीते दिन अहमदाबाद से तीन ISIS से जुड़े आतंकियों को गिरफ्तार किया था. ये आतंकी गुजरात और देशभर में बड़े आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे. अब पता चला है कि आतंकियों ने लखनऊ में आरएसएस दफ्तर और दिल्ली में आजादपुर मंडी की रेकी की थी. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आजाद सुलेमान शेख, मोहम्मद सुहैल और अहमद मोहियुद्दीन सैयद के रूप में हुई. सूत्रों के मुताबिक, ये आतंकी लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय और दिल्ली की भीड़भाड़ वाली आज़ादपुर मंडी की रेकी कर रहे थे. दोनों जगहों को आतंकी हमले के संभावित निशाने के तौर पर चुना गया था. जांच में खुलासा हुआ है कि शेख और सुहैल ने राजस्थान के हनुमानगढ़ से हथियार जुटाए और उन्हें गांधीनगर के एक कब्रिस्तान में छिपाया. वहीं, हैदराबाद निवासी मोहियुद्दीन को ये हथियार लेकर वापस लौटना था लेकिन गुजरात ATS ने समय रहते कार्रवाई कर मोहियुद्दीन को शुक्रवार रात ही गिरफ्तार कर लिया. उसके पास से चार विदेशी पिस्तौल, 30 कारतूस और 40 लीटर कैस्टर ऑयल बरामद हुए. आतंकियों के मोबाइल रिकॉर्ड से खुलासा मोहियुद्दीन के मोबाइल की जांच में उसके दो साथियों के संपर्क और पूरे मॉड्यूल की गतिविधियों का पता चला. इसके बाद ATS ने दोनों अन्य आतंकियों को भी गिरफ्तार किया. गुजरात ATS के DIG सुनील जोशी के मुताबिक, "डॉ. अहमद मोहियुद्दीन सैयद उच्च शिक्षित व्यक्ति है, जो चीन से MBBS की पढ़ाई कर चुका है. वह ISIS-खुरासान प्रांत के सदस्य अबू खादिम से संपर्क में था, जिसने उसे भारत विरोधी गतिविधियों के लिए फंड इकट्ठा करने और भर्ती अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी थी." मोहियुद्दीन साइनाइड से बना रहा था जहरीला पदार्थ पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि मोहियुद्दीन साइनाइड से जहरीला पदार्थ तैयार करने की कोशिश कर रहा था. फिलहाल ATS यह पता लगाने में जुटी है कि हथियारों की सप्लाई कैसे हुई थी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य स्लीपर सेल कहां सक्रिय हैं.

सूडान के बाद माली में नया आतंक! बंदूक की नोक पर 5 भारतीयों को अगवा किया गया

माली अफ्रीका में भारतीयों की सुरक्षा को लेकर एक और चिंताजनक खबर सामने आई है. पश्चिमी अफ्रीकी देश माली में अज्ञात बंदूकधारियों ने पांच भारतीय नागरिकों का अपहरण कर लिया है. ये सभी एक बिजलीकरण परियोजना (Electrification Project) पर काम कर रहे थे. कंपनी और सुरक्षा सूत्रों ने इस घटना की पुष्टि की है. न्यूज एजेंसी AFP को दिए बयान में एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को कोबरी (Kobri) इलाके के पास इन भारतीयों को अगवा किया गया. उन्होंने बताया कि ये सभी उस कंपनी के कर्मचारी थे जो माली में ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति परियोजना चला रही है. कंपनी के एक प्रतिनिधि ने कहा, ‘हम पुष्टि करते हैं कि हमारे पांच भारतीय नागरिकों का अपहरण किया गया है. बाकी भारतीय कर्मचारियों को राजधानी बमाको (Bamako) सुरक्षित पहुंचा दिया गया है.’ फिलहाल किसी भी समूह ने इस अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली है. इस्लामिक स्टेट और अल कायदा जैसे समूह भी यहां सिर उठा रहे हैं. माली इन दिनों अशांति और आतंकी हिंसा से जूझ रहा है. यहां की सत्ता एक सैन्य जुंटा (Military Junta) के हाथों में है, जबकि देश के कई हिस्सों पर अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े जिहादी समूहों का प्रभाव है. ग्रुप फॉर द सपोर्ट ऑफ इस्लाम एंड मुस्लिम्स (JNIM) नाम का संगठन पूरे देश में ईंधन नाकेबंदी (Fuel Blockade) जैसी गतिविधियों से आम जनता को परेशान कर रहा है. आतंकी के डर की वजह से बाकी कर्मचारियों को माली की राजधानी बामाको में शिफ्ट किया गया है। अभी तक किसी भी संगठन ने इस अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली है। बता दें कि माली में फिलहाल सेना का ही शासन है। अल-कायदा और आईएसआईएस की वजह से यहां आतंकी घटनाएं हुआ करती हैं। माली इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है। कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों और आतंकियों ने यहां फ्यूल ब्लॉकेड लगा दिया है। माली में विदेशों को टारगेट करना आम बात है। अकसर कट्टरपंथी संगठन विदेशियों की हत्या कर देते हैं या फिर उनका अपहरण कर लेते हैं। 2012 में यहां तख्तापलट हुआ था और इसके बाद से ही कभी शांति नहीं रही। बीते महीने ही आतंकियों ने दो अमीराती और एक ईरानी नागरिक को किडनैप कर लिया था। 5 करोड़ डॉलर की फिरौती के बाद उन्हें छोड़ा गया था। माली में अकसर आतंकी और जिहादी समूह फिरौती के लिए लोगों को अगवा करते हैं। वे विदेशी इंजीनियरों और कर्मचारियों को निशाना बनाते हैं और फिर कंपनी से मोटी रकम की मांग करते हैं। जेएनआईएम के आतंकियों का यही काम हो गया है। माली में आतंकियों की इन हरकतों की वजह से विदेशी कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। माली की घटना ने अफ्रीका में भारतीय कामगारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि कुछ ही दिन पहले सूडान से भी भारतीय नागरिक के अपहरण की खबर आई थी. सूडान में रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) मिलिशिया ने ओडिशा के आदर्श बेहेरा को बंधक बना लिया. एक वीडियो में आदर्श दो हथियारबंद सैनिकों के बीच बैठे दिखते हैं. उनमें से एक उनसे पूछता है, ‘क्या तुम शाहरुख खान को जानते हो?’ जबकि दूसरा उन्हें कैमरे की ओर देखकर ‘डगालो गुड’ कहने के लिए कहता है. डगालो, यानी RSF प्रमुख मोहम्मद हामदान डगालो (हेमेती) का नाम. 36 वर्षीय आदर्श को अल-फशीर शहर से अगवा किया गया था. माना जा रहा है कि उन्हें RSF के गढ़ न्याला ले जाया गया है. परिवार ने बताया कि वे 2022 से सूडान की सुकराती प्लास्टिक फैक्ट्री में काम कर रहे थे और उनकी पत्नी व दो छोटे बेटे ओडिशा में हैं.

राजधानी भोपाल में आतंकियों और मादक पदार्थ तस्करों की सक्रियता, पिछले 3 साल में कई विदेशी संदिग्ध गिरफ्तार

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी अब आतंकियों और मादक पदार्थ तस्करों का पनाहगाह बनती जा रही है। बीते तीन वर्षों में भोपाल से सीरिया से लेकर बांग्लादेश तक के कई संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जो देश विरोधी ताकतों के साथ मिलकर आतंक फैलाने की साजिश रच रहे थे। आशंका है कि सिमी के बाद अन्य प्रतिबंधित संगठन यहां से अपने नेटवर्क का विस्तार करने के प्रयास में जुटे हुए हैं।  राजधानी को शांति का टापू माना जाता है, लेकिन अब यह आतंकियों और मादक पदार्थ तस्करों का पनाहगाह बनती जा रही है। पिछले तीन साल में शहर से सीरिया से लेकर बांग्लादेश तक के कई संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जो देश विरोधी ताकतों के साथ मिलकर साजिश रच रहे थे। अब यह साफ है कि भोपाल आतंकियों के लिए एक सेफ जोन बनता जा रहा है। जेएमबी और एचयूटी के आतंकी पकड़े गए सिमी के बाद अन्य प्रतिबंधित संगठनों ने भी यहां अपने नेटवर्क फैलाए। जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के आतंकियों ने भोपाल में पनाह ली, लेकिन इंटेलिजेंस की सक्रियता से उनका मॉड्यूल ध्वस्त किया गया। इसके बाद एनआईए ने शाहजहांनाबाद से पीएफआई और हिज्ब-उत-तहरीर (एचयूटी) के सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस और एजेंसियों की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ युवक सीधे आईएसआईएस से संपर्क में थे। भोपाल से ISIS आतंकी कैसे हुआ गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ISIS (इस्लामिक स्टेट) के एक खतरनाक मॉड्यूल को ध्वस्त करते हुए भोपाल के करोंद इलाके से 21 वर्षीय आतंकी सैयद अदनान उर्फ अबू (अदनान खान) को गिरफ्तार किया, जबकि दिल्ली के सादिक नगर से 20 वर्षीय अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब को पहले ही पकड़ लिया गया था। दोनों ने मिलकर दिल्ली के भीड़भाड़ वाले मॉल और पब्लिक पार्क में IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से फिदायीन (सुसाइड) हमला करने की प्लानिंग की थी। गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि अदनान (भोपाल वाला) के लैपटॉप से फिदायीन ट्रेनिंग के वीडियो बरामद हुए, जिसमें सीरियाई-तुर्की बॉर्डर पर बैठे एक हैंडलर के निर्देश थे।  अदनान ने पहले भी ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे के जज को सोशल मीडिया पर धमकी दी थी। यह गिरफ्तारी न केवल दिल्ली को बचाने वाली है, बल्कि ISIS की ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन की गहराई को उजागर करती है। आइए, इस सनसनीखेज मामले की पूरी परतें खोलते हैं-गिरफ्तारी से लेकर साजिश, खुलासे और पुलिस की कार्रवाई तक। साजिश का खुलासा: 'दिवाली पर IED ब्लास्ट', दिल्ली के मॉल-पार्क थे निशाना दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को 16 अक्टूबर 2025 को खुफिया इनपुट मिला कि ISIS का एक छोटा मॉड्यूल दिल्ली में बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। शुरुआत दिल्ली के सादिक नगर से हुई, जहां 20 वर्षीय अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब (जिसका पिता सरकारी कर्मचारी है) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने भोपाल कनेक्शन उजागर किया, जिसके बाद 18 अक्टूबर सुबह 4 बजे स्पेशल सेल की टीम भोपाल पहुंची। निशातपुरा थाना क्षेत्र के इंडस रीजेंसी अपार्टमेंट के मकान नंबर A-46 पर छापा मारा गया, जहां 21 वर्षीय सैयद अदनान उर्फ अबू को उसके परिवार के साथ सोते हुए पकड़ा गया। अदनान भोपाल में CA की तैयारी कर रहा था, लेकिन छह साल से परिवार के साथ रहते हुए ISIS की गतिविधियों में लिप्त था। पुलिस की बड़ी चूक आतंकियों की मौजूदगी के बावजूद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क नहीं दिखीं। सबसे बड़ी विफलता यह रही कि शहर में किरायेदारों का सत्यापन ठीक से नहीं हुआ। इसी कमी का फायदा आतंकियों ने उठाया और घनी बस्तियों में पनाह ले ली। ऐशबाग और करोंद में ठिकाना मार्च 2022 में एटीएस ने ऐशबाग से जेएमबी के आतंकियों को पकड़ा था। पूछताछ में पता चला कि ऐशबाग की घनी बस्ती में किराए पर मकान लेना आसान है और वहां नजर रखना मुश्किल है। यहां तीन साल तक आतंकी छिपे रहे, लेकिन पुलिस और इंटेलिजेंस को भनक तक नहीं लगी। अब तक ऐशबाग से करीब दस संदिग्ध गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं करोंद इलाके में जेएमबी के मददगारों और आईएसआईएस से जुड़े आतंकियों की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।  

शांति के बीच टूटे सन्नाटा, गाजा में भारी झड़प, 27 नागरिक और 8 आतंकी मरे

गाजा  इजरायल और हमास के बीच शांति हो गई है. इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को उम्मीद है कि सोमवार को उनके कैदियों की वापसी होने लगेगी. लेकिन इस सबके बीच गाजा से एक चिंता वाली खबर आई है. गाजा में एक बार फिर भीषण हिंसा भड़क उठी है लेकिन इस बार दुश्मन इजराइल नहीं, बल्कि हमास के अपने ही लोग हैं. शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक चली हमास सुरक्षा बलों और दुघमुश (Dughmush) कबीले के लड़ाकों के बीच हुई मुठभेड़ में कम से कम 27 लोग मारे गए, जिनमें 19 कबीले के सदस्य और 8 हमास फाइटर शामिल हैं. यह गाजा में इज़राइल के बड़े हमलों के खत्म होने के बाद से अब तक का सबसे भीषण आंतरिक संघर्ष है. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि, गाजा सिटी के तेल अल-हावा इलाके में जॉर्डनियन अस्पताल के पास भारी गोलीबारी हुई. मास्क पहने हमास गनमैनों ने दुघमुश कबीले के लड़ाकों पर हमला किया. कहा जा रहा है कि यह झड़प तब शुरू हुई जब हमास के 300 से ज्यादा फाइटर एक बिल्डिंग में घुसे जहां दुघमुश कबीले के लोग छिपे थे. स्थानीय लोगों ने बताया कि ‘इस बार लोग इजरायली हमले से नहीं, बल्कि अपने ही लोगों से भाग रहे थे.’ कई परिवारों को फिर से विस्थापन झेलना पड़ा, जो पहले से युद्ध की मार झेल चुके हैं. क्यों हुई लड़ाई? रिपोर्ट के अनुसार, झगड़े की शुरुआत तब हुई जब दुघमुश कबीले के लड़ाकों ने हमास के दो एलीट फाइटर्स को गोली मार दी, जिनमें से एक हमास के वरिष्ठ सैन्य खुफिया प्रमुख इमाद आकेल का बेटा था. गुस्से में हमास ने ‘सुरक्षा ऑपरेशन’ चलाते हुए इलाके को घेर लिया. हमास के आंतरिक मंत्रालय ने कहा कि यह ‘गैरकानूनी मिलिशिया की कार्रवाई’ थी, जिसे ‘कठोरता से दबाया जाएगा.’ दूसरी ओर, दुघमुश कबीले ने आरोप लगाया कि हमास उनकी बिल्डिंग पर कब्जा करना चाहता था, जो पहले जॉर्डन अस्पताल रही थी और जहां कबीले के लोग शरण लिए हुए थे. रिपोर्ट के मुताबिक दुघमुश कबीले के 19 और हमास के 8 लड़ाके मारे गए. गाजा के सबसे प्रमुख कबीलों में से एक, दुघमुश परिवार का हमास के साथ लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहा है. पहले भी हमास के साथ इसके टकराव हुए हैं. दोनों पक्ष झड़प के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. दुघमुश का कहना है कि उनके लोगों ने जहां शरण ले रखी थी हमास उस जगह को कब्जा करने के लिए पहुंचा और अपना बेस बना लिया, जिससे बवाल बढ़ा. हमास ने 7,000 लड़ाकों को बुलाया गाजा से मिली रिपोर्टों के अनुसार, हमास ने हाल ही में 7,000 सुरक्षा कर्मियों को दोबारा बुलाया है ताकि इज़राइल की वापसी के बाद छोड़े गए इलाकों पर फिर से नियंत्रण पाया जा सके. इनमें कई पूर्व सैन्य कमांडर शामिल हैं जिन्हें गवर्नर नियुक्त किया गया है. स्थानीय सूत्रों का कहना है कि हमास ‘गाज़ा को अपराधियों और इज़राइल समर्थक तत्वों से मुक्त’ करने की तैयारी में है.  

बिहार में सुरक्षा सतर्क: नेपाल से आए 3 जैश आतंकी पकड़े जाने की आशंका

पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले आतंकी खतरा मंडराने लगा है. पुलिस मुख्यालय (PHQ) को मिली अहम खुफिया जानकारी के बाद पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. खबर है कि नेपाल के रास्ते पाकिस्तान के तीन आतंकी बिहार में दाखिल हो चुके हैं. जानकारी के मुताबिक ये आतंकी प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए हैं. इनकी पहचान रावलपिंडी निवासी हसनैन अली, उमरकोट निवासी आदिल हुसैन और बहावलपुर का रहने वाला मो. उस्मान के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि ये तीनों आतंकी अगस्त के दूसरे हफ्ते में काठमांडू पहुंचे थे और वहीं से पिछले हफ्ते नेपाल बॉर्डर पार करके बिहार में दाखिल हुए हैं. देश के किसी भी हिस्से में आतंकी घटना को अंजाम देने की आशंका पुलिस मुख्यालय ने इस इनपुट को बेहद गंभीरता से लिया है. PHQ के आला अधिकारियों ने तीनों आतंकियों के पासपोर्ट और अन्य डिटेल्स सीमावर्ती जिलों के प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा कर दी हैं. खासतौर पर नेपाल से सटे इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है. खुफिया सूत्रों का कहना है कि इन आतंकियों के देश के किसी भी हिस्से में आतंकी घटना को अंजाम देने की आशंका जताई जा रही है. राज्य में विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह अलर्ट और भी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि आतंकी किसी बड़े राजनीतिक या भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम को निशाना बना सकते हैं. 'सुराग मिलने पर तुरंत करें कार्रवाई' PHQ ने सभी जिलों के पुलिस कप्तानों और खुफिया तंत्र को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. साथ ही कहा गया है कि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें, लगातार सूचना एकत्र करें और किसी भी तरह के सुराग मिलने पर तुरंत कार्रवाई करें. बिहार पुलिस इस समय पूरी तरह अलर्ट मोड में है और सीमावर्ती जिलों में सर्च ऑपरेशन भी तेज कर दिए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि राज्य में आतंकी किसी भी तरह की वारदात को अंजाम न दे सकें.

कुलगाम में गोलियों की गूंज! सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को किया ढेर, ऑपरेशन जारी

कुलगाम जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच पिछले तीन दिनों से चल रही मुठभेड़ आज भी जारी है. अखल के जंगलों में कल पूरी रात विस्फोट और गोलीबारी जारी रही. भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि यह इस वर्ष का सबसे बड़ा ऑपरेशन हो सकता है. इस मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने अब तक तीन आतंकियों को ढेर करने में सफलता पाई है. एक जवान भी घायल हुआ है. इस आतंक रोधी अभियान में हाईटेक सर्विलांस सिस्टम और स्पेशल पैरा फोर्स के जवान शामिल हैं. जम्मू-कश्मीर के डीजीपी और सेना की 15वीं कोर के कमांडर इस एंटी-टेरर ऑपरेशन पर कड़ी नजर रख रहे हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बयान में कहा कि स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एक जॉइंट टीम अखल के जंगलों में चल रहे इस आतंकवाद विरोधी अभियान में लगी हुई है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद 1 अगस्त को दक्षिण कश्मीर के अखल वन क्षेत्र में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया. उन्होंने बताया कि छिपे हुए आतंकवादियों द्वारा सुरक्षा बलों पर गोलीबारी करने के बाद तलाशी अभियान मुठभेड़ में बदल गया, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की. जम्मू-कश्मीर में एक हफ्ते में तीन एनकाउंटर जम्मू-कश्मीर में इस हफ्ते यह सुरक्षा बलों की आतंकियों के साथ तीसरी मुठभेड़ है. इससे पहले, सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन महादेव चलाकर पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकवादियों- सुलेमान, अफगान और जिब्रान को ढेर कर दिया था. लश्कर-ए-तैयबा का एक शीर्ष कमांडर सुलेमान पहलगाम और गगनगीर आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड था. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 जुलाई को संसद को बताया था कि तीनों की पहचान पाकिस्तानी आतंकवादियों के रूप में हुई है, जिन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में 26 निर्दोष पर्यटकों की गोली मारकर निर्मम हत्या की थी. पुंछ में नियंत्रण रेखा के पास 31 जुलाई को दो और आतंकवादी मारे गए थे. पुलिस ने बताया कि दोनों पाकिस्तान से घुसपैठ करके भारतीय सीमा में आए थे, जिन्हें एलओसी के पास ही सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया. वहीं, कुलगाम के जंगलों में 1 अगस्त को खुफिया सूचना के बाद सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू किया था, जो आतंकियों की ओर से फायरिंग करने के बाद मुठभेड़ में बदल गई.